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परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रव्यापी अग्नि सुरक्षा सप्ताह का किया शुभारंभ

दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा वातावरण सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से, 4 मई से 10 मई,  तक राष्ट्रव्यापी अग्नि सुरक्षा सप्ताह का आयोजन शुरू किया।

इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधा अग्नि सुरक्षा” विषय पर राष्ट्रव्यापी संकल्प समारोह के साथ किया गया, जिसमें अग्नि निवारण, तैयारी और प्रत्युत्तर प्रणालियों को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों और हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अग्नि सुरक्षा सप्ताह मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर का पुनर्मूल्यांकन करने, सुविधाओं के पर्याप्त ऑडिट का आकलन करने और उन कमियों और खामियों की पहचान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पेशेवरों को अग्नि आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सरकारी संस्थानों सहित पांच लाख अधिक प्रतिभागी पहले ही आईजीओटी अग्नि सुरक्षा पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं और उन्होंने इस तरह के प्रयासों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।

एनडीएमए के सदस्य और प्रमुख कृष्ण एस. वत्सा ने स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा के लिए एक सक्रिय, प्रणाली-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर, मंत्रालय ने स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि और जीवन सुरक्षा संबंधी राष्ट्रीय दिशानिर्देश (2026) का आधिकारिक रूप से शुभारंभ भी किया। ये दिशानिर्देश विभिन्न प्रमुख संस्थानों और अस्पतालों के विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से विकसित किए गए हैं, जो स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक मजबूत और व्यापक ढांचा सुनिश्चित करते हैं।

तकनीक आधारित युग में भविष्य के लिए अनुसंधान और नवाचार जरुरी : राजनाथ सिंह

दिल्ली/सत्ता संदेश

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीव्र तकनीकी क्रांति के वर्तमान युग में भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और अप्रत्याशित नवाचार की रणनीति अपनाने के महत्व पर बल दिया। रक्षामंत्री ने 4 मई को प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह विचार व्‍यक्‍त किए।

उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में, युद्ध का स्वरूप महज तीन-चार सालों में टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन और सेंसर जैसे क्रांतिकारी उपकरणों में परिवर्तित हो गया। इसके अलावा, दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी वस्‍तुएं भी घातक हथियार बनती जा रही हैं।

रक्षामंत्री ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को आवंटित किया गया है और अब तक इन संस्थाओं ने बजट का 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की एक नई नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत विकास-सह-उत्पादन साझेदारों, विकास साझेदारों और उत्पादन एजेंसियों के लिए पहले लगने वाला 20 प्रतिशत शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, डीआरडीओ ने अब तक विभिन्न उद्योगों को 2,200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं।

रक्षा मंत्री ने रक्षा त्रिवेणी संगम- जहां प्रौद्योगिकीउद्योग और सैन्य शक्ति का संगम होता है विषय पर आधारित नॉर्थ टेक संगोष्ठी को नवाचार को बढ़ावा देने और भारत की तकनीकी एवं रक्षा तैयारियों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी हितधारकों को अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने में सक्षम बनाने के लिए ठोस सुझावों की आशा व्‍यक्‍त की। उन्होंने हितधारकों को विशेषज्ञता साझा करने और उभरते एवं अनछुए क्षेत्रों में सामूहिक रूप से क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए एक ज्ञान गलियारे के निर्माण का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारा सामूहिक प्रयास है कि हम आने वाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करें।

संगोष्ठी के भाग के रूप में, एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों, निजी रक्षा प्रौद्योगिकी फर्मों, स्टार्टअप्स और वर्दीधारी नवोन्मेषकों सहित विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत स्वदेशी समाधानों को प्रदर्शित किया गया। 284 कंपनियों ने अपने नवीनतम नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए।

भारत–कंबोडिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-II 2026’ के लिए भारतीय सेना का दल रवाना

