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मानसा में बिजली कटों के खिलाफ अकाली दल का प्रदर्शन, 24 घंटे निर्बाध सप्लाई की मांग

मानसा में बिजली के अघोषित कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल का प्रदर्शन। मानसा, बुधलाड़ा और सरदूलगढ़ में धरने, 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई की मांग।

मानसा / सत्ता संदेश

पंजाब में लगातार सामने आ रही बिजली आपूर्ति की समस्या को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को मानसा, बुधलाड़ा और सरदूलगढ़ में अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि पंजाब के लोगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। अकाली नेताओं का कहना है कि मौजूदा बिजली कटों का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। धान की फसल के महत्वपूर्ण दौर में खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मानसा में बिजली आपूर्ति को लेकर किसानों की नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी है। हाल के दिनों में क्षेत्र में अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण धान की सिंचाई प्रभावित होने की रिपोर्टें सामने आई हैं।

अकाली नेताओं ने दावा किया कि पिछली शिरोमणि अकाली दल सरकार के दौरान पंजाब में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए सौर और थर्मल पावर परियोजनाओं पर काम किया गया था। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में इजाफा हुआ।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मौजूदा समय में पंजाब के कई हिस्सों में बिजली कटों की समस्या बनी हुई है। इसका असर किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों पर भी पड़ रहा है। राज्य में बिजली संकट को लेकर हाल के दिनों में किसान संगठनों और औद्योगिक क्षेत्र की ओर से भी विरोध प्रदर्शन सामने आए हैं।

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार से मांग की है कि बिजली कटों की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और किसानों, आम लोगों तथा उद्योगों को नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

यह प्रदर्शन शिरोमणि अकाली दल द्वारा 16 सितंबर को पंजाबभर में बिजली कटों के खिलाफ विधानसभा हलका स्तर पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों के आह्वान का हिस्सा है।

Amritser : काउंटर इंटेलिजेंस की बड़ी कार्रवाई, 4 युवक गिरफ्तार; हेरोइन और हथियार बरामद

अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस ने अमृतसर-लाहौर हाईवे पर चार युवकों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों के खिलाफ काउंटर इंटेलिजेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। टीम ने यह कार्रवाई अमृतसर-लाहौर इंटरनेशनल हाईवे पर खासा के पास की।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार बरामद किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में बरामद हेरोइन की मात्रा करीब 30 से 35 किलोग्राम बताई गई है, जबकि द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई में 27 किलोग्राम हेरोइन और एक पिस्तौल बरामद हुई है। बरामदगी की अंतिम मात्रा और हथियारों का पूरा विवरण जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करन, समरप्रीत, विशाल और सनी के रूप में बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में एक संदिग्ध विदेशी हैंडलर से इनके संपर्क की जानकारी भी सामने आई है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही हैं।

जांच एजेंसियों को शक है कि नशीले पदार्थों की खेप सीमा पार से ड्रोन के जरिए पहुंचाई जा रही थी। काउंटर इंटेलिजेंस टीम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खेप कहां से आई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

अमृतसर में ड्रग्स और अवैध हथियारों के खिलाफ हाल के दिनों में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की कई कार्रवाइयां सामने आई हैं। पंजाब पुलिस ने भी हाल में ड्रग और हथियार सप्लाई से जुड़े कई नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है।

फिलहाल चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बरामदगी या गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

माछीवाड़ा मंडी में आढ़तियों की बैठक, धान खरीद जल्द शुरू करने की मांग

माछीवाड़ा साहिब अनाज मंडी में सच्चा सौदा आढ़ती एसोसिएशन की बैठक हुई। आढ़तियों ने सरकार से धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग की और किसानों से 17% से अधिक नमी वाला धान मंडी में न लाने की अपील की।

