भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी बनेगी विकास का नया मोर्चा, 2030 तक AVGC क्षेत्र में 20 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत
सोनीपत / हरियाणा / सत्ता संदेश
भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से विकास और रोजगार के नए क्षेत्र के रूप में उभर रही है। सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
डॉ. एल. मुरुगन ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित जिंदल पॉलिसी कॉन्क्लेव में “लॉ, पॉलिसी एंड द क्रिएटिव इकोनॉमी” विषय पर उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी विचारों, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा से संचालित हो रही है और इसका विस्तार युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ नए कारोबार के अवसर भी खोल रहा है।
मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर क्रिएटिव इकोनॉमी का योगदान वैश्विक GDP में 3.1 प्रतिशत और रोजगार में 6.2 प्रतिशत है। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक करीब 5.7 करोड़ भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक और रचनात्मक व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। भारत की मीडिया और मनोरंजन अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये बताया गया।

डॉ. मुरुगन ने विशेष रूप से AVGC यानी Animation, Visual Effects, Gaming and Comics क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को वर्ष 2030 तक करीब 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है। इससे एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कॉमिक्स से जुड़े कौशल रखने वाले युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुल सकते हैं
युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से सरकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज को समर्थन दे रही है। इसके अलावा 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC क्रिएटर लैब्स के लिए भी सरकारी समर्थन की घोषणा की गई है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को उभरती रचनात्मक और तकनीक आधारित नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।
डॉ. मुरुगन ने यह भी कहा कि क्रिएटिव इकोनॉमी के विकास के साथ मजबूत कानूनी और नीतिगत ढांचे की जरूरत होगी। उन्होंने कॉपीराइट सुरक्षा, रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल को महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में रेखांकित किया।
युवा प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उन्होंने संस्थानों और स्थापित मान्यताओं पर सम्मान, तर्क और प्रमाण के आधार पर सवाल उठाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से अपने विचारों, रचनात्मकता और कौशल के जरिए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

