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छात्रों के समर्थन में उतरे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, महाराष्ट्र में किया मौन आंदोलन

महाराष्ट्र / सत्ता संदेश

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन किया। उनका ये आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ था, जो दोपहर 1 बजे खत्म हो गया। अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया और उसके बाद वो इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बीते बुधवार को पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा है कि हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं।

अन्ना हजारे ने पत्र में आगे कहा है कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बगैर कहा कि अगर किसी मंत्री से इस्तीफा देने को कहा जाता है तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, विश्वास का माहौल बनाने और सकारात्मक संवाद के जरिए समाधान तलाशने का अनुरोध किया है।

22 छात्रों की आत्महत्या की खबरों पर जताई चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट (NEET) परीक्षा का जिक्र करते हुए हजारे ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रश्न पत्र लीक होने और गंभीर अनियमितताओं के आरोप 2024 में और फिर 2026 में सामने आए। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद 22 छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की। अन्ना हजारे ने यह भी लिखा कि जब भी अनियमितताएं या घोटाले सामने आते थे, तो अक्सर जिम्मेदारी पूरी तरह से निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती थी, जबकि सरकार सकारात्मक परिणामों का श्रेय खुद ले लेती थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय जवाबदेही के साथ जवाब देना चाहिए।

सरकार छात्रों से बात करने को तैयार’

वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से हम चर्चा करने को तैयार हैं, सरकार छात्रों से बात करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर से आज दोपहर तक 4 बार बातचीत करने का प्रस्ताव दिया गया है। पीएम इस विषय को लेकर संवेदानशील हैं, मैं विनम्रता से आग्रह करता हूं आइए बैठिए और चर्चा कीजिए. उन्होंने आगे कहा कि हम छात्रों के शर्तों पर बात करने को तैयार हैं।

PM मोदी ने चंडीगढ़ में 4,700 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का किया उद्घाटन
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना सहित 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया
  • चंडीगढ़ में आज स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है; प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां इन परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है
  • प्रधानमंत्री ने कहा: स्वच्छता एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है
  • प्रधानमंत्री ने कहा: जब कोविड-19 महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को मदद देने वाला देश था
  • प्रधानमंत्री ने कहा: भारत में स्वास्थ्य सेवा अब विशेषाधिकार की जगह एक अधिकार बन रही है

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना शामिल हैं। राष्ट्र की प्रगति के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में शहर की अनूठी स्थिति को रेखांकित करते हुए, उन्होंने बेहतर जीवन शैली और सुगम जीवन सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रतिष्ठा पर बल दिया। क्षेत्र पर मां चंडी की दिव्य कृपा को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इसके निरंतर, सुनियोजित विकास के लिए सत्तारूढ़ प्रशासन की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। मोदी ने कहा, “चंडीगढ़ का विकास हमेशा से हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।”

प्रधानमंत्री ने डेढ़ साल पहले लागू किए गए देश की न्याय व्यवस्था के ऐतिहासिक और व्यापक सुधार को याद करते हुए दंडात्मक औपनिवेशिक कानूनों से न्यायोचित ढांचे की ओर हुए बदलाव  के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “भारतीय न्याय संहिता का कार्यान्वयन चंडीगढ़ से ही शुरू हुआ।”

शहरी परिदृश्य के आधुनिकीकरण के लिए किए गए वित्तीय निवेशों के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र, स्मार्ट यातायात प्रबंधन और डिजिटल शासन जैसी परिवर्तनकारी पहलों का उल्लेख किया। स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन पर निवासियों को बधाई देते हुए, उन्होंने इन भविष्योन्मुखी उन्नयनों को गति देने वाले भारी पूंजी निवेश के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “शहर को उच्च तकनीक वाला बनाने के इस मिशन पर ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।”

क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित विस्तृत दैनिक कार्यक्रम का विवरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने हरियाणा के जींद में अपने पूर्व कार्यक्रम और पंजाब के जालंधर की आगामी यात्रा के बारे में बताया। उन्होंने अपने चंडीगढ़ को दोनों पड़ोसी राज्यों को निर्बाध रूप से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और प्रशासनिक सेतु के रूप में प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने कहा, “हमारा चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब दोनों को प्रभावी ढंग से जोड़ता है।”

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शहरी विकास के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव पर बल देते हुए कहा कि शहर में हुए सुधार किस प्रकार हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पड़ोसी क्षेत्रों की आबादी के जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा वितरण में शहर की अपरिहार्य और केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “चिकित्सा सेवाओं के लिए, चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है।”

स्थानीय चिकित्सा संस्थान में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री ने तंत्रिका विज्ञान केंद्र, मातृ एवं शिशु केंद्र और गहन चिकित्सा अस्पताल ब्लॉक सहित कई महत्वपूर्ण नई सुविधाओं की जानकारी साझा की। श्री मोदी ने कहा, “इन परियोजनाओं से लाखों लोगों को और भी बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी।”

प्रधानमंत्री ने 2015 में संस्थान के दीक्षांत समारोह में अपनी पिछली यात्रा को याद करते हुए, पिछले एक दशक में हासिल की गई असाधारण क्षमता निर्माण की सराहना की। उन्होंने इस प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाने में लगे प्रशासनिक दल, शैक्षणिक कर्मचारियों और चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने कहा, “संस्थान की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए मैं यहां के प्रोफेसरों और युवा डॉक्टरों की बहुत सराहना करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वच्छता मानकों के बीच सीधा सम्‍बंध बताते हुए स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ को याद किया। उन्होंने करोड़ों शौचालयों के निर्माण से लेकर खुले में शौच की प्रथा के उन्मूलन तक लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों का विस्तृत विवरण दिया और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए शहर के प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “विभिन्न पहलें शुरू की गईं ताकि स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन जाए।”

प्रधानमंत्री ने असाधारण नागरिक समर्पण के लिए झाड़ू योद्धा के नाम से जाने जाने वाले स्थानीय सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की जमीनी स्तर पर स्वच्छता आंदोलन शुरू करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने इन प्रेरणादायक सामुदायिक प्रयासों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करने के सरकार के निर्णय पर गर्व व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “नई जागरूकता पैदा करने के लिए, हमारी सरकार ने उन्हें इस वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वच्छता को एक बार का आयोजन नहीं बल्कि निरंतर जीवनशैली का हिस्सा बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के कार्यक्रम में विशेष ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान को शामिल किया गया है। उन्होंने इस पहल को अपनाने के लिए स्थानीय नागरिकों की सराहना की और रोग निवारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छता अभियान देश भर में अनेक बीमारियों की रोकथाम में बेहद सहायक साबित हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने देश की स्वास्थ्य सेवा क्षमता को लेकर अतीत में फैली वैश्विक चिंताओं का उल्‍लेख करते हुए कई बार संकट के दौरान व्याप्त संदेह की तुलना करते हुए ऐतिहासिक कोरोना महामारी के दौरान देश के सक्रिय नेतृत्व के बारे में बताया। उन्होंने गर्वपूर्वक कहा कि सहायता मांगने के बजाय, देश ने सहायता प्रदान की और अब जटिल चिकित्सा उपचारों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन गया है। श्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ने भारत की क्षमता को पूरी तरह से बदल दिया और दुनिया के दृष्टिकोण में आमूलचूल परिवर्तन किया।”

