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चीन में बड़ा हादसा! किंगदाओ शिपयार्ड में मालवाहक जहाज में भीषण आग, 30 मौतों की आशंका

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

चीन के किंगदाओ शिपयार्ड में एक विदेशी मालवाहक जहाज में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे में करीब 30 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि चीन की ओर से अभी तक मृतकों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी के मुताबिक, जिस मालवाहक जहाज में आग लगी, वह मरम्मत के लिए किंगदाओ शिपयार्ड में खड़ा था। इसी दौरान अचानक जहाज में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसका ऊपरी हिस्सा आग की चपेट में आ गया। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की कई टीमों को मौके पर भेजा गया है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, आग लगने वाला जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला मालवाहक पोत ‘ओशन मेलोडी’ है। जहाज का इस्तेमाल किस कंपनी या ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा था, इस संबंध में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि जहाज को कुछ दिन पहले ही चीन के किंगदाओ लाया गया था और यहां इसकी मरम्मत का काम चल रहा था।

हादसे के बाद चीन के राष्ट्रपति भी सक्रिय हो गए हैं और राहत एवं बचाव अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली कियांग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश तेज करने और बचाव अभियान को पूरी गंभीरता से चलाने के निर्देश दिए हैं। आशंका है कि हादसे में प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या शिपयार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की हो सकती है।

घटना के बाद शिपयार्ड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सामने आई तस्वीरों में मालवाहक जहाज का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह जला हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां शिपयार्ड के बाहर तैनात नजर आ रही हैं। चीनी शिपयार्ड के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया के सवालों का फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है।

किंगदाओ में चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन का प्रमुख जहाज निर्माण और मरम्मत परिसर मौजूद है। यहां व्यावसायिक जहाजों के निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत का काम किया जाता है। यह विशाल शिपयार्ड करीब 815 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाने के साथ-साथ लापता लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और हादसे में प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या का पता लगाना है।

18वां ब्रिक्स सम्मेलन : भारत दौरे पर आएंगे राष्ट्रपति जिंनपिं, पीएम मोदी के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। ऐसे में संभावित मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

18वें ब्रिक्स सम्मेलन की भारत में मेजबानी

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने की संभावना है। यदि उनका दौरा होता है तो गलवान हिंसा और उसके बाद पैदा हुए सीमा तनाव के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।

गलवान घाटी में जून 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी। सीमा पर तनाव के साथ-साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ गई थी।

हालांकि, पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई बातचीत के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी रही हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद कुछ तनाव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी भी हुई है।

सीमा विवाद के बीच बातचीत की कोशिश

गलवान के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों तथा राजनयिकों के स्तर पर लगातार बातचीत होती रही है। हाल ही में कजाकिस्तान के बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आए थे और दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया था। हालांकि, उस समय दोनों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

ऐसे में यदि नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत होती है तो इसे भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है। हालांकि, सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।

डोभाल की चीन यात्रा से बनी बातचीत की जमीन

शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म तथा दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत हुई है।

इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, लद्दाख में तनाव कम होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसके इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।

ब्रिक्स सम्मेलन में गुटेरेस भी होंगे शामिल

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की संभावना है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में गुटेरेस 13 सितंबर को मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है।

गुटेरेस अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर दे सकते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां 1945 के दौर जैसी नहीं हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव जरूरी है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

अमृतसर : अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़, 2 AK-47 समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : विक्रमजीत सिंह / तरजिंदर सिंह

कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने गैर-कानूनी हथियार सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 AK-47 राइफल, 3 मैगजीन और 50 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

बरामद हथियारों के संबंध में जानकारी देते हुए अमृतसर के IPS पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि कमिश्नरेट पुलिस की ओर से अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से AK-47 राइफल समेत हथियार और जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

पुलिस ने इस मामले में थाना छेहरटा, अमृतसर में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बरामद हथियार कहां से लाए गए थे और इन्हें आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। मामले में आगे की जांच जारी है।

