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मोगा में अमित शाह का बड़ा एलान: पंजाब में बनी BJP सरकार तो 2 साल में होगा नशा मुक्त; 2027 के लिए फूंका चुनावी बिगुल

पंजाब डेस्क : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 14 मार्च 2026 को पंजाब के मोगा जिले के गांव किल्ली चहिना में आयोजित भाजपा की ‘बदलाव रैली’ को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों का शंखनाद किया। भगवा रंग की पगड़ी पहनकर मंच पर पहुंचे शाह का स्वागत जोरदार नारों के साथ किया गया।

2 साल में नशा मुक्त पंजाब: अमित शाह ने पंजाब की जनता से बड़ा वादा करते हुए कहा कि यदि 2027 में राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो अगले 2 साल के भीतर पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे से केवल भाजपा ही बचा सकती है।

अकेले चुनाव लड़ेगी भाजपा: गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में भाजपा किसी अन्य दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और पंजाब में अपनी स्वतंत्र सरकार बनाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि उन्होंने अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मौका दिया है, अब एक मौका भाजपा को भी दें।

डबल इंजन सरकार और विकास: शाह ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा करतारपुर कॉरिडोर खोलने जैसी उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि पंजाब में ‘डबल इंजन’ की सरकार बनने पर धर्म परिवर्तन पर रोक लगेगी और विकास को नई गति मिलेगी।

गुरु साहिब को नमन और नववर्ष की बधाई: उन्होंने नानकशाही संवत 558 और देसी नववर्ष की शुरुआत पर लोगों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी की कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि यदि वे न होते तो आज हिंदू भी न होते।शाह ने अपने संबोधन में विश्वास जताया कि साल 2027 में पंजाब में निश्चित तौर पर भाजपा की सरकार बनेगी।

‘उद्योग’ की परिभाषा पर 17 मार्च को सुनवाई करेगी उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 17 मार्च से औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू करने वाली है।

न्यायालय की 17 मार्च की कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ करेगी। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल हैं।

इससे पहले 16 फरवरी को न्यायालय ने उन व्यापक मुद्दों को तैयार किया था, जिन पर इस पीठ को निर्णय लेना है।

देश की सर्वोच्च न्यायालय को विचार करना है कि क्या 1978 के बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड मामले में न्यायमूर्ति वी आर कृष्णा अय्यर द्वारा ‘उद्योग’ को परिभाषित करने के लिए तय किए गए मानक सही हैं? साथ ही, पीठ यह भी देखेगी कि औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1982 और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (जो 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी है) का मूल अधिनियम में ‘उद्योग’ शब्द की व्याख्या पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ता है।

पीठ द्वारा तय किए गए मुख्य मुद्दों में से एक यह है कि क्या सरकारी विभागों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कल्याण कार्यों, योजनाओं या अन्य उद्यमों को औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(जे) के तहत ”औद्योगिक गतिविधियां” माना जा सकता है।

अदालत ने संबंधित पक्षों को 28 फरवरी तक अपनी लिखित दलीलें देने का मौका दिया था। नौ न्यायाधीशों की यह पीठ 17 मार्च को सुनवाई शुरू करेगी और इसे 18 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि 2017 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे के गंभीर और व्यापक प्रभावों को देखते हुए इसे नौ न्यायाधीशों की पीठ को भेजने का निर्णय लिया था। इससे पहले मई 2005 में भी एक पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।

यह कानूनी विवाद दशकों पुराना है। वर्ष 1996 में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सामाजिक वानिकी विभाग को ‘उद्योग’ माना था, लेकिन 2001 में दो न्यायाधीशों की पीठ ने अलग राय व्यक्त की, जिसके बाद मामला बड़ी पीठों के पास पहुंचता गया।

समुद्र में जीपीएस की गड़बड़ी से युद्ध से जहाजों की सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो जाता है

जॉर्जिया, 14 मार्च (द कन्वरसेशन) ईरान में जारी युद्ध के कारण हवाई हमलों और बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरें सुर्खियों में रही हैं लेकिन युद्ध में तत्काल तबाही के अलावा, इस संघर्ष ने तेजी से बढ़ते एक और खतरे को भी उजागर किया है और वह है- पोतों की नेविगेशन प्रणाालियों में व्यवधान के कारण जहाजों और इन्हें संचालित करने वाले लोगों पर खतरा।

