ब्रेकिंग न्यूज़
राष्ट्रीय डाक सप्ताह–2026 का आयोजन, तकनीक और नवाचार के साथ वित्तीय समावेशन पर रहेगा विशेष जोर

लुधियाना / सत्ता संदेश

भारतीय डाक विभाग की ओर से विश्व डाक दिवस एवं राष्ट्रीय डाक सप्ताह–2026 का आयोजन 9 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। इस वर्ष राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान बदलती जरूरतों के अनुरूप भारतीय डाक विभाग की विकसित होती भूमिका और नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान तकनीक एवं नवाचार, वित्तीय समावेशन, फिलेटली, मेल एवं पार्सल सेवाओं तथा जन-जागरूकता को प्रमुखता दी जाएगी। इसका उद्देश्य नागरिकों को डाक विभाग की आधुनिक एवं डिजिटल सेवाओं से जोड़ना और डाक सेवाओं को अधिक सुविधाजनक एवं सुलभ बनाना है।

लुधियाना शहरी मंडल के विभिन्न डाकघरों एवं प्रशासनिक कार्यालयों में सप्ताहभर कई जागरूकता एवं ग्राहक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा स्वच्छता अभियान, फिलेटली गतिविधियां, वित्तीय समावेशन तथा डाकघर की बचत एवं बीमा योजनाओं से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस

राष्ट्रीय डाक सप्ताह की शुरुआत 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के साथ होगी। इस अवसर पर आम जनता को डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं और जनसेवा में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। डाकघरों में ग्राहक संपर्क एवं जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक डाक सेवाओं से अवगत कराया जाएगा।

12 अक्टूबर को Fun with Philately Day

12 अक्टूबर को Fun with Philately Day मनाया जाएगा। इस दौरान बच्चों एवं युवाओं में फिलेटली यानी डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। डाक टिकटों और विशेष आवरणों के माध्यम से देश के इतिहास, संस्कृति, कला एवं महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। विद्यार्थियों को फिलेटली को ज्ञानवर्धक एवं रचनात्मक गतिविधि के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

13 अक्टूबर को Financial Inclusion & CCS Day

13 अक्टूबर को Financial Inclusion & CCS Day के तहत वित्तीय समावेशन और ग्राहक संपर्क पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आम जनता को डाकघर की बचत योजनाओं, PLI/RPLI, India Post Payments Bank (IPPB) सहित विभिन्न वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। अधिक से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग और बीमा सेवाओं से जोड़ने के लिए विशेष संपर्क अभियान भी चलाया जाएगा।

14 अक्टूबर को Mails & Parcels Day

14 अक्टूबर को Mails & Parcels Day के तहत मेल और पार्सल सेवाओं को प्रमुखता से प्रचारित किया जाएगा। नागरिकों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों को स्पीड पोस्ट, पार्सल तथा अन्य मेल सेवाओं की सुविधाओं और उपयोगिता के बारे में जागरूक किया जाएगा। ग्राहकों को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं सुविधाजनक डाक और पार्सल सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

15 अक्टूबर को Technology & Innovation Day

राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतिम दिन 15 अक्टूबर को Technology & Innovation Day मनाया जाएगा। इस अवसर पर डाक सेवाओं में तकनीक के बढ़ते उपयोग, डिजिटल सुविधाओं और विभिन्न नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिकों को यह जानकारी देना है कि भारतीय डाक विभाग आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी सेवाओं को तेज, पारदर्शी, सुलभ और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

भारतीय डाक विभाग ने आम जनता से राष्ट्रीय डाक सप्ताह–2026 में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। विभाग ने नागरिकों से बचत, बीमा, मेल, पार्सल, डिजिटल एवं वित्तीय सेवाओं सहित भारतीय डाक की विभिन्न सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया है।

भारतीय डाक — डाक सेवा, जन सेवा।

टांडा-पुल पुख्ता बरसाती नाले पर अवैध कब्जों का आरोप, कांग्रेस ने SDM को सौंपा ज्ञापन

टांडा-पुल पुख्ता बरसाती नाले पर कथित अवैध कब्जों को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने SDM टांडा को ज्ञापन सौंपा। SDM ने ड्रेनेज विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए।

