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अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

इजराइल ने ईरान में फैक्टरी पर हमला किया, हथियार कार्यक्रम के लिए फेंटानिल आपूर्ति का लगाया आरोप

दुबई, एक अप्रैल (एपी) इजराइल ने कथित रूप से रासायनिक हथियार कार्यक्रम में इस्तेमाल के लिए ‘‘ईरान सरकार को फेंटालिन की आपूर्ति करने वाले वाली’’ एक फैक्टरी पर हमला किया है। इजराइल ने बुधवार तड़के यह जानकारी दी।

ईरान ने तोफीघ डारू फैक्टरी पर हमले की पुष्टि की लेकिन उसने साथ ही कहा कि यह फैक्टरी केवल ‘‘अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी दवाओं’’ की आपूर्ति करती थी जिनका उपयोग चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में होता है।

इजराइल और ईरान ने बताया कि यह हमला मंगलवार को किया गया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान स्थित फैक्टरी की एक तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इजराइल के युद्ध अपराधी दवा कंपनियों पर अब खुलेआम और बेशर्मी से बमबारी कर रहे हैं।’’

भीषण दर्द के इलाज के लिए अस्पतालों में फेंटानिल का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल जानलेवा भी हो सकता है।

इजराइल और अमेरिका ने हाल के वर्षों में दावा किया है कि ईरान हथियारों में फेंटानिल के इस्तेमाल के लिए परीक्षण कर रहा है। अमेरिका ने यह दावा करते हुए ईरान के उस शैक्षणिक शोध का भी हवाला दिया था जिसमें यह अध्ययन किया गया कि 2002 में चेचेन चरमपंथियों द्वारा मॉस्को के थिएटर में लोगों को बंधक बनाए जाने की घटना के दौरान रूस ने संभवतः फेंटानिल का कैसे इस्तेमाल किया।

इजराइल ने आरोप लगाया कि ‘तोफीघ डारू’ तेहरान के एक उन्नत अनुसंधान संस्थान एसपीएनडी को फेंटानिल की आपूर्ति करता था। अमेरिका का आरोप है कि एसपीएनडी ने ऐसे शोध और परीक्षण किए हैं जिनका इस्तेमाल परमाणु विस्फोटक उपकरणों और अन्य हथियारों के विकास में किया जा सकता है।

इस बीच, प्राधिकारियों ने बताया कि बुधवार तड़के कतर के तट के पास एक टैंकर पोत पर हमला हुआ।

ब्रिटेन की सेना के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस’ केंद्र ने हमले की घोषणा करते हुए कहा कि प्रक्षेपास्त्र पोत के किनारे से टकराया।

उसने कहा कि इस दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ और चालक दल सुरक्षित है।

मंगलवार को दुबई के तट के पास तेल से भरे एक कुवैती टैंकर पर हमला हुआ था। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान फारस की खाड़ी में 20 से अधिक पोत पर हमले कर चुका है।

ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान सभी हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा

 इस्लामाबाद, 26 मार्च (भाषा) पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ईरान युद्ध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के सभी हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से बातचीत कर रहा है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी को शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका और आगामी सप्ताहांत में इस्लामाबाद में आमने-सामने की वार्ता की संभावनाओं के बारे में कई सवालों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने आगामी दिनों में सीधी वार्ता की पुष्टि करने से साफ इनकार कर दिया, जबकि इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान वार्ता के माध्यम से शांति लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पाकिस्तान क्षेत्रीय हितधारकों और अपने क्षेत्र से बाहर के हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, और लगातार तत्काल तनाव कम करने, शत्रुता समाप्त करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अपरिवर्तनीय मार्ग अपनाने की वकालत कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व्यक्तिगत रूप से सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देने के लिए ‘हमारे राजनयिक प्रयासों’ का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री के उस ट्वीट का जिक्र किया जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साझा किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा होगा, उनके हालिया सार्वजनिक संदेशों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, जिसमें अमेरिका के नेतृत्व द्वारा भी मान्यता शामिल है।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईमानदारी और स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होकर सेतु बनाने में सैद्धांतिक और सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

