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उप-राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी

आज़ाद भारत के लिए गाइड

श्री सी.पी. राधाकृष्णन

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर, मैं हर भारतीय को दिल से बधाई देता हूं। साथ ही, मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को आदरपूर्वक नमन करता हूं जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।

पिछले हफ़्ते अंडमान और निकोबार आइलैंड्स की अपनी यात्रा के दौरान, मुझे ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन के तहत हमारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने और महान देशभक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक याद को सलाम करने का सम्मान मिला। मेरे लिए उस पवित्र ज़मीन पर खड़ा होना बहुत ही इमोशनल और गर्व का पल था, जहां श्री नेताजी की आज़ाद हिंद फौज ने 30 दिसंबर, 1943 को भारत की धरती पर पहली बार तिरंगा फहराया था। इस मौके ने मुझे सितंबर 1939 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मदुरै यात्रा की भी याद दिला दी, जब वे महान स्वतंत्रता सेनानी पासुमपोन मुथुरामलिंगा थेवर के बुलावे पर वहां पहुंचे थे। उस ऐतिहासिक पल ने इस इलाके के अनगिनत देशभक्तों के दिलों में आज़ादी की रोशनी जगा दी थी।

अंडमान में नेशनल मेमोरियल सेलुलर जेल का मेरा दौरा एक और बहुत प्रेरणा देने वाला पल था। इस जेल में भारत माता के महान सपूतों श्री वीर सावरकर जी, श्री योगेंद्र शुक्ला जी, श्री बटुकेश्वर दत्त जी, श्री सचिंद्रनाथ सान्याल जी और कई दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों को गुलामी की ताकतों ने अंधेरी कोठरियों में कैद करके रखा था। आज भी, नेशनल मेमोरियल की ये दीवारें उन वीरों के साहस, तकलीफों और महान बलिदानों की कहानियां कहती हुई लगती हैं, जिन्होंने भारत की आज़ादी और शान के लिए अपनी जान दे दी। इस दौरे ने मुझे उन सभी देश के वीरों को श्रद्धांजलि के तौर पर यह आर्टिकल लिखने की प्रेरणा दी, जिन्होंने करोड़ों लोगों के दिलों में देशभक्ति की आग जलाई और देश को आज़ादी पाने के रास्ते पर आगे बढ़ाया।

9 अगस्त को, जब हम ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की याद कर रहे थे, मुझे अंडमान द्वीप समूह में ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन शुरू करने का मौका मिला। साल 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का आह्वान करके देश को “करो या मरो” का जोशीला नारा दिया था। इस आह्वान के नतीजे में पूरे देश में आज़ादी की गहरी चाहत पैदा हुई।

आज हमें आज़ादी की ताज़ी हवा में सांस लेने और डेमोक्रेटिक ढांचे के तहत संवैधानिक अधिकारों के साथ जीने का सौभाग्य मिला है, यह उन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ी की वजह से है जिन्होंने अपने समय की विदेशी सरकारों के खिलाफ़ डटकर लड़ाई लड़ी। उस समय देश के कोने-कोने से करोड़ों बहादुर स्वतंत्रता सेनानी पूरी लगन और त्याग की भावना के साथ इस संघर्ष में शामिल हुए और कई बहादुरों ने भारत माता की आज़ादी के लिए अपनी जान दे दी।

स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवपूर्ण कहानी

चाहे आज़ादी के सिपाही उत्तर में कश्मीर से हों या दक्षिण में तमिलनाडु से, पश्चिम में गुजरात से हों या पूर्व में असम से—देश के हर इलाके, वर्ग और उम्र के महिला और पुरुष भारत माता की आज़ादी के आम लक्ष्य के लिए एक साथ लड़े।

रानी लक्ष्मीबाई जी की बहादुरी, जो पहले आज़ादी की लड़ाई के दौरान विरोध की अमर निशानी बन गईं, मंगल पांडे जी की हिम्मत और बाल गंगाधर तिलक जी का बेखौफ ऐलान—“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा”—आज़ादी की तरफ बढ़ते देश के हर कदम को ताकत देता रहा।

इसी सिलसिले में ओ. चिदंबरम पिल्लई जी ने भी भारत का पहला स्वदेशी शिपिंग बिज़नेस शुरू करके गुलामी के राज के आर्थिक दबदबे को चुनौती दी। इससे यह साबित हुआ कि आज़ादी की लड़ाई सिर्फ़ जंग के मैदान तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक मैदान में भी लड़ी गई थी।

भगत सिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी की क्रांतिकारी सोच ने आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी के लिए त्याग और बलिदान के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। उसी समय, रानी गाइदिन्ल्यू जी की अटूट भावना ने नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में ब्रिटिश राज के खिलाफ बगावत की आग जलाए रखी।

असम की युवा बहादुर योद्धा कनकलता बरुआ जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का नेतृत्व किया, हाथों में राष्ट्रीय झंडा थामे, बहुत हिम्मत के साथ आगे बढ़ीं और अपनी जान दे दी। भगवान बिरसा मुंडा जी और कई दूसरे आदिवासी नेताओं ने भी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व किया।

इतिहास के पन्नों में ऐसी अनगिनत कहानियां हैं, जो हिम्मत, संघर्ष, धैर्य और पक्के इरादे से भरी हैं। इन सभी कहानियों ने मिलकर बहादुरी और बलिदान की एक समृद्ध विरासत बनाई है। वे हमें याद दिलाती हैं कि भारत की आज़ादी अनगिनत नायकों के मिले-जुले प्रयासों से मिली थी और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

स्वतंत्रता आंदोलन में तिरुपुर का योगदान

इस स्वतंत्रता दिवस पर, मैं तिरुपुर कुमारन जी को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्हें ‘कोडी कथा कुमारन’ के नाम से जाना जाता है, जिसका मतलब है ‘झंडे की रक्षा करने वाले कुमारन’। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, उन्होंने मेरे होमटाउन तिरुपुर में आज़ादी के लिए अपनी जान दे दी। मौत का सामना करते हुए भी उन्होंने देश के झंडे को ज़मीन पर नहीं गिरने दिया। इसीलिए उन्हें यह सम्मान वाली उपाधि मिली।

कम उम्र में ही कुमारन जी के दिल में देशभक्ति की लौ जल उठी थी। “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” के नारे से प्रेरित होकर वे आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो गए। महात्मा गांधी के आदर्शों से बहुत प्रभावित होकर कुमारन जी ने लोगों, खासकर युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए ‘देशबंधु युवा संघ’ की स्थापना की। कुमारन जी का पक्का मानना ​​था कि सच्ची आज़ादी तभी मिल सकती है जब लोग विदेशी शासन के ज़ुल्म के बारे में जागरूक हों और उसके खिलाफ लड़ने की हिम्मत और साफ़ सोच विकसित करें।