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश से

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब की अनाज मंडी में सच्चा सौदा आढ़ती एसोसिएशन की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में आढ़तियों के साथ-साथ शेलर मालिकों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान आगामी धान सीजन को लेकर खरीद प्रबंधों और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान आढ़ती एसोसिएशन के नेताओं ने सरकार से मांग की कि धान की सरकारी खरीद जल्द से जल्द शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि समय पर खरीद शुरू होने से किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और मंडियों में खरीद प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चल सकेगी।

आढ़तियों ने किसानों से भी अपील की कि वे मंडी में 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाला धान लेकर न आएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित नमी के मानकों के अनुसार धान मंडी में लाने से खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।

बैठक में आढ़तियों और शेलर मालिकों ने भरोसा दिलाया कि धान के सीजन के दौरान किसानों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। साथ ही मंडी में खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्ष मिलकर काम करेंगे।

मानसा सिटी-2 थाने के बाहर किसान यूनियन का धरना, महिला से मारपीट के आरोपों पर पुलिस का इनकार

मानसा के सिटी-2 थाने में महिला से कथित मारपीट के आरोपों को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने धरना शुरू किया। पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए महिला को पूछताछ के लिए थाने लाने की बात कही।

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

मानसा के सिटी-2 पुलिस थाने में एक महिला को कथित तौर पर हिरासत में लेकर उसके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। किसान यूनियन ने मामले की निष्पक्ष जांच और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

किसान यूनियन नेता राम सिंह भैनी भागा के मुताबिक, सोमवार शाम पुलिस एक महिला को उसके घर से हिरासत में लेकर थाने लाई थी। यूनियन का आरोप है कि थाने में महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उसके सिर पर चप्पल से वार किया गया।

यूनियन के अनुसार, देर रात कार्यकर्ता महिला को अपने साथ लेकर सिटी-2 थाने के बाहर पहुंचे। इस दौरान महिला ने रोते हुए अपने साथ कथित तौर पर हुई मारपीट की जानकारी दी। किसान यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि जब कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी से मामले को लेकर सवाल किया तो उनके सामने भी महिला के साथ कथित मारपीट की गई।

इन आरोपों के बाद किसान यूनियन ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। यूनियन नेताओं ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और दोषी पाए जाने वाले पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

वहीं, सिटी-2 थाना प्रभारी बेअंत कौर ने किसान यूनियन द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। थाना प्रभारी के मुताबिक, मानसा शहर में एक युवक पर हुई फायरिंग की घटना की जांच के सिलसिले में महिला को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला के साथ किसी भी तरह की मारपीट नहीं की गई।

फिलहाल किसान यूनियन का धरना जारी है। मामले में किसान यूनियन की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस के इनकार के बीच वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लुधियाना पहुंचे पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू, NDRF अधिकारियों ने बताया प्रेरणास्रोत

लुधियाना में NDRF के विशेष कार्यक्रम में पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू पहुंचे। उन्होंने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बताया। NDRF अधिकारियों ने उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में NDRF की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू पहुंचे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना और समाज में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस दौरान पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू का विशेष सम्मान भी किया गया।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि अपने पर्यावरण और आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल शहरों को खूबसूरत बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी साफ-सफाई और उचित रखरखाव पर भी लगातार ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी शहर की सुंदरता के साथ-साथ उसकी स्वच्छता और देखभाल में आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के क्षेत्र को साफ रखने और पर्यावरण की उचित देखभाल करने की अपील की।

वहीं, कार्यक्रम के दौरान NDRF अधिकारियों ने पद्मश्री इंदरजीत सिंह सिद्धू को प्रेरणास्रोत बताया। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है और समाज के प्रति उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

NDRF अधिकारियों ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी इंदरजीत सिंह सिद्धू स्वयं सफाई के कार्यों में जुटे रहते हैं। उनका यह प्रयास युवाओं और समाज के अन्य लोगों को पर्यावरण एवं स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है।

शिरोमणि अकलाी दल का डेमोक्रेसी डे, सिमरनजीत मान ने SGPC चुनाव समेत कई मुद्दे उठाए