टांडा उड़मुड़ / सत्ता संदेश

टांडा से पुल पुख्ता जाने वाले बरसाती नाले पर कथित गैर-कानूनी कब्जों को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब संगत सिंह गिलजियां के नेतृत्व में एसडीएम टांडा लवप्रीत सिंह औलख को ज्ञापन सौंपा।

पूर्व मंत्री संगत सिंह गिलजियां ने कहा कि आजादी के बाद बनाए गए इस ड्रेनेज नाले के माध्यम से टांडा, उड़मुड़, अहियापुर और दारापुर क्षेत्रों से बरसाती पानी की निकासी होती है। उन्होंने कहा कि पहले यह नाला काफी चौड़ा था और इसके साथ लगती जमीनों के मालिक ड्रेनेज विभाग की अनुमति लेकर ऐसी पुलियां बना सकते थे, जिनसे पानी की निकासी प्रभावित न हो।

गिलजियां ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक दबाव के चलते कुछ लोगों ने निजी फायदे के लिए चौहान पैलेस के पास और अन्य स्थानों पर जेसीबी मशीनों और टिप्परों के माध्यम से मिट्टी डालकर नाले को संकरा करने और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यदि इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भारी बारिश के दौरान शहर में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि नाले पर किए गए कथित अवैध कब्जों को तुरंत हटाया जाए, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और पूरे नाले की सफाई करवाई जाए। साथ ही उन्होंने शहर की समाजसेवी संस्थाओं और बुद्धिजीवियों से भी इस गंभीर समस्या के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

इस मामले में एसडीएम टांडा लवप्रीत सिंह औलख ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी जांच की है और कुछ स्थानों पर नाले पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जे किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि ड्रेनेज विभाग को कानून के अनुसार कार्रवाई करने और संबंधित लोगों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कब्जे नहीं हटाए जाते हैं तो विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए कब्जे हटाए जाएंगे और नाले की सफाई करवाई जाएगी।

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट दलजीत सिंह गिलजियां, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष गुरसेवक मार्शल, एमसी बलदेव राज, जसविंदर काका, राजेश लाडी, मनजीत सिंह, विनोद खोसला, राकेश बिट्टू, अनिल पिंका सचदेवा सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

Barnala : BJP प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के घर के बाहर AAP का प्रदर्शन, ED-CBI कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी

बरनाला / सत्ता संदेश

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी टकराव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। ED और CBI की कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को बरनाला में जोरदार प्रदर्शन किया। AAP कार्यकर्ता पंजाब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के आवास के बाहर पहुंचे और केंद्र सरकार तथा बीजेपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन को देखते हुए केवल सिंह ढिल्लों की कोठी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और आवास के बाहर बैरिकेडिंग की गई।

AAP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र की जांच एजेंसियों ED और CBI की कार्रवाई का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इसी के विरोध में पार्टी की ओर से पंजाब के अलग-अलग जिलों में बीजेपी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

बरनाला में भी AAP कार्यकर्ताओं ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के आवास के बाहर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ नारे लगाए।

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने मौके पर सुरक्षा घेरा मजबूत किया और बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को आवास से दूर रखा। पुलिस प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई।

पंजाब में ED और CBI की कार्रवाई को लेकर AAP और BJP के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बरनाला में हुआ यह प्रदर्शन इसी बढ़ते सियासी टकराव की एक कड़ी माना जा रहा है।

विराट कोहली के प्रवक्ता ने दिनेश फलाहारी महाराज के दावों को बताया निराधार, मीडिया से तथ्य जांचने की अपील

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज द्वारा किए गए दावों पर अब विराट कोहली के प्रवक्ता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रवक्ता ने इन दावों को पूरी तरह गलत और निराधार बताते हुए सिरे से खारिज किया है।

विराट कोहली के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा द्वारा विराट कोहली के संबंध में कही गई बातें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। बयान में कहा गया है कि विराट कोहली संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं। संत के प्रति कोहली का आध्यात्मिक जुड़ाव व्यक्तिगत है और इसे किसी अन्य दावे या उद्देश्य से जोड़ना उचित नहीं है।

