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गृह मंत्रालय में ‘विशेष अभियान 6’: स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटारे और बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन पर जोर

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और सरकारी कामकाज में लंबित मामलों को कम करने के विजन के तहत ‘विशेष अभियान 6’ पर जोर दिया है। अभियान का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के साथ कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाना और लंबित शिकायतों व संदर्भों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत विशेष रूप से उन क्षेत्रीय और बाहरी कार्यालयों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां आम जनता का सीधे संपर्क होता है। मंत्रालय का फोकस स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और अधिक उत्पादक कार्यस्थल तैयार करने के साथ-साथ लंबित मामलों को कम करने पर है।

अभियान के तहत संसद सदस्यों के संदर्भ, राज्य सरकारों के संदर्भ, संसद के आश्वासन, अंतर-मंत्रालयी परामर्श, जन शिकायतों और अपीलों के निपटारे के अलावा रिकॉर्ड प्रबंधन को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच मंत्रालय और उसके क्षेत्रीय एवं बाहरी कार्यालयों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं। इस अवधि में 761 स्वच्छता अभियान चलाए गए। वहीं संसद सदस्यों से प्राप्त 299 संदर्भों, राज्य सरकारों से प्राप्त 336 संदर्भों और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त 7 संदर्भों का निपटारा किया गया।

इसी अवधि में मंत्रालय ने 52,050 जन शिकायतों और 7,410 जन शिकायत अपीलों का भी निपटारा किया। इसके अलावा गृह मंत्रालय और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के कार्यालयों में 1,02,084 वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली कराया गया, जिससे कार्यालयी संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया।

गृह मंत्रालय और उससे जुड़े एवं अधीनस्थ संगठन विशेष अभियान के माध्यम से स्वच्छता, बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन, लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे तथा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल कार्यस्थल विकसित करने पर लगातार काम कर रहे हैं।

अभियान से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित और सटीक तरीके से एकत्र करने के लिए गृह मंत्रालय एक अंतर-मंत्रालयी पोर्टल का उपयोग कर रहा है। इस पोर्टल पर मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों के साथ-साथ केंद्रशासित प्रदेशों और दिल्ली पुलिस से संबंधित अभियान का डेटा अपलोड किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, इससे विभिन्न प्रभागों और कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा समय पर सही आंकड़े प्राप्त करने में मदद मिली है।

चीन से 1-3 से हारी भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम, कांस्य पदक से करना पड़ा संतोष

खेल डेस्क / नागोया / सत्ता संदेश

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम को एशियन गेम्स के सेमीफाइनल मुकाबले में चीन के हाथों 1-3 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारतीय टीम का स्वर्ण या रजत पदक जीतने का सपना टूट गया, लेकिन टीम कांस्य पदक अपने नाम करने में सफल रही।

सेमीफाइनल में भारत और चीन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पुरुष युगल मुकाबले में एमआर अर्जुन और हरिहरन अमसाकरुनाना की जोड़ी को चीन के जी तिंग ही और यी लुई के हाथों 16-21, 21-17, 9-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे के साथ चीन ने सेमीफाइनल में 3-1 की बढ़त हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

भारत की ओर से सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना मुकाबला जीता। हालांकि, लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी अपने-अपने मुकाबले जीतने में सफल नहीं रहे। पूरे सेमीफाइनल में चीन का दबदबा देखने को मिला।

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने हांग्झू 2023 एशियन गेम्स में रजत पदक जीता था, जहां फाइनल में उसे चीन के हाथों हार मिली थी। मौजूदा एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के साथ भारत ने 40 साल में पहली बार एशियन गेम्स के लगातार दो संस्करणों में पुरुष टीम बैडमिंटन में पदक हासिल किया है।

इससे पहले भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने 1982 और 1986 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीते थे। अब चीन के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के बावजूद भारतीय टीम ने कांस्य पदक के साथ अपना पदक अभियान जारी रखा है।

मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, एशियन गेम्स में पहली बार जीता सिल्वर; 28 साल बाद भारत को वेटलिफ्टिंग में मिला पदक

मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 49 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 198 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। भारत को वेटलिफ्टिंग में 28 साल बाद एशियन गेम्स पदक मिला।

नागोया / सत्ता संदेश

भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने आखिरकार एशियन गेम्स में पदक जीतने का अपना अधूरा सपना पूरा कर लिया। एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 49 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में मीराबाई ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने कुल 198 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया।