अमृतसर के हेरिटेज रोड पर SAD (अमृतसर) ने डेमोक्रेसी डे मनाया। सिमरनजीत सिंह मान ने SGPC चुनाव, 1984, अग्निवीर, करतारपुर कॉरिडोर और वाघा बॉर्डर व्यापार समेत कई मुद्दों पर बयान दिया।

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर: शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) की ओर से अमृतसर के हेरिटेज रोड पर डेमोक्रेसी डे के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान ने SGPC चुनाव, 1984 की घटनाओं, अग्निवीर योजना, सिख धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और अंतरराष्ट्रीय मामलों समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी रही। (The Tribune)

सिमरनजीत सिंह मान ने 1984 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दरबार साहिब और अन्य गुरुद्वारों पर हुए हमलों के बाद खालिस्तान की मांग को आधार मिला। यह मान का राजनीतिक वक्तव्य था, जिसे उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में रखा।

मान ने SGPC चुनावों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार और बादल परिवार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SGPC के चुनाव नियमित रूप से होने चाहिए, लेकिन लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं। उन्होंने इसे सिख संस्थाओं की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। हालिया रिपोर्टों में भी SAD (अमृतसर) के कार्यक्रम में SGPC चुनावों में देरी को प्रमुख मुद्दे के तौर पर उठाए जाने की पुष्टि हुई है। (The Tribune)

अग्निवीर योजना पर भी सिमरनजीत सिंह मान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार साल की अग्निवीर सेवा व्यवस्था को लेकर सिख युवाओं में असहमति है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की रक्षा तकनीक और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता से जुड़े सवाल भी उठाए।

अंतरराष्ट्रीय मामलों का जिक्र करते हुए मान ने BRICS और Quad जैसे समूहों को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने भारत द्वारा रूस और चीन के साथ कथित तौर पर गोपनीय जानकारी साझा किए जाने का आरोप लगाया और अमेरिका से भारत को Quad से बाहर करने की बात कही। ये आरोप और राजनीतिक दावे उनके संबोधन का हिस्सा थे।

मान ने लद्दाख से जुड़े ऐतिहासिक दावों का भी जिक्र किया। उन्होंने 1834 में लाहौर दरबार द्वारा जीते गए क्षेत्रों का हवाला देते हुए इन इलाकों को सिखों को सौंपने और खालिस्तान घोषित करने की मांग रखी। लद्दाख को 1834 में सिख साम्राज्य में शामिल किए जाने का उल्लेख SAD (अमृतसर) की आधिकारिक सामग्री में भी मिलता है। (Akalidalamritsar)

उन्होंने करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने और वाघा बॉर्डर के जरिए भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार शुरू करने की मांग भी उठाई। मान ने कहा कि सीमा व्यापार खुलने से पंजाब के किसानों को अपनी फसलों के बेहतर बाजार और दाम मिल सकते हैं। उन्होंने अमरनाथ यात्रा का उदाहरण देते हुए करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भी सवाल उठाया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि प्रदर्शन मार्च दरबार साहिब की ओर जाएगा। आयोजकों के अनुसार SGPC, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार, हेड ग्रंथी साहिब और अन्य संबंधित प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

पंजाब में 16-17 सितंबर को बारिश के आसार, गर्मी से मिलेगी राहत

पंजाब में 16 और 17 सितंबर को बारिश की संभावना है। PAU और IMD के अनुसार कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक हो सकती है। लुधियाना में सितंबर की बारिश सामान्य से कम दर्ज हुई है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में लगातार पड़ रही गर्मी के बीच अगले दो दिनों में मौसम करवट ले सकता है। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के मौसम विभाग के अनुसार, 16 और 17 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से लेकर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान में भी पंजाब-चंडीगढ़ क्षेत्र में इन दिनों बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।

मौसम में बदलाव से लोगों को पिछले कुछ समय से जारी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ सकती हैं, जिसके चलते पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में बारिश देखने को मिल सकती है।