अंद्राबी ने कहा कि उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने भी इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के अपने समकक्षों के साथ घनिष्ठ और निरंतर संपर्क बनाए रखा है।

ईरान के परमाणु हथियार पर ट्रंप की बड़ी चेतावनी: ‘एक घंटे में कर देगा इस्तेमाल, पूरा मध्य-पूर्व हो जाएगा तबाह’

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान के हाथ परमाणु हथियार लग गए, तो वह उनका इस्तेमाल करने में एक घंटा या एक दिन भी नहीं लगाएगा और तुरंत हमला कर देगा। उन्होंने आगाह किया कि इससे न केवल इज़राइल, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व (Middle East) तबाह हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को ‘हिंसक और क्रूर’ बताते हुए दावा किया कि ईरानी प्रशासन ने पिछले तीन हफ्तों में अपने ही 32,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। उन्होंने ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि केवल दो हफ्तों के हमलों में ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। ट्रंप के दावों के अनुसार, अब ईरान के पास न तो वायुसेना बची है, न ही नौसेना और उनके एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी नष्ट हो चुके हैं।इसके अलावा, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि यह दुनिया के लिए एक बड़ा ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से कई देश अपनी ऊर्जा का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चीन और जापान जैसे देशों को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वहाँ अपने युद्धपोत (Warships) तैनात करने चाहिए। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी थी।

ईरान-इराक सीमा खुलते ही सस्ते सामान, इंटरनेट और काम की तलाश में इराक पहुंचे दर्जनों ईरानी

हाजी ओमेरान (इराक), 16 मार्च (एपी) युद्ध के कारण लंबे समय से बंद रही सीमा खुलने के बाद रविवार को दर्जनों ईरानी नागरिक सस्ती खाद्य सामग्री खरीदने, इंटरनेट का उपयोग करने, परिजनों से संपर्क साधने और काम की तलाश में उत्तरी इराक में दाखिल हुए।

यात्रियों ने बताया कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने ईरान में जीवन बेहद कठिन बना दिया है।

इराक के कुर्द क्षेत्र से माल से लदे ट्रक हाजी ओमेरान सीमा चौकी के रास्ते ईरान की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे ईरान में बढ़ती कीमतों से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरानी कुर्द अक्सर इराकी कुर्दिस्तान में आते-जाते रहे हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध गहरे हैं तथा खुली सीमा के कारण व्यापार और आवागमन नियमित रहा है। अब युद्धग्रस्त क्षेत्र में ईरानियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का अहम जरिया इराक का कुर्द क्षेत्र बन गया है।

ईरान की ओर सामान लेकर जा रहे ट्रक चालक खिदेर चोमानी ने कहा, ‘‘जब यह सीमा बंद थी, तब इसका असर गरीबों, अमीरों और मजदूरों सभी पर पड़ा।’’

क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने के बाद इस सीमा को बंद कर दिया गया था। इराकी कुर्द प्रशासन लंबे समय से अपने ईरानी समकक्षों द्वारा इसे फिर से खोलने का इंतजार कर रहा था।

एपी से बात करने वाले लगभग सभी ईरानी कुर्दों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है और उन्हें संदेह है कि ईरानी खुफिया एजेंसियां मीडिया से बात करने वालों पर नजर रखती हैं।

उन्होंने दावा किया कि कई ईरानी सैन्य ठिकाने, खुफिया कार्यालय और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान हमलों में नष्ट हो गए हैं। बमबारी के कारण सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, कई सुरक्षाकर्मी सरकारी इमारतों से दूर रहकर स्कूलों और अस्पतालों जैसे नागरिक ठिकानों में शरण ले रहे हैं या फिर कार्यालयों में रिपोर्ट करने के बजाय वाहनों में ही घूमते रहते हैं।

ईरान के पिरानशहर शहर की एक कुर्द महिला रविवार को अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने और जरूरी सामान खरीदने के लिए सीमा पार कर आई। उसने बताया कि वह 15 किलोमीटर की यात्रा करके यहां पहुंची।

