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नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, 95 लोगों का रेस्क्यू; 5 अब भी लापता

नेपाल / सत्ता संदेश

नेपाल के गोरखा जिले में भारी बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन से तबाही। 95 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, पांच लापता। 45 घर पूरी तरह तबाह और पुलों व बिजली परियोजनाओं को नुकसान।

नेपाल में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने गोरखा जिले में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ का पानी कई घरों और पुलों को बहा ले गया, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक कुल 95 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना, सुरक्षा बल और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश करने के साथ-साथ राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।

हेलिकॉप्टर की मदद से फंसे लोगों को निकाला

नेपाली सेना के अनुसार, गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। रविवार शाम उंगिलुंग नदी के पास धौलीभीर इलाके में फंसे तीन लोगों को सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया। ये लोग रविवार सुबह अचानक हुए भूस्खलन के बाद वहां फंस गए थे। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से सुरक्षित फिलिम पहुंचाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम तक चार हेलिकॉप्टरों और जमीन पर काम कर रही बचाव टीमों की मदद से 95 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। राहत और बचाव कार्य में 700 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें नेपाली सेना के 171 जवान भी शामिल हैं।

45 घर पूरी तरह तबाह, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन में पांच लोग लापता हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। आपदा ने स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

प्रभावित क्षेत्र में 45 घर पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 27 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दो झूला पुल और दो मोटर वाहन पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीन जलविद्युत परियोजनाओं, मवेशियों को रखने के 34 बाड़ों और तीन वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई जा रही राहत सामग्री

बचाव अभियान के साथ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम भी जारी है। प्रशासन की ओर से जरूरतमंद लोगों तक तंबू, कंबल, गद्दे, स्लीपिंग बैग और रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान पहुंचाया जा रहा है। जिन परिवारों के घर तबाह हो गए हैं या जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

कई इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया

‘द राइजिंग नेपाल’ की रिपोर्ट के अनुसार, जगत से 17, यारू से 22, थुलोधुंगा से 13, दोभान से तीन, फिलिम से दो, न्याकफेदी से 17, पायु से 12, नामरुंग से तीन, डेंग से तीन और धौली से तीन लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बचाव दल अब भी प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। पहाड़ी भूभाग और लगातार भूस्खलन का खतरा राहत कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

नेपाल में बार-बार क्यों आती है ऐसी आपदा?

हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश, खड़ी पहाड़ियां और अस्थिर ढलानें अचानक बाढ़ तथा भूस्खलन का खतरा बढ़ाती हैं। कई बार भूस्खलन से नदियों और नालों का रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। इसके कारण पानी अस्थायी रूप से जमा हो सकता है और रुकावट टूटने पर पानी व मलबा तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इसकी चपेट में आने वाली बस्तियों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

नेपाल में इससे पहले भी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया है। लगातार सामने आ रही ऐसी आपदाएं संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में समय पर चेतावनी, सुरक्षित निकासी और मजबूत राहत-बचाव व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित करती हैं।

फिलहाल गोरखा जिले में पांच लापता लोगों की तलाश जारी है। बचाव दल प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में हालात सामान्य करने में जुटे हैं। लापता लोगों का पता लगाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने के लिए अभियान लगातार जारी है।

फाजिल्का मंडी में भारी बारिश से धान बर्बाद, किसानों ने पंजाब सरकार से मांगा मुआवजा

फाजिल्का अनाज मंडी में भारी बारिश और जलभराव से किसानों की धान की फसल को नुकसान। किसानों ने जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पंजाब सरकार से मुआवजे की मांग की।

फाजिल्का / सत्ता संदेश

पंजाब के फाजिल्का में भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अनाज मंडी में जलभराव के कारण किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का आरोप है कि मंडी में पानी की निकासी के उचित इंतजाम नहीं होने के कारण धान के ढेर पानी में बह गए और कई बोरियों तक पानी पहुंच गया। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

किसानों ने बताया कि उन्हें इस बार धान का अच्छा भाव मिलने की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि फसल बेचकर वे अपने पुराने कर्ज चुका सकेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति को कुछ बेहतर बना पाएंगे। लेकिन सुबह हुई भारी बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

किसानों के मुताबिक, कई दिन पहले धान को मंडी में लाकर खुले स्थान पर ढेर लगाकर रखा गया था। बारिश से बचाने के लिए उन्होंने रात को धान के ढेरों को तिरपाल से चारों तरफ से ढक दिया था। इसके बावजूद सुबह जब वे मंडी पहुंचे तो वहां जलभराव के कारण धान के ढेर पानी में बह चुके थे। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार की गई फसल को भारी नुकसान हुआ है।

प्रशासन पर उठाए सवाल, निकासी व्यवस्था न होने का आरोप

किसानों ने मंडी में पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी की व्यवस्था की गई होती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने पंजाब सरकार से नुकसान का आकलन करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले वे अपनी फसल को आढ़तियों के निजी खेतों में रख देते थे, जिससे बारिश के दौरान मंडी में होने वाले नुकसान से बचाव हो जाता था। लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से आढ़तियों को अपने निजी खेतों में धान रखने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण किसानों को मंडी में ही फसल रखनी पड़ी। किसानों का दावा है कि इसी वजह से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

अब किसानों ने पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि मंडी में जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए, खराब हुई फसल का सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

पंजाब में ASI इकबाल सिंह की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार हमलावर फरार

फिरोजपुर काउंटर इंटेलिजेंस में तैनात ASI इकबाल सिंह की नौशेरा-लोहका रोड पर गोली मारकर हत्या। अज्ञात बाइक सवार हमलावर फरार, पुलिस जांच में जुटी।

