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विशाखापत्तनम स्टील प्लांट विस्फोट मामला: एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान, आंध्र प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के स्टील प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में आठ श्रमिकों की मौत और छह अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की घटना का स्वतः संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा 8 जून 2026 को संयंत्र की स्टील मेल्टिंग शॉप में हुआ, जब करीब 1600 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 150 टन तरल स्टील ले जा रहा एक बर्तन अचानक फट गया। विस्फोट के बाद पिघला हुआ स्टील वर्कशॉप के फर्श पर फैल गया, जिसकी चपेट में कई श्रमिक आ गए।

घटना में आठ श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि कम से कम छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। श्रमिक संघों ने इस हादसे के लिए प्रबंधन पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है। आयोग ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

एनएचआरसी ने कहा है कि रिपोर्ट में घायल श्रमिकों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उनके उपचार की जानकारी तथा घायलों और मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए।

आयोग की इस कार्रवाई के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की ओर से हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और पीड़ित परिवारों को राहत प्रदान करने के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

ओडिशा में हिरासत में प्रताड़ना का आरोप, महिला पुलिस निरीक्षक निलंबित; मां-बेटे ने लगाए ‘थर्ड डिग्री’ टॉर्चर के गंभीर आरोप

भुवनेश्वर / सत्ता संदेश

Odisha के केंद्रपाड़ा जिले में पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तालचुआ मरीन पुलिस थाने की महिला पुलिस निरीक्षक को निलंबित कर दिया है। महिला और उसके बेटे ने पुलिस अधिकारियों पर हिरासत में ‘थर्ड डिग्री’ यातना देने, दुर्व्यवहार करने और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, तालचुआ मरीन पुलिस थाने की प्रभारी निरीक्षक Sandhyarani Jena को कर्तव्य में लापरवाही और अनुचित व्यवहार के आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले ने राज्य में पुलिस कार्यप्रणाली और हिरासत में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

यह मामला तब सामने आया जब गिरिपाही गांव की रहने वाली 55 वर्षीय अन्नपूर्णा मंडल और उनके 31 वर्षीय बेटे अनंत कुमार मंडल ने सोमवार को आरोप लगाया कि पुलिस थाने के अंदर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। दोनों का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और दबाव बनाने के लिए मारपीट की गई।

पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्हें किसी मामले की जांच के सिलसिले में थाने बुलाया गया था, लेकिन वहां उनके साथ कथित तौर पर कठोर व्यवहार किया गया। मां-बेटे ने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों तक थाने में रखा गया और पूछताछ के दौरान ‘थर्ड डिग्री’ तरीके अपनाए गए। घटना के बाद दोनों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायतों के आधार पर महिला निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है।

राज्य में विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस तंत्र में जवाबदेही की कमी के कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की जाएगी और किसी भी अधिकारी को नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा।

पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में हिरासत में प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।