दिल्ली/सत्ता संदेश

भारतीय सेना का दल भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के दूसरे संस्करण – ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ – के लिए रवाना हो गया है। यह अभ्यास 04 से 17 मई तक कंबोडिया साम्राज्य के कंम्पोंग स्पेयू प्रांत स्थित टेको सेन फ्नोम थॉम म्रीस प्रॉव रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अध्याय 7 के ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जाएगा, जिसमें उप-पारंपरिक वातावरण में अभियानों के संचालन हेतु कंपनी स्तर का संयुक्त प्रशिक्षण प्रदर्शित किया जाएगा।

भारतीय सेना के दल में 120  सैन्‍यकर्मी हैं, जिनमें अधिकांश मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। कंबोडियाई दल 160 कार्मिकों का है, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।

यह संयुक्त अभ्यास उन आतंकवाद-रोधी अभियानों की वर्तमान कार्य-प्रक्रिया के अनुरूप होगा, जिनका सामना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के दौरान शांति-रक्षक बलों द्वारा किया जाता है । अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार तथा स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के दलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता, समन्वय तथा परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करना है।

संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ भारत–कंबोडिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को प्रतिबिंबित करता है और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक समझ को सुदृढ़ करते हुए दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।

सब इंस्पेक्टर धर्मपाल बने ERS ज़ोन-3 के इंचार्ज, ट्रैफिक व इमरजेंसी सेवाएं होंगी और मजबूत

लुधियाना/सत्ता संदेश

  • शहर के इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (ERS) को मजबूत करने के लिए सब इंस्पेक्टर धर्मपाल को ज़ोन-3 का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे ज़ोन-4 में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और अपनी ईमानदारी व कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
  • नव-नियुक्त ज़ोन इंचार्ज धर्मपाल ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण, सुचारू यातायात व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को तेज़ करना रहेगी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम 24 घंटे मुस्तैद रहेगी और किसी भी इमरजेंसी में तुरंत मौके पर पहुंचकर सहायता प्रदान करेगी।
  • उन्होंने विशेष रूप से एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को बिना बाधा रास्ता दिलाने पर जोर दिया। साथ ही आम जनता से ट्रैफिक नियमों का पालन करने और पुलिस का सहयोग करने की अपील की।

उच्च अधिकारियों द्वारा लुधियाना जिले के इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (ERS) ज़ोन 3 में सब इंस्पेक्टर धर्मपाल को इंचार्ज नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति शहर में ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा इमरजेंसी सेवाओं को तेज़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई है।
सब इंस्पेक्टर धर्मपाल इससे पहले भी लुधियाना में ई.आर.एस. ज़ोन 4 में अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा चुके हैं। इसके अलावा वह जिले के विभिन्न थानों और पुलिस चौकियों में ड्यूटी करते हुए अपनी ईमानदारी, काबिलियत और जिम्मेदारी के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति से ज़ोन 3 में ट्रैफिक प्रबंधन और इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सब इंस्पेक्टर धर्मपाल ने अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों द्वारा दी गई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ज़ोन में ट्रैफिक की समस्या को कम करना, जाम की स्थिति पर तुरंत काबू पाना और लोगों को सुचारू यातायात सुविधा प्रदान करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम 24 घंटे सतर्क रहेगी और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर सहायता प्रदान करेगी। खास तौर पर अस्पतालों की ओर जाने वाले इमरजेंसी वाहनों, जैसे एंबुलेंस आदि को बिना रुकावट रास्ता दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने आम जनता से अपील की कि ट्रैफिक नियमों का पालन करें, गैर-कानूनी पार्किंग से बचें और सड़कों पर अनुशासन बनाए रखने में पुलिस का सहयोग दें। उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग से ही ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकता है।

एग्री स्टैक: किसानों के लिए डिजिटल क्रांति, खेती को मिलेगा स्मार्ट और पारदर्शी सिस्टम

दिल्ली/ सत्ता संदेश

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। इस क्षेत्र में कुल श्रमशक्ति का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा जुटा हुआ है। पिछले दशक में सरकार की ओर से उत्पादन/उत्पादकता बढ़ाने, फसलों के विविधीकरण, खेती की लागत में कमी लाने, कृषि उत्पादों की बेहतर कीमत अर्जित करने, जलवायु के अनुकूल ढालने और जोखिमों को कम करने की बहुआयामी रणनीति के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के ठोस प्रयास किए गए हैं।

