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कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर नकेल: संसद में ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ पास, झंडे और प्रचार सामग्री पर लगा बैन

नेशनल डेस्क: कनाडा की संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) ने खालिस्तानी गतिविधियों और नफरत भरे भाषणों पर सख्ती के लिए एक बड़ा विधेयक पास किया है। ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ (Combating Hate Act) नाम के इस बिल का मुख्य उद्देश्य अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसके महिमामंडन पर रोक लगाना है।

प्रतीकों पर प्रतिबंध: इस कानून के लागू होने के बाद बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) जैसे प्रतिबंधित संगठनों के झंडे, बैनर और अन्य प्रचार सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन गैरकानूनी होगा।

धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा: बिल के तहत किसी भी धार्मिक स्थल के पास लोगों को डराना या भयभीत करना अब अपराध की श्रेणी में आएगा।

धार्मिक छूट खत्म करने का प्रस्ताव: लिबरल पार्टी और ब्लॉक क्यूबेकॉइस के बीच हुए समझौते के तहत, हेट स्पीच (घृणा भाषण) कानून से धार्मिक छूट को खत्म करने का प्रावधान शामिल किया गया है। वर्तमान में, किसी धार्मिक ग्रंथ या विश्वास के आधार पर दी गई राय को हेट स्पीच से छूट प्राप्त है, जिसे यह नया बिल हटाने का प्रस्ताव रखता है।

विरोध और अगला कदम: कनाडा की कंजर्वेटिव और एनडीपी पार्टियों ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। नागरिक अधिकार समूहों ने भी चिंता जताई है कि इससे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाया जा सकता है।

हालांकि, न्याय मंत्री सीन फ्रेजर ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी की आस्था को अपराधी नहीं बनाता, बल्कि केवल नफरत और आतंकवाद को रोकने के लिए है।निचली संसद से पास होने के बाद अब यह विधेयक अंतिम मंजूरी के लिए कनाडाई सीनेट (उच्च सदन) के पास भेजा गया है, जहाँ इस पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

एचपीवी टीकाकरण:  लड़कियों के लिए एक साधारण सा टीका, सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन की दिशा में बहुत बड़ा कदम

प्रोफेसर हैराल्ड ज़ुर हाउज़ेन को 2008 में उनकी इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला कि ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के हाई-रिस्क स्ट्रेन से लगातार होने वाला संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मूलभूत कारण है। यह दुनिया भर में रुग्‍णता और मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है, लेकिन कम और निम्न-मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में इसका प्रभाव अधिक है। उनकी इस खोज ने रोगनिरोधी टीकों के साथ-साथ संक्रमण फैलाने वाले एजेंट का पता लगाने वाले परीक्षणों के विकास का भी मार्ग प्रशस्त किया। एक दशक बाद, 2018 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सर्वाइकल कैंसर के उन्‍मूलन की दिशा में एक पहल की घोषणा की, और 17 नवंबर 2020 को इस संबंध में एक वैश्विक रणनीति औपचारिक रूप से शुरू की गई, जिसे भारत सहित 194 देशों ने समर्थन दिया।

