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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका, अपने गढ़ भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी से हारी

नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अपनी पार्टी TMC की करारी शिकस्त के बाद, मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी खुद भी चुनाव हार गई हैं। उन्हें कोलकाता की चर्चित भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों के अंतर से मात दी।

वोटों का अंतर: सुवेंदु अधिकारी को कुल 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को केवल 58,812 वोटों से संतोष करना पड़ा।

गढ़ में सेंध: भवानीपुर सीट को ममता बनर्जी का मजबूत किला माना जाता था, जहाँ से वे पहले भी जीत दर्ज कर चुकी थीं। इस बार चुनावी रुझानों में कांटे की टक्कर के बाद अंतिम राउंड्स में सुवेंदु अधिकारी ने भारी बढ़त बना ली।

मंत्रियों की हार: केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनके 9 मंत्रियों को भी इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है।

हार के कारण: माना जा रहा है कि बंगाल में सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency), कानून-व्यवस्था की स्थिति, और भाजपा की आक्रामक चुनावी रणनीति ने खेल बदल दिया। साथ ही, RSS की पर्दे के पीछे की रणनीति और स्थानीय मुद्दों ने भी भाजपा की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…4-05-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में आज की सबसे बड़ी हलचल बंगाल चुनाव के नतीजों और उसके पंजाब की राजनीति पर पड़ने वाले असर को लेकर रही। इसके साथ ही राज्य में अपराध, धार्मिक संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाबियों की उपलब्धियों से जुड़ी खबरें भी सुर्खियों में रहीं। आइए विस्तार से जानते हैं आज की 10 बड़ी खबरें।

बंगाल चुनाव का पंजाब पर राजनीतिक असर: पश्चिम बंगाल में भाजपा की एकतरफा बढ़त के बाद पंजाब की राजनीति गर्मा गई है। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्‌टू ने दावा किया है कि अब पंजाब में भी तख्तापलट होगा, जिस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पलटवार करते हुए इसे ‘शेखचिल्ली के सपने’ बताया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा बंगाल फतह करती है, तो वह पंजाब में भी सत्ता पाने के लिए अपनी पूरी ताकत और नीतियां झोंक देगी।

गुरदासपुर में मर्डर-सुसाइड की खौफनाक वारदात: गुरदासपुर में बरिंदर सिंह उर्फ बिंदा ने अपनी दूसरी पत्नी परमशील उर्फ शैली की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू कलह चल रही थी और दूसरी पत्नी ने तलाक के लिए वूमेन सेल में शिकायत भी की थी। घटना के समय उनकी दो बेटियाँ घर पर नहीं थीं और पुलिस ने मौके से एक लाइसेंसी पिस्टल बरामद की है।

शिक्षक की प्रताड़ना से छात्र का सुसाइड: फरीदकोट में BA प्रथम वर्ष के एक छात्र ने सरहिंद नहर में कूदकर जान दे दी। सुसाइड से पहले उसने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें शिक्षक को अपनी मौत का जिम्मेदार बताते हुए उसे सजा दिलाने की मांग की थी। छात्र के पिता का आरोप है कि शिक्षक ने उसे बहुत बेइज्जत किया था और उसे नहर में कूदकर मरने के लिए उकसाया था। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में ले लिया है।

AAP विधायक और गैंगस्टर के बीच फोन पर भिड़ंत: लुधियाना के पायल से विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा और गैंगस्टर डोनी बल के बीच तीखी बहस का एक वीडियो सामने आया है। गैंगस्टर ने विधायक और उनके करीबियों को जान से मारने की धमकी दी, जिसके जवाब में विधायक ने कहा कि वे धमकियों से नहीं डरते। विधायक ने इस मामले की शिकायत डीजीपी को भेजी है क्योंकि उनके करीबियों पर पहले भी फायरिंग और धमकियां दी जा चुकी हैं।

गोल्डन टेंपल में AI फोटो से धार्मिक भावनाएं आहत: स्वर्ण मंदिर की एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनित फोटो वायरल हुई है, जिसमें परिक्रमा के भीतर लोगों को चप्पल पहने और नंगे सिर दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर आपत्ति जताए जाने के बाद फोटो पोस्ट करने वाले ने माफी मांग ली है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और उनके कानूनी सलाहकार इस पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