आधुनिक जहाजरानी व्यवस्था जीपीएस उपग्रह नेविगेशन पर काफी हद तक निर्भर करती है। जब इन संकेतों में बाधा उत्पन्न होती है या उनमें हेरफेर किया जाता है, तो जहाज अपने नाविकों और अन्य जहाजों को अचानक किसी अन्य स्थान पर दिखाई दे सकते हैं, जबकि वास्तव में वे कहीं और होते हैं।

महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और समुद्री प्रणालियों का अध्ययन करने वाली एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता के रूप में, मैं इस बात की समीक्षा करती हूं कि डिजिटल खतरे जहाजों और उन्हें संचालित करने वाले लोगों को कैसे प्रभावित करते हैं।

जीपीएस व्यवधानों से उत्पन्न खतरे को समझने के लिए, पहले यह समझना आवश्यक है कि जीपीएस कैसे काम करता है। जीपीएस प्रणाली पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रहों से प्राप्त संकेतों का उपयोग करके स्थान का निर्धारण करती है।

जीपीएस जैमिंग में, हमलावर विद्युत चुम्बकीय शोर से उपग्रह के वास्तविक संकेतों को अवरुद्ध कर देता है, जिससे उनकी पहचान नहीं हो पाती। ऐसा होने पर नेविगेशन प्रणाली में गड़बड़ी आ जाती है। फोन पर, ऐसा लग सकता है कि नक्शा रुक गया है या अनियमित रूप से हिल रहा है।

समुद्र में नाविकों के लिए, जीपीएस में गड़बड़ी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। खुले समुद्र में, अगर जीपीएस ठीक से काम नहीं करता है, तो जहाज की स्थिति की पुष्टि करने के लिए बहुत कम स्थलचिह्न होते हैं।

इसका एक उदाहरण मई 2025 में सामने आया। लाल सागर से गुजरते समय, कंटेनर जहाज एमएससी एंटोनिया अपनी वास्तविक स्थिति से काफी दूर की स्थिति दिखाने लगा। इससे चालक दल भ्रमित हो गया और अंततः जहाज किनारे से टकरा गया।

जहाज के फंसने से लाखों डॉलर का नुकसान हुआ और बचाव अभियान पांच सप्ताह से अधिक समय तक चला।

एमएससी एंटोनिया जैसी घटना कोई एक घटना नहीं हैं। पोत-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि जहाजों के समूह अचानक दूरस्थ स्थानों पर नजर आते हैं।

ये विसंगतियां भू-राजनीतिक संघर्ष से ग्रस्त क्षेत्रों में जीपीएस ‘स्पूफिंग’ से जुड़ी हुई हैं।

‘स्पूफिंग’ एक साइबर हमला है जिसमें अपराधी अपनी पहचान छिपाकर किसी विश्वसनीय व्यक्ति का रूप धारण करते हैं।

जीपीएस में हस्तक्षेप जहाजों को प्रभावित करने वाले साइबर खतरों का केवल एक प्रकार है। जैसे-जैसे जहाज उपग्रह इंटरनेट प्रणाली और दूरस्थ निगरानी उपकरण के माध्यम से अधिक जुड़ते जा रहे हैं, साइबर हमलों की आशंका बढ़ती जा रही है।

समुद्री साइबर सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक चर्चा अधिकतर जहाज प्रणालियों में तकनीकी खामियों पर केंद्रित है लेकिन इस पहेली का एक उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा वे लोग हैं जिन्हें इन तकनीकों के गलत होने पर उनका विवरण देना होता है और प्रतिक्रिया देनी होती है।

हाल में किए गए एक शोध में, मैंने और मेरे सहयोगियों ने पेशेवर नाविकों का साक्षात्कार लिया ताकि साइबर घटनाओं से जुड़े उनके अनुभवों और उनसे निपटने की उनकी तैयारियों के बारे में जाना जा सके।

