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President Droupadi Murmu Brother: तारिणीसेन टुडू ने गुरुद्वारा साहिब में टेका माथा, देश की शांति के लिए की अरदास

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाई तारिणीसेन टुडू ने अमृतसर के गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका और पाठ के भोग में शामिल हुए। उन्होंने देश की शांति और भाईचारे की कामना की।

अमृतसर / सत्ता संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाई तारिणीसेन टुडू ने अमृतसर स्थित एक प्रमुख गुरुद्वारा साहिब में पहुंचकर माथा टेका और गुरु घर में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ अरदास में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने पाठ के भोग में भी शिरकत की। उनके साथ परिवार के सदस्य और कुछ करीबी लोग भी मौजूद रहे।

गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने के बाद तारिणीसेन टुडू ने अपनी यात्रा को लेकर भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि गुरु घर पहुंचकर उन्हें मन की शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने गुरुद्वारा साहिब की पवित्रता, गुरबाणी और यहां की सेवा भावना की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि गुरु घर में दिखाई देने वाली सेवा और आध्यात्मिक वातावरण लोगों को प्रेरणा देता है। उनके अनुसार, इस पवित्र स्थल पर आना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा और उन्हें यहां आकर मानसिक शांति मिली।

इस अवसर पर तारिणीसेन टुडू ने सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। उन्होंने देश में शांति, तरक्की और आपसी भाईचारा मजबूत होने की कामना की। उन्होंने कहा कि देश में सभी लोग खुशहाल रहें और समाज में आपसी मेलजोल एवं सद्भाव बना रहे।

गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से तारिणीसेन टुडू का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। प्रबंधन ने उन्हें सिरोपा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें गुरुद्वारा साहिब के इतिहास, धार्मिक महत्व और यहां निभाई जा रही सेवा की परंपरा के बारे में भी जानकारी दी गई।

तारिणीसेन टुडू की यह धार्मिक यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ शांति, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश भी देती है। गुरु घर में उनके द्वारा की गई प्रार्थना में देश और समाज की खुशहाली की कामना प्रमुख रही।

राष्ट्रपति मुर्मू ने नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम 2026’ का उद्घाटन किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को सुश्रुत जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्‍थान के एमआरआई सेक्‍शन का भी उद्घाटन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने शल्‍य चिकित्‍सा के जनक माने जाने वाले आचार्य सुश्रुत की जयंती के शुभ अवसर पर आयुर्वेद से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सदियों पहले आचार्य सुश्रुत ने जब शल्य चिकित्सा पद्धति का सूत्रपात किया था, तब वह अपने समय की एक क्रांति से कम नहीं था।

राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत अनेक जटिल एवं नवाचारपूर्ण शल्य क्रियाओं के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपने समय में प्‍लास्‍टिक सर्जरी, मोतियाबिंद सर्जरी, ट्यूमर के उपचार और ईएनटी सर्जरी जैसे अनेक क्षेत्रों में नयी पद्धतियों का प्रवर्तन किया। उनके द्वारा रची गयी सुश्रुत संहिता ने केवल भारतीय उपमहाद्वीप को ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को भी एक नई दिशा प्रदान की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी परंपरा में निहित, मानव-कल्याण के लिए उपयोगी ज्ञान को, बदलते समय के साथ सामंजस्य बिठाते हुए आगे बढ़ाना समाज के लिए हितकर होगा। आयुर्वेद की समग्र जीवन-दृष्टि मानवता के लिए एक वरदान है। हमें यह सुनिश्‍चित करना चाहिए कि यह प्राचीन ज्ञान वर्तमान समय के साथ प्रासंगिक और प्रभावी बना रहे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने आयुर्वेद और योग को विश्व पटल पर नई ऊर्जा के साथ प्रतिष्ठित किया है। उन्‍हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सरकार शल्य चिकित्सा की इस प्राचीन परंपरा को भी वैज्ञानिक कसौटियों के सभी मानकों पर सफल करने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मानकीकृत दस्तावेज़ीकरण, डिजिटल हैल्‍थ एकीकरण, और आधुनिक विज्ञान की अनुसंधान तकनीकों का सम्‍यक् उपयोग करने से इस प्रणाली की व्यापक वैश्विक स्वीकृति को बल मिलेगा।

राष्ट्रपति ने युवा विद्यार्थियों और अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत कर रहे शोधकर्ताओं से कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है। उन्‍होंने उन सबको सुझाव दिया कि वे जिज्ञासा, सत्यनिष्ठा, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक शोध और अपने क्षेत्र में उच्‍च कोटि के साक्ष्‍य निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उपयुक्त हो, वहां उन्‍हें नई तकनीकों का उपयोग करने से नहीं हिचकना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि वे आचार्य सुश्रुत के दिखाए हुए मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा में नैतिकता और रोगियों के प्रति करुणामय सेवा के अपने संकल्प पर सदैव अडिग रहें।

राष्ट्रपति ने यह विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि ‘सौश्रुतम् 2026’ में होने वाले विचार-विमर्श से नए ज्ञान का सृजन होगा और इससे आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सार्थक आयोजनों से समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्‍ठी में भारत और अन्य देशों के जाने-माने सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे।

Parliament Monsoon Session : 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को मंजूरी दे दी है। संसदीय परिपाटी के मुताबिक मानसून सत्र दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भी कराई जाएगी। करीब तीन सप्ताह के इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान में क्या?