मीराबाई का यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि इससे भारत का एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में 28 साल का इंतजार खत्म हुआ है। इससे पहले 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में पदक जीता था।

ऐसे जीता मीराबाई ने सिल्वर

मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम से शुरुआत की और इसके बाद 85 तथा 87 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। स्नैच के बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ वजन उठाया। इस तरह उनका कुल स्कोर 198 किलोग्राम रहा और उन्होंने सिल्वर मेडल पक्का कर लिया।

उत्तर कोरिया की री सॉन्ग गुम ने 215 किलोग्राम के कुल वजन के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रि विजायाना ने 191 किलोग्राम के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

एशियन गेम्स में तीसरी कोशिश में मिली सफलता

मीराबाई चानू ने 2014 में पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, लेकिन पदक नहीं जीत सकीं। 2018 में चोट के कारण वह प्रतियोगिता से बाहर रहीं। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में वह पदक से चूकते हुए चौथे स्थान पर रही थीं। अब 23 सितंबर 2026 को उन्होंने आखिरकार एशियन गेम्स का अपना पहला पदक जीत लिया।

मीराबाई का यह सिल्वर उनके शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ता है। वह टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं और वर्ल्ड चैंपियनशिप तथा कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए पदक हासिल कर चुकी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम तीन गोल्ड और एक सिल्वर मेडल हैं।

एशियन गेम्स का सिल्वर जीतकर मीराबाई चानू ने न सिर्फ अपना लंबे समय से चला आ रहा सपना पूरा किया, बल्कि भारतीय वेटलिफ्टिंग को भी 28 साल बाद एशियाई मंच पर पदक दिलाया।

पंचकूला में PIB की ‘वार्ता’ मीडिया कार्यशाला, नशा मुक्ति, कचरा प्रबंधन और पोषण पर हुई चर्चा

चंडीगढ़ / पंचकुला / सत्ता संदेश

पत्र सूचना कार्यालय (PIB), चंडीगढ़ की ओर से बुधवार को पंचकूला में ‘वार्ता – एक मीडिया कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य सरकार और मीडिया के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ-साथ विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम में पंचकूला की एसडीएम मन्नत राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने कार्यशाला की अध्यक्षता की। इस अवसर पर हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) के डीएसपी हरविंदर सिंह, नगर निगम पंचकूला के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ प्रदीप कुमार, जिला परियोजना अधिकारी, समेकित बाल सेवाएं, पंचकूला सविता नेहरा और डीपीआरओ पंचकूला विनय वत्स सहित मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यशाला में ‘नशा मुक्त भारत’, ‘ठोस कचरा प्रबंधन’ और ‘पोषण अभियान’ जैसे जनहित से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी।

अपने संबोधन में एसडीएम मन्नत राणा ने कहा कि सरकारी योजनाओं और पहलों की जानकारी लोगों तक सही और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सरकार तथा मीडिया के बीच बेहतर संवाद और समन्वय महत्वपूर्ण है। उन्होंने मजबूत सरकार-मीडिया समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी जनकल्याणकारी पहल की सफलता के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी है और इन्हें जन-आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए।

नशा मुक्त भारत पर आयोजित पहले तकनीकी सत्र में HSNCB के डीएसपी हरविंदर सिंह ने नशे के खिलाफ अभियान के उद्देश्यों और सामूहिक भागीदारी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कार्रवाई और प्रयासों की जानकारी भी साझा की।

ठोस कचरा प्रबंधन सत्र में प्रदीप कुमार ने कचरे के उचित पृथक्करण और निस्तारण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से ‘4-व्हील सिस्टम’ के तहत कचरे को सूखा, गीला, संदूषित/सैनेटरी तथा बायोमेडिकल एवं खतरनाक कचरे की अलग-अलग श्रेणियों में रखने की अपील की। उन्होंने कचरा प्रबंधन के संदर्भ में ‘R’ की अवधारणा को विस्तार देते हुए Reduce, Reuse, Recycle और Re-buy यानी कम करना, दोबारा इस्तेमाल करना, पुनर्चक्रण करना और पुनः खरीदना अपनाने पर जोर दिया।