जिन लोगों का साक्षात्कार लिया गया उनमें नौवहन अधिकारी, इंजीनियर और जहाज प्रणालियों के लिए जिम्मेदार अन्य चालक दल के सदस्य शामिल थे। इनसे एक ही बात स्पष्ट हुई और वह यह है कि समुद्र में साइबर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन चालक दल उनसे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।

अमेरिकी हमले में मारे गए 84 ईरानी नाविकों के शव श्रीलंका ने स्वदेश वापस भेजे

कोलंबो, 14 मार्च (भाषा) श्रीलंका ने एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए गए ईरानी नौसेना पोत के 84 नाविकों के शवों को स्वदेश वापस भेज दिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पिछले सप्ताह बुधवार को श्रीलंका ने बताया था कि उसने अमेरिकी पनडुब्बी हमले में द्वीप के दक्षिणी तट पर गाले के पास ईरानी नौसैनिक पोत ‘आईरिस देना’ के डूबने के बाद 84 ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं।

यह पोत भारत के विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था जहां इसने नौसेना बेड़े की समीक्षा अभ्यास में हिस्सा लिया था।

दक्षिणी जिले हंबनटोटा के मट्टाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद पत्रकारों ने बताया कि ये शव तुर्किये के निजी एयरलाइन के विमान से भेजे गये जो शुक्रवार को रवाना हुआ।

मुख्य मजिस्ट्रेट समीरा डोडंगोडा ने 11 मार्च को करापितिया स्थित नेशनल हॉस्पिटल के निदेशक को आदेश दिया था कि वे ‘आईरिस देना’ पोत के 84 नाविकों के शव ईरान के दूतावास को सौंप दें।

अमेरिकी टॉरपीडो के हमले में चार मार्च को मारे गए नाविकों के शवों को गाले के कारपितिया अस्पताल में रखा गया था तथा हमले में जीवित बचे 32 लोगों का इलाज किया गया था।

श्रीलंका सरकार ने पहले कहा था कि स्थिति सुधरने तक वे शवों को अपने पास रखेंगे ताकि उन्हें स्वदेश वापस भेजा जा सके।

हमले में जीवित बचे 32 लोगों को रविवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

HBCH&RC पंजाब में ‘ONTOP 2026’ की शुरुआत: युवा डॉक्टरों को कैंसर की जांच की बारीकियां सिखाने के लिए जुटा देश भर का जमावड़ा

न्यू चंडीगढ़, 11 मार्च 2026: होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), पंजाब के ऑन्कोपैथोलॉजी विभाग ने अपने न्यू चंडीगढ़ कैंपस में तीन दिनों का एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है। इस प्रोग्राम को ‘ONTOP 2026 – ऑन्कोपैथोलॉजी टीचिंग ऑफ पोस्टग्रैजुएट्स’ नाम दिया गया है। 13 से 15 मार्च 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के बड़े-बड़े पैथोलॉजिस्ट, कैंसर विशेषज्ञ और मेडिकल छात्र हिस्सा ले रहे हैं। इसका मकसद कैंसर की जांच की नई तकनीकों पर चर्चा करना और इस क्षेत्र में डॉक्टरों की पकड़ और मजबूत करना है।

इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया, ऑन्कोपैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संकल्प संचेती और डॉ. निलय निशीथ (सेक्रेटरी) की देखरेख में किया जा रहा है। उनके साथ ऑन्कोपैथोलॉजी विभाग और एक पूरी टीम इस काम में जुटी है। इस प्रोग्राम को इस तरह से तैयार किया गया है ताकि मेडिकल के छात्रों और युवा डॉक्टरों को कैंसर की जांच के आधुनिक तरीकों का प्रैक्टिकल अनुभव मिल सके।

इन तीन दिनों के दौरान विशेषज्ञों के लेक्चर, असल केसों पर चर्चा, स्लाइड सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही छात्रों के लिए एक पैथोलॉजी क्विज भी रखी गई है, जिससे यह पूरा प्रोग्राम काफी रोचक हो गया है। देश के नामी संस्थानों के एक्सपर्ट्स यहाँ साइटोपैथोलॉजी, हेमेटोपैथोलॉजी और लिम्फोमा जैसे विषयों पर खास वर्कशॉप भी ले रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश कुमार सिंघल (डायरेक्टर, PGIMS रोहतक) और डॉ. रवनीत कौर (डायरेक्टर-प्रिंसिपल, GMCH-32, चंडीगढ़) की मौजूदगी में दीप जलाकर की गई। इसमें कई वरिष्ठ डॉक्टर और छात्र शामिल हुए।