गांधीवादी सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को मानने वाले कुमारन जी ने नशा विरोधी अभियान को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया। वे इसे सामाजिक और राष्ट्रीय जागृति की दिशा में एक ज़रूरी कदम मानते थे। इसी मकसद से उन्होंने ताड़ी की दुकानों के सामने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और लोगों को नशे से दूर रहने और सेल्फ-डिसिप्लिन अपनाने के लिए प्रेरित किया।

10 जनवरी 1932 को ‘सिविल डिसओबिडिएंस मूवमेंट’ के दौरान कुमारन जी ने एक जुलूस निकाला। हाथों में तिरंगा लिए, वे कुछ बहादुर साथियों के साथ आगे बढ़े और तिरुपुर की सड़कें “वंदे मातरम” के जोशीले नारों से गूंज उठीं।

ब्रिटिश सरकार की पुलिस ने इस जुलूस पर हमला कर दिया। “वंदे मातरम” का नारा लगाते हुए और तिरंगे को सीने से लगाए हुए, कुमारन जी के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। शहादत के समय उनकी उम्र सिर्फ़ 27 साल थी।

जब मैं तिरुपुर कुमारन जी की उम्र का ज़िक्र करता हूँ, तो मुझे भारत माँ के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले कई नौजवानों की याद आती है। इनमें भगत सिंह (23 साल), सुखदेव (23 साल), राजगुरु (22 साल), खुदीराम बोस (18 साल), कनकलता बरुआ (18 साल), अनंत लक्ष्मण कन्हेरे (19 साल), वंचिनाथन (25 साल) और ऐसे ही कई दूसरे नौजवान शामिल हैं। उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर जगह बनाई।

मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की पहल की तारीफ़ करता हूँ, जिसके ज़रिए राष्ट्रीय आंदोलन के उन गुमनाम नायकों को देश के सामने लाया जा रहा है, जिनके योगदान को इतिहास के पन्नों में लंबे समय तक नज़रअंदाज़ किया गया। मैं सभी जाने-अनजाने स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि देता हूँ।

इस ऐतिहासिक मौके पर, आइए हम अपनी मातृभूमि के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों पर सोचें और अपना वादा फिर से पक्का करें। इस अमृतकाल में, आइए हम 2047 तक एक विकसित भारत बनाने के लिए खुद को समर्पित करें और देश की तरक्की और खुशहाली के लिए मिलकर काम करें।

यह उन बहादुर सपूतों को हमारी सच्ची और सही श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने बहुत हिम्मत से लड़ाई लड़ी और हमारी आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।

जय हिंद!

भारत माता की जय!

(लेखक भारत के वाइस प्रेसिडेंट हैं।)

मंत्री शिवराज चौहान ने चंडीगढ़ में CBDC आधारित DBT का किया शुभारंभ
  • केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ में CBDC‑आधारित DBT का किया शुभारंभ; PDS में पारदर्शिता की नई क्रांति
  • पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी उपस्थित
  • किसानों के हक में कोई समझौता नहीं: ट्रेड डील को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- किसानों का हित सर्वोपरि
  • हर घर तिरंगा, हर थाली सुरक्षित: गरीब कल्याण अन्न योजना पर सबका विश्वास- शिवराज सिंह
  • चंडीगढ़ में जनहित का नया प्रयोग: चुस्त, पारदर्शी और लाभार्थी‑केंद्रित वितरण- शिवराज सिंह
  • डीबीटी से गड़बड़ी पर वार; राशन खाद्यान्न व आवश्यक वस्तुओं तक सीमित रहेगा- शिवराज सिंह
  • प्रधानमंत्री का विजन “सरकार फाइल में नहीं, जनता की ज़िंदगी में दिखनी चाहिए”- शिवराज सिंह चौहान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आज पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण एवं नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री (खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण) श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। श्री चौहान ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता, सुरक्षा और समयबद्धता लाने का अहम कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किसानों व गरीबों के हित से कोई समझौता नहीं होगा।

पारदर्शिता और भरोसे का नया सिस्टम

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि CBDC‑आधारित DBT के जरिए राशन और खाद्यान्न का भुगतान सीधे, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचेगा। चंडीगढ़ में शुरू यह प्रयोग देशव्यापी मॉडल के रूप में अपनाया जाएगा। नई व्यवस्था में तकनीकी पाबंदियां इस तरह लगाई गई हैं कि लाभार्थी केवल खाद्यान्न व अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद पर ही लेनदेन कर सके ताकि पैसा गलत जगह खर्च न हो। साथ ही, लाभार्थियों को चॉइस की सुविधा भी मिलेगी। वे गेहूँ‑चावल के अलावा दाल या अन्य जरूरी खाद्य पदार्थ चुन सकेंगे। श्री चौहान ने विभागीय टीम और अधिकारियों की तारीफ करते हुए इसे बड़ा नवाचार बताया।

किसानों के हित पर अटल रुख

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा के मामले में किसानों के हित से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसानों के लिए जितने भी समझौते दुनियाभर के देशों से हुए वो राष्ट्रहित, किसानहित और जनताहित सर्वोपरी की अवधारणा को लेकर हुए। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि विपक्ष को इसमें भी तकलीफ है। उन्होंने देश के गेहूँ‑धान के मजबूत भंडारों का हवाला देते हुए कहा कि अब भारत अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है और ज़रूरत पड़ने पर निर्यात भी करता है। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किसान सम्मान निधि और अन्य लाभों की पारदर्शी डिलीवरी जारी रहेगी और किसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

संसद में व्यवधान पर कड़ी टिप्पणी

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने संसद में हो रही बाधाओं और विपक्ष के व्यवहार पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवधान संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान हैं और देशहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में बहस जरूरी है, पर व्यवधान अस्वीकार्य है।

गरीब कल्याण अन्न योजना और सामाजिक सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की सराहना की और कहा कि 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराना देश की बड़ी सामाजिक सुरक्षा है। श्री चौहान ने बताया कि यह योजना सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं है; इससे परिवारों की आर्थिक मजबूती आएगी और खर्च बचकर बच्चों की पढ़ाई व अन्य आवश्यकताओं पर लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी गरीब भूखा न रहे और हर थाली में भोजन की कमी न हो।

डीबीटी के फायदे और नए उपाय

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डीबीटी से लाभ सीधे खाताधारक के पास पहुंचते हैं जिससे मध्यस्थता और घपला कम हुआ है। साथ ही उन्होंने माना कि नकद मिलने के बाद गलत उपयोग का जोखिम रहता है इसीलिए CBDC‑आधारित व्यवस्था में तकनीक ऐसी रखी गई है कि लाभार्थी का भुगतान सीधे राशन/खाद्य पदार्थ पर खर्च हो और ग़लत इस्तेमाल रोका जा सके। इस तकनीकी नवाचार के लिए उन्होंने विभाग की तारीफ की।

