ब्रेकिंग न्यूज़
IPRD-2026: दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक होगा इंडो-पैसिफिक सम्मेलन, रक्षामंत्री करेंगे संबोधित

IPRD-2026 का आयोजन 3 से 5 नवंबर तक नई दिल्ली में होगा। 18 देशों के विशेषज्ञ समुद्री सुरक्षा, विज्ञान, तकनीक और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करेंगे।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना 3 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD-2026) का आयोजन करेगी। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 18 देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सम्मेलन के पहले दिन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस वर्ष सम्मेलन की थीम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग पर केंद्रित है। भारतीय नौसेना नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

सम्मेलन का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। इसमें समुद्र के बेहतर प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर रहेगा विशेष जोर

IPRD-2026 में समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन की सुरक्षा को प्रमुखता दी जाएगी। समुद्री मार्गों पर बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच देशों के बीच समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके साथ ही समुद्री निगरानी, महासागरीय अनुसंधान और नई समुद्री तकनीकों के इस्तेमाल से जुड़ी संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

सम्मेलन में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के माध्यम से समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान तलाशना और क्षेत्रीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देना है।

पांच प्रमुख सत्रों में होगा विचार-विमर्श

तीन दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में पांच प्रमुख सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें शैक्षणिक संस्थानों के बीच नेटवर्किंग, अनुसंधान को बढ़ावा देने, विशेषज्ञों को तैयार करने, समुद्री निगरानी, समुद्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, महासागर प्रशासन और नई समुद्री तकनीकों जैसे विषय शामिल होंगे।

सम्मेलन के पहले दिन ‘पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम द फ्लैग ब्रिज’ नाम से विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख हिस्सा लेंगे। इसके अलावा ‘सहयोग का संवाद’ नाम से राजनयिकों के साथ विशेष बातचीत भी होगी, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग और साझा समुद्री हितों पर विचार रखे जाएंगे।

भारत की समुद्री रणनीति को मिलेगा बढ़ावा

IPRD-2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) और भारत की MAHASAGAR समुद्री रणनीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन पहलों के तहत क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और महासागरों के सतत विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाता है।

सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न देशों के विशेषज्ञों, राजनयिकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को साझा चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे ठोस सुझाव और प्रस्ताव तैयार करना है, जिन्हें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर लागू किया जा सके।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार और समुद्री संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में IPRD-2026 के जरिए भारत क्षेत्रीय देशों के साथ वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के साथ समुद्री चुनौतियों के समाधान में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।

Punjab Stubble Burning: पराली जलाने के मामलों में 2022 के मुकाबले करीब 90% गिरावट, मशीनों पर सब्सिडी से बढ़ा विकल्प

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। जानिए 2026 के आंकड़े, कृषि मशीनों पर सब्सिडी और पराली प्रबंधन की योजनाएं।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। इस बहस में पंजाब का नाम प्रमुखता से आता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी की ओर इशारा करते हैं। पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि 2025 में इनकी संख्या घटकर 5,114 रह गई। इस तरह 2022 के मुकाबले 2025 में घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

हालांकि, चालू सीजन में पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 22 अक्टूबर तक 510 घटनाएं दर्ज की गई थीं। ऐसे में पराली प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे उपायों के साथ मौजूदा सीजन की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।

मध्य प्रदेश में पंजाब से ज्यादा घटनाएं

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS कार्यक्रम के 6 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मध्य प्रदेश में 118, पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं सामने आईं।

ये आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में धान की खेती का विस्तार, फसल कटाई का समय और अवशेषों के प्रबंधन की उपलब्ध सुविधाएं इस चुनौती को प्रभावित करती हैं। हालांकि, अलग-अलग तारीखों और निगरानी प्रणालियों के आंकड़ों की तुलना करते समय उनके स्रोत और गणना के तरीके को ध्यान में रखना आवश्यक है।

कृषि मशीनों पर सब्सिडी से किसानों को मदद

पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कृषि मशीनों पर सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को पात्रता के अनुसार 80 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है।

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में किसानों ने 21 हजार से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें सुपर सीडर की संख्या सबसे अधिक रही है। इसके अलावा मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल ड्रिल, बेलिंग मशीन और स्ट्रॉ रेक जैसी मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है।

इन मशीनों की मदद से किसान पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाने, उसके बीच अगली फसल की बुवाई करने या उसे इकट्ठा करके दूसरे उपयोगों के लिए भेजने जैसे विकल्प अपना सकते हैं।

पराली प्रबंधन के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना

पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के मद में 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को तकनीकी सहायता देने और पराली के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।

इससे पहले 2025 के सीजन में आधुनिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए लगभग 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सरकारी प्रयासों का उद्देश्य किसानों को ऐसे व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना है, जिनसे धान की कटाई के बाद खेतों को समय पर गेहूं की बुवाई के लिए तैयार किया जा सके।

धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय

किसानों के सामने पराली प्रबंधन की चुनौती केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय कम मिलता है। ऐसे में खेत से पराली हटाने, मशीनों का इंतजाम करने और अवशेषों को दूसरी जगह पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह चुनौती अधिक हो सकती है।

इसलिए पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए निगरानी और कानूनी कार्रवाई के साथ सस्ती मशीनों की उपलब्धता, साझा मशीन केंद्रों और किसानों को समय पर तकनीकी सहायता देना भी महत्वपूर्ण है।

बायोगैस और बायो-CNG में भी संभावनाएं

धान की पराली का उपयोग बायोगैस, बायो-CNG, बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है। यदि किसानों को पराली के लिए नियमित खरीदार, उचित कीमत और किफायती परिवहन की सुविधा मिलती है, तो फसल अवशेष उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन सकते हैं।

हालांकि, इससे होने वाली आय पराली की मात्रा, बाजार में मांग, परिवहन खर्च और संबंधित परियोजनाओं की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे विकल्पों को बड़े स्तर पर विकसित करना पराली प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

किसानों की भागीदारी के बिना संभव नहीं समाधान

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों के मुकाबले आई कमी के पीछे सरकारी योजनाओं, कृषि मशीनों की उपलब्धता, निगरानी और किसानों की भागीदारी जैसे कई कारक महत्वपूर्ण हैं। केवल किसी एक योजना को इसका पूरा श्रेय देना उचित नहीं होगा।

आगे की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पराली प्रबंधन के विकल्प हर किसान तक समय पर पहुंचें और उनका उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक बना रहे। इसके साथ ही चालू सीजन के आंकड़ों की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि पिछले वर्षों में दर्ज सुधार को आगे भी बनाए रखा जा रहा है या नहीं।

PMJJBY Fraud: मध्य प्रदेश में 9.5 करोड़ का बीमा घोटाला, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों से क्लेम लेने का आरोप

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 9.5 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े की जांच। CID ने दो FIR दर्ज कीं, 121 क्लेम और 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में।

भोपाल / सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत कथित बीमा घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए करीब 9.5 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम हासिल किए गए। इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने दो FIR दर्ज की हैं। अब तक 121 संदिग्ध क्लेम मामलों की जांच की जा रही है, जबकि 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कथित गिरोह ने जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर बीमा कंपनियों से क्लेम लेने की कोशिश की। इस पूरे मामले ने बैंकिंग व्यवस्था, नगरीय निकायों में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और बीमा क्लेम के सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

गरीबों के लिए शुरू की गई योजना में कथित फर्जीवाड़ा

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना केंद्र सरकार की जीवन बीमा योजना है, जिसके तहत पात्र खाताधारकों को निर्धारित वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, कथित गिरोह ने लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बीमा पॉलिसियां लीं। कुछ मामलों में शुरुआत में एक या दो प्रीमियम की किश्तें जमा कराई गईं। इसके बाद बीमित व्यक्ति की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से होने का दावा करते हुए कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर क्लेम हासिल किए गए।

ग्वालियर, मुरैना और राजस्थान तक जांच का दायरा

मामले की जांच केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और मध्य प्रदेश के अन्य इलाकों के साथ राजस्थान के कुछ स्थानों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि अलग-अलग बैंकों में खोले गए खातों और बीमा पॉलिसियों का इस्तेमाल कथित ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया।

जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि कुछ बीमित व्यक्तियों के पते, मृत्यु के कथित स्थान और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले निकायों के बीच मेल नहीं था। एक ही परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु कम समय के अंतराल में दर्ज किए जाने के मामलों ने भी एजेंसियों का ध्यान खींचा।

एक मोबाइल नंबर और नॉमिनी से खुला शक

कथित फर्जीवाड़े की जांच के दौरान बैंक खातों और बीमा दस्तावेजों में कुछ असामान्य समानताएं सामने आईं। कई खातों में एक ही मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी दर्ज होने और अलग-अलग पॉलिसियों में समान व्यक्तियों को नॉमिनी बनाए जाने की जानकारी जांच का हिस्सा है।

इन समानताओं और मृत्यु प्रमाण पत्रों से जुड़े असामान्य पैटर्न के आधार पर संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बैंक खाते किसने खुलवाए, दस्तावेज किसने जमा किए और बीमा क्लेम की रकम किन लोगों तक पहुंची।

रतलाम के बैंक खातों से जुड़े दावों की जांच

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रतलाम स्थित फेडरल बैंक के 62 खातों से करीब 2.5 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम से संबंधित लेन-देन की जांच की जा रही है। इसके अलावा, 121 पॉलिसीधारकों में से 28 के मृत्यु प्रमाण पत्र राजस्थान के सवाई माधोपुर से जारी होने की बात सामने आई है।

अन्य प्रमाण पत्रों के संबंध में ग्वालियर नगर निगम, मालनपुर, भिंड, गोहद क्षेत्र के गांव लेचौरा, शिवपुरी जिले के पार्वती बड़ौदा और मुरैना के कैलारस से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की वास्तविकता, जारी करने की प्रक्रिया और बीमा कंपनियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही हैं।