इस अवसर पर होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), पंजाब के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कैंसर के इलाज में पैथोलॉजी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. आशीष गुलिया ने कहा, “शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आप कितनी भी इमारतें बना लें या कितने भी उपकरण लगा लें, वे तब तक किसी काम के नहीं जब तक कि हमारे पास सही फैकल्टी और अनुभवी लोग (मैनपावर) न हों, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की देखभाल और इलाज देने में हमारी मदद कर सकें। मुझे लगता है कि ‘ONTOP’ इसी दिशा में हमारी एक अहम पहल है। सटीक और समय पर जांच ही कैंसर के प्रभावी इलाज की बुनियाद है। ‘ONTOP 2026’ जैसी कोशिशों के जरिए हमारा लक्ष्य युवा पैथोलॉजिस्टों को आधुनिक जानकारी, व्यावहारिक कौशल और नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि वे कैंसर के खिलाफ इस लड़ाई में अपना सार्थक योगदान दे सकें।”

डॉ. सुरेश कुमार सिंघल ने कहा कि अगली पीढ़ी के डॉक्टरों को तैयार करने और देश में कैंसर की जांच को बेहतर बनाने के लिए ऐसे प्रोग्राम बहुत जरूरी हैं। वहीं, डॉ. रवनीत कौर ने भी माना कि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और केसों पर चर्चा से छात्रों और युवा डॉक्टरों को बहुत कुछ नया सीखने को मिलेगा।

इन तीन दिनों में शामिल होने वाले लोग टाटा मेमोरियल सेंटर, PGIMER चंडीगढ़ और AIIMS मंगलगिरी जैसे बड़े संस्थानों के प्रोफेसरों से सीधे संवाद कर सकेंगे। इस प्रोग्राम को इसकी पढ़ाई-लिखाई की अहमियत की वजह से PMC क्रेडिट पॉइंट्स भी दिए गए हैं।

आयोजकों को पूरा भरोसा है कि ‘ONTOP 2026’ से भारत में कैंसर की जांच और मरीजों की देखभाल के स्तर में बड़ा सुधार आएगा।

नाइलिट रोपड़ ने युवाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान करने के लिए “रोज़गार मेला 2026” का आयोजन किया।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) जो कि भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी है, द्वारा 13 मार्च 2026 को रोपड़ स्थित अपने परिसर में सफलतापूर्वक “रोज़गार मेला 2026” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंजाब के युवाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान करना था, जिसके तहत प्रतिष्ठित कंपनियों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को एक साझा मंच प्रदान किया गया।

नाइलिट रोपड़ के कार्यकारी निदेशक श्री दीपक वासन द्वारा रोज़गार मेले का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम को श्री प्रभजोत सिंह ज़िला रोज़गार सृजन एवं प्रशिक्षण अधिकारी (DEGTO), सुश्री मीनाक्षी बेदी प्लेसमेंट अधिकारी, रोपड़ और श्री संदीप कुमार उप-क्षेत्रीय रोज़गार अधिकारी, DGE, जालंधर ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से सम्मानित किया। श्री वासन ने इस कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए मेगा रोज़गार मेले के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी पहल पंजाब के युवाओं को उद्योग जगत से जुड़ने और उपयुक्त रोज़गार प्राप्त करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है।

विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कई कंपनियों ने रोज़गार मेले में भाग लिया और उपलब्ध पदों के लिए नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के साथ बातचीत की। इस कार्यक्रम में छात्रों, नए स्नातकों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, उन्होंने अपने रिज़्यूम जमा करवाए और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे तौर पर बातचीत की।

इस कार्यक्रम में 23 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया और विभिन्न तकनीकी और पेशेवर पृष्ठभूमि से संबंधित 500 उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए गए। रोज़गार मेले के दौरान, कई उम्मीदवारों को मूल्यवान करियर मार्गदर्शन और रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए। विशेष रूप से 300 से अधिक उम्मीदवारों को मौके पर ही शॉर्टलिस्ट किया गया एवं नियुक्ति पत्र जारी किए गए, जिससे यह आयोजन युवाओं को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अत्यंत सफल रहा।