फिरोजपुर / पट्टी / सत्ता संदेश

पंजाब में अपराध की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। फिरोजपुर के काउंटर इंटेलिजेंस विभाग में तैनात ASI इकबाल सिंह (55) की रविवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात नौशेरा से लोहका रोड पर पटवारखाना के पास हुई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ASI इकबाल सिंह फिरोजपुर में अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद मोटरसाइकिल पर सवार होकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान जब वह नौशेरा से लोहका रोड पर पटवारखाना के पास पहुंचे, तो अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर गोलियां चला दीं। गोली लगने से उनकी मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। DSP पट्टी रवि शेर सिंह ने शुरुआती जानकारी में ASI इकबाल सिंह की हत्या की पुष्टि करते हुए बताया कि अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

हत्या के कारणों का पता नहीं, हमलावरों की तलाश जारी

फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। हमलावरों की पहचान और वारदात के मकसद का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है। घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

काउंटर इंटेलिजेंस विभाग में तैनात पुलिसकर्मी की इस तरह हत्या किए जाने से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर ASI इकबाल सिंह की हत्या किसने और क्यों की।

लुधियाना में नशा मुक्ति मोर्चा और पुलिस की बैठक, नशे के खिलाफ बनेगी रणनीति

लुधियाना में नशा मुक्ति मोर्चा के ईस्ट विंग और पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। नशे की रोकथाम, युवाओं को जागरूक करने और पुलिस-समाज के बीच समन्वय मजबूत करने पर चर्चा की गई।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में नशे की समस्या पर रोक लगाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी पंजाब द्वारा गठित नशा मुक्ति मोर्चा के लुधियाना ईस्ट विंग ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में क्षेत्र में नशे की रोकथाम, युवाओं को जागरूक करने और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान पुलिस प्रशासन और नशा मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों के बीच आपसी तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य पंजाब में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए प्रयास करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशे जैसी सामाजिक समस्या से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। लोगों को जागरूक करने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई गई।

बैठक में डीसीपी रूरल लुधियाना गुरसेवक सिंह PPS, डीसीपी इन्वेस्टिगेशन रुपिंदर कौर भट्टी PPS, एसीपी ईस्ट राज कुमार PPS, एसीपी ट्रैफिक गुरबिंदर सिंह PPS तथा पुलिस स्टेशन डिवीजन नंबर 7 के एसएचओ गगनदीप सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

वहीं, नशा मुक्ति मोर्चा की ओर से हलका ईस्ट के को-ऑर्डिनेटर पंकज मेहता, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर अभिषेक जलोटा, मोहित मित्तल और योगेश जिंदल, फील्ड ऑफिसर अमन सिंह तथा वालंटियर मोहित बागला सहित अन्य पदाधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य नशे के खिलाफ चलाए जा रहे प्रयासों में पुलिस और सामाजिक स्तर पर सक्रिय लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाना रहा।

लुधियाना में सेना भर्ती रैली के दौरान युवाओं ने दिखाया जोश और अनुशासन, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर रहा जोर

लुधियाना / सत्ता संदेश

भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में आयोजित भर्ती रैली 10 अक्टूबर को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस (ARO), लुधियाना की ओर से हेडक्वार्टर रिक्रूटिंग जोन (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर) के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में लगभग 5,200 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया।

इस भर्ती रैली में लुधियाना, मोगा, रूपनगर और एस.ए.एस. नगर (मोहाली) के उम्मीदवारों के साथ-साथ पंजाब और जम्मू डिवीजन की कुछ निर्धारित श्रेणियों के अभ्यर्थियों ने भी भाग लिया। सभी उम्मीदवार भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने के उद्देश्य से भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए।

भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों, प्रक्रियाओं और मानकों के अनुसार पूरी की गई। इस दौरान उम्मीदवारों को शारीरिक फिटनेस परीक्षण सहित चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ा। पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और पेशेवर मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया।

रैली के दौरान उम्मीदवारों में सेना में भर्ती होने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के लिए योग्य पाए जाने वाले उम्मीदवारों को आधिकारिक माध्यमों से सूचना दी जाएगी।

भारतीय सेना देश की सेवा करने और सशस्त्र बलों में सम्मानजनक करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को अवसर प्रदान करती है। भर्ती से संबंधित जानकारी और स्पष्टीकरण के लिए उम्मीदवार लुधियाना, फिरोजपुर, पटियाला, अमृतसर और जम्मू स्थित आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं।

Sports Homeland Punjab 2026: लुधियाना में साइक्लिंग और बेसबॉल प्रतियोगिताएं शुरू

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के राज्य स्तरीय खेलों का पहला चरण शुरू। लुधियाना में साइक्लिंग टाइम ट्रायल के परिणाम और अंडर-14 व अंडर-17 लड़कियों के बेसबॉल मुकाबलों के नतीजे जानें।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का पहला चरण शनिवार, 10 अक्टूबर से पंजाब के छह जिलों में शुरू हो गया। इस प्रतियोगिता के अंतर्गत लुधियाना जिले में बेसबॉल और साइक्लिंग के मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। इन खेलों में अलग-अलग आयु वर्ग के लड़के, लड़कियां, पुरुष और महिला खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन के नेतृत्व में लुधियाना में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध कराना और युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना है।

