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स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति का व्यावहारिक रास्ता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता दृढ़ता, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व पर आधारित व्यावहारिक रास्तों को आगे बढ़ाने का अवसर देती है

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा की बढ़ती मांग और जलवायु से जुड़ी गंभीर चुनौतियों के इस दौर में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसी ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण करने की जरूरत है जो स्वच्छ व अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित, सस्ती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की विकास संबंधी जरूरतों तथा आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप भी हों।

स्वच्छ ऊर्जा दरअसल ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से तेजी  से अहम होती जा रही है। यह ईंधन बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले जोखिमों  को कम कर सकती है, ऊर्जा को अपेक्षाकृत अधिक सुलभ बना सकती है, रोजगार सृजित कर सकती है, घरेलू उद्योगों को मजबूत कर सकती है और देश को अपेक्षाकृत अधिक सुदृढ़ बना सकती है। फिर भी, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के रास्ते एक जैसे नहीं हो सकते। इन रास्तों को राष्ट्रीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और विकास की प्राथमिकताओं के हिसाब से निर्धारित किया जाना चाहिए।

इसी बिंदु पर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत का अपना अनुभव यह बताता है कि स्वच्छ ऊर्जा की शुरुआत लोगों से ही होनी चाहिए।

पिछले दशक में, प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत लगभग 28.6 मिलियन घरों को बिजली के कनेक्शन दिए गए। इससे सभी तक बिजली पहुंचाने का काम आगे बढ़ा और ग्रामीण व कम सुविधा वाले इलाकों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत महिलाओं को 105 मिलियन से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे खाना पकाने के साफ-सुथरे तरीकों को बढ़ावा मिला, घर में सेहत बेहतर हुई और कठिन श्रम का बोझ कम हुआ।

ये पहल एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करती हैं: स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने को केवल स्थापित मेगावाट या जोड़ी गई क्षमता के आधार पर नहीं मापा जा सकता, बल्कि इससे पैदा हुए अवसरों, सुदृढ़ हुई आजीविका और बेहतर हुए जीवन स्तर के आधार पर भी मापा जाना चाहिए।

लोगों को प्राथमिकता देने वाले इस दृष्टिकोण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर काम और सहयोगी  बुनियादी ढांचे की भी जरूरत है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा की कहानी में नवीकरणीय ऊर्जा अहम हो गई है। लेकिन इसकी सफलता इसे समर्थन प्रदान करने वाली प्रणालियों पर निर्भर करती है। सौर  और पवन ऊर्जा को तेजी से अपनाया जा सकता है, लेकिन इनकी पूरी क्षमता का लाभ तभी मिल पाएगा जब पारेषण (ट्रांसमिशन), वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन), भंडारण (स्टोरेज) और ग्रिड प्रबंधन एकसाथ मिलकर काम करें।

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में सहायता प्रदान करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचे (ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर) का निरंतर विस्तार हुआ है। इसके साथ-साथ ऊर्जा के भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) और ग्रिड की सुदृढ़ता (ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी) के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ा है। वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) संबंधी सुधारों और उन्नत ग्रिड तकनीक को अपनाने से एक ऐसी बेहतर एवं भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली बनाने में मदद मिली है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समन्वित करने में सक्षम है।

भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित क्षमता अब 288 गीगावॉट से अधिक हो गई है। बड़े पैमाने की परियोजनाओं के अलावा, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) प्रणालियां – जैसे कि रूफटॉप सोलर, सोलर पंप, मिनी-ग्रिड और माइक्रो-ग्रिड – ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा को और अधिक सुलभ बना रही हैं। ये प्रणालियां सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, स्कूलों, हेल्थकेयर सेंटरों तथा स्थानीय व्यवसायों को मदद पहुंचाने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका और स्थानीय आर्थिक सुदृढ़ता को भी बढ़ावा दे रही हैं।

भारत की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ बड़े पैमाने पर इस दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस योजना से अब तक लगभग 4 मिलियन परिवारों को लाभ हुआ है, जिससे उपभोक्ता अपेक्षाकृत अधिक विकेन्द्रीकृत एवं भागीदारी वाली ऊर्जा प्रणाली में योगदान देने वाले बन पाए हैं।

हालांकि, स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में वित्त पोषण सबसे अहम तत्वों में से एक बना रहेगा। कई विकासशील देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन संभावनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने तथा बैंक से ऋण पाने योग्य परियोजनाओं में बदलने हेतु सस्ती और दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत होती है।

आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, वितरण संबंधी बुनियादी ढांचा, ग्रिड के आधुनिकीकरण, भंडारण प्रणाली और कम ऊर्जा खर्च करने वाली तकनीकों में निवेश बेहद जरूरी होगा। न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थान वित्त पोषण, तकनीक संबंधी साझेदारी और क्षमता विकास के जरिए विकासशील देशों की मदद करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों के लिए सुदृढ़ एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणालियां  सुनिश्चित करने हेतु मैन्यूफैक्चरिंग, तकनीक, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना जरूरी होगा।