उसने कहा, ‘‘ मैं यहां फोन करने आई हूं। ईरान के अधिकतर हिस्सों में इंटरनेट नहीं है। पिछले 16 दिनों से मेरे रिश्तेदारों को मेरी कोई खबर नहीं मिली है और वे चिंतित हैं।’’

महिला ने बताया कि देशभर में इंटरनेट बाधित होने के कारण कई ईरानी इराकी सिम कार्ड खरीदते हैं और सीमा के पास जाकर विदेश में रह रहे अपने परिजनों और दोस्तों से संपर्क करते हैं।

वह सीमा के पास स्थित बाजार में अपने शहर पिरानशहर की तुलना में कम कीमत पर चावल और खाने का तेल जैसे जरूरी सामान खरीदने गई थी। उसके अनुसार, युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने से ईरान में इन बुनियादी वस्तुओं की कीमतें बहुत अधिक हो गई हैं।

उसने कहा, “ईरान में हालात बहुत खराब हैं। लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, चीजें महंगी हैं और लोग घरों से निकलना नहीं चाहते।”

करीब आधे घंटे बाद वह दो प्लास्टिक बैग में सामान लेकर जल्दी-जल्दी वापस ईरान लौट गई। उसने बताया कि उसके बच्चे घर पर उसका इंतजार कर रहे हैं।

इसी दौरान काली शॉल में लिपटी एक बुजुर्ग महिला बारिश में अकेले सीमा पार करती दिखाई दी। उसने बताया कि वह ईरान के पश्चिम अजरबैजान प्रांत के सरदश्त से आई है और इराकी कुर्द क्षेत्र के चोमान शहर जा रही है, जो सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर है। वहां उसके कुछ दूर के रिश्तेदार रहते हैं, जिनसे वह मदद की उम्मीद कर रही है।

उसने बताया कि उसका बेटा 14 महीने पहले ईरानी सैनिकों की गोली से मारा गया था। वह सीमा पार सिगरेट और अन्य सामान की तस्करी करता था, जो इस इलाके में आजीविका का आम जरिया है। बेटे की मौत के बाद परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा और वह तीन छोटे बच्चों की देखभाल कर रही है, जिनमें सबसे बड़ा पांच साल का है।

महिला ने कहा कि खाद्य कीमतें बढ़ने से बच्चों का पेट भरना मुश्किल हो गया है और दो महीने का लगभग 200 डॉलर किराया भी बकाया है। उसने रोते हुए कहा, “मेरी मदद करने वाला वहां कोई नहीं है। युद्ध ने हालात और खराब कर दिए हैं। सब कुछ और महंगा हो गया है।”

वह अपने रिश्तेदारों को पहले से सूचना भी नहीं दे सकी थी और उम्मीद कर रही थी कि वे उसकी मदद करेंगे। उसने कहा, “मैं बेबस हूं, लेकिन बच्चे भूखे हैं और मुझे उनके लिए पूरी कोशिश करनी होगी।”

इस बीच तीन ईरानी मजदूर एक टैक्सी में सवार होकर इराकी कुर्द क्षेत्र में अपने काम पर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि वे एक ही निर्माण कंपनी में काम करते हैं और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए एक महीने तक काम करके पैसे कमाने का इरादा रखते हैं।

उनमें से एक मजदूर ने कहा, “हालात और खराब होंगे और इसका असर आम लोगों पर ही पड़ेगा। हम अपने बच्चों और पत्नियों को छोड़कर यहां काम करने आए हैं, वरना उन्हें अकेला नहीं छोड़ते।”

ईरान के उरमिया शहर में रहने वाले और इराक के इरबिल में काम करने वाले एक पेंटर ने बताया कि लगातार बमबारी अब रोजमर्रा की हकीकत बन गई है। वह हाल ही में विस्फोटों से डरी अपनी मां को सांत्वना देने के लिए घर लौटा था।