चंडीगढ़ में मोबाइल चोरी के शक में हत्या: मनीमाजरा में नगर निगम के एक कर्मचारी कृष्ण कुमार की बेल्ट से गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में बिहार के रहने वाले एक पिता, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को शक था कि उनके दो मोबाइल फोन कृष्ण कुमार ने चुराए हैं, जिसके बाद हुई मारपीट में उसकी जान चली गई और आरोपियों ने शव को जंगल में फेंक दिया।

बिक्रम मजीठिया को फिर मिली जान से मारने की धमकी: अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप पर धमकी भरा संदेश मिला है। मैसेज में लिखा था कि “कुछ दिन और जिंदगी जी लो, ट्रेलर जल्द आने वाला है”। सुरक्षा एजेंसियां और साइबर सेल इस धमकी के स्रोत की जांच कर रहे हैं।

ट्राइडेंट समूह और प्रदूषण बोर्ड विवाद: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। ट्राइडेंट समूह ने आरोप लगाया है कि बोर्ड की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और सैंपल लेने के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया है।

कनाडा पुलिस में पंजाबी बेटी की कामयाबी: मोगा के गांव मल्लके की जसदीप कौर बराड़ को कनाडा पुलिस में ‘पीस ऑफिसर’ के रूप में चुना गया है। जसदीप के पिता, जो गांव के सरपंच हैं, ने बताया कि उनकी बेटी ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से यह मुकाम हासिल किया है, जो युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।

चंडीगढ़ की विरासत की विदेशों में नीलामी: चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर के 4 लॉट हाल ही में ब्रिटेन में करीब 21.8 लाख रुपये में नीलाम हुए हैं। इनमें पियरे जीनरेट द्वारा डिजाइन किए गए डेस्क, कुर्सियां और रैक शामिल थे। स्थानीय अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी नीलामियों को रोकने के लिए एक विशेष नीति (SOP) बनाई जाए क्योंकि यह चोरी की गई संपत्ति है।

विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल में खिला ‘कमल’, केरल में कांग्रेस की वापसी और तमिलनाडु में अभिनेता विजय का धमाका

नई दिल्ली/कोलकाता: भारत के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—के विधानसभा चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है,। 4 मई 2026 को हुई मतगणना के रुझानों और नतीजों ने कई दिग्गजों को चौंका दिया है।

1. पश्चिम बंगाल: बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘जनता की ताकत की जीत’ बताते हुए कहा कि बंगाल में अब “कमल खिल गया है” और लोगों ने सुशासन की राजनीति को चुना है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से हार का सामना करना पड़ा और उनकी पार्टी टीएमसी (TMC) राज्य में पिछड़ गई,। मतगणना के दौरान भवानीपुर केंद्र पर हंगामे की खबरें भी सामने आईं, जहाँ ममता बनर्जी ने अपने एजेंटों पर हमले का आरोप लगाया।

2. केरल: यूडीएफ (UDF) की सत्ता में वापसी केरल में शुरुआती रुझानों से ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। जीत की खबर मिलते ही तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाना शुरू कर दिया। सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) इस बार पिछड़ती नजर आई।

3. तमिलनाडु: अभिनेता विजय की पार्टी TVK का बड़ा प्रभाव तमिलनाडु के नतीजों ने सबको सबसे ज्यादा चौंकाया है, जहाँ अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कज़गम) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। शुरुआती रुझानों में TVK 96 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एआईएडीएमके (AIADMK) 62-69 सीटों के साथ दूसरे और सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) 50 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई है

4. असम: भाजपा का किला बरकरार असम में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाने के करीब है। पार्टी 126 में से 74 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटती दिख रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा, जो उनके पिता तरुण गोगोई का गढ़ मानी जाती थी।

5. पुडुचेरी: एनडीए की बढ़त केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों में से भाजपा 22 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे वहां एनडीए (NDA) की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस यहाँ भी केवल 6 सीटों तक सीमित रह गई है।

विज्ञान को प्रयोगशाला से बाजार तक लाकर भारत के आर्थिक पुनर्जागरण को मिलेगी गति : जितेंद्र सिंह

