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BIMSTEC बैठक में आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और साइबर अपराध पर मंथन, दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया

नई दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में पहली BIMSTEC गृह मंत्री बैठक हुई। दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी, साइबर अपराध और मानव तस्करी के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से पहली बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्री बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया।

बैठक में श्रीलंका का प्रतिनिधित्व सार्वजनिक सुरक्षा एवं संसदीय मामलों के मंत्री अनंदा विजेपाला ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सतत आर्थिक और सामाजिक विकास की बुनियाद है। क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित वातावरण में रहने, यात्रा करने और बिना किसी भय के कारोबार करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध पर चिंता

बैठक में नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी को एक गंभीर सीमा पार चुनौती के रूप में उठाया गया। श्रीलंका के मंत्री अनंदा विजेपाला ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी के तार संगठित आपराधिक नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों, वित्तीय लेन-देन और आधुनिक संचार तकनीकों से जुड़े हैं। ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है।

उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रीय नशा रोकथाम कार्यक्रम ‘Ratama Ekata’ का उल्लेख करते हुए नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के साथ रोकथाम, नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

साइबर अपराध और मानव तस्करी के खिलाफ सहयोग पर जोर

बैठक में साइबर अपराध, वित्तीय अपराध, मानव तस्करी, प्रवासियों की अवैध तस्करी और समुद्री मार्गों से होने वाली आपराधिक गतिविधियों से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। सदस्य देशों के बीच खुफिया सूचनाओं और सुरक्षा संबंधी जानकारी का समय पर आदान-प्रदान करने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया गया।

श्रीलंका ने कहा कि सीमा पार अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान जरूरी है। क्षेत्रीय स्तर पर की गई प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक कार्रवाई में बदलना और आम लोगों को इसका लाभ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति

बैठक में अपनाए गए दिल्ली घोषणा-पत्र के माध्यम से बिम्सटेक सदस्य देशों ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षित, मजबूत, विकसित और समृद्ध बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणा-पत्र में आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही मौजूदा कानूनी समझौतों और व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने, आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता, प्रत्यर्पण और दोषसिद्ध कैदियों के स्थानांतरण जैसे विषयों पर सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। सुरक्षा एजेंसियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को भी क्षेत्रीय सहयोग का अहम हिस्सा माना गया।

सुरक्षा संस्थानों को मजबूत बनाने की जरूरत

श्रीलंका के मंत्री ने सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुरक्षा संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए जनता का विश्वास, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक सहयोग भी जरूरी हैं।

बच्चों और युवाओं को नशीले पदार्थों, हिंसा और शोषण से बचाना भी प्रभावी सार्वजनिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक से पहले 12 अक्टूबर को गृह मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भी मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण, नशीले पदार्थों पर नियंत्रण और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

बिम्सटेक सदस्य देशों की यह पहल बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्षेत्रीय सहयोग के जरिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के साथ आर्थिक विकास, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

2029 तक नशा मुक्त भारत का लक्ष्य, केंद्र सरकार ने तैयार किया तीन साल का रोडमैप

केंद्र सरकार ने 2029 तक नशा मुक्त भारत बनाने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया है। 4 स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदुओं के साथ उपचार, पुनर्वास और नशा विरोधी अभियान पर जोर।

शिमला / चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर अगले तीन वर्षों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की मांग को कम करने, उपचार एवं पुनर्वास की सुविधाओं को बढ़ाने और जनजागरूकता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

शिमला में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की ओर से नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गृह मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत 2029’ अभियान और Vision Document 2026-2029 की प्रमुख योजनाओं की जानकारी दी गई। यह विजन डॉक्यूमेंट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 10वीं शीर्ष स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) बैठक में लॉन्च किया था।

कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार ने बताया कि रोडमैप को 35 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें केंद्र और राज्य स्तर पर NCORD बैठकों तथा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है।

चार स्तंभों पर आधारित है रोडमैप

नशा मुक्त भारत 2029 का तीन वर्षीय रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें खुफिया जानकारी एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं नुकसान में कमी तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। पूरे रोडमैप में 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदु निर्धारित किए गए हैं।

