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UPI MDR 2026: ₹2,000 से अधिक भुगतान पर 0.4% MDR, 15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

UPI MDR को लेकर वित्त मंत्रालय ने सफाई दी है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा, ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई पर एमडीआर लागू करने के फैसले के पीछे किसी तरह का विदेशी दबाव या प्रभाव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि यह दावा गलत है कि यूपीआई पर एमडीआर लगाने का फैसला किसी विदेशी दबाव के कारण लिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक सरकार का उद्देश्य ऐसा डिजिटल भुगतान तंत्र तैयार करना है, जो लंबे समय तक टिकाऊ, समावेशी और किफायती बना रहे।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

नए प्रावधान के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन निर्धारित की गई है।

हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई भुगतान पर किसी भी राशि के लिए एमडीआर लागू नहीं होगा। यानी दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR का भुगतान ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। यह व्यापारी भुगतान से जुड़े इकोसिस्टम में लागू शुल्क होगा, जिसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं समेत संबंधित भागीदारों के बीच साझा किया जाएगा।

इस व्यवस्था का असर मुख्य रूप से पात्र व्यापारी लेन-देन पर पड़ेगा, जबकि आम ग्राहक द्वारा किए जाने वाले P2P यूपीआई भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि नए ढांचे का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता और समावेशिता को बनाए रखना है।

मोहाली में पोषण माह रैली का आयोजन, ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का दिया संदेश

SPNIWCD क्षेत्रीय केंद्र मोहाली ने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के तहत पोषण माह रैली आयोजित की। रैली में संतुलित आहार, मातृ-शिशु पोषण और स्वस्थ आदतों के प्रति जागरूकता फैलाई गई।

मोहाली / सत्ता संदेश

सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD), क्षेत्रीय केंद्र मोहाली द्वारा 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत पोषण माह रैली का आयोजन किया गया। रैली का उद्देश्य पोषण, स्वस्थ आहार संबंधी आदतों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और सामुदायिक सहभागिता के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।

रैली से पहले क्षेत्रीय निदेशक डॉ. के. सुनीता शेषाद्री ने मुख्य अतिथि डॉ. मदनजीत कौर सहोता, कार्यकारी सदस्य, बाल कल्याण समिति का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. शेषाद्री ने बताया कि सितंबर माह में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की व्यापक थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है। इस थीम के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के लिए सामुदायिक कार्रवाई के केंद्र के रूप में मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्य अतिथि डॉ. मदनजीत कौर सहोता ने रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने पहल की सराहना करते हुए कहा कि पोषण संबंधी जागरूकता और स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के लिए परिवार, संस्थान और समुदाय की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

रैली में एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) के विद्यार्थियों, SPNIWCD क्षेत्रीय केंद्र मोहाली के संकाय एवं कर्मचारियों तथा अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्लाकार्ड, नारों और सामुदायिक संवाद के माध्यम से संतुलित एवं विविध आहार, पर्याप्त प्रोटीन, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, मातृ एवं शिशु पोषण, स्वच्छता और कुपोषण की रोकथाम से जुड़े संदेश लोगों तक पहुंचाए गए।

रैली के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्वस्थ वृद्धि एवं विकास के लिए आहार में अनाज एवं मोटे अनाज, दालें, फल-सब्जियां, मेवे एवं बीज, दूध एवं दुग्ध उत्पाद तथा अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और पोषण के बीच संबंध को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने जीवन के शुरुआती 1,000 दिनों में पर्याप्त पोषण और संवेदनशील देखभाल के महत्व के बारे में जागरूक किया। पोषण और प्रारंभिक उद्दीपन को बच्चों के संज्ञानात्मक, मोटर तथा सामाजिक-भावनात्मक विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया।

इस दौरान पोषण अभियान के जन आंदोलन दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पोषण में सुधार केवल सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवारों, समुदायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से ही स्थायी व्यवहार परिवर्तन संभव है।

