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सुनाम में अमन अरोड़ा के आवास के बाहर काला झंडा लेकर पहुंचे दामन बाजवा,

सुनाम / सत्ता संदेश

सिख युवक मोहनजीत सिंह पर हुए कथित अत्याचार के विरोध में सुनाम में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दामन बाजवा ने कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के आवास के बाहर काला झंडा लेकर प्रदर्शन किया। मोहनजीत सिंह ने मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया था। इसी मामले को लेकर भाजपा ने पंजाब सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

दामन बाजवा के अचानक मंत्री के आवास के बाहर पहुंचने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान बाजवा ने पुलिस प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि प्रशासन में हिम्मत है तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहनजीत सिंह के साथ अमानवीय अत्याचार किया गया है।

बाजवा ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से रोष प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय अपनी आवाज उठाने वाले लोगों को दबाने का प्रयास कर रही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार चाहे तो उनके खिलाफ भी मामला दर्ज कर जेल भेज सकती है, लेकिन वे किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने मोहनजीत सिंह के मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

वहीं, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और राजनीतिक दल को अपनी बात रखने तथा प्रदर्शन करने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक पार्टियां इस संवेदनशील मामले को लेकर केवल राजनीति कर रही हैं।

प्रदर्शन के दौरान हरमनदेव सिंह बाजवा भी मौजूद रहे। मामले को लेकर भाजपा और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

Moga Farmers Protest: बिजली कटौती से भड़के किसान, लुधियाना-फिरोजपुर हाईवे 4 घंटे जाम

मोगा में बिजली कटौती से परेशान 10 गांवों के किसानों ने अजीतवाल पावर ग्रिड के सामने लुधियाना-फिरोजपुर हाईवे जाम कर 4 घंटे धरना दिया। किसानों ने पर्याप्त बिजली नहीं मिलने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

मोगा / सत्ता संदेश

पंजाब के मोगा जिले में बिजली कटौती से परेशान किसानों का शनिवार को गुस्सा फूट पड़ा। धान की फसल को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से नाराज करीब 10 गांवों के किसानों ने अजीतवाल पावर ग्रिड के सामने लुधियाना-फिरोजपुर हाईवे जाम कर दिया। किसानों ने करीब चार घंटे तक धरना देकर पंजाब सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

किसानों का कहना है कि धान की फसल को इस समय पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन गांवों में लगातार बिजली कटौती के कारण खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। बारिश भी कम होने के चलते किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।

पिछले 20 दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित

किसान नेताओं जगजीत सिंह और संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से किसानों को आठ घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। गांवों में चार-चार घंटे की बिजली कटौती हो रही है।

किसानों ने दावा किया कि पिछले करीब 20 दिनों से बिजली आपूर्ति को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि धान के खेतों में सिंचाई के लिए बिजली बेहद जरूरी है। वहीं, कई गांवों में नहरी पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान बिजली पर ही निर्भर हैं।

किसानों ने सरकार पर लगाए आरोप

प्रदर्शनकारी किसानों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेताओं ने कहा कि जब सरकार आठ घंटे बिजली देने का दावा कर रही है तो गांवों में निर्धारित आपूर्ति क्यों नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मजबूरी में किसानों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा है।

किसानों ने कहा कि यदि बिजली की समस्या जल्द दूर नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।

अधिकारी के आश्वासन पर खत्म हुआ धरना

किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद बिजली बोर्ड के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को आठ घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। साथ ही एक-दो दिन के भीतर बिजली आपूर्ति की समस्या को ठीक करने की बात कही गई।

अधिकारी के आश्वासन के बाद किसानों ने करीब चार घंटे बाद धरना समाप्त कर दिया और लुधियाना-फिरोजपुर हाईवे पर यातायात बहाल हो गया।

हालांकि, किसान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगले एक-दो दिनों में बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ और किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिली तो वे बड़े संघर्ष का ऐलान करेंगे।

NBA अध्यक्ष का CSIR-IMTECH चंडीगढ़ दौरा, माइक्रोबियल संसाधन संरक्षण और रिसर्च क्षमताओं की समीक्षा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त IFS अधिकारी वीरेंद्र आर. तिवारी ने शनिवार को चंडीगढ़ स्थित CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (CSIR-IMTECH) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे माइक्रोबियल संसाधन संरक्षण, अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं का जायजा लिया।

दौरे का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण और माइक्रोबियल संसाधन विज्ञान के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा। NBA अध्यक्ष ने संस्थान के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से बातचीत की तथा विभिन्न प्रमुख सुविधाओं का निरीक्षण किया। इनमें माइक्रोबियल टाइप कल्चर कलेक्शन एंड जीन बैंक (MTCC), फर्मेंटेशन डिवीजन और प्रोटीन सेंटर प्रमुख रहे।

वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से की बातचीत

वीरेंद्र आर. तिवारी ने वैज्ञानिकों एवं छात्रों के साथ सीधे संवाद किया और माइक्रोबियल संसाधनों के संरक्षण एवं उनके वैज्ञानिक उपयोग में संस्थान के योगदान की सराहना की। MTCC में बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट और एक्टिनोमाइसेट्स सहित हजारों प्रमाणित सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखा गया है।

इन माइक्रोबियल संसाधनों का उपयोग कृषि, जैव-उर्वरक, खाद्य प्रसंस्करण, औद्योगिक एंजाइम और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे संसाधन वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

नियामक ढांचे पर भी हुई चर्चा

दौरे के दौरान NBA नेतृत्व और CSIR-IMTECH के वैज्ञानिकों के बीच माइक्रोबियल संसाधनों से संबंधित नियामक ढांचे और जैव विविधता कानून को लेकर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने माइक्रोबियल टाइप कल्चर को लेकर नियामकीय प्रावधानों को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चर्चा में बताया गया कि MTCC के 1,300 से अधिक संदर्भ कल्चर वैज्ञानिक सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए संदर्भ मानक के तौर पर काम करते हैं। शोधकर्ताओं और उद्योग के लिए इन प्रमाणित सामग्रियों तक आसान पहुंच को वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

MTCC के योगदान की सराहना

NBA अध्यक्ष ने MTCC की सुविधाओं के उच्च स्तर के रखरखाव और वैश्विक गुणवत्ता मानकों के पालन की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर माइक्रोबियल संसाधनों के संरक्षण में MTCC की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

CSIR-IMTECH की निदेशक डॉ. अलका राव राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की आधिकारिक सदस्य भी हैं। बैठक के दौरान भारत के माइक्रोबियल जैव संसाधनों को संरक्षित करने और उनका टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक एवं कानूनी साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

1986 में हुई थी MTCC की स्थापना

MTCC की स्थापना 1986 में हुई थी और यह पेटेंट से संबंधित जैविक सामग्रियों के डिपॉजिट के लिए बुडापेस्ट ट्रीटी के तहत भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय निक्षेपागार सुविधाओं में शामिल है। वर्ष 2007 में इसे जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत Designated National Repository (DNR) के रूप में अधिसूचित किया गया।

CSIR-IMTECH की स्थापना 1984 में हुई थी। संस्थान का उद्देश्य माइक्रोबियल विज्ञान में उत्कृष्ट अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए बुनियादी खोजों को स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ना है।

हरसिमरत कौर बादल हिरासत में, CM आवास की ओर बढ़ रही अकाली महिलाओं को पुलिस ने रोक

Chandigarh Protest: डॉ. गुरप्रीत कौर पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के विरोध में अकाली दल की महिला इकाई ने रोष मार्च निकाला। हरसिमरत कौर बादल को पुलिस ने हिरासत में लिया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शनिवार को चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल की महिला इकाई ने रोष मार्च निकाला। सांसद हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अकाली महिला कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और अकाली कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस ने सांसद हरसिमरत कौर बादल को हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी महिलाएं सड़क पर बैठ गईं और धरना शुरू कर दिया।

अकाली दल की महिला कार्यकर्ताओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी और बैरिकेडिंग की गई थी।

पांच करोड़ रुपये के कथित आरोपों की जांच की मांग

शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर पर पांच करोड़ रुपये मांगने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पार्टी की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सच्चाई सामने लाई जाए।

अकाली दल इस मुद्दे को लेकर पंजाब सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों से जुड़े ऐसे आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।

NHRC ने मांगी जांच रिपोर्ट

मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के संज्ञान का भी अकाली दल की ओर से हवाला दिया गया है। पार्टी के अनुसार, NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मामले में जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

हालांकि, डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अदालत में साबित नहीं हुए हैं। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

परनीत कौर ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

दूसरी ओर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता परनीत कौर ने भी मामले को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

परनीत कौर के मुताबिक, सत्ता में बैठे लोगों पर लगे आरोपों को केवल राजनीतिक मामला बताकर खारिज करने के बजाय जांच एजेंसियों को मामले की सच्चाई सामने लानी चाहिए।

शनिवार को चंडीगढ़ में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अकाली कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा। फिलहाल प्रदर्शनकारी महिलाएं सड़क पर धरने पर बैठी रहीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं।

पंजाब कैबिनेट के बड़े फैसले: PPSC नियमों में संशोधन, 132 पदों को मंजूरी

Punjab Cabinet Meeting: सीएम भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में PPSC ग्रुप-1 रेगुलेशन में संशोधन, फूड ग्रेन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी और अस्पतालों में 132 पद भरने को मंजूरी दी गई।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में शनिवार को चंडीगढ़ में पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक हुई। बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बाद विभिन्न फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की।