केन्द्र प्रायोजित या केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाओं के जरिए किसानों को विभिन्न सेवाओं या लाभों की निर्बाध, पारदर्शी और कुशल आपूर्ति संघीय या राज्य स्तर की सरकार की प्राथमिकता है। कुल कृषि भूमि का स्वामित्व और उस भूमि पर बोई गई फसलों का इतिहास किसी भी योजना के लाभ के लिए किसी भी किसान (चाहे वह मालिक हो, पट्टेदार हो या फिर बटाईदार हो) की पात्रता के आकलन की जरूरी शर्त है। हालांकि, देश भर में भूमि से संबंधित प्रशासन में पायी जाने वाली व्यापक भिन्नताएं एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।

स्वामित्व और बुवाई से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को संकलित करने वाले एक मानकीकृत किसान डेटाबेस के महत्व एवं जरूरत को पहचानते हुए, सरकार ने वर्ष 2024 में डिजिटल कृषि मिशन की शुरुआत की। किसानों के इस डेटाबेस को मजबूत सहमति तंत्र के साथ गतिशील रूप से अद्यतन किया जाता है। एग्री स्टैक, इस डिजिटल कृषि मिशन का एक प्रमुख स्तंभ है। यह अब इस मिशन के एक मौन लेकिन सशक्त परिवर्तनकारी स्तंभ के रूप में उभर रहा है। इसमें तीन विवरणी (रजिस्ट्री) – खेत, किसान और बोई गई फसल – शामिल हैं। एग्री स्टैक भारत की कृषि से जुड़ी यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत का इशारा करता है। एक ऐसा अध्याय, जो माननीय प्रधानमंत्री के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लक्ष्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

खेत वाली रजिस्ट्री में भौगोलिक संदर्भों के आधार पर कृषि भूखंडों का डेटाबेस शामिल होता है। इनमें से प्रत्येक भूखंड को एक अनूठी कृषि आईडी प्रदान की जाती है। दूसरी परत में, प्रत्येक भूमि के मालिक किसान को एक अनूठी फार्म आईडी प्रदान की जा रही है। इस आईडी में स्वामित्व वाली प्रत्येक भूखंड से संबंधित जरूरी जानकारियों के साथ-साथ सह-स्वामित्व के मामले में हिस्सेदारी का उल्लेख भी शामिल है। यह डेटा अधिकार अभिलेख (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) से गतिशील रूप से जुड़ा हुआ है ताकि विरासत, बिक्री आदि के कारण स्वामित्व में हुआ कोई भी बदलाव किसान रजिस्ट्री में अद्यतन हो जाए। तीसरी परत में प्रत्येक भूखंड पर बोई गई फसल का विवरण शामिल होता है। यह विवरण बुवाई पूरी होने के बाद प्रत्येक फसल के मौसम में किए गए डिजिटल/तकनीक आधारित फसल सर्वेक्षण के जरिए हासिल किया जाता है।

केन्द्र सरकार ने विभिन्न समझौता ज्ञापनों के जरिए 35 राज्यों और केन्द्र- शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी की है। इस डिजिटल मिशन को केन्द्र और राज्य के बीच मजबूत सहयोग के जरिए कार्यान्वित किया जा रहा है। इसमें पूर्ण समावेशन सुनिश्चित करते हुए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

एग्री स्टैक एक संघीय डेटाबेस है जिसका स्वामित्व राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के पास है, लेकिन केन्द्र सरकार सेवाओं की आपूर्ति और डेटा विश्लेषण के लिए इसका उपयोग कर सकती है। इसका उद्देश्य प्रत्येक किसान के लिए एक सत्यापित डिजिटल पहचान बनाना, उस पहचान को सटीक रूप से मैप किए गए भूखंड से जोड़ना और प्रत्येक मौसम में उगाई जाने वाली फसलों को दर्ज करना है। यह स्टैक नियमों पर आधारित एवं स्वचालित सेवा वितरण को विभिन्न योजनाओं और भौगोलिक क्षेत्रों में संभव बनाता है। इससे किसानों को बार-बार अपनी पहचान, भूमि स्वामित्व या फसल के विवरण को साबित करने की जरूरत नहीं होती है। इसमें गोपनीयता और डेटा संरक्षण संबंधी कानूनों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए किसानों से संबंधित जानकारी तक पहुंच एक मजबूत सहमति तंत्र के जरिए होती है।