दिल्ली/सत्ता संदेश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किए गए प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है, जिसका योगदान अनुसंधान से लेकर उद्योग, स्टार्टअप और राष्ट्रीय विकास तक विस्तारित हो रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान को अब “प्रयोगशालाओं से बाजारों की ओर और विचारों से प्रभाव की ओर” बढ़ना चाहिए, जो एक नई नीतिगत दिशा को दर्शाता है जो अनुसंधान को आर्थिक परिणामों के साथ एकीकृत करती है।

अंतरिक्ष क्षेत्र के तीव्र विस्तार का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निजी कंपनियों के लिए इसे खोलने के कुछ ही वर्षों के भीतर भारत में स्टार्टअप-आधारित नवाचार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे उपग्रह प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नई क्षमताएं उभर रही हैं। ये आर्थिक विकास और राष्ट्रीय तैयारियों दोनों में योगदान दे रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उद्योग जगत और निजी क्षेत्र से अलग-थलग रहकर कोई भी देश विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति नहीं कर सकता, और उन्होंने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी खुद की प्रौद्योगिकियों का तेजी से विकास कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर सुधारों, मजबूत संस्थागत ढांचों और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ, भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम आने वाले वर्षों में देश के आर्थिक विकास और वैश्विक नेतृत्व को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

सिख संस्थाओं ने “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम” को नामंजूर किया

अमृतसर/सत्ता संदेश

पत्रकार विक्रमजीत सिंह एवं कैमरामैन तरनजीत सिंह

श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज द्वारा ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026’ तथा भाई बलवंत सिंह राजोआणा के मामलों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हेतु सिख संस्थाओं, जत्थेबंदियों, विद्वानों, कानूनी विशेषज्ञों और विचारकों की एक विशेष बैठक आज अमृतसर स्थित भाई गुरदास हॉल में आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में सिख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने विचार रखे।

बैठक में पंजाब सरकार द्वारा पारित ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026’ को लेकर सिख समुदाय में उत्पन्न आशंकाओं और आपत्तियों पर चर्चा हुई। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने बताया कि इन चिंताओं को देखते हुए पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को 8 मई 2026 को सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है।

बैठक में कई वक्ताओं ने कहा कि यह कानून सिख धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और इससे बेअदबी मामलों में दोषियों को सजा देने की बजाय सिख संस्थाओं, गुरुद्वारा प्रबंधकों, संगत और ग्रंथी सिंहों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाल दी गई हैं, जिससे सिख प्रचार-प्रसार में बाधा आएगी।

जत्थेदार गर्गज ने कहा कि खालसा पंथ की सहमति के बिना इस संशोधित कानून को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिखों से जुड़े धार्मिक मामलों में सरकार कोई भी कानून थोप नहीं सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि बेअदबी के दोषियों को सजा देने के लिए सख्त कानून बनाने का सिख पंथ विरोध नहीं करता, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में सिख भावनाओं को कानून के दायरे में लाना स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि 2015 के बेअदबी मामलों में अभी तक मुख्य दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ भी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए।

भाई बलवंत सिंह राजोआणा के मामले पर उन्होंने कहा कि सिखों के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है और केंद्र सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने बंदी सिखों और राजोआणा के समर्थन की बात कही।

बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, विभिन्न निहंग जत्थे, दमदमी टकसाल और अन्य सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में प्रस्तावित हाई-स्पीड और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर और राज्य बीओटी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की

महाराष्ट्र /सत्ता संदेश

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर, हाई-डेंसिटी कॉरिडोर और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर की समीक्षा की।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज नई दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण राजमार्ग विकास परियोजनाओं पर चर्चा की, जिनमें नागपुर-भंडारा खंड का छह लेन का निर्माण, तलोदा-बुरहानपुर खंड का चार लेन का निर्माण, दुर्ग-गडचिरोली-मंचरियाल कॉरिडोर, गडचिरोली-कांकेर (रायपुर-विशाखापत्तनम) कॉरिडोर, ग्वालियर-नागपुर कॉरिडोर, नागपुर-हैदराबाद कॉरिडोर, भंडारा-रायपुर खंड का छह लेन का निर्माण, लखनादोन-दुर्ग-रायपुर कॉरिडोर, नागपुर-अमरावती खंड का छह लेन का निर्माण, एनएच-44 पर मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा-नागपुर बाईपास-बोरखेड़ी खंड और पुणे-सतारा खंड का छह लेन का निर्माण शामिल है।

समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर 527 किमी की कुल लंबाई को कवर करने वाली नौ राज्य निर्माण-परिचालन-हस्तांतरण (बीओटी) परियोजनाओं पर भी चर्चा शामिल थी। इन परियोजनाओं में शिरूर-अहिल्यानगर (4-लेन), अहिल्यानगर-वडाला (4-लेन), वडाला-छत्रपति संभाजीनगर (4-लेन), छत्रपति संभाजीनगर-जालना (4-लेन), जालना-वातूर (4-लेन), नांदेड़-नरसी-डेगलुर (4-लेन और 2-लेन), जाम-वरोरा (4-लेन), वरोरा-चंद्रपुर-बामनी (4-लेन) और मलकापुर-चिखली (2-लेन) गलियारे शामिल हैं।

इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में सड़क संपर्क को मजबूत करने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन में तेजी लाना था।

प्रभबीर सिंह बरार की अपील: जनगणना-2027 में पंजाबी को मातृभाषा दर्ज करें, डिजिटल प्रक्रिया अपनाएं

अमृतसर / सत्ता संदेश

संवाददाता- विक्रमजीत सिंह कैमरामैन- तरजिंदर सिंह

पनसप के चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़ ने आम जनता से जनगणना-2027 में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय जनगणना के सटीक आंकड़ों पर निर्भर करते हैं।

बराड़ ने कहा कि राज्य के विकास से संबंधित कई अहम फैसले जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे बड़ी संख्या में आगे आएं और पंजाबी को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराएं, ताकि उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 का पहला चरण “मकानों की सूचीकरण एवं आवास गणना” है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना प्रक्रिया सरल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित है, जो लोगों को डिजिटल जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करती है।

चेयरमैन बराड़ ने लोगों से इस तकनीक-आधारित प्रक्रिया को अपनाने और सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल से 14 मई तक उपलब्ध स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और एक व्यापक एवं विश्वसनीय राष्ट्रीय डाटाबेस के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि प्रभावी योजना निर्माण और नीति निर्धारण के लिए मजबूत डाटाबेस अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि जनगणना के प्रमाणिक आंकड़े सुशासन की रीढ़ होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कल्याणकारी योजनाएं, बुनियादी ढांचे का विकास और संसाधनों का समान वितरण समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत 15 मई से 13 जून, 2026 तक घर-घर सर्वेक्षण भी किया जाएगा। इस दौरान आवासीय स्थिति, सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित 33 प्रश्न पूछे जाएंगे तथा प्रत्येक घर की गणना की जाएगी, ताकि कोई भी परिवार इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान से वंचित न रह जाए।

पंजाब सरकार की बड़ी पहल: 16 जिलों में खरीफ मक्का विविधीकरण योजना, किसानों को 17,500 प्रति हेक्टेयर सहायता

अमृतसर/सत्ता संदेश

संवाददाता-विक्रमजीत सिंह/ कैमरामैन- तरजिंदर सिंह

पानी की अधिक खपत करने वाली धान की फसल से किसानों को बाहर निकालकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वर्ष 2026–27 के लिए खरीफ मक्का विविधीकरण योजना को 6 जिलों से बढ़ाकर 16 जिलों तक लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

यह निर्णय वर्ष 2025–26 के खरीफ सीजन के दौरान छह जिलों में लागू किए गए पायलट प्रोजेक्ट को किसानों से मिले भारी समर्थन के बाद लिया गया है। यह कदम किसानों को धान से मक्का की खेती की ओर प्रेरित कर राज्य में गिरते भूजल स्तर को रोकने की दिशा में एक “निर्णायक कदम” माना जा रहा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला योजना समिति, अमृतसर के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह संधू ने बताया कि इस योजना के तहत अमृतसर, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, पटियाला, पठानकोट, रूपनगर, संगरूर, एसएएस नगर, एसबीएस नगर और तरनतारन जिलों में 20,000 हेक्टेयर (50,000 एकड़) क्षेत्र को खरीफ मक्का के अधीन लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी किसानों को प्रति हेक्टेयर 17,500 की सब्सिडी दी जाएगी।