रैली जॉब ट्रेनिंग कोर्स (JTC) के पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा घटक का व्यावहारिक विस्तार भी रही। इसके माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों और ADCGC विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता गतिविधियों में लागू करने का अवसर मिला।

डॉ. के. सुनीता शेषाद्री ने कहा कि रैली का उद्देश्य पोषण, स्वस्थ आहार व्यवहार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के प्रति समुदाय में जागरूकता बढ़ाना और सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम यह संदेश देती है कि पोषण केवल सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार, संस्था और समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान का उद्देश्य पोषण साक्षरता को मजबूत करना, स्वस्थ व्यवहारों को बढ़ावा देना और पोषण संबंधी संदेशों को संस्थान से समुदाय तक पहुंचाना है।

SPNIWCD क्षेत्रीय केंद्र मोहाली की इस पहल ने पोषण शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और क्षेत्र-आधारित प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। कार्यक्रम के माध्यम से मिशन पोषण 2.0 और पोषण अभियान के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप स्वस्थ एवं सुपोषित समाज के निर्माण के लिए सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया गया।

2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, PIB चंडीगढ़ ने NCB के साथ किया ‘वार्तालाप’

भारत सरकार ने 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। PIB चंडीगढ़ ने NCB के सहयोग से ‘वार्तालाप’ आयोजित कर विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 की रणनीति पर चर्चा की।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जून 2026 में ‘नशामुक्त भारत’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 का शुभारंभ किया गया था। इस विजन डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के प्रमुख पहलुओं, उद्देश्यों और रणनीतियों पर चर्चा की गई। मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति महत्वपूर्ण आधार है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है। ऐसे में ‘नशामुक्त भारत 2029’ को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ पर जोर

जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की तीन वर्षीय कार्ययोजना को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विजन डॉक्यूमेंट चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—खुफिया सूचना एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं हानि में कमी तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय।

इन चारों स्तंभों के लिए ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ (Detect, Disrupt and Destroy) को परिचालन मंत्र बनाया गया है।

डिटेक्ट (Detect): मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी के मार्ग, तस्करों, तकनीक, भुगतान माध्यमों और प्रमुख संचालकों की पहचान करना।

डिसरप्ट (Disrupt): मादक पदार्थों के परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और ड्रग्स से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाना।

डिस्ट्रॉय (Destroy): अवैध ड्रग लैब, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों, गिरोहों के नेतृत्व और वितरण नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर देना।

NCB और PIB अधिकारियों ने मीडिया को दी जानकारी

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों को देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई शामिल रही।

विजन डॉक्यूमेंट में गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं के विनष्टीकरण, मादक पदार्थों से जुड़े अपराधियों एवं भगोड़ों को वापस लाने, विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण और मापनीय राष्ट्रीय परिणाम हासिल करने पर भी जोर दिया गया है।

मांग, आपूर्ति और हानि में कमी पर फोकस

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त भारत के लिए आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी से जुड़े रोडमैप पर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार मादक पदार्थों के नेटवर्क, वित्तीय संसाधनों और भगोड़ों को लक्षित करने के साथ-साथ समस्या से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

नीति निर्माण से लेकर अभियोजन तक विभिन्न एजेंसियों के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय को मजबूत करना भी विजन डॉक्यूमेंट की प्राथमिकताओं में शामिल है।

यह विजन डॉक्यूमेंट संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें मादक पदार्थों की समस्या से जुड़े मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और हानि में कमी के पहलुओं के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है।

युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों पर विशेष ध्यान

रोडमैप में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी से निपटने, युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने, उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के उपाय शामिल किए गए हैं।

शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने की योजना है, जो समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भूमिका निभाएंगे।

‘वार्तालाप’ कार्यक्रम के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने और समाज तक सही एवं प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में मीडिया को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को जन-अभियान में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

नशामुक्त भारत 2029: सरकार का तीन साल का रोडमैप, ड्रग्स के खिलाफ चार स्तंभों पर रणनीति