यह पहल कौशल विकास, रोज़गार क्षमता बढ़ाने और युवाओं के लिए रोज़गार अवसरों को बढ़ावा देने की सरकार की परिकल्पना को साकार करने में नाइलिट की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह रोज़गार मेला कुशल उम्मीदवारों और उद्योगों की आवश्यकताओं के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने की दिशा मे एक महत्त्वपूर्ण कदम रहा।

एनसीसीटी सचिव मिनू शुक्ला पाठक ने आरआईसीएम चंडीगढ़ का निरीक्षण किया, सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया

चंडीगढ़, 13 मार्च 2026: श्रीमती मीनू शुक्ला, आईआरएस राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT), नई दिल्ली ने दिनांक 13 मार्च 2026 को क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (RICM), सेक्टर-32-C, चंडीगढ़ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के कार्य निष्पादन की समीक्षा की तथा संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया।

अपने दौरे के दौरान श्रीमती शुक्ला ने संस्थान के अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए संस्थान द्वारा संचालित प्रशिक्षण पहलों की सराहना की तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता एवं विस्तार को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सहकारी संस्थाओं की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

श्रीमती शुक्ला ने संस्थान के कर्मचारियों के साथ भी संवाद किया तथा उनकी विभिन्न शिकायतों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुना ।

अपने दौरे के दौरान श्रीमती शुक्ला ने हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन महासंघ (HAFED), पंचकूला, हरियाणा का भी दौरा किया, जहां उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संभावनाओं का आकलन किया तथा सहकारी क्षेत्र में प्रशिक्षण सहयोग को और सुदृढ़ करने के अवसरों पर विचार किया ।

संस्थान के कार्यों की समीक्षा करते हुए श्रीमती शुक्ला ने सहकारी संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के सफल संचालन हेतु RICM के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्थान को भविष्य में प्रशिक्षण के नए एवं उभरते क्षेत्रों की खोज करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

दौरे के अंत में डॉ. आर. के. शर्मा, निदेशक, RICM ने श्रीमती मीनू शुक्ला का संस्थान का दौरा करने, मार्गदर्शन प्रदान करने तथा संस्थान के भविष्य के प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के विकास हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

नाबार्ड अध्यक्ष ने एनडीआरआई के प्रतिष्ठित डॉ. के.के. इया स्मृति भाषण में भारत के किसानों के लिए जलवायु सुरक्षा कवच के रूप में डेयरी की भूमिका पर प्रकाश डाला

करनाल, 13 मार्च, 2026 – आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल के 22वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में चल रहे शैक्षणिक पखवाड़े के जीवंत उत्सवों के बीच, प्रतिष्ठित डॉ. के.के. इया स्मृति भाषण ने डॉ. डी. सुंदरेशन सभागार को रोशन कर दिया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए, एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी का हार्दिक स्वागत किया। एनडीआरआई के दूरदर्शी निदेशक (1957-1965), भारत सरकार के पूर्व डेयरी विकास सलाहकार, आईसीएआर में उप महानिदेशक और एफएओ विशेषज्ञ डॉ. के.के. इया को पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

जलवायु जोखिम और ग्रामीण आजीविका: लघु किसानों के लिए डेयरी को एक मजबूत सहारा बनाना विषय पर अपने प्रभावशाली भाषण में, डॉ. कृष्णन ने भारत की डेयरी क्रांति को लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए लचीलेपन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए एक आशावादी तस्वीर पेश की। उन्होंने भारत के विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में शानदार उदय पर प्रकाश डाला, जो प्रति वर्ष 248 मिलियन टन दूध का उत्पादन करता है और वैश्विक उत्पादन का 25% हिस्सा है। 2014-25 के दौरान 5.7% की स्थिर वार्षिक वृद्धि दर से उत्पादन में 69% की वृद्धि से प्रेरित इस उल्लेखनीय उछाल ने प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता को 48% बढ़ाकर 485 ग्राम प्रतिदिन कर दिया है, जो 1950-51 के मात्र 124 ग्राम से कहीं अधिक है।