लुधियाना में इस साल बारिश सामान्य से कम रही है। सितंबर में अब तक करीब 33 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की बात सामने आई है, जबकि इस महीने का औसत 100 मिलीमीटर से अधिक बताया गया है। मौसम विभाग की विशेषज्ञ डॉ. पवनीत किंगरा के अनुसार, पिछले साल की तुलना में भी इस बार बारिश कम हुई है।

हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे राज्य के कई इलाकों में मौसम सुहावना होने के साथ तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है।

मौसम विभाग ने बारिश के दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज बारिश और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन तस्करी रोकने के लिए बड़ा एक्शन, अमृतसर में 2 एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात

अमृतसर ग्रामीण के सीमावर्ती गांव मोधे धनॉय में 2 एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए निगरानी और नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाई।

अमृतसर / सत्ता संदेश

पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए ड्रोन से हथियार, हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अमृतसर ग्रामीण के सीमावर्ती गांव मोधे धनॉय में दो एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं।

मंगलवार को IG बॉर्डर रेंज गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने इन सिस्टम को लॉन्च किया और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान SSP अमृतसर ग्रामीण कंवलप्रीत सिंह चहल समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

IG भुल्लर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ अभियान और संगठित अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत बॉर्डर रेंज में ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सीमा के कुछ इलाके बेहद संवेदनशील हैं, जहां पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ, हथियार और अन्य गैरकानूनी सामान भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने की कोशिश की जाती है। ऐसे संवेदनशील और कमजोर स्थानों पर एंटी-ड्रोन ऑपरेशन के साथ-साथ पुलिस पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाएगी।

पुलिस के मुताबिक एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमा क्षेत्र में संदिग्ध या बिना अनुमति उड़ रहे ड्रोन की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेंगे। पंजाब पुलिस ने पहले ही कई स्थानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं, जबकि BSF के पास भी ड्रोन सर्विलांस और काउंटर-ड्रोन से जुड़ी क्षमताएं मौजूद हैं। दोनों एजेंसियों के संसाधनों और टीमों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। (The Tribune)

IG भुल्लर ने कहा कि रात की पेट्रोलिंग को भी मजबूत किया जा रहा है। अमृतसर ग्रामीण पुलिस में अतिरिक्त बल लगाया जा रहा है, ताकि संदिग्ध ड्रोन गतिविधि सामने आने पर रात के समय भी अतिरिक्त पुलिस पार्टियों को तुरंत मौके पर भेजा जा सके। इसका उद्देश्य ड्रोन से गिराई गई संभावित खेप को हासिल करने वाले नेटवर्क तक पहुंचना और त्वरित कार्रवाई करना भी है।

उन्होंने कहा कि BSF के साथ समन्वय इस पूरे अभियान का अहम हिस्सा है। सीमा पर BSF की पहली सुरक्षा लाइन के पीछे पुलिस की दूसरी लाइन काम करती है। दोनों के बीच तालमेल को और मजबूत करने के लिए रात में पेट्रोलिंग करने वाले BSF अधिकारियों और जवानों के साथ बैठकें की जा रही हैं तथा ग्राउंड स्तर की समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली जा रही है।

पंजाब पुलिस सीमा क्षेत्र में ड्रोन गतिविधि के संभावित हॉटस्पॉट की पहचान भी कर रही है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही स्थानीय लोगों, पंचायतों और सिविल प्रशासन को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। ग्रामीणों से अपील की जाएगी कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध ड्रोन या अनजान गतिविधि दिखाई देती है तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।

IG भुल्लर ने कहा कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए केवल ड्रग्स ही नहीं, बल्कि हथियार और विस्फोटक भी भेजे जाने का खतरा रहता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ सीमावर्ती गांवों के लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस को ड्रोन तकनीक में लगातार हो रहे बदलावों के मुताबिक अपनी तकनीकी क्षमताओं, पेट्रोलिंग और ऑपरेशनल रणनीति को भी लगातार अपडेट करना होगा। पुलिस, BSF और सीमावर्ती आबादी के बीच बेहतर तालमेल के जरिए ड्रोन आधारित तस्करी पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