कागजी रिकॉर्ड से डिजिटल आधार तक

दशकों तक, कृषि संबंधी प्रशासन कागजी अभिलेखों और मैनुअल सर्वेक्षण पर बहुत अधिक निर्भर रहा। यह अक्सर नागरिकों के लिए उत्पीड़न और भ्रष्टाचार का कारण बनता था। एग्री स्टैक इस पुरानी परंपरा से हटकर एक क्रांतिकारी बदलाव लाता है। किसानों की पहचान का  डिजिटलीकरण करके और उन्हें भूमि एवं फसल के आंकड़ों से जोड़कर, यह भारतीय कृषि की एक विश्वसनीय और नई तस्वीर पेश करता है।

अब तक 9 करोड़ से अधिक किसान आईडी का सृजन इस सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये डिजिटल आईडी एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। इससे किसानों को बार-बार सत्यापन के बिना कई सेवाओं का लाभ उठाने में मदद मिलती है और लेन-देन की लागत कम हो जाती है। सरकारी एजेंसियों की दृष्टि से, ये आईडी लाभार्थियों की पहचान में होने वाली त्रुटियों को कम करते हैं और लाभ का सही लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित करने में सहायक साबित होते हैं।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि एग्री स्टैक की शुरुआत मुख्य रूप से किसानों को विभिन्न योजनाओं के लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के इरादे से की गई है, लेकिन यह भूमि के रिकॉर्ड या भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र की जगह नहीं लेगा। भले ही अधिकार अभिलेख (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) के साथ इसका जुड़ाव प्रामाणिकता सुनिश्चित करता हो।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण: फसल की वास्तविक जानकारी

वर्ष 2025-26 में, 24 राज्यों ने 600 से अधिक ज़िलों में लगभग 30 करोड़ भूखंडों पर मोबाइल उपकरणों, जियोटैगिंग और सैटेलाइट की मदद से डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण पारंपरिक विधियों से हटकर एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पारंपरिक विधियां अक्सर धीमी होती थीं और उनमें विसंगतियों या त्रुटियों की गुंजाइश अधिक रहती थी।

यह डेटा उपज का अनुमान लगाने, खरीद की योजना बनाने और बाजार से संबंधित पूर्वानुमान लगाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। यह सूखे, बाढ़ या कीटों के कारण फसल पर पड़ने वाले दबाव की शीघ्र पहचान करके आपदा की तैयारी को भी ठोस बनाता है। किसानों के लिए, बेहतर डेटा समय पर एवं फसल-विशेष से जुड़ी सलाह और गड़बड़ होने पर त्वरित सहायता प्रदान करता है।

सहयोग एवं समावेशन पर आधारित इकोसिस्टम

देश भर में भूमि से जुड़े प्रशासन में मौजूद विविधता को ध्यान में रखते हुए, इस संरचना में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इसे अनुकूलित करने का अंतर्निहित लचीलापन है। साथ ही, अंतरसंचालनीयता सुनिश्चित करने हेतु सामान्य मानकों को बनाए रखा गया है ताकि राज्यों और केंद्रीय प्रणालियों के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान संभव हो सके।

उदाहरण के तौर पर, कुछ ऐसे राज्य हैं जहां दशकों से भूमि के रिकॉर्डों को अद्यतन नहीं किया गया है और पूर्वजों के नाम अभी भी दर्ज हैं। भूमि के रिकॉर्डों को अद्यतन करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच, मृतक मालिकों के नाम पर दर्ज भूमि पर खेती करने वाले उत्तराधिकारी किसानों को राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन के बाद किसान आईडी जारी किया जा सकता है ताकि लाभों की निरंतरता सुनिश्चित हो सके।