कैबिनेट बैठक में PPSC ग्रुप-1 रेगुलेशन में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा राज्य में नई सरकारी भर्तियां निकालने को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

बैठक में पंजाब फूड ग्रेन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी को भी हरी झंडी दे दी गई। इस फैसले के जरिए खाद्यान्न के परिवहन से जुड़े कामकाज को लेकर नीति को मंजूरी प्रदान की गई है।

अस्पतालों में पद भरने को मंजूरी

कैबिनेट ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पदों को भरने की भी मंजूरी दी। जानकारी के मुताबिक, चमकौर साहिब अस्पताल में 33 पद, जबकि मलेरकोटला और धूरी के अस्पतालों में 19 पद भरने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा डेंटल विभाग में 80 पदों को भरने की अनुमति दी गई है।

इस तरह स्वास्थ्य और डेंटल विभाग से जुड़े कुल 132 पदों को भरने का रास्ता साफ हुआ है।

अब तक 71 हजार सरकारी नौकरियां देने का दावा

कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अब तक युवाओं को 71 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं। उन्होंने सरकार की भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया।

पंजाब कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य में सरकारी भर्ती, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के तौर पर देखा जा रहा है।

भारतीय नवाचार का वास्तविक हृदयस्थल: अनुसंधान प्रयोगशालाओं से ‘विकसित भारत’ की कक्षाओं तक

– डॉ. सुकांत मजूमदार

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उत्कृष्टता की पहचान नहीं हैं; ये हमारे देश के भविष्य को आकार देने वाले प्रमुख शिल्पकारों का सम्मान करते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के मार्गदर्शन में तथा  ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में भारत की सामूहिक यात्रा में, नवाचार को अक्सर वैश्विक सूचकांक और वित्तीय खर्च जैसे तकनीकी नजरिए से देखा जाता है। फिर भी, नवाचार मूल रूप से एक मानवीय प्रयास है — यह छात्र की आँखों में जिज्ञासा की चमक और उस शिक्षक का अटूट समर्पण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी बच्चा पीछे न छूट जाए।   

भारत में शिक्षा के मौजूदा विकास की सबसे खास बात यह है कि उच्च-स्तरीय प्रयोगशाला अनुसंधान और कक्षा की रोज़मर्रा की हकीकत के बीच सोच-समझकर एक पुल बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत, नवाचार की परिकल्पना सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाले एक उत्प्रेरक के तौर पर की गयी है। यह विज़न इस बात पर ज़ोर देता है कि देश की वास्तविक प्रगति तभी हो सकती है, जब हमारे  सबसे बेहतरीन शोध का फ़ायदा आखिरी कतार में बैठे आखिरी बच्चे तक पहुँचे। 

इस बड़े बदलाव के पैमाने को समझने के लिए, सबसे पहले भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान इकोसिस्टम में व्यापक स्तर पर हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों को देखना होगा।

व्यापक नवाचार क्रांति: वैश्विक ऊँचाइयों को छूना

इक्कीसवीं सदी में अपनी संप्रभुता और आर्थिक नेतृत्व को मज़बूत करने की कोशिश कर रहे देश के लिए, एक मज़बूत अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) इकोसिस्टम बहुत जरूरी है। भारत में एक मौलिक बदलाव आया है; देश अब मुख्य रूप से वैश्विक तकनीक को अपनाने के बजाय, वैश्विक चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। यह बदलाव वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की बढ़ती रैंकिंग में प्रतिबिंबित होता है, जहाँ देश 2014 के 76वें स्थान से ऊपर उठकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गया है।

हालाँकि, असली कहानी भारत की कार्यक्षमता में छिपी है। नवाचार इनपुट के 52वें स्थान की तुलना में, भारत नवाचार आउटपुट में अब दुनिया भर में 32वें स्थान पर है। यह दिखाता है कि देश में नवाचार इनपुट को बड़े प्रभाव वाले नतीजों में बदलने की क्षमता, कई दूसरे देशों के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर है। इस संस्कृति को 6,000 से ज़्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में आर एंड डी प्रकोष्ठ बनाकर और 59,300 अनुसंधान सहयोग स्थापित करके संस्थागत रूप दिया गया है।