चंडीगढ़ को मॉडल शहर बताया; विस्तार का आह्वान

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ की विशेषता व नागरिक चेतना का जिक्र करते हुए कहा कि इस शहर में शुरू यह प्रयोग सफल होने पर धीरे‑धीरे पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय बाधाओं को दूर कर व्यवस्था का विस्तार सुनिश्चित किया जाए ताकि हर परिवार तक सुविधाएँ पहुंचे। श्री चौहान ने चंडीगढ़ की तारीफ़ में कहा कि यहाँ अनुशासन, सफ़ाई और शहरी जिम्मेदारी का भाव है।

भावनात्मक अपील

स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमें देश के लिए जीने की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए और नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने “हर घर तिरंगा” की अपील की और कहा कि शहीदों के सपनों को साकार करने का सबसे बेहतर तरीका है कि हम ईमानदारी से काम करें और देश के विकास में योगदान दें। श्री चौहान ने नागरिकों से पर्यावरण‑हित का काम (जैसे पौधा लगाना) करने की भी अपील की।

सरकार जनता की ज़िंदगी में दिखे

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस संकल्प को दोहराया कि “सरकार फाइल में नहीं, जनता की लाइफ में दिखनी चाहिए”। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम इसी सोच का नतीजा है, जहां तकनीक और नीतियां आम आदमी की रोजमर्रा की ज़िंदगी में सुधार ला रही हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सरकार जनता की सेवा में हरसंभव प्रयास कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जाएंगे जिनमें “लखपति दीदी” का लक्ष्य भी शामिल है जिसके तहत 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने का संकल्प है।

पंजाब बनेगा रोड सेफ्टी हब, सेटेलाइट तकनीक से सड़क सड़क सुरक्षा होगी चौकस

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब पुलिस न केवल अपराधियों से प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि अपनी प्रमुख परियोजना सड़क सुरख्या फोर्स (एसएसएफ) के माध्यम से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर रही है, जो कि यात्रियों की जान बचाने के लिए समर्पित हाईवे पेट्रोल बल है और यह ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत कर पंजाब पुलिस को भारत का पहला 3डी पुलिस बल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक, एसएसएफ ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुँचकर कुल 47,386 लोगों की मदद की. इन कार्रवाइयों के दौरान, 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुँचाया गया; जिससे तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया और चिकित्सीय सहायता के माध्यम से लोगों की जान बचाने में महत्त्वपूर्ण योगदान मिला.

पंजाब एसएसएफ का ध्यान

पंजाब हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित बल के रूप में स्थापित पंजाब एसएसएफ का ध्यान विशेष रूप से निर्धारित हाईवे और प्रमुख सड़कों पर पेट्रोलिंग पर केंद्रित है. पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के विपरीत, एसएसएफ के जवानों को नियमित कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता. उनका प्राथमिक दायित्व सड़क सुरक्षा, तत्काल प्रतिक्रिया और दुर्घटना पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.

इस बल के पास 144 हाई-टेक वाहन और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी हैं, जिनमें लगभग 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं. टीमों को महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और प्रमुख ज़िला सड़कों के 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में प्रत्येक 30 किलोमीटर पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है. एसएसएफ की टीमें दुर्घटनाओं पर औसतन 6 से 10 मिनट में प्रतिक्रिया देती हैं, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफ़ी तेज़ है.

Road Safety Force Punjab

अस्पताल की चिकित्सा सहायता

प्लैटिनम 10 मिनट के सिद्धांत पर आधारित, एसएसएफ कर्मी का लक्ष्य दुर्घटना पीड़ितों तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुंचना है, ताकि एंबुलेंस या अस्पताल की चिकित्सा सहायता पहुंचने से पहले उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता दी जा सके. एसएसएफ के वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर (ब्रेथलाइज़र), ई-चालान मशीनें, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

सड़क सुरक्षा के अलावा, एसएसएफ की टीमों ने पुलिस कार्रवाई और लोगों की मदद में भी योगदान दिया है. टीमों ने 6 किलोग्राम अफीम और चोरी के वाहन बरामद किए हैं तथा नकदी और सोना उनके असली मालिकों को लौटाने में भी मदद की है. टीमों ने 12 से अधिक आत्महत्याओं को रोकने, स्कूली बच्चों की सहायता करने तथा देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों की मदद करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

फेज़-II में एसएसएफ का विस्तार

इस बीच, फेज़-II विस्तार के तहत एसएसएफ का कवरेज मौजूदा 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा. लंबी अवधि की योजना विजन एसएसएफ-2047 का उद्देश्य सैटेलाइट डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीकों को एकीकृत करते हुए एक समग्र सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित करना है.

प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा, जिससे वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी प्राप्त करने, संभावित ज़ोखिमों का पूर्वानुमान लगाने और पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया में सहायता मिलेगी, जिससे यातायात एवं सड़क सुरक्षा पुलिसिंग को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.

डीजीपी ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा को डिजिटल एनफोर्समेंट के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से विजन एसएसएफ-2047 में सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना, पूरी तरह हरित मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित करना और पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर (पीआरएसटीआरसी) के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित करना शामिल है.

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) आधारित एनफोर्समेंट, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और मोबाइल इंटरसेप्टर के माध्यम से पुलिस ने दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का औसत समय सात मिनट से कम कर लिया है. रोड सेफ्टी पंजाब विजन के तहत 7E फ्रेमवर्क—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इमरजेंसी केयर, एंगेजमेंट और इवैल्यूएशन—के माध्यम से यातायात प्रबंधन में बदलाव किया जा रहा है. यह रणनीति अनुमान और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित प्रबंधन से हटकर साक्ष्य-आधारित और तकनीक-संचालित दृष्टिकोण की ओर बदलाव को दर्शाती है.

दूसरी ओर, पीआरएसटीआरसी अनुसंधान, परामर्श और प्रशिक्षण का नेतृत्व करता है. इसे शिक्षा जगत, उद्योग और नागरिक समाज से जुड़े रिसर्च एडवाइजरी ग्रुप्स (आरएजी) का सहयोग प्राप्त है. आईआईटी, एनआईटी, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी, जीएनडीईसी लुधियाना और जीएनडीयू अमृतसर जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से पीआरएसटीआरसी क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में कार्य कर रहा है. यह साझा डेटा, संयुक्त परियोजनाओं और इंटर्नशिप के माध्यम से इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है.