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स हैंडल पर लिखा, भारत सरकार की अनुशंसा पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 में संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की स्वीकृति दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।

किन मुद्दों पर हंगामा कर सकता है विपक्ष?

बीते दिनों मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा- NEET के पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का चढ़ावा चोरी विवाद जैसे कई मामले लगातार सुर्खियों में है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान हंगामा होने की आशंका है। इन मामलों के अलावा तृणमूल के दो फाड़ होने का मुद्दा भी चर्चा में है। नजरें स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं। कांग्रेस अंडमान की ग्रेट निकोबार परियोजना पर भी लगातार हमलावर है। ऐसे में हंगामे और नारेबाजी से सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है।

बजट सत्र में कितना कामकाज हुआ?

इससे पहले संसद का बजट सत्र विगत 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था। 28 जनवरी, 2026 को शुरू हुए संसद के बजट सत्र में कई अहम विधेयक पारित कराए गए थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के मुताबिक सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं। लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा कराई गई थी। 

बजट सत्र के दौरान कौन से विधेयक पारित हुए थे?

  • औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
  • वित्त विधेयक, 2026
  • दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
  • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026
  • जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026

93 प्रतिशत उत्पादकता, चर्चा में कितने सदस्यों ने भाग लिया?

सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने बताया था कि सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पुरःस्थापित किए गए और 09 विधेयक पारित किए गए। 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026; संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026; और परिसीमन विधेयक, 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट तक चर्चा हुई। इस चर्चा में 131 सदस्यों ने भाग लिया था। कुल कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही थी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्य प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में हुई शामिल

मध्य प्रदेश / सत्ता संदेश

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में शामिल हुईं। यह कार्यक्रम विशेष रुप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में चुनौती का सामना करने की दिशा में एक अहम प्रयास था। राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है; यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जांच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अब तक लगभग 2.5 लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिह्नित किये जा चुके हैं, और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक भी पहचाने जा चुके हैं। उन्होंने वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौतियों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान करने के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्तूबर, 2025 तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत चार लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने गौर किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष ‘विश्व सिकल सेल दिवस’ पर “सिकल मित्र” पहल का शुभारंभ किया गया था। इस पहल के अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को सहायता प्रदान करने के लिए शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीश नियुक्त हुए

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिनांक 01 जून 2026 की एक अधिसूचना के माध्यम से निम्नलिखित चार मुख्य न्यायाधीशों व एक वरिष्ठ अधिवक्ता को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है:

इनमें हाईकोर्ट पंजाब और हरियाणा के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति शील नागू, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुंबई उच्चा न्यायलय के न्यायधीश चंद्रशेखर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की न्यायधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना है।

पंजाब के 10 साल के लाडले ने देश का नाम किया रोशन, राष्ट्रपति मुर्मू ने श्रवण सिंह को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से किया सम्मानित

पंजाब डेस्क: पंजाब के बॉर्डर जिले फिरोजपुर के एक युवा हीरो ने पूरे देश में राज्य का नाम रोशन किया है। फिरोजपुर के बॉर्डर गांव चक तार वाली के रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह को शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025’ से सम्मानित किया।

श्रवण को यह प्रतिष्ठित सम्मान उनकी असाधारण बहादुरी और निस्वार्थ सेवा के लिए दिया गया है।दुश्मन के ड्रोन पर ध्यान दिए बिना सैनिकों की सेवा कीश्रवण सिंह ने मई 2025 में भारत-पाक बॉर्डर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेमिसाल साहस दिखाया था। उस समय बॉर्डर पर बहुत ज़्यादा तनाव था और दुश्मन के ड्रोन लगातार घुसपैठ कर रहे थे।

इतने खतरनाक माहौल में भी श्रवण हर दिन फ्रंट पोस्ट पर तैनात सैनिकों तक पानी, दूध, लस्सी, चाय, खाना और बर्फ जैसी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाता रहा। उसके इस जुनून ने लंबे समय से तैनात सैनिकों के लिए ‘लाइफलाइन’ का काम किया और उनका हौसला बढ़ाया।

CM भगवंत मान ने बधाई दी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्रवण सिंह की इस कामयाबी पर खुशी जताई और कहा कि यह पंजाबियों के लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए देश के लिए बच्चे के इस जुनून को सलाम किया और कहा कि श्रवण ने हमारे गुरुओं की सीख पर चलकर सैनिकों की सेवा की है, जो तारीफ़ के काबिल है।

इंडियन आर्मी करवा रही है पढ़ाई

श्रवण की बहादुरी को देखते हुए इंडियन आर्मी पहले ही उसे सम्मानित कर चुकी है। खास बात यह है कि आर्मी अब खुद श्रवण सिंह की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही है ताकि यह बहादुर बच्चा भविष्य में और आगे बढ़ सके।