जहां भी राज्य के कानून अनुमति देते हैं और राज्य सहमत होते हैं, वहां मजबूत स्वामी-प्राधिकरण तंत्र के साथ, बटाईदारों और किरायेदार किसानों को भी विशिष्ट योजना के लाभों को हासिल करने के लिए शामिल किया जा सकता है।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां सामुदायिक स्वामित्व का वर्चस्व है, भू-निर्देशांक-आधारित प्रमाणीकरण प्रथागत रीति-रिवाजों को बाधित किए बिना समावेशन की अनुमति देता है।

इससे किसानों को कैसे लाभ होगा?

किसानों के लिए, डिजिटल व्यवस्था का मतलब है कम फॉर्म भरना, स्थानीय कार्यालयों में कम चक्कर लगाना और सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं तक पहुंचने में अधिक पारदर्शिता। भूमि के स्वामित्व और फसलों के इतिहास के अद्यतन विवरणों वाले विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड बैंकों और बीमाकर्ताओं को जोखिम का आकलन करने और किसानों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में समर्थ बनाते हैं।

एग्री स्टैक में किसान संगठनों को मजबूत करने की क्षमता है। सत्यापित डेटा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को उपज एकत्रित करने, बेहतर कीमतों के लिए बातचीत करने और कार्यशील पूंजी तक अधिक आसानी से पहुंच हासिल करने में मदद कर सकता है।

भूमि से जुड़े डेटा को फसलों की बुवाई और मिट्टी की सेहत से संबंधित विवरणों से लैस करने से कृषि के विस्तार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है, क्योंकि अब किसानों की जरूरतों  के अनुरूप सलाह तैयार और प्रसारित की जा सकती है। वह भी बहुत कम लागत पर। किसान स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बुवाई के सर्वोत्तम समय, सिंचाई कार्यक्रम, पोषक तत्वों के प्रयोग और कीट प्रबंधन के बारे में व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

प्रशासन और नीतिगत प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

एग्री स्टैक शासन की प्रक्रियाओं में सुधार लाने और साक्ष्य-आधारि व डेटा-संचालित नीति निर्माण को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रावधान के कारण नीति निर्माताओं के पास फसल पैटर्न पर नजर रखने, आपूर्ति और मांग के बीच के अंतर का अनुमान लगाने और मूल्य अस्थिरता को रोकने के लिए समय पर हस्तक्षेप करने हेतु सटीक और समय पर डेटा उपलब्ध होता है।

एक बार किसान की पहचान, भूमि के स्वामित्व और बोई गई फसल का डिजिटल सत्यापन हो जाने के बाद, नकद या वस्तु के रूप में सब्सिडी वितरण, फसल बीमा, खरीद या ऋण आदि से संबंधित लेनदेन डिजिटल रूप से सुचारू रूप से किए जा सकते हैं। आधार-आधारित भुगतान गेटवे लाभ को सही लाभार्थी तक पहुंचना सुनिश्चित करते हैं। यह संशोधित प्रणाली सार्वजनिक व्यय का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती है।

यह देखा गया है कि केन्द्र और राज्य स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों और कुछ मामलों में तो एक ही मंत्रालय के विभिन्न विभागों ने भी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अपने-अपने किसान डेटाबेस विकसित किए हैं। एग्री स्टैक एक साझा लेकिन सार्वभौमिक डिजिटल माध्यम विकसित करके इस तरह के स्व-निर्मित डेटाबेस की सीमाओं को तोड़ता है ताकि कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारी समितियां, राजस्व, खाद्य, उर्वरक, ऋण और बीमा प्रणालियां एक ही सत्यापित डेटा का उपयोग करके कार्य कर सकें। इससे न केवल परिचालन संबंधी दक्षता बेहतर होती है, बल्कि किसानों पर विभिन्न योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के लिए कई पोर्टलों पर पंजीकरण करने का बोझ भी कम होता है।