साइक्लिंग में खिलाड़ियों ने दिखाया दम

पीएयू लुधियाना स्थित साइक्लिंग वेलोड्रोम में पंजाब स्पोर्ट्स वेलफेयर बोर्ड की सदस्य सोनिया अलग ने राज्य स्तरीय साइक्लिंग प्रतियोगिता में शिरकत की और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर जिला खेल अधिकारी मंदीप कौशल, एथलेटिक्स कोच संजीव शर्मा, साइक्लिंग कोच सतविंदर सिंह और सुखपाल कौर, खेलो इंडिया साइक्लिंग कोच मोहित कुमार तथा कोच साहिल मौजूद रहे।

साइक्लिंग के 1 किलोमीटर टाइम ट्रायल मुकाबलों में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

अंडर-21 पुरुष वर्ग: गुरदासपुर के बीर प्रताप सिंह ने पहला, अमृतसर के अर्शदीप सिंह ने दूसरा और लुधियाना के कुंवरप्रीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।

अंडर-21 महिला वर्ग: अमृतसर की जपनूर कौर पहले, लुधियाना की तरनवीर कौर दूसरे और प्रभजोत कौर तीसरे स्थान पर रहीं।

21 से 30 वर्ष पुरुष वर्ग: अमृतसर के तनवीर सिंह ने पहला, पटियाला के हुसनप्रीत सिंह ने दूसरा और पटियाला के जशनप्रीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।

21 से 30 वर्ष महिला वर्ग: लुधियाना की विधि तेजपाल ने पहला, पटियाला की संदीप कौर ने दूसरा और फाजिल्का की संजू देवी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

बेसबॉल में भी रोमांचक मुकाबले

राज्य स्तरीय बेसबॉल प्रतियोगिता की शुरुआत सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गिल में हुई। जिला खेल अधिकारी मंदीप कौशल ने प्रतियोगिता में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

इस मौके पर पंजाब बेसबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखदेव सिंह औलख, सचिव हरबीर सिंह गिल, एथलेटिक्स कोच संजीव शर्मा, बेसबॉल कोच जतिंदर कुमार और विभिन्न जिलों से आए तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।

अंडर-14 लड़कियों के बेसबॉल मुकाबलों के परिणाम

  • श्री मुक्तसर साहिब ने मालेरकोटला को 1-0 से हराया।
  • पटियाला ने फाजिल्का को 2-1 से मात दी।
  • संगरूर ने जालंधर को 2-0 से हराया।
  • लुधियाना ने अमृतसर को 3-1 से पराजित किया।
  • फिरोजपुर ने पटियाला को 1-0 से हराया।
  • श्री मुक्तसर साहिब ने मोगा को 10-0 से हराकर बड़ी जीत दर्ज की।

अंडर-17 लड़कियों के मुकाबलों के परिणाम

  • एसएएस नगर ने मालेरकोटला को 2-0 से हराया।
  • श्री मुक्तसर साहिब ने अमृतसर को 3-2 से मात दी।
  • बठिंडा ने जालंधर को 4-1 से हराया।
  • पटियाला ने फाजिल्का को 3-1 से पराजित किया।

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत आयोजित इन प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर मिल रहा है। साइक्लिंग और बेसबॉल के शुरुआती मुकाबलों में खिलाड़ियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से पंजाब में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और युवाओं को नशे से दूर रखकर खेलों की ओर प्रेरित करने पर जोर दिया जा रहा है।

लुधियाना के जवाहर नवोदय विद्यालय धनांसू में 28वीं यूथ पार्लियामेंट आयोजित

लुधियाना के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय धनांसू में 28वीं यूथ पार्लियामेंट आयोजित हुई। कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र, अनुशासन और शिक्षकों के सम्मान के लिए प्रेरित किया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, धनांसू में स्कूल की प्रिंसिपल निधि गोयल के नेतृत्व में 28वीं यूथ पार्लियामेंट का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान विद्यार्थियों ने संसदीय कार्यप्रणाली को समझने और लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यवहार में अपनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्रों को अपने शिक्षकों और अभिभावकों का सम्मान करने की सीख दी। साथ ही, स्कूल की आवश्यकताओं को पूरा करने में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

यूथ पार्लियामेंट को सफल बनाने में वाइस प्रिंसिपल सोनू शर्मा, मुकेश शर्मा और स्कूल के समस्त स्टाफ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम की तैयारी में जोगिंदर भारद्वाज और कंवलजीत कौर की विशेष भूमिका रही।

इस अवसर पर अमरदीप सिंह गिल, सदस्य ब्लॉक समिति; धर्मजीत सिंह, प्रिंसिपल धनांसू; हरगोबिंद सिंह, सदस्य पंचायत धनांसू; सतपाल सिंह ग्रेवाल, सरपंच भुखरी खुर्द और सुखविंदर सिंह, नंबरदार भुखरी खुर्द सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। तेजिंदर सिंह मिट्ठू, इकबाल सिंह जंडियाली, प्रिंस सैनी और बब्बू मुंडियां ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

धर्मजीत सिंह ढिल्लों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अनुशासन में रहने और आत्म-मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

यूथ पार्लियामेंट में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले विद्यार्थियों का चयन निर्णायक मंडल ने किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रिंसिपल निधि गोयल ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

लुधियाना: गुरु नानक पब्लिक स्कूल के समारोह में पहुंचे कुलतार सिंह संधवान, मेधावी छात्र सम्मानित

लुधियाना के गुरु नानक पब्लिक स्कूल की 47वीं वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और शिक्षा, पंजाबी मातृभाषा व पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

“विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की अहम भूमिका” — मेधावी छात्रों को किया सम्मानित, पंजाबी मातृभाषा और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर बनाने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक न केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देते हैं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।