कुल राशि में से 4,500 इनपुट बिल ब्लॉक कृषि कार्यालय में जमा कराने पर जारी किए जाएंगे, जबकि शेष 13,000 अनिवार्य जियो-टैग्ड फसल सत्यापन के बाद दो किस्तों में दिए जाएंगे।

राज्य के बहुमूल्य भूजल संसाधनों के संरक्षण के लिए किसानों से खरीफ मक्का की बुवाई करने की अपील करते हुए चेयरमैन संधू ने कहा कि इच्छुक किसान सरकारी वेबसाइट https://agrimachinerypb.com पर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए अनिवार्य रूप से जे-फॉर्म और खेत की जियो-टैगिंग आवश्यक होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसान ने पिछले वर्ष धान की खेती की थी और इस वर्ष मक्का की ओर रुख कर रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि उन्नत किसान पोर्टल के माध्यम से सत्यापन दो चरणों में किया जाएगा — पहला 15 जुलाई से 25 जुलाई तक तथा दूसरा चरण 5 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक होगा। प्रत्येक सत्यापन के बाद जिला मुख्य कृषि अधिकारी द्वारा 9,500 और 7,500 प्रति हेक्टेयर जारी किए जाएंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजीकरण से लेकर सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और पात्र किसानों को समय पर सब्सिडी मिल सके।

उन्होंने कहा कि धान-गेहूं का पारंपरिक फसली चक्र अब टिकाऊ नहीं रहा। यह योजना केवल फसल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्मार्ट, संवहनीय, बेजोड़: टेक्निकल टेक्सटाइल इस तरह बुन रहे हैं फुटवियर में भारत का भविष्य
  • श्री ​गिरिराज सिंह

आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ उत्पादन में आत्मनिर्भरता ही नहीं, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में नेतृत्व भी हासिल करना है। कुछेक क्षेत्रों ने ही इस अवसर का फुटवियर की तरह स्पष्ट रूप से उपयोग किया है। फुटवियर रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली सबसे आम वस्तुओं में से एक है। इसका इस्तेमाल स्कूली बच्चों, लंबी पाली में काम करने वाले कामगारों और लगातार भागमभाग कर सामान की डिलीवरी करने वालों से लेकर अपनी शारीरिक सीमाओं से आगे जाने वाले एथलीट तक करते हैं। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक है। इसके बावजूद वैश्विक फुटवियर निर्यात में हमारी हिस्सेदारी बहुत कम है।

यह अंतर क्षमता की कमी के कारण नहीं, बल्कि मटेरियल (सामग्री), डिजाइन और कार्य प्रदर्शन के प्रति दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता के कारण है। इस बदलाव के केंद्र में एक ऐसी श्रेणी भी है जिस पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता, वह है-तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल)। मैंने इसे हाल ही में अपनी आगरा यात्रा के दौरान और अधिक स्पष्टता से समझा। आगरा अपने जूतों और चप्पल के लिए जाना जाता है। वहां के उत्पादन समूहों में घूमते हुए और निर्माताओं से बातचीत करते हुए यह स्पष्ट हो गया कि वहां इनके उत्पादन में  नवाचार पहले से ही किया जा रहा है। कई इकाइयाँ ऐसी सामग्रियों का उपयोग कर रही थीं जो बहुत आरामदायक, टिकाऊ और नरम जूते बना रही हैं। लेकिन इनमें से कइयों ने इन्हें टेक्निकल टेक्सटाइल के रूप में नहीं बताया। उन सब ने इन्हें सिर्फ ऐसे बेहतर आदानों के रूप में देखा जो उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को पूरा करते हैं।