कई राज्यों ने एग्री स्टैक के उपयोग को सफलतापूर्वक लागू किया है। छत्तीसगढ़ ने पिछले खरीफ सीजन के दौरान एमएसपी आधारित धान की खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण सुचारू रूप से करने हेतु एग्री स्टैक का उपयोग किया। मध्य प्रदेश ने पीएमएएसएचए के तहत सोयाबीन किसानों को मूल्य घाटे के आधार पर सहायता प्रदान करने हेतु इस डेटाबेस का उपयोग किया। महाराष्ट्र आपदा राहत सहित अपने सभी डीबीटी आधारित लाभों के लिए एग्री स्टैक का उपयोग कर रहा है।

नवाचार को प्रोत्साहित करना

एग्रीस्टैक की खुली और मानकीकृत संरचना नवाचार के लिए एक इकोसिस्टम प्रदान करता है। खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के लिए। जैसे-जैसे यह स्टैक परिपक्व होता जाता है, स्टार्टअप के लिए फसलों से जुड़े डेटा, मौसम संबंधी पूर्वानुमान और बाजार की कीमतों को उपयोगकर्ता के अनुकूल टूल में संयोजित करने वाले एप्लिकेशन बनाने के अवसर खुलते जाते हैं।

माननीया वित्त मंत्री ने अपने हालिया सार्वजनिक भाषणों में एग्री स्टैक को “भारत की अगली बड़ी उपलब्धि” और “यूपीआई जैसी अगली क्रांति” के रूप में पेश किया है। भारत आत्मनिर्भरता और दुनिया का खाद्य भंडार बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में एग्री स्टैक एक दूरदर्शी सुधार है। इस सुधार के तहत डेटा किसानों को सशक्त बनाता है, तकनीक शासन को मजबूत करती है और सहयोग प्रगति को गति देता है।   

ईरान से तनाव और गिरती अर्थव्यवस्था ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल; लोकप्रियता 37% पर पहुंची

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर सामने आई है। एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है और उनकी कुल स्वीकृति रेटिंग (Approval Rating) घटकर अब केवल 37 प्रतिशत रह गई है।

आर्थिक नीतियों और महंगाई से जनता नाराज : सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि अमेरिकी नागरिक ट्रंप की आर्थिक नीतियों से खासे असंतुष्ट हैं। करीब 66 प्रतिशत लोगों ने उनकी आर्थिक नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उनकी रेटिंग गिरकर 34 प्रतिशत रह गई है, जबकि महंगाई के मुद्दे पर जनता ने उन्हें मात्र 27 प्रतिशत रेटिंग दी है। जीवन-यापन की लागत के मुद्दे पर उनकी लोकप्रियता सबसे कम, यानी 23 प्रतिशत पर सिमट गई है।

ईरान नीति पर भी उठे सवाल : ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और ट्रंप के रुख को लेकर भी जनता में असंतोष है। सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के उनके तरीके पर असहमति व्यक्त की है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा था कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।

रिपब्लिकन समर्थकों का भरोसा बरकरार: भले ही कुल रेटिंग में गिरावट आई हो, लेकिन अपनी पार्टी के भीतर ट्रंप का जादू अभी भी बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच उन्हें अभी भी करीब 85 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है। वहीं, आव्रजन (Immigration) और सीमा नीतियों पर उन्हें 45 प्रतिशत लोगों की मंजूरी मिली है।

सर्वेक्षण का विवरण यह सर्वेक्षण: वॉशिंगटन पोस्ट, ABC न्यूज और इप्सोस (Ipsos) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग (Disapproval Rating) बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई है, जो उनके दोनों कार्यकाल में अब तक का सबसे उच्च स्तर है।

बटाला में सनसनीखेज वारदात: घरेलू कलह के चलते पति ने पत्नी को मारी गोली, फिर खुद भी की आत्महत्या