इस क्रांतिकारी बदलाव का श्रेय बारह वर्षों के समर्पित नीतिगत क्रियान्वयन को देते हुए, प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सुविधाएं सभी के लिए मुहैया कराने और सभी नागरिकों के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल सुनिश्चित करने के मूलभूत संकल्प को याद किया। श्री मोदी ने कहा, “पिछले बारह वर्षों में देश की सफलता इसी संकल्प का प्रत्यक्ष परिणाम है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा अवसंरचना के देशव्यापी आक्रामक विस्तार का विवरण देते हुए 2014 के बाद 15 नए एम्स की मंजूरी, सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और विशिष्ट अस्पतालों की तेजी से बढ़ती संख्या के बारे में बताया। उन्होंने गर्व से चंडीगढ़ में होमी भाभा कैंसर अस्पताल के 2022 में उद्घाटन का उल्लेख किया, जो अब हजारों मरीजों की कुशलतापूर्वक सेवा कर रहा है। श्री मोदी ने कहा, “हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का तेजी से और व्यापक रूप से विस्तार किया है।”

जमीनी स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। इसके तहत गहन चिकित्सा केंद्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 17.5 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर वर्तमान में शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जांच और व्यापक स्वास्थ्य पैकेज प्रदान कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “प्रत्येक गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के तेजी से विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में डिजिटल तकनीक के क्रांतिकारी एकीकरण के बारे में बताते हुए, विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए ई-संजीवनी मिशन की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब कठिन यात्रा किए बिना आसानी से शीर्ष स्तर के विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं। श्री मोदी ने कहा, “आज देश भर में 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।”

इन व्यापक चिकित्सा सुधारों के जीवनरक्षक प्रभाव को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 90 प्रतिशत से अधिक प्रसव अत्यंत सुरक्षित संस्थागत व्यवस्थाओं में होते हैं। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए, जो मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की भारी गिरावट और देश भर में शिशु मृत्यु दर में भारी कमी को दर्शाते हैं। श्री मोदी ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं के इस व्यापक विस्तार के कारण शिशु मृत्यु दर में भी भारी कमी आई है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सम्‍बंधी प्रगति और सक्रिय स्वास्थ्य रणनीतियों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, प्रशासन के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर दोहरे ध्‍यानाकर्षण पर बल दिया। उन्होंने पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग प्रोत्साहन, एचपीवी टीकाकरण अभियान और यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी समग्र पहलों को संभावित स्वास्थ्य चुनौतियों से विशाल आबादी को सक्रिय रूप से सुरक्षित रखने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “इन अनेक महत्वपूर्ण प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन निरंतर सुरक्षित हो रहा है।”

तपेदिक के खिलाफ चलाए जा रहे सक्रिय राष्ट्रीय अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने समुदाय-आधारित टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत समय पर जांच और उपचार पर दिए जा रहे विशेष बल के बारे में विस्तार से बताया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने पिछले दशक में संक्रमण में 21 प्रतिशत की कमी और 90 प्रतिशत से अधिक उपचार कवरेज की उपलब्धि की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “जन की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अत्यधिक जागरूक बनाया जा रहा है।”

इस स्वास्थ्य सेवा क्रांति के प्राथमिक लाभार्थियों की पहचान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने समान चिकित्सा पहुंच के प्रति राष्ट्र के दृष्टिकोण में एक मौलिक दार्शनिक परिवर्तन पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अब विशेषाधिकार नहीं रहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार बन रही हैं।”

चिकित्सा शिक्षा में ऐतिहासिक रूप से चली आ रही बाधाओं को दूर करते हुए, प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक सीटों की गंभीर कमी का उल्‍लेख किया, जिसने पहले युवा छात्रों की आकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया था। उन्होंने घोषणा की कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, स्नातकोत्तर सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और हाल ही में स्थानीय संस्थान में एमबीबीएस कॉलेज को बहुप्रतीक्षित मंजूरी मिली है। श्री मोदी ने कहा, “यह व्यापक विस्तार प्रतिभाशाली युवाओं को शीर्ष संस्थानों में अध्ययन करने का अवसर देगा और देश को सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर प्रदान करेगा।”

प्रधानमंत्री ने शहर में मौजूद शिक्षा, इंजीनियरिंग और चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों के अनूठे संगम की प्रशंसा करते हुए, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में इसके तीव्र विकास की भविष्यवाणी की। इस शैक्षणिक यात्रा को गति देने के लिए, उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल का उद्घाटन और नए शोधार्थियों के आवास की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को उन्नत अनुसंधान के लिए सर्वोत्तम प्रयोगशालाएं और बेहतर संकाय उपलब्ध हों।”

प्रधानमंत्री ने कठोर शैक्षणिक वातावरण को तकनीकी प्रगति से सीधे जोड़ते हुए एआई, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक में प्रगति को गति देने के लिए एक मजबूत अनुसंधान तंत्र की परम आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय शिक्षकों और छात्रों पर अटूट विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “जब अनुसंधान वातावरण वास्तव में मजबूत होगा तभी नवाचार में तेजी आएगी।”

प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ अवसंरचना को आर्थिक समृद्धि का अंतिम खाका बताते हुए सरकार के नवीन समग्र विकास दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले नए राजमार्ग का उद्घाटन किया। इससे हवाई अड्डे की सड़क पर भीड़भाड़ कम होगी और क्षेत्रीय यात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करने हेतु ‘पीआर सेवन स्पर’ की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “इन सभी रणनीतिक विकास कार्यों से उद्योग और व्यापार को अभूतपूर्व गति प्राप्त होगी।”

क्षेत्रीय संपर्क के विषय को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने जालंधर में एक साथ रेलवे परियोजनाओं के शुभारंभ और जींद को सोनीपत से जोड़ने वाली देश की पहली स्वच्छ ईंधन से चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन के ऐतिहासिक शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने सतत, हरित परिवहन में इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि पर जनता को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छ ईंधन से चलने वाली यह ट्रेन देश के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।”

अपने सम्‍बोधन का समापन एक विकसित भारत के दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ करते हुए, प्रधानमंत्री ने भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों, परिवहन प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवा संरचनाओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लोगों को आश्वासन दिया कि वर्तमान प्रशासन आने वाली पीढ़ियों की सेवा करने वाली स्थायी संस्थाओं के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने कहा, “हमें ऐसे साहसिक निर्णय लेने होंगे जिनका अधिकतम लाभ हमारी आने वाली सभी पीढ़ियों तक सहजता से पहुंचे।”

PM मोदी PGIMER में 1200 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

  • एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर, एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर एवं क्रिटिकल केयर ब्लॉक उत्तर भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को देंगे नई दिशा
  • “जनता का बढ़ता विश्वास हमारी जिम्मेदारी को बढ़ाता है; इसका समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि अवसंरचना का विस्तार करना है।” – प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER ), चंडीगढ़ अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने जा रहा है। भारत के माननीय प्रधानमंत्री 17 जुलाई 2026 को दो अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं—एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर (एएनसी) और एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (AMCC)—का उद्घाटन करेंगे तथा क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) की आधारशिला रखेंगे। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत वाली ये परियोजनाएँ संस्थान के इतिहास में स्वास्थ्य अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तारों में से एक हैं।

इन नई सुविधाओं से न केवल चंडीगढ़ बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड तथा अन्य पड़ोसी राज्यों के उन लाखों मरीजों को लाभ मिलेगा, जो उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए पीजीआईएमईआर पर निर्भर हैं।

उद्घाटन से पूर्व अपने विचार व्यक्त करते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“ये परियोजनाएँ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी छलांग हैं। पीजीआईएमईआर सदैव प्रत्येक मरीज को उसकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इन सुविधाओं के शुरू होने से विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करने की हमारी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना भी जारी रहेगा।”

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर

एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर को देश की सबसे उन्नत न्यूरोलॉजिकल देखभाल सुविधाओं में से एक के रूप में विकसित किया गया है। इसमें अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, उन्नत गहन चिकित्सा इकाइयाँ तथा आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. विवेक लाल

“पीजीआई में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी की शुरुआत वर्ष 1967 में मात्र 50 बिस्तरों के साथ हुई थी। एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज़ सेंटर के साथ यह संख्या बढ़कर 400 से अधिक बिस्तरों तक पहुँच रही है, जिनमें समर्पित आईसीयू और आपातकालीन सुविधाएँ शामिल हैं। यह एक परिवर्तनकारी कदम है, जिससे स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर, रीढ़ की बीमारियों, मिर्गी, ट्रॉमा और अन्य जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।”