नशामुक्त भारत 2029 के लक्ष्य को लेकर सरकार ने मादक पदार्थ नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029 तैयार किया है। जानिए चार स्तंभों वाली रणनीति और चंडीगढ़ में आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम की पूरी जानकारी।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को ‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी किया था। यह दस्तावेज नशीले पदार्थों की मांग, आपूर्ति और इससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अगले तीन वर्षों का साझा रोडमैप प्रस्तुत करता है।

इसी विज़न डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान विज़न डॉक्यूमेंट के प्रमुख बिंदुओं, नशामुक्त भारत अभियान की रणनीति और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में बताया गया कि नशीले पदार्थों की समस्या केवल स्वास्थ्य और परिवार से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है। सरकार के अनुसार, स्वस्थ और नशामुक्त युवा शक्ति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें प्रवर्तन, खुफिया एवं अभियान आधारित कार्रवाई; प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण; मांग एवं हानि में कमी; तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं।

इस रणनीति के तहत ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ को परिचालन मंत्र के रूप में अपनाया गया है। ‘डिटेक्ट’ के तहत मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी मार्ग, तस्करों, तकनीक और भुगतान माध्यमों की पहचान पर जोर है। ‘डिसरप्ट’ के तहत ड्रग्स की सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट, हवाला और मादक पदार्थों से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया जाएगा। वहीं ‘डिस्ट्रॉय’ के तहत अवैध ड्रग प्रयोगशालाओं, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों और वितरण नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है।

विजन डॉक्यूमेंट में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने की रणनीति शामिल है।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की संयुक्त भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने की रणनीति से अवगत कराया गया।

मीडिया प्रतिनिधियों को मादक पदार्थों के खिलाफ देशभर में की जा रही कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त मादक पदार्थों के निस्तारण जैसी कार्रवाई शामिल है।

विजन डॉक्यूमेंट में शिक्षा संस्थानों को नशामुक्त बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय की बात कही गई है। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की योजना भी बताई गई है।

सरकार की तीन वर्षीय रणनीति में आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी—तीनों स्तरों पर समानांतर कार्रवाई का खाका तैयार किया गया है। साथ ही नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन, वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई, भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई, अवैध प्रयोगशालाओं पर शिकंजा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई है।

‘वार्तालाप’ के दौरान मीडिया को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में प्रमाणिक और जिम्मेदार जानकारी समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नशामुक्त भारत के लक्ष्य में जनभागीदारी बढ़ाना और नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता अभियान को मजबूत करना रहा।

EPFO Wage Ceiling Hike: 15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई वेतन सीमा, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

EPFO Wage Ceiling Hike: केंद्र सरकार ने EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है। फैसले से 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। सरकार के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि EPFO की वैधानिक वेतन सीमा में यह बदलाव करीब 12 साल बाद किया जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2014 में वेतन सीमा को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था।

क्या है EPFO की वेज सीलिंग?

EPFO की वेज सीलिंग का मतलब उस अधिकतम मासिक वेतन सीमा से है, जिसके आधार पर कर्मचारी की अनिवार्य EPF कवरेज निर्धारित होती है। अभी तक 15,000 रुपये प्रति माह की वैधानिक सीमा लागू थी। नई व्यवस्था के बाद 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आएंगे।

सरकार के मुताबिक, पिछले वर्षों में वेतन और आय में वृद्धि के साथ-साथ देश में औपचारिक रोजगार का दायरा भी बढ़ा है। नई सीमा इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सुरक्षा का कवरेज बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

वेतन सीमा बढ़ने से ऐसे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के अनिवार्य कवरेज में आ जाएंगे, जो अब तक 15,000 रुपये से अधिक वेतन होने के कारण इस अनिवार्य सीमा से बाहर थे।

इसके जरिए अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि और संबंधित सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।

सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय खर्च

वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले का असर सरकारी वित्तीय सहायता पर भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा वार्षिक बजट सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है, जबकि नई व्यवस्था के तहत अनुमानित वार्षिक सरकारी खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये होगा।