इसका श्रेय राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन द्वारा शुरू किए गए परिवर्तनकारी ऑपरेशन फ्लड (1970-96) को देते हुए, डॉ. कृष्णन ने भारत की इस सफलता का श्रेय दिया। कृष्णन ने इस क्षेत्र के विशाल नेटवर्क का विस्तृत विवरण दिया: 22 दुग्ध संघ, 240 जिला संघ, 230,000 गांवों में फैली 1.5 लाख सहकारी समितियां और 18 मिलियन किसान सदस्य, जिनमें 35% महिलाएं शामिल हैं, जो 48,000 ग्राम स्तरीय समितियों का नेतृत्व करती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “डेयरी सिर्फ एक उद्योग नहीं है; यह ग्रामीण भारत की रीढ़ है, जो जीडीपी में 5% का योगदान देती है, 8 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देती है और सालाना 6% की दर से बढ़ रही है।” इसकी स्थिर, प्रतिचक्रीय आय फसल खराब होने, सूखे, बाढ़ और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान वित्तीय सुरक्षा कवच का काम करती है, जिससे परिवारों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

जलवायु संबंधी खतरों पर चर्चा करते हुए, डॉ. कृष्णन ने कठोर वास्तविकताओं को स्वीकार किया: बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून, सूखा और बाढ़ कृषि के लिए खतरा हैं, जिससे 2040 तक फसल पैदावार में 4.5-9% की गिरावट (जीडीपी का 1.8% नुकसान) हो सकती है और बैंकों को 1.4 ट्रिलियन डॉलर के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। 86% छोटे और सीमांत किसानों के लिए, इसके प्रभावों में गर्मी के तनाव से दूध उत्पादन और उर्वरता में 10-30% की कमी, चरागाहों के सिकुड़ने से चारे की कमी, जल संकट से लंपी स्किन डिजीज और मैस्टाइटिस जैसी बीमारियों का बढ़ना और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान शामिल हैं। फिर भी, उन्होंने जोर दिया कि डेयरी उद्योग की विश्वसनीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे ग्रामीण गरीबों की वार्षिक आय में 5% की कमी को कम किया जा सकता है और पलायन को रोका जा सकता है।

डॉ. कृष्णन ने जलवायु-लचीली डेयरी प्रणालियों के निर्माण में NABARD के सक्रिय नेतृत्व का समर्थन किया। प्रमुख पहलों में ₹29,110 करोड़ का डेयरी अवसंरचना विकास कोष (DIDF) और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) शामिल हैं, जिनसे प्रतिदिन 10.69 मिलियन लीटर (MLPD) प्रसंस्करण क्षमता, प्रतिदिन 265 मीट्रिक टन दूध पाउडर संयंत्र और 113 थोक दूध कूलर जोड़े गए हैं। NABARD ने 600 दुग्ध उत्पादक संगठनों (FPO) को प्रोत्साहित किया है, पशुधन के माध्यम से प्राकृतिक खेती और पोषक तत्व चक्रण के लिए JIVA परियोजना शुरू की है, डेयरी को आदिवासी बागवानी प्रणालियों में एकीकृत किया है (जैसे हरिद्वार की बुक्सा प्राइवेटजी परियोजना), और ग्रामीण उद्यमों के लिए LEDP का समर्थन किया है। Dvara e-Dairy की बायोमेट्रिक पशु पहचान, स्वास्थ्य स्कोरिंग और बीमा जैसी डिजिटल प्रगति से आय में स्थिरता आई है, जबकि RIDF से चिलिंग सेंटर, टीके और सड़कों के लिए धन प्राप्त होता है।

