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अमेरिका-ईरान तनाव पर चीन की बड़ी टिप्पणी, पाकिस्तान की ‘सक्रिय मध्यस्थता’ का किया समर्थन

China ने अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में Pakistan की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए “सक्रिय मध्यस्थता” बेहद जरूरी है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने संयुक्त राष्ट्र में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान निकाल सकती है।

वांग यी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन उन सभी देशों के प्रयासों का समर्थन करता है जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल करने तथा टकराव को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की सक्रिय कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

चीन ने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई या दबाव की राजनीति से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए होना चाहिए। वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जो तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंध जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता को क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन लगातार खुद को वैश्विक शांति और मध्यस्थता के समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी बीजिंग कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर चुका है। वहीं पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से मुस्लिम देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

ईरान से तनाव और गिरती अर्थव्यवस्था ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल; लोकप्रियता 37% पर पहुंची

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर सामने आई है। एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है और उनकी कुल स्वीकृति रेटिंग (Approval Rating) घटकर अब केवल 37 प्रतिशत रह गई है।

आर्थिक नीतियों और महंगाई से जनता नाराज : सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि अमेरिकी नागरिक ट्रंप की आर्थिक नीतियों से खासे असंतुष्ट हैं। करीब 66 प्रतिशत लोगों ने उनकी आर्थिक नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उनकी रेटिंग गिरकर 34 प्रतिशत रह गई है, जबकि महंगाई के मुद्दे पर जनता ने उन्हें मात्र 27 प्रतिशत रेटिंग दी है। जीवन-यापन की लागत के मुद्दे पर उनकी लोकप्रियता सबसे कम, यानी 23 प्रतिशत पर सिमट गई है।

ईरान नीति पर भी उठे सवाल : ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और ट्रंप के रुख को लेकर भी जनता में असंतोष है। सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के उनके तरीके पर असहमति व्यक्त की है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा था कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।

रिपब्लिकन समर्थकों का भरोसा बरकरार: भले ही कुल रेटिंग में गिरावट आई हो, लेकिन अपनी पार्टी के भीतर ट्रंप का जादू अभी भी बरकरार है। रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच उन्हें अभी भी करीब 85 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है। वहीं, आव्रजन (Immigration) और सीमा नीतियों पर उन्हें 45 प्रतिशत लोगों की मंजूरी मिली है।

सर्वेक्षण का विवरण यह सर्वेक्षण: वॉशिंगटन पोस्ट, ABC न्यूज और इप्सोस (Ipsos) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग (Disapproval Rating) बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई है, जो उनके दोनों कार्यकाल में अब तक का सबसे उच्च स्तर है।