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PM Modi Congratulates Lula: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को पीएम मोदी ने दी बधाई, भारत-ब्राजील संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को चुनावी जीत पर बधाई दी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के सहयोग पर जोर दिया गया।

अंतराष्ट्रीय समाचार / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को दोबारा चुनाव जीतने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और अधिक समावेशी, समान तथा टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में राष्ट्रपति लूला को अपना मित्र बताते हुए उनकी चुनावी जीत पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने की इच्छा व्यक्त की।

भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी के बधाई संदेश में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और ब्राजील विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, आर्थिक सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ग्लोबल साउथ की साझा जरूरतों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। ग्लोबल साउथ से आशय मुख्य रूप से उन विकासशील देशों से है, जो आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े कई समान मुद्दों पर सहयोग करते हैं।

जीत के बाद राष्ट्रपति लूला ने जताया जनता का आभार

चुनावी जीत के बाद राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने ब्राजील की जनता को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रयास करने वाले युवाओं और मतदान के माध्यम से देश के भविष्य में भागीदारी निभाने वाले नागरिकों के योगदान को सराहा।

लूला ने कहा कि यह जीत उन लोगों की है, जो विश्वास बनाए रखते हैं, संघर्ष करते हैं और अधिक न्यायपूर्ण, स्वतंत्र तथा लोकतांत्रिक ब्राजील के निर्माण के लिए प्रयास करना नहीं छोड़ते।

भारत और ब्राजील के संबंधों के लिए क्या मायने?

भारत और ब्राजील के बीच व्यापार, कृषि, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और रणनीतिक सहयोग से इन क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से स्पष्ट है कि भारत ब्राजील के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने और वैश्विक मंचों पर साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग जारी रखने का इच्छुक है।

मोदी डॉक्ट्रिन: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत बना स्थिरता का केंद्र, हरीश साल्वे ने गिनाए कारण

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर अपने एक लेख में कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत स्थिरता और आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक निरंतरता, स्पष्ट राष्ट्रीय दिशा और ऐसी विदेश नीति को प्रमुख कारण बताया, जो बाहरी दबाव के बजाय भारतीय हितों पर आधारित होने का दावा करती है।

साल्वे ने अपने लेख ‘Modi Doctrine: Stability Amid Disorder’ में दुनिया में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आए बड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि महामारी, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव, बदलती वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में बदलाव ने पुरानी वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दी है। उनके अनुसार, ऐसे दौर में भारत ने राजनीतिक स्थिरता और विकास की निरंतरता बनाए रखी है।

साल्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के एक दशक से अधिक लंबे नेतृत्व की प्रमुख विशेषताओं में राजनीतिक निरंतरता और देश की विकास दिशा को लेकर स्पष्टता शामिल है। उन्होंने ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और इटली जैसे देशों में नेतृत्व परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में लंबे समय तक एक ही राजनीतिक नेतृत्व के बने रहने से नीतियों और दीर्घकालिक योजनाओं को निरंतरता मिली।

लेख में कहा गया है कि भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रणनीतिक स्वायत्तता है। साल्वे ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों, अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी, क्वाड और ब्रिक्स में भागीदारी तथा इजराइल, खाड़ी देशों और ईरान के साथ भारत के अलग-अलग स्तर के संबंधों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता को दर्शाता है।

महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था और सुधारों का उल्लेख

साल्वे ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की आर्थिक नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पैकेज, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) और MSME क्षेत्र के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना जैसी पहलों को आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने और घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करने से जोड़ा।

लेख में भारत के बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान और वैक्सीन मैत्री का भी जिक्र किया गया है। साल्वे के अनुसार, संकट से निपटने के साथ-साथ भारत ने महामारी के बाद आर्थिक सुधार और संरचनात्मक बदलावों को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया।

वैश्विक निवेशकों के भरोसे का भी जिक्र

लेख में भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आकलनों का भी उल्लेख किया गया है। अगस्त 2025 में S&P Global Ratings ने भारत की दीर्घकालिक संप्रभु क्रेडिट रेटिंग BBB- से बढ़ाकर BBB की थी। एजेंसी ने आर्थिक मजबूती, राजकोषीय समेकन और सार्वजनिक खर्च की गुणवत्ता जैसे कारकों का उल्लेख किया था। यह 18 वर्षों में S&P की ओर से भारत की पहली संप्रभु रेटिंग वृद्धि थी।

वहीं, सितंबर 2026 में Japan Credit Rating Agency (JCR) ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया और आउटलुक स्थिर रखा। JCR ने मजबूत आर्थिक विकास, बेहतर वित्तीय प्रणाली और आर्थिक नीतियों को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया।

