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लुधियाना में वर्धमान-आइची स्टील फोर्जिंग प्लांट की आधारशिला, 500 युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार: CM भगवंत मान
  • मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारत के अपनी तरह के पहले 1,116 करोड़ रुपए की लागत वाले वर्धमान-आईची स्टील फोर्जिंग प्लांट का नींव पत्थर रखा, 500 युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार
  • अगली वर्धमान-आईची स्टील यूनिट 2,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब के अनुकूल औद्योगिक माहौल को देखते हुए शुरुआती 500 करोड़ रुपए के समझौते के बावजूद वर्धमान-आईची ने निवेश बढ़ाकर 1,116 करोड़ रुपए किया: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • प्लांट में तैयार किए जाने वाले ऑटोमोबाइल पार्ट्स भारत और अन्य देशों में निर्यात किए जाएंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • नई औद्योगिक नीति के तहत पंजाब अब ‘सिंगल-विंडो, सिंगल-पेन’ के माध्यम से 45 दिनों के अंदर सभी मंजूरियां प्रदान करता है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जापान की आईची स्टील की भागीदारी के साथ वर्धमान स्पेशल स्टील्स द्वारा स्थापित किए जा रहे देश के अपनी तरह के पहले 1,116 करोड़ रुपए के फोर्जिंग और मशीनिंग यूनिट का नींव पत्थर रखा। उन्होंने इसे पंजाब के औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में बड़ा प्रोत्साहन बताया। यह प्रोजेक्ट 500 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि वर्धमान-आईची के प्रोजेक्ट के भविष्य के विस्तार से अन्य 2,000 लोगों के लिए नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों द्वारा पंजाब के अनुकूल औद्योगिक माहौल को देखते हुए निवेश को 500 करोड़ रुपए के शुरुआती समझौते से बढ़ाकर 1,116 करोड़ रुपए किया गया है, जो राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। यह प्लांट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उच्च-मूल्य वाले ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्माण करेगा, जबकि पंजाब की नई औद्योगिक नीति ‘सिंगल-विंडो, सिंगल-पेन’ प्रणाली के माध्यम से 45 दिनों के अंदर सभी मंजूरियों को सुनिश्चित करती है।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह प्रोजेक्ट पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र के लिए नए युग की शुरुआत है। यह राज्य के आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ 500 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार प्रदान करेगा। वर्धमान न केवल अग्रणी औद्योगिक समूह है, बल्कि पंजाब की विकास गाथा का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है, जो लगभग चार दशकों से राज्य में काम कर रहा है। वर्धमान और आईची स्टील के बीच भागीदारी भरोसे, प्रौद्योगिकी और लंबे समय के दृष्टिकोण पर आधारित है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “आईची स्टील मान्यता प्राप्त जापानी कंपनी है और टोयोटा ग्रुप की महत्वपूर्ण सप्लायर है। दिसंबर 2025 में हमारी जापान यात्रा के दौरान हमने नागोया में आईची स्टील की लीडरशिप से मुलाकात की थी। उस समय वर्धमान और आईची स्टील ने पंजाब में लगभग 500 करोड़ रुपए के निवेश के साथ मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं के लिए समझौता किया था। आज कुछ ही महीनों के अंदर इस समझौते को अमली रूप दे दिया गया है। यह नीति को अमल में लाने और प्रतिबद्धता को हकीकत में बदलने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। दो चरणों में लगभग 1,100 करोड़ रुपए का नियोजित निवेश किया जाना है।”

प्रोजेक्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह प्रोजेक्ट पंजाब में जापानी आधुनिक फोर्जिंग प्रौद्योगिकी लाएगा और भारत के साथ-साथ यूरोप, आसियान देशों, अफ्रीका और मेक्सिको के बाजारों के लिए उच्च-मूल्य वाले ऑटोमोबाइल पार्ट्स का निर्माण करेगा। पंजाब न केवल विशेष स्टील का उत्पादन करेगा बल्कि तैयार पार्ट्स का निर्माण भी करेगा। यह बुनियादी निर्माण से उच्च-मूल्य वाले निर्माण की ओर महत्वपूर्ण बदलाव है और इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट्स तथा एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के मुख्य केंद्र के रूप में लुधियाना की स्थिति को और मजबूत करेगा।”