सरकार के मुताबिक रणनीति में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों, भगोड़ों, डार्कनेट और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नेटवर्क की पहचान, तस्करी की सप्लाई चेन को बाधित करने और अवैध प्रयोगशालाओं तथा पूरे वितरण नेटवर्क को खत्म करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।

उपचार और पुनर्वास क्षमता में बड़ा विस्तार

विजन डॉक्यूमेंट में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के सेवन की रोकथाम के साथ उपचार और पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार मार्च 2029 तक नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या मौजूदा 334 से बढ़ाकर 1,751 करने की योजना है।

बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करने तथा प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में नशे से संबंधित उपचार के लिए समर्पित विभाग स्थापित करने की भी योजना बताई गई है।

50 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य

‘नशा मुक्त भारत’ अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की योजना है। इसके तहत जागरूकता अभियान की पहुंच मौजूदा करीब 20 करोड़ लोगों से बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

2019 से जुलाई 2026 तक 93 लाख किलो से अधिक मादक पदार्थ जब्त

कार्यक्रम में NCB चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक देश में 93,33,987 किलोग्राम मादक और मन:प्रभावी पदार्थ जब्त किए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1,53,212 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसी अवधि में 44,88,576 किलोग्राम NDPS पदार्थ नष्ट किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 88,010 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा करीब 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों और परिसंपत्तियों को फ्रीज या जब्त किया गया तथा 128 अवैध गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया गया।

NCB के अनुसार 2019 से अब तक विभिन्न स्तरों पर 16,966 से अधिक NCORD बैठकें आयोजित की गई हैं। भारतपोल के माध्यम से 195 देशों के साथ इंटरपोल संपर्क स्थापित किए जाने और MANAS हेल्पलाइन 1933 के जरिए 3.33 लाख से अधिक नागरिकों के जुड़ने की जानकारी भी दी गई।

राज्यों में एंटी नारकोटिक्स व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

रोडमैप के तहत राज्यों की एंटी-ड्रग्स व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से संसाधन उपलब्ध कराने और परिणाम आधारित निगरानी पर जोर दिया गया है। मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित ANTF उपलब्ध कराने, मादक पदार्थों के नमूनों की रिपोर्टिंग 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने और गृह मंत्रालय की ओर से त्रैमासिक समीक्षा किए जाने की योजना बताई गई है।

इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिमला में NCB का जोनल कार्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसे जल्द शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

केंद्र सरकार के इस रोडमैप में नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने के साथ मांग और नुकसान को कम करने, उपचार एवं पुनर्वास सुविधाओं के विस्तार और समाज में जागरूकता बढ़ाने को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति रखी गई है।

2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, PIB चंडीगढ़ ने NCB के साथ किया ‘वार्तालाप’

भारत सरकार ने 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। PIB चंडीगढ़ ने NCB के सहयोग से ‘वार्तालाप’ आयोजित कर विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 की रणनीति पर चर्चा की।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जून 2026 में ‘नशामुक्त भारत’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 का शुभारंभ किया गया था। इस विजन डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के प्रमुख पहलुओं, उद्देश्यों और रणनीतियों पर चर्चा की गई। मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति महत्वपूर्ण आधार है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है। ऐसे में ‘नशामुक्त भारत 2029’ को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ पर जोर

जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की तीन वर्षीय कार्ययोजना को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विजन डॉक्यूमेंट चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—खुफिया सूचना एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं हानि में कमी तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय।

इन चारों स्तंभों के लिए ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ (Detect, Disrupt and Destroy) को परिचालन मंत्र बनाया गया है।

डिटेक्ट (Detect): मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी के मार्ग, तस्करों, तकनीक, भुगतान माध्यमों और प्रमुख संचालकों की पहचान करना।

डिसरप्ट (Disrupt): मादक पदार्थों के परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और ड्रग्स से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाना।

डिस्ट्रॉय (Destroy): अवैध ड्रग लैब, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों, गिरोहों के नेतृत्व और वितरण नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर देना।

NCB और PIB अधिकारियों ने मीडिया को दी जानकारी

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों को देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई शामिल रही।