प्रधानमंत्री अनुसंधान फेलोशिप (पीएमआरएफ) द्वारा समर्थित भारत का प्रतिभा समूह भी अनुसंधान इकोसिस्टम के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है। पीएमआरएफ ने 3,688 विद्वानों का समर्थन किया है, जिसके परिणामस्वरूप 10,300 शैक्षिक पत्रिका प्रकाशन, 7,966 सम्मेलन पत्र, 834 पेटेंट दाखिले और 221 पेटेंट स्वीकृत हुए हैं। पीएमआरएफ 2.0 10,000 फ़ेलोशिप का समर्थन करने के लिए तैयार है, और प्रधानमंत्री अनुसंधान प्रभाग (पीएमआरसी) को पहले ही 3,600 से अधिक फ़ेलोशिप आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, इस प्रकार भारत की बौद्धिक अवसंरचना का विस्तार जारी है। इसे उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (एचईएफए) ने और बढ़ावा दिया है, जिसने 111 संस्थानों में 281 परियोजनाओं के लिए ₹47,000 करोड़ से अधिक की मंजूरी दी है।

“भारत में एआई निर्माण” के विज़न को आगे बढ़ाने के लिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में चार समर्पित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें ₹1,490 करोड़ का संचयी निवेश किया जाएगा:

• स्वास्थ्य सेवा: आईआईएससी बेंगलुरु

• स्थायी शहर: आईआईटी कानपुर

• कृषि: आईआईटी रोपड़

• शिक्षा: आईआईटी मद्रास

जहां यह अवसंरचना भारत की प्रगति का आधार प्रदान करती है, वहीं ज्ञान का लोकतंत्रीकरण इसे जीवंत बनाता है।

ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाना: पहुँच और बौद्धिक संपदा

यह सुनिश्चित करने के लिए कि दूर-दराज़ के गाँव का कोई महत्वाकांक्षी शोधार्थी भी बड़े शहर के शोधार्थी जितने ही मौकों का फ़ायदा उठा सके, भारत ने अतीत में ज्ञान तक सीमित पहुँच वाली व्यवस्थाओं को खत्म करने की कोशिश की है। ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (ओएनओएस) पहल शैक्षिक समानता के लिए एक अहम साधन है, जो 1.8 करोड़ छात्रों और संकाय सदस्यों को 13,000 अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक पत्रिकाओं तक पहुँच प्रदान करती है।

इसकी रफ़्तार भी उतनी ही अहम है। 2025 के 11.4 करोड़ संपूर्ण-पाठ डाउनलोड के बाद, 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 6.26 करोड़ लेखों तक पहुँचा गया है। यह ज्ञान के प्रति उत्सुक देश की नब्ज़ को दर्शाता है।

ज्ञान तक पहुँच का यह विस्तार भारत के बौद्धिक संपदा इकोसिस्टम में आए बड़े बदलाव के साथ-साथ हुआ है। घरेलू पेटेंट दाखिला 2014–15 के 42,763 से बढ़कर 2024–25 में 1,10,375 हो गया है, जो 158% की भारी वृद्धि को रेखांकित करता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 2021–22 के बाद से इन दाखिलों में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ गई है, जो 11.15 प्रतिशत से बढ़कर 34.13 प्रतिशत हो गई है। कपिला कार्यक्रम जैसी पहल, जिसने 13,067 पेटेंट दाखिले में मदद की है, और 418 संस्थानों में आईडिया लैब नेटवर्क, आविष्कारकों की अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में मदद कर रहे हैं।

यह भारत की बढ़ती बौद्धिक संप्रभुता का परिणाम है। उच्च शिक्षा संस्थान अब केवल सीखने की जगहें नहीं रह गए हैं; वे तेज़ी से नवाचार-आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन बन रहे हैं। भारत के लगभग 125 यूनिकॉर्न में से 86 उच्च शिक्षा संस्थानों से निकले हैं, जिनमें से 62 खास तौर पर आईएआईटी और आईएआईएससी से जुड़े हैं।

फिर भी, समावेश के बिना नवाचार केवल तकनीकी प्रगति है; सहानुभूति के साथ नवाचार एक सभ्यतागत विजय है। इस विजय का सबसे महत्वपूर्ण स्थान समावेशी कक्षा है।  

प्रौद्योगिकी का मानवीय चेहरा: समावेश का ज़मीनी आधार 

एनईपी 2020 और सतत विकास लक्ष्य 4 के संयोजन में, प्रौद्योगिकी को शिक्षा में समानता लाने वाले एक अहम माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद सीखने में आने वाली हर तरह की भौतिक और डिजिटल रुकावटों को दूर करके उन्हें अवसरों में बदलना है।

प्रशस्त ऐप जैसे उपाय आरपीडब्लूडी अधिनियम, 2016 के तहत 21 तरह की दिव्यांगताओं की शुरुआती पहचान में मदद करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो पाता है कि हर बच्चे की खास ज़रूरतों की स्कूल स्तर पर ही पहचाना की जा सके और उनका समाधान किया जा सके। सहानुभूति बढ़ाने के लिए, ‘प्रिया – एक्सेसिबल वॉरियर’ कॉमिक बुक जैसे संसाधन बच्चों को यह सिखाते हैं कि सभी के लिए सुलभता सुनिश्चित करना सबकी मिली-जुली ज़िम्मेदारी है।