पंजाब पुलिस की ओर से हाल में जारी जानकारी के अनुसार राज्य में कई एंटी-ड्रोन सिस्टम और ड्रोन रिस्पॉन्स टीमों के जरिए सीमा क्षेत्र में निगरानी को मजबूत किया गया है।

मिटते फासलेः सेमीकंडक्टर सामग्रियों में आत्मनिर्भरता पर भारत का जोर

भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम की कहानी में अक्सर सिर्फ चिप बनाने वाले कारखानों (फैब) तथा असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) क्षमता का ही बोलबाला रहता है। यह रुझान सिर्फ निवेश की गति को दिखाता है। यह इस बात को नहीं बताता कि असली रणनीतिक कमजोरी कहां है। कोई भी फैब प्रक्रिया के स्तर पर रसायनों (डिपोजिशन, एचिंग, लिथोग्राफी, सीएमपी, सफाई और डोपिंग के चरणों में) का सतत उपभोक्ता होता है। इन रसायनों में अत्यधिक शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड प्रक्रिया गैसें (अल्ट्रा-प्योर गैसें), तरल रसायन (एसिड, अमोनिया और अन्य क्लीनर), सीएमपी घोल (स्लरी), फोटोरेसिस्ट और ऐसे बेस मैटेरियल (सबस्ट्रेट्स) शामिल होते हैं, जिनमें अशुद्धियां एक अरबवें या एक खरबवें  हिस्से जितनी कम होनी चाहिए। शुद्धता में थोड़ी सी कमी शायद तुरंत बड़ी खराबी न दिखाए। मगर यह हफ्तों बाद चिप की क्वालिटी या उसकी विश्वसनीयता को कमजोर कर देती है। यही इस रणनीतिक हकीकत के पीछे का तकनीकी सच है। 

उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत के नए संयंत्रों के लिए विशेष रसायनों की आपूर्ति में आयात पर निर्भरता 85 प्रतिशत से अधिक है। प्रक्रिया में काम आने वाले उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। रणनीतिक तौर पर देखें तो यह किसी पहले से स्थापित परिपक्व उद्योग की तुलना में कहीं अधिक मायने रखता है। इन चीजों की खपत लगातार होती है और इन्हें बीच प्रक्रिया में बिना पूरी रीक्वालिफिकेशन (फिर से जांच और मंजूरी) के बदला नहीं जा सकता। कोई भी कारखाना सप्लाई में रुकावट आने पर रातों-रात अपना गैस या स्लरी सप्लायर नहीं बदल सकता। मुश्किल यह है कि ऐसा करने पर हफ्तों तक फैक्ट्री बंद रख कर जांच करनी पड़ती है। यही वह स्थिति है जो आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी को दर्शाती है। सेमीकॉन 2.0 को इसी अंतर को पाटने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत उपकरणों, विशेष रसायनों, औद्योगिक गैसों और सामग्रियों को एक अलग और मजबूत प्रोत्साहन स्तंभ बनाया गया है। पहले इन सामग्रियों को केवल बाहर से मंगाई जाने वाली चीज माना जाता था। लेकिन इस मिशन के अंतर्गत इन सामग्रियों को ऐसी चीजें माना गया है जिनके स्वदेश में निर्माण की क्षमता को बढ़ाया जाना है। मूल मिशन की शुरुआत के बाद से भारत की सेमीकंडक्टर नीति में यह सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है। इसका सीधा निशाना उस स्तर पर है जो तय करता है कि इस क्षेत्र का विकास वाकई देश को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाता है या नहीं।