विजन डॉक्यूमेंट में गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं के विनष्टीकरण, मादक पदार्थों से जुड़े अपराधियों एवं भगोड़ों को वापस लाने, विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण और मापनीय राष्ट्रीय परिणाम हासिल करने पर भी जोर दिया गया है।

मांग, आपूर्ति और हानि में कमी पर फोकस

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त भारत के लिए आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी से जुड़े रोडमैप पर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार मादक पदार्थों के नेटवर्क, वित्तीय संसाधनों और भगोड़ों को लक्षित करने के साथ-साथ समस्या से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

नीति निर्माण से लेकर अभियोजन तक विभिन्न एजेंसियों के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय को मजबूत करना भी विजन डॉक्यूमेंट की प्राथमिकताओं में शामिल है।

यह विजन डॉक्यूमेंट संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें मादक पदार्थों की समस्या से जुड़े मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और हानि में कमी के पहलुओं के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है।

युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों पर विशेष ध्यान

रोडमैप में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी से निपटने, युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने, उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के उपाय शामिल किए गए हैं।

शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने की योजना है, जो समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भूमिका निभाएंगे।

‘वार्तालाप’ कार्यक्रम के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने और समाज तक सही एवं प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में मीडिया को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को जन-अभियान में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

मानसा में 260 ग्राम हेरोइन और .32 बोर पिस्तौल समेत दो गिरफ्तार, 6 जिंदा कारतूस भी बरामद

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

मानसा पुलिस की ओर से नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बुढलाडा पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 260 ग्राम हेरोइन, एक .32 बोर पिस्तौल और 6 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