भारत का डिजिटल समावेशी इकोसिस्टम – जिसमें भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) के लिए पीएम ई -विद्या चैनल 31 और सीआईईटी-एनसीईआरटी के रोज़ाना के समावेशी प्रसारण शामिल हैं – यह पक्का करने की कोशिश करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर किसी का अधिकार बने।

सबसे अहम बदलावों में से एक है ‘किताब एक, पढ़ें अनेक’ (केईपीए) पहल। ‘शिक्षा-प्राप्ति के लिए सार्वभौमिक डिज़ाइन’ (यूडीएल) पर आधारित इन भौतिक-सह-डिजिटल किताबों में छूकर महसूस किए जा सकने वाले डॉट्स, प्रिंट-से-ऑडियो तकनीक और आईएसएल वीडियो से जुड़े क्यूआर कोड होते हैं। जब इस्तेमाल में आसान, मज़बूत और रिचार्ज-योग्य उपकरण के साथ इनका उपयोग किया जाता है, तो ये किताबें ज्ञान तक पहुँचने का एक बहु संवेदी ज़रिया बन जाती हैं। इससे यह साबित होता है कि तकनीक तब अपने शिखर पर होती है, जब वह समाज के सबसे कमज़ोर तबके की मदद करती है।

हमेशा नई सोच रखने वाले शिक्षक: पंचतंत्र से दीक्षा तक

चाहे कितना भी आधुनिक भौतिक-सह-डिजिटल टूल क्यों न हो, उसे सही दिशा देने के लिए मानवीय मदद की ज़रूरत होती है। भारतीय परंपरा में, शिक्षक हमेशा से ही नई सोच और नवाचार के मुख्य स्रोत रहे हैं। समावेशी शिक्षा का सिद्धांत भारत की प्राचीन शिक्षण-पद्धति की समझ में भी प्रतिध्वनित होता है। 

पंचतंत्र का उदाहरण लें। जब आचार्य विष्णु शर्मा को राजा अमरशक्ति के उन पुत्रों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से सीखने में मुश्किल होती थी, तो भी वे घबराए नहीं। उन्होंने नए तरीके अपनाए। उन्होंने कहानियों, बातचीत और व्यावहारिक उदाहरणों का इस्तेमाल करके उन्हें उनकी समझ के स्तर पर जाकर सिखाया। यह कालातीत विरासत हमें याद दिलाती है कि एक शिक्षक की असली काबिलियत इसी बात में है कि वह हर सीखने वाले की खास ज़रूरतों के हिसाब से अपने पढ़ाने के तरीके को अनुकूलित कर सके।

आज, दीक्षा जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए इस परंपरा को और मज़बूत किया जा रहा है; यह आधुनिक आचार्य के लिए एक डिजिटल साथी की तरह है। दिव्यांगता से जुड़े मुद्दों पर हर महीने होने वाले पाँच दिन के मुफ़्त उन्मुखीकरण कार्यक्रम के ज़रिए, शिक्षकों को ऐसी नई और समावेशी रणनीतियाँ सिखाई जा रही हैं जिनसे वे अपनी कक्षा को भविष्य के लिए तैयार कर सकें।

भविष्य के निर्माता

वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की बेहतर होती रैंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र से लेकर केईपीए की पाठ्यपुस्तकों के छूकर महसूस किये जाने वाले पन्नों तक का सफ़र एक ही मिशन को दिखाता है: भारतीय छात्र का सशक्तिकरण। भारत एक ऐसा देश बना रहा है, जहाँ अनुसंधान तो उच्च-स्तरीय हो, लेकिन उसका फ़ायदा ज़मीनी स्तर तक पहुँचे; जहाँ प्रौद्योगिकी तो सबसे आधुनिक हो, लेकिन उसका हृदयस्थल पूरी तरह मानवीय हो।

शिक्षक इस नवाचार की कहानी के वास्तविक हृदयस्थल हैं। वे ही कागज़ पर बनी नीति को बच्चों के लिए संभावनाओं में बदलते हैं। वे ही ‘विकसित भारत’ के निर्माता हैं। जब भी कोई शिक्षक किसी संघर्ष कर रहे छात्र तक पहुँचने का नया तरीका ढूँढते हैं, तो वह काम न सिर्फ़ उस छात्र के भविष्य को बेहतर बनाता है, बल्कि देश की बौद्धिक शक्ति और नैतिक चरित्र को भी मज़बूत करता है। साथ मिलकर, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि भविष्य के भारत में कोई भी सपना बहुत बड़ा न हो और कोई भी बच्चा उसे पूरा करने के अवसर से दूर न रहे।

