सऊदी अरब में मौत की सजा का सामना कर रहा पंजाब का सुखचैन सिंह, परिवार ने संत सीचेवाल से लगाई गुहार
पंजाब के समराला के गांव माणकी निवासी सुखचैन सिंह को सऊदी अरब में मौत की सजा सुनाए जाने का मामला सामने आया है। परिवार ने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल से मदद मांगकर केंद्र और पंजाब सरकार से हस्तक्षेप की अपील की।
समराला के गांव माणकी का रहने वाला है सुखचैन सिंह, इकलौते बेटे की जिंदगी बचाने के लिए घर बेचने को मजबूर परिवार
समराला / सत्ता संदेश
रिपोर्ट : परमिंदर वर्मा
दिनांक : 9 अक्टूबर 2026
पंजाब के समराला के नजदीकी गांव माणकी के रहने वाले सुखचैन सिंह को सऊदी अरब में मौत की सजा सुनाए जाने का मामला सामने आया है। परिवार के मुताबिक, सऊदी अरब की अदालत ने सुखचैन सिंह को सिर कलम करने की सजा सुनाई है। परिवार का इकलौता बेटा होने के कारण परिजन उसकी जिंदगी बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी सिलसिले में परिवार ने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल से मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई है।
परिवार के अनुसार, सुखचैन सिंह बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से सऊदी अरब गया था, जहां वह ड्राइवरी का काम करता था। उसके पिता भी लंबे समय से ड्राइवरी करके परिवार का पालन-पोषण करते रहे हैं। परिजनों का कहना है कि सऊदी अरब में सुखचैन सिंह का एक अन्य युवक के साथ विवाद हो गया था। इस दौरान हुई घटना में एक युवक की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और अदालत में चले मामले के बाद सुखचैन सिंह समेत दो युवकों को मौत की सजा सुनाए जाने की जानकारी परिवार ने दी है।
इस मामले के बाद सुखचैन सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस इकलौते बेटे से परिवार को भविष्य संवारने की उम्मीद थी, आज उसकी जिंदगी बचाने के लिए परिजन दर-दर भटक रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। बेटे को बचाने की उम्मीद में परिजनों ने अपना घर तक बेचने के लिए लगा दिया है।
परिवार ने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल को ज्ञापन सौंपकर केंद्र और पंजाब सरकार के माध्यम से सऊदी अरब सरकार के समक्ष मामला उठाने की मांग की है। परिजनों की अपील है कि सुखचैन सिंह की सजा पर रोक लगवाने और उसे राहत दिलाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएं। परिवार ने यह भी मांग की है कि यदि सऊदी अरब सरकार उसे भारत वापस भेजने के लिए तैयार होती है, तो उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करवाई जाए।
परिवार की एक ही गुहार है कि उनके इकलौते बेटे की जान बचाने के लिए सरकारें हस्तक्षेप करें और उसे राहत दिलाने की दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं। अब परिवार की उम्मीदें सरकारों की पहल और जरूरी कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं।