वे लुधियाना स्थित गुरु नानक पब्लिक स्कूल के 47वें वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. मुकेश कुमार अरोड़ा, जीएनपीएस कमेटी के अध्यक्ष जसबीर सिंह रयात और स्कूल की प्रिंसिपल दर्शप्रीत कौर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलतार सिंह संधवान ने विद्यार्थियों को मेहनत, लगन और समर्पण के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सफलता की कुंजी है। विद्यार्थियों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करनी चाहिए और अपने ज्ञान व प्रतिभा का उपयोग समाज की भलाई के लिए करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को ऐसे रचनात्मक कार्य करने की सलाह दी, जिनसे वे समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें।

समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने ICSE और ISC परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में योग की शानदार प्रस्तुति के माध्यम से स्वस्थ जीवन का संदेश दिया गया। वहीं, मोबाइल फोन के अनावश्यक इस्तेमाल के दुष्प्रभावों को दर्शाते नाटक ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा झूमर, कथक फ्यूजन, गिद्दा और भांगड़ा की प्रस्तुतियों ने पंजाबी संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया।

विद्यार्थियों ने एक साइलेंट प्ले के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया। इन प्रस्तुतियों के जरिए बच्चों ने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व को उजागर किया।

कुलतार सिंह संधवान ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनकी मेहनत और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बदलते समय में पंजाबी मातृभाषा को संरक्षित करने और इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने तथा इसके सम्मान और गौरव को बनाए रखने की अपील की।

समारोह के अंत में स्कूल की प्रिंसिपल दर्शप्रीत कौर ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अभिभावकों, शिक्षकों और सभी स्टाफ सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

गुरु नानक पब्लिक स्कूल का यह वार्षिक समारोह शैक्षणिक उपलब्धियों, कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का सुंदर संगम रहा, जिसमें विद्यार्थियों की प्रतिभा और रचनात्मकता की झलक देखने को मिली।

गंतव्य स्थल से आगे का पर्यटन: भारत की अगली बड़ी छलांग साझेदारी पर क्यों आधारित होनी चाहिए

गजेंद्र सिंह शेखावत          

भारत में गंतव्य स्थलों की कभी कोई कमी नहीं रही है। कमी अगर रही है, तो बस उस संस्थागत परिकल्पना की, जिसके जरिये दुनिया इन स्थलों को जानने में सक्षम हो सके, वहाँ पहुँच सके, उन्हें अनुभव कर सके और सबसे ज़रूरी बात—वहाँ बार-बार जा सके।

हमारी सांस्कृतिक विरासत बेमिसाल है: यहाँ सब कुछ है – प्राचीन शहर और जीवंत परंपराएँ, पवित्र परिदृश्य और वन्यजीव, वास्तुकला और शिल्प, खान-पान और त्योहार, पहाड़ और समुद्र तट, आदि। लेकिन सिर्फ़ विरासत से ही पर्यटन नहीं बनता। कोई स्मारक अपने-आप में गंतव्य स्थल नहीं होता; एक गंतव्य स्थल असल में एक पूरा इकोसिस्टम होता है। इसमें शामिल हैं—वहाँ तक ले जाने वाली सड़क, यात्रा से जुड़ी कहानी, यात्रियों का स्वागत करने वाला आतिथ्य, उसे असली पहचान देने वाले कारीगर, उसे खोजने में मदद करने वाली तकनीक और वह समुदाय जिसकी भागीदारी यह तय करती है कि पर्यटन एक आर्थिक अवसर बनेगा या बस एक अनुचित प्रवेश रह जाएगा।

इसीलिए भारतीय पर्यटन के अगले अध्याय को सिर्फ़ पर्यटन स्थलों के नज़रिए से नहीं, बल्कि साझेदारी के नज़रिए से भी तय किया जाना चाहिए।

पर्यटन का पुरानी संरचना काफ़ी हद तक ऊपर से नीचे की ओर श्रेणीबद्ध थी। सरकारें अवसंरचना बनाती थीं, गंतव्य स्थलों को बढ़ावा दिया जाता था, उद्योग जगत पर्यटकों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था करता था और समुदाय काफ़ी हद तक हाशिए पर रहते थे। नयी संरचना सबकी बराबर भागीदारी वाली होनी चाहिए। सरकार, उद्योग जगत, प्रौद्योगिकी कंपनियां, रचनाकार, निवेशक, राज्य, स्थानीय निकाय और समुदायों को मिलकर पर्यटन के अनुभव का निर्माण करना चाहिए।

यह फ़र्क सिर्फ़ शब्दों का नहीं है। यह विकास को समझने के हमारे नज़रिए में एक बुनियादी बदलाव को दिखाता है।

आज पर्यटन का मतलब सिर्फ़ लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है। यह विचारों, कहानियों, उम्मीदों, पूंजी और सांस्कृतिक प्रभाव का आवागमन है। यात्री अब सिर्फ़ भारत को देखना नहीं चाहते, बल्कि उसे अनुभव करना चाहते हैं — लोग खान-पान का स्वाद लेना, परंपराओं को समझना, घरों में जाना, कारीगरों से मिलना और यहाँ की जीवंत संस्कृति में, चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही, भाग लेना चाहते हैं।

यह बदलाव भारत के लिए एक शानदार अवसर लेकर आया है।

लेकिन बिना तालमेल के अवसर का लाभ शायद ही मिल पाता है।

इसलिए सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है, भले ही यह बदलती रहती हो। इसकी ज़िम्मेदारी सब कुछ खुद करने की नहीं है; बल्कि ज़्यादा चीज़ों को संभव बनाने की है। सड़कों, हवाईअड्डों, रेलवे, स्वच्छता, डिजिटल अवसंरचना, विरासत संरक्षण और नागरिक सुविधाओं में सरकारी निवेश वह आधार तैयार करता है, जिस पर निजी क्षेत्र नवाचार और निवेश कर सकता है। राजनीतिक इच्छाशक्ति निरंतरता और दिशा देती है। उद्योग जगत पूंजी, प्रबंधन विशेषज्ञता, तकनीक और बाज़ार तक पहुंच में योगदान देता है। समुदाय वह चीज़ देते हैं, जिसे कोई सरकार या निगम नहीं बना सकता: प्रामाणिकता।

