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‘आप’ की ट्रेड विंग द्वारा गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ घंटाघर में विरोध प्रदर्शन

लुधियाना/सत्ता संदेश

आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग द्वारा लुधियाना के घंटाघर में मोदी सरकार द्वारा गैस सिलेंडरों की कीमतों में किए गए भारी बढ़ोतरी के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया गया और भाजपा पर तीखे निशाने साधे गए।

इस मौके पर विधायक अशोक पराशर पप्पी, विधायक दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल, चेयरमैन अनिल ठाकुर, साहिल अग्रवाल, जिला इंचार्ज जतिंदर खंगूड़ा, लोकसभा इंचार्ज एवं सीनियर वाइस चेयरमैन पंजाब मीडियम इंडस्ट्री शरणपाल सिंह मक्कड़, महिला आयोग सदस्य अजिंदरपाल कौर, मनप्रीत बंटी, काका माछीवाड़ा, विपुन सेठी, राकेश कुमार, राज कुमार अग्रवाल (जीएसटी सदस्य), रविंदर पाल पाली (डायरेक्टर), दविंदर वर्मा सहित सैकड़ों ‘आप’ वॉलंटियर शामिल हुए।

उन्होंने एक सुर में कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार आम आदमी के लिए लाचार और रसोई के लिए दोषी साबित हुई है।

गौरतलब है कि वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर अब 993 रुपये महंगा हो गया है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उछाल के चलते यह अब तक का सबसे बड़ा और लगातार तीसरा मासिक बढ़ोतरी है। 19 किलो वजनी वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर आमतौर पर होटलों और रेस्तरां में उपयोग किया जाता है।

इससे पहले कीमतों में 1 अप्रैल को 195.50 रुपये प्रति सिलेंडर और 1 मार्च को 114.5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इन तीन बढ़ोतरी के बाद कुल मिलाकर कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में 1303 रुपये का इजाफा हुआ है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। 7 मार्च को 14.2 किलो वजनी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये का है।

सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विनिमय दरों के आधार पर एटीएफ और एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा आने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक उछाल आया है।

‘आप’ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार को केवल चुनावों के समय ही आम लोगों की परेशानियों की चिंता होती है, उसके बाद उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध को तीन महीने हो चुके हैं और सरकार को आर्थिक बोझ आम जनता पर डालने के बजाय उन्हें राहत देने के लिए कोई ठोस योजना बनानी चाहिए थी, जबकि सिलेंडरों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर लोगों की कमर तोड़ दी गई है।

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