प्रवक्ता ने मीडिया से अपील की है कि विराट कोहली से संबंधित किसी भी दावे या बयान को प्रकाशित अथवा प्रसारित करने से पहले उसके तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि की जाए। उन्होंने कहा कि अपुष्ट और निराधार दावों को बढ़ावा देने से बचना चाहिए और जिम्मेदार पत्रकारिता के तहत केवल सत्यापित जानकारी ही सामने रखी जानी चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज को लेकर एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने संत की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें बेलवन आश्रम छोड़कर गोवर्धन में रहने की अपील की है।

पत्र में उन्होंने आश्रम में कथित तौर पर दो गुटों के बीच मतभेद होने का दावा किया है। इसी पत्र में उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि एक गुट ने कथित तौर पर भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को 5 करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के दरबार में बुलाया था, जिसके बाद महाराज की प्रसिद्धि देशभर में बढ़ी।

हालांकि, विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है और इसे गलत तथा निराधार बताया है। प्रवक्ता के अनुसार, विराट कोहली प्रेमानंद महाराज के दर्शन केवल अपनी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं।

दिनेश फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में बेलवन आश्रम और यमुना खादर क्षेत्र में जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुछ लोगों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है। पत्र में कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं और इनकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा दिनेश फलाहारी महाराज ने सरकार से संत प्रेमानंद महाराज को जेड प्लस सुरक्षा देने का अनुरोध भी किया है। उन्होंने कहा है कि गोवर्धन में रहकर साधना करना संत के लिए अधिक सुरक्षित हो सकता है।

अपने पत्र में दिनेश फलाहारी महाराज ने यह भी कहा कि संत प्रेमानंद महाराज ने अपनी साधना और तपस्या के बल पर पहचान बनाई है। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से विवादों से दूर रहने और गोवर्धन गिरिराजजी की पवित्र भूमि में साधना करने की अपील की है।

इस पूरे विवाद में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विराट कोहली के प्रवक्ता ने 5 करोड़ रुपये देकर उन्हें प्रेमानंद महाराज के दरबार में बुलाए जाने संबंधी दावे को पूरी तरह नकार दिया है और मीडिया से किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है।

लुधियाना : हेल्थ डिपार्टमेंट की बड़ी कार्रवाई, चाप और फ्रोजन फूड में मिली फफूंद; वेज-नॉनवेज सामान एक ही फ्रीजर में

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर लुधियाना हेल्थ डिपार्टमेंट ने बड़ी कार्रवाई की है। डिवीजन नंबर-3 इलाके में शिकायत के आधार पर हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने फ्रोजन फूड और चाप बेचने वाली एक दुकान पर छापा मारा। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में खराब और फफूंद लगा हुआ सामान बरामद किया गया। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कई फ्रोजन प्रोडक्ट्स पर न तो एक्सपायरी डेट दर्ज थी और न ही उनके कंटेंट की जानकारी दी गई थी।

जांच के दौरान टीम को डीप फ्रीजर में रखी चाप और अन्य फ्रोजन खाद्य सामग्री बेहद खराब हालत में मिली। कुछ सामान पर फफूंद लगी हुई थी। इतना ही नहीं, जिस डीप फ्रीजर में खाद्य सामग्री रखी गई थी, उसमें भी गंदगी और फफूंद पाई गई। अधिकारियों के मुताबिक, फ्रीजर की लंबे समय से सफाई नहीं किए जाने जैसी स्थिति दिखाई दे रही थी।

हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार, दुकान में रखे कई फ्रोजन प्रोडक्ट्स पर मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी और कंटेंट संबंधी जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इससे यह पता लगाना भी मुश्किल था कि खाद्य सामग्री कितने समय से स्टोर करके रखी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी स्थिति में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

एक ही फ्रीजर में वेज और नॉन-वेज सामान

कार्रवाई के दौरान टीम ने पाया कि दुकान के एक ही फ्रीजर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन खाद्य सामग्री रखी गई थी। खाद्य सुरक्षा के नियमों के तहत खाद्य पदार्थों के भंडारण और हैंडलिंग में स्वच्छता और उचित पृथक्करण का ध्यान रखना जरूरी है। इस तरह की लापरवाही से क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बढ़ सकता है।