भविष्य की ओर देखते हुए, डॉ. कृष्णन ने एक गतिशील भविष्य की कल्पना की: जीनोमिक्स के माध्यम से गर्मी सहन करने वाली नस्लें, मीथेन कम करने वाले चारे, वास्तविक समय में स्वास्थ्य निगरानी और पता लगाने की क्षमता के लिए सूचान प्रौद्योगिकी,  हाइड्रोपोनिक चारा, और जलवायु योजनाओं में पशुधन को शामिल करने वाली नीतियां—जिसमें सौर शीतलन, अनुक्रमित बीमा, हरित वित्त और महिला/युवा नेतृत्व वाले समूहों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। उन्होंने कहा, “एनडीआरआई के साथ साझेदारी में, नाबार्ड छोटे किसानों पर केंद्रित, कम उत्सर्जन वाले डेयरी फार्मों में अग्रणी भूमिका निभाएगा—चुनौतियों को स्थिरता और समानता के वैश्विक मॉडल में बदल देगा।”

संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), डॉ. आशीष कुमार सिंह ने राष्ट्रीय डेयरी मेले की सफलता के लिए नाबार्ड के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि एनडीआरआई के हमारे अनुभवी और दिग्गज निदेशक, डॉ. के.के. इया की स्मृति में प्रतिवर्ष यह एनडीआरआई भाषण पुरस्कार एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, प्रशस्ति पत्र और मानदेय शामिल है। संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए नाबार्ड, हरियाणा की मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी, महाप्रबंधक,  सुनील कुमार कौशिक, सभी गणमान्य व्यक्तियों, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के किसानों, सेवानिवृत्त कर्मियों, आईएआरआई की छात्राओं, प्रतिभागियों, छात्रों और आयोजकों को इस कार्यक्रम की शानदार सफलता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के 1000 से अधिक वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों ने भाषण समारोह में भाग लिया।

आईआईएसईआर मोहाली ने ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ावा देने और रणनीतिक साझेदारी के लिए उद्योग-अकादमिक बैठक की आयोजित

मोहाली, 12 मार्च 2026: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) मोहाली ने 11 मार्च 2026 को अपने परिसर में एक उच्चस्तरीय उद्योग-अकादमिक बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस बैठक में आईआईएसईआर मोहाली के नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के साथ-साथ पंजाब तथा आसपास के क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया और इस बात पर विस्तृत विचार-विमर्श किया कि उद्योगों की चुनौतियों और शैक्षणिक नवाचारों के बीच की खाई को पाटने के लिए आईआईएसईआर मोहाली उद्योग के साथ किस प्रकार मिलकर कार्य कर सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईएसईआर मोहाली के निदेशक प्रो. अनिल के. त्रिपाठी ने की। उन्होंने समाज और उद्योग की तात्कालिक आवश्यकताओं के समाधान के लिए ट्रांसलेशनल रिसर्च के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि अकादमिक जगत प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर उद्योगों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों के समाधान में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करे।” उन्होंने संकाय सदस्यों से अपने अत्याधुनिक अनुसंधान कौशल को व्यापक अर्थव्यवस्था और समाज के हित में उपयोग करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उद्योग जगत को भी अकादमिक संस्थानों के साथ दीर्घकालिक और फलदायी सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।

प्रतिष्ठित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भविष्य की दिशा तय की

इस बैठक में उद्योग और नीति क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें श्री अमित जैन, अध्यक्ष, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई); श्री लोकेश जैन, प्रबंध निदेशक, टीके स्टील्स लिमिटेड; डॉ. रजनीश विज, महासचिव, बीबीएनआईए, बद्दी; श्री संजीव सिंह सेठी, प्रबंध निदेशक, गिलार्ड इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड; श्री जे.पी. कुंद्रा, चीमा बॉयलर्स लिमिटेड; इंजीनियर प्रीतपाल सिंह, कार्यकारी निदेशक, पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (PSCST); तथा डॉ. दपिंदर कौर बक्शी, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख, PSCST सहित अनेक अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुले संवाद के माध्यम से अपने क्षेत्रों के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों को सामने रखा—जैसे सतत अपशिष्ट प्रबंधन, तकनीक का बड़े पैमाने पर विस्तार, तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में मानव हस्तक्षेप को कम करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग। प्रतिभागियों ने उद्योग-अकादमिक सहयोग में बाधा बनने वाली संरचनात्मक और नीतिगत चुनौतियों पर भी चर्चा की तथा नई और सार्थक साझेदारियों के लिए ठोस अवसरों की पहचान की।