टांडा के रसूलपुर में अकाली दल की बैठक, अरविंदर सिंह रसूलपुर बोले- ‘AAP सरकार से हर वर्ग दुखी’

होशियारपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी

होशियारपुर में शिरोमणि अकाली दल की ओर से टांडा के गांव रसूलपुर में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में हलके के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला और कई लोग अपने साथ अन्य गांवों के लोगों को भी बैठक में लेकर पहुंचे।

बैठक को संबोधित करते हुए अरविंदर सिंह रसूलपुर ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में मौजूदा सरकार के कार्यकाल से किसान, व्यापारी, कर्मचारी और नौजवान समेत विभिन्न वर्गों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए दावों और गारंटियों को लेकर भी लोगों में निराशा बढ़ रही है।

अरविंदर सिंह रसूलपुर ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने नौजवानों से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के साथ कथित तौर पर बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण पंजाब के लोगों को पिछली सरकारों का समय याद आने लगा है। अरविंदर सिंह रसूलपुर ने शिरोमणि अकाली दल को पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी की नीतियां और मुद्दे पंजाब तथा पंजाबियों के हितों से जुड़े हुए हैं।

बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अकाली दल की नीतियों और विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाने तथा आम लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की अपील की। इस मौके पर बड़ी संख्या में अकाली दल के कार्यकर्ता और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।

अमृतसर : PCR सिस्टम का बड़ा बदलाव, अब 68 बीट और 34 रेड अलर्ट पॉइंट पर रहेगी नजर

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट :विक्रमजीत सिंह/तरजिंदर सिंह

अमृतसर में अपराध पर लगाम लगाने, 112 इमरजेंसी कॉल पर पुलिस की त्वरित मदद सुनिश्चित करने और पुलिस की ग्राउंड लेवल मौजूदगी मजबूत करने के लिए कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने PCR सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। नए सिस्टम के तहत शहर को 68 PCR बीट में बांटा गया है, जबकि 34 रेड अलर्ट पॉइंट चिन्हित किए गए हैं।

अमृतसर के पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल, IPS ने 13 नई PCR मोटरसाइकिलों और 5 नई गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान DCP लोकल आकर्षि जैन, DCP ऑपरेशंस जुगराज सिंह, DCP इन्वेस्टिगेशन प्रभजोत सिंह विर्क और DCP लॉ एंड ऑर्डर रविंदर पाल सिंह संधू समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पुलिस के मुताबिक, PCR सिस्टम का नया री-अलाइनमेंट शहर की मौजूदा ग्राउंड रियलिटी, जनसंख्या घनत्व और पुलिस स्टेशनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पहले शहर में करीब 50 बीट थीं और कई बीट दो अलग-अलग पुलिस स्टेशनों के इलाकों में ओवरलैप करती थीं। इससे इमरजेंसी के समय पुलिस टीमों को मौके तक पहुंचने में परेशानी होती थी। अब प्रत्येक PCR बीट को संबंधित पुलिस स्टेशन की सीमा के अनुसार स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

68 PCR बीट में बंटा शहर

नए सिस्टम में अमृतसर शहर को कुल 68 PCR बीट में बांटा गया है। पुराने और अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोटरसाइकिल PCR को प्राथमिकता दी गई है, जबकि खुले और नए विकसित इलाकों में PCR वाहनों की तैनाती की जाएगी। इसके तहत 13 नई PCR मोटरसाइकिलें सिस्टम में शामिल की गई हैं, जिनका ट्रायल रन पिछले कुछ दिनों से चल रहा था।

पुलिस का लक्ष्य है कि 112 पर इमरजेंसी कॉल प्राप्त होने के बाद संबंधित PCR टीम को तत्काल अलर्ट किया जाए और पुलिस की प्रतिक्रिया का समय लगभग 5 से 10 मिनट के भीतर रखने का प्रयास किया जाए।