पंजाब डेस्क : पंजाब के बटाला में रविवार देर शाम एक दिलदहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ फतेहगढ़ चूड़ियां के गाँव कादियां राजपूतां में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद खुद को भी गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।पारिवारिक विवाद बना हत्या का कारण पुलिस जाँच में सामने आया है कि 42 वर्षीय बरिंदर सिंह उर्फ बिंदा और उसकी 40 वर्षीया पत्नी परमशील उर्फ शैली के बीच पिछले काफी समय से अनबन चल रही थी।

बरिंदर की यह दूसरी शादी थी; उसकी पहली पत्नी से उसका तलाक हो चुका था। रविवार शाम को दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद गुस्से में आकर बरिंदर ने अपने लाइसेंसी पिस्टल से वारदात को अंजाम दिया।दो बेटियों के सिर से उठा माता-पिता का साया घटना के वक्त दंपती घर पर अकेले थे।

उनकी दो छोटी बेटियाँ हैं, जिनकी उम्र 9 और 7 साल है। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तो परमशील का शव फर्श पर खून से लथपथ मिला, जबकि बरिंदर का शव सोफे पर पड़ा था।पुलिस की कार्रवाई सूचना मिलते ही डीएसपी ललित कुमार और थाना अलीवाल के एसएचओ लखविंदर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे।

पुलिस ने घटनास्थल से लाइसेंसी हथियार बरामद कर लिया है और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए बटाला के सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। डीएसपी ललित कुमार ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक जाँच के अनुसार यह आत्मघाती कदम पारिवारिक झगड़े के कारण उठाया गया है।

‘आप’ की ट्रेड विंग द्वारा गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ घंटाघर में विरोध प्रदर्शन

लुधियाना/सत्ता संदेश

आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग द्वारा लुधियाना के घंटाघर में मोदी सरकार द्वारा गैस सिलेंडरों की कीमतों में किए गए भारी बढ़ोतरी के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया गया और भाजपा पर तीखे निशाने साधे गए।

इस मौके पर विधायक अशोक पराशर पप्पी, विधायक दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल, चेयरमैन अनिल ठाकुर, साहिल अग्रवाल, जिला इंचार्ज जतिंदर खंगूड़ा, लोकसभा इंचार्ज एवं सीनियर वाइस चेयरमैन पंजाब मीडियम इंडस्ट्री शरणपाल सिंह मक्कड़, महिला आयोग सदस्य अजिंदरपाल कौर, मनप्रीत बंटी, काका माछीवाड़ा, विपुन सेठी, राकेश कुमार, राज कुमार अग्रवाल (जीएसटी सदस्य), रविंदर पाल पाली (डायरेक्टर), दविंदर वर्मा सहित सैकड़ों ‘आप’ वॉलंटियर शामिल हुए।

उन्होंने एक सुर में कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार आम आदमी के लिए लाचार और रसोई के लिए दोषी साबित हुई है।

गौरतलब है कि वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर अब 993 रुपये महंगा हो गया है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उछाल के चलते यह अब तक का सबसे बड़ा और लगातार तीसरा मासिक बढ़ोतरी है। 19 किलो वजनी वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर आमतौर पर होटलों और रेस्तरां में उपयोग किया जाता है।

इससे पहले कीमतों में 1 अप्रैल को 195.50 रुपये प्रति सिलेंडर और 1 मार्च को 114.5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इन तीन बढ़ोतरी के बाद कुल मिलाकर कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में 1303 रुपये का इजाफा हुआ है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। 7 मार्च को 14.2 किलो वजनी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये का है।

सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विनिमय दरों के आधार पर एटीएफ और एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा आने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक उछाल आया है।

‘आप’ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार को केवल चुनावों के समय ही आम लोगों की परेशानियों की चिंता होती है, उसके बाद उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध को तीन महीने हो चुके हैं और सरकार को आर्थिक बोझ आम जनता पर डालने के बजाय उन्हें राहत देने के लिए कोई ठोस योजना बनानी चाहिए थी, जबकि सिलेंडरों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर लोगों की कमर तोड़ दी गई है।

चुनावी नतीजों के बीच शेयर बाजार में ‘तूफानी’ तेजी: सेंसेक्स 900 अंक उछला, निफ्टी में भी भारी बढ़त