            कैंसर का उन्मूलन! वह भी कोई साधारण कैंसर नहीं, बल्कि सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन, जो अत्यधिक शारीरिक पीड़ा, भावनात्मक संघर्ष और आर्थिक कठिनाइयों का सबब है। भारत में महिलाओं में यह में दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल इसके लगभग एक लाख नए मामले सामने आते हैं और इनमें से करीब आधे मामलों में मौत हो जाती है, जो दुनिया भर के कैंसर के बोझ का लगभग एक-चौथाई है। सर्वाइकल कैंसर में जीवन के खोए हुए वर्ष,  अन्य कैंसरों की तुलना में अधिक होते हैं, क्योंकि पीडि़त महिलाएँ अपेक्षाकृत कम उम्र की होती हैं और परिवार व समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही होती हैं। कैंसर विशेषज्ञ के रूप में, मैंने उनकी तकलीफों को करीब से देखा है.. ऐसी महिलाएँ जिनमें चौथी स्‍टेज में इस रोग का पता चला, उनमें यूरिनरी फिस्टुला विकसित हो चुका था और कंसल्टिंग रूम में उनके दाखिल होने से पहले ही बदबू आने लगती थी; ऐसी महिलाएँ जो रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले रक्तस्राव का जिक्र करने में तब तक हिचकिचाती रहीं, जब तक कि बहू ने उनकी साड़ी पर दाग नहीं देख लिया; ऐसी महिलाएँ  जो अत्यधिक सायटिक और कमर दर्द, मूत्रवाहिनी या यूरेटर में रुकावट और गुर्दे फेल होने जैसी स्थितियों से जूझ रही थीं… फिर कुछ अपेक्षाकृत भाग्यशाली महिलाएँ  भी थीं, जिन्‍हें शुरुआती अवस्‍था ही इस रोग से ग्रसित होने के बारे में पता चल गया और जब यह बीमारी ठीक हो सकती थी, लेकिन सिर्फ़ रेडिकल सर्जरी या कीमो- और रेडिएशन थेरेपी से… ऐसे में गहन या एग्रेसिव सर्जरी का शरीर पर असर हुआ, लंबे समय तक चले रेडिएशन उपचार के कारण देखभाल करने वालों को पढ़ाई या काम से वंचित रहना पड़ा, और महंगी कीमो व इम्यूनोथेरेपी हुई… इसके अलावा, हमारे हरसंभव प्रयासों के बावजूद कुछ मामलों में कैंसर दोबारा लौट आया, जिसके लिए और भी जटिल प्रक्रियाओं, जैसे एक्सेंटरेशन सर्जरी और स्टोमा आदि की आवश्यकता पड़ी। हाँ, हम इलाज कर सकते थे, लक्षणों में राहत दे सकते थे, यहां तक कि हार्मोन रिप्लेसमेंट और अन्य सहायक देखभाल भी दे सकते थे, लेकिन इसकी  शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक कीमत चुकानी होती।

            और भी दुखद बात यह थी कि इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती थी। 1940 के दशक से ही पश्चिमी देशों में नियमित पैप स्मीयर जांच के माध्यम से द्वितीयक रोकथाम की व्यवस्था की गई थी, जिससे न केवल कैंसर का पता लगाया जा सकता था, बल्कि रोग की प्रारंभिक अवस्‍थाओं का भी पता लगाया जा सकता था। सर्वाइकल कैंसर की नेचुरल हिस्ट्री को एक सदी से अधिक समय से अच्छी तरह से दर्ज किया गया है। इसमें 10–15 वर्षों का लंबा प्रीकैंसरस चरण होता है, जिसे सर्वाइकल इंट्राअपिथीलियल नियोप्लासिया (सीआईएन) कहा जाता है, गर्भाशय ग्रीवा या सर्विक्स को ब्रश करके स्लाइड पर इकट्ठा की गई कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से जांच करके जिसका पता लगाया जा सकता है। इस अवस्‍था में इस रोग का उपचार सरल डे-केयर प्रक्रियाओं के जरिए आसानी से किया जा सकता है, जिनमें गर्भाशय निकालने की आवश्यकता नहीं होती। भारत और अन्य निम्न-मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में हमारे पास इतनी बुनियादी सुविधाएँ और प्रशिक्षित जनशक्ति नहीं थी कि 30 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं की जीवन में एक बार भी जांच की जा सके, जबकि हर 3 साल के अंतराल पर यह जांच कराने की सलाह दी गई थी। यहाँ तक कि अच्छे तृतीयक केंद्रों में भी प्रयोगशालाएँ प्रतिदिन सीमित संख्या में ही महिलाओं की जांच कर पाती थीं। देशभर में स्त्रीरोग विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट द्वारा नियमित रूप से आउटरीच कैंप आयोजित किए जाते थे, ताकि वंचितों की मदद की जा सके, लेकिन ये प्रयास समुद्र में एक बूंद के समान थे। यहाँ तक कि आज भी, विजुअल इंस्‍पेक्‍शन (वीआईए) के माध्यम से राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कार्यक्रम होने के बावजूद, स्क्रीनिंग कवरेज 5% से अधिक नहीं है, और जिन महिलाओं का टेस्‍ट पॉजिटिव पाया जाता है, उन्हें अस्पताल लाकर रोग की पुष्टि के लिए बायोप्सी और उपचार कराना भी बेहद कठिन होता है।