34 रेड अलर्ट पॉइंट पर तुरंत नाकाबंदी

नए PCR सिस्टम में 34 रेड अलर्ट पॉइंट भी तैयार किए गए हैं। किसी आपराधिक घटना या अन्य गंभीर स्थिति में तत्काल नाकाबंदी की जरूरत पड़ने पर कंट्रोल रूम संबंधित PCR टीमों को इन चिन्हित स्थानों पर भेज सकेगा। इससे संदिग्ध वाहनों और लोगों की चेकिंग तथा घटना के बाद घेराबंदी को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

PCR बीट को लगातार सक्रिय रखने के लिए पुलिस लाइन में अतिरिक्त मोटरसाइकिलें रिजर्व में भी रखी गई हैं। किसी बीट की मोटरसाइकिल में तकनीकी खराबी आने पर उसकी जगह तुरंत दूसरी मोटरसाइकिल भेजने की व्यवस्था की गई है।

हर बीट की जानकारी होगी बीट बुक में

पुलिस ने प्रत्येक PCR बीट के लिए विशेष बीट बुक भी तैयार की है। इसमें संबंधित इलाके के अस्पताल, धार्मिक स्थल, बैंक, ATM, रेलवे लाइन, मुख्य सड़कें, संवेदनशील स्थान और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की जानकारी दर्ज होगी। बीट बुक में बीट का लैमिनेटेड मैप भी रखा जाएगा, ताकि किसी नए पुलिसकर्मी को भी इलाके और उसकी जिम्मेदारियों की जानकारी आसानी से मिल सके।

पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने कहा कि PCR सिस्टम के नए री-अलाइनमेंट का मुख्य उद्देश्य क्राइम प्रिवेंशन, तेज रिस्पॉन्स, बेहतर पेट्रोलिंग और पुलिस की लगातार मौजूदगी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि अपराध को रोकने के लिए शहर के महत्वपूर्ण इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग की जाए।

पुलिस के अनुसार नए सिस्टम की लगातार समीक्षा की जाएगी और PCR स्टाफ को नियमित रूप से आवश्यक जानकारी एवं दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

लालगंज में निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरा, छह कर्मचारी घायल; दो की हालत गंभीर

वैशाली के लालगंज में भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-139डब्ल्यू पर निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरने से छह कर्मचारी घायल हो गए। दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बिहार / सत्ता संदेश

बिहार के वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के तहत बनाए जा रहे एनएच-139डब्ल्यू फोरलेन पर गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। निर्माण कार्य के दौरान एक निर्माणाधीन पुल का भारी-भरकम लॉन्चर अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से साइट पर काम कर रहे कई कर्मचारी घायल हो गए। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने घायलों को लालगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में छह घायल कर्मचारियों का इलाज किया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही घायलों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर भी जुट गए और हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों और घायलों के परिजनों ने निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निर्माण के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे और तकनीकी स्तर पर भी जरूरी सावधानियां नहीं बरती गईं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद परियोजना से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार मौके से चले गए। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी या निर्माण कार्य के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई। जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, उपकरणों और तकनीकी व्यवस्थाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Karnataka : सतीश जारकीहोली के ठिकानों पर ED की छापेमारी, परिवार के ठिकाने भी खंगाले

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर ED की तलाशी दूसरे दिन भी जारी रही। गोकाक और बेलगावी में परिवार व करीबियों के ठिकानों पर जांच हुई।

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी लोगों से जुड़े कई ठिकानों पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की। यह जांच कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में की जा रही है।

ईडी अधिकारियों ने गोकाक स्थित सतीश जारकीहोली के आवास पर भी तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान उनकी पत्नी और बेटी के अलावा सांसद प्रियंका जारकीहोली भी घर पर मौजूद थीं। इसके साथ ही बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्य वाई. मंजूनाथ के आवास पर भी जांच एजेंसी ने तलाशी ली।

जांच का दायरा मंत्री के करीबी सहयोगियों और स्टाफ तक भी पहुंचा। ईडी ने सतीश जारकीहोली के करीबी सहयोगी बताए जा रहे गिरीश सोनावलकर के घर की तलाशी ली। इसके अलावा मंत्री के निजी सचिव मालागौड़ा पाटिल के आवास पर भी जांच की गई।

तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों ने सतीश जारकीहोली से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी समन किया। अधिकारियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप कुमार इंदी और सैदप्पा गडागी से वित्तीय लेनदेन और अकाउंटिंग से संबंधित जानकारी मांगी। कार्रवाई के दौरान एक प्रिंटर और कुछ दस्तावेज जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

ईडी की कार्रवाई के बीच कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। धारवाड़ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सदानंद डंगनावर ने कहा कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कामकाज की सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रही है।

डंगनावर ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को अस्थिर नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री एकजुट होकर राज्य के हित में काम कर रहे हैं।

इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मंत्री प्रियंक खरगे भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। दोनों नेताओं ने कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

फिलहाल ईडी की तलाशी और जांच जारी है। कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में जांच एजेंसी किन दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है, इसका पूरा विवरण जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ISRO का बड़ा कदम: CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN थ्रस्ट पर सफल हॉट टेस्ट, LVM3 की बढ़ेगी पेलोड क्षमता

ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट किया। इससे LVM3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 किलो न्यूटन (kN) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 9 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में किया गया।

इस सफल परीक्षण को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य के LVM3 मिशनों में पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले LVM3 मिशन के C32 अपर स्टेज के लिए निर्धारित CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN के बढ़े हुए थ्रस्ट पर फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफल रहा। परीक्षण के दौरान LOX टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) के प्रदर्शन को भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है।

CE20 इंजन LVM3 लॉन्च व्हीकल के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को शक्ति प्रदान करता है। इसरो भविष्य के LVM3 मिशनों के लिए 22 टन थ्रस्ट क्षमता वाले अपग्रेडेड C32 स्टेज पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य रॉकेट की पेलोड क्षमता को और बढ़ाना है, जिससे भविष्य में अधिक भारी उपग्रहों और अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता मजबूत होगी।

इस सफल परीक्षण से पहले मार्च 2026 में भी महेंद्रगिरी स्थित परीक्षण सुविधा में CE20 इंजन का 22 टन थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर हॉट टेस्ट किया गया था। उस परीक्षण में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का इस्तेमाल किया गया था। 165 सेकंड तक चले उस परीक्षण में इंजन और परीक्षण सुविधा ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था।

CE20 इंजन के हाई-एरिया-रेशियो नोजल की समुद्र तल पर टेस्टिंग तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन हो सकता है, जिससे तेज कंपन और थर्मल स्ट्रेस पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट अपग्रेडेड C32 स्टेज को आगामी LVM3 मिशनों में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इसरो की यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है, जब 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (EOS-05) का सफल प्रक्षेपण किया गया था। लगातार सफल परीक्षण और प्रक्षेपण भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत कर रहे हैं।

हमारे दादा सरदार करम सिंह हिस्टोरियन एक टकसाली हिस्टोरियन थे

राजपुरा / सत्ता संदेश

मेरे दादा पंजाबी हिस्टोरियन एस. करम सिंह हिस्टोरियन का जन्म 22 मार्च, 1883 को अमृतसर ज़िले के झबल (अब तरनतारन) कस्बे में दफ़ेदार एस. झंडा सिंह ढिल्लों के घर माता बिशन कौर के यहाँ हुआ था। सिख इतिहास की अमर हीरो, माई भागो, भी हमारे परिवार की एक बड़ी हस्ती थीं। वह भाई गुरदास के 11वें वार में बताए गए बाबा लंगाह के भाई की पोती थीं।

एस. करम सिंह ने अपने गाँव के प्राइमरी स्कूल से पाँचवीं क्लास पास की और खालसा कॉलेज अमृतसर में पढ़ने चले गए। दसवीं क्लास पास करने के बाद, उन्होंने 1902 में F.Sc. की पढ़ाई के लिए खालसा कॉलेज अमृतसर में एडमिशन लिया।