असली चुनौती इन क्षमताओं को एक साथ लाने की है।

उद्योग जगत के साथ पर्यटन मंत्रालय का बढ़ता जुड़ाव इसी दिशा में एक प्रयास है। ग्यारह रणनीतिक समझौता ज्ञापनों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनमें से पांच का विश्व पर्यटन दिवस 2026 को आदान-प्रदान हुआ है। उनका महत्व केवल दस्तावेजों को लेकर नहीं है, बल्कि उन क्षमताओं में है, जिन्हें वे जोड़ना चाहते हैं – प्रौद्योगिकी, आवागमन, आतिथ्य, कंटेंट, डिजिटल आउटरीच और स्थानीय उद्यम।

गंतव्य स्थल की खोज करने के बदलते अर्थशास्त्र पर विचार करें।

एक पीढ़ी पहले, किसी यात्री को यात्रा गाइड या विज्ञापन के माध्यम से भारत की जानकारी मिलती होगी। आज, एक गंतव्य स्थल एक फिल्म, एक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, एक रचनाकार की कहानी या मोबाइल फोन में सामने आई एक छवि के माध्यम से वैश्विक परिकल्पना में प्रवेश कर सकता है।

नेटफ्लिक्स के साथ सहयोग गंतव्य प्रचार की इस नई व्यवस्था को प्रदर्शित करता है, जो भारत की संस्कृति, वन्य जीवन और पहाड़ी परिदृश्यों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने दिखाती है। आईटीबी बर्लिन 2026 में प्रदर्शित भारत के स्वाद और लंदन व न्यूयॉर्क में प्रचार अभियान यह दर्शाते हैं कि कैसे पर्यटन का भूगोल; कहानी कहने के भूगोल से पहले ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

लेकिन कहानी सुनाने से अंततः यात्रा करने का कारण अवश्य मिलना चाहिए।

यहीं पर अगली पीढ़ी की साझेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। मास्टरकार्ड के साथ विकसित परियोजना वाराणसी बहुमूल्य, विज्ञापन से परे एक ऐसे अनुभव की ओर बढ़ता है, जिसे वास्तव में खोजा और आरक्षित किया जा सकता है: सूर्योदय के समय गंगा, शास्त्रीय संगीत, साहित्य पर बातचीत, बनारसी बुनकर समुदाय और विरासत स्थल। इस तरह की पहल का महत्व यह है कि वाराणसी को फोटो खिंचवाने वाले स्मारक के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव की जाने वाली सभ्यता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इस अंतर की जानकारी हमारी संपूर्ण पर्यटन रणनीति को दी जानी चाहिए।

भारत को आकर्षण बेचने के बदले अनुभव संग्रहित करने की ओर बढ़ना चाहिए।

हवाई संपर्क भी इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एलायंस एयर, एयर इंडिया और इंडिगो के साथ साझेदारी अतुल्य भारत को यात्री इकोसिस्टम में विस्तार देती है, जिससे उड़ानों, डिजिटल प्लेटफार्मों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गंतव्य को बढ़ावा मिलता है।

प्रौद्योगिकी एक और आयाम जोड़ती है: बुद्धिमत्ता।

भविष्य की पर्यटन प्रणाली को तेजी से समझना होगा कि कौन यात्रा कर रहा है, यात्री क्या चाहते हैं, मांग कहां उभर रही है और प्राथमिकताएं कैसे बदल रही हैं। गूगल इंडिया के साथ सहयोग, जिसमें क्षमता निर्माण और वैश्विक यात्रा मांग व यात्री व्यवहार को समझने से जुड़े कार्य शामिल है, एक पर्यटन नीति की ओर इशारा करता है, जो उत्तरोत्तर अधिक साक्ष्य-आधारित बन सकती है।

फिर भी सबसे परिणामी परिवर्तन पारंपरिक पर्यटन केंद्रों से बहुत दूर हो सकता है।

यदि पर्यटन को वास्तव में समावेशी बनाना है, तो गाँव को पर्यटन नीति के लिए उतना ही महत्वपूर्ण बनाना होगा जितना कि महानगरीय प्रवेश द्वार। होमस्टे, होटल जैसा ही महत्वपूर्ण हो सकता है। कारीगर उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है जितना आकर्षण। स्थानीय उद्यमी बड़े संचालकों के समान ही महत्वपूर्ण बन सकते हैं।

एयरबीएनबी, सोल ऑफ इंडिया और मेकमाईट्रिप की साझेदारियां अवसर के इसी लोकतंत्रीकरण की दिशा में प्रयास कर रही हैं – होमस्टे मेजबानों को डिजिटल क्षमताओं से लैस करना, कम-ज्ञात गंतव्यों को अधिक दृश्यता देना, अनजान गांवों को रचनाकारों और आरक्षण योग्य रहने की जगहों से जोड़ना। इसके पीछे एक गहरी सोच है: जब कोई स्थल किसी यात्री की कल्पना में बसता है, तो उससे पैदा होने वाले आर्थिक मौके उन लोगों की ज़िंदगी में भी आने चाहिए, जो उस स्थल को पहचान देते हैं।

यही पर्यटन से होने वाले विकास की असली कसौटी है।

सिर्फ़ आने वाले पर्यटकों की संख्या ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकती। हमें एक और ज़रूरी सवाल पूछना चाहिए: जब कोई स्थल सफल होता है, तो फ़ायदा किसे होता है?

