ब्रेकिंग न्यूज़
लुधियाना : पराली जलाने के खिलाफ अभियान तेज, डीसी ने 3 अवेयरनेस वैन को दिखाई हरी झंडी

लुधियाना में धान की पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया गया। डीसी हिमांशु जैन ने 3 अवेयरनेस वैन रवाना कीं, जो गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करेंगी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए लुधियाना प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स से तीन अवेयरनेस वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

ये वैन कृषि विभाग, लुधियाना की ओर से चलाए जा रहे ‘स्टबल मैनेजमेंट कैंपेन’ के तहत चलाई जा रही हैं। धान की कटाई के सीजन के दौरान ये वैन जिले के सभी ब्लॉकों में जाकर गांव-गांव किसानों को पराली न जलाने और इसे बिना आग लगाए मैनेज करने के लिए जागरूक करेंगी।

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में जिले में पराली प्रबंधन से जुड़ी 5,000 से अधिक कृषि मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई हैं। इस साल भी किसान अब तक करीब 1,300 और मशीनें खरीद चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले साल जिले में पराली जलाने की कुल 219 घटनाएं दर्ज की गई थीं। प्रशासन के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने में सहयोग करने वाले किसानों को कृषि विभाग की ओर से कैंप लगाकर सम्मानित भी किया जा रहा है।

हिमांशु जैन ने कहा कि इस वर्ष भी किसानों के सहयोग और कृषि, सहकारिता, ग्रामीण विकास तथा शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे पराली को बिना जलाए मैनेज करने के लिए किसान समूहों, सहकारी समितियों और पंचायतों का सहयोग लें। उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन करके पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिल सकती है।

इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और इसके उचित प्रबंधन के फायदों के बारे में जानकारी देंगी। वैन में ऑडियो सिस्टम भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे।

डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन के अलावा गांवों में किसान प्रशिक्षण कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों में कार्यक्रमों, अखबारों, WhatsApp संदेशों और दीवारों पर लिखे स्लोगन के जरिए भी किसानों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

इस अवसर पर खेतीबाड़ी विभाग के इंजीनियर अमनप्रीत सिंह घई, खेतीबाड़ी अधिकारी ब्लॉक लुधियाना डॉ. हरिंदर सिंह और एडीओ डॉ. करमजीत सिंह ने भी किसानों से विभाग की मुहिम में सहयोग करने की अपील की।

अमृतसर : KMSC का प्रदर्शन, खाद की कमी और पराली जलाने की नीति पर सरकार को घेरा

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर में खाद की कथित कमी, कालाबाजारी, बीजों के मनमाने दाम और पराली जलाने को लेकर सरकार की नीतियों के विरोध में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (KMSC) ने अमृतसर स्थित एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कमेटी के प्रमुख नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाते हुए केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि किसानों को यूरिया और DAP खाद हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने बीज विक्रेताओं पर भी मनमाने दाम वसूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को कई स्थानों पर बिना पक्के बिल के ऊंची कीमतों पर बीज दिए जा रहे हैं।

पराली जलाने को लेकर सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए पंढेर ने कहा कि किसानों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने और राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज करने जैसी कार्रवाई से उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालिया केंद्रीय ड्राफ्ट नियमों में दो एकड़ से कम जमीन पर ₹5,000, दो से पांच एकड़ पर ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर ₹30,000 प्रति घटना पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान रखा गया है।

पंढेर ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली के स्थानीय स्रोतों और औद्योगिक प्रदूषण समेत सभी कारकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से पराली प्रबंधन को लेकर निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई जा रही है। पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के मामलों की निगरानी शुरू हो चुकी है और शुरुआती मामले भी दर्ज किए गए हैं।

किसान नेता ने केंद्र सरकार पर किसानों की आय दोगुनी करने और फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी से जुड़े वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल कार्रवाई का सामना कराने के बजाय खेती से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों पर लागू की जा रही नीतियों की समीक्षा करने की मांग उठाई।

PAU किसान मेले में CM भगवंत मान का बड़ा बयान- पंजाब के पानी से कोई समझौता नहीं, नहरों से 88% सिंचाई का दावा
  • हम किसानों के हितों की रक्षा और खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब के पास एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है और किसी को पानी की एक बूंद देने का सवाल ही पैदा नहीं होता: सीएम मान
  • किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किमी पाइपें बिछाई गईं, वर्ष के अंत तक और 7,000 किमी पाइपें बिछाई जाएंगी: CM मान
  • फसल का एक-एक दाना खरीदा और समय पर उठाया जाएगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • केंद्र सरकार को विभिन्न फसलों के लिए लाभकारी एम.एस.पी. सुनिश्चित करनी चाहिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पी.ए.यू. में किसान मेला वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों के प्रति जागरूकता पैदा करेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार बीज अनुसंधान के लिए पी.ए.यू. को फंड की कोई कमी नहीं आने देगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 1,300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार देश में गन्ने का सबसे अधिक 416 रुपये प्रति क्विंटल भाव दे रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • यदि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करे तो पंजाब के किसान पराली जलाना पूरी तरह बंद कर देंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • सीएम भगवंत सिंह मान ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘किसान मेले’ को किया संबोधित

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में आयोजित किसान मेले में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों के हितों, कृषि को आधुनिक बनाने और राज्य के जल संसाधनों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और राज्य के बहुमूल्य जल संसाधनों के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

किसान मेले में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने में अहम योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में नहरी सिंचाई के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब सिंचाई के लिए करीब 22 प्रतिशत नहरी पानी का इस्तेमाल हो रहा था, जो अब 88 प्रतिशत से अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई जा चुकी हैं और वर्ष के अंत तक करीब 7,000 किलोमीटर और पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है।

भगवंत मान ने दावा किया कि नहरी नेटवर्क और जल रिचार्ज के प्रयासों के चलते राज्य के कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने किसानों से पानी की हर बूंद बचाने और कृषि में पानी के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के बीज अनुसंधान को मजबूत कर रही है, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सकें। उन्होंने राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 1,300 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पंजाब में गन्ने का भाव 416 रुपये प्रति क्विंटल है, जिसे उन्होंने देश में सबसे अधिक बताया।

कृषि विविधीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से वैकल्पिक फसलों के लिए लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को धान के अलावा दूसरी फसलों की ओर बढ़ने में प्रोत्साहन मिलेगा और पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

पराली प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पराली के खेत के अंदर और खेत के बाहर प्रबंधन के लिए उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र से किसानों को वित्तीय सहायता देने की भी मांग की।

आगामी खरीफ खरीद सीजन को लेकर भगवंत मान ने कहा कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा और समय पर उठाया जाएगा। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात भी कही।

मुख्यमंत्री ने किसानों से कृषि में वैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान मेले का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।

किसान मेले के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। PAU में आयोजित यह दो दिवसीय किसान मेला 18 और 19 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें किसानों और कृषि विशेषज्ञों की भागीदारी है।