लुधियाना में GLADA की प्रॉपर्टी का बड़ा फर्जीवाड़ा: 1998 में रद्द हुआ मकान 2024 में फर्जी दस्तावेजों से बेचा, पुलिस ने दर्ज किया केस
लुधियाना: ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) की एक रिहायशी प्रॉपर्टी को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने इस धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
26 साल पुराना मामला: यह मामला दुगरी रोड के फेज-3 स्थित एक मकान से जुड़ा है, जो साल 1998 में परमजीत सिंह के नाम पर अलॉट हुआ था। हालांकि, पैसे जमा न करने के कारण अलॉटमेंट रद्द कर दिया गया था और 2002 में जमा राशि भी वापस कर दी गई थी।
फर्जी अलॉटी का खेल: साल 2021 में किसी व्यक्ति ने खुद को असली अलॉटी बताकर GLADA में दस्तावेज जमा किए और कन्वेयंस डीड करवा ली। इसके बाद पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जून 2022 और सितंबर 2023 में मालिकाना हक घुमाया गया और अंततः अप्रैल 2024 में इसकी रजिस्ट्री हरिंदरपाल सिंह के नाम कर दी गई।
जांच में खुली पोल: जब खरीदार ने नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन किया, तो GLADA अधिकारियों को फाइल में कई खामियां मिलीं। करीब 4 लाख रुपये की रसीदें फर्जी पाई गईं, क्योंकि यह पैसा विभाग के खाते में कभी जमा ही नहीं हुआ था।
रिकॉर्ड में हेराफेरी: जांच के दौरान पजेशन लेटर और नो-ड्यू सर्टिफिकेट के डिस्पैच नंबर फर्जी पाए गए और फाइल के कई महत्वपूर्ण पन्ने (नोट-शीट) गायब थे।
पुलिस कार्रवाई: थाना सराभा नगर पुलिस ने GLADA के एस्टेट ऑफिसर की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। एएसआई राजपाल सिंह के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगा रही है कि सरकारी सिस्टम के भीतर से यह धोखाधड़ी कैसे अंजाम दी गई।

