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असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में 1,500 से अधिक छात्रों को दिया गया प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का प्रशिक्षण

गुवाहाटी/ सत्ता संदेश

असम के Manas National Park और इसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले 1,500 से अधिक स्कूली छात्रों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। यह जानकारी वन विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को दी।

यह जागरूकता अभियान विभिन्न संपर्क कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों को जंगलों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल ‘मानस मित्र कार्यक्रम’ के तहत की गई, जिसे Manas National Park and Tiger Reserve Authority ने स्थानीय समुदायों और संरक्षण प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किया है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि कैसे वन्यजीवों और जंगलों का संरक्षण मानव जीवन के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्हें यह भी समझाया गया कि अवैध शिकार, वनों की कटाई और पर्यावरण प्रदूषण किस तरह प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के जरिए स्थानीय समुदायों और युवाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सवाल पूछे। कई छात्रों ने भविष्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने की इच्छा भी जताई।

वन विभाग का मानना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से न केवल छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है, बल्कि स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय उद्यान के बीच सहयोग भी मजबूत होता है।

उत्तराखंड में हाथियों की गणना अभियान शुरू, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से हुई विशेष कवायद की शुरुआत


देहरादून / सत्ता संदेश

उत्तराखंड में जंगली हाथियों की संख्या का सटीक आकलन करने के लिए राज्य वन विभाग ने विशेष गणना अभियान शुरू कर दिया है। इस महत्वपूर्ण कवायद की शुरुआत मंगलवार को प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से की गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य राज्य में हाथियों की वास्तविक संख्या, उनके आवागमन के मार्ग और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति का अध्ययन करना है।

वन विभाग की टीमों के साथ वन्यजीव विशेषज्ञ, शोधकर्ता और प्रशिक्षित कर्मचारी इस अभियान में भाग ले रहे हैं। हाथियों की गिनती के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग, कैमरा ट्रैप और प्रत्यक्ष निगरानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सर्वेक्षण कई चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके आंकड़े भविष्य की वन्यजीव संरक्षण योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व और तराई क्षेत्र हाथियों के प्रमुख आवास माने जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में जंगलों के सिकुड़ने और मानव गतिविधियों के बढ़ने से हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में यह गणना अभियान संरक्षण रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।

वन विभाग ने बताया कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील इलाकों की भी पहचान की जाएगी, ताकि गांवों और जंगलों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों की सही संख्या और उनके व्यवहार संबंधी आंकड़े मिलने से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।