इराकी कुर्द क्षेत्र में काम करने वाले एक अन्य ईरानी कुर्द फैक्टरी मजदूर ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि उसने उरमिया में रह रहे अपने परिवार-पत्नी और तीन बच्चों को भी यहां आकर रहने के लिए बुला लिया। वे रविवार को यहां पहुंचे और सड़क किनारे एक रेस्तरां में आराम करते देखे गए।

उसने कहा कि लगातार हमलों के कारण सुरक्षा बल अब अपने ठिकानों में नहीं रुकते। कई सैन्य, खुफिया और पुलिस ठिकाने खंडहर में बदल चुके हैं।

उसने कहा, “वे अब अपने दफ्तरों में नहीं रहते। वे कारों में, पुलों के नीचे, स्कूलों और अस्पतालों में रहते हैं और लगातार इधर-उधर घूमते रहते हैं। उनके ठिकाने नष्ट हो चुके हैं।”

क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई आश्वासन दिया है: केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया

 नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को सवाल किया कि क्या ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि भारतीय पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बृहस्पतिवार रात फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की ‘‘गंभीर स्थिति’’ पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है कि वह हमारे पोतों को होर्मुज से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?’’

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है।

भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने तीन दिन पहले उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।

ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच सदस्यों को शरण दी: अधिकारी

वेलिंगटन, 10 मार्च (एपी) ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने मंगलवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच सदस्यों को शरण दी है, जो ईरान में युद्ध शुरू होने से पहले एक टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए देश का दौरा कर रही थीं।

ऑस्ट्रेलिया में ईरानी समूहों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार से उन महिलाओं की मदद करने का आग्रह किया था, जो सार्वजनिक रूप से शरण नहीं मांग पा रही हैं। टीम की खिलाड़ियों ने अपने शुरुआती मैच से पहले ईरान का राष्ट्रगान नहीं गाया था जिसके बाद कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थी और इसे मीडिया में भी काफी कवरेज मिली थी।

स्थानीय समयानुसार मंगलवार तड़के ऑस्ट्रेलिया के संघीय पुलिस ने शरण के लिए आवेदन करने वाली पांच महिलाओं को उनके होटल से ‘‘सुरक्षित स्थान’’ पर पहुंचाया। बर्क ने ब्रिस्बेन में पत्रकारों को बताया कि उन्होंने इन महिला खिलाड़ियों से मुलाकात की और मानवीय आधार पर उनके वीजा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

बर्क ने कहा, ‘‘मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता कि प्रत्येक महिला के लिए यह फैसला करना कितना मुश्किल रहा होगा लेकिन निश्चित रूप से कल रात खुशी और राहत का माहौल था।’’

बर्क ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते समय महिलाओं के मुस्कुराते और ताली बजाते हुए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए।

उन्होंने कहा, ‘‘वे ऑस्ट्रेलिया में एक नया जीवन शुरू करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।’’

बर्क ने कहा कि शरण लेने वाली महिला खिलाड़ी अपने नाम और तस्वीरें प्रकाशित होने से खुश थीं। खिलाड़ियों ने यह स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं।

टीम की अन्य 21 खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान युद्ध शुरू होने से ठीक पहले पिछले महीने एएफसी महिला एशियाई कप में भाग लेने के लिए ईरानी टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी। उसकी टीम टूर्नामेंट से जल्द बाहर हो गई जिसके बाद टीम को अपने देश लौटना था जहां युद्ध के कारण हालात खराब हैं।

ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘एएपी’ की खबर के अनुसार, ईरान की मुख्य कोच मर्जियेह जाफरी ने रविवार को कहा कि खिलाड़ी ‘‘जितनी जल्दी हो सके ईरान वापस लौटना चाहती हैं’’।

ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली ईरान की टीम में 26 खिलाड़ी तथा सहयोगी स्टाफ के सदस्य शामिल थे। बर्क ने कहा कि टीम के सभी सदस्यों को शरण का प्रस्ताव दिया गया था।