क्या कारीगर ज़्यादा कमाता है? क्या युवा को स्थानीय स्तर पर कोई अवसर मिलता है? क्या महिला उद्यमी को बाज़ार मिलता है? क्या समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाने का प्रोत्साहन मिलता है? क्या यात्री सिर्फ़ एक फ़ोटो लेकर नहीं, बल्कि गहरी समझ लेकर वापस जाता है?

अगर इन सवालों का जवाब ‘हाँ’ में है, तो पर्यटन सिर्फ़ एक उद्योग नहीं रह जाता। यह सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सबके लिए आर्थिक विकास का ज़रिया बन जाता है।

इस मामले में भारत की कम जानी-पहचानी जगहें एक बहुत बड़ा मौका देती हैं। तकनीक उन्हें युवा दर्शकों तक पहुँचा सकती है; आवाजाही की सुविधा से वहाँ पहुंचना आसान हो सकता है; निजी निवेश उचित अवसंरचना बना सकता है; और समुदाय की भागीदारी यह सुनिश्चित कर सकती है कि विकास पहचान की कीमत पर न होता हो। हिमालय में समुदाय के नेतृत्व वाले विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने वाली पहल – जिसमें मौखिक परंपराओं, शिल्प और स्थानीय ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण शामिल है – यह दिखाती हैं कि पर्यटन कैसे संरक्षण का दुश्मन नहीं, बल्कि साथी बन सकता है।

लेकिन साझेदारी का मतलब सिर्फ़ समझौते पर दस्तख़त करने वाली सरकारी शब्दावली नहीं होनी चाहिए।

समझौता ज्ञापन तो बस एक शुरुआत है। असली साझेदारी तब शुरू होती है जब समझौते से कोई उत्पाद बनता है, जब किसी अभियान से यात्री आते हैं, जब यात्री से स्थानीय आय होती है और जब उस आय से उस जगह पर समुदाय का मालिकाना हक़ और मज़बूत होता है।

इसलिए उद्योग संघ और पर्यटन व्यापार बहुत ज़रूरी हैं। बाज़ार, यात्रियों, यात्रा-कार्यक्रमों और वितरण के बारे में उनकी जानकारी आकांक्षाओं को वास्तविक यात्राओं में बदल सकती है। वहीं, राज्य और स्थानीय संस्थाएँ ज़मीनी स्तर पर अनुभव की गुणवत्ता तय करती हैं।

भारतीय पर्यटन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम सरकार और उद्योग जगत, केंद्र और राज्यों, तकनीक और परंपरा, वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म और स्थानीय समुदायों के बीच की पुरानी संस्थागत सीमाओं को कितना खत्म कर पाते हैं।

वाराणसी इस संभावना की एक झलक दिखाती है: कहानी सुनाना, संगीत, विरासत, बुनाई, आतिथ्य और तकनीक – ये सब एक ही जगह पर संयोजित हो रहे हैं।

इससे मिलने वाला बड़ा सबक स्पष्ट है। 

भारत को सिर्फ़ और पर्यटकों की ज़रूरत नहीं है। इसे एक मज़बूत पर्यटन समाज की ज़रूरत है।

एक ऐसा समाज, जहाँ नागरिक पर्यटन को किसी अन्य का उद्योग नहीं, बल्कि एक ऐसा मौका मानते हैं जिसमें उनकी भी हिस्सेदारी है। एक ऐसा समाज, जहाँ सरकारी निवेश से आधार बनता है, निजी निवेश संभावनाओं को कई गुना बढ़ाता है और समुदाय की भागीदारी से विकास को मान्यता मिलती है।

इसलिए, भविष्य का पर्यटन स्थल केवल नक्शे पर चिह्नित कोई जगह नहीं होगी। यह रिश्तों का एक नेटवर्क होगा।

और भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त शायद सिर्फ़ इस बात में नहीं है कि हमारे पास क्या भव्य स्थल हैं, बल्कि इस क्षमता में है कि हम उन अनेक लोगों और संस्थाओं को एक साथ ला सकें, जो हमारी विरासत को दुनिया के लिए एक मूल्यवान अनुभव में बदल सकें।

अब हमारे सामने यह सवाल नहीं है कि क्या भारत के पास यात्रियों को देने के लिए पर्याप्त चीज़ें हैं।

निश्चित रूप से हैं।

सवाल यह है कि क्या हम ऐसी साझेदारियाँ बना सकते हैं जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत की हर यात्रा उसकी सभ्यता की यात्रा बन जाए — और उस यात्रा से होने वाली समृद्धि उन लोगों तक पहुँचे जो उस सभ्यता को जीवित रखे हुए हैं।    

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(लेखक केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं)

सफ़ेद सोना, नई सुबह: कॉटन की विरासत से लेकर धागे के मॉडर्न दौर में आगे रहने तक का भारत का सफ़र

गिरिराज सिंह

हर साल 7 अक्टूबर को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड कॉटन डे’ हमें याद दिलाता है कि किसी देश के भविष्य के सबसे मज़बूत धागे उसके अतीत की मज़बूती से बुने जाते हैं। हज़ारों सालों से, भारत में कॉटन काता और बुना जाता रहा है, जिससे इतने शानदार कपड़े बनते हैं कि भारतीय मलमल को “हवा से बुना कपड़ा” कहा जाने लगा है। इसलिए, भारत के लिए कॉटन कभी भी सिर्फ़ एक कमोडिटी नहीं रहा। यह हमारी सभ्यता, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे देश के विकास के सफ़र का एक अहम हिस्सा रहा है।