विशेष रूप से शाकाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था चिंता का विषय बन सकती है। अधिकारियों ने खाद्य कारोबारियों को साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण के नियमों का पालन करने की हिदायत दी है।

फूड सेफ्टी सर्टिफिकेट भी एक्सपायर

हेल्थ डिपार्टमेंट की जांच में दुकान के फूड सेफ्टी सर्टिफिकेट को लेकर भी सवाल सामने आए। विभाग के मुताबिक, दुकानदार के पास मौजूद फूड सेफ्टी प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुकी थी। अधिकारियों ने बताया कि इसकी तारीख 2025 में ही खत्म हो गई थी।

कार्रवाई के दौरान खाद्य पदार्थों के सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। वहीं, संबंधित विभाग की ओर से दुकानदार का चालान भी किया गया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हेल्थ डिपार्टमेंट ने जब्त किया सामान

डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए खाद्य सामान को जब्त करने की प्रक्रिया की जाएगी और नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि फ्रोजन फूड, चाप या किसी भी पैक्ड खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट, पैकिंग, कंटेंट और साफ-सफाई जरूर जांचें।

खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक गलत तापमान पर रखना या गंदे फ्रीजर में स्टोर करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएं।

उत्तराखंड से दिल्ली-NCR तक भूकंप के झटके, चमोली रहा केंद्र; नोएडा-मुरादाबाद में भी महसूस हुई कंपन

देहरादून / नई दिल्ली / सत्ता संदेश

उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन की सतह से करीब 13 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

भूकंप के झटके मंगलवार रात करीब 10:24 बजे महसूस किए गए। उत्तराखंड में गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में लोगों ने धरती में कंपन महसूस किया। बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ सहित कई क्षेत्रों में झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नोएडा में भी महसूस हुई धरती में कंपन

दिल्ली-NCR के नोएडा में भी मंगलवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। शहर के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। सेक्टर-122 निवासी भूषण शर्मा के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी और कंपन कुछ सेकेंड तक ही महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि उस समय वह परिवार के साथ खाना खा रहे थे और डाइनिंग टेबल पर रखा सामान हिलने लगा।

वहीं, सेक्टर-122 की निवेदिता ने बताया कि वह बेड पर आराम कर रही थीं, तभी अचानक बेड हिलने लगा। इसके बाद उन्हें भूकंप आने का अहसास हुआ।

मुरादाबाद में घरों से बाहर निकले लोग

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी भूकंप के झटकों के बाद लोगों में घबराहट देखी गई। धरती हिलने का अहसास होते ही कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। कुछ समय तक लोगों के बीच भूकंप को लेकर चर्चा होती रही। आसपास के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए जाने की सूचना सामने आई।

क्यों आता है भूकंप?

भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल है। पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या उनके बीच दबाव बढ़ता है, तो भूगर्भ में ऊर्जा जमा होने लगती है।

जब यह दबाव एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है तो चट्टानों और प्लेटों में हलचल या टूटने की स्थिति पैदा हो सकती है। इस दौरान निकलने वाली ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में धरती की सतह तक पहुंचती है और हमें भूकंप के झटकों के रूप में महसूस होती है।

क्या होता है भूकंप का केंद्र और तीव्रता?

भूकंप के फोकस या हाइपोसेंटर को पृथ्वी के अंदर वह स्थान कहा जाता है, जहां से भूकंपीय ऊर्जा निकलती है। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को एपिसेंटर (भूकंप का केंद्र) कहा जाता है।

एपिसेंटर से दूरी बढ़ने के साथ आम तौर पर भूकंप के कंपन का प्रभाव कम होता जाता है। हालांकि भूकंप का असर केवल तीव्रता पर ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई, स्थानीय भूगर्भीय संरचना और भूकंपीय तरंगों की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।

रिक्टर स्केल पर कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की मैग्नीट्यूड को मापने के लिए रिक्टर स्केल का पारंपरिक रूप से उल्लेख किया जाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में कई मामलों में Moment Magnitude Scale (Mw) का भी इस्तेमाल किया जाता है। मैग्नीट्यूड से भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा का अंदाजा लगाया जाता है।