इस संबंध में मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने बताया कि जिले में नशा तस्करों और अवैध हथियार रखने वाले लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत बुढलाडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद हेरोइन कहां से लाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। साथ ही अवैध हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि मानसा पुलिस का नशा तस्करी और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अमित शाह ने NCORD की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और“मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” का विमोचन किया
  • श्री अमित शाह ने‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है
  • ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में NCB द्वारा जारी Vision Document on Narcotics Control का उद्देश्य सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट नेटवर्क, सीमा पार तस्करी और नए खतरों के खिलाफ संस्थागत क्षमता को और मजबूत बनाना है
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम ड्रग्स के कारोबार के पूरे इकोसिस्टम पर अगले 3 वर्षों में ऐसा प्रहार करेंगे, कि यह दशकों तक उठ न पाए
  • ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ की नीति से ह्यूमन व टेक्नोलॉजी इंटेलिजेंस व कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए सोर्स से लेकर किंगपिन तक नार्को के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा
  • हमें ड्रग्स के व्यापारियों के प्रति ruthless अप्रोच और पीड़ित युवाओं के प्रति Sympathetic अप्रोच रखना होगा
  • बड़े NDPS मामलों में वित्तीय जांच, अपराध की कमाई को फ्रीज़ और सीज़ करना हमारी प्राथमिकता
  • सभी राज्य ANTF को फुल-टाइम, डेडिकेटेड, इक्विप्ड और अकाउंटेबल यूनिट बनाए
  • विदेश में छिपे ड्रग तस्करों और गैंगस्टरों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस, प्रत्यर्पण और CBI के माध्यम से कार्रवाई तेज करने के लिए राज्य एक तंत्र विकसित करें
  • डिमांड रिडक्शन के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों व मंत्रालयों की भागीदारी से ड्रग्स फ्री जोन बनाए व जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे
  • बड़े मामलों में जल्द सजा सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट की दिशा में कार्यरत, राज्य भी अपने हाई कोर्ट में एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट के गठन करें
  • सीमा, पोर्ट, एयरपोर्ट, गांव, कम्युनिटी पुलिसिंग और क्राइम मैपिंग के जरिए हर ड्रग नेटवर्क की पहचान करनी होगी
  • ड्रग कार्टेल की फाइनेंसिंग, नेतृत्व और पूरे नेटवर्क पर हमला करना होगा, बड़े मामलों में ED के जरिए वित्तीय जांच अनिवार्य हो
  • ड्रग्स की लड़ाई के खिलाफ हमारा रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित- एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस व ऑपरेशंस; प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग कंट्रोल; डिमांड रिडक्शन व रिहैबिलिटेशन; कैपेसिटी बिल्डिंग व कोऑर्डिनेशन
  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय गृह मंत्री ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट -2025” का विमोचन और जम्मू और गुवाहाटी में NCB के ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। श्री अमित शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की जिसमे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हमारा देश नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां पर आने वाले 3 साल यह तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के आने वाले 100 वर्ष के भविष्य के लिए यह लड़ाई हमें दृढ़ता के साथ संयुक्त प्रयास से जीतनी चाहिए। यह लड़ाई कोई एक विभाग, राज्य, सरकार याव्यक्ति नहीं लड़ सकता बल्कि इसके लिए सभी राज्यों और उनके संबंधित विभागों को एक साथ एक मंच पर आना होगा। इस लड़ाई में हमें जनता को प्रेरित करने वाले संतों, देश का भविष्य तय करने वाले युवाओं और हमारी मातृशक्ति को भी जोड़ना पड़ेगा, तभी इस लड़ाई में हम पूरी तरह से सफल हो सकेंगे। श्री शाह ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, आर्थिक हितों की रक्षा और हमारी युवा पीढ़ी और उसके माध्यम से देश के भविष्य के साथ जुड़ी हुई समस्या है। इस समस्या पर संपूर्ण विजय प्राप्त करना भारत के सभी राज्यों का एक सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के वित्त पोषण के साथ यह समस्या एक Evolving Narco Terrorism Ecosystem भी बन चुकी है। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा, अर्थतंत्र और युवा पीढ़ी के भविष्य की सुरक्षा के लिए हमें इस समस्या पर पूर्ण विजय प्राप्त करनी ही होगी। हम Death Triangle और Death Crescent के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल का उपयोग आदि तरीकों से ड्रग का कारोबार करने वालों ने हमारी लड़ाई को और कठिन बना दिया है। नार्को ऑफेंडर्स आज टेक्नोलॉजी से सक्षम बन कर नेटवर्क आधारित बन चुके हैं और मल्टी-डोमेन अपराध के रूप में आज हमारे सामने खड़े हैं। इस कठिन लड़ाई के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी सामूहिक और संगठित, रोडमैप आधारित और आधुनिक और इंटेलिजेंस लीड-बेस्ड होनी चाहिए। हमारी अप्रोच टेक्नोलॉजी ड्रिवन होनी चाहिए और हमें रूथलेस अप्रोच के साथ नेटवर्क-सेंट्रिक लड़ाई लड़नी होगी तभी हम इस समस्या के खिलाफ विजय प्राप्त कर सकते हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमें ड्रग का व्यापार करने वालों के प्रति ruthless अप्रोच रखनी है और ड्रग के विक्टिम के प्रति sympathetic अप्रोच रखनी है। उन्होंने कहा कि हमारी सद्भावना ही उन विक्टिम बच्चों को फिर से सामान्य जीवन के साथ जोड़ सकती है और हमें उनकी अंगुली पकड़ कर सही रास्ते पर ले जाने का काम करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज यहां पर किए गए प्रस्तुतिकरण में बहुत स्पष्ट रूप से चार स्तंभों के अंदर हमारी लड़ाई को व्याख्यायित किया गया है और हर स्तंभ के अंदर उसके उपस्तंभ भी तय किए गए हैं। हर उपस्तंभ के अंदर लक्ष्य और इसे प्राप्त करने की तिथि को भी चिन्हित कर दिया गया है। एक साल बाद इस योजना का हम पुनरीक्षण करेंगे और इसे रीडिफाइन कर अंतिम 2 साल की लड़ाई के लिए हम आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज यहां एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया है। इसके साथ-साथ नशामुक्त भारत के रोडमैपके विजन डॉक्यूमेंट का भी आज विमोचन हुआ है। एनसीबी के गुवाहाटी और जम्मू ज़ोनल कार्यालयों का भी आज लोकार्पण किया गया। आज तक ज़िलास्तरीय एनकॉर्ड की 15876 बैठक हो चुकी हैं, राज्य स्तर की 266 बैठक हो चुकी हैं, एग्जीक्यूटिव स्तर पर सात बैठक कर चुके हैं और शीर्ष स्तर पर आज हम 10वीं बैठक कर रहे हैं। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख एनकॉर्ड बैठकों को परिणामलक्षित बनाने के लिए भी प्रयास करें।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 में विकसित भारत का एक लक्ष्य रखा है और नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी प्रधानमंत्री जी ने हमें दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2026 से 2029 तक का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ –Enforcement, Intelligence और Operations। इसका उद्देश्य है कि पूरे नेटवर्क पर लक्षित इंटेलिजेंस लीड कार्रवाई करें और नेटवर्क को नष्ट कर दें। दूसरा स्तंभ है –Precursors एवं Synthetic Drug Control। हमें उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोकने की रणनीति अपनानी पड़ेगी। तीसरा स्तंभ- Demand और Harm Reduction के अभियान को समाज, शिक्षा और पुनर्वसन के माध्यम से हमें आगे बढ़ाना होगा। Capacity Building, Coordination और Monitoringके चौथे स्तंभ की रचना तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए की गई है। यह रोडमैप Whole of Government Approach और Whole of Society Approach को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इस रोडमैप में भारत के हर नागरिक का रोल समाहित किया गया है, लेकिन नागरिकों को प्रेरित करने का काम सभी राज्य सरकारें और भारत सरकार के सभी विभागों के सचिवों को करना पड़ेगा। इस रोडमैप की सफलता और लक्ष्यों की समय पर सिद्धि की जिम्मेदारी भी साझा है और उसकी निगरानी की भी व्यवस्था तय की गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई वर्णन हम तीन शब्दों में कर सकते हैं –Detect, Disrupt और Destroy। हमने सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में HUMINT,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से हमें – विदेश से देश में ड्रग पहुंचाने वाले, देश में उसे राज्यों तक पहुंचाने वाले और राज्यों से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने वाले – तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ना होगा। डार्क वेब मॉनिटरिंग, हवाला, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, पोर्ट और एयरपोर्ट के उपयोग पर हमारी सभी वित्तीय एजेंसियों को अपनी पूरी क्षमता के साथ समन्वित तरीके से काम कर एक साझा कार्यक्रम तैयार करना पड़ेगा। Disrupt के तहत नशे का व्यापार करने वालों के सोर्स ट्रांजिट, फाइनेंस और लीडरशिप के हर लेवल पर हमें कानून के तहत आघात करना पड़ेगा। अवैध फसलों को नष्ट करने के लिए हमें एक अभियान चलाना होगा। अवैध प्रयोगशालाओं को ढूंढने का एक तंत्र एजेंसियों को विकसित करना पड़ेगा और उन्हें कठोरता के साथ नष्ट करना पड़ेगा। नई पद्धति के कंट्रोल डिलीवरी ऑपरेशन का हमें उपाय भी ढूंढना पड़ेगा और इस उपाय में सतत पर्वर्तन करते हुए इसकी मॉनिटरिंग कर हमें इसे लॉजिकल एंड तक ले जाना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि PMLA और ED के माध्यम से नशे के व्यापारियों के फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन को भी हमें बहुत रूथलेसली करना पड़ेगा और इसके माध्यम से उनके नेटवर्क को छिन्न-भिन्न करने की जिम्मेदारी भी हमारी है। Destroy के तहत ध्वस्त किया गया नेटवर्क दोबारा खड़ा ना हो, इस तरह से हम इसे रूथलेसली समाप्त करें। जो पकड़ा गया जो kingpin है वो छूटना नहीं चाहिएऔर इसके लिए हमारे कानूनों में सभी प्रावधान उपलब्ध हैं। De-addiction और rehabilitation के माध्यम से हमें सप्लाई साइड को कम कर इनको डिस्ट्रॉय करने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा। Detect, Disrupt और Destroy इन तीन शब्दों के आधार पर इस पूरे रोडमैप की रचना की गई है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, राज्यों