           सर्वाइकल कैंसर की प्राथमिक रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण ने 2006 में एक उम्मीद भरे सुपरहीरो की तरह इस परिदृश्य में प्रवेश किया। शुरुआत में यह तीन खुराक वाला टीका था, लेकिन लगातार  शोध से यह साबित हुआ कि इसे दो खुराक तक घटाया जा सकता है, और आगे चलकर यह भी पाया गया कि केवल एक खुराक ही 85–90% कैंसर से सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त है। एक साधारण सा इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन इतनी बड़ी तकलीफ से बचा सकता है?! यह वास्तव में बेहद उत्साहजनक संभावना थी। रोकथाम के लिए टीकाकरण में सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। अब तक 500 मिलियन से अधिक खुराकें दुनिया भर में और लगभग 4 मिलियन खुराकें भारत में दी जा चुकी हैं। व्यवस्थित परीक्षणों और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस से प्राप्त समेकित आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि टीका लगवाने वाली महिलाओं में सामान्य आबादी  की तुलना में प्रतिकूल प्रभावों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। उनमें क्षणिक हल्की प्रतिक्रियाएँ देखी गई हैं, जो सभी टीकों में सामान्य होती हैं। इन टीकों का प्रजनन क्षमता, जन्म दर, जन्मजात विकृतियों या मासिक धर्म के पैटर्न पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है। एचपीवी टीकों की प्रभावशीलता बहुत अच्‍छी है, क्योंकि ये टीके उनमें शामिल वायरस के प्रकारों से लगभग पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करते हैं। पहली पीढ़ी के टीके एचपीवी के दो सबसे खतरनाक प्रकारों — एचपीवी 16 और 18—के खिलाफ बनाए गए थे, जो वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के 70% और भारत में लगभग 85% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों, जिन्‍होंने 2007–08 में इस टीके के शुरू होने के तुरंत बाद ही एचपीवी टीकाकरण लागू कर दिया था, वहाँ प्रीकैंसर तथा कैंसर के मामलों में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है। स्वीडन, डेनमार्क, कनाडा और अमेरिका जैसे अन्य देशों से भी इसी तरह के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।  

            डब्ल्यूएचओ की सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन पहल का लक्ष्य सर्वाइकल कैंसर को एक दुर्लभ कैंसर बनाना है, जिसके होने की दर प्रति 1 लाख में केवल 4 मामलों तक सीमित हो।  इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2030 तक : 15 वर्ष की आयु से पहले 90% लड़कियों का एचपीवी टीकाकरण, 35 और 45 वर्ष की आयु में 70% महिलाओं की एचपीवी परीक्षण द्वारा स्क्रीनिंग, और जिन महिलाओं में रोग के लक्षण पाए जाएं, उनमें से 90% का उपचार – जैसे कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्यों को हासिल करना आवश्यक है। वैश्विक घोषणा के शुरू होने के बाद से हम आधे से अधिक रास्‍ता पार कर चुके हैं, लेकिन अभी भी इन लक्ष्यों की प्राप्ति से काफी दूर हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ऑफ इंडिया (एफओजीएसआई) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) जैसे संगठनों के प्रतिनिधित्‍व वाला चिकित्‍सा समुदाय लंबे अरसे से एचपीवी टीकाकरण को सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग कर रहा है। आखिरकार, अब उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है— माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 28 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान को देशव्यापी स्‍तर पर लॉन्‍च किया जाना- महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रजनन अधिकारों को महत्व दिलाने की दिशा में सर्वोच्च राजनीतिक प्रतिबद्धता का संकेत है, जिसकी वे हकदार हैं। पहुँच, किफायत  और उपलब्धता जैसी प्रमुख चिंताओं का सरकार ने पूरी तरह समाधान कर दिया है। अब सभी अभिभावकों को इस सुनहरे अवसर के बारे में जागरूक होने की आवश्‍यकता है, ताकि उनकी 14 साल की बेटियाँ नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्‍क टीकाकरण का लाभ उठा सकें। हमारी बेटियों के लिए एक साधारण सा टीका, सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बहुत महत्‍वपूर्ण साबित होगा।