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर में माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इसमें समर्पित आईसीयू, आधुनिक लेबर सुइट, विशेष नवजात सेवाएँ और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएँ होंगी।

प्रो. विवेक लाल ने कहा,
“पीजीआईएमईआर ने भारत में कई नवजात सेवाओं की शुरुआत की है। एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर विशेष आईसीयू, उन्नत तकनीक और समर्पित स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।”

क्रिटिकल केयर ब्लॉक
नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला कोविड-19 महामारी से मिली सीख के बाद देश की आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रो. लाल ने कहा,
“महामारी ने हमें यह सिखाया कि क्रिटिकल केयर अवसंरचना कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। यह नया क्रिटिकल केयर ब्लॉक सुनिश्चित करेगा कि गहन चिकित्सा और वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले मरीजों को बिना अनावश्यक विलंब के समय पर उपचार मिल सके। यह भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।”

वर्तमान में पीजीआईएमईआर में प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख मरीजों का पंजीकरण होता है तथा प्रतिदिन 10,000 से 15,000 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जाते हैं। संस्थान बढ़ती मरीज संख्या को बोझ नहीं, बल्कि जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक मानता है।

इस संदर्भ में निदेशक ने कहा, “अक्सर कहा जाता है कि पीजीआई पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी बढ़ रही है। पीजीआई लाखों लोगों के लिए आशा और विश्वास का केंद्र है। समाधान मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप अपनी अवसंरचना और सेवाओं का लगातार विस्तार करना है।”

निदेशक ने बताया कि पीजीआईएमईआर आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत अत्यधिक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ न्यूनतम या बिना किसी लागत के उपलब्ध कराता है।

संस्थान में अब तक 5,500 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इसके अलावा लिवर, हृदय, फेफड़े और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाएँ भी उपलब्ध हैं, जिनमें से कई अब आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। सेवाओं के विस्तार के कारण पात्र किडनी प्रत्यारोपण मरीजों की प्रतीक्षा अवधि में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

पीजीआईएमईआर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी राष्ट्रीय अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। संस्थान अब तक 40 लाख से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान कर चुका है तथा देशभर के 250 से अधिक चिकित्सा संस्थानों, जिनमें सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (एएफएमसी) और अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं, को शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करता है।

निदेशक ने संस्थान की अभिनव ‘सारथी’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मरीज सेवा में स्वयंसेवा के लिए प्रेरित करना है। यह कार्यक्रम एक छोटे स्वयंसेवी प्रयास से विकसित होकर हजारों युवाओं का जनआंदोलन बन चुका है, जो संस्थान में मरीजों की सहायता कर रहे हैं।

प्रो. लाल ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा और संवेदनशीलता का भी नाम है। ‘सारथी’ के माध्यम से युवा स्वयंसेवक सहानुभूति और सामुदायिक सेवा की भावना सीखते हैं तथा देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों की सहायता करते हैं। संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आधुनिक अस्पतालों का निर्माण करना।”

इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के शुरू होने के साथ पीजीआईएमईआर उन्नत, किफायती और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में अग्रसर होगा तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। यह उद्घाटन भारत सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने और उत्तर भारत के लाखों लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के सतत प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

PM की यात्रा से पहले PGIMER ने स्वास्थ्य सेवाओं की रुपरेखा पेश की

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER ), चंडीगढ़ ने सोमवार को 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किए जाने वाले ऐतिहासिक स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं के महत्व से मीडिया को अवगत कराया।

कैरोन ब्लॉक के बोर्ड रूम में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने इसे संस्थान की स्वास्थ्य उत्कृष्टता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा, “माननीय प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा पीजीआईएमईआर की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ये केवल नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि उत्तर भारत के करोड़ों लोगों तक उन्नत, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की हमारी क्षमता में एक परिवर्तनकारी छलांग का प्रतीक हैं।”

प्रधानमंत्री एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (AMCC) तथा एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर (ANC) का उद्घाटन करेंगे, साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत वाली ये परियोजनाएं उत्तर भारत में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा तथा उन्नत अनुसंधान को नई मजबूती प्रदान करेंगी।

रोगी सेवा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रो. लाल ने कहा, “हमारा मूल मंत्र हमेशा से केवल एक रहा है—रोगी सेवा, रोगी सेवा और रोगी सेवा। हमारी प्रत्येक नई सुविधा इसी उद्देश्य से विकसित की गई है कि हर मरीज को गरिमा, संवेदनशीलता और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक के साथ विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा सके।”

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में डीन (अकादमिक) प्रो. संजय जैन, उपनिदेशक (प्रशासन) श्री पंकज राय, न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अशोक कुमार, बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. वनीता जैन, अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विजय गोनी, प्रोफेसर इंचार्ज (इंजीनियरिंग) प्रो. समीर अग्रवाल, लेफ्टिनेंट कर्नल गुरविंदर सिंह भट्टी (एस.एच.ई.), एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव चौहान तथा अस्पताल प्रशासन विभाग से डॉ. रमन शर्मा एवं डॉ. विजय तड़िया उपस्थित रहे।

एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर की जानकारी देते हुए निदेशक ने कहा, “₹505 करोड़ की लागत से निर्मित यह अत्याधुनिक केंद्र आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से सुसज्जित है। 300 बिस्तरों वाले इस केंद्र में अत्याधुनिक नवजात गहन चिकित्सा इकाइयां (NICU), मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तथा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे पीजीआईएमईआर की प्रतिवर्ष 6,000 से अधिक उच्च जोखिम वाली प्रसूतियों के प्रबंधन की क्षमता और सुदृढ़ होगी।”

इन्फोसिस फाउंडेशन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “उन्नत चिकित्सा उपकरणों की स्थापना के लिए ₹147 करोड़ का उदार सहयोग प्रदान करने पर हम इन्फोसिस फाउंडेशन के अत्यंत आभारी हैं। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की यह अनुकरणीय साझेदारी हमारी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगी तथा आने वाली पीढ़ियों तक मरीजों को लाभान्वित करेगी।”

300 बिस्तरों वाला एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोरेडियोलॉजी, न्यूरोएनेस्थीसिया, न्यूरोक्रिटिकल केयर तथा पुनर्वास सेवाओं को एक ही परिसर में समाहित करेगा। 61 गहन चिकित्सा बिस्तरों, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटरों तथा अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के उपचार को नई दिशा देगा।

इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रो. लाल ने कहा, “यह नया केंद्र उपचार में होने वाली देरी को कम करेगा, मरीजों के जीवित रहने की संभावना तथा दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल परिणामों में सुधार लाएगा और पीजीआईएमईआर को न्यूरोसाइंस शिक्षा, अनुसंधान एवं उन्नत उपचार के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।”

माननीय प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत लगभग ₹244 करोड़ की लागत से विकसित किए जाने वाले 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। कोविड-19 महामारी के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही यह सुविधा आपातकालीन तैयारियों तथा बहुविषयक क्रिटिकल केयर सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

पीजीआईएमईआर में बढ़ते मरीजों की संख्या पर टिप्पणी करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “पीजीआईएमईआर में आने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या हमारे लिए बोझ नहीं, बल्कि इस संस्थान पर लोगों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। हम इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं कि निरंतर अपनी अवसंरचना और सेवाओं का विस्तार करें ताकि कोई भी मरीज गुणवत्तापूर्ण उपचार से वंचित न रहे।”