एक ही पते पर कई बैंक खाते मिलने का दावा

जांच में कुछ ऐसे पते भी सामने आए हैं, जहां कई बैंक खाते दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें मुरैना के जैन बगीची, रामनगर क्षेत्र के एक पते पर 12 खाते, ग्वालियर के थाटीपुर ग्रिड क्षेत्र के एक पते पर 12 खाते, मुरैना की गायत्री कॉलोनी में 9 खाते और ग्वालियर की नारायण विहार कॉलोनी में 3 खाते शामिल बताए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, इंदौर की पीपल्याहाना शाखा से 59 खातों के आवेदन पत्र, KYC दस्तावेज और लेन-देन के विवरण जब्त किए जाने की जानकारी है। बेंगलुरु स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रामानगरम शाखा और अन्य राज्यों से जुड़े कुछ बीमा रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

क्लेम की रकम निकालने के तरीके की भी जांच

आरोप है कि बीमा क्लेम की रकम खातों में आने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों के ATM से नकदी निकाली गई। जांच एजेंसियां बैंक खातों, ATM निकासी, लेन-देन के रिकॉर्ड और संदिग्ध व्यक्तियों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं, ताकि कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।

मोहन यादव सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने की बात कही गई है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की स्थिति गंभीर है और केंद्र सरकार की योजना भी इससे अछूती नहीं रही।

पटवारी ने सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे ‘अलीबाबा और 40 चोर’ की सरकार कहा। उनके बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

फिलहाल, CID की जांच का मुख्य उद्देश्य कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों की उत्पत्ति, बैंक खातों के संचालन, बीमा क्लेम के भुगतान और इसमें शामिल संभावित लोगों की भूमिका का पता लगाना है। जांच के नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि कथित घोटाले में कितने लोग शामिल थे और संबंधित संस्थाओं की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई थी या नहीं।

अमित शाह का कांग्रेस-AAP पर हमला, यमुना सफाई के लिए ₹8,941 करोड़ की परियोजनाएं

अमित शाह ने दिल्ली में 8,941 करोड़ रुपये की DJB की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास किया। यमुना सफाई को लेकर केजरीवाल और राहुल गांधी पर साधा निशाना।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली में यमुना नदी के पुनरुद्धार और जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की कुल लागत 8,941 करोड़ रुपये बताई गई है। इस दौरान शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पर निशाना साधते हुए यमुना की सफाई, वोट चोरी के आरोपों और दिल्ली की पिछली सरकार के कामकाज को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। उन्होंने दावा किया कि कम समय में इस दिशा में 40 प्रतिशत से अधिक काम किया जा चुका है। शाह के मुताबिक, शुरू की गई परियोजनाओं में गंदे पानी के शोधन, सीवरेज व्यवस्था और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने से जुड़े कार्य शामिल हैं।

केजरीवाल के यमुना में डुबकी लगाने के वादे पर निशाना

अमित शाह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने यमुना नदी में डुबकी लगाने के कई वादे किए, लेकिन नदी की सफाई के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। शाह ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने यमुना के शुद्धिकरण के लिए तीन साल का एक्शन प्लान तैयार किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य दिल्ली के हर घर को सीवरेज कनेक्शन उपलब्ध कराना और प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि यमुना के पुनरुद्धार और दिल्ली की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

राहुल गांधी और कांग्रेस पर वोट चोरी के आरोपों को लेकर पलटवार

सभा के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगाता है और कभी ईवीएम को लेकर सवाल उठाता है। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष इन मुद्दों के जरिए घुसपैठियों के वोट बचाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि देश की जनता विपक्ष की राजनीति को समझ चुकी है। शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर विकास के मुद्दों के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने का आरोप लगाया।

पंजाब में भी AAP सरकार को हटाने की कही बात

अमित शाह ने आम आदमी पार्टी की पिछली दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें केंद्र से सहयोग नहीं मिलने का बहाना बनाती रही हैं। शाह ने पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास आम आदमी पार्टी के आरोपों का जवाब है, लेकिन वह पंजाब में भी AAP सरकार को सत्ता से हटाने के बाद जवाब देंगे।

दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों के मुद्दे पर भी शाह ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार कूड़े के पहाड़ों को कम करने की दिशा में काम कर रही है और आने वाले दो वर्षों में संबंधित स्थान पर बगीचा दिखाई देगा।

दिल्ली में शुरू की गई 8,941 करोड़ रुपये की ये 43 परियोजनाएं यमुना के पुनरुद्धार, सीवरेज प्रबंधन और पेयजल व्यवस्था से जुड़ी हैं। इनके क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति पर आने वाले समय में दिल्ली की जल एवं स्वच्छता व्यवस्था में होने वाले बदलाव निर्भर करेंगे।