अब जबकि ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता आगे बढ़ रही है, सहयोग की एक ऐसी भविष्योन्मुखी रूपरेखा को मजबूत करने का अवसर है जो सामर्थ्य, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, विश्वसनीयता, तकनीक की सुलभता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सतत विकास का समर्थन करे।

चुनौती सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि ऐसे ऊर्जा प्रणाली के निर्माण की भी है जो सबके लिए सुलभ, किफायती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास और मानव विकास को कायम रखने में सक्षम हों।

 (लेखक विद्युत राज्यमंत्री हैं)

मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों और न्याय मंत्रियों की बैठक

गुजरात/ सत्ता संदेश

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय का विधि मामलों का विभाग, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तत्वावधान में 19-20 मई, 2026 को ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (एसओएम) और उसके बाद 21-22 मई, 2026 को गांधीनगर, गुजरात में ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक (जेएमएम) की मेजबानी कर रहा है। इस वर्ष ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता भारत करेगा।

ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ अधिकारी संस्थागत मध्यस्थता, मध्यस्थता सुधार और वाणिज्यिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र के विवादों में वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) की भूमिका सहित प्राथमिकता वाले एडीआर-संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आएंगे। चर्चाओं में एडीआर-केंद्रित सुधारों के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी, जिन्हें ब्रिक्स मंचों में लंबित मामलों को कम करने और समय पर, लागत प्रभावी विवाद समाधान को बढ़ावा देने के लिए आदर्श हस्तक्षेप के रूप में उजागर किया गया है।

संयुक्त न्याय परिषद (जेएमएम) ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों को ब्रिक्स ढांचे में वैकल्पिक विवाद समाधान निवारण आधारित सहयोग पर एक संयुक्त वक्तव्य अपनाने के लिए एक मंत्रिस्तरीय मंच प्रदान करेगी, जिसमें सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा करने, संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और प्रशिक्षण कार्यक्रम, आदर्श नियम और डिजिटल विवाद समाधान मंच जैसे सहयोगी एडीआर संबंधी पहलों का पता लगाने के लिए ठोस प्रतिबद्धताएं निर्धारित की जाएंगी। ये बैठकें आधुनिक कानूनी प्रणाली सुधार के एक मुख्य घटक के रूप में और नागरिकों को सुलभ, त्वरित और किफायती न्याय प्रदान करने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में एडीआर को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को रेखांकित करती हैं।

आयोजन स्थल के रूप में गुजरात के गांधीनगर का चयन भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कानूनी और बहुपक्षीय आयोजनों के केंद्र के रूप में शहर के उभरने को दर्शाता है।

प्रमुख उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम

ब्रिक्स के न्याय मंत्री वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर), विशेष रूप से मध्यस्थता और मध्यस्थता पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देंगे, जिसके लिए वे सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत दृष्टिकोणों और संस्थागत अनुभवों के आदान-प्रदान को सुगम बनाएंगे;  मध्यस्थों, न्यायाधीशों, सरकारी कानूनी अधिकारियों और कानूनी पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण, व्यावसायिक आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाओं और ज्ञान साझाकरण मंचों के माध्यम से व्यावसायिक क्षमता और संस्थागत इको-सिस्टम को मजबूत करेंगे; न्यायालय द्वारा संदर्भित और मुकदमे से पहले की मध्यस्थता को बढ़ावा देंगे; मध्यस्थता केंद्रों, मध्यस्थता संस्थानों और कानूनी प्रशिक्षण निकायों के बीच संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देंगे; सीमा पार वाणिज्यिक विवादों पर सहयोग का समर्थन करने और पहुंच, दक्षता में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाएंगे; व्यापार और पर्यावरण पर कानूनों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए ब्रिक्स न्यायशास्त्र के कानूनी अनुसंधान और तुलनात्मक अध्ययन को आगे बढ़ाएंगे; और सरकारी कानूनी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगे।

इन बैठकों में पूर्ण सत्र और द्विपक्षीय आदान-प्रदान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य ठोस सहयोग पहल, क्षमता निर्माण परियोजनाएं और संस्थागत संबंध स्थापित करना है। इन बैठकों के परिणाम ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों द्वारा “मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करना” विषय पर एक घोषणापत्र में संकलित किए जाएंगे।

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने गांधीनगर में ब्रिक्स बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की


गांधीनगर / सत्ता संदेश

ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार 1.17 ट्रिलियन अमरिकी डॉलर तक पहुंचा, इस क्षेत्र में अपार संभावना है: वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने गुजरात के गांधीनगर में व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर ब्रिक्स संपर्क समूह (सीजीईटीआई) की दूसरी बैठक में मुख्य भाषण दिया। यह बैठक मार्च 2026 में वर्चुअल रूप से आयोजित सीजीईटीआई की पहली बैठक के बाद हुई।