आयात पर निर्भरता को खत्म करना हर मामले में एक समान रूप से कठिन नहीं है। उन्नत लिथोग्राफी और फ्रंट-एंड कैपिटल इक्विपमेंट के पीछे दशकों की संचित बौद्धिक संपदा (आईपी) और कुछ ही वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं का हाथ है, इसलिए लीडिंग-एज नोड्स पर भारत का जल्द प्रवेश व्यावहारिक नहीं है। लेकिन, सामग्रियों  का मामला वास्तव में अलग है। ये प्रोसेस केमिस्ट्री, कंटैमिनेशन कंट्रोल और प्यूरिफिकेशन इंजीनियरिंग से तैयार होते हैं, न कि खास टूल आर्किटेक्चर से। बल्क और फाइन केमिकल्स, फार्मास्युटिकल-ग्रेड प्यूरिफिकेशन और इंडस्ट्रियल गैस सेपरेशन में भारत का मौजूदा आधार एक भरोसेमंद तकनीकी शुरुआत हो सकता है।  हालाँकि, इंडस्ट्रियल-ग्रेड से इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड उत्पादन की ओर बढ़ने के लिए समर्पित अल्ट्रा-क्लीन लाइन्स, मेटल्स-फ्री हैंडलिंग और निरंतर पार्टिकल मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है, जिसके लिए अधिकांश भारतीय रसायन उत्पादकों के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। यह अंतर नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह है कि सीमित संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए जहाँ भारत के पास पहले से ही बढ़त हासिल है, न कि उन्हें हर श्रेणी में एक समान बाँट दिया जाए। तकनीक के कुछ अंतर इतने बड़े हैं कि उन्हें जल्दी से खत्म करना संभव नहीं है, जबकि कुछ अन्य ऐसे नहीं हैं। नीति का ध्यान इन्हीं दूसरे कम अंतर वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होना चाहिए।

कुछ इनपुट्स सबसे पहले स्थानीयकरण करने का सबसे मजबूत तर्क पेश करते हैं। ये वे इनपुट्स हैं जिनकी भारत में बड़ी मात्रा में खपत है, जिनकी लगातार आवश्यकता होती है और जिन्हें अभी भी कुछ ही आपूर्तिकर्ताओं से खरीदा जाता है – जैसे प्रोसेस गैस, वेट केमिकल्स, स्लरी और एचैंट।  इन्हें स्थानीय स्तर पर बनाने में सबस्ट्रेट्स या प्रिकर्सर्स की तुलना में लागत भी कम आती है। इसलिए, यहाँ खर्च किया गया हर एक रुपया किसी भी अन्य जगह की तुलना में जोखिम को कम करता है। इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड सामग्री विकसित करने के मिशन के तहत घरेलू रसायन उद्योग की हालिया साझेदारियाँ आगे बढ़ने के लिए एक व्यावहारिक मॉडल हैं। यह मिशन ठीक इसी तरह के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करता है—चाहे वह भारत में मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिफिकेशन बेस की तलाश कर रहे वैश्विक सामग्री निर्माताओं के साथ संयुक्त उद्यम  के ज़रिए हो, या फिर भारतीय रसायन और गैस कंपनियों द्वारा स्वतंत्र रूप से इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड क्षमता के निर्माण के ज़रिए। दोनों रास्ते वैध हैं और व्यावहारिक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं। संयुक्त उद्यम सिद्ध प्रक्रिया संबंधी जानकारी और वैश्विक फैब विशिष्टताओं के अनुरूप तेजी से योग्यता लाते हैं जबकि स्वतंत्र घरेलू कंपनियां इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर आवश्यक गहन और दीर्घकालिक क्षमता का आधार तैयार करती हैं। सेमीकंडक्टर 2.0 को दोनों के लिए एक खुला आमंत्रण माना जाना चाहिए। योग्यता अवसंरचना को ही बाध्यकारी बाधा मानें। निर्माण कंपनियां आपूर्तिकर्ताओं की पुनः योग्यता का निर्धारण केवल सख्त संदूषण और स्थिरता मानदंडों के विरुद्ध सांख्यिकीय रूप से मान्य परीक्षणों के बाद ही करती हैं, जो अक्सर कई तिमाहियों तक चलते हैं। घरेलू कंपनियों के पास वर्तमान में इस कार्य को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए सुलभ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत परीक्षण अवसंरचना की कमी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तीव्र स्थानीयकरण में बाधा अक्सर विनिर्माण क्षमता नहीं बल्कि योग्यता क्षमता होती है। सामग्री और उपकरण निर्माताओं को सरकारी सहायता प्रदान करना आवश्यक है, लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है। प्रदर्शन-सिद्ध  उत्पादन और दोष-घनत्व प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहनों की संरचना करना और घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को डाउनस्ट्रीम फैब और ओएसएटी ऑफटेक प्रतिबद्धताओं के साथ जानबूझकर तालमेल बिठाना, सहायता को उस वास्तविक परिणाम से जोड़ता है जो विश्वसनीय और योग्य आपूर्ति के लिए वास्तव में मायने रखता है।