अन्य राज्यों की तुलना में, उपलब्ध आंकड़े यह दर्शाते हैं कि हाईवे सुरक्षा, तकनीक के इस्तेमाल और जन-जवाबदेही तंत्र को लेकर राज्यों के दृष्टिकोण में महत्त्वपूर्ण अंतर है. एसएसएफ की संरचना अन्य राज्यों के मॉडलों से अलग है, जैसे कि, महाराष्ट्र हाईवे पुलिस मौजूदा राज्य पुलिस की एक अत्याधुनिक और प्रभावी शाखा है, न कि एक अलग बल.

पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था का प्रशिक्षण

इस बीच, एसडीजीपी (ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी, पंजाब) अमरदीप सिंह राय ने कहा, नियमित पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिसके लिए अलग और व्यापक कौशल की आवश्यकता होती है.दूसरी ओर, एसएसएफ को स्पष्ट और सर्वोच्च प्राथमिकता—लोगों की जान बचाना—के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.

एसएसएफ कर्मियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्राथमिक उपचार के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल से प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें रेड क्रॉस द्वारा दिया गया प्रशिक्षण भी शामिल है और उन्हें क्रैश इन्वेस्टिगेशन का प्रशिक्षण भी दिया गया है. पूरा बल एक ही अवधारणा—प्लैटिनम 10 मिनट—के इर्द-गिर्द बनाया गया है, जिसके तहत दुर्घटना पीड़ित तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुँचकर एंबुलेंस या अस्पताल की सहायता पहुँचने से पहले उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान करना अनिवार्य है.

उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा, एसएसएफ कर्मियों को वीआईपी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता और न ही स्थानीय कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए उनकी ड्यूटी बदली जाती है. उनका एकमात्र प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (की परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर) सड़क सुरक्षा और पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.

पंजाब पुलिस न केवल अपराधियों से प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि अपनी प्रमुख परियोजना सड़क सुरख्या फोर्स (एसएसएफ) के माध्यम से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर रही है, जो कि यात्रियों की जान बचाने के लिए समर्पित हाईवे पेट्रोल बल है और यह ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत कर पंजाब पुलिस को भारत का पहला 3डी पुलिस बल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक, एसएसएफ ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुँचकर कुल 47,386 लोगों की मदद की. इन कार्रवाइयों के दौरान, 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुँचाया गया; जिससे तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया और चिकित्सीय सहायता के माध्यम से लोगों की जान बचाने में महत्त्वपूर्ण योगदान मिला।

पंजाब एसएसएफ का ध्यान

पंजाब हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित बल के रूप में स्थापित पंजाब एसएसएफ का ध्यान विशेष रूप से निर्धारित हाईवे और प्रमुख सड़कों पर पेट्रोलिंग पर केंद्रित है. पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के विपरीत, एसएसएफ के जवानों को नियमित कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता. उनका प्राथमिक दायित्व सड़क सुरक्षा, तत्काल प्रतिक्रिया और दुर्घटना पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.

इस बल के पास 144 हाई-टेक वाहन और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी हैं, जिनमें लगभग 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं. टीमों को महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और प्रमुख ज़िला सड़कों के 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में प्रत्येक 30 किलोमीटर पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है. एसएसएफ की टीमें दुर्घटनाओं पर औसतन 6 से 10 मिनट में प्रतिक्रिया देती हैं, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफ़ी तेज़ है.

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अस्पताल की चिकित्सा सहायता

प्लैटिनम 10 मिनट के सिद्धांत पर आधारित, एसएसएफ कर्मी का लक्ष्य दुर्घटना पीड़ितों तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुंचना है, ताकि एंबुलेंस या अस्पताल की चिकित्सा सहायता पहुंचने से पहले उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता दी जा सके. एसएसएफ के वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर (ब्रेथलाइज़र), ई-चालान मशीनें, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

सड़क सुरक्षा के अलावा, एसएसएफ की टीमों ने पुलिस कार्रवाई और लोगों की मदद में भी योगदान दिया है. टीमों ने 6 किलोग्राम अफीम और चोरी के वाहन बरामद किए हैं तथा नकदी और सोना उनके असली मालिकों को लौटाने में भी मदद की है. टीमों ने 12 से अधिक आत्महत्याओं को रोकने, स्कूली बच्चों की सहायता करने तथा देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों की मदद करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

फेज़-II में एसएसएफ का विस्तार

इस बीच, फेज़-II विस्तार के तहत एसएसएफ का कवरेज मौजूदा 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर राज्य सड़कों तक किया जाएगा. लंबी अवधि की योजना विजन एसएसएफ-2047 का उद्देश्य सैटेलाइट डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीकों को एकीकृत करते हुए एक समग्र सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित करना है.

प्रस्तावित 3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा, जिससे वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी प्राप्त करने, संभावित ज़ोखिमों का पूर्वानुमान लगाने और पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया में सहायता मिलेगी, जिससे यातायात एवं सड़क सुरक्षा पुलिसिंग को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.

डीजीपी ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा को डिजिटल एनफोर्समेंट के साथ एकीकृत करने के उद्देश्य से विजन एसएसएफ-2047 में सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना, पूरी तरह हरित मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित करना और पंजाब रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक रिसर्च सेंटर (पीआरएसटीआरसी) के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित करना शामिल है.

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) आधारित एनफोर्समेंट, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और मोबाइल इंटरसेप्टर के माध्यम से पुलिस ने दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का औसत समय सात मिनट से कम कर लिया है. रोड सेफ्टी पंजाब विजन के तहत 7E फ्रेमवर्क—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इमरजेंसी केयर, एंगेजमेंट और इवैल्यूएशन—के माध्यम से यातायात प्रबंधन में बदलाव किया जा रहा है. यह रणनीति अनुमान और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित प्रबंधन से हटकर साक्ष्य-आधारित और तकनीक-संचालित दृष्टिकोण की ओर बदलाव को दर्शाती है.

दूसरी ओर, पीआरएसटीआरसी अनुसंधान, परामर्श और प्रशिक्षण का नेतृत्व करता है. इसे शिक्षा जगत, उद्योग और नागरिक समाज से जुड़े रिसर्च एडवाइजरी ग्रुप्स (आरएजी) का सहयोग प्राप्त है. आईआईटी, एनआईटी, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी, जीएनडीईसी लुधियाना और जीएनडीयू अमृतसर जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से पीआरएसटीआरसी क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में कार्य कर रहा है. यह साझा डेटा, संयुक्त परियोजनाओं और इंटर्नशिप के माध्यम से इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है.

अन्य राज्यों की तुलना में, उपलब्ध आंकड़े यह दर्शाते हैं कि हाईवे सुरक्षा, तकनीक के इस्तेमाल और जन-जवाबदेही तंत्र को लेकर राज्यों के दृष्टिकोण में महत्त्वपूर्ण अंतर है. एसएसएफ की संरचना अन्य राज्यों के मॉडलों से अलग है, जैसे कि, महाराष्ट्र हाईवे पुलिस मौजूदा राज्य पुलिस की एक अत्याधुनिक और प्रभावी शाखा है, न कि एक अलग बल.

पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था का प्रशिक्षण

इस बीच, एसडीजीपी (ट्रैफिक एवं रोड सेफ्टी, पंजाब) अमरदीप सिंह राय ने कहा, नियमित पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिसके लिए अलग और व्यापक कौशल की आवश्यकता होती है.दूसरी ओर, एसएसएफ को स्पष्ट और सर्वोच्च प्राथमिकता—लोगों की जान बचाना—के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया गया है.

एसएसएफ कर्मियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्राथमिक उपचार के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल से प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें रेड क्रॉस द्वारा दिया गया प्रशिक्षण भी शामिल है और उन्हें क्रैश इन्वेस्टिगेशन का प्रशिक्षण भी दिया गया है. पूरा बल एक ही अवधारणा—प्लैटिनम 10 मिनट—के इर्द-गिर्द बनाया गया है, जिसके तहत दुर्घटना पीड़ित तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुँचकर एंबुलेंस या अस्पताल की सहायता पहुँचने से पहले उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान करना अनिवार्य है.

उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा, एसएसएफ कर्मियों को वीआईपी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता और न ही स्थानीय कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों के लिए उनकी ड्यूटी बदली जाती है. उनका एकमात्र प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (की परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर) सड़क सुरक्षा और पीड़ितों को सहायता प्रदान करना है.

माहिलपुर-फगवाड़ा रोड पर दर्दनाक हादसा, बेकाबू कार पेड़ से टकराई; पुलिसकर्मी की मौत

होशियारपुर / सत्ता संदेश

Report : अमरीक कुमार

माहिलपुर-फगवाड़ा रोड पर गांव भारता गणेशपुर के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार और बेकाबू कार पेड़ से टकराने के बाद सड़क पर पलट गई। हादसे में कार सवार एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई।

मृतक की पहचान मंदीप सिंह निवासी गांव थुआना के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मंदीप सिंह जहानखेल (होशियारपुर) में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपनी कार से वापस गांव लौट रहे थे। इसी दौरान गांव भारता गणेशपुर के पास उनकी कार अचानक बेकाबू होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पेड़ से टकराने के बाद सड़क पर पलट गई। हादसे में मंदीप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें सिविल अस्पताल माहिलपुर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे की सूचना मिलते ही माहिलपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस द्वारा हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हादसे की सूचना मिलने के बाद मृतक के परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

हरिमंदिर साहिब माथा टेकने गया था परिवार, पीछे से चोरों ने घर किया साफ; 5 लाख के गहने-नकदी चोरी

समराला / सत्ता संदेश

Report: परमिंदर वर्मा

समराला: समराला के नजदीकी गांव नागरा में दिनदहाड़े एक घर को निशाना बनाकर चोरी की वारदात सामने आई है। चोर घर से करीब 5 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने और नकदी चोरी कर फरार हो गए। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित परिवार के मुखिया किरपाल सिंह ने बताया कि वह बीती शाम अपने परिवार के साथ अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने गए थे। गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे जब परिवार वापस घर पहुंचा तो मुख्य गेट और अंदर के कमरों के ताले टूटे मिले। घर के अंदर सामान बिखरा हुआ था।

जांच करने पर पता चला कि चोर करीब 3 तोले सोने के गहने, कीमती चांदी का सामान और नकदी चोरी कर ले गए। परिवार के अनुसार, चोरी की इस वारदात में उन्हें करीब 5 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

CCTV में दीवार फांदते नजर आए नकाबपोश चोर

घटना के बाद आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में बिना नंबर प्लेट वाली पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार दो नकाबपोश युवक दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों युवक ढींडसा गांव की तरफ से आए थे।

CCTV फुटेज के अनुसार, दोनों आरोपियों ने मोटरसाइकिल घर के बाहर खड़ी की और दीवार फांदकर घर के अंदर दाखिल हुए। चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों मौके से फरार हो गए। फुटेज में आरोपियों के घर की दीवार फांदने की गतिविधि भी दिखाई दे रही है।

दिनदहाड़े चोरी से ग्रामीणों में दहशत

गांव के प्रमुख लोगों मनजीत सिंह और इंद्रपाल सिंह ने कहा कि दिनदहाड़े इस तरह की घटनाओं से ग्रामीणों में डर का माहौल पैदा हो रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए और चोरी हुआ सामान बरामद कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और CCTV फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

PGIMER की कार्डियक ट्रायेज सेवा से इमरजेंसी केयर हुआ बेहतर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर (ACC) में शुरू की गई समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट ने आपातकालीन हृदय देखभाल को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 9 मार्च से 29 जुलाई 2026 तक करीब पांच महीनों की अवधि में यूनिट ने 3,049 हृदय रोगियों का प्रबंधन किया।

PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट विशेषज्ञतापूर्ण आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता केवल मरीजों की संख्या में नहीं, बल्कि ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करने में है, जिसमें मरीजों का तेजी से आकलन कर उनकी वास्तविक चिकित्सीय जरूरत के अनुसार उचित स्तर की देखभाल तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि नेहरू अस्पताल की मुख्य इमरजेंसी से स्वतंत्र रूप से विकसित इस कार्डियक इमरजेंसी सेवा ने मरीजों के केंद्रित मूल्यांकन, शीघ्र चिकित्सीय निर्णय और उचित सेवा तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है। इससे मुख्य इमरजेंसी पर मरीजों का दबाव कम करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी सहायता मिली है।

करीब आधे मरीजों को मूल्यांकन के बाद किया गया डिस्चार्ज

कार्डियोलॉजी विभाग, एडवांस्ड कार्डियक सेंटर के प्रोफेसर डॉ. राजेश विजयवर्गीय ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने समर्पित कार्डियक ट्रायेज प्रणाली की आवश्यकता को साबित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 3,049 मरीजों में से:

  • 1,108 मरीज (36.3%) को आगे के उपचार के लिए Coronary Care Unit (CCU) में स्थानांतरित किया गया।
  • 1,513 मरीज (49.6%) का उचित मूल्यांकन और उपचार करने के बाद OPD आधार पर डिस्चार्ज किया गया।
  • 298 मरीज (9.8%) को गैर-हृदय संबंधी आपात स्थितियों के उपचार के लिए नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में रेफर किया गया।
  • 85 मरीज (2.8%) को संबंधित कार्डियोलॉजी/CTVS OPD भेजा गया।
  • 30 मरीज (1%) को मूल्यांकन और स्थिरीकरण के लिए Heart Command भेजा गया।