भविष्य की अर्थव्यवस्था पर जोर

हरीश साल्वे ने सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की दीर्घकालिक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक और नीतिगत निरंतरता ऐसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करती है, जिनके परिणाम कई वर्षों या दशकों बाद सामने आते हैं।

उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को भारत की भविष्य की औद्योगिक रणनीति से जोड़ा।

लेख के अंत में साल्वे ने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, बदलती वैश्विक व्यवस्था और आर्थिक अनिश्चितताओं जैसे कई संकटों से गुजर रही है। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में भारत की राजनीतिक स्थिरता और विकास की दिशा देश के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में सामने आती है। उन्होंने इसे ‘मोदी डॉक्ट्रिन’ से जोड़ते हुए कहा कि यह भारत को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता प्रदान करता है।

PM मोदी सेशेल्स दौरे के लिए हुए रवाना, आजादी के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे मुख्य अतिथि

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स दौरे के लिए रवाना हुए । यहां वे देश के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स की यात्रा कर रहे हैं।

कई मुद्दें पर होगी चर्चा
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हरमिनी के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करने वाले हैं। पीएम मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। 

भारत के महासागर विजन में सेशेल्स का अहम स्थान
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी है। हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी होने के नाते, सेशेल्स भारत के विजन महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) और वैश्विक दक्षिण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है।

इसमें आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी मित्रता की पुष्टि करेगी और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी। इससे पहले अप्रैल में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान अपने सेशेल्स समकक्ष बैरी फॉरे से मुलाकात की और विक्टोरिया को उसकी वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सहायता करने के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश ने क्या कहा?
भारत-सेशेल्स संबंधों को ‘गतिशील और उत्कृष्ट’ बताते हुए, सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान और संरक्षण और नीली अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के इच्छुक हैं। प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले आईएएनएस से बात करते हुए, रतीश ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों की घोषणा होने की उम्मीद है।

उन्होंने फरवरी में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की भारत यात्रा और पिछले साल अक्टूबर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की सेशेल्स यात्रा का भी जिक्र किया, जिससे उच्च स्तरीय द्विपक्षीय संबंधों में आई तेजी का पता चलता है।

हेगसेथ ने भारत-पाक संघर्षविराम पर ट्रंप के दावे का किया समर्थन, भारत को बताया हिंद-प्रशांत रणनीति का प्रमुख साझेदार

सिंगापुर / सत्ता संदेश

अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने शनिवार को राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने तथा संघर्षविराम स्थापित करने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया था। साथ ही हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार बताया।

सिंगापुर में आयोजित Shangri-La Dialogue के दौरान अपने संबोधन और बातचीत में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में रहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से किया जाना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। नई दिल्ली कई अवसरों पर इस नीति को स्पष्ट रूप से दोहरा चुकी है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर

हेगसेथ ने भारत को अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का केंद्रीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को और करीब लाती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत के योगदान की सराहना की।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग, खुफिया साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर वैश्विक नजर

शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दक्षिण एशिया, चीन, ताइवान, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। भारत और अमेरिका दोनों ने क्षेत्रीय स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ का बयान एक ओर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

हालांकि भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी भूमिका को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना रखते हैं, विशेषकर रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में।

भारत-बांग्लादेश तनाव: बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए रोक दी वीज़ा सर्विस

नेशनल डेस्क: भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते डिप्लोमैटिक तनाव के बीच दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन ने भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा और कॉन्सुलर सर्विस कुछ समय के लिए रोक दी हैं।

बांग्लादेश के इस कदम को भारत के बांग्लादेश में वीज़ा सर्विस रोकने के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।भारत के एक्शन और हिंसा का बैकग्राउंड इससे पहले भारत ने बांग्लादेश के चटगांव (चटगांव), खुलना और राजशाही में मौजूद इंडियन वीज़ा एप्लीकेशन सेंटर (IVAC) में सर्विस अनिश्चित समय के लिए रोक दी थीं।

सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा और भारत विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए लिया गया। चटगांव में वीज़ा ऑफिस पर प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी के भी आरोप लगे थे।शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉयनगर इलाके में एक चुनाव कैंपेन इवेंट के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी।

उन्हें गंभीर हालत में सिंगापुर ले जाया गया, जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई। हादी की मौत के बाद पूरे बांग्लादेश में आगजनी, तोड़फोड़ और भारत विरोधी नारे लगे। इस बीच खुलना में नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता मोतलेब शिकदर की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई।आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने दावा किया कि बांग्लादेशी हाई कमिश्नर रियाज़ हमीदुल्लाह को दिल्ली में जान से मारने की धमकी मिली थी।

हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि हाई कमीशन की सुरक्षा में कोई कमी नहीं थी और पुलिस ने वहां प्रदर्शनकारियों को तुरंत हटा दिया था।