दिल्ली में फुटवियर संघ के साथ हुई एक बैठक के दौरान यह समझ और गहरी हुई। उद्योग जगत के हितधारकों ने उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं के बारे में बताया, जैसे उपभोक्ता अब हलके, बेहतर कुशनिंग वाले, हवादार और टिकाऊ जूते पसंद करते हैं। ये अब केवल महंगे उत्पादों की विशेषताएं नहीं रह गई, बल्कि मानक ज़रूरतें बनती जा रही थीं। इसी चर्चा के दौरान मेरे विभाग ने एक महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला: फुटवियर उद्योग पहले से ही टेक्निकल टेक्सटाइल का व्यापक रूप से उपयोग कर रहा है, भले ही इसे औपचारिक रूप से मान्यता न दी गई हो।

उस अहसास ने पूरी चर्चा का स्वरूप ही बदल दिया। वैश्विक स्तर पर, फुटवियर उद्योग सालाना लगभग 23.9 बिलियन जोड़ी जूतों का उत्पादन करता है, जिसका बाजार आकार करीब 500 बिलियन अमरीकी डॉलर है। भारत वैश्विक उत्पादन में लगभग 12.5 प्रतिशत का योगदान देता है, फिर भी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत है। यह आंकड़ा हमारी क्षमता और वैश्विक स्थिति के बीच के स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। साथ ही, दुनिया भर के लगभग 86 प्रतिशत फुटवियर ‘नॉन-लेदर’ (गैर-चमड़ा) हैं, जबकि भारत का उद्योग परंपरागत रूप से चमड़े पर केंद्रित रहा है।

देश में भी स्थिति तेजी से बदल रही है। साल 2025 में भारतीय फुटवियर बाजार का आकार 20.67 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँच गया, जो बढ़ती आय और उपभोक्ता की बदलती प्रवृत्तियों को दर्शाता है। हालाँकि, एक औसत भारतीय अभी भी साल भर में लगभग 2 जोड़ी जूते ही खरीदता है, जबकि वैश्विक औसत 7 से 8 जोड़ी का है। जैसे-जैसे खरीदने की क्षमता बढ़ेगी, उपभोक्ताओं की पसंद ‘आराम’ और ‘बेहतर प्रदर्शन’ होगी। इसे देखते हुए  घरेलू बाजार का विस्तार और भी व्यापक होने की उम्मीद है।

यही वह बिंदु है जहाँ तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल) विकास के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण बन जाते हैं। वस्त्र मंत्रालय में, इस परिवर्तन को ‘स्मार्ट, टिकाऊ और निर्बाध’ फ्रेमवर्क के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘स्मार्ट’ फुटवियर’ तकनीक और डिजाइन के बढ़ते एकीकरण को दर्शाते हैं। डिजिटल टूल्स, एआई आधारित मॉडलिंग और फुट स्कैनिंग के माध्यम से अब बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप समाधान संभव हो पा रहे हैं। यह रुझान व्यापक रूप से उपभोक्ताओं की जरूरतों और फैशन के अनुरूप है। वर्ष 2025 में, भारत में 28.9 मिलियन स्मार्टवॉच की बिक्री दर्ज की गई, जिससे 780 मिलियन अमरीकी डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। यह उन उत्पादों के प्रति बढ़ती पसंद को दर्शाता है जो दैनिक उपयोग के साथ-साथ आज के समय के अनुरूप भी हों। स्नीकर (हलके रबड़ के जूते) श्रेणी  के जूते इस बदलाव को और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। अनुमान है कि यह वर्ष 2024 के 3.2 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक यह लगभग 6 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँच जायेंगे, जिसमें इसकी मात्रा 55 मिलियन जोड़ी से बढ़कर 70 मिलियन जोड़ी हो जाएगी। उपभोक्ता स्पष्ट रूप से ऐसे फुटवियर खरीद रहे हैं जो ‘आरामदायक’ हों और ‘देखने में भी सुन्दर’ हों और यहीं पर ‘तकनीकी वस्त्र’ एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