बिजनेस डेस्क : 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझानों के बीच आज भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में ‘हरियाली’ छा गई और बाजार प्रमुख सूचकांकों में बड़ी बढ़त दर्ज की गई।

सेंसेक्स और निफ्टी का रिकॉर्ड प्रदर्शन: सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 587 अंक चढ़कर 77,501 के स्तर पर पहुँच गया, और सुबह करीब 9:40 बजे तक इसमें 900 अंकों से ज्यादा की तूफानी तेजी देखी गई। इसी तरह निफ्टी 50 भी 192 अंकों की छलांग लगाकर 24,190 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भारी खरीदारी के साथ निफ्टी बैंक 325 अंक बढ़कर 55,188 पर पहुँच गया।

तेजी के पीछे की वजह: बाजार में इस उछाल का मुख्य कारण विधानसभा चुनावों के शुरुआती रुझान हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पश्चिम बंगाल, असम और पांडुचेरी में बढ़त मिलती दिख रही है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की TMC और BJP के बीच कांटे की टक्कर के समाचारों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है।

सेक्टर और शेयरों का हाल: आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर में 2% से ज्यादा और FMCG सेक्टर में 1% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। बाजार की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेडिंग शुरू होने वाले कुल 903 शेयरों में से 742 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 107 शेयरों में गिरावट आई। इतना ही नहीं, 69 शेयर अपने 52 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गए, जो बाजार के मजबूत सेंटीमेंट को दर्शाता है।

मजदूर दिवस पर बड़ा फैसला: पंजाब में 13 साल बाद मजदूरों के वेतन में 15% बढ़ोतरी

लुधियाना/सत्ता संदेश

मजदूर दिवस पर पंजाब के इतिहास में जुड़ा नया अध्याय। सरकारी और गैर सरकारी मज़दूरों के मूल वेतन में 15% बढ़ोतरी। – अजय मित्तल (मेंबर लेबर बोर्ड पंजाब)

1 मई मजदूर दिवस के मौके पर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने विधानसभा का स्पेशल सत्र बुलाया। सत्र की शुरुआत शिकागो में मजदूर आंदोलन के दौरान शहीद हुए उन मज़दूरों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई, जिन्होंने मज़दूर वर्ग के अधिकारों के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

इस स्पेशल सत्र के दौरान लेबर मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंध ने विधानसभा में मज़दूरों की मूल तनख्वाह में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को सभी विधायकों ने एकमत से पास कर दिया, जिसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस ऐतिहासिक फैसले की आधिकारिक घोषणा करते हुए इस पर मुहर लगा दी।

गौरतलब है कि सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में यह बढ़ोतरी करीब 13 साल बाद की गई है। मज़दूर वर्ग इस मांग का लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था। पंजाब सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से न सिर्फ मज़दूर वर्ग आर्थिक रूप से मज़बूत होगा, बल्कि उनका जीवन स्तर भी ऊपर उठेगा।

इस मौके पर पंजाब लेबर बोर्ड के मेंबर अजय मित्तल ने पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंध का धन्यवाद करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने हमेशा आम लोगों और मज़दूर वर्ग की भलाई को प्राथमिकता दी है। यह फैसला सिर्फ़ मज़दूरी में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि मज़दूरों के सम्मान और उनकी मेहनत की तारीफ़ का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि पंजाब का मज़दूर वर्ग राज्य की तरक्की की रीढ़ है और सरकार द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले से मज़दूरों में नया आत्मविश्वास पैदा होगा और उम्मीद है कि आने वाले समय में मज़दूरों के हक और भलाई के लिए ऐसे और भी जन-हितैषी फैसले लिए जाएंगे। आज ‘मज़दूर दिवस’ पर पंजाब के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 13 साल बाद मज़दूरों की मज़दूरी में 15% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी करके उनकी मेहनत की असली कीमत मिल गई है। जहां पिछली सरकारें सिर्फ़ वादे करती थीं, वहीं हमने ज़मीनी हकीकत में मज़दूरों के चेहरों पर मुस्कान लाई है।