भूकंप की तीव्रता जितनी अधिक होती है, सामान्य तौर पर उसके प्रभाव और नुकसान की संभावना भी उतनी ही बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप कितनी गहराई पर आया, उसका केंद्र कहां था, प्रभावित क्षेत्र की जमीन कैसी है और वहां बनी इमारतें कितनी मजबूत हैं।

फिलहाल उत्तराखंड के चमोली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके उत्तराखंड के कई जिलों के साथ-साथ दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए।

आकाशवाणी भवन में बिना अनुमति प्रवेश पर राहुल गांधी-प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, 8 घंटे चला था धरना

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली पुलिस ने इंडिया ब्लॉक के मंगलवार को किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति प्रवेश को लेकर मिली शिकायत के आधार पर की गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को समाप्त करने की मांग को लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक के 19 दलों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च निकाला था। संसद मार्ग पर पुलिस द्वारा मार्च को रोके जाने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर वहां धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारी सांसदों ने कहा कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात किए बिना धरना समाप्त नहीं करेंगे। करीब 8 घंटे तक चले धरने के बाद रात करीब 8 बजे पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसदों को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप पहुंचाया।

इसके बाद रात करीब 10 बजे राहुल गांधी समेत सभी हिरासत में लिए गए सांसदों को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एफआईआर दर्ज की है।

इंडिया ब्लॉक के इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग रही। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग और सरकार इस प्रक्रिया को चुनावी सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बताते हैं।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में AISA, SFI, AISF, CJP, ASAP, सहित विभिन्न छात्र संगठनों की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता का मुख्य उद्देश्य 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाना और अधिक से अधिक नागरिकों, छात्रों तथा युवाओं को इसमें शामिल होने की अपील करना था।

प्रेस वार्ता में छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि वे चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने इस पहल का नेतृत्व करते हुए कहा कि विभिन्न छात्र संगठन एकजुट होकर अपनी मांगों को मजबूती से उठाएंगे।

छात्र संगठनों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग छात्रों की चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहा है। संगठनों ने चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों और कथित खामियों पर निर्वाचन आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान संगठनों ने हाल के चुनावों की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने की मांग की। उनका कहना है कि 10 अक्टूबर का प्रदर्शन छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।

छात्र संगठनों ने नागरिकों, युवाओं और छात्रों से जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन को समर्थन देने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन के माध्यम से सरकार और निर्वाचन आयोग तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएंगी तथा चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।

Punjab CM Bhagwant Mann Camp Office CBI Raid: भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI की रेड का दावा, जानें पूरा मामला

पंजाब CM भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI की रेड का दावा, बोले- चुनाव से पहले BJP कर रही एजेंसियों का दुरुपयोग

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके कैंप ऑफिस पर छापेमारी की है। मुख्यमंत्री मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा ने पंजाब चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके कैंप ऑफिस पर CBI की टीम पहुंची है और आने वाले समय में पंजाब सरकार तथा उन्हें बदनाम करने के लिए ED और CBI का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंजाब में उन्हें मिल रहे लोगों के प्यार से भाजपा घबरा गई है।

जानकारी के मुताबिक, CBI की टीमें पंजाब और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर कार्रवाई कर रही हैं। इसी कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के आवास पर भी CBI टीम के पहुंचने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम कथित तौर पर संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI की कार्रवाई

CBI की यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के एक दिन बाद सामने आई है, जिसमें ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े मामले की CBI जांच के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि इसी मामले के सिलसिले में CBI की टीमें अलग-अलग स्थानों पर जांच कर रही हैं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रांसफर, पोस्टिंग और सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है।

बिक्रम सिंह मजीठिया ने बताया ‘बड़ी कार्रवाई’

CBI की कार्रवाई को लेकर शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे CBI की बड़ी कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार के खेल के अंत की शुरुआत है।

क्या है ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ा पूरा मामला?