डॉ. विजयवर्गीय के अनुसार, इस मॉडल ने मरीजों की प्रभावी चिकित्सीय श्रेणी तय करने, समय पर उपचार उपलब्ध कराने और बढ़ते आपातकालीन कार्यभार को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद की। इसमें आवश्यक मरीजों के लिए Primary PCI जैसी तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन भी शामिल रही।

26 Primary PCI प्रक्रियाएं, मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत

रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट के माध्यम से 26 Primary PCI प्रक्रियाएं कराई गईं। इससे तत्काल कार्डियक इंटरवेंशन की जरूरत वाले मरीजों में समय पर रक्त प्रवाह बहाल करने में सहायता मिली।

मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कुल मृत्यु दर 0.5 प्रतिशत रही। 9 मार्च से 29 जुलाई के बीच कुल 16 मौतें दर्ज की गईं।

जुलाई में 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह

यूनिट में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। मार्च में जहां करीब 100 मरीज प्रति सप्ताह आ रहे थे, वहीं जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 200 से अधिक मरीज प्रति सप्ताह हो गई।

9 से 15 जुलाई के सप्ताह में मरीजों की संख्या 233 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा समर्पित कार्डियक ट्रायेज सेवा के बढ़ते उपयोग और इसकी आवश्यकता को दर्शाता है।

अनावश्यक भर्ती कम करने में मददगार मॉडल

PGIMER के अनुसार, इस अनुभव से सामने आया है कि केंद्रित कार्डियक ट्रायेज व्यवस्था से मरीजों के प्रवाह को बेहतर बनाने, अनावश्यक भर्ती को कम करने और गंभीर हृदय संबंधी मामलों में तेजी से चिकित्सीय निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

समर्पित कार्डियोलॉजी ट्रायेज यूनिट उच्च-भार वाले तृतीयक हृदय उपचार केंद्र के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल के रूप में उभर रही है। PGIMER का यह अनुभव देश के अन्य तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसी तरह की समर्पित कार्डियक इमरजेंसी और ट्रायेज सेवाएं विकसित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

पंजाब सरकार ने हरियाणा और राजस्थान को पानी की रॉयल्टी को लेकर मांगा मुआवजा, कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्यों हरियाणा और राजस्थान को नदी जल आपूर्ति और नहरों के रखरखाव से जुड़े बकाया राशि के भुगतान के लिए नोटिस जारी किए हैं। जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल ने इस संबंध में जानकारी दी। राजस्थान सरकार से 1961 से 2025 तक नदी जल उपयोग की रॉयल्टी और मुआवजे के रूप में 1.44 लाख करोड़ की मांग की गई है। 

कानूनी कार्रवाई की दे चेतावनी
पंजाब ने राजस्थान को अंतिम मांग नोटिस भेजकर 30 दिनों के भीतर राशि जमा करने को कहा है। भुगतान न होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बरिंदर गोयल ने बताया कि 1920 में महाराजा बीकानेर के साथ हुए समझौते के तहत पंजाब से राजस्थान को पानी जा रहा है। 1960-61 तक राजस्थान इस पानी का पैसा देता रहा, लेकिन उसके बाद पिछली सरकारों ने बिना कोई कारण बताए राजस्थान से पैसे लेना बंद कर दिया। अब वर्तमान सरकार इस बकाए की वसूली कर रही है।

हरियाणा से भी बकाए की मांगा
हरियाणा सरकार से भाखड़ा मेन लाइन और अन्य साझा नहरों के संचालन व रखरखाव का खर्च मांगा गया है। 2015-16 से हरियाणा ने नहरों के रखरखाव का पैसा देना बंद कर दिया है, जिसकी बकाया राशि 312 करोड़ बताई गई है। पंजाब के मुख्य सचिव ने हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तुरंत भुगतान की मांग की है।विज्ञापन

गोयल ने कहा कि भाखड़ा मेन लाइन और अन्य नहरों के रखरखाव का पूरा खर्च पंजाब उठा रहा है। बकाया राशि न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंजाब सरकार का दावा है कि 1920 के समझौते के आधार पर राजस्थान पर रॉयल्टी बकाया है, जबकि राजस्थान ने पहले इस तरह के दावों को खारिज किया था। 

पंजाब सरकार तीर्थ योजना के तहत सीएम मान और केजरीवाल ने 15 बसों को तीर्थ स्थलों के लिए किया रवाना

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना का विस्तार कर बुजुर्गों को सालासर बालाजी-श्री खाटू श्याम, हरिद्वार- ऋषिकेश और मथुरा-वृंदावन लेकर रवाना 15 बसें रवाना हुई। इस बसों को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और सीएम भगवंत सिंह मान ने होशियारपुर में हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने बसों में जाकर सुविधाओं का जायजा भी लिया और बुजुर्गों से बात भी की। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि तीर्थयात्रा योजना के तहत भगवंत मान सरकार ने अब तक 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों को यात्रा करा चुकी है। योजना के तहत 50 साल से अधिक उम्र के एक परिवार से 2 सदस्य यात्रा कर सकेंगे। सरकार सभी तीर्थ यात्रियों को ले जाने के लिए एसी स्लीपर बस, ठहरने और भोजन की व्यवस्था मुफ्त कर रही है।

तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही बसों को हरी झंडी दिखाने से पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोगों के लिए यह जिंदगी का बहुत बड़ा मौका है कि वे तीर्थ यात्रा करने जा रहे हैं। हम अभी बस के अंदर भी गए थे, बस बहुत शानदार, आरामदायक और एयर-कंडीशंड है। लोगों को कोई खर्चा करने की जरूरत नहीं है, आने-जाने, रहने और खाने-पीने का सारा खर्चा भगवंत मान सरकार उठाएगी। भक्तों के लिए बहुत अच्छे होटलों का इंतजाम किया गया है। वहां उतरने पर भी अच्छी बसों का इंतजाम है, इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि आज हरिद्वार-ऋषिकेश, मथुरा-वृंदावन, सालासर-खाटू श्याम के लिए 15 बसें जा रही हैं। हमने बस के अंदर लोगों से बात की, जिनमें से बहुत से लोगों को पहली बार सालासर और खाटू श्याम जाने का मौका मिला है। अगले कुछ महीनों में पंजाब से कुल डेढ़ लाख लोगों को अलग-अलग तीर्थ स्थलों पर ले जाया जाएगा। उन्होंने सभी को बधाई देते हुए मंगलमय यात्रा के लिए प्रार्थना की और कहा कि तीर्थयात्री वहां से आशीर्वाद लेकर आएं कि पंजाब खुशहाल बने, पंजाब के लोग सुखी रहें और पंजाब में सुख-शांति रहे। उन्होंने सभी के खुश और स्वस्थ रहने की कामना करते हुए मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।विज्ञापन

इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आज इस पवित्र दिन के मौके पर होशियारपुर, पठानकोट, मुकेरियां और आसपास के इलाके से जितने भी लोग आए हैं, जो खाटू श्याम, सालासर, वृंदावन, मथुरा, ऋषिकेश या जहां भी दर्शन करने जा रहे हैं, मैं उन सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इससे पहले भी दरबार साहिब, राम तीर्थ, अमृतसर साहिब, वाघा बॉर्डर और फतेहगढ़ साहिब जैसे धार्मिक स्थलों के लिए तीर्थ यात्रा की बसें चल रही हैं। अलग-अलग धर्मों के सभी धार्मिक स्थान मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।

भगवंत मान ने कहा कि आज होशियारपुर से वृंदावन, सालासर, खाटू श्याम, ऋषिकेश और मथुरा के लिए 15 बसें जा रही हैं। हम तीर्थयात्रियों से मिलकर आए हैं, बस में बैठे भक्त बहुत खुश हैं और अभी से भजन गा रहे हैं। उन्होंने कामना की कि लोगों की यात्रा मंगलमय हो, वे खुशी-खुशी हंसते-गाते जाएं और पंजाब की बेहतरी व तरक्की की अरदास करके वापस आएं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दर्शन करने जाएं और पंजाब की बेहतरी, तरक्की और तंदुरुस्ती की अरदास, दुआ और आरती करके आएं।

सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी तीर्थयात्रियों के सफर के लिए एसी स्लीपर बसों का इंतजाम किया गया है और उनके ठहरने के लिए पर्याप्त वॉशरूम सुविधाओं वाले वातानुकूलित कमरों की व्यवस्था की जाएगी। पूरी यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को मुफ्त भोजन और उचित देखभाल प्रदान की जाएगी। हर तीर्थयात्री का मेडिकल बीमा सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें अच्छे सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिल सके। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक बस में एक अटेंडेंट मौजूद रहेगा और दर्शन प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर गंतव्य पर एक विशेष टीम तैनात की गई है। 

भगवंत सिंह मान ने कहा कि यात्रा पूरी होने पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद और एक स्मृति चिह्न (पीतल का गिलास) भी भेंट किया जाएगा। किसी भी क्षेत्र, जाति या धर्म के लोग इन धार्मिक यात्राओं की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पंजाब सरकार का यह प्रयास उन बुजुर्गों की आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है, जो अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर जाकर दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं।

भगवंत सिंह मान ने बताया कि होशियारपुर से 5 जिलों (होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, पठानकोट और गुरदासपुर) के श्रद्धालुओं को लेकर कुल 15 बसें अलग-अलग धार्मिक स्थलों के लिए रवाना की गई हैं। होशियारपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, जालंधर और कपूरथला से 10 बसें ऋषिकेश-हरिद्वार जाएंगी। इसी तरह, फगवाड़ा और गुरदासपुर से 2 बसें श्रद्धालुओं को मथुरा-वृंदावन ले जाएंगी, जबकि जालंधर और गुरदासपुर से 3 बसें श्रद्धालुओं को श्री खाटू श्याम-सालासर ले जाएंगी।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि योजना के पहले चरण में अब तक 4 लाख तीर्थयात्रियों ने श्री अमृतसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब-नैना देवी के दर्शन किए हैं। इस यात्रा के लिए विभिन्न जिलों के क्लस्टर बनाए गए हैं। इस यात्रा पर अब तक 148 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं और 10 लाख तीर्थयात्रियों को ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस विशेष तीर्थ यात्रा के लिए श्री आनंदपुर साहिब में एक टेंट सिटी भी स्थापित की गई है और यह यात्रा बहुत ही सुचारू रूप से चल रही है।

मुंबई ने खेल कोटे के तहत पंजाब के 2 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को नियुक्त किया

मुंबई / चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

आयकर विभाग, मुंबई ने खेल कोटे के तहत पंजाब के दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नियुक्त किया है। यह पहल खेल उत्कृष्टता को पहचान देने तथा उच्च स्तर की खेल प्रतिभाओं को सार्वजनिक सेवा में आगे बढ़ाने की विभाग की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

नवनियुक्त खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र 12 अगस्त 2026 को मुंबई स्थित आयकर भवन में प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, मुंबई, श्री आलोक कुमार द्वारा प्रदान किए गए।

आयकर विभाग द्वारा 7 जनवरी 2026 की अधिसूचना के माध्यम से 97 रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न खेल विधाओं के खिलाड़ियों से कुल 3,595 आवेदन प्राप्त हुए। निर्धारित मानदंडों के अनुसार आवेदनों की गहन जांच एवं मूल्यांकन के बाद 97 उम्मीदवारों का मेरिट के आधार पर चयन किया गया।

भर्ती की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि चयनित खिलाड़ियों में 80 प्रतिशत से अधिक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, जो विभाग में शामिल होने वाली खेल प्रतिभाओं के उच्च स्तर को दर्शाता है।

चयनित उम्मीदवारों में पंजाब के दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों को कर सहायक (Tax Assistant) के पद पर नियुक्त किया गया है। बास्केटबॉल और वॉलीबॉल के इन खिलाड़ियों ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

आयकर विभाग में शामिल हुई पंजाब की खेल प्रतिभाएं

अनमोलप्रीत कौर, 26 वर्ष, कर सहायक – बास्केटबॉल

अनमोलप्रीत कौर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने चीन के शेनझेन में आयोजित FIBA महिला एशिया कप 2025 डिवीजन बी में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 19वें एशियाई खेलों, हांगझोऊ 2022 में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया, जिससे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उनके अनुभव का पता चलता है।

जश्नूर ढींडसा, 22 वर्ष, कर सहायक – वॉलीबॉल

जश्नूर ढींडसा ने एशियाई पुरुष अंडर-20 वॉलीबॉल चैंपियनशिप 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया। उन्होंने AVC कप फॉर मेन 2022 में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल में उनका अनुभव और समृद्ध हुआ।

खेल करियर जारी रखने का अवसर

यह भर्ती आयकर विभाग द्वारा खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा उत्कृष्ट खिलाड़ियों को राष्ट्र सेवा के साथ अपने खेल करियर को जारी रखने का अवसर प्रदान करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, मुंबई, श्री आलोक कुमार ने नवनियुक्त खिलाड़ियों को बधाई दी और उन्हें आश्वस्त किया कि विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्हें खेल का अभ्यास जारी रखने तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि आयकर विभाग, मुंबई को उम्मीद है कि नवनियुक्त खिलाड़ी अपने खेल करियर में प्रदर्शित अनुशासन, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता की भावना को सार्वजनिक सेवा में भी आगे बढ़ाएंगे।

