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शेयर बाजार में ‘लाल निशान’ का आतंक: मार्च में निवेशकों के डूबे ₹51 लाख करोड़, सेंसेक्स 11% से ज्यादा टूटा

बिजनेस डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना किसी भयावह सपने जैसा साबित हुआ है। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों को भारी आर्थिक चोट पहुंची है। आंकड़ों के अनुसार, इस महीने की बिकवाली ने निवेशकों की 51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति स्वाहा कर दी है।

दो दिनों में मची भारी तबाही: बाजार में गिरावट का आलम यह रहा कि पिछले केवल दो कारोबारी सत्रों में ही सेंसेक्स 4 प्रतिशत (लगभग 3,325 अंक) से ज्यादा लुढ़क गया। इन दो दिनों की गिरावट मात्र से इक्विटी निवेशकों को 18.60 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सोमवार को 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर 71,947.55 के स्तर पर बंद हुआ।

पश्चिम एशिया में संघर्ष: जानकारों के मुताबिक, ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल का तनाव पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर गया है, जो थमने का नाम नहीं ले रहा।कच्चे तेल में उबाल: युद्ध की वजह से वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

विदेशी निवेशकों (FII) की निकासी: मार्च 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी निकासी की है। यह 2020 की महामारी के बाद से जोखिम से बचने की सबसे तीव्र लहर मानी जा रही है।

कौन से सेक्टर और शेयर सबसे ज्यादा गिरे? बाजार की इस सुनामी में बजाज फाइनेंस, एसबीआई (SBI), इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियों में शामिल रहे। क्षेत्रवार देखें तो PSU बैंक (4.60% की गिरावट) और प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

हैरानी की बात यह रही कि सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से केवल पावर ग्रिड ही ऐसी कंपनी थी, जिसके शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस नहीं लौटता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।