आज, यह विरासत और भी मज़बूत है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कॉटन प्रोड्यूसर है और एरिया के हिसाब से सबसे बड़ा कॉटन उगाने वाला देश है। भारत में लगभग 115.25 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर कॉटन की खेती होती है, जो दुनिया के कुल कॉटन एरिया का एक-तिहाई से भी ज़्यादा है। भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहाँ चार तरह के कॉटन की कमर्शियल खेती होती है। लगभग 6 मिलियन किसान सीधे तौर पर इस फ़सल पर डिपेंडेंट हैं, जबकि लाखों और लोग पिकिंग, स्पिनिंग, वीविंग और टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग के ज़रिए इससे जुड़े हुए हैं।

कॉटन भारत का सफ़ेद सोना है, रोज़ी-रोटी, इंडस्ट्रियल ताकत और गांव की खुशहाली का ज़रिया है। भारत में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कुल फाइबर में कॉटन का हिस्सा लगभग 60 परसेंट है, जबकि दुनिया भर में इसका हिस्सा लगभग 30 परसेंट है। यह हमारी कॉटन-बेस्ड टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बड़े और मज़बूत स्ट्रक्चर को दिखाता है, लेकिन यह हमें एक ज़िम्मेदारी भी देता है: हर हेक्टेयर की प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, कॉटन की हर गांठ की क्वालिटी सुधारना और हर किसान के लिए ज़्यादा मुनाफ़ा पक्का करना।

कई सालों से, भारत के कॉटन सेक्टर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है – कम प्रोडक्टिविटी, बारिश पर निर्भर खेती पर बहुत ज़्यादा निर्भरता, मौसम और कीड़ों का खतरा, मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक अलग-अलग पहुँच और फाइबर की क्वालिटी को लेकर चिंताएँ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो बदलाव आया है, वह इन चुनौतियों से निपटने की कोशिशों के पैमाने, महत्वाकांक्षा और पूरे नज़रिए में दिखता है। हम इसे बीज और किसान से लेकर कॉटन चुनने, स्पिनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल मार्केट तक, एक पूरी वैल्यू चेन के तौर पर देख रहे हैं। 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के खर्च वाला ‘कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन – कॉटन रेवोल्यूशन’ इसी विज़न को दिखाता है। इसका लक्ष्य साफ़ है: 2030-31 तक कॉटन फाइबर की प्रोडक्टिविटी को 440 kg प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 kg प्रति हेक्टेयर करना और कुल प्रोडक्शन को 498 लाख बेल तक ले जाना। यह मिशन क्लाइमेट-फ्रेंडली और ज़्यादा पैदावार वाली किस्में, मॉडर्न खेती की तकनीकें, किसानों के लिए फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, साइंटिफिक रिसर्च, क्वालिटी में सुधार, टेस्टिंग, पूरा प्रोडक्ट ट्रेसेबिलिटी सिस्टम और सस्टेनेबल फाइबर डेवलपमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है।

हमने मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) पर खरीद के लिए सेंटर्स की संख्या बढ़ाकर 571 कर दी है और खरीद को ज़्यादा ट्रांसपेरेंट और एफिशिएंट बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम को मज़बूत किया है। ‘CotBiz’ (कॉटन सीड एंड बेल बिलिंग सिस्टम) और ‘BITS’ (बैले आइडेंटिफिकेशन एंड ट्रेसिंग सिस्टम) के ज़रिए, हम पूरी कॉटन वैल्यू चेन में ज़्यादा एफिशिएंसी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रेसेबिलिटी ला रहे हैं। इसके साथ ही, ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ क्वालिटी, सर्टिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी के आधार पर इंडियन कॉटन को एक खास पहचान दे रहा है। इससे इंडियन कॉटन एक कमोडिटी तक सीमित रहने के बजाय क्वालिटी-बेस्ड, ट्रेसेबल और ग्लोबली पहचाना जाने वाला इंडियन ब्रांड बन रहा है।

लेकिन हमारे बदलाव का मुख्य पॉइंट प्रोडक्टिविटी है। भारत का लगभग 60 परसेंट कॉटन बारिश पर निर्भर इलाकों में उगाया जाता है, इसलिए खेती की क्षमता और मज़बूती बढ़ाते हुए पैदावार में सुधार करना ज़रूरी है। इसीलिए हम मॉडर्न टेक्नोलॉजी, बेहतर किस्में, HDPS (हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम), खेती के बेहतर तरीके और मज़बूत एक्सटेंशन सर्विस सीधे खेतों तक ला रहे हैं। आम खेती में, किसान आमतौर पर प्रति एकड़ सिर्फ़ 5 से 7 क्विंटल कॉटन ही उगा पाते थे। HDPS के तहत, लगभग 5.5 पैकेट बीज और प्रति एकड़ 29,000 पौधों का इस्तेमाल करके पैदावार बढ़कर लगभग 12 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई है। हमारा अगला लक्ष्य अपने किसानों की सक्रिय भागीदारी से इसे 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक ले जाना है।

लेकिन, ज़्यादा कॉटन का मतलब बेहतर क्वालिटी का कॉटन भी होना चाहिए। अभी, फाइबर रिकवरी लगभग 32 से 33 परसेंट है, इसलिए जिनिंग प्रोसेस का मॉडर्नाइज़ेशन ज़रूरी है। जिनिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ अपनी बातचीत में, मैंने क्वालिटी और एफिशिएंसी पर ज़ोर दिया है। मॉडर्न मशीनरी का इस्तेमाल फाइबर रिकवरी को 35 परसेंट तक ले जाने और ग्लोबल मार्केट में साफ़ और हाई क्वालिटी इंडियन कॉटन पहुंचाने में मदद कर रहा है।