निदेशक ने आयुष्मान भारत योजना के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा, “इस योजना ने अनेक जटिल उपचारों और उन्नत शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को उन मरीजों के लिए भी आर्थिक रूप से सुलभ बनाया है, जो पहले वित्तीय बाधाओं के कारण इनका लाभ नहीं उठा पाते थे। अंग प्रत्यारोपण, कैंसर उपचार से लेकर जटिल हृदय एवं न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं तक, पीजीआईएमईआर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हुए मरीजों पर आर्थिक बोझ को न्यूनतम कर रहा है।”

उन्नत उपचार की किफायत पर बल देते हुए प्रो. लाल ने कहा, “आज पीजीआईएमईआर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं अत्यधिक महंगी होना आवश्यक नहीं हैं। आयुष्मान भारत योजना और हमारी अमृत फार्मेसियों के माध्यम से अनेक महंगी दवाएं पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग तीन सौवें हिस्से की लागत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे जीवनरक्षक उपचार जरूरतमंद मरीजों की पहुंच में आ सका है।”

प्रो. लाल ने भारत सरकार तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “ये ऐतिहासिक परियोजनाएं रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान तथा आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी और देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में पीजीआईएमईआर की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेंगी।”

मीडिया ब्रीफिंग का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें निदेशक ने रोगी सेवाओं, नई स्वास्थ्य अवसंरचना की तैयारियों तथा भविष्य की विस्तार योजनाओं से संबंधित मीडिया के प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उत्कृष्ट रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के प्रति पीजीआईएमईआर की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

जोधपुर को मिला नया एयरपोर्ट टर्मिनल, पीएम मोदी ने लॉन्च की संशोधित ‘उड़ान’ योजना

राजस्थान / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।

नए टर्मिनल का किया निरीक्षण

प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

480 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ टर्मिनल

यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

राजस्थान की विरासत और हरित निर्माण पर विशेष जोर

राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

संशोधित ‘उड़ान’ योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपए का प्रावधान

पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित होंगे

योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। 

नारी शक्ति: वादों से लेकर कर दिखाने तक: ब्रिक्स में भारत का योगदान

भारत ने 1 जनवरी 2026 को “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की थीम के तहत ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। महिलाओं से जुड़े मामलों में हमारा योगदान बेहद खास रहा है। हम सिर्फ़ कोई नारा या तारीफ़ के लिए सफल कहानियों का संग्रह पेश नहीं कर रहे हैं। हम एक ऐसा कामकाजी ढांचा लेकर आए हैं, जो करोड़ों महिलाओं तक पहुँचा है। यह ढांचा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां से शुरू होकर जहाँ भी जाता है, वहाँ आगे और विकसित होने के लिए तैयार रहता है।

यही भारत की खास बात है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से  भारत ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एक राष्ट्रीय मिशन के तौर पर अपनाया है और इस काम को इतने बड़े पैमाने पर किया है, जिसकी बराबरी बेहद कम देश कर सकते हैं। 2023 में अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान, भारत ने वैश्विक सोच को “महिलाओं के विकास” से बदलकर “महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास” की ओर मोड़ने में मदद की। यह महज़ शब्दों का बदलाव नहीं था, बल्कि सोच का भी बदलाव था। महिलाओं को सिर्फ़ लाभार्थी के तौर पर देखने के बजाय, उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका में देखना। कोच्चि में हम इसी बदलाव से जुड़ा सवाल उठा रहे हैं: एक बार वादा करने के बाद, उसे बड़े पैमाने पर, आख़िरी गाँव की आख़िरी महिला तक कैसे पहुँचाया जाए? भारत ने पिछले दस सालों में सिर्फ़ सैद्धांतिक तौर पर नहीं, बल्कि असल में इस सवाल का जवाब दिया है।

भारत के लिए यह सोच नई नहीं, बल्कि बहुत पुरानी है। विकास की भाषा के आने से काफी पहले ही, हमारी संस्कृति ने नारी को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का स्रोत माना था। ये तीनों ही वे आधार हैं, जिन पर कोई भी समाज तरक्की करता है और उन्हें देवी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता रहा है। दैवीय शक्ति को ही ‘शक्ति’ कहा जाता है और संस्कृत के एक प्रसिद्ध श्लोक के अनुसार, जहाँ महिलाओं का सम्मान होता है, वहाँ देवता भी प्रसन्न होते हैं। यह सम्मान सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं था: लोपामुद्रा और घोषा जैसी महिला ऋषियों ने ऋग्वेद के मंत्रों की रचना की और गार्गी और मैत्रेयी जैसी दार्शनिकों ने उपनिषदों के प्रसिद्ध वाद विवादों में अपनी बात मज़बूती से रखी। इसलिए, भारत के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास, किसी और से लिया हुआ विचार नहीं है, बल्कि एक प्राचीन विचार का ही आधुनिक रूप है।

शुरुआत फ़ैसला लेने की प्रक्रिया से करते हैं। भारत की पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधियों में से लगभग आधी महिलाएँ हैं, जो दुनिया में चुनी हुई महिला नेताओं के सबसे बड़े समूहों में से एक है। इसके अलावा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का अंत सिर्फ़ प्रतिनिधित्व तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां से इसकी शुरुआत होती है। ऐसा मॉडल, जो महिलाओं को सेवाएँ तो देता है, लेकिन उन सेवाओं को तय करने वाले फ़ैसलों में उन्हें शामिल नहीं करता, वह असल में महिलाओं के नेतृत्व वाला मॉडल नहीं है।

भारत में सेवा पहुँचाने का ढाँचा तीन हिस्सों पर टिका है, जो एक साथ मिलकर ही काम करते हैं। पहला हिस्सा है पहुँच: डिजिटल जन अवसंरचना, फ़ायदों को सीधे महिलाओं के हाथों तक पहुँचाती है। आधार से जुड़े ट्रांसफ़र उन बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर रहे हैं, जो पहले मदद पहुँचने से पहले ही उसे दूसरी तरफ़ मोड़ देते थे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना इस पहुँच का व्यावहारिक उदाहरण है।  4.26 करोड़ से ज़्यादा माताओं को मातृत्व लाभ के तौर पर 20,060 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि सीधे उनके आधार से जुड़े खातों के ज़रिए मिली है। दूसरा हिस्सा है संस्थाएँ: डीएवाई-एनआरएलएम के तहत, 10.05 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण महिलाओं को 90.90 लाख से ज़्यादा स्वयं-सहायता समूहों में संगठित किया गया है, जो दुनिया में महिलाओं के नेतृत्व वाली सामुदायिक संस्थाओं का सबसे बड़ा नेटवर्क है। तीसरा हिस्सा है गतिशीलता—यानी मूल्य श्रृंखला में हमेशा सबसे नीचे बने रहने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ने का एक सोच-समझकर चुना गया रास्ता। भारत अब 65,949 एसएचजी महिलाओं को बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट एजेंट यानी बीसी सखी के तौर पर तैनात कर रहा है, जो दूर-दराज़ के इलाकों में जमा, क्रेडिट, धनराशि भेजने और पेंशन सेवाएँ पहुँचाती हैं। जो महिला कभी किसी लाभ के लिए कतार में लगती थी, अब वही महिला उस लाभ को दूसरों तक पहुँचाती है।

कुल मिलाकर ये सब मिलकर भागीदारी को आमदनी और मालिकाना हक में बदलते हैं। लखपति दीदी पहल के तहत, जून 2025 तक 1.48 करोड़ स्वयं सहायता समूह महिलाओं की सालाना कमाई कम से कम 1 लाख रुपए तक पहुँच गई थी और जनवरी 2026 में शुरू किए गए उद्यमिता पर केंद्रित एक राष्ट्रीय अभियान का मकसद 50,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्ति के ज़रिए 50 लाख अतिरिक्त महिलाओं को प्रशिक्षण देना है। तरक्की का यही रास्ता औपचारिक कारोबार में भी दिखता है: पीएमएमवाई के तहत दिए गए ऋण में से 69 प्रतिशत और ‘स्टैंड-अप इंडिया’ के लाभार्थियों में से 84 प्रतिशत महिलाएँ हैं। डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2.12 लाख स्टार्टअप्स में से 1.02 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या हिस्सेदार है और इनमें से कई स्टार्टअप बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों में हैं। हम ब्रिक्स को ये ब्रांड नाम नहीं, बल्कि उनके पीछे की कहानी पेश करते हैं: पहले पहुँच, फिर संस्थाएँ और फिर लाभार्थी से उद्यमी बनने का एक व्यवस्थित मार्ग।

आँकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। भारत में महिलाओं की कामकाजी आबादी में भागीदारी 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41.7 प्रतिशत हो गई है और इसी दौरान महिलाओं में बेरोज़गारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत हो गई है। अब पहले से कहीं ज़्यादा महिलाएँ कार्यबल का हिस्सा हैं, इसलिए हमारा फोकस अब अगले चरण पर है, उनके काम की गुणवत्ता और आमदनी को और बेहतर बनाना।

इस साल महिलाओं से जुड़े कामों के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र तय किए गए हैं और इनमें से एक सीधे हमारे अनुभव से जुड़ा है: जलवायु कार्यवाही, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका। इस बारे में साक्ष्य भी साफ नतीजे बयां करते हैं: जब फैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाएं शामिल होती हैं, तो पोषण बेहतर मिलता है और समुदाय चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं। यह कोई काल्पनिक बात नहीं है। झारखंड में महिला किसानों को ऐसी बीजों की किस्मों की जानकारी है, जो सूखे के दौरान भी बची रहती हैं। राजस्थान में महिला पशुपालकों को उन रास्तों की भी जानकारी है, जिनसे सूखे के समय मवेशियों को सुरक्षित ले जाया जा सकता है। भारत का काम ऐसे संस्थान बनाना रहा है, जो इस जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल करें, न कि इसे नज़रअंदाज़ करें। मिशन पोषण 2.0 आंगनवाड़ी नेटवर्क के ज़रिए चलाया जाता है, जिसमें महिलाएं काम करती हैं और वे ही लोगों तक सेवा पहुंचाने की भरोसेमंद कड़ी होती हैं। जलवायु के अनुसार ढलने का काम भी इसी तरह होता है, चाहे वह लद्दाख में महिलाओं द्वारा बनाए गए ऊंचे इलाकों में पानी जमा करने के ढांचे हों या ओडिशा के तट पर वनस्पति के घने इलाकों को बचाने वाली समितियां। महिलाएं अब सिर्फ़ अनुकूलन की तकनीक का इस्तेमाल करने वाली नहीं रह गई हैं, बल्कि वे खुद इसे आगे बढ़ा भी रही हैं: नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को खेती में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह ज़्यादा कौशल और ज़्यादा आमदनी वाले काम की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है।

एक खास बात जो पूरी तरह से भारत की वास्तविक विशेषता बन गई है।  एक ज़िला एक उत्पाद पहल के तहत अब 761 ज़िलों में 1,102 उत्पाद शामिल हैं। महिला समूह हथकरघा, जीआई टैग वाले शिल्प और क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों जैसे स्थानीय विशेष उत्पादों को ब्रांडेड और तेज़ी से निर्यात होने वाले उत्पादों में बदल रहे हैं। सरकार भी इन उत्पादों के लिए बाज़ार तक पहुँचने का रास्ता बना रही है: अवसर योजना के तहत हवाई अड्डों पर महिलाओं के लिए आरक्षित रिटेल जगह और ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ के तहत महिला-संचालित उद्यमों के लिए जेम पर एक खास स्थान। असल मायनों में यह टिकाऊ व्यवस्था है, जिसके तहत स्थानीय सामग्री, स्थानीय कौशल और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, जो समुदाय के भीतर ही अपना मूल्य बनाए रखती हैं और ये विकास का ऐसा रूप भी है, जिसके लिए किसी महिला को बाज़ार तक पहुँचने के लिए अपना ज़िला छोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास सरकार द्वारा की गई महज़ कोई घोषणा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे एक-एक हिस्से को जोड़कर तब तक बनाया और संचालित किया जाता है, जब तक कि यह उस आखिरी महिला तक न पहुँच जाए, जिसके लिए इसे बनाया गया था। जुलाई में कोच्चि में होने वाली मंत्रियों की बैठक में, भारत इस मॉडल को एक योगदान के तौर पर पेश करेगा, न कि किसी ऐसे उपाय के तौर पर, जिसे दूसरों को भी अपनाना ही हो। इसका मकसद यह है कि दूसरे इससे सीख सकें और इसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकें। यही व्यवस्था और इसके सफल होने के सबूत, भारत ब्रिक्स के सामने रख रहा है। यह आदान-प्रदान दोनों तरफ से होता है: भारत कोच्चि में अपने ब्रिक्स सहयोगियों के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।

(लेखिका भारत सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)

बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

MSME दिवस 2026 पर विशेष: कैसे डिजिटल पोर्टल भारत के 8 करोड़ MSME के कामकाज के तरीके में चुपचाप बड़ा बदलाव ला रहे हैं

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

एक दशक पहले किसी भी सरकारी जिला कार्यालय में जाइए। वहां कागजों की फाइलों का ढेर, काम के बोझ से परेशान कर्मचारी और पंजीकरण प्रमाणपत्र या भुगतान विवाद के निपटारे के लिए कई दिनों, कभी-कभी कई हफ्तों तक इंतजार करते उद्यमी आम दृश्य हुआ करते थे। आज देश के किसी भी कोने में बैठा एक कारीगर अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में अपना उद्यम पंजीकृत कर सकता है, अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार में बेचने के लिए सूचीबद्ध कर सकता है और अपनी कार्यशाला से बाहर निकले बिना बकाया भुगतान की शिकायत भी दर्ज करा सकता है। यह केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था में आया एक बड़ा बदलाव है।

भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश की अर्थव्यवस्था का छोटा हिस्सा नहीं हैं। वर्ष 2026 के एमएसएमई दिवस पर यह समझना जरूरी है कि इनका योगदान कितना बड़ा है। ये देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत से अधिक और कुल निर्यात में लगभग 48.58 प्रतिशत का योगदान देते हैं। साथ ही, ये लगभग 38 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जो दुनिया के अधिकांश देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। इसके बावजूद, कई दशकों तक ये उद्यम औपचारिक व्यवस्था से दूर रहे। इन्हें संस्थागत ऋण आसानी से नहीं मिला, बड़े सरकारी और निजी खरीद बाजारों तक पहुंच सीमित रही और जटिल नियम-कायदों का सामना करना पड़ा, जिनका लाभ अक्सर बड़े उद्योगों को मिलता था।

अब स्थिति तेजी से बदल रही है। एमएसएमई के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए कई डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक उनकी किसी खास समस्या का समाधान करता है। इन पहलों ने सरकार और छोटे उद्यमियों के बीच संबंधों को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है।

अंगुलियों पर औपचारिक पहचान

सबसे बड़ी और बुनियादी समस्या यह थी कि बिना औपचारिक पंजीकरण के कोई भी उद्यम सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण या सरकारी ठेकों का लाभ नहीं ले सकता था। उद्यम पोर्टल पर कागज रहित, आधार आधारित सत्यापन और स्व-घोषणा की व्यवस्था ने पहले की लंबी और जटिल प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों की ऑनलाइन प्रक्रिया में बदल दिया। आज 8.7 करोड़ उद्यम इस पोर्टल के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इतिहास में इतने बड़े स्तर पर औपचारिक पंजीकरण का यह एक दुर्लभ उदाहरण है।

