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ट्रंप के वादों और हकीकत के बीच फासला, अमेरिकी श्रमिकों को नहीं मिला अपेक्षित आर्थिक लाभ

वॉशिंगटन / सत्ता संदेश

अमेरिका में रोजगार, विनिर्माण और मजदूर वर्ग की आय बढ़ाने के वादों के साथ सत्ता में लौटे राष्ट्रपति Donald Trump की आर्थिक नीतियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि तमाम बड़े वादों और नीतिगत घोषणाओं के बावजूद अमेरिकी श्रमिकों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया है।

ट्रंप ने अपने चुनावी अभियानों में बार-बार यह दावा किया था कि उनकी नीतियां अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित करेंगी, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाएंगी और विदेशी प्रतिस्पर्धा से प्रभावित श्रमिकों को राहत प्रदान करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से चीन के साथ व्यापार असंतुलन, विदेशी आयात और अमेरिकी नौकरियों के पलायन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।

हालांकि कई आर्थिक अध्ययनों और श्रम बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक तस्वीर अधिक जटिल है। कुछ क्षेत्रों में निवेश और रोजगार बढ़ने के बावजूद व्यापक स्तर पर श्रमिकों की वास्तविक आय, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल रोजगार सृजन के आंकड़े किसी अर्थव्यवस्था की पूरी कहानी नहीं बताते। महंगाई, आवास लागत, स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी आम श्रमिक की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। यदि मजदूरी की वृद्धि इन खर्चों की तुलना में धीमी रहती है, तो श्रमिकों की वास्तविक क्रय शक्ति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता।

कई श्रम संगठनों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र में कुछ सुधार जरूर देखने को मिले हैं, लेकिन स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी संरचनात्मक चुनौतियां अभी भी अमेरिकी श्रमिकों के सामने मौजूद हैं। इसके कारण पारंपरिक औद्योगिक नौकरियों में स्थायी वृद्धि सीमित रही है।

दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि उनकी व्यापार नीतियों, कर सुधारों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने अमेरिकी उद्योगों को मजबूती दी है। उनका कहना है कि आर्थिक लाभों का प्रभाव दीर्घकालिक होता है और कई क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम धीरे-धीरे दिखाई दे रहे हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति का मूल्यांकन केवल राजनीतिक वादों के आधार पर नहीं किया जा सकता। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, तकनीकी परिवर्तन, ऊर्जा लागत, ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां भी रोजगार और आय पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।

वर्तमान बहस यह संकेत देती है कि अमेरिकी राजनीति में श्रमिक वर्ग का मुद्दा अभी भी केंद्रीय विषय बना हुआ है। चाहे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, दोनों दलों के लिए यह वर्ग चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि अमेरिकी श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार के लिए केवल संरक्षणवादी नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए कौशल विकास, आधुनिक उद्योगों में निवेश, शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को भी समान महत्व देना होगा।

इसी वजह से ट्रंप के आर्थिक वादों और श्रमिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को लेकर बहस आने वाले समय में भी अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था का प्रमुख मुद्दा बनी रहने की संभावना है।

ईरान से तनाव और गिरती अर्थव्यवस्था ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल; लोकप्रियता 37% पर पहुंची

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर सामने आई है। एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है और उनकी कुल स्वीकृति रेटिंग (Approval Rating) घटकर अब केवल 37 प्रतिशत रह गई है।

आर्थिक नीतियों और महंगाई से जनता नाराज : सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि अमेरिकी नागरिक ट्रंप की आर्थिक नीतियों से खासे असंतुष्ट हैं। करीब 66 प्रतिशत लोगों ने उनकी आर्थिक नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उनकी रेटिंग गिरकर 34 प्रतिशत रह गई है, जबकि महंगाई के मुद्दे पर जनता ने उन्हें मात्र 27 प्रतिशत रेटिंग दी है। जीवन-यापन की लागत के मुद्दे पर उनकी लोकप्रियता सबसे कम, यानी 23 प्रतिशत पर सिमट गई है।

ईरान नीति पर भी उठे सवाल : ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और ट्रंप के रुख को लेकर भी जनता में असंतोष है। सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के उनके तरीके पर असहमति व्यक्त की है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा था कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।

रिपब्लिकन समर्थकों का भरोसा बरकरार: भले ही कुल रेटिंग में गिरावट आई हो, लेकिन अपनी पार्टी के भीतर ट्रंप का जादू अभी भी बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच उन्हें अभी भी करीब 85 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है। वहीं, आव्रजन (Immigration) और सीमा नीतियों पर उन्हें 45 प्रतिशत लोगों की मंजूरी मिली है।

सर्वेक्षण का विवरण यह सर्वेक्षण: वॉशिंगटन पोस्ट, ABC न्यूज और इप्सोस (Ipsos) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग (Disapproval Rating) बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई है, जो उनके दोनों कार्यकाल में अब तक का सबसे उच्च स्तर है।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका: IEEPA के जरिए टैरिफ लगाने पर रोक, जवाब में राष्ट्रपति ने तत्काल लागू किया 10% ग्लोबल टैरिफ

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है, जिसमें कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के उनके फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से यह फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैरिफ लगाने के लिए 1977 के इस एक्ट का इस्तेमाल करके अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, IEEPA अथॉरिटीज का इस्तेमाल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की जवाबी कार्रवाई और 10% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप ने “बहुत बुरा फैसला” करार दिया है। हालांकि, इस कानूनी शिकस्त के तुरंत बाद ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ को “तत्काल प्रभाव” से लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके लिए उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जो उन्हें 150 दिनों के लिए अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगाने की अनुमति देता है।

वित्त मंत्री ने दिया वैकल्पिक रास्तों का भरोसा : अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि भले ही IEEPA के इस्तेमाल पर रोक लगी है, लेकिन टैरिफ रेवेन्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसी वैकल्पिक कानूनी शक्तियों (Alternative Legal Authorities) का इस्तेमाल करेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इन अन्य तरीकों को अपनाने से 2026 में टैरिफ से होने वाली कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या है IEEPA कानून? इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977 में बनाया गया एक अमेरिकी संघीय कानून है। यह राष्ट्रपति को ‘नेशनल इमरजेंसी’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को रेगुलेट करने, एसेट्स फ्रीज करने और अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले देशों के साथ व्यापार पर रोक लगाने के व्यापक अधिकार देता है। अब तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसका इस्तेमाल 77 बार नेशनल इमरजेंसी घोषित करने के लिए किया है।