बर्क ने कहा, ‘‘ये महिलाएं ऑस्ट्रेलिया में बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन हम समझते हैं कि वे अपने फैसलों को लेकर बेहद मुश्किल स्थिति में हैं। वे जब भी चाहें तब ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों से बात कर सकती हैं।’’

यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ईरान के अन्य खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ के सदस्य ऑस्ट्रेलिया से कब रवाना होंगे।

ईरान के खिलाफ युद्ध इराक जैसा नहीं, हमारे और भी सैनिक हो सकते हैं हताहत: अमेरिकी रक्षा मंत्री

वाशिंगटन, तीन मार्च (एपी) ईरान में अमेरिकी-इजराइली हमलों के लंबे क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने की बढ़ती चिंताओं पर अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को कहा कि “यह इराक जैसा नहीं है। यह अंतहीन नहीं है।”

इस संघर्ष में अब तक अमेरिका के छह सैनिक मारे जा चुके हैं, तथा

हेगसेथ ने आगाह किया कि आने वाले हफ्तों में और अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा सबसे बड़ी चिंता है, जिसका हल जरूरी है। अधिकारी ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों से पैदा खतरे को हमले शुरू करने का एक मुख्य कारण बता रहे हैं। साथ ही, इसे सरकार के शीर्ष नेतृत्व को सत्ता से बेदखल करने का अवसर भी माना जा रहा है।

ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम “तेजी से और बहुत अधिक बढ़ रहा था, और इससे अमेरिका तथा विदेशों में हमारे सैनिकों को बहुत बड़ा और सीधे खतरा है।”

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के साथ एक अलग प्रेस वार्ता में हेगसेथ ने कहा कि इस अभियान का “निर्णायक उद्देश्य” ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को खत्म करना, उसकी नौसेना को नष्ट करना और यह सुनिश्चित करना है कि “कोई परमाणु हथियार न बचे।”

हेगसेथ ने कहा, “यह तथाकथित सत्ता परिवर्तन का युद्ध नहीं है, लेकिन सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से हुआ है और यह दुनिया के लिए बेहतर है।”

संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैल गया है। ईरान और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों ने इजराइल, अरब देशों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।

इस संघर्ष में अब तक छह अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं, और ट्रंप, हेगसेथ और केन ने और सैनिकों के हताहत होने की आशंका जताई है।

नाम न उजागर करने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि सभी छह मौतें कुवैत में हुई हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार को कहा कि ईरान के पहले पलटवार के बाद लापता दो सैनिकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

अमेरिका का ईरान पर महा-हमले का प्लान तैयार: ट्रंप को सौंपी गई ‘किल लिस्ट’, दर्जनों नेताओं के खात्मे से तख्तापलट की तैयारी

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अगले कुछ घंटों या हफ्तों में ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस और पेंटागन द्वारा तैयार की गई एक विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कई विकल्प शामिल हैं।

नेताओं की ‘किल लिस्ट’ और तख्तापलट का लक्ष्य : इस योजना का सबसे खतरनाक हिस्सा ईरान में शासन परिवर्तन (रेजीम चेंज) करना है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने एक ‘किल लिस्ट’ तैयार की है जिसमें ईरान के दर्जनों राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजना है। इस सूची में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान खामेनेई शासन को उखाड़ फेंकना है।

परमाणु ठिकाने और मिसाइल सेंटर निशाने पर : अमेरिकी सेना की हिट लिस्ट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाएं सबसे ऊपर हैं। इन हमलों के लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में 150 फाइटर जेट और 12 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। इस अभियान को “मिडनाइट हैमर” जैसे पिछले ऑपरेशनों से भी बड़ा और निरंतर चलने वाला हवाई युद्ध बताया जा रहा है।

ईरान की तैयारी और कूटनीतिक चुनौतियां: संभावित हमले को देखते हुए ईरान ने भी अपने परमाणु केंद्रों को बंकरों में बदलना शुरू कर दिया है और अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका के लिए एक चुनौती यह है कि खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई ने अपनी धरती का उपयोग अमेरिकी हमले के लिए करने देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप के विकल्प सीमित हो सकते हैं।