और सभी विभागों को नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ना पड़ेगा। बड़े NDPS के मामले में वित्तीय जांच को राज्य के पुलिस प्रमुखों को अनिवार्य करना होगा। Proceed of Crime, उसकी पहचान, फ्रीज करना, seize करना और उसे जेल से बाहर न आने देने तक की पूरी प्रक्रिया को एविडेंस बेस्ड और आधुनिक तकनीक से लैस करनी होगी। गृह मंत्रालय ने सभी हाई कोर्ट के साथ भी इस विषय को उठाया है कि स्पेशल कोर्ट्स बनें, कोर्ट्स के न्यायमूर्ति की संख्या पर्याप्त हो और सजा तय करने के लिए बड़े केस की प्रतिदिन सुनवाई करने को प्राथमिकता दी जाए। जब तक रियल टाइम शेयरिंग सुनिश्चित नहीं करते हैं तब तक follow the money trail हम नहीं कर पाएंगे और इसीलिए रियल टाइम शेयरिंग को हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि Precursors और साइकोट्रॉपिक पदार्थ की शेड्यूलिंग को भी हमें एक बार देखना होगा और नार्को फाइनेंस के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही भी हमें सुनिश्चित करनी पड़ेगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नशामुक्त भारत अभियान और जन जागरूकता अभियान, सामुदायिक सहभागिता और उपचार पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना होगा तभी हम मांग को कम कर सकते हैं। फार्मास्यूटिकल डायवर्जन और ऑनलाइन फार्मेसी की निगरानी को स्वास्थ्य मंत्रालय को सुनिश्चित करना होगा। शिक्षा मंत्रालय के तहत माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षाविभागों को ड्रग-फ्री कैंपस का फ्रेमवर्क अडॉप्ट करना होगा। सबकी सहमति से इस कांसेप्ट को आगे बढ़ाते हुए अभिभावकों औरशिक्षकों की जागरूकता को भी हमेंसुनिश्चित करनाहोगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि NCRB, NFSU, DFSS, I4C और NATGRID को कार्टेल आइडेंटिफिकेशन के लिए अपने-अपने स्तर पर बहुत सारे काम करने होंगे। राज्यों को ANTFs को फुल टाइम बनाना चाहिए औरdedicated, resourced, equipped और accountable यूनिट के रूप में इसे परिवर्तित करने के लिए राज्यों के पुलिस प्रमुख को काम करना चाहिए। ड्रग्स की commercial quantity के मामले में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन तथा backward-forward linkage हमारी इन्वेस्टिगेशन का अहम हिस्सा होना चाहिए क्योंकि इसके बिना हम तंत्र को नष्ट नहीं कर सकते। राज्य और ज़िला स्तरीय NCORD बैठकों को output-oriented बनाना चाहिए और इसकी मॉनिटरिंग भी बहुत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। Strong chargesheet और effective prosecution के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर रखने की दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए और exclusive NDPS कोर्ट के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख, अपने गृह विभाग के माध्यम से हाई कोर्ट को अप्रोच कर आगे बढ़ें। Demand reduction, treatment, rehabilitation, awareness, अभिभावकों, प्राध्यापकों और शिक्षकों की जागरूकताके लिए भी राज्यों को हर विभाग में एक नोडल अधिकारी तय करना चाहिए। इसके साथ ही, CBI के माध्यम से हमने भगोड़ों को वापस लाने का एक अभियान शुरू किया है जिसमें हमें बहुत अच्छी सफलता मिली है। राज्य सरकारों से भी अनुरोध है जो आपके राज्य के ड्रग्स या गैंगस्टर का काम करने वाले लोग विदेश में छिप कर बैठे हैं, उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर, सीबीआई का उपयोग कर और एजेंसियों के माध्यम से उनको वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 तक 40000 करोड़ रूपए के मूल्य की 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग जब्त किए गए थे जबकि 2014 से 2026 तक 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रूपए मूल्य की 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम ड्रग्स ज़ब्त की गई, यह बताता है कि हमारा अभियान सफलता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।2004 से 2014 में 8000 करोड़ रूपए मूल्य की 3,26,000 किलोग्रामड्रग्स को नष्ट किया गया जबकि 2014 से 2026 के बीच 89,896 करोड़ रूपए मूल्य की 42,47,000 किलोग्राम ड्रग को हमने नष्ट किया। इसी प्रकार अवैध खेती के विनष्टीकरण को हमने लगातार बढ़ाया है। 2020 में 10,000 एकड़ अवैध अफीम की खेती विनष्ट की गई 2025 में हमने 42,282 एकड़ अवैध खेती को विनष्ट किया। 2004 से 2014 तक 173000 केस हुए थे जिनमें 195000 गिरफ्तारियां की गई थीं। 2014 से 2026 में 8,75,000 केस रजिस्टर किए गए हैं और 10,97,000 लोगों की गिरफ्तारियां हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि जब हम प्रयास करते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी। मोदी सरकार ने प्रयास को स्पेसिफिक किया है, लक्ष्य को केंद्रित किया है, टाइम बाउंड भी किया है और ड्रग के खिलाफ लड़ाई के सभी प्रकार के बिंदुओंको आइडेंटिफाई कर हमने यह रोडमैप बनाया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अगर हम इस लड़ाई को मिलकर और एकजुट होकर लड़ते हैं तो निश्चित रूप से विजय हमारी होगी। तीन साल के अंदर हम भारत में ड्रग्स के नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में बहुत आगे बढ़ जाएंगे। इन तीन साल में हम सब एक लक्ष्य को तय कर सामूहिक प्रयास से मेहनत करें, समयसीमा और साझा रणनीति के साथ लक्ष्य तय करें तो हमारी विजय सुनिश्चित है।