राज्य के औद्योगिक ढांचे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह निवेश पंजाब के कुशल श्रमिकों, वर्क कल्चर और औद्योगिक क्षमता में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के विश्वास को दर्शाता है। ‘पंजाब इंडस्ट्रियल एंड ट्रेड डेवलपमेंट पॉलिसी 2026’ 24 क्षेत्रीय नीतियों के माध्यम से सहायता प्रदान करती है और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रौद्योगिकी, रोजगार और टिकाऊ औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करती है। निवेशकों को उनके प्रोजेक्ट्स के दौरान स्पष्ट नीतियां, तुरंत फैसले और पूर्ण सहयोग मिलना चाहिए।”

उन्होंने बताया, “पंजाब ने वन-ऑफिस, वन पोर्टल, ‘सिंगल विंडो-सिंगल पेन’ और सिंगल-पॉइंट रिस्पांसिबिलिटी की एक विशिष्ट प्रणाली स्थापित की है। ‘इन्वेस्ट पंजाब’ शुरुआत से लेकर मंजूरियों, निर्माण, उत्पादन और भविष्य के विस्तार तक निवेशकों के लिए संपर्क का एकमात्र केंद्र के रूप में काम करता है। ‘फास्ट ट्रैक पंजाब पोर्टल’ के माध्यम से निवेशक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, फीस का भुगतान कर सकते हैं और मंजूरियों की स्थिति देख सकते हैं। यह पोर्टल 200 से अधिक कारोबारी सेवाएं और लगभग 50 मुख्य रेगुलेटरी मंजूरियां प्रदान करता है।”

कारोबार करने की आसानी पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मंजूरियां निर्धारित समय में दी जाती हैं और आवेदनों पर अधिकतम 45 कार्यदिवसों के अंदर फैसला किया जाता है। जहां कहीं ‘सिंगल विंडो-सिंगल पेन’ सिस्टम लागू होता है, वहां ऑटो-डीम्ड मंजूरी का प्रावधान होता है। हमारा उद्देश्य अनावश्यक देरी को समाप्त करना और प्रशासन को पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाना है। पंजाब पहले ही लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित कर चुका है, जिससे लगभग छह लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा। यह निवेश उद्योगपतियों के पंजाब के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है और पंजाब भी उद्योगों के साथ मजबूती से खड़ा है।”

जापान में राज्य सरकार की गतिविधियों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा जापान दौरा महज एक विदेशी दौरा नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य पंजाब में निवेश, प्रौद्योगिकी, हुनर और विश्वव्यापी अवसर आकर्षित करना था। हमने टोक्यो, नागोया और ओसाका में प्रमुख जापानी कंपनियों और संस्थानों से बातचीत की और आज का यह प्रोजेक्ट उस मिशन के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है। पंजाब सरकार इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए वर्धमान और आईची स्टील को पूरा सहयोग देगी।”

पंजाब के औद्योगिक माहौल में आई प्रगतिशील तब्दीली पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण पिछले चार वर्षों के दौरान दूसरे राज्यों से कई उद्योगों ने अपने कारोबार पंजाब में स्थानांतरित किए हैं। हमें एक ऐसा सिस्टम विरासत में मिला था जहां पिछली सरकारों के समय फिरौती और हिस्सेदारी सिस्टम से तंग आकर उद्योग पंजाब से भाग रहे थे। निरंतर प्रयासों के माध्यम से हमने उद्योगों का विश्वास बहाल किया है और पंजाब को औद्योगिक विकास में अग्रणी बनाया है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “वे दिन बीत चुके हैं जब निवेशकों पर अनुचित लाभ या उनके उद्यमों में हिस्सेदारी के लिए दबाव डाला जाता था। आज पंजाब सरकार सिर्फ पंजाब और पंजाबियों की भलाई के लिए काम करती है। टाटा स्टील ने पहले ही 3,200 करोड़ रुपए के निवेश के साथ पंजाब में जमशेदपुर के बाद अपना दूसरा सबसे बड़ा प्लांट स्थापित किया है। यह भी बहुत गर्व की बात है कि सनातन टेक्सटाइल, नेस्ले, क्लास, फ्रायडेनबर्ग, कारगिल, वर्बियो और डेनोन जैसी अग्रणी कंपनियों ने राज्य में अपना कारोबार शुरू कर दिया है।”

रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करने के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारा उद्देश्य हमारे युवाओं को रोजगार प्रदान करना है ताकि वे नशे की लानत से दूर रहें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और बेरोजगारी कई सामाजिक समस्याओं की जड़ है। इसलिए पंजाब सरकार अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि हमारे युवा सम्मानजनक नौकरियों के माध्यम से एक खुशहाल भविष्य का निर्माण करें।”

पंजाब गवर्नर और केंद्रीय राज्य मंत्री ने 1,044 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