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(लेखक केंद्रीय शिक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री हैं)

टीचर्स डे: NEP 2020 में टीचर्स की भूमिका और एक विकसित भारत की यात्रा

भारतीय परंपरा में, शिक्षा को हमेशा एक ऐसे सफ़र के तौर पर देखा गया है जो एक व्यक्ति को बनाता है और समाज को बेहतर बनाता है। ज्ञान एक व्यक्ति को दुनिया को समझने में मदद करता है, जबकि एक शिक्षक का मार्गदर्शन सीखने की प्रक्रिया को मकसद, दिशा और मतलब देता है। पुराने भारत के गुरुकुलों से लेकर आज के क्लासरूम तक, शिक्षक और सीखने वाले के बीच का रिश्ता इस सफ़र के दिल में रहा है और टीचर्स डे हमें इस रिश्ते को सेलिब्रेट करने का मौका देता है।

हर साल 5 सितंबर को, हम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की याद में टीचर्स डे मनाते हैं, जो एक जाने-माने विद्वान, दार्शनिक और शिक्षक थे, जिनका जीवन शिक्षा की महिमा और समाज में शिक्षकों के गहरे योगदान का प्रतीक था। इसलिए, यह दिन सिर्फ़ तारीफ़ के दिन से कहीं ज़्यादा है। यह हमें उन सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाता है जिन्होंने सीखने और शिक्षकों के बारे में भारत की समझ को बनाया है।

हमारी पुरानी परंपरा में, शिक्षक को एक गाइड के तौर पर सम्मान दिया जाता था जो सीखने वाले को ज्ञान और बेहतर समझ की ओर ले जाता था। “गुरु देवो भवः” की भावना टीचर के लिए गहरे सम्मान को दिखाती है, जिनकी भूमिका अनुशासन, चरित्र, मूल्यों और ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करने तक फैली हुई है। शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था। भारत के शिक्षा सिस्टम में गुरु-शिष्य परंपरा आज भी ज़िंदा है। एक टीचर का योगदान सिर्फ़ किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं। टीचर छात्रों को गाइड करते हैं, उनकी खूबियों को पहचानते हैं, उन्हें अपनी पसंद को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उनमें आत्मविश्वास जगाने में मदद करते हैं। उनके गाइडेंस का किसी व्यक्ति के जीवन पर लंबे समय तक चलने वाला असर हो सकता है।

और उन्हें सफल और ज़िम्मेदार इंसान बनने में मदद कर सकते हैं। इस तरह, टीचर और स्टूडेंट के बीच का रिश्ता युवाओं की ज़िंदगी को आकार देता रहता है।

यह समृद्ध एजुकेशनल विरासत भारत की शिक्षा की लंबी परंपरा में दिखती है। तक्षशिला, विक्रमशिला और नालंदा जैसे हमारे पुराने शिक्षा केंद्रों ने भारत और विदेश के स्टूडेंट्स और स्कॉलर्स को आकर्षित किया है। ये केंद्र मैथ्स, एस्ट्रोनॉमी, मेडिसिन, फिलॉसफी, लिटरेचर, भाषाएं और बायोलॉजी जैसे विषयों पर स्कॉलरशिप, चर्चा और विचारों के लेन-देन के केंद्र बन गए।

इस परंपरा के मूल में इस बात की गहरी समझ थी कि इंसानी जीवन के लिए ज्ञान का क्या मतलब है। संस्कृत का मुहावरा “ज्ञानं मनुजस्य त्रितियं नेत्रियं नेत्रम्”, ज्ञान को इंसान की तीसरी आंख बताता है। ज्ञान हमें तुरंत से आगे देखने, गहराई से समझने और सोच-समझकर फैसले लेने में मदद करता है। इस प्रोसेस में टीचर की अहम भूमिका होती है, जो सीखने वाले को ज्ञान से समझ और समझ से समझ की ओर ले जाता है।

ये विचार ऐसे समय में और भी ज़रूरी हो जाते हैं जब भारत 21वीं सदी के मौकों के लिए अपने एजुकेशन सिस्टम को तैयार कर रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, शिक्षा को भारत के एक विकसित और ज्ञान-आधारित राष्ट्र बनने के सफ़र के केंद्र में रखा गया है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 इस दिशा में एक अहम कदम है। यह पॉलिसी सीखने वाले को शिक्षा के केंद्र में रखती है और उसके पूरे विकास, बौद्धिक समझ, क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी, अनुभव से सीखने और स्किल्स को महत्व देती है। यह भारतीय भाषाओं पर भी फिर से ध्यान केंद्रित करती है और छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक्स और दूसरी नई टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार करती है।

टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर जानकारी हासिल करने और सीखने के नए रास्ते खोल रही है। टीचर इस सीखने की प्रक्रिया को संदर्भ, दिशा और इंसानी जुड़ाव देते हैं। मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस एक क्लासरूम तब सच में सार्थक होता है जब टीचर छात्रों को सवाल पूछने, नई चीज़ें खोजने, जो उन्होंने सीखा है उसे समझने और लागू करने के लिए प्रेरित करते हैं। टीचर नए तरीके अपना रहे हैं, टेक्नोलॉजी को शामिल कर रहे हैं और छात्रों को उनकी रुचियों और क्षमताओं को खोजने में मदद कर रहे हैं, साथ ही शिक्षा में सुधार के नज़रिए को रोज़ाना के क्लासरूम के अनुभवों में भी बदल रहे हैं।

ज्ञान का बदलता स्वरूप भी टीचर की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। आज, स्टूडेंट्स के पास जानकारी के कई सोर्स हैं। टीचर उन्हें आइडिया को ध्यान से देखने, जानकारी और समझ में फर्क करने, काम के सवाल पूछने और ज्ञान का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने में मदद करते हैं। इस तरह, एजुकेशन अच्छे फैसले लेने की काबिलियत, सेल्फ-कॉन्फिडेंस, कैरेक्टर और समाज में काम का योगदान देने की काबिलियत डेवलप करने का एक प्रोसेस बन जाती है।

प्रधानमंत्री ने हमेशा भविष्य के भारत को बनाने में टीचरों की अहमियत पर ज़ोर दिया है। डेवलप्ड इंडिया 2047 का उनका विज़न युवाओं को भारत की डेवलपमेंट जर्नी के सेंटर में रखता है, और उस भविष्य की नींव टीचरों के रोज़ाना के काम से रखी जा रही है। क्यूरियोसिटी को बढ़ावा देकर, कॉन्फिडेंस जगाकर, पोटेंशियल पहचानकर और टैलेंट को निखारने के मौके देकर, टीचर युवा भारतीयों को भविष्य की ज़िम्मेदारियों और मौकों के लिए तैयार करने में मदद कर रहे हैं।

गुरुकुल से डिजिटल क्लासरूम तक का सफ़र दिखाता है कि भारत में नई संभावनाओं को अपनाने और अपनी सभ्यता की समझ को आगे बढ़ाने की कितनी ज़बरदस्त क्षमता है। पढ़ाई के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन ज्ञान की खोज और टीचर की गाइड करने वाली भूमिका हमेशा हमारी पढ़ाई के सफ़र का सेंटर रही है।

इस टीचर्स डे पर, जब हम अपने टीचरों का सम्मान करते हैं, तो आइए हम उस भारतीय परंपरा का जश्न मनाएं जो ज्ञान को इंसान की ज़िंदगी के सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक मानती है और इसे देने वालों का बहुत सम्मान करती है। आइए हम इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाएं और एक ऐसा एजुकेशन सिस्टम बनाएं जो हर सीखने वाले को अपनी क्षमता खोजने, समाज में योगदान देने और एक विकसित और ज्ञान से भरपूर भविष्य की ओर भारत के सफ़र में पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लेने में मदद करे।

(लेखक केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय कंज्यूमर अफेयर्स, फ़ूड और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्री हैं।)

Punjab Health Card: अब घर बैठे डाउनलोड करें मुख्यमंत्री सेहत योजना का हेल्थ कार्ड

Punjab Health Card: मुख्यमंत्री सेहत योजना के लाभार्थी अब SHA Punjab पोर्टल से घर बैठे हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। जानें ई-केवाईसी और डाउनलोड का तरीका

  • पंजाब में हेल्थ कार्ड को लेकर बड़ी सुविधा, अब घर बैठे डाउनलोड करें कार्ड; जानें पूरा तरीका

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

Punjab Health Card: मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के लाभार्थियों के लिए पंजाब सरकार ने डिजिटल सुविधा शुरू की है। अब पात्र लाभार्थी किसी केंद्र पर जाए बिना राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आधिकारिक पोर्टल से अपना हेल्थ कार्ड ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे।

पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच देने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है। हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा शुरू होने के बाद लाभार्थियों को केवल कार्ड की कॉपी लेने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

हालांकि, हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने से पहले लाभार्थी का वेरिफिकेशन, ई-केवाईसी और फोटो आधारित प्रमाणीकरण पूरा होना जरूरी है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेरीफाइड हेल्थ कार्ड को ऑनलाइन देखा और PDF के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है।

तीन आसान चरणों में डाउनलोड करें हेल्थ कार्ड

1. अपनी जानकारी दर्ज करें
लाभार्थी फैमिली आईडी, हेल्थ कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर या आधार नंबर के जरिए अपना पारिवारिक रिकॉर्ड खोज सकते हैं।