नियुक्ति कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त खिलाड़ियों को उनकी भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों तथा लागू सरकारी नियमों के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि वे अपने कर्तव्यों की स्पष्ट समझ के साथ विभाग में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू कर सकें।

पंजाब के इन दो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का आयकर विभाग में शामिल होना विभाग द्वारा खेल प्रतिभाओं को निरंतर दिए जा रहे समर्थन को दर्शाता है। यह पहल ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करने के विभाग के प्रयासों को भी रेखांकित करती है, जहां उत्कृष्ट खिलाड़ी सार्वजनिक सेवा में योगदान देने के साथ-साथ अपने-अपने खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना जारी रख सकें।

MSME तंत्र को मजबूत करने के लिए सुधारों का अगला चरण : जीतन राम मांझी


संसद के दोनों सदनों द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का पारित होना, एमएसएमई के लिए भारत के कानूनी ढांचे को तेज़ी से बदलते तंत्र के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मूल अधिनियम के बाद से पिछले दो दशकों में, लाखों उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने हैं और एमएसएमई राष्ट्रीय विकास, निर्यात और रोज़गार सृजन में अहम योगदान देने वाले बन गए हैं। इस संशोधन का उद्देश्य एमएसएमई इकोसिस्टम को ज़्यादा संवेदनशील और भरोसे पर आधारित बनाना है। इससे पंजीकरण आसान होगा,  वर्गीकरण बेहतर होगा, ऋण तक पहुंच और समय पर भुगतान आसान होगा, विवादों का निपटारा डिजिटल और तेज़ होगा और नियमों का पालन आसान होगा।

इस संशोधन में उद्यमों के मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रावधान किया गया है। इससे कई तरह की बाधाएं दूर होंगी और सरकार को बेहतर तरीके से लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। अधिनियम के तहत पंजीकरण एक पात्रता है, जिसका दावा कोई भी कंपनी कर सकती है, यह कोई बाध्यता नहीं है।

यह संशोधन संयंत्र, मशीनरी या उपकरणों में निवेश और कारोबार के संयुक्त मानदंडों के आधार पर उद्यमों के वर्गीकरण के लिए एक स्पष्ट फ्रेमवर्क प्रदान करता है। इस वर्गीकरण से  फ्रेमवर्क  को प्रौद्योगिकी, लागत, बाजार और व्यवसाय मॉडल में आने वाले बदलावों के अनुसार तेज़ी से ढाला सकता है और यह केंद्र सरकार को अधिसूचना के माध्यम से इसकी सीमाओं को निर्धारित करने का अधिकार देता है।

ज़्यादातर एमएसएमई के लिए सबसे बड़ी चिंता नियमित नकद प्रवाह की होती है, क्योंकि किसी छोटे उद्यम का एक भी भुगतान न मिलने का व्यापक असर कर्मचारियों के समय पर वेतन, कच्चे माल की खरीद और अगले ऑर्डर को स्वीकार करने पर पड़ता है, जिससे  भुगतान में देरी होने से कंपनी के काम करने और आगे बढ़ने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इस संशोधन में इस समस्या को तीन चरणों – रोकथाम, समाधान और कार्यान्वयन के माध्यम से दूर करने की कोशिश की गई है।

रोकथाम: यह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए ‘ट्रेड्स’ (टीआरइडीएस) के माध्यम से एमएसएमई से संबंधित रसीद (इनवॉइस) के भुगतान और जानकारी देने को अनिवार्य बनाकर पारदर्शिता लाता है। राज्य सरकारें भी यही नियम अपने राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर लागू कर सकती हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के नाते, ‘ट्रेड्स’ एक स्वीकृत इनवॉइस के आधार पर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से तुरंत वित्तपोषण प्राप्त करने की सुविधा देता है। इससे आपूर्तिकर्ता को अग्रिम भुगतान मिल जाता है, जबकि खरीदार तय तिथि पर बैंक या वित्तीय संस्थान को भुगतान चुकता करता है। इस प्रकार, रिसिवेबल्स (मिलने वाली रकम) आपूर्तिकर्ता के लिए लिक्विडिटी का ज़रिया बन जाता है, जिससे कंपनी को अपने कामकाज का प्रबंधन करने, बिलों का भुगतान करने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने में आसानी होती है।

समाधान: यह इस अधिनियम के विवाद-समाधान फ्रेमवर्क को और अधिक मजबूत करता है। यह राज्य सरकारों को मध्यस्थता और सुलह के लिए अतिरिक्त ‘सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदों’ (एमएसइएफसी) की स्थापना करने में सक्षम बनाता है। यह मध्यस्थता और सुलह के लिए समय-सीमा निर्धारित करता है तथा ऑनलाइन विवाद-समाधान को वैधानिक मान्यता प्रदान करता है। इससे मामलों का तेजी से निपटारा होगा और एक ऐसी व्यवस्था तैयार होगी जिससे कंपनी प्रक्रिया और समय-सीमा की निश्चितता के साथ अपने जायज़ दावों को पेश कर सकेगी।

कार्यान्वयन: ‘सुविधा परिषदों’ द्वारा दिए गए निर्णय के तहत मिलने वाली रकम को ज़मीन के लगान की बकाया राशि की तरह वसूला जा सकता है। यदि कोई खरीदार किसी फैसले को अदालत में चुनौती देना चाहता है, तो उसे तय राशि का 75 प्रतिशत अदालत में जमा कराना होगा और यदि वह चुनौती छह महीने तक लंबित रहती है, तो अदालत उस जमा राशि में से आधी राशि आपूर्तिकर्ता को जारी कर सकती है। इस प्रकार, लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी के कारण जायज दावों को खारिज नहीं किया जा सकेगा और अदालत में बीतने वाला समय अब केवल खरीदार के पक्ष में नहीं होगा।

यह संशोधन उद्यमों के लिए अनुपालन के प्रति अधिक संतुलित और विश्वास-आधारित दृष्टिकोण की दिशा में बदलाव को भी दर्शाता है। छोटे-मोटे उल्लंघन के लिए अब पहली बार में केवल चेतावनी दी जाएगी और अपराध दोहराए जाने पर अलग-अलग आर्थिक जुर्माने लगाए जा सकते हैं। नियमों के पालन की प्रक्रिया को ज़्यादा अनुमान लगाने लायक और आसान बनाकर,  कंपनियाँ अब अपनी ऊर्जा अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने पर लगा सकती हैं। इससे व्यवसाय करने में सुगमता (ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस) और विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा मिलेगा।

आखिर में, यह संशोधन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में विश्वास का एक प्रतीक है, जो उन्हें नवाचार करने, रोज़गार पैदा करने, नए बाज़ारों में प्रवेश करने और अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में सक्षम बनाएगा। एक अधिक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा।

(लेखक केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री हैं)