‘विश्व युवा कौशल दिवस’ के मौके पर आज लुधियाना के गिल रोड स्थित सरकारी ITI कैंपस के ‘वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ एक्सीलेंस’ में सन फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे ‘मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स’ (MSDCs) का एक भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पंजाब भर में सन फाउंडेशन के स्किल सेंटर्स में प्रशिक्षित 1,044 युवाओं को सर्टिफिकेट और नियुक्ति पत्र दिए गए। इस समारोह में पंजाब के माननीय गवर्नर गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए, जबकि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की मेजबानी पद्म डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, सांसद (राज्यसभा) और चेयरमैन, सन फाउंडेशन ने की।

इस कार्यक्रम में पंजाब भर से 3,000 से अधिक युवाओं, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों, शिक्षण संस्थानों, नियोक्ताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिससे यह राज्य में ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ के सबसे बड़े आयोजनों में से एक बन गया।

पंजाब के गवर्नर श्री गुलाब चंद कटारिया ने कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में सन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे बेहतरीन कार्यों की बहुत सराहना की। उन्होंने पद्म श्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी के दूरदर्शी नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि फाउंडेशन की पहल पंजाब भर के हजारों युवाओं को कौशल और सम्मानजनक रोजगार के अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बना रही है।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने पंजाब में विश्व स्तरीय कौशल विकास केंद्र बनाने के लिए पद्म श्री डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी और सन फाउंडेशन की टीम की प्रशंसा की। उन्होंने सन फाउंडेशन को कौशल और रोजगार के क्षेत्र में एक आदर्श संस्थान बताया और युवा सशक्तिकरण तथा राष्ट्र निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. साहनी को बधाई दी।

सभा को संबोधित करते हुए, सांसद (राज्यसभा) और सन फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि कौशल विकास और रोजगार सृजन पंजाब में बेरोजगारी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और पलायन की चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने बताया कि सन फ़ाउंडेशन आज पंजाब भर में अपने ‘मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ के नेटवर्क के ज़रिए हर साल 5,000 से ज़्यादा युवाओं को ‘स्किल फ़ॉर जॉब्स’ (नौकरी के लिए कौशल) के तहत इंडस्ट्री से जुड़ी और भविष्य के लिए तैयार करने वाली ट्रेनिंग देता है।

उन्होंने आगे कहा कि सन फ़ाउंडेशन सेंटर्स में ट्रेनिंग लेने वाले हज़ारों युवाओं को इंडिगो एयरलाइंस, ताज होटल्स, मैरियट, रैडिसन, शाही एक्सपोर्ट्स, एवन साइकिल्स जैसी बड़ी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर की कई नामी कंपनियों में नौकरी मिली है। डॉ. साहनी ने कहा कि सन फ़ाउंडेशन मार्केट की मांग के हिसाब से कोर्स तैयार करके और युवाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार के मौके पक्के करके, इंडस्ट्री की ज़रूरतों और युवाओं की उम्मीदों के बीच के अंतर को सफलतापूर्वक कम कर रहा है।

मान्यवरों ने ‘वर्ल्ड स्किल कैंपस ऑफ़ एक्सीलेंस’ का दौरा भी किया, जहाँ उन्होंने ट्रेनिंग लेने वालों से बातचीत की और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और कई उभरते हुए सेक्टर में कौशल दिखाने वाली प्रदर्शनियों और लाइव डेमो का निरीक्षण किया।

रोजगार में लुधियाना सबसे आगे: श्रमिक अनुपात में फरीदाबाद-दिल्ली को छोड़ा पीछे

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 57 प्रतिशत है, जो दिल्ली (41.2 प्रतिशत) और फरीदाबाद (44 प्रतिशत) से बेहतर है। नियमित वेतनभोगियों की हिस्सेदारी भी 63 प्रतिशत है, जो कई बड़े शहरों के बराबर या उनसे बेहतर है।

रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना में औद्योगिक गतिविधियां तेज होने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योगों में कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को देखते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।

लुधियाना में स्वरोजगार करने वालों का प्रतिशत 34.7 है जबकि आकस्मिक श्रमिक (कैजुअल लेबर) 2.3 प्रतिशत हैं। शहर की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो फरीदाबाद (4.9 प्रतिशत) और दिल्ली (5.3 प्रतिशत) से कम है। हालांकि महिलाओं की श्रम भागीदारी अब भी चिंता का विषय है। महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 22.8 प्रतिशत है। महिलाओं में बेरोजगारी दर 3.8 प्रतिशत जबकि पुरुषों में 3.4 प्रतिशत है। दिल्ली में महिलाओं की बेरोजगारी 8.4 प्रतिशत और पुरुषों की 4.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