मामला पंजाब में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग तथा कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के DGP को पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी। इन पत्रों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

ED की ओर से लगाए गए आरोपों में IAS और IPS अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित हस्तक्षेप तथा सरकारी टेंडरों से जुड़े मामलों में दखल का उल्लेख किया गया था। एजेंसी ने इन आरोपों के संबंध में कार्रवाई और FIR दर्ज करने की मांग भी की थी।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष और जांच के अंतिम निष्कर्ष अलग विषय हैं। CBI की मौजूदा कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच और सामने आने वाले तथ्यों पर नजर बनी हुई है।

बिहार : मेडिकल वेस्ट डस्टबीन खरीद पर बड़ा विवाद, ₹307 करोड़ के टेंडर पर पटना हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

बिहार में सरकारी अस्पतालों के लिए माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद पर सवाल उठे हैं। ₹307 करोड़ के टेंडर मामले में पटना हाईकोर्ट ने सरकार से 19 नवंबर तक जवाब मांगा है।

  • बिहार में ₹307 करोड़ की मेडिकल वेस्ट खरीद पर सवाल, पटना हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
  • 15 हजार का डस्टबीन ₹1,550 में? बिहार की सरकारी खरीद पर हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
  • मेडिकल वेस्ट डस्टबीन-बैग खरीद में कथित अनियमितता, 19 नवंबर को होगी पटना हाईकोर्ट में सुनवाई

पटना / सत्ता संदेश

बिहार के सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए खरीदे गए माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमतों को लेकर विवाद अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) की ओर से की गई इस खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को 19 नवंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता कौशलेश कुमार की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने अदालत के सामने डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद कीमतों और कथित बाजार कीमतों के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठाया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि BMSICL ने सरकारी अस्पतालों के लिए 75 लीटर और 45 लीटर क्षमता वाले माइक्रोवेव डस्टबीन तथा बायोडिग्रेडेबल बैग की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी किया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि कुछ वस्तुओं के लिए बाजार कीमत की तुलना में कई गुना अधिक भुगतान तय किया गया।

याचिका में दिए गए दावों के मुताबिक, 75 लीटर के माइक्रोवेव डस्टबीन की खरीद कीमत ₹15,490, जबकि कथित बाजार कीमत करीब ₹1,550 बताई गई है। इसी तरह 45 लीटर डस्टबीन की खरीद कीमत ₹11,474, जबकि बाजार कीमत करीब ₹1,162 होने का दावा किया गया है।

बायोडिग्रेडेबल बैग को लेकर भी याचिका में कीमतों में बड़े अंतर का आरोप लगाया गया है। 75 लीटर बैग की कीमत ₹98 प्रति बैग, जबकि कथित बाजार कीमत ₹8.50 बताई गई है। वहीं 45 लीटर बैग की खरीद कीमत ₹69, जबकि बाजार कीमत करीब ₹5.75 होने का दावा किया गया है।

57 सप्लाई ऑर्डर और ₹307 करोड़ के टेंडर का दावा

याचिका के अनुसार, जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच इन वस्तुओं की आपूर्ति के लिए कुल 57 सप्लाई ऑर्डर जारी किए गए। याचिका में दावा किया गया है कि 18 प्रतिशत GST सहित इन वस्तुओं की कुल खरीद कीमत करीब ₹307 करोड़ तय की गई, जबकि चार अन्य आपूर्तिकर्ता फर्मों के कथित कोटेशन के आधार पर इन वस्तुओं की कुल कीमत करीब ₹29 करोड़ बताई गई है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि निविदा प्रक्रिया के बाद लखनऊ स्थित ‘एसएस मेडिकल सिस्टम’ को इन वस्तुओं की आपूर्ति का ठेका मिला।

19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में इससे पहले 8 सितंबर को भी सुनवाई हुई थी। उस दौरान अदालत ने राज्य सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। अब हाईकोर्ट ने सरकार को 19 नवंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।

हालांकि, डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद में कीमतों को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल जनहित याचिका में किए गए दावे हैं। खरीद प्रक्रिया, टेंडर की शर्तों, वस्तुओं की गुणवत्ता, बाजार मूल्य और वास्तविक भुगतान को लेकर राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।