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‘संकटमोचन’ नहीं ‘रिंकू’ ही ठीक है: रिंकू सिंह ने ठुकराया नया नाम, LSG के खिलाफ जीत के बाद कही दिल जीतने वाली बात

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को हरा दिया, जिसमें रिंकू सिंह एक बार फिर जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे। इस शानदार प्रदर्शन के बाद जब उन्हें ‘संकटमोचन’ जैसा नया नाम देने का प्रस्ताव रखा गया, तो उन्होंने बड़ी सादगी से इसे मना कर दिया।

रोमांचक जीत: इकाना स्टेडियम में 26 अप्रैल को खेले गए इस मैच का फैसला सुपर ओवर में हुआ, जहाँ रिंकू सिंह की बल्लेबाजी और चुस्त फील्डिंग की बदौलत केकेआर ने जीत दर्ज की।

रिंकू का धाकड़ प्रदर्शन: रिंकू सिंह ने इस मैच में 51 गेंदों पर नाबाद 83 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 5 छक्के और 7 चौके शामिल थे। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने फील्डिंग में भी कमाल दिखाते हुए 5 कैच लपके।

नया नाम ठुकराया: मैच के बाद जब प्रेजेंटर ने उनसे पूछा कि क्या अब उन्हें ‘संकटमोचन’ कहा जाना चाहिए, तो रिंकू ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ ‘रिंकू’ कहलाना ही पसंद है और वही नाम उनके लिए अच्छा है।

जीत की रणनीति: रिंकू ने अपनी सफलता का मंत्र साझा करते हुए बताया कि उनके दिमाग में बस गेम को आखिर तक ले जाने और खराब गेंदों का इंतजार करने की योजना थी।

रिंकू सिंह के इस प्रदर्शन की हर तरफ सराहना हो रही है क्योंकि उन्होंने मुश्किल वक्त में टीम की कमान संभाली और केकेआर के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर से साबित किया।

क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन: लंबे समय से कैंसर से थे बीमार; पिता की बिगड़ती हालत देख बीच में छोड़ा था टी20 वर्ल्ड कप का साथ

स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता खचंद्र सिंह का शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को निधन हो गया। वे काफी लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अंतिम सांस ली।

अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे खचंद्र सिंह : जानकारी के मुताबिक, खचंद्र सिंह की हालत पिछले कई दिनों से बेहद नाजुक बनी हुई थी। उन्हें अस्पताल में मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था और लगातार ‘रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी’ दी जा रही थी। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पिता के लिए रिंकू ने छोड़ा था प्रैक्टिस सेशन : रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया के साथ चेन्नई में थे। मंगलवार, 24 फरवरी को जब टीम इंडिया का प्रैक्टिस सेशन चल रहा था, तब रिंकू सिंह पिता की खराब सेहत की खबर मिलते ही अभ्यास छोड़कर तुरंत नोएडा रवाना हो गए थे। वह इस वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज और सुपर-8 के मैचों का हिस्सा रहे थे, हालांकि हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ हुए मैच में उन्हें प्लेइंग XI में शामिल नहीं किया गया था।

28 वर्षीय रिंकू सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता के निधन पर खेल जगत और उनके प्रशंसकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

T20 वर्ल्ड कप 2026: टीम इंडिया की बड़ी कमजोरी आई सामने, पाकिस्तान-कनाडा से भी बुरा हाल; सुपर-8 से पहले बढ़ी टेंशन

स्पोर्ट्स डेस्क : टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में लगातार 4 मैच जीतकर भारतीय टीम ने शानदार तरीके से सुपर-8 में जगह बना ली है। हालांकि, इस शानदार प्रदर्शन के बीच टीम इंडिया की एक ऐसी कमजोरी उजागर हुई है जो बड़े मैचों में खिताब का सपना तोड़ सकती है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी में कमाल दिखाने वाली भारतीय टीम फील्डिंग और कैचिंग के मामले में फिसड्डी साबित हो रही है।

कैच छोड़ने में भारत दूसरे नंबर पर: हैरान करने वाले आंकड़े बताते हैं कि टूर्नामेंट में अब तक भारत ने कुल 9 कैच छोड़े हैं, जो भाग लेने वाली 20 टीमों में दूसरा सबसे खराब रिकॉर्ड है। इस लिस्ट में केवल आयरलैंड (10 कैच) ही भारत से पीछे है। चौंकाने वाली बात यह है कि फील्डिंग के मामले में पाकिस्तान और कनाडा जैसी टीमों का प्रदर्शन भी भारत से बेहतर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, टीम इंडिया का कैचिंग प्रतिशत 70 से भी नीचे गिर गया है और हर मैच में औसतन 2-3 कैच छूट रहे हैं।

मैदान पर तालमेल की कमी: नीदरलैंड्स के खिलाफ हुए हालिया मैच में भी कैचिंग को लेकर भारी चूक देखी गई, जहाँ एक कैच लेने के प्रयास में सूर्यकुमार यादव और रिंकू सिंह आपस में टकरा गए थे, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी को चोट नहीं आई। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच में भी कुलदीप यादव और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों ने कैच टपकाए थे, जिससे टीम पर दबाव बढ़ गया था।

सुपर-8 में बढ़ सकती है चुनौती : सुपर-8 स्टेज में भारत का सामना साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी आक्रामक और मजबूत टीमों से होना है। जानकारों का मानना है कि इन बड़े मुकाबलों में फील्डिंग की ये छोटी-छोटी गलतियां मैच का रुख बदल सकती हैं और भारत को भारी पड़ सकती हैं। टूर्नामेंट जीतने के लिए भारतीय खिलाड़ियों को अपनी फील्डिंग ड्रिल्स पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।