साइंस स्टूडेंट होने के बावजूद, उन्हें सिख हिस्टोरिकल किताबों में दिलचस्पी थी। वह अपना ज़्यादातर समय लाइब्रेरी में बिताते थे। पहले के सिख इतिहासकारों भाई रतन सिंह भंगू, महा कवि भाई संतोख सिंह नूरदी, ज्ञानी ज्ञान सिंह, भाई सुखा सिंह वगैरह ने सिख इतिहास को अपने-अपने तरीके से पेश किया था, लेकिन ये कीमती किताबें नई साइंटिफिक रिसर्च की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। इस वजह से तारीखों और घटनाओं को लेकर कई गलतफहमियां और गलतफहमियां पैदा हुईं।

खालसा कॉलेज में पढ़ते समय उन्होंने अपने क्लासमेट अमर सिंह वासु, मास्टर ईशर सिंह धोतियां और एस. गुरमुख सिंह के साथ मिलकर कसम खाई कि हम अपनी ज़िंदगी पढ़ाई, पत्रकारिता, धर्म और ऐतिहासिक रिसर्च के लिए लगाएंगे। अमर सिंह वासु खालसा एडवोकेट के एडिटर बने, ईशर सिंह धोतियां टीचर बने। लेकिन करम सिंह हिस्टोरियन ने सिख इतिहास की साइंटिफिक तरीके से रिसर्च के लिए अपनी ज़िंदगी लगाने की कसम भरी और इसे भाई वीर सिंह जी को सौंप दिया। करम सिंह का इतिहास पर रिसर्च करने का तरीका ओरिजिनल, साइंटिफिक और अनोखा था।

इस शैली को उन्होंने अपने लेख ज्ञानी हीरा सिंह दर्द की पत्रिका “फुलवारी” में अपने नोट्स के माध्यम से समझाया। कॉलेज छोड़ने के बाद अपने इस जुनून के कारण उन्हें काफी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उनके मित्र ईशर सिंह धोतियां के अलावा कुछ ही लोग उनका साथ देते थे। उनके एक मित्र मास्टर ईशर सिंह धोतियां हर महीने अपना आधा वेतन देकर योगदान देते थे। भाई तख्त सिंह फिरोजपुर वाले और भाई मोहन सिंह वैद ने भी उनका उत्साहवर्धन किया। सिख सभा समितियों को उनके कार्य का महत्व काफी समय बाद पता चला। जब 1929 में अकाल तख्त पर हुई एक बैठक में सिख इतिहास सोसायटी की स्थापना हुई और उन्हें संस्थापक सचिव घोषित किया गया।

फुलवाड़ी के संपादक हीरा सिंह दर्द ने उनकी प्रकाशित पुस्तक “बंदा बहादुर” को पढ़कर उनकी सराहना करना शुरू कर दिया और उनके कई लेख फुलवाड़ी में प्रकाशित किए। उनके लेखन और शोध पद्धति के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं: 1905 में परीक्षा से तीन महीने पहले करम सिंह ने पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि प्लेग फैलने की वजह से 80-90 साल के वे बूढ़े, जिन्होंने सिख राज की तरक्की और गिरावट देखी थी, इस दुनिया से जा रहे थे। उनके साथ, वह कीमती इतिहास भी गायब हो रहा था जो उन्होंने देखा और महसूस किया था। इन बुज़ुर्ग इतिहास के लोगों के बयानों को रिकॉर्ड करना कोई आसान काम नहीं था।