नीरजा भटला

प्रोफेसर एमेरिटसराष्ट्रीय कैंसर संस्थान झज्जर,

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानदिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व प्रमुख

पंजाब में वेरका के GM समेत 3 अधिकारी सस्पेंड: सेना को भेजे दूध पाउडर के सैंपल फेल, 125 मीट्रिक टन की खेप लौटा

पंजाब डेस्क: पंजाब में सरकारी डेयरी ब्रांड वेरका (Verka) के दूध पाउडर की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय सेना को सप्लाई किए गए दूध पाउडर के सैंपल फेल होने के बाद सरकार ने लुधियाना मिल्क प्लांट के जीएम (GM) दलजीत सिंह, प्रोडक्शन हेड परितोष मिश्रा और क्वालिटी मैनेजर गुरइकबाल सिंह को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

सेना ने लौटाई खेप: भारतीय सेना ने लुधियाना मिल्क यूनियन द्वारा भेजे गए लगभग 125 मीट्रिक टन होल मिल्क पाउडर को रिजेक्ट कर दिया है,। यह खेप दो बैचों (58.338 टन और 66.654 टन) में भेजी गई थी।

सैंपल में मिले बाहरी कण: सेना की जांच के दौरान दूध पाउडर के सैंपलों में बाहरी कण (Foreign Particles) पाए गए,। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब जांच में सैंपलों में मेटल और काले कण होने की बात सामने आई है।

गंभीर लापरवाही: मिल्कफेड के एमडी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस लापरवाही से संगठन की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। सेना ने नोटिस जारी कर वेरका को 7 दिनों के भीतर अपने सैंपल वापस ले जाने को कहा है, वरना उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।

जांच कमेटी गठित: विवाद बढ़ने के बाद विभाग ने एक ‘फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ गठित की है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा है कि वेरका अपने स्तर पर जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर फूड सप्लाई विभाग भी जांच करेगा।

विपक्ष के निशाने पर सरकार: इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को घेरा है:

प्रताप सिंह बाजवा (कांग्रेस): उन्होंने कहा कि मान सरकार ने पंजाब की शान मानी जाने वाली ‘वेरका’ को भी इस हालत में पहुंचा दिया है कि उसका पाउडर सेना ने ठुकरा दिया है। उन्होंने इसे सरकार की विफलताओं का एक पैटर्न बताया।

बिक्रम मजीठिया (अकाली दल): मजीठिया ने आरोप लगाया कि अगर सेना को भेजे गए दूध में मेटल मिल रहा है, तो पंजाब में बिना जवाबदेही के बिकने वाले दूध से करोड़ों लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।

पश्चिम एशिया संकट पर PM मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बड़ी बैठक: ‘टीम इंडिया’ की तरह काम करने का आह्वान, लॉकडाउन की खबरों को बताया अफवाह

नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक की। करीब सवा दो घंटे चली इस बैठक में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि देश को इस संकट से उबारने के लिए सभी राज्यों को ‘टीम इंडिया’ की तरह मिलकर काम करना होगा।

लॉकडाउन की संभावना से इनकार: प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में कोई लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने लॉकडाउन को लेकर फैल रही खबरों को पूरी तरह भ्रामक और अफवाह बताया और राज्यों से आग्रह किया कि वे सही और भरोसेमंद जानकारी फैलाने पर जोर दें।

ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि इस कटौती से ईंधन के खुदरा (Retail) दाम में तत्काल बदलाव नहीं होगा, बल्कि तेल कंपनियां इसका उपयोग कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए करेंगी।मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।

सरकार की प्राथमिकताएं और चुनौतियां: पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता, एनर्जी सिक्योरिटी और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।

भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार के लिए सबसे ऊपर है。सप्लाई चेन और जमाखोरी: राज्यों से अपील की गई है कि वे सप्लाई चेन को मजबूत रखें और जमाखोरी या मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाएं।