इस तरह सरकार पर हर साल लगभग 1,089 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। पांच वर्षों में अनुमानित कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये बताया गया है।

12 साल बाद बदली EPFO की वेतन सीमा

EPFO की वैधानिक वेतन सीमा में इससे पहले सितंबर 2014 में बदलाव किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बदलते वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार के विस्तार के अनुरूप अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।

टांडा उड़मुड़ : बिजली कटों के खिलाफ अकाली दल का प्रदर्शन, SDM कार्यालय के बाहर जताया विरोध

होशियारपुर / सत्ता संदेश

टांडा उड़मुड़ में लंबे समय से जारी बिजली कटों और बिजली सप्लाई में बार-बार आ रही रुकावटों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (बादल) की ओर से आज SDM कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व शिरोमणि अकाली दल के नेशनल जनरल सेक्रेटरी एवं हलका इंचार्ज सरदार अरविंदर सिंह रसूलपुर ने किया।

प्रदर्शन के दौरान अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगातार हो रहे बिजली कटों को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ अपना रोष जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई-कई घंटों तक बिजली गुल रहने के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अकाली नेताओं के मुताबिक बिजली कटों का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, दुकानदारों और व्यापारियों के कामकाज पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े कार्यों के साथ-साथ बाजारों और कारोबार में भी बिजली की नियमित आपूर्ति महत्वपूर्ण है।

अकाली दल के नेताओं ने प्रशासन और संबंधित बिजली विभाग से मांग की कि टांडा उड़मुड़ क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को सुचारू किया जाए और लंबे समय तक लगने वाले बिजली कटों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोगों को लगातार बिजली उपलब्ध करवाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

CPWD JE Association Chandigarh ने आयोजित किया 30वां रक्तदान शिविर, 136 यूनिट रक्त एकत्र

चंडीगढ़ में CPWD JE Association ने इंजीनियर्स दिवस पर 30वां रक्तदान शिविर आयोजित किया। PGIMER के सहयोग से हुए शिविर में 136 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर सीपीडब्ल्यूडी जेई एसोसिएशन, चंडीगढ़ की ओर से बुधवार को केंद्रीय सदन, सेक्टर-9ए, चंडीगढ़ में 30वां रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के सहयोग से किया गया, जिसमें कुल 136 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

यह रक्तदान शिविर भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की स्मृति में इंजीनियर्स दिवस मनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। शिविर के दौरान सीपीडब्ल्यूडी जेई एसोसिएशन के अध्यक्ष भोज राज नेहरा और सचिव साक्षी गोयल मौजूद रहे और आयोजन की व्यवस्थाओं की देखरेख की।

एसोसिएशन की ओर से रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि रक्तदान मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण और नेक कार्य है। रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों की मदद की जा सकती है और इस तरह का सामाजिक योगदान समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है।

इस अवसर पर केतन चौधरी, अनिरुद्ध गिरि और रवि कुमार ने भी रक्तदाताओं एवं शिविर में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

एसोसिएशन ने शिविर को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी रक्तदाताओं, पीजीआईएमईआर की टीम और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया। 30वें रक्तदान शिविर में 136 यूनिट रक्त एकत्र होना आयोजन की सफलता को दर्शाता है।

मानसा में बिजली कटों के खिलाफ अकाली दल का प्रदर्शन, 24 घंटे निर्बाध सप्लाई की मांग

मानसा में बिजली के अघोषित कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल का प्रदर्शन। मानसा, बुधलाड़ा और सरदूलगढ़ में धरने, 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई की मांग।

मानसा / सत्ता संदेश

पंजाब में लगातार सामने आ रही बिजली आपूर्ति की समस्या को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को मानसा, बुधलाड़ा और सरदूलगढ़ में अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि पंजाब के लोगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। अकाली नेताओं का कहना है कि मौजूदा बिजली कटों का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। धान की फसल के महत्वपूर्ण दौर में खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मानसा में बिजली आपूर्ति को लेकर किसानों की नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी है। हाल के दिनों में क्षेत्र में अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण धान की सिंचाई प्रभावित होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।