उस समय कोई भी जाना-माना इतिहासकार 21-22 साल के इस नौजवान को जाना-माना इतिहासकार मानने को तैयार नहीं था। 1905-06 में करम सिंह ने उन 18-20 बुज़ुर्गों के बयान लिखे जिन्होंने लाहौर दरबार में मिलिट्री सर्विस की थी। करम सिंह ने उनकी बताई सिर्फ़ वही बातें रिकॉर्ड कीं जो पहले इतिहास का हिस्सा नहीं थीं। बुज़ुर्गों में एक सज्जन ऐसे भी थे जो सरदार चेत सिंह के मर्डर के समय महाराजा खड़क सिंह के साथ मौजूद थे। एक ऐसा भी व्यक्ति था जो संधवालियों का नौकर था और महाराजा शेर सिंह के मर्डर के समय मौजूद था। एक गवाह राजा हीरा सिंह के मर्डर के समय खालसा फ़ौज के साथ था। इनमें महाराजा दलीप सिंह के दरबारी भी शामिल थे, जो सरदार जवाहर सिंह की हत्या के समय मौजूद थे। इन बूढ़े लोगों की बगावत के दौरान, इनमें से एक गवाह खोड़ी के किले से दुश्मन के कब्ज़े में आ गया था और तकलीफ़ें सहने के बावजूद, वह अपने धर्म पर अड़ा रहा।

एक सैनिक ने मुदकी, फेरू शहर, सभ्राओं, रामनगर, मोंग रसूल (चेलियां वाला) और गुजरात (अब पाकिस्तान) की लड़ाइयों में हिस्सा लिया था। इन सैनिकों के बयान सिख इतिहास की अहम घटनाओं के चश्मदीद बयान हैं, जिन्हें सबसे भरोसेमंद माना जा सकता है।

करम सिंह ने अपनी रिसर्च सिर्फ़ खालसा राज की घटनाओं तक ही सीमित नहीं रखी, बल्कि सिख इतिहास से जुड़े दूसरे टॉपिक पर भी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने लाहौर दरबार की डायरियों के ज़रिए भी ऐतिहासिक घटनाओं को एनालाइज़ करने की कोशिश की। करम सिंह ने लाहौर दरबार के सीक्रेट इतिहास की स्टडी पर भी काम किया।

उन्होंने राजा गुलाब सिंह और राजा ध्यान सिंह डोगरा द्वारा खालसा राज के खिलाफ़ रची गई साज़िशों और हत्याओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने ध्यान सिंह द्वारा सरदार चेत सिंह की हत्या के हालात का भी खुलासा किया। उन्होंने यह भी पता लगाया कि कैसे कुंवर नौ निहाल सिंह को उनके पिता महाराजा खड़क सिंह के खिलाफ भड़काया गया और चेत सिंह की हत्या में उन्हें साजिशकर्ता बनाया गया।

करम सिंह ने वारों के ज़रिए सिख इतिहास इकट्ठा करने की भी कोशिश की क्योंकि पहले हमारे देश में वार सुनने का बहुत रिवाज था। धाड़ियां बहुत कीमती होती थीं। उन्होंने गुजरांवाला जिले में एक रुपये में एक सुना और पांच रुपये में एक लिखा, जिसे नादिर शाह की पौड़ी कहा जाता था। उनके पास दूसरे पद लिखने के लिए पैसे नहीं थे।

सूर सिंह के परिवार के एक धाड़ियां, जो भाई बिधि चंद छीना के परिवार के करीबी थे, को गुरु हरगोबिंद साहिब और गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े आठ पद याद थे। करम सिंह ने ये पद खान बहादुर के समय में लिखे थे।

UIDAI ने लॉन्च किया आधार फेस ऑथेंटिकेशन SDK और सैंडबॉक्स, एक ही ऐप में मिलेगा आसान प्रमाणीकरण

UIDAI ने Global Fintech Fest 2026 में Aadhaar Face Authentication SDK और Sandbox लॉन्च किया। इससे बैंकिंग, फिनटेक और सरकारी ऐप्स में एक ही ऐप के जरिए सुरक्षित फेस ऑथेंटिकेशन आसान होगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में आधार फेस ऑथेंटिकेशन SDK (Software Development Kit) और आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और अन्य संस्थाओं के डिजिटल एप्लिकेशन में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को आसानी से एकीकृत करना है।

नए SDK की मदद से UIDAI की फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा को सीधे Android और iOS के मूल मोबाइल एप्लिकेशन में शामिल किया जा सकेगा। इससे उपयोगकर्ताओं को प्रमाणीकरण के लिए अलग-अलग ऐप के बीच जाने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया एक ही एप्लिकेशन के भीतर पूरी की जा सकेगी।