लेकिन केवल औपचारिक पंजीकरण ही पर्याप्त नहीं है। यदि सबसे छोटे और कमजोर उद्यम इससे बाहर रह जाएं, तो इसका पूरा लाभ नहीं मिल सकता। इसी उद्देश्य से उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म शुरू किया गया। यह उन सूक्ष्म और अनौपचारिक उद्यमों के लिए बनाया गया है, जिनके पास सामान्य पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इस मंच पर अब तक 3.28 करोड़ ऐसे उद्यम जुड़ चुके हैं। इससे पहली बार लाखों छोटे कारोबार सरकारी सहायता और योजनाओं की पहुंच में आए हैं, जो पहले किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।

सरकारी खरीद में समान अवसर

पहले छोटे उद्यमों के लिए ग्राहकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं था। यह अक्सर भौगोलिक दूरी, सीमित संपर्कों और सरकारी खरीद की जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर करता था। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। यह एक पारदर्शी ऑनलाइन मंच है, जहां कोई भी पंजीकृत एमएसएमई सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को सीधे सामान और सेवाएं बेच सकता है। इससे सरकारी खरीद प्रणाली अधिक खुली और सभी के लिए समान अवसर वाली बन गई है।

आज जेम पर 11.14 लाख से अधिक एमएसएमई विक्रेता पंजीकृत हैं। इनमें 2.03 लाख महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले और 61 हजार अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यम शामिल हैं। जेम के माध्यम से अब तक 18.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी खरीद हो चुकी है। यह केवल कारोबार का आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, छोटे उद्यमों की मजबूती और आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार का भी प्रमाण है।

नकदी की उपलब्धता आसान बनाना

यदि पंजीकरण और बाजार तक पहुंच एमएसएमई सुधारों की मजबूत नींव हैं, तो समय पर धन उपलब्ध होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लंबे समय तक सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बड़े खरीदार छोटे उद्यमों के भुगतान 60, 90 या कभी-कभी 180 दिनों तक रोककर रखते थे। इससे छोटे कारोबारियों को महंगे अनौपचारिक कर्ज का सहारा लेना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए व्यापार प्राप्तियों के छूटकरण प्रणाली (टीआरईडीएस) शुरू की गई। अब एमएसएमई अपने बिल इस डिजिटल मंच पर अपलोड कर सकते हैं, जहां बैंक और वित्तीय संस्थान उन बिलों के बदले तुरंत धन उपलब्ध कराते हैं। इससे कारोबार के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी समय पर मिल जाती है।

वर्ष 2021 से 2026 के बीच टीआरईडीएस के माध्यम से 8.35 लाख करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान कराया जा चुका है। इसका अर्थ है कि हजारों छोटे उद्यम अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर दे सके, उन्हें साहूकारों से महंगा कर्ज नहीं लेना पड़ा और केवल भुगतान में देरी के कारण उनका कारोबार बंद नहीं हुआ।

शिकायतों का समाधान और न्याय तक आसान पहुंच

सबसे अच्छी व्यवस्था में भी कभी-कभी समस्याएं आती हैं। इन्हें दूर करने के लिए एमएसएमई चैंपियंस पोर्टल बनाया गया है। यह एक डिजिटल मंच है, जहां उद्यमी सलाह ले सकते हैं, अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 24 जून 2026 तक इस पोर्टल पर प्राप्त कुल शिकायतों में से 1,85,253 शिकायतों यानी 99.66 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है।

एमएसएमई समाधान पोर्टल विशेष रूप से छोटे उद्यमों के बकाया भुगतान की समस्या को दूर करने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल न्याय तक पहुंच को और आसान बनाता है। इस पोर्टल के माध्यम से छोटे उद्यम अपने व्यावसायिक विवादों का समाधान ऑनलाइन सुलह और मध्यस्थता के जरिए कर सकते हैं। इससे देश के सबसे छोटे कारोबारियों के लिए न्याय प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सुलभ हो गया है।

नई पीढ़ी के डिजिटल मंच

इस वर्ष का एमएसएमई दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि डिजिटल बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत भी है। भारत अब अपनी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीएमईजीपी 2.0 पोर्टल आवेदन से लेकर अनुदान मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को और सरल बनाएगा। एमएसएमई समाधान 2.0 बकाया भुगतान के मामलों का और तेज़ी से निपटारा करेगा। वहीं, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 एक सरकारी सहयोग वाला ऑनलाइन बाजार होगा, जो ओएनडीसी व्यवस्था से जुड़ा रहेगा। इसके माध्यम से छोटे उद्यम एक-दूसरे के साथ और सीधे ग्राहकों को भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे, साथ ही वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के इस दौर में सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि इस परिवर्तन की यात्रा में कोई भी उद्यमी पीछे न छूटे।

बड़ी तस्वीर

ये सभी डिजिटल मंच अलग-अलग काम नहीं करते, बल्कि मिलकर एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाते हैं, जो नियमों का पालन आसान करती है, विभिन्न सरकारी आंकड़ों को आपस में जोड़ती है और सरकार तथा उद्यमों के बीच तुरंत सूचना का आदान-प्रदान संभव बनाती है। इनसे केवल सुविधा ही नहीं बढ़ी है, बल्कि उन पुराने लाभों को भी खत्म किया गया है, जो पहले केवल बड़े, शहरी और प्रभावशाली कारोबारों को मिलते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प में एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। “सबका साथ, सबका विकास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली का आधार है। 1 अप्रैल 2014 को एमएसएमई क्षेत्र को दिया गया बैंक ऋण 10.40 लाख करोड़ रुपये था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 36.79 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी 12 वर्षों में इसमें 268 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बड़े उद्योगों की तुलना में अधिक तेज रही। इस दृष्टि से एमएसएमई के लिए तैयार की गई डिजिटल व्यवस्था, विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का मजबूत आधार बन चुकी है।

देश में भविष्य के अधिकांश नए रोजगार एमएसएमई क्षेत्र से ही आएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार भी इसी क्षेत्र के माध्यम से होगा और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक व्यवस्था की ओर बदलाव भी इसी के जरिए पूरा होगा। इसलिए एमएसएमई के लिए तैयार की जा रही डिजिटल व्यवस्था विकसित भारत की मजबूत नींव है। हर नया पंजीकरण, हर समय पर मिला भुगतान और हर ऑनलाइन सुलझा विवाद वर्ष 2047 के विकसित भारत की दिशा में उठाया गया एक स्थायी कदम है।

आज लाखों छोटे उद्यमों को बाजार, वित्त और सरकारी सेवाओं से जोड़ने वाले ये डिजिटल मंच केवल तकनीकी सुविधा नहीं हैं। वे एक ऐसे भारत की मजबूत आधारशिला हैं, जहां हर छोटे उद्यमी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले और कोई भी पीछे न रह जाए।

(लेखक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं।)

देशव्यापी PM-VBRY उत्सव में शामिल होगा चंडीगढ़; पीएम करेंगे 2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि के वितरण का नेतृत्व

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के सफल कार्यान्वयन के उपलक्ष्य में,  श्रम और रोजगार मंत्रालय 19 जून, 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के माननीय प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में एक राष्ट्रीय PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान, भारत के माननीय प्रधानमंत्री प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे।

PM-VBRY के तहत प्रोत्साहन राशि के इस वितरण से 15 लाख से अधिक लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम में लगभग 1,200 आमंत्रित लोगों के शामिल होने की आशा है, जिनमें नियोक्ता और कर्मचारी, लाभार्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। माननीय प्रधानमंत्री देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले लाभार्थियों के साथ बातचीत भी करेंगे। इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे के साथ-साथ श्रम और रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

