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HBCHRC Punjab में पहला सफल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, 17 साल की बहन ने भाई को दिया जीवनदान

न्यू चंडीगढ़ के HBCH&RC में पहला सफल एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ। 17 वर्षीय बहन ने ल्यूकेमिया से जूझ रहे 10 वर्षीय भाई को स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ ने एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। इस उपचार के जरिए 17 वर्षीय बहन ने ब्लड कैंसर से जूझ रहे अपने 10 वर्षीय भाई को अपने स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी 10 वर्षीय बच्चे को इस वर्ष अप्रैल में एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) के दूसरे रिलैप्स का पता चला था। बीमारी दोबारा लौटने के बाद परिवार बेहतर उपचार के लिए पंजाब पहुंचा और बच्चे को परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की इकाई HBCH&RC में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में बच्चे को गहन कीमोथेरेपी दी गई, जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ। हालांकि, बीमारी के दोबारा लौटने के अधिक जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट को आगे के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना।

एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट में मरीज की बीमार रक्त-निर्माण प्रणाली को किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त स्वस्थ रक्त-निर्माण स्टेम सेल से बदला जाता है। इस मामले में विस्तृत डोनर मूल्यांकन के बाद बच्चे की 17 वर्षीय बड़ी बहन को सबसे उपयुक्त डोनर पाया गया। उसके स्टेम सेल एकत्र कर बच्चे को दिए गए।

बाल हेमेटोलॉिस्ट-ऑन्कोलॉजिस्ट और BMT चिकित्सक डॉ. जसमीत सिद्धू ने बताया कि प्रत्यारोपित स्टेम सेल सफलतापूर्वक मरीज के शरीर में स्थापित हो गए। ट्रांसप्लांट के बाद बच्चे की लगातार निगरानी और आवश्यक देखभाल की गई। अब बच्चा स्वस्थ है और मंगलवार को अच्छी सेहत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद भी उसकी नियमित निगरानी जारी रहेगी।

मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा गुलिया ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सावधानीपूर्वक योजना, सही डोनर चयन, संक्रमण से बचाव और गहन सहायक देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समर्पित बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी इकाई के साथ आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अस्पताल में वयस्क और बाल चिकित्सा मरीजों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, CAR-T सेल थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और लक्षित उपचार जैसी आधुनिक उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अस्पताल के मुताबिक, यहां उपचार अत्यधिक सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया जाता है।

HBCH&RC पंजाब के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने इस उपलब्धि को चिकित्सीय सफलता के साथ-साथ एक भावनात्मक मानवीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भाई-बहन की यह कहानी यह दर्शाती है कि आधुनिक कैंसर उपचार गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए नई उम्मीद पैदा कर सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल की मेडिकल सोशल वर्क टीम ने सरकारी योजनाओं और CSR सहायता के माध्यम से परिवार को 14 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। इसके अलावा उपचार के दौरान परिवार के लिए धर्मशाला में रहने की व्यवस्था भी की गई।

डॉ. आशीष गुलिया के अनुसार, 2024 में BMT कार्यक्रम शुरू होने के बाद से HBCH&RC में अब तक 15 स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और तीन CAR-T सेल थेरेपी इंफ्यूजन किए जा चुके हैं। अस्पताल का कहना है कि उसका उद्देश्य उत्तर भारत में कठिन रक्त कैंसर से जूझ रहे मरीजों को किफायती लागत पर आधुनिक और विश्वस्तरीय कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है।

HBCHRC ने छह महीने से भी कम समय में पूरी कीं 100 रोबोटिक कैंसर सर्जरियां

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (HBCHRC), पंजाब ने मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के महज छह महीनों में 100 से अधिक जटिल रोबोटिक सर्जरियां सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। HBCHRC भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की एक इकाई है। यह मील का पत्थर हासिल करने वाला केंद्र सरकार का यह अस्पताल पंजाब के न्यू चंडीगढ़ में स्थित है।

रोबोटिक सर्जरी सुविधा की योजना की घोषणा पिछले साल अगस्त में होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव के दौरान पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा की गई थी। इस उपलब्धि को साझा करते हुए, HBCHRC के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी पूरे उत्तर भारत में केवल सीमित अस्पतालों में ही उपलब्ध है।

डॉ. गुलिया ने कहा, “शुरुआत के समय, हमने पहले 80 मरीजों को मुफ्त में रोबोटिक सर्जरी प्रदान करने का वादा किया था। हमें यह साझा करते हुए गर्व हो रहा है कि हमने न केवल छह महीने से भी कम समय में 100 सफल रोबोटिक सर्जरियां पूरी कीं, बल्कि सभी 100 मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के यह इलाज मिला।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे न्यू चंडीगढ़ परिसर में रोबोटिक सर्जरी सुविधा उन्नत चिकित्सा तकनीक से लैस है और अब अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की तुलना में काफी कम लागत पर इलाज की पेशकश कर रही है।”

ओंकोसर्जरी (Oncosurgery) विभाग के प्रमुख डॉ. विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि रोबोटिक सर्जरी सर्जन की जगह नहीं लेती है। उन्होंने कहा, “पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जन का ही पूरा नियंत्रण रहता है और सभी महत्वपूर्ण निर्णय ऑपरेटिंग सर्जन द्वारा ही लिए जाते हैं। रोबोट केवल सर्जरी को अधिक सटीकता के साथ करने में मदद करता है।”

रोबोटिक सर्जरी के फायदों पर प्रकाश डालते हुए, ओंकोसर्जन डॉ. अरविंद गुरु ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी सर्जनों को पहुंच से दूर वाले क्षेत्रों में अधिक सटीकता के साथ काम करने की अनुमति देती है, जबकि इसमें केवल छोटे कीहोल (keyhole) के आकार के चीरों की आवश्यकता होती है। इसके परिणामस्वरूप खून कम बहता है, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल ने एक 80 वर्षीय मरीज की भी सफल रोबोटिक सर्जरी की है, जिसे आईसीयू में कम समय बिताना पड़ा और वे तेजी से स्वस्थ हुए।
विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ कैंसर का इलाज

आपको बता दें कि पंजाब और आसपास के राज्यों को बेहतरीन कैंसर इलाज देने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अगस्त 2022 में इस अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित किया था। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाले टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई द्वारा करीब 660 करोड़ की लागत से बना यह 300 बेड वाला अस्पताल हर आधुनिक सुविधा (जैसे सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट) से लैस है। यह अस्पताल एक मुख्य केंद्र (Hub) की तरह काम करता है, जबकि संगरूर वाला 150 बेड का अस्पताल इसकी एक शाखा (Spoke) के रूप में मरीजों की सेवा कर रहा है।