UIDAI के अनुसार, रेडी-टू-यूज SDK में AI/ML आधारित लाइवनेस डिटेक्शन और एंटी-स्पूफिंग जैसी क्षमताएं शामिल हैं। यह प्रमाणीकरण डेटा के सुरक्षित प्रबंधन और एन्क्रिप्शन को भी सपोर्ट करता है तथा उपभोक्ता स्मार्टफोन पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, बीमा, ब्रोकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं में फेस ऑथेंटिकेशन को अपनाना आसान हो सकता है।

इसके साथ ही UIDAI ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स भी लॉन्च किया है। यह एक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण उपलब्ध कराता है, जहां संगठन अपने एप्लिकेशन को उत्पादन में लागू करने से पहले पूरी फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया का एकीकरण, परीक्षण और सत्यापन कर सकते हैं।

सैंडबॉक्स के माध्यम से डेवलपर और क्वालिटी एश्योरेंस टीमें यूजर प्रोविजनिंग और सहमति, चेहरे की पहचान, लाइवनेस चेक, ऑथेंटिकेशन, एरर मैनेजमेंट और एक्शन वेरिफिकेशन जैसे प्रमुख चरणों का परीक्षण कर सकेंगी। इसमें बाहरी बायोमेट्रिक हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा अमान्य डिजिटल सिग्नेचर, नेटवर्क बाधा, टाइमआउट और संभावित स्पूफिंग प्रयासों जैसे विफलता परिदृश्यों का भी परीक्षण किया जा सकेगा।

UIDAI के मुताबिक, SDK और सैंडबॉक्स की शुरुआत बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही उस जरूरत को पूरा करती है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन के भीतर ही सुरक्षित और आसान ग्राहक ऑनबोर्डिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी।

इस सुविधा से उपयोगकर्ता अनुभव भी सरल होगा। उदाहरण के लिए, किसी बैंकिंग, बीमा या ब्रोकिंग ऐप में ग्राहक सीधे उसी ऐप के भीतर आधार फेस ऑथेंटिकेशन कर सकेगा। इससे पहले इसी तरह की प्रक्रिया के लिए FaceRD नामक बैकग्राउंड ऐप की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया लंबी होती थी और उपयोगकर्ता को अतिरिक्त ऐप पर निर्भर रहना पड़ता था। नए SDK के बाद आधार फेस ऑथेंटिकेशन के लिए कई ऐप की आवश्यकता कम हो जाएगी।

UIDAI द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित AI/ML आधारित फेस ऑथेंटिकेशन समाधान को वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया था। UIDAI के अनुसार, इस तकनीक के जरिए अब तक 500 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए जा चुके हैं। इसे केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों, राज्य सरकारों, बैंकों, NBFC, दूरसंचार कंपनियों, ब्रोकरेज फर्मों और प्रमाणन प्राधिकरणों समेत करीब 200 संस्थाओं ने अपनाया है। इस तकनीक को नवाचार श्रेणी में प्रधानमंत्री का लोक प्रशासन उत्कृष्टता पुरस्कार 2023 भी प्राप्त हुआ है।

आधार फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल पेंशनभोगियों द्वारा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने, आयुष्मान भारत लाभार्थियों के पंजीकरण, DBT योजनाओं, आधार-सक्षम भुगतान, e-KYC के जरिए सिम एक्टिवेशन, PM E-DRIVE, प्रधानमंत्री आवास योजना और PM किसान जैसी विभिन्न सेवाओं में लाभार्थी प्रमाणीकरण के लिए किया जा रहा है।

इस अवसर पर UIDAI ने “प्लेबुक ऑन ईज ऑफ ऑनबोर्डिंग” भी लॉन्च की। यह गाइड BFSI संस्थाओं को अपने ग्राहकों, कर्मचारियों और अन्य व्यावसायिक भागीदारों के पहचान सत्यापन के लिए UIDAI के ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम से जुड़ने में मदद करेगी।