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हिंद महासागर का जहाज सागर कोलंबो बंदरगाह पर सफल ठहराव के बाद रवाना

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना का हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर , तीन दिवसीय सफल बंदरगाह यात्रा के बाद 18 मई 2026 को कोलंबो, श्रीलंका से रवाना हुआ , जिससे भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली और भारत के महासागर – पारस्परिक और समग्र क्षेत्रीय विकास के विजन को आगे बढ़ाया गया।

इस यात्रा के दौरान, आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की और समुद्री सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर केंद्रित चर्चा की।

आईओएस सागर पर आयोजित स्वागत समारोह ने नौसैनिक कर्मियों और विशिष्ट अतिथियों के बीच राजनयिक जुड़ाव और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इस कार्यक्रम ने जहाज के चालक दल के बहुराष्ट्रीय स्वरूप को उजागर किया और तैनाती में निहित क्षेत्रीय सहयोग की भावना को रेखांकित किया।

आउटरीच गतिविधियों के एक भाग के रूप में, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों का जहाज पर स्वागत किया, जिससे उन्हें जहाज की परिचालन क्षमताओं और जहाज पर जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव करने का अवसर मिला।

इस यात्रा में सौहार्द और आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी शामिल थीं। श्रीलंका नौसेना और आईओएस सागर के कर्मियों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच ने टीम भावना को बढ़ावा दिया और दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी संबंधों को मजबूत किया। इसके अलावा, बहुराष्ट्रीय दल ने गाले और कैंडी की सांस्कृतिक यात्राएँ कीं, जिससे उन्हें श्रीलंका की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की गहरी समझ प्राप्त हुई।

कोलंबो से प्रस्थान करते समय, आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के जहाज एसएलएनएस नंदीमित्रा के साथ पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लिया । इस अभ्यास में समन्वित सामरिक युद्धाभ्यास और संचार अभ्यास शामिल थे, जिनका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता, नौकायन कौशल और परिचालन समन्वय को बढ़ाना था।

आईओएस सागर इस समय कोच्चि के रास्ते में है और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदार देशों के बीच समुद्री सहयोग, अंतरसंचालनीयता और मित्रता को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।

आईएनएस सागरध्वनि पोर्ट क्लांग, मलेशिया से रवाना

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारतीय नौसेना का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत, आईएनएस सागरध्वनि, रॉयल मलेशियन नौसेना के साथ सफल समन्वय के बाद 15 मई 2026 को पोर्ट क्लांग, मलेशिया से रवाना हुआ। इस समन्वय के दौरान दोनों पक्षों के बीच पेशेवर और वैज्ञानिक स्तर पर सार्थक बातचीत हुई।

दोनों पक्षों के कर्मियों ने आधुनिक जलवैज्ञानिक पद्धतियों, समुद्री पर्यावरण अनुसंधान और समुद्रविज्ञान प्रौद्योगिकियों में हो रही प्रगति पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंतर्गत, रॉयल मलेशियन नौसेना के जलवैज्ञानिक विभाग के एक प्रतिनिधिमंडल ने जहाज का दौरा किया और उन्हें जहाज पर मौजूद समुद्रवैज्ञानिक प्रणालियों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञ अधिकारियों के बीच विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान (एसएमईई) में डेटा-केंद्रित रखरखाव दृष्टिकोण, प्रवृत्ति मूल्यांकन विधियों, नौवहन सुरक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी-आधारित निर्णय-सहायता तंत्रों पर भी चर्चा हुई।

इस प्रवास के दौरान, आईएनएस सागरध्वनि के कमांडिंग ऑफिसर ने कुआलालंपुर में मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त से भेंट की। इस चर्चा का केंद्र बिंदु जहाज का चल रहा समुद्र विज्ञान मिशन और गहन वैज्ञानिक सहयोग था।

यह प्रवास भारत और मलेशिया के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों को दर्शाता है, साथ ही क्षेत्रीय सहयोग, ज्ञान साझा करने और घनिष्ठ व्यावसायिक संबंधों के प्रति दोनों नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

भारतीय नौसेना का जहाज त्रिकंद केन्या के मोम्बासा पहुंचा

भारतीय नौसेना का अग्रणी निर्देशित मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी जारी तैनाती के तहत अप्रैल 2026 को केन्या के मोम्बासा पहुंचा। केन्‍या में इस तैनाती का उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना और भारत तथा केन्या के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना है।

इस बंदरगाह पर आईएनएस त्रिकंद युद्धपोत के आगमन के साथ ही पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भी केन्या यात्रा पर पहुंचे।

इस यात्रा के दौरान व्यावसायिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा और आवश्यक सामग्री केन्या रक्षा बलों को सौंप दी जाएगी। इसके अलावा युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर केन्‍या के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

मोम्बासा से प्रस्थान करने से पहले आईएनएस त्रिकंद केन्या नौसेना की इकाइयों के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) में भाग लेगा। इस अभ्यास में सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाया जाएगा और द्विपक्षीय समुद्री अंतर संचालनीयता को बढ़ावा मिलेगा।

आईएनएस त्रिकंद का मोम्‍बासा बंदरगाह पर आना भारत के महासागर (हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है।

अमेरिकी हमले में मारे गए 84 ईरानी नाविकों के शव श्रीलंका ने स्वदेश वापस भेजे

कोलंबो, 14 मार्च (भाषा) श्रीलंका ने एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए गए ईरानी नौसेना पोत के 84 नाविकों के शवों को स्वदेश वापस भेज दिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पिछले सप्ताह बुधवार को श्रीलंका ने बताया था कि उसने अमेरिकी पनडुब्बी हमले में द्वीप के दक्षिणी तट पर गाले के पास ईरानी नौसैनिक पोत ‘आईरिस देना’ के डूबने के बाद 84 ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं।

यह पोत भारत के विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था जहां इसने नौसेना बेड़े की समीक्षा अभ्यास में हिस्सा लिया था।

दक्षिणी जिले हंबनटोटा के मट्टाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद पत्रकारों ने बताया कि ये शव तुर्किये के निजी एयरलाइन के विमान से भेजे गये जो शुक्रवार को रवाना हुआ।

मुख्य मजिस्ट्रेट समीरा डोडंगोडा ने 11 मार्च को करापितिया स्थित नेशनल हॉस्पिटल के निदेशक को आदेश दिया था कि वे ‘आईरिस देना’ पोत के 84 नाविकों के शव ईरान के दूतावास को सौंप दें।

अमेरिकी टॉरपीडो के हमले में चार मार्च को मारे गए नाविकों के शवों को गाले के कारपितिया अस्पताल में रखा गया था तथा हमले में जीवित बचे 32 लोगों का इलाज किया गया था।

श्रीलंका सरकार ने पहले कहा था कि स्थिति सुधरने तक वे शवों को अपने पास रखेंगे ताकि उन्हें स्वदेश वापस भेजा जा सके।

हमले में जीवित बचे 32 लोगों को रविवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।