अकाली नेताओं ने दावा किया कि पिछली शिरोमणि अकाली दल सरकार के दौरान पंजाब में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए सौर और थर्मल पावर परियोजनाओं पर काम किया गया था। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में इजाफा हुआ।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मौजूदा समय में पंजाब के कई हिस्सों में बिजली कटों की समस्या बनी हुई है। इसका असर किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों पर भी पड़ रहा है। राज्य में बिजली संकट को लेकर हाल के दिनों में किसान संगठनों और औद्योगिक क्षेत्र की ओर से भी विरोध प्रदर्शन सामने आए हैं।

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार से मांग की है कि बिजली कटों की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और किसानों, आम लोगों तथा उद्योगों को नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

यह प्रदर्शन शिरोमणि अकाली दल द्वारा 16 सितंबर को पंजाबभर में बिजली कटों के खिलाफ विधानसभा हलका स्तर पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों के आह्वान का हिस्सा है।

Amritser : काउंटर इंटेलिजेंस की बड़ी कार्रवाई, 4 युवक गिरफ्तार; हेरोइन और हथियार बरामद

अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस ने अमृतसर-लाहौर हाईवे पर चार युवकों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों के खिलाफ काउंटर इंटेलिजेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। टीम ने यह कार्रवाई अमृतसर-लाहौर इंटरनेशनल हाईवे पर खासा के पास की।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार बरामद किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में बरामद हेरोइन की मात्रा करीब 30 से 35 किलोग्राम बताई गई है, जबकि द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई में 27 किलोग्राम हेरोइन और एक पिस्तौल बरामद हुई है। बरामदगी की अंतिम मात्रा और हथियारों का पूरा विवरण जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करन, समरप्रीत, विशाल और सनी के रूप में बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में एक संदिग्ध विदेशी हैंडलर से इनके संपर्क की जानकारी भी सामने आई है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही हैं।

जांच एजेंसियों को शक है कि नशीले पदार्थों की खेप सीमा पार से ड्रोन के जरिए पहुंचाई जा रही थी। काउंटर इंटेलिजेंस टीम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खेप कहां से आई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

अमृतसर में ड्रग्स और अवैध हथियारों के खिलाफ हाल के दिनों में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की कई कार्रवाइयां सामने आई हैं। पंजाब पुलिस ने भी हाल में ड्रग और हथियार सप्लाई से जुड़े कई नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है।

फिलहाल चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बरामदगी या गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

माछीवाड़ा मंडी में आढ़तियों की बैठक, धान खरीद जल्द शुरू करने की मांग

माछीवाड़ा साहिब अनाज मंडी में सच्चा सौदा आढ़ती एसोसिएशन की बैठक हुई। आढ़तियों ने सरकार से धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग की और किसानों से 17% से अधिक नमी वाला धान मंडी में न लाने की अपील की।

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश से

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब की अनाज मंडी में सच्चा सौदा आढ़ती एसोसिएशन की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में आढ़तियों के साथ-साथ शेलर मालिकों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान आगामी धान सीजन को लेकर खरीद प्रबंधों और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान आढ़ती एसोसिएशन के नेताओं ने सरकार से मांग की कि धान की सरकारी खरीद जल्द से जल्द शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि समय पर खरीद शुरू होने से किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और मंडियों में खरीद प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चल सकेगी।

आढ़तियों ने किसानों से भी अपील की कि वे मंडी में 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाला धान लेकर न आएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित नमी के मानकों के अनुसार धान मंडी में लाने से खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।

बैठक में आढ़तियों और शेलर मालिकों ने भरोसा दिलाया कि धान के सीजन के दौरान किसानों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। साथ ही मंडी में खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्ष मिलकर काम करेंगे।