देशव्यापी पहुंच अभियान के हिस्से के रूप में, देश भर में 200 स्थानों पर एक साथ क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्षेत्रीय कार्यक्रमों में जन प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होगी, जिनमें 2 राज्यपाल, 5 मुख्यमंत्री, 12 केंद्रीय मंत्री, 1 उपमुख्यमंत्री, 13 राज्य श्रम मंत्री, 39 राज्य मंत्री, 59 सांसद, 56 विधायक और 2 महापौर शामिल हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के साथ उनकी भागीदारी PM-VBRY की देशव्यापी पहुंच को और मजबूत करेगी और रोजगार सृजन तथा कार्यबल के औपचारिककरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। देशव्यापी भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए विज्ञान भवन में मुख्य कार्यक्रम की कार्यवाही का प्रसारण सभी क्षेत्रीय स्थानों पर किया जाएगा।

देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में लगभग 65,000 से 70,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की आशा है, जिनमें लगभग 9,000 नियोक्ता प्रतिनिधि और लगभग 45,000 कर्मचारी शामिल हैं।

इसी क्रम में, क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ द्वारा दिनांक 19.06.2026 को जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज, सैक्टर 32-सी, चण्डीगढ़ – 160030 में PM-VBRY कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें मुख्य अतिथि श्री सौरभ जोशी, मेयर, चण्डीगढ़ होंगे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में श्री राजीव कुमार गुप्ता, आई.ए.एस., श्रम आयुक्त, पंजाब सरकार, श्री हेमांग डिमजेल, उप मुख्य श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री आकाश मित्तल, सहायक श्रम आयुक्त, चण्डीगढ़, श्री पंकज वोहरा, संयुक्त निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, श्री एस एस नेगी, डी.जी., श्रम ब्यूरो, श्री हुक्म सिंह, सदस्य, क्षेत्रीय समिति शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, विभिन्न स्थापनाओं के कर्मचारी, नियोक्ता, कर्मचारी एसोसिएशन तथा नियोक्ता एसोसिएशन के सदस्य भाग लेंगे।

PM-VBRY  के बारे में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ELI) योजना है। इसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, संगठित कार्यबल में पहली बार शामिल होने वालों की मदद करना और नियोक्ताओं को अतिरिक्त नौकरियां पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार नौकरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (अधिकतम ₹15,000 तक) मिलता है, जबकि नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए दो साल तक प्रोत्साहन दिया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अतिरिक्त दो साल के लिए बढ़ा हुआ सहयोग मिलता है, जिससे श्रम-प्रधान उद्योगों में लगातार नौकरियां पैदा करने को बढ़ावा मिलता है।

कुल ₹99,446 करोड़ के बजट के साथ, PM-VBRY का लक्ष्य दो साल की अवधि में देश भर में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थियों के औपचारिक कार्यबल में पहली बार शामिल होने की आशा है। इस योजना के तहत लाभ 1 अगस्त, 2025 और 31 जुलाई 2027 के बीच पैदा हुई नौकरियों पर लागू होते हैं। इस योजना का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना, गुणवत्तापूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना और समावेशी व टिकाऊ आर्थिक विकास के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देना है।

इस योजना के दो हिस्से हैं:

भाग A – पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन:

इस हिस्से के तहत, EPFO  में पंजीकृत और ₹ 1 लाख प्रति माह तक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी, एक महीने के वेतन के बराबर प्रोत्साहन (अधिकतम ₹15,000 तक) दो किस्तों में प्राप्त करने के पात्र हैं। पहली किस्त लगातार छह महीने की सेवा पूरी होने के बाद दी जाती है, जबकि दूसरी किस्त बारह महीने की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा होने के बाद दी जाती है। जो कर्मचारी छह महीने से अधिक समय तक लगातार नौकरी में रहते हैं, वे इस योजना के तहत लाभ पाने के पात्र हो जाते हैं, जिससे कार्यबल को बनाए रखने और लगातार औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है। प्रोत्साहन की दूसरी किस्त को एक निश्चित अवधि के लिए बचत साधन/जमा खाते में रखा जाएगा ताकि युवा श्रमिकों में लंबी अवधि की बचत की आदत को बढ़ावा दिया जा सके।

भाग B – नियोक्ताओं के लिए सहयोग:

यह हिस्सा सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार पैदा करने के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है। नियोक्ताओं को हर अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो साल तक ₹3,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन मिलेगा, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह महीने तक लगातार नौकरी पर बना रहे। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, ये प्रोत्साहन दो और साल के लिए बढ़ा दिए गए हैं, जिसमें तीसरा और चौथा साल भी शामिल है। इस हेतु पात्र होने के लिए, EPFO के अंतर्गत रजिस्टर्ड स्थापनाओं को कम से कम दो अतिरिक्त कर्मचारी (50 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) या पांच अतिरिक्त कर्मचारी (50 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए) भर्ती करने होंगे।

पार्ट A के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को सभी भुगतान “आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम” (ABPS) का प्रयोग करके प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के ज़रिए किए जाते हैं, जबकि पार्ट B के तहत नियोक्ताओं को प्रोत्साहन सीधे उनके PAN-लिंक्ड बैंक अकाउंट में क्रेडिट किए जाते हैं।

आशा है कि PMVBRY योजना से नौकरियां बढ़ेंगी, विशेषकर मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर में, और साथ ही औपचारिक कार्यबल में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना देश भर में लाखों कामगारों के बीच रोज़गार को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने में भी काफी मदद करेगी।

PMVBRY योजना ने औपचारिक रोज़गार को बढ़ावा देने और कामगारों और नियोक्ताओं, दोनों को मदद करने में पहले ही काफी शुरुआती सफलता प्रदर्शित की है। मार्च 2026 में, योजना के पार्ट A के तहत 4.41 लाख पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ₹ 247 करोड़ के फायदे दिए गए, जिससे औपचारिक कार्यबल में आने वाले युवा कामगारों को सीधी वित्तीय मदद मिली। पार्ट B के तहत, 17,551 स्थापनाओं को ₹ 214 करोड़ के प्रोत्साहन दिए गए, जिससे लगभग 6.46 लाख कामगारों को अतिरिक्त रोज़गार मिला।

क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़ के हिस्से सहित पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल की समेकित कुल स्थिति का विवरण नीचे दिया गया है:

1.  दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-B लाभार्थी (नियोक्ता)

विवरण                                                      स्थापनाओं की संख्या            राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                          2,428                    56,85,77,793
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                                      794                    26,63,94,224

2. दूसरे वितरण चक्र के लिए संभावित भाग-A लाभार्थी (कर्मचारी)

विवरण                                          लाभार्थियों की संख्या       राशि (₹)
पंजाब और हिमाचल प्रदेश अंचल                15,287           8,38,03,235
क्षेत्रीय कार्यालय, चण्डीगढ़                           5,435           3,26,38,831

“नोट: पार्ट-A के पहले चरण के दौरान बांटी गई राशि से संबंधित विवरण अभी उपलब्ध नहीं हैं।”

आने वाले समय में मिलने वाला लाभ PM-VBRY को लागू करने की दिशा में एक और अहम पड़ाव है। यह देशव्यापी कार्यक्रम रोज़गार पैदा करने, कार्यबल को औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ाने के प्रति सरकार की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों को लगातार मदद देकर PM-VBRY भारत की रोज़गार रणनीति के एक अहम स्तंभ और ‘विकसित भारत’ के विज़न में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के तौर पर उभर रहा है।

नारी शक्ति का दशक, विकसित भारत का उत्कर्ष

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश के किसी भी गाँव, बस्ती या सुदूर इलाके में जाइए- हर घर की रसोई में एक जैसी बदली हुई हवा महसूस होगी l चूल्हे के जिस काले धुएँ ने कभी नई दुल्हन की आँखों में आँसू भरे थे, उज्ज्वला की नीली लौ ने उसे विदा कह दिया है। जो माँ कभी कोसों दूर से पानी ढोती थी, आज उसकी बेटी के पास ‘हर घर जल’ का अपना नल है। खेत के पीछे की वह शर्मनाक मजबूरी अब इतिहास है- आँगन में स्वच्छ भारत का शौचालय गरिमा के साथ खड़ा है। सिर पर पक्की छत है, और उसके मालिकाना हक पर पहली बार- घर की महिला का नाम लिखा है। पर्स में जन-धन की पासबुक है और फोन में यूपीआई का ऐप है।


