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अमृतसर : KMSC का प्रदर्शन, खाद की कमी और पराली जलाने की नीति पर सरकार को घेरा

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में खाद की कथित कमी, कालाबाजारी, बीजों के मनमाने दाम और पराली जलाने को लेकर सरकार की नीतियों के विरोध में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (KMSC) ने अमृतसर स्थित एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कमेटी के प्रमुख नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाते हुए केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि किसानों को यूरिया और DAP खाद हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने बीज विक्रेताओं पर भी मनमाने दाम वसूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को कई स्थानों पर बिना पक्के बिल के ऊंची कीमतों पर बीज दिए जा रहे हैं।

पराली जलाने को लेकर सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए पंढेर ने कहा कि किसानों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने और राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज करने जैसी कार्रवाई से उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालिया केंद्रीय ड्राफ्ट नियमों में दो एकड़ से कम जमीन पर ₹5,000, दो से पांच एकड़ पर ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर ₹30,000 प्रति घटना पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान रखा गया है।

पंढेर ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली के स्थानीय स्रोतों और औद्योगिक प्रदूषण समेत सभी कारकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से पराली प्रबंधन को लेकर निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई जा रही है। पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के मामलों की निगरानी शुरू हो चुकी है और शुरुआती मामले भी दर्ज किए गए हैं।

किसान नेता ने केंद्र सरकार पर किसानों की आय दोगुनी करने और फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी से जुड़े वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल कार्रवाई का सामना कराने के बजाय खेती से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों पर लागू की जा रही नीतियों की समीक्षा करने की मांग उठाई।

किसान मजदूर मोर्चा ने कैबिनेट मंत्रियों के घरों के बाहर पक्के मोर्चे लगाने की तैयारी

किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने पंजाब सरकार के खिलाफ 8 कैबिनेट मंत्रियों के घरों के बाहर पक्के विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया। MSP, कर्ज माफी, लैंड पूलिंग और नशे समेत कई मांगें उठाईं।

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने पंजाब सरकार के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि मोर्चे की ओर से पंजाब के करीब 8 कैबिनेट मंत्रियों के घरों के बाहर पक्के विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। इनमें माझा क्षेत्र के दो, दोआबा के दो और मालवा क्षेत्र के चार कैबिनेट मंत्री शामिल हैं।

सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि वह फिलहाल न्यू अमृतसर में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के घर के बाहर मौजूद हैं, जहां विरोध प्रदर्शन के लिए जगह की सफाई और अन्य तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन मोर्चों के लिए गांवों से राशन, दूध और अन्य जरूरी सामान जुटाने की भी तैयारी की जा रही है।

किसान मजदूर मोर्चा की प्रमुख मांगों में पांच फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद की कानूनी गारंटी शामिल है। पंधेर ने कहा कि गेहूं और धान की सरकारी खरीद की व्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत है, लेकिन अन्य फसलों के मामले में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने फसलों के दाम C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर तय करने और पंजाब सरकार से खरीद की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की।

पंधेर ने किसानों और खेत मजदूरों की कर्ज समस्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों और खेत मजदूरों के परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इसके साथ ही किसानों के जमीन और संपत्ति से जुड़े अधिकारों को मजबूत करने की भी मांग रखी।

किसान नेता ने पंजाब की लैंड पूलिंग पॉलिसी को वापस लेने की मांग करते हुए शंभू-खनौरी आंदोलन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की मांग की। उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने तथा घायलों को उचित मुआवजा और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने पंजाब और दिल्ली में किसान आंदोलनों के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज पुलिस, रेलवे और पराली जलाने से संबंधित मामलों को वापस लेने की मांग भी की। इसके अलावा पंजाब के नदी जल विवाद को रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार हल करने और बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई।

पंधेर ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी सरकार से युवाओं के पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को पुनर्वास के जरिए समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