फैब और एटीएमपी में निवेश आवश्यक बना हुआ है क्योंकि यही वह मुख्य मांग है जो घरेलू सामग्री उद्योग को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बनाती है। लेकिन सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता सिर्फ़ इमारत का मालिकाना हक हासिल करने से नहीं मिलती। यह उन इनपुट्स पर नियंत्रण पाने या कम से कम उन्हें विविधता देने से मिलती है, जो इसमें लगातार इस्तेमाल होते हैं। सेमीकॉन 2.0 का ‘मटीरियल्स पिलर’ (सामग्री से जुड़ा हिस्सा) पहला ऐसा  नीतिगत कदम है जो सीधे तौर पर इस समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियाँ (चाहे संयुक्त उद्यम के ज़रिए प्रवेश करने वाली प्रमुख वैश्विक कंपनियां हों या स्वतंत्र रूप से काम करने वाली घरेलू कंपनियाँ) असल में इस क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी जगह कैसे बनाती हैं। तो फिर हम वास्तविक प्रगति को कैसे मापें? नई घोषित सुविधाओं या फ़ैक्टरियों की गिनती करके तो बिल्कुल नहीं। असल में जिस आंकड़े पर नज़र रखनी है, वह ज़्यादा आसान है। जब भारतीय फ़ैब (सेमीकंडक्टर बनाने वाली फ़ैक्टरियाँ) अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगेंगी, तो उनमें इस्तेमाल होने वाला कितना मटीरियल देश के अंदर से ही लिया जाएगा और सही तरह से प्रमाणित (क्वालिफ़ाइड) होगा? यही एक आंकड़ा, शुद्धिकरण और प्रमाणन के मुश्किल तकनीकी काम को बड़े रणनीतिक लक्ष्य से जोड़ता है। यही संख्या सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला  में सामग्री के मामले में देश की आत्मनिर्भरता को परिभाषित करेगी।

(लेखक आईएसएम, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार में डिस्प्ले एवं मैटेरियल्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी हैं।)

सेमीकॉन 2.0 से भारत में डीप-टेक और स्वदेशी चिप उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: भारत ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मजबूत क्षमता विकसित की है। भारतीय प्रतिभाएं दुनिया के कई उन्नत और जटिल चिप कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब देश के सामने बड़ी चुनौती इस इंजीनियरिंग क्षमता को व्यावसायिक और उद्यम मूल्य में बदलने की है, ताकि भारत में अनुसंधान एवं विकास, स्वदेशी बौद्धिक संपदा और वैश्विक बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर उत्पाद विकसित किए जा सकें।

