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नूह में दिशा 2.0 के तहत टेली-लॉ कार्यशाला, 150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

हरियाणा के नूह में दिशा 2.0 योजना के तहत टेली-लॉ सेवाओं पर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

नूह / हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से मंगलवार को हरियाणा के नूह जिले के लघु सचिवालय में दिशा 2.0 योजना के तहत टेली-लॉ सेवाओं को लेकर अधिकारी-स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला की अध्यक्षता न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एक्सेस टू जस्टिस) सुरेश कुमार और नूह के एसडीएम कुंवर आदित्य विक्रम ने की। कार्यक्रम में कॉमन सर्विसेज सेंटर्स (CSC) के प्रतिनिधियों, ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE), पैनल वकीलों, न्याय सहायकों और न्याय तक पहुंच को मजबूत करने से जुड़े अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य टेली-लॉ कार्यक्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के नागरिकों तक कानूनी सहायता की पहुंच मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ने प्रारंभिक संबोधन दिया। इसके बाद दिशा 2.0 योजना पर प्रस्तुति दी गई। इसमें टेली-लॉ, न्याय बंधु, कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (LLLAP) और विधि-संजीवनी के एकीकृत क्रियान्वयन के जरिए न्याय तक पहुंच बढ़ाने की दिशा पर जानकारी दी गई।

तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को टेली-लॉ सेवाओं के कामकाज और उनके प्रभाव के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान कॉमन सर्विसेज सेंटर्स को जमीनी स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाले प्रमुख पहुंच बिंदु के रूप में बताया गया। ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLE) की भूमिका पर भी चर्चा हुई, जो नागरिकों को कानूनी परामर्श तक पहुंच बनाने में मदद करते हैं।

कार्यशाला में डिजिटल तकनीक के माध्यम से कानूनी सेवा प्रदाताओं और जरूरतमंद नागरिकों के बीच की दूरी कम करने पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों को योजना के तहत उपलब्ध डिजिटल माध्यमों की जानकारी देने के लिए टेली-लॉ पोर्टल और न्याय सेतु AI-सक्षम चैटबॉट का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में हितधारकों के साथ संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई। इसमें टेली-लॉ सेवाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, बेहतर कार्यप्रणाली और कानूनी सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में टेली-लॉ सेवाओं के प्रभावी संचालन को लेकर सुझाव भी साझा किए।

कार्यशाला का समापन न्याय विभाग के अवर सचिव गौरव कुमार त्रिपाठी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने न्याय तक पहुंच मजबूत करने और नागरिकों के कानूनी सशक्तिकरण के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक भूमिका और प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया।

जल्दी इंसाफ पाने के लिए परमानेंट लोक अदालत का फायदा उठाएं : हरप्रीत कौर रंधावा

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने परमानेंट लोक अदालतों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठाने पर ज़ोर दिया।

डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रंधावा ने कहा कि पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, SAS नगर के निर्देशों के अनुसार, लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़, 1987 के सेक्शन 22-B के तहत डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ अमेंडमेंट एक्ट, 2002 के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर परमानेंट लोक अदालतें (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) बनाई गई हैं, जबकि परमानेंट लोक अदालतों (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में 01 चेयरपर्सन और 02 मेंबर होते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित प्री-लिटिगेटिव केस (वे केस जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं) का फैसला किया जाता है। इस स्थायी लोक अदालत में जनोपयोगी सेवाओं जैसे परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीफोन सेवाएं, बिजली सेवाओं से संबंधित मामले, पानी से संबंधित मामले, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा या सफाई से संबंधित मामले, अस्पताल या डिस्पेंसरी में सेवाओं से संबंधित मामले, बीमा सेवाएं, बैंकिंग सेवाएं, आवास सेवाएं, वित्त सेवाएं, शिक्षा का प्रावधान एवं संबंधित मामले, नए कनेक्शन, आपूर्ति, एलपीजी रीफिलिंग एवं संबंधित मामले, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं बीपीएल कार्ड जारी करना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा योजना, शगुन योजना एवं बेरोजगारी भत्ता सेवाओं से संबंधित मामले, जनवितरण सेवाएं, जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित सेवाएं आदि का निपटारा किया जाता है।

उपर्युक्त सेवाओं से संबंधित ऐसे विवाद, शिकायत, विवाद जो न्यायालयों में लंबित नहीं हैं, उन्हें सादे कागज पर लिखित रूप में स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं) के अध्यक्ष के समक्ष दायर करना होगा तथा 5 लाख रुपये तक के विवाद/मामले इस लोक अदालत में 01 करोड़ तक के केस फाइल किए जा सकते हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, लुधियाना की चेयरपर्सन मैडम हरप्रीत कौर रंधावा ने आम लोगों से अपील की कि वे ऊपर बताई गई कैटेगरी में आने वाले अपने केस परमानेंट लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज़) में फाइल करें। लोक अदालत में जल्दी और सस्ता इंसाफ मिलता है और इसके फैसले को सिविल कोर्ट का आदेश माना जाता है। परमानेंट लोक अदालत में केस फाइल करने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती और इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती। ज़्यादा जानकारी के लिए 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।