अमृतसर पुलिस ने हथियार और हेरोइन तस्करी मॉड्यूल का किया भंडाफोड़

अमृतसर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : विक्रमजीत सिंह / कैमरामैन: तरजिंदर सिंह

पंजाब को सुरक्षित और नशा मुक्त बनाने की मुहिम के तहत अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने सीमा पार से हथियार और नशे की तस्करी करने वाले मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 2.225 किलो हेरोइन, 6 आधुनिक पिस्तौल और 12 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।


डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर के गांव चीचा निवासी सुखदेव सिंह उर्फ सुख और गांव लोधी गुजर निवासी हरजिंदर सिंह उर्फ जिंदर के रूप में हुई है। दोनों आरोपी आदतन अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले भी अपहरण तथा अवैध हथियार रखने के मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सीमा पार बैठे तस्करों के संपर्क में थे और ड्रोन के माध्यम से भेजी गई हेरोइन तथा हथियारों की खेप प्राप्त कर पंजाब में अपराधी तत्वों तक पहुंचाते थे। बरामद हथियारों में चीन, ऑस्ट्रिया, अमेरिका और तुर्की निर्मित आधुनिक पिस्तौल शामिल हैं।


पुलिस कमिश्नर अमृतसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पहले आरोपी सुखदेव सिंह को 2.225 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दूसरे आरोपी हरजिंदर सिंह उर्फ जिंदर को चार पिस्तौलों सहित गिरफ्तार किया गया। आरोपी हरजिंदर की निशानदेही पर पुलिस ने दो और पिस्तौल बरामद किए। पुलिस के अनुसार सुखदेव पहले से ही थाना छेहरटा में दर्ज एक मामले में वांछित था, जिसमें उसके चार साथियों को सात पिस्तौल और 12 जिंदा कारतूसों सहित गिरफ्तार किया गया था।


पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। मामले के आगे और पीछे के सभी लिंक खंगाले जा रहे हैं ताकि पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पंजाब पुलिस ने साफ किया है कि सीमा पार से हथियार और नशा तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

2 किलो हेरोइन के साथ SHO गिरफ्तार, पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आई थी नशे की खेप

अमृतसर: पंजाब पुलिस ने अमृतसर के भिंडी सैदां थाने में तैनात SHO शशपाल सिंह को 2 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन की एक खेप आई थी, जिसे SHO ने बरामद तो किया लेकिन उसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के बजाय खुद के पास रख लिया।

पुलिस की कार्रवाई और रिमांड: जैसे ही पुलिस के उच्चाधिकारियों को इस बात की भनक लगी कि SHO ने हेरोइन को खुर्द-बुर्द कर दिया है, तुरंत जांच शुरू की गई। जांच में दोषी पाए जाने पर एसएसपी सोहेल मीर ने शशपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सोमवार को आरोपी को अजनाला कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

थाने का पिछला रिकॉर्ड: गौरतलब है कि यह वही भिंडी सैदां थाना है जहाँ 30 मार्च को ग्रेनेड अटैक हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी बाद में खालिस्तान लिब्रेशन आर्मी (KLA) ने ली थी। पुलिस अब इस मामले में गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।