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हंजर बायोटेक एनर्जीज पर 93.44 करोड़ के बैंक फ्रॉड का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया है। बैंक की शिकायत के मुताबिक, कंपनी को दी गई करीब 350 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा में कथित वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान बैंक ने करीब 93.44 करोड़ रुपये की बकाया राशि को NPA घोषित किया था।

बैंक की शिकायत के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2009 में अपनी वित्तीय स्थिति और प्रस्तावित परियोजनाओं का विवरण देते हुए करीब 350 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मांगी थी। 9 नवंबर 2009 को बैंक की शाखा प्रबंधन समिति की सिफारिश पर कंपनी को 75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टर्म लोन मंजूर किया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 में तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, जो अब पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का हिस्सा है, ने भी 50 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर किया था।

शिकायत के मुताबिक, 13 परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित टर्म लोन सुविधा पूरी तरह वितरित की गई थी।

2013 में खाता हुआ NPA

बैंक का आरोप है कि मई 2011 से हंजर समूह के खातों में अनियमितताएं सामने आने लगी थीं। बैंक की ओर से संपर्क, फोन, SMS और बैठकों के जरिए खाते को नियमित करने की कोशिश की गई, लेकिन कथित तौर पर स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद 30 जुलाई 2013 को हंजर बायोटेक एनर्जीज का खाता NPA घोषित कर दिया गया। उस समय बैंक के अनुसार कंपनी पर करीब 93.44 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी थी।

फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आईं कथित अनियमितताएं

मामले में बैंक ने बाद में खाते का फॉरेंसिक ऑडिट कराया। इसके लिए BDO (India) LLP को नियुक्त किया गया था, जिसने 2 जनवरी 2017 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

बैंक की शिकायत में फॉरेंसिक ऑडिट के हवाले से कहा गया है कि प्लांट और मशीनरी के एक प्रमुख सप्लायर Navi Infrastructure Engineering Pvt. Ltd. और हंजर बायोटेक एनर्जीज के बीच कथित कारोबारी संबंध थे। रिपोर्ट में कॉमन प्रमोटर, निदेशक/पार्टनर और कॉमन ई-मेल डोमेन जैसी समानताओं का उल्लेख किया गया है।

ऑडिट के मुताबिक, प्लांट और मशीनरी के लिए जारी राशि का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा सप्लायर कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुल राशि का 94.13 प्रतिशत यानी करीब 262.50 करोड़ रुपये पांच प्रमुख सप्लायर कंपनियों को ट्रांसफर किए गए।

इन कंपनियों में Navi Infra, Munshi Manufacturing Company, Navi Engineering Works, Enviro Infratech Company और Yes Engineering Company के नाम शामिल हैं।

फर्नीचरवाला समूह से जुड़ी कंपनियों तक रकम पहुंचने का आरोप

फॉरेंसिक ऑडिट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में सप्लायर कंपनियों से रकम फर्नीचरवाला समूह से जुड़ी कंपनियों तक पहुंची।

शिकायत के अनुसार, Navi Infra ने वित्त वर्ष 2010-11 में Huma Synthetics Pvt. Ltd. को 21.88 करोड़ रुपये का शॉर्ट-टर्म लोन/एडवांस दिया था। बैंक ने इसे इरफान फर्नीचरवाला द्वारा प्रमोट की गई कंपनी बताया है।

ऑडिट में संबंधित सप्लायर कंपनियों के बीच भी कथित संबंधों का उल्लेख किया गया है। इनमें कॉमन प्रमोटर, निदेशक, पार्टनर, प्रमुख प्रबंधन अधिकारी, समान पते और कॉमन ई-मेल डोमेन जैसी समानताएं शामिल होने की बात कही गई है।

गारंटरों ने संपत्तियां गिरवी रखीं

बैंक की शिकायत के मुताबिक, नदीम फर्नीचरवाला, नुज़हत फर्नीचरवाला और नाजिम अशरफ फर्नीचरवाला ने कंपनी के कर्ज की अदायगी के लिए गारंटर के तौर पर काम किया और अपनी संपत्तियां बैंक के पास गिरवी रखीं।

हालांकि शिकायत के अनुसार, 75 करोड़ और 50 करोड़ रुपये के टर्म लोन के मामलों में कोई कोलेटरल सिक्योरिटी नहीं थी।

हंजर समूह की कुछ अन्य कंपनियां—हंजर बायोटेक वडोदरा प्राइवेट लिमिटेड, हंजर बायोटेक एनर्जीज (वसई) प्राइवेट लिमिटेड और हंजर बायोटेक एनर्जीज सूरत प्राइवेट लिमिटेड—भी बैंक से वित्तीय सुविधाएं ले रही थीं। बैंक ने इनसे जुड़े कथित फ्रॉड को लेकर अलग शिकायतें CBI में दर्ज कराने की बात कही है।

2018 में बैंकों की कुल बकाया राशि 284.05 करोड़

बैंक की शिकायत के अनुसार, 30 जून 2018 तक हंजर बायोटेक एनर्जीज पर कंसोर्टियम बैंकों की कुल बकाया राशि 284.05 करोड़ रुपये थी। इसमें PNB समेत विभिन्न बैंकों की देनदारियां शामिल थीं। हंजर बायोटेक एनर्जीज के खिलाफ अलग-अलग बैंकों की वसूली संबंधी कार्यवाही भी रिकॉर्ड में दिखाई देती है।

2025 में खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया गया

बैंक ने मामले में 11 दिसंबर 2013 को SARFAESI कार्रवाई शुरू की थी। बाद में कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के लेन-देन की जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया।

बैंक की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और उनके जवाब तथा व्यक्तिगत सुनवाई के बाद 24 दिसंबर 2025 को खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया गया।

बैंक की आंतरिक जांच में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई योग्य लापरवाही नहीं मिलने की बात भी शिकायत में कही गई है। हालांकि अज्ञात लोगों की भूमिका की जांच का विकल्प खुला रखा गया है।

CBI ने दर्ज किया मामला

इन्हीं आरोपों के आधार पर CBI ने कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। FIR में IPC की धारा 120-B और 420 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(d) का उल्लेख है।

मामले की जांच CBI इंस्पेक्टर धर्मबीर राणा को सौंपी गई है।

बैंक की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों पर बैंक से प्राप्त धन का कथित दुरुपयोग और डायवर्जन करने का आरोप है, जिससे बैंक को करीब 93.44 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है। CBI नामजद आरोपियों के साथ-साथ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

गौरतलब है कि ये सभी आरोप बैंक की शिकायत और जांच एजेंसी के मामले पर आधारित हैं। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।