संवहनीयता भी एक निर्णायक कारक बनता जा रहा है। “पुनर्चक्रित पीईटी प्लास्टिक और ‘बायोडिग्रेडेबल’  फाइबर जैसे पदार्थ धीरे-धीरे उत्पादन की मुख्यधारा में प्रवेश कर रहे हैं। भारत के लिए, यह न केवल एक पर्यावरणीय अनिवार्यता है, बल्कि वैश्विक बाजारों में खुद को संवहनीय सामग्री के आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक रणनीतिक अवसर भी है। इसी तरह, ‘निर्बाध विनिर्माण’ की दिशा में बढ़ते कदम भी परिवर्तनकारी साबित हो रहे हैं। 3डी बुनाई और उन्नत निर्माण जैसी तकनीकें कचरे को कम कर रही हैं, दक्षता में सुधार कर रही हैं और उत्पादन चक्र को तेज कर रही हैं। इससे निर्माता निरंतरता और गुणवत्ता बनाए रखते हुए उपभोक्ता की बदलती मांगों के प्रति अधिक प्रभावी ढंग से उत्पादन करने में सक्षम हो रहे हैं।

इस बदलाव को और भी मज़बूत बनाने वाली बात है भारत के मौजूदा इकोसिस्टम का पैमाना। फुटवियर उद्योग में पहले से ही 20 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिला हुआ है, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत महिलाएँ हैं; इस वजह से यह समावेशी रोज़गार का एक बड़ा ज़रिया बन गया है। लगभग 2.9 अरब जोड़ी जूतों के सालाना उत्पादन के साथ, भारत में प्रति श्रमिक उत्पादकता लगभग 4 से 5 जोड़ी प्रतिदिन है। इसकी तुलना में, वैश्विक उत्पादन में कहीं ज़्यादा दक्षता देखने को मिलती है, जहाँ मज़दूर प्रतिदिन लगभग 17 से 20 जोड़ी जूते बनाते हैं। आगरा, कानपुर, चेन्नई, रानीपेट, अंबूर और कोलकाता में स्थापित क्लस्टर्स न केवल उत्पादन के केंद्र हैं, बल्कि वे आधार भी हैं जिन पर भारत फुटवियर क्षेत्र में अपनी दक्षता, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक नेतृत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

टेक्निकल टेक्सटाइल की ओर यह बदलाव किसी नए उद्योग को खड़ा करने के बारे में नहीं है, बल्कि एक मौजूदा उद्योग की पूरी क्षमता को उजागर करने के बारे में है। आगरा की यात्रा और दिल्ली में हुई चर्चाओं से एक सरल लेकिन प्रभावशाली अंतर्दृष्टि सामने आई—फुटवियर में टेक्निकल टेक्सटाइल कोई उभरती हुई अवधारणा नहीं है। वे पहले से ही इस उद्योग का हिस्सा हैं और चुपचाप फुटवियर उत्पादों को बनाने और तैयार करने में बेहतर योगदान कर रहे हैं।

आगे का काम इस एकीकरण को पहचानना, व्यवस्थित करना और इसका विस्तार करना है। फुटवियर क्षेत्र को टेक्निकल टेक्सटाइल्स इकोसिस्टम के दायरे में और ज़्यादा स्पष्ट रूप से लाने से नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है, निर्यात बढ़ सकता है और उच्च गुणवत्ता वाले रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को वैश्विक मांग के रुझानों के साथ, खासकर नॉन-लेदर और परफॉर्मेंस-आधारित श्रेणियों में, तालमेल बिठाने में भी मदद मिल सकती है।

वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनने की भारत की यात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि वह पारंपरिक उद्योगों, उन्नत सामग्रियों और आधुनिक डिजाइन के संगम का कितनी प्रभावी ढंग से लाभ उठाता है। फुटवियर ऐसा ही एक संगम है। ‘टेक्निकल टेक्सटाइल’ वह सूत है  जो इस अवसर को एक वैश्विक सफलता की कहानी में पिरोने में मदद कर सकता है।

(लेखक केंद्रीय वस्त्र मंत्री हैं। लेख में व्यक्त लेखक के निजी विचार हैं)

अमृतसर: बिक्रमजीत सिंह पुरेवाल ने जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी का कार्यभार संभाला

अमृतसर/ सत्ता संदेश

संवाददाता-विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन-तरजिंदर सिंह

बिक्रमजीत सिंह पुरेवाल ने सोमवार 3 मई को जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी, अमृतसर के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। इससे पूर्व वे जिला तरनतारन में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

कार्यभार संभालने के उपरांत पुरेवाल ने कहा कि वे सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें समय पर लाभ उपलब्ध करवाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्री पुरेवाल का स्वागत किया तथा उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।