यह किसी पोस्टर पर छपी कोई काल्पनिक तस्वीर नहीं, बल्कि मोदी सरकार के बारह वर्षों में महिला सशक्तिकरण का एक ऐसा सच है, जिसे देश की करोड़ों महिलाएँ हर रोज़ जी रही हैं। यह उस दौर की दास्तान है जिसमें Women Led Development के विजन के साथ भारतीय नारी विकसित भारत की शिल्पकार बन रही है। इस बदलाव की विशालता को समझने के लिए एक दशक पीछे लौटिए। एक समय मातृ मृत्यु दर 212 थी। निर्भया जैसी घटना पर देश का आक्रोश सड़कों पर था, लेकिन व्यवस्था में नीतिगत इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती थी। महिला आरक्षण विधेयक 1996 से चार बार अधर में लटका रहा और ट्रिपल तलाक पर दशकों तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। चूल्हा साँसों में कालिख घोलता था। दूरस्थ हैंडपंप रोज़मर्रा की बेबसी का प्रतीक था l भारतीय नारी एक नई सुबह की प्रतीक्षा में अपने हिस्से की उम्मीद बचाए हुए थी l


शुरुआत करते हैं सबसे पवित्र आँकड़े—जीवन का अधिकार से। देश में मातृ मृत्यु दर तेजी से घटकर 212 से 88 पर आ गई है। UN-MMEIG के अनुसार जहाँ वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु दर में महज़ 48% की कमी आई, वहीं भारत ने 86% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। संस्थागत प्रसव 38.7% से बढ़कर 90.6% हो चुका है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने चार करोड़ से अधिक माताओं के बैंक खातों में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक सीधे हस्तांतरित कर सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन की नींव मजबूत की है।


देश में बने 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों ने महिलाओं को गरिमा दी l10.5 करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शनों ने धुएँ से मुक्ति दी। आज 16 करोड़ से अधिक घरों तक नल का पानी पहुँच चुका है—जबकि 2014 में महज 17% परिवारों के पास यह सुविधा थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के लगभग 4 करोड़ घरों में से 73% घर महिलाओं के नाम पर हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार सरकारी रिकॉर्ड्स पर माँ-बहनों का नाम गर्व से दर्ज है।


गरिमा से स्वामित्व आया, और स्वामित्व ने निर्णय लेने का आत्मविश्वास दिया। आर्थिक भागीदारी का यह विस्तार बैंक खाते से शुरू होकर उद्यमिता तक पहुँचा है l लगभग 56 करोड़ जन-धन खातों में 56% खाते महिलाओं के नाम पर हैं।


विश्व बैंक मानता है- भारत ने एक दशक में खाता-स्वामित्व के जेंडर गैप को शून्य पर ला दिया है, जो वैश्विक वित्तीय समावेशन के इतिहास में अभूतपूर्व है। मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक जमानत-मुक्त ऋणों में से 68% ऋण महिलाओं को मिले हैं। स्टैंड-अप इंडिया ने महिला उद्यमियों को 43,000 करोड़ रुपये से अधिक दिए हैं और दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत 91 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है।” निर्धारित समय से पहले 3 करोड़ बहनें ‘लखपति दीदियाँ’ बन चुकी हैं।


यह बदलाव शिक्षा और रोजगार में भी स्पष्ट है l देश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह भागीदारी 47.6% तक पहुँच चुकी है । सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ खातों में 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है । उच्च शिक्षा में हमारा जेंडर समानता सूचकांक (GPI) 1 के पार है और STEM शिक्षा में बेटियों की भागीदारी 43% है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है। यह परिवर्तन केवल अनुभवों में नहीं, SRS, NFHS, PLFS, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र—हर रिपोर्ट एक ही दिशा की ओर इशारा करती है: भारतीय महिला के लिए पहुँच बढ़ी है और आत्मनिर्भरता का नया आसमान खुला है।


इसी आर्थिक-सामाजिक चेतना का विस्तार राजनैतिक और लोकतांत्रिक भागीदारी में दिख रहा है। वर्ष 2019 के आम चुनावों में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया—यह वैश्विक स्तर पर महिलाओं की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक भागीदारी थी l इसी के फलस्वरूप दशकों से लंबित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद में ऐतिहासिक सर्वसम्मति से पास हुआ। आजजमीनी स्तर पर 14.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं। देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में भी महिलाएँ राफेल उड़ा रही हैं और नौसेना की कमान संभाल रही हैं।


मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने ट्रिपल तलाक पर प्रभावी रोक लगाई, जिससे ऐसे मामलों में 82% की कमी आई है।देशभर में स्थापित 973 वन स्टॉप सेंटर्स पर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी सहायता और काउंसलिंग मिल रही है l Women Helpline-181 ने अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं की मदद की है । मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आँगनवाड़ी—ये नारी-नेतृत्व वाले भारत की रीढ़ हैं। बेशक, महिला सशक्तिकरण की राह में अभी भी चुनौतियाँ हैं, जिन पर सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। इसके साथ ही, नारी शक्ति वंदन अधिनियम आगामी परिसीमन की प्रक्रिया की प्रतीक्षा में है।


हमारे गणतंत्र के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला अब नीति निर्धारण के पटल पर केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी सक्रिय ‘सह-निर्माता’ है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में वह अब राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया की सहयात्री है, सहभागी है और सूत्रधार भी।
(SHGs) ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है।” निर्धारित समय से पहले 3 करोड़ बहनें ‘लखपति दीदियाँ’ बन चुकी हैं।


यह बदलाव शिक्षा और रोजगार में भी स्पष्ट है l देश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3% से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 41.7% हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह भागीदारी 47.6% तक पहुँच चुकी है । सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ खातों में 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है । उच्च शिक्षा में हमारा जेंडर समानता सूचकांक (GPI) 1 के पार है और STEM शिक्षा में बेटियों की भागीदारी 43% है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है। यह परिवर्तन केवल अनुभवों में नहीं, SRS, NFHS, PLFS, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र—हर रिपोर्ट एक ही दिशा की ओर इशारा करती है: भारतीय महिला के लिए पहुँच बढ़ी है और आत्मनिर्भरता का नया आसमान खुला है।


इसी आर्थिक-सामाजिक चेतना का विस्तार राजनैतिक और लोकतांत्रिक भागीदारी में दिख रहा है। वर्ष 2019 के आम चुनावों में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया—यह वैश्विक स्तर पर महिलाओं की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक भागीदारी थी l इसी के फलस्वरूप दशकों से लंबित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद में ऐतिहासिक सर्वसम्मति से पास हुआ। आजजमीनी स्तर पर 14.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं। देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में भी महिलाएँ राफेल उड़ा रही हैं और नौसेना की कमान संभाल रही हैं।


मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने ट्रिपल तलाक पर प्रभावी रोक लगाई, जिससे ऐसे मामलों में 82% की कमी आई है।देशभर में स्थापित 973 वन स्टॉप सेंटर्स पर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी सहायता और काउंसलिंग मिल रही है l Women Helpline-181 ने अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं की मदद की है । मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आँगनवाड़ी—ये नारी-नेतृत्व वाले भारत की रीढ़ हैं।


बेशक, महिला सशक्तिकरण की राह में अभी भी चुनौतियाँ हैं, जिन पर सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। इसके साथ ही, नारी शक्ति वंदन अधिनियम आगामी परिसीमन की प्रक्रिया की प्रतीक्षा में है। हमारे गणतंत्र के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला अब नीति निर्धारण के पटल पर केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी सक्रिय ‘सह-निर्माता’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में वह अब राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया की सहयात्री है, सहभागी है और सूत्रधार भी।


(लेखिका भारत सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं।)