एग्रीकल्चर सेक्टर: खेती के लिए फर्टिलाइजर (खाद) के स्टोरेज और वितरण की एडवांस प्लानिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में शामिल दिग्गज: इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए

। हालांकि, उन राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए जहाँ चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि एकजुट होकर काम करने से भारत इस आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चुनौती पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त करेगा।

पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन ने आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए तत्‍क्षण डेटा संग्रह को सुगम बनाया है

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2. 0 योजना का उद्देश्य पोषण सेवाओं को सुदृढ़ करना और देश में कुपोषण की समस्या का समाधान करना है। इस केंद्र प्रायोजित योजना के तहत विभिन्न गतिविधियों के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। देश भर में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां (आकांक्षी जिलों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में 14-18 वर्ष की आयु) इस मिशन के लाभार्थी हैं।

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित शासन उपकरण के रूप में शुरू किया गया है, जिसका उपयोग आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) और लाभार्थियों की सभी गतिविधियों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए निर्धारित संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इसने आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए तत्‍क्षण डेटा संग्रह को सुगम बनाया है। इसने रजिस्टरों में मैन्युअल डेटा प्रविष्टि को सरल बनाकर परिचालन संबंधी चुनौतियों को कम करके प्रशासनिक कार्य को काफी हद तक कम कर दिया है। मिशन पोषण 2.0 के तहत उपलब्ध सेवाओं से संबंधित डेटा दर्ज करने के लिए अग्रिमपंक्ति के  कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए गए हैं। देश भर की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए प्रति वर्ष 2000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सहायता करने और इंटरनेट नेटवर्क संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए, पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को विशेष रूप से ऑफ़लाइन मोड में डेटा एंट्री की सुविधा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्घाटन, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, पारंपरिक गृह ऋण वितरण और गर्म पके हुए भोजन का वितरण, आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित पूर्व-विद्यालय शिक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता सत्र आदि दैनिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग सर्वर की उपलब्धता पर निर्भर किए बिना ऑफ़लाइन मोड में उपलब्ध है। इससे लाभार्थियों को आंगनवाड़ी सेवाओं का लाभ उठाने में आसानी होती है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्बाध सेवा वितरण सुनिश्चित करने में सुविधा होती है।

ब्लॉक और जिला समन्वयक पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के प्रभावी उपयोग और तकनीकी गड़बड़ियों के समाधान के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करते हैं।

दूरसंचार विभाग देश में डिजिटल भारत निधि के माध्यम से स्थिर ब्रॉडबैंड/इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दूरसंचार पहुंच में असमानताओं को दूर करने और डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए काम कर रहा है। प्रमुख पहलों में शामिल हैं:

  1. भारतनेट परियोजना ग्राम पंचायतों और गांवों को ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करती है।
  • II. पूर्वोत्तर, द्वीप समूह, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र, आकांक्षी जिले और सीमावर्ती गांवों जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट/ब्रॉडबैंड और मोबाइल सेवाओं (4जी सहित) के लिए विभिन्न योजनाएं।
  1. इसके अलावा, संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत स्कूलों, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, आंगनवाड़ी केंद्रों, पंचायत कार्यालयों आदि सहित सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अपनाया बहुआयामी दृष्टिकोण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और बालिकाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद करता है। यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित और सशक्त बनाकर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2021-22 से 2025-26) में बीबीबीपी योजना का पुनर्गठन किया गया है और अब यह ‘मिशन शक्ति’ की ‘संभल’ उप-योजना का एक घटक है। बीबीबीपी का विस्तार देश के सभी जिलों में कर दिया गया है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से उन गतिविधियों पर अधिक खर्च करने को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।

बीबीबीपी के तहत इन पहलों ने एक रिकॉल वैल्यू स्थापित की है और विभिन्न हितधारकों—जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता शामिल है—को लामबंद करके इसे एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तत्काल चिंताओं को दूर करना है, बल्कि बालिकाओं को महत्व देने और उनके अधिकारों व अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना भी है।

मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित इसके घटकों सहित मंत्रालय की योजनाओं का दो बार—2020 में और पुनः 2025 में—नीति आयोग के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया गया है। इन अध्ययनों ने योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया है।

सरकार देश भर में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के समाधान हेतु एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है।

समग्र शिक्षा प्री-स्कूल से कक्षा XII तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, एक समग्र और समावेशी पाठ्यक्रम, लर्निंग आउटकम में सुधार, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को पाटने, और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करने पर जोर देती है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना कक्षा XII तक की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूली सुविधाएँ प्रदान करके स्कूली शिक्षा में लैंगिक और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को पाटने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक समुदायों और बीपीएल  परिवारों की 10-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को शामिल किया जाता है।

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लैंगिक संतुलन में सुधार के लिए लड़कियों को स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कक्षा IX से कक्षा XII तक की मेधावी छात्राओं को लक्षित करता है और इसमें छात्र-अभिभावक परामर्श, करियर परामर्श, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, टिंकरिंग गतिविधियां, विशेष व्याख्यान, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों के भ्रमण और विज्ञान शिविर व कार्यशालाएं शामिल हैं।

बालिकाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने व्यापक कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया मिशन शुरू किया है। सरकार ने देश भर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कौशल केंद्र’ भी स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत महिलाओं को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

सरकार ने देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं हेतु कई पहल/उपाय किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया योजना, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव आदि शामिल हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह रोजगार और स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) संचालित है।

सरकार महिलाओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए महिला-केंद्रित योजनाएं भी लागू कर रही है, जैसे कि नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग- किरण (डब्लूआईएसई-किरण), सर्ब-पावर (खोजपूर्ण अनुसंधान में महिलाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा देना) आदि।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, श्री पीयूष गोयल, 26 मार्च 2026 से याउंडे, कैमरून में शुरू हुए विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं

श्री पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) में सुधारों को पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से लागू करने का आह्वान किया, जिसमें विकास को केंद्र में रखा जाए

श्री गोयल ने विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) के मूलभूत सिद्धांतों और उद्देश्यों—विशेष रूप से भेदभाव-रहित नीति, सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-निर्माण और समानता—को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कैमरून के माननीय प्रधानमंत्री महामहिम श्री डायोन न्गूटे जोसेफ से मुलाकात की और विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक के साथ वार्ता की

विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून के याउंडे में कैमरून के व्यापार मंत्री की अध्यक्षता में एक औपचारिक सत्र के साथ प्रारंभ हुआ। इस सत्र में डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक डॉ. न्गोज़ी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों/वरिष्ठ प्रतिनिधियों उपस्थित थे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने इसके उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह भी आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद, मंत्रियों ने डब्ल्यूटीओ के मूलभूत मुद्दों, जिसमें इसके सिद्धांत भी शामिल हैं, पर एक मंत्रिस्तरीय चर्चा के लिए बैठक की। इस सत्र के दौरान भारत के माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए, जिसमें विकास को केंद्र में रखा जाए तथा संगठन के मूलभूत बुनियादी सिद्धांतों और उद्देश्यों—विशेष रूप से भेदभाव-रहित नीति, सर्वसम्मति-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया और निष्पक्षता—को बनाए रखा जाए।

एमसी14 बैठकों के पहले दिन के दौरान, श्री गोयल ने कैमरून के माननीय प्रधानमंत्री महामहिम श्री डायोन न्गूटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को और मजबूत करने के उपायों सहित द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। श्री गोयल ने विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें चर्चाएं मुख्य रूप से एमसी14 के एजेंडे पर केन्द्रित रहीं। एचसीआईएम ने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और गहरा करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने भी एमसी-14 के दौरान चिली, पराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मेक्सिको, पेरू, रूस, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में चर्चा एमसी-14 के एजेंडे के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने के विकल्पों पर केंद्रित रहीं। चिली और पेरू के साथ, दोनों पक्षों ने भारत-चिली एफटीए वार्ता और भारत-पेरू एफटीए वार्ता की प्रगति पर चर्चा की। यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ, दोनों पक्षों ने हाल ही में संपन्न भारत-ईयू एफटीए तथा भारत-न्यूजीलैंड एफटीए वार्ताओं पर हस्ताक्षर की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और भव्य रात्रिभोज के साथ हुआ।