किसान मजदूर मोर्चा ने भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्ट, सीड एक्ट और सहकारी संस्थाओं के केंद्रीयकरण जैसे मुद्दों पर भी पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इनके विरोध की मांग की है।

सरवन सिंह पंधेर ने लोगों से किसान मजदूर मोर्चा के आंदोलन को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने अमृतसर के लोगों को पहले दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

महंगाई, जमीन अधिग्रहण और FTA के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, पुतला फूंक जताएंगे विरोध

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन : तरजिंदर सिंह

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने पंजाब के अमृतसर जिले में चल रहे संगठन चुनावों के मद्देनजर जोन रामतीर्थ में गांव लेवल की चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के बाद गांव ख्याला में राज्य नेता सरवन सिंह पंधेर, जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह कलेर बाला और जिला नेता सचिव सिंह कोटला के नेतृत्व में जोन डेलीगेट मीटिंग बुलाकर जोन कोर कमेटी को फिर से बनाया गया।

इस मौके पर नेताओं ने कहा कि जोन पहुंचे डेलीगेट्स ने सर्वसम्मति से जोन कोर कमेटी का चुनाव किया। आज के चुनाव में प्रेसिडेंट नरिंदर सिंह भिट्टेविड, सेक्रेटरी कुलजीत सिंह काले घनुपुर, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बलविंदर सिंह ख्याला, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बलवंत सिंह कोटला, ट्रेजरर अमरपाल सिंह रोमी, असिस्टेंट ट्रेजरर सेक्रेटरी सिंह कोटला, प्रेस सेक्रेटरी अवतार बावा, असिस्टेंट प्रेस सेक्रेटरी गुरचंत सिंह भिट्टेविड, वाइस प्रेसिडेंट गुरवेल सिंह ढोल, वाइस प्रेसिडेंट सुखदेव सिंह सैदूपुर, मेंबर गुरदीप सिंह काले घनुपुर, मेंबर सुखदेव सिंह छिदन, मेंबर कजर सिंह छिदन समेत 13 मेंबर वाली कमेटी बनाई गई।

इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सरकार किसान और मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत की अंदरूनी इकॉनमी को खत्म करने पर तुला हुआ है। उन्होंने कहा कि मनरेगा स्कीम से मजदूरों को जो रोजगार मिलता था, वह भी खत्म कर दिया गया है और राज्यों के सिर पर एक्स्ट्रा आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और बिज़ बिल जैसी पॉलिसी से जहां भारतीय खेती बर्बाद हो जाएगी, वहीं खेत मजदूर और खेती से जुड़ा हर वर्ग आर्थिक मंदी का शिकार होगा। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025, बिज़ बिल, MNREGA खत्म करवाने और बी ग्राम जी एक्ट, 4 लेबर कोड को भी रद्द करवाने के लिए बड़े संघर्ष की तैयारी करें।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पंजाब में अचानक बाढ़ आई जिससे पंजाब के आम लोगों और किसानों-मजदूरों को भारी नुकसान हुआ, सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए और 50% पीड़ितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि बारिश का मौसम फिर से शुरू होने वाला है लेकिन सरकार किसी भी इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि शंभू खनौरी बॉर्डर पर चल रहे संघर्ष में किसानों की ट्रॉलियों और दूसरे सामान की चोरी से हुए 3 करोड़ 77 लाख के नुकसान का मुआवजा सरकार तुरंत जारी करे।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों में हुई ज़बरदस्त बढ़ोतरी, भारत और US के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, भारतीय लेवल पर ज़बरदस्ती ज़मीन अधिग्रहण और खाद की कमी के खिलाफ़ 8 जून को अलग-अलग राज्यों में पुतला जलाकर प्रदर्शन किए जाएंगे। नेताओं ने कहा कि नाकाम विदेश नीति और गलत आर्थिक नीतियों की वजह से कॉर्पोरेट घरानों को फ़ायदा हो रहा है और आम लोगों का शोषण हो रहा है, इसलिए सरकार को बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस लेनी चाहिए।