भारत सरकार के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शिवकुमार कल्याणरमण के अनुसार, भारत के लिए केवल वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में इंजीनियरिंग प्रतिभा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता ऐसे भारतीय और भारत-आधारित वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्यम तैयार करने की है, जो अपने उत्पादों की परिकल्पना और व्यावसायीकरण करें, अपनी मूल बौद्धिक संपदा पर स्वामित्व बनाए रखें तथा वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्था में भागीदारी और उसका स्वामित्व अलग-अलग विषय हैं। भारत लंबे समय से वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग को कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभा उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन वास्तविक आर्थिक लाभ तब बढ़ सकता है जब इस क्षमता को स्वदेशी उत्पादों, प्लेटफॉर्म और बौद्धिक संपदा में बदला जाए।

सेमीकॉन 2.0 से बढ़ेगा दायरा

सेमीकॉन 2.0 इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय से स्वीकृत इस कार्यक्रम में चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, प्रतिभा विकास और व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर जोर दिया गया है। यह केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उद्योग-आधारित अनुसंधान, तकनीकी विकास और कुशल कार्यबल को बढ़ावा देना है।

भारत के पहले सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और चिप डिजाइन में निवेश को प्रोत्साहित किया गया। दिए गए विवरण के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रतिबद्ध निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें तीन परियोजनाओं ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है।

सेमीकॉन 2.0 में डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण एवं सामग्री, प्रतिभा विकास तथा अनुसंधान, विकास और डीप-टेक नवाचार को व्यापक रूप से शामिल किया गया है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष के माध्यम से भारत में अनुसंधान एवं विकास के अगले चरण को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।

स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर

भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स के लिए अब अवसर केवल डिजाइन और इंजीनियरिंग सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय अपने स्वयं के उत्पाद विकसित करने और स्वदेशी बौद्धिक संपदा तैयार करने का है। डिजाइन सहायता, उद्योग-आधारित अनुसंधान एवं विकास, विशेषज्ञ प्रतिभा और दीर्घकालिक निवेश को एक साथ लाकर डीप-टेक स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पूंजी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सॉफ्टवेयर स्टार्टअप्स की तुलना में सेमीकंडक्टर कंपनियों को उत्पाद विकसित करने, परीक्षण, सत्यापन और निर्माण तक पहुंचने में अधिक समय और पूंजी की आवश्यकता होती है। डिजाइन के नए संस्करण, परीक्षण और निर्माण की प्रक्रिया लागत तथा तकनीकी जटिलता को बढ़ा सकती है। ऐसे में शुरुआती अनुसंधान से लेकर व्यावसायीकरण तक लंबे समय तक समर्थन देने वाले निवेश तंत्र की जरूरत होगी।

उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग जरूरी

वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर कंपनियां विकसित करने के लिए केवल पूंजी पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता होगी, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सके।

साझा अनुसंधान, प्रोटोटाइप सुविधाओं तक पहुंच और स्वदेशी अनुसंधान के व्यावसायीकरण के प्रभावी तंत्र से नई तकनीकों को मजबूत बौद्धिक संपदा और व्यावसायिक उत्पादों में बदला जा सकता है।

भारत के उभरते सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम में 100 से अधिक स्टार्टअप्स चिप विकसित कर रहे हैं। अब चुनौती यह है कि इनमें से सक्षम कंपनियां केवल चिप डिजाइन तक सीमित न रहें, बल्कि अपने उत्पादों की दीर्घकालिक रणनीति और रोडमैप पर नियंत्रण स्थापित करें, ऐसी बौद्धिक संपदा तैयार करें जिसकी आसानी से नकल न हो सके और वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच बनाएं।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि देश वैश्विक मूल्य श्रृंखला का कितना हिस्सा आकर्षित करता है। महत्वपूर्ण यह भी होगा कि भारत अपने अनुसंधान, प्रतिभा और बौद्धिक संपदा के आधार पर कितने वैश्विक स्तर के तकनीकी उत्पाद और कंपनियां तैयार कर पाता है। स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास से विकसित और भारत में निर्मित चिप्स यदि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी उत्पादों का आधार बनते हैं, तो यह देश के तकनीकी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

(लेखक भारत सरकार के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।)