2. OTP से करें सत्यापन
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या आधार से जुड़े OTP के जरिए प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

3. हेल्थ कार्ड डाउनलोड करें
सफल सत्यापन के बाद वेरीफाइड हेल्थ कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसे PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर मोबाइल में सुरक्षित रखा जा सकता है या जरूरत पड़ने पर इसकी प्रिंटेड कॉपी निकाली जा सकती है।

हेल्थ कार्ड डाउनलोड करने से पहले ई-केवाईसी जरूरी

लाभार्थियों को ध्यान रखना होगा कि केवल हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर लेना प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बराबर नहीं है। कार्ड डाउनलोड करने से पहले परिवार के सदस्यों का फोटो आधारित वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी पूरा होना आवश्यक है।

डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थी परिवार के सदस्यों की अपडेटेड फोटो को वेरीफाई कर सकते हैं और कार्ड जनरेट करने से पहले जरूरी प्रमाणीकरण पूरा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री सेहत योजना में ₹10 लाख तक का कवरेज

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज कवरेज उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज के खर्च से परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

डिजिटल हेल्थ कार्ड की सुविधा से योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है। मोबाइल फोन में कार्ड उपलब्ध रहने से लाभार्थी जरूरत के समय इसे आसानी से प्रस्तुत कर सकेंगे।

मोबाइल में रखें डिजिटल हेल्थ कार्ड

हेल्थ कार्ड डाउनलोड होने के बाद लाभार्थी इसे अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित रख सकते हैं। इसके अलावा कार्ड की प्रिंटेड कॉपी भी रखी जा सकती है, ताकि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते समय दस्तावेज उपलब्ध रहे।

लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे हेल्थ कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान अपना OTP किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें और कार्ड डाउनलोड करने के लिए केवल राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।

आधिकारिक पोर्टल: SHA Punjab पर लॉगिन कर हेल्थ कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है।



Punjab DA Hike: 85 हजार कर्मचारियों को बड़ी राहत, DA 42% से बढ़कर 60%
  • पंजाब के 85 हजार कर्मचारियों को बड़ी राहत, DA 42 से बढ़कर 60 फीसदी; वेतन में होगा इजाफा
  • 17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले से करीब 85 हजार कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा ने इस संबंध में घोषणा की है।

सरकार के फैसले के मुताबिक, 17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी कर्मचारियों के डीए में सीधे 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

इस फैसले के बाद पात्र कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी और उन्हें महंगाई से राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से राज्य के हजारों कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

मंत्री अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन और महंगाई भत्ता देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार, डीए में बढ़ोतरी से करीब 85,000 कर्मचारी लाभान्वित होंगे। त्योहारों से पहले सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि इससे पहले 17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले कर्मचारियों को 42 प्रतिशत डीए मिल रहा था। अब इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों के वेतन में डीए के तौर पर मिलने वाली राशि में भी बढ़ोतरी होगी।

पंजाब सरकार के इस फैसले को लेकर कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार की ओर से इसे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

जन्माष्टमी पर खन्ना में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 70 मंदिरों में 250 पुलिसकर्मी तैनात

जन्माष्टमी को लेकर खन्ना पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। 70 मंदिरों में 250 पुलिसकर्मी तैनात, भीड़भाड़ वाले इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाई गई।

खन्ना / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : परमिंदर वर्मा

जन्माष्टमी के पवित्र त्योहार को लेकर खन्ना पुलिस ने शहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने मंदिरों के साथ-साथ प्रमुख बाजारों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए।

एसएसपी खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को केवल ड्यूटी के तौर पर नहीं, बल्कि सेवा की भावना के साथ निभा रही है। त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए।

शहर के अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई। मंदिर प्रबंधन समितियों के साथ पहले ही लायजन मीटिंग कर पुलिस ने उनके वालंटियरों के साथ तालमेल स्थापित किया, ताकि भीड़ को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्नैचिंग, पिकपॉकेटिंग और अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई। संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए व्हीकल ऐप और पुलिस निगरानी के लिए पायल्स ऐप का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस जिला खन्ना के क्षेत्र में करीब 70 मंदिरों में 250 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारियों के अलावा दो एसपी रैंक के अधिकारी भी तैनात रहे।

इसके अलावा असामाजिक और आपराधिक तत्वों पर नजर रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर स्टैटिक और मोबाइल नाकाबंदी की गई। पूरे क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई और ईआरवी सहित पुलिस की गाड़ियां लगातार गश्त करती रहीं।

एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कोई संदिग्ध व्यक्ति, वाहन या वस्तु दिखाई देती है तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना दें या मौके पर तैनात पुलिसकर्मी को इसकी जानकारी दें।

पुलिस ने लोगों से त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से मनाने तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।