श्री अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स लगातार मजबूत होता जा रहा है तथा यह उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रभावी आवाज के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, मुद्रास्फीति के दबाव और बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच माल व्यापार तेरह गुना बढ़ गया है, जो 2003 के  84 बिलियन अमरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन अमरिकी डॉलर हो गया है। यह  वृद्धि वैश्विक व्यापार की गति से अधिक रही है और इससे सदस्य देशों के लिए अधिक लचीलापन तथा विविधीकरण में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच होने वाला व्यापार अभी भी वैश्विक व्यापार का लगभग 5 प्रतिशत है, जो अधिक व्यापार एकीकरण, मजबूत मूल्य-श्रृंखला संबंधों और बेहतर आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है।

“लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता लाना”  विषय पर आयोजित इस बैठक में पिछली अध्यक्षता के दौरान किए गए कार्यों को आगे बढ़ाया गया। भारत 2012, 2016 और 2021 के बाद चौथी बार ब्रिक्स का अध्यक्ष बना है। इस दौरान हुए विचार-विमर्श में समकालीन व्यापार मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को सुदृढ़ करना, रोजगार सृजन के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के अंतर्राष्ट्रीयकरण में सहायता करना, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को अधिक लचीला और विविध बनाना तथा सेवाओं से संबंधित व्यापार को बढ़ाना शामिल है। बैठक में अधिक संतुलित व्यापार को बढ़ावा देने, सेवा क्षेत्र में नए अवसर उपलब्‍ध कराने और ब्रिक्स देशों के बीच अधिक व्यापार के माध्यम से किसानों, महिलाओं, उद्यमियों और व्यवसायों सहित प्रमुख हितधारकों को अधिक समृद्ध बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

15 मई 2026 को, प्रतिनिधिमंडल ने गिफ्ट सिटी-गांधीनगर का दौरा किया और वे वहां कमांड एंड कंट्रोल सेंटर सहित विभिन्‍न सुविधा केंद्र भी गए। गिफ्ट सिटी को विश्व स्तरीय वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित करने की पहलों पर एक प्रस्तुति भी दी गई। इस यात्रा से प्रतिनिधिमंडल को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायता करने के लिए बैंकिंग, पूंजी बाजार, फंड प्रबंधन, लीजिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के भारत के प्रयासों को देखने का अवसर मिला।

सीजीईटीआई में हुई चर्चाओं में ब्रिक्स के साथ भारत की सहभागिता को व्यापक व्यापार परिप्रेक्ष्य में भी रखा गया। नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स के सदस्य देशों को भारत का माल निर्यात अनुमानित 82.0 बिलियन अमरिकी डॉलर और कैलेंडर वर्ष 2024 में सेवाओं के क्षेत्र में निर्यात 31.3 बिलियन अमरिकी डॉलर था। ये आंकड़े ब्रिक्‍स देशों के बीच व्यापार और बढ़ाने की गुंजाइश को दर्शाते हैं, जिसमें सेवाएं और कनेक्टिविटी भविष्य की वृद्धि के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं।

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ब्रिक्स महिला कार्य समूह की पहली प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई


इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी

दिल्ली /सत्ता संदेश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, 30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स महिला कार्य समूह की प्रथम प्रारंभिक बैठक आयोजित की।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके साथ ही, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, और संयुक्त राष्ट्र महिला व भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) जैसे ज्ञान भागीदारों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अपर सचिव, सुश्री कैरालीन खोंगवार देशमुख ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और चर्चाओं के लिए माहौल तैयार किया।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय: ‘प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ से प्रेरित होकर, इस बैठक में वैश्विक स्तर पर महिलाओं की प्रमुख समस्याओं और साझा चिंताओं पर गहन चर्चा हुई, जिन्हें चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बांटा गया। इनमें शासन और नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका; वित्तीय और डिजिटल समावेशन; महिला उद्यमिता और कौशल विकास; तथा जलवायु कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।

इस बैठक ने महिला नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया, जिसमें महिलाओं को आर्थिक विकास, शासन और सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख वाहक के रूप में मान्यता दी गई।

ब्रिक्स सदस्य देशों ने अपने वक्तव्यों में भारत को उसकी अध्यक्षता के लिए बधाई दी, और सहयोग एवं सीखने की भावना को अपनाते हुए इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का स्वागत और समर्थन किया।

इन चर्चाओं का निष्कर्ष उन प्रमुख परिणामों में योगदान देगा, जो केरल के कोच्चि में आयोजित होने वाली ब्रिक्स महिला कार्य समूह की बैठक (6–7 जुलाई 2026) और ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक (8–9 जुलाई 2026) में सामने आएंगे।