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पीएम मोदी ने चंडीगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन, चंडीगढ़ वासियों को दी बधाई

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

गुलाब चंद कटारिया, केंद्र में मेरे सहयोगी जेपी नड्डा , अश्विनी वैष्णव जीसंसद में मेरे साथी मनीष तिवारी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।

आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।

चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।

बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।

यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।

जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।

मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।

स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।

स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।

ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है।

गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।

हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।

हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।

हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।

रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।

विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

संचार लेखा नियंत्रक, पंजाब द्वारा PGIMER के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार, संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग (DoT) के नोडल कार्यालय कार्यालय संचार लेखा नियंत्रक, पंजाब ने विश्व रक्तदाता दिवस 2026 के उपलक्ष्य में 10 जून को PGIMER, चंडीगढ़ के ब्लड बैंक के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। यह शिविर कार्यालय संचार लेखा नियंत्रक, दूरसंचार भवन, चंडीगढ़ में आयोजित किया गया।

शिविर का उद्घाटन विजेंदर एन. टंडन, संचार लेखा नियंत्रक, पंजाब द्वारा किया गया। उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे मानवता की सेवा का एक महान कार्य बताया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ऐसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने और जीवन बचाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक शिविर में भाग लिया और स्वेच्छा से रक्तदान किया, जिससे इस मानवीय कार्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रदर्शित हुई। शिविर के दौरान 27 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।

पीजीआईएमईआर ब्लड बैंक की टीम द्वारा रक्तदान प्रक्रिया संचालित की गई। डॉ. आर. आर. शर्मा, प्रोफेसर एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष, पीजीआईएमईआर एवं यूटी चंडीगढ़ राज्य रक्त संक्रमण परिषद ने कार्यालय के सहयोग की सराहना की तथा इसे मानव सेवा के रूप में सराहा।


रक्तदान करने वाले सभी दाताओं को उनकी सामाजिक सेवा के सम्मान में “प्रशस्ति प्रमाण पत्र” प्रदान किए गए।

यह आयोजन कार्यालय संचार लेखा नियंत्रक, पंजाब की सामाजिक जिम्मेदारी और लोक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संग्रहित रक्त जीवन रक्षक ट्रांसफ्यूजन के लिए रक्त भंडार को मजबूत करेगा।

पीजीआईएमईआर ने द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वैच्छिक सेवा और परिवर्तनीय रोगी देखभाल की भावना का सम्मान

• सारथी सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख पर आधारित है; छात्रों को इसके माध्यम से केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन प्राप्त होता है: श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन

सारथी स्वयंसेवक केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता के सर्वोत्तम रूप को सीख रहे हैं: प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