एशियाई खेलों के लिए कबड्डी शिविर बेल्लारी में

बेल्लारी (कर्नाटक), 27 मार्च (भाषा) नवीन कुमार, पवन सहरावत, अर्जुन देशवाल और सोनाली विष्णु शिंगेट सहित पुरुष और महिला वर्ग के कई प्रमुख कबड्डी खिलाड़ी इस वर्ष के आखिर में जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले यहां अनुकूलन शिविर में भाग ले रहे हैं।

यह शिविर 27 मार्च से दो अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा जिसमें खिलाड़ियों के विकास, फिटनेस, अनुकूलन और प्रदर्शन में उत्कृष्टता हासिल करने पर ध्यान दिया जाएगा।

भारत लंबे समय से इस खेल में एक मजबूत शक्ति रहा है। दशकों से पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारत महाद्वीपीय स्तर पर अपना दबदबा बनाए हुए है। एशियाई खेलों में पुरुष और महिला कबड्डी दोनों में भारत मौजूदा चैंपियन है।

भारतीय एमेच्योर कबड्डी महासंघ ने एक विज्ञप्ति में बताया कि पुरुष वर्ग में नवीन कुमार, अर्जुन देशवाल, पवन सहरावत, असलम इनामदार, सुनील कुमार, आशु मलिक और भरत हुड्डा शिविर का हिस्सा हैं।

महिला टीम में प्रमुख खिलाड़ियों में कबड्डी विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य शामिल हैं। इनमें कप्तान रितु नेगी, सोनाली विष्णु शिंगेट, पुष्पा राणा, चंपा ठाकुर, पिंकी रॉय, प्रिया और कार्तिका आर प्रमुख हैं।

यह शिविर बेल्लारी स्थित इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) में आयोजित किया जा रहा है।

वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स, निफ्टी में भारी गिरावट

 मुंबई, 27 मार्च (भाषा) वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख और अमेरिका-ईरान संघर्ष जारी रहने से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी निवेशकों को हतोत्साहित किया है।

बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 280.95 अंक की गिरावट के साथ 23,025.50 अंक पर पहुंच गया।

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इटर्नल, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फिनसर्व के शेयर में सबसे अधिक गिरावट रही।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट के शेयर में बढ़त दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का ‘कॉस्पी’ और जापान का ‘निक्केई’ 225 घाटे में रहे, जबकि चीन का ‘एसएसई कम्पोजिट’ और हांगकांग का ‘हैंगसेंग’ फायदे में रहे।

अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 106.8 डॉलर प्रति बैरल रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,429.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

रामनवमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को शेयर बाजार बंद रहे थे।

सेंसेक्स बुधवार को 1.63 प्रतिशत और निफ्टी 1.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।

उमर अब्दुल्ला ने ईरान युद्ध को ‘अन्यायपूर्ण और अवैध’ बताया, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की

जम्मू, 27 मार्च (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘‘ईरान पर थोपी गई अन्यायपूर्ण एवं अवैध जंग’’ की शुक्रवार को निंदा की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मानवता के हित में इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया।

अब्दुल्ला ने विधानसभा में सदन के नेता के रूप में यह बयान दिया। इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई सदस्यों ने इस मामले में संक्षिप्त बयान दिए जाने की मांग की थी जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ईरान संकट एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और यह इस सदन के दायरे में नहीं आता।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं ईरान पर थोपी गई इस अन्यायपूर्ण और अवैध जंग की अपनी ओर से और अपने सहयोगियों की ओर से कड़ी निंदा करता हूं। मैं अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और इस संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।’’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री से भी अपील करता हूं कि वह इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त कराने में मदद के लिए सभी उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों एवं संबंधों का इस्तेमाल करें। इससे न केवल हमें, बल्कि पूरी मानवता को लाभ होगा।’’