भारत की फाइबर की ज़रूरत 2030 तक लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) के मौजूदा लेवल से बढ़कर लगभग 23 मिलियन मीट्रिक टन होने का अनुमान है। सिर्फ़ कॉटन इस बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर सकता। 21वीं सदी अब एक नया चैप्टर शुरू कर रही है, जो रिन्यूएबल, बायोडिग्रेडेबल और कम कार्बन वाले मटीरियल की खोज से आगे बढ़ रही है। भारत इस नए दौर में एक खास फ़ायदे के साथ आ रहा है: हमारे पास भविष्य के मटीरियल बनाने के लिए बहुत सारे नेचुरल रिसोर्स और अलग-अलग तरह के फाइबर हैं।

मॉडर्न ज़माने के धागे: अगली फाइबर इकॉनमी बनाना

यहीं पर मॉडर्न ज़माने के धागे स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी हो जाते हैं। भारत सदियों से इनमें से कई धागों के बारे में जानता है और उनका इस्तेमाल करता रहा है, फिर भी उनकी असली क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया है। अब हम अपने फाइबर डेवलपमेंट एजेंडा को कॉटन से आगे ले जा रहे हैं, जिसमें मॉडर्न ज़माने के फाइबर के रिसर्च, डेवलपमेंट और कमर्शियलाइज़ेशन पर खास ध्यान दिया जा रहा है। कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के तहत 300 करोड़ रुपये की खास मदद से, हम किसानों, ग्रामीण एंटरप्राइज़ और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग के लिए नए मौके खोल रहे हैं। यह भारत को सस्टेनेबल धागों में ग्लोबल लीडर के तौर पर उभरने के लिए तैयार कर रहा है। हम अलग-अलग तरह के फाइबर पर काम कर रहे हैं, जिसमें बबूल, अलसी, रेमी, सिसल, भांग और भांग से लेकर बांस, केले, स्कंक और अनानास के पत्तों से मिलने वाले फाइबर शामिल हैं।

मिल्कवीड, जिसे पारंपरिक रूप से ‘आक’ या ‘मदार’ कहा जाता है और भगवान शिव की पूजा में चढ़ाया जाता है, एक नए ज़माने के अच्छे फाइबर के तौर पर उभर रहा है। इसकी खेती उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 15-16 एकड़ तक फैल गई है और इससे लगभग 10,000 kg फ्लॉस और फाइबर मिला है। इसमें गर्मी से बचाने वाले मटीरियल, इको-फ्रेंडली फिलिंग मटीरियल, कपड़े और बहुत ठंडे इलाकों के लिए बचाव वाले कपड़े बनाने की बहुत ज़्यादा क्षमता है। सिसल का इस्तेमाल गाड़ियों के इंटीरियर, जियोटेक्निकल फैब्रिक, कम्पोजिट मटीरियल, कंस्ट्रक्शन के कामों में मजबूती और सस्टेनेबल पैकेजिंग के लिए किया जा रहा है, जबकि रेमी में कपड़ों, डेनिम ब्लेंड और टेक्निकल फैब्रिक के लिए काफी क्षमता है। अनानास के पत्ते का फाइबर (PALF) खेती के कचरे को फैशन के कपड़ों, लेदर के विकल्प और बायो-बेस्ड कम्पोजिट मटीरियल में बदल सकता है। इसी तरह, केले के फाइबर का इस्तेमाल धागा, कागज़, हैंडीक्राफ्ट, सजावटी सामान और टेक्निकल टेक्सटाइल बनाने के लिए किया जाता है। बांस, अलसी, भांग, ज्वार और ज्वार के रेशे, कपड़ा, घरेलू सामान, इन्सुलेशन और तकनीकी उत्पादों में इस्तेमाल के जरिए भारत के टिकाऊ रेशों के विविध स्रोतों को और समृद्ध करते हैं।

यह मौका सिर्फ़ अलग-अलग तरह के धागों तक ही सीमित नहीं है। जैसे-जैसे रिन्यूएबल, लो-कार्बन, बायोडिग्रेडेबल और ट्रेसेबल मटीरियल की ग्लोबल डिमांड बढ़ रही है, यह डायवर्सिटी भारत के लिए एक स्ट्रेटेजिक इकोनॉमिक एसेट बन रही है।

कॉटन की जन्मभूमि भारत ने हज़ारों सालों से इस विरासत को संभालकर रखा है। आज, हम इस विरासत को भविष्य में ले जाने के लिए तैयार हैं—न सिर्फ़ कॉटन के कस्टोडियन के तौर पर, बल्कि नए ज़माने के फाइबर, सस्टेनेबल मटीरियल, इनोवेशन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से चलने वाली ‘सेकंड फाइबर रेवोल्यूशन’ के पायनियर के तौर पर भी। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 5F विज़न के गाइडेंस में—खेत से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से विदेशी बाज़ारों तक—हम अपनी रिच विरासत को नई दुनिया की ज़रूरतों से जोड़ रहे हैं। आज, जब दुनिया ऐसे धागों की तलाश में है जो साफ़, इको-फ्रेंडली और फ्यूचर-प्रूफ़ हों, तो भारत इस बदलाव को लीड करने और ग्लोबल टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अगले चैप्टर को आकार देने के लिए अच्छी स्थिति में है।

लेखक केंद्रीय कपड़ा मंत्री हैं। इस लेख में दिए गए विचार उनके निजी विचार हैं।