चंडीगढ़, 5 मई 2026: एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करते हुए, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने आज द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ मनाया, जो सारथी (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) के दो सफल वर्षों की स्मृति में आयोजित किया गया—यह एक अग्रणी स्वयंसेवी पहल है जो संस्थान में रोगी देखभाल और पहुंच को रूपांतरित कर रही है।
इस अवसर पर श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सुश्री प्रेरणा पुरी, आईएएस, सचिव शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर, श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान) तथा प्रो. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक भी उपस्थित रहे।
एक भरे हुए सभागार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री एच. राजेश प्रसाद ने सारथी को सेवा और अनुभवात्मक शिक्षा के अनूठे मॉडल के रूप में सराहा। उन्होंने कहा, “सारथी चार सशक्त स्तंभों—सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख—पर आधारित है। बड़े अस्पतालों में, जहां व्यवस्थाओं को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, ये युवा स्वयंसेवक सच्चे ‘सारथी’ बनकर मरीजों को गरिमा और संवेदनशीलता के साथ मार्गदर्शन देते हैं। यहां उन्हें केवल कौशल ही नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए हृदय का परिवर्तन मिलता है।”
मानवीय सेवा के आयाम को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “करुणा को पुस्तकों से नहीं सिखाया जा सकता—इसे अनुभव करना पड़ता है। सारथी के माध्यम से ये छात्र न केवल मरीजों की सहायता कर रहे हैं, बल्कि मानवता के वास्तविक सार को भी समझ रहे हैं। यह पहल बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ-साथ बेहतर नागरिक भी तैयार कर रही है।”
पहल के व्यापक प्रभाव की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “पीजीआईएमईआर में एक पायलट के रूप में शुरू हुई यह पहल देश के सबसे बड़े सामाजिक सेवा आंदोलनों में से एक बनने की क्षमता रखती है। जब युवाओं की ऊर्जा को सेवा की दिशा में लगाया जाता है, तो स्वास्थ्य सेवाओं का अनुभव पूरे देश में बदला जा सकता है।”
इससे पूर्व प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर ने अपने संबोधन में सारथी को संस्थान की करुणा, सेवा और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, “संस्थान केवल भवनों या तकनीक से नहीं बनते, बल्कि मूल्यों, समर्पण और सेवा से बनते हैं। पीजीआईएमईआर ने अपनी यात्रा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय की है और सारथी इन्हीं आदर्शों का प्रतिनिधित्व करता है।”
स्वयंसेवकों को स्नेहपूर्वक “ब्रेवहार्ट्स” संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “ये युवा केवल मरीजों की सहायता नहीं कर रहे, बल्कि मानवता का श्रेष्ठ रूप सीख रहे हैं। देश के सबसे व्यस्त अस्पतालों में से एक में मरीजों का मार्गदर्शन करते हुए वे सहानुभूति, धैर्य और सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता विकसित कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में वे सारथी को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानेंगे।”
उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, नोडल अधिकारियों और प्रशासकों के योगदान के लिए आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम के राष्ट्रीय विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “जो पहल पीजीआईएमईआर में शुरू हुई थी, वह अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। सारथी ने यह सिद्ध किया है कि जब युवाओं को उद्देश्य और मूल्यों के साथ मार्गदर्शन मिलता है, तो वे परिवर्तन के सशक्त वाहक बन सकते हैं।”
श्री पंकज राय, आईएएस, उप निदेशक (प्रशासन), पीजीआईएमईआर ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की चर्चा अक्सर बुनियादी ढांचे और तकनीक तक सीमित रहती है, लेकिन मरीज का वास्तविक अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बड़े संस्थानों में सेवाओं तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है। सारथी इसी अंतर को पाटने के लिए शुरू किया गया था।”
6 मई 2024 को शुरू हुई इस पहल के तहत छात्र स्वयंसेवक अस्पताल में मरीजों की गैर-चिकित्सीय प्रक्रियाओं—जैसे पंजीकरण, जांच केंद्रों तक मार्गदर्शन, विभिन्न सेवाओं के बीच आवागमन, तथा बुजुर्ग और कमजोर वर्गों की सहायता—में सहयोग करते हैं।
पहल के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलकर 1.24 लाख से अधिक सेवा घंटे दिए हैं, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिला है।
नीतिगत महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सारथी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है, तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा अनुभवात्मक शिक्षण ढांचे के अंतर्गत भी सराहा गया है।
उन्होंने कहा, “सारथी एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहा है जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार है और समझती है कि स्वास्थ्य सेवा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। यह पहल हमें याद दिलाती है कि सच्चा उपचार केवल चिकित्सा में नहीं, बल्कि मरीज को सम्मान और सहारा देने में निहित है।”
कार्यक्रम में सारथी परियोजना की दो वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। एक विशेष फिल्म के माध्यम से इसके विकास और प्रभाव को दर्शाया गया। इसके साथ ही 25 सहयोगी शैक्षणिक संस्थानों को सम्मानित किया गया तथा प्राचार्यों, एनएसएस नोडल अधिकारियों और समर्पित स्वयंसेवकों (ब्रेवहार्ट्स) को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समापन पर प्रो. संजय जैन, डीन (अनुसंधान), पीजीआईएमईआर ने कहा, “सारथी करुणा को क्रियान्वित करने का सशक्त उदाहरण है। यह युवाओं द्वारा संचालित परिवर्तन और सामुदायिक सहभागिता की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।”
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि इस पहल को और मजबूत करते हुए देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में इसका विस्तार किया जाएगा।

पीजीआईएमईआर में 20 अप्रैल से न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी ओपीडी एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में शिफ्ट होंगी

“रोगी देखभाल को बेहतर बनाने और क्लिनिकल दक्षता को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” : प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर

चंडीगढ़, 17 2026: अप्रैल पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने घोषणा की है कि न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी (न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा ओपीडी को छोड़कर) की बाह्य रोगी सेवाएं (ओपीडी) 20 अप्रैल 2026 से एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर के लेवल-2 पर (एसबीआई बैंक और गोल मार्केट के पास) संचालित होंगी।

इस परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए ये सेवाएं 18 अप्रैल 2026 की दोपहर के बाद न्यू ओपीडी ब्लॉक से बंद कर दी जाएंगी।

इस बदलाव को रोगी देखभाल और क्लिनिकल दक्षता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा,“यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल देखभाल प्रदान करने के तरीके में एक परिवर्तनकारी कदम है। एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में परामर्श, जांच और उन्नत उपचार सुविधाओं को एकीकृत करके हम एक रोगी-केंद्रित प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जो विलंब को कम करती है, उपचार के परिणामों को बेहतर बनाती है और मरीजों को अधिक सहज अनुभव प्रदान करती है। यह कदम सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं में नए मानक स्थापित करने की पीजीआईएमईआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

ओपीडी के समय और कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।न्यूरोलॉजी ओपीडी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को संचालित होंगी, जबकि गुरुवार को विशेष क्लिनिक (सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) लगेगा।न्यूरोसर्जरी ओपीडी मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को पूर्ववत संचालित होंगी, जिनका सामान्य समय सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक रहेगा।

मरीज और उनके परिजन पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के गेट नंबर 3 से एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर में प्रवेश कर सकते हैं। आगंतुकों के मार्गदर्शन और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।

सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध है कि इस परिवर्तन का संज्ञान लें और सहयोग प्रदान करें।