आईआईएसईआर मोहाली ने वास्तविक प्रभाव वाले विश्व-स्तरीय अनुसंधान प्रदर्शित  किया

आईआईएसईआर मोहाली के संकाय सदस्यों ने कई उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक ट्रांसलेशनल अनुसंधान को प्रभावशाली रूप में प्रदर्शित किया। प्रदर्शित नवाचारों में शामिल थे — एंटीवायरल चिकित्सीय अनुसंधान, जैव-ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन, पंजाब क्षेत्र के लिए मृदा उन्नयन तकनीक, कैंसर उपचार के लिए माइक्रोबॉट्स, भविष्य की तकनीकों के लिए ब्लू लेजर, पर्यावरण और औषधीय उपयोगों के लिए कार्बन डॉट नैनोमटेरियल्स तथा गहरे ऊतकों की जांच के लिए बायोमेडिकल उपकरण।

परिवर्तनकारी सहयोग के लिए एक प्रभावी मंच

यह उद्योग-अकादमिक बैठक एक अनूठा और समयोचित मंच साबित हुई, जहाँ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने वास्तविक समस्याओं को सीधे उन शोधकर्ताओं के सामने रखा जो वैज्ञानिक दृष्टि से ठोस समाधान प्रदान करने में सक्षम हैं। चर्चा के विषय—जैसे स्वच्छ एवं सतत प्रौद्योगिकी, जैव-अभियांत्रिकी, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता—आईआईएसईआर मोहाली के अनुसंधान कार्यों की व्यापक उपयोगिता को दर्शाते हैं।

कार्यक्रम का समापन अत्यंत सकारात्मक वातावरण में हुआ, जहाँ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने आईआईएसईआर मोहाली के संकाय सदस्यों के साथ सक्रिय सहयोग की प्रबल इच्छा व्यक्त की। संस्थान की कई तकनीकों और विशेषज्ञताओं में औद्योगिक दक्षता तथा व्यावसायिक अर्थशास्त्र को सुदृढ़ करने की तत्काल क्षमता दिखाई दी।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के प्रति प्रतिबद्धता

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि आईआईएसईआर मोहाली विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज के ठोस लाभ में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। शोधकर्ताओं और उद्योग के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देकर संस्थान स्वयं को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की उभरती अर्थव्यवस्था के लिए नवाचार का एक महत्वपूर्ण इंजन भी सिद्ध कर रहा है।

आईआईएसईआर मोहाली ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आयोजन उद्योगों के साथ दीर्घकालिक सहभागिता की शुरुआत है और भविष्य में इस प्रकार के कई और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

जालंधर: 9वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत; पिता ने स्कूल प्रशासन पर उठाए सवाल, लगाया ‘कत्ल’ का आरोप

जालंधर: शहर के पॉश इलाके जालंधर हाइट्स (Jalandhar Heights) में 14 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे खुदकुशी बताया जा रहा है, लेकिन मृतका के परिवार ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है।

टेनिस खेलने गई थी छात्रा: मृतका की पहचान 14 वर्षीय भुविका के रूप में हुई है, जो कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल (बारादरी) की 9वीं कक्षा की छात्रा थी। उसके पिता सुनील सिंगला ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब 4 बजे उसे अर्बन एस्टेट फेज-2 स्थित स्कूल की ब्रांच में टेनिस खेलने के लिए छोड़कर आए थे।

संदेह के घेरे में स्कूल प्रशासन: पिता का सवाल है कि जब उन्होंने बेटी को स्कूल के अंदर छोड़ा था, तो स्टाफ ने उसे बाहर कैसे जाने दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ घंटे बाद उन्हें सूचना मिली कि भुविका ने जालंधर हाइट्स के फ्लैट की छत से कूदकर जान दे दी है।

पिता के गंभीर आरोप: सुनील सिंगला का कहना है कि यदि भुविका को आत्महत्या ही करनी होती तो वह स्कूल की छत से भी कूद सकती थी, वह जालंधर हाइट्स तक कैसे पहुंची? उन्होंने शक जताया है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने स्कूल स्टाफ से बात करनी चाही, तो उन्होंने अगले दिन बात करने की बात कहकर टाल दिया।

पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।