अमृतसर में रोजगार की तस्वीर कमजोर

रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर में रोजगार की स्थिति लुधियाना के मुकाबले कमजोर है। यहां श्रमिक जनसंख्या अनुपात 45.8 प्रतिशत है जबकि पुरुषों में यह 69 प्रतिशत और महिलाओं में केवल 21.2 प्रतिशत है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सरकार रोजगार बढ़ाने के प्रयास कर रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी नहीं मिल पाए हैं। महिलाओं की श्रम भागीदारी यहां भी काफी कम बनी हुई है।

बेरोजगारी दर 8.7%, महिलाओं पर ज्यादा असर

अमृतसर की कुल बेरोजगारी दर 8.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो लुधियाना से काफी अधिक है। पुरुषों में यह 7.6 प्रतिशत और महिलाओं में 12.3 प्रतिशत है। शहर में स्वरोजगार का प्रतिशत 43.9 है। स्वरोजगार में 49.2 प्रतिशत पुरुष और 25.9 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं आकस्मिक श्रमिकों की हिस्सेदारी 11.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं की रोजगार भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह अब भी संतोषजनक स्तर से काफी नीचे है।

ट्रंप के वादों और हकीकत के बीच फासला, अमेरिकी श्रमिकों को नहीं मिला अपेक्षित आर्थिक लाभ

वॉशिंगटन / सत्ता संदेश

अमेरिका में रोजगार, विनिर्माण और मजदूर वर्ग की आय बढ़ाने के वादों के साथ सत्ता में लौटे राष्ट्रपति Donald Trump की आर्थिक नीतियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि तमाम बड़े वादों और नीतिगत घोषणाओं के बावजूद अमेरिकी श्रमिकों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया है।

ट्रंप ने अपने चुनावी अभियानों में बार-बार यह दावा किया था कि उनकी नीतियां अमेरिकी उद्योगों को पुनर्जीवित करेंगी, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ाएंगी और विदेशी प्रतिस्पर्धा से प्रभावित श्रमिकों को राहत प्रदान करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से चीन के साथ व्यापार असंतुलन, विदेशी आयात और अमेरिकी नौकरियों के पलायन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।

हालांकि कई आर्थिक अध्ययनों और श्रम बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक तस्वीर अधिक जटिल है। कुछ क्षेत्रों में निवेश और रोजगार बढ़ने के बावजूद व्यापक स्तर पर श्रमिकों की वास्तविक आय, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल रोजगार सृजन के आंकड़े किसी अर्थव्यवस्था की पूरी कहानी नहीं बताते। महंगाई, आवास लागत, स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी आम श्रमिक की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। यदि मजदूरी की वृद्धि इन खर्चों की तुलना में धीमी रहती है, तो श्रमिकों की वास्तविक क्रय शक्ति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता।

कई श्रम संगठनों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र में कुछ सुधार जरूर देखने को मिले हैं, लेकिन स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी संरचनात्मक चुनौतियां अभी भी अमेरिकी श्रमिकों के सामने मौजूद हैं। इसके कारण पारंपरिक औद्योगिक नौकरियों में स्थायी वृद्धि सीमित रही है।

दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि उनकी व्यापार नीतियों, कर सुधारों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने अमेरिकी उद्योगों को मजबूती दी है। उनका कहना है कि आर्थिक लाभों का प्रभाव दीर्घकालिक होता है और कई क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम धीरे-धीरे दिखाई दे रहे हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति का मूल्यांकन केवल राजनीतिक वादों के आधार पर नहीं किया जा सकता। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, तकनीकी परिवर्तन, ऊर्जा लागत, ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां भी रोजगार और आय पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।

वर्तमान बहस यह संकेत देती है कि अमेरिकी राजनीति में श्रमिक वर्ग का मुद्दा अभी भी केंद्रीय विषय बना हुआ है। चाहे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, दोनों दलों के लिए यह वर्ग चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि अमेरिकी श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार के लिए केवल संरक्षणवादी नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए कौशल विकास, आधुनिक उद्योगों में निवेश, शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को भी समान महत्व देना होगा।

इसी वजह से ट्रंप के आर्थिक वादों और श्रमिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को लेकर बहस आने वाले समय में भी अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था का प्रमुख मुद्दा बनी रहने की संभावना है।