पोषण अभियान के सत्र में जिला परियोजना अधिकारी सविता नेहरा ने महिलाओं और बच्चों, विशेषकर ग्रामीण एवं वंचित वर्गों में पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने पोषण संबंधी पहलों और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए जन-जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पोषण अभियान की शुरुआत से जुड़े प्रयासों और इसके उद्देश्यों पर भी जानकारी साझा की।

कार्यशाला के दौरान प्रत्येक विषयगत सत्र के बाद संवाद और प्रश्नोत्तर का आयोजन किया गया। इससे मीडिया प्रतिनिधियों को विशेषज्ञों से सीधे जानकारी लेने और संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के समापन पर अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। PIB चंडीगढ़ के राजन नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला में सरकारी प्रतिनिधियों, विषय विशेषज्ञों और मीडिया के बीच संवाद के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं एवं अभियानों को लेकर जन-जागरूकता और प्रभावी संचार को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

उपहार वही, जिसका प्रभाव लगातार बना रहे : सुहेल सेठ

सुहेल सेठ, मैनेजिंग पार्टनर , काउंसिलेज इंडिया

बीता सप्ताहांत एक तीखे घटनाक्रम के साथ शुरू हुआ और यहां ‘तीखा’ शब्द शाब्दिक अर्थ में भी लिया जा सकता है। मेरे सोशल मीडिया फीड पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री ने नीरज चोपड़ा द्वारा भेंट किए गए भाले की नीलामी कर एक तरह से उसका अपमान किया है। यह विषय मेरे लिए इसलिए भी दिलचस्प था, क्योंकि इसमें मेरी रुचि के कई पहलू एक साथ जुड़े हुए थे—प्रधानमंत्री, नीलामी, राजनीतिक प्रतिआक्रमण और, निश्चित रूप से, खेल। इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करने पर इससे जुड़े कई बेहद दिलचस्प पहलू सामने आए।

लेकिन उससे पहले मूल तर्क पर बात करना जरूरी है—भाले को लेकर किया गया यह हमला अपेक्षित प्रभाव पैदा नहीं कर सका।

दशकों से मैंने अपने हिस्से से कहीं अधिक ऐसे प्रभावशाली पुरुषों और महिलाओं को देखा है, जिन्हें विभिन्न प्रकार के उपहार प्राप्त होते रहे हैं। घड़ियां, जिन्हें वे कभी-कभार पहनते हैं, भले ही उन्हें अधिक बार पहनने की इच्छा रखते हों। ऐसी मूर्तियां, जिन पर शायद ही कभी धूल साफ की जाती है। कभी-कभार कोई महंगा शॉल भी पहन लिया जाता है। सामान्यतः सत्ता के साथ एक प्रवृत्ति जुड़ी होती है—संचय की प्रवृत्ति। वस्तुएं एकत्रित की जाती हैं, उन्हें अपने पास रखा जाता है और फिर प्रदर्शन के लिए सजा दिया जाता है। भारत में हमने ऐसे प्रधानमंत्री भी देखे हैं, जिन्हें उपहार के रूप में मर्सिडीज कारें मिलीं और उन्होंने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर गर्व के साथ चलाया।

नरेन्द्र मोदी ने इस परंपरा को हममें से अधिकांश लोगों के ध्यान देने से बहुत पहले ही बदलना शुरू कर दिया था। पिछले लगभग 25 वर्षों से उन्होंने इस परंपरा को लगातार एक नई दिशा दी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अपने आप में एक प्रकार का रिकॉर्ड है।

गुजरात के दिनों में, जब ‘ब्रांड मोदी’ उन बिजनेस स्कूलों में अध्ययन का विषय नहीं बना था, जहां मैं कभी-कभार व्याख्यान देता हूं, उससे बहुत पहले ही एक विशिष्ट अनुशासन स्थापित हो चुका था। किसी भी मुख्यमंत्री को मिलने वाले स्मृति-चिह्नों की तरह उनके पास भी उपहारों का संग्रह होता गया। लेकिन ये उपहार किसी सरकारी गोदाम में पड़े रहने के बजाय नीलामी के लिए भेजे गए। यह केवल एक रूपक नहीं था, बल्कि वास्तव में ऐसा किया गया। उपहारों की नीलामी की गई, उनसे धनराशि प्राप्त की गई और इस राशि को एक ऐसे उद्देश्य के लिए समर्पित किया गया, जिसे उन्होंने अपने निजी संग्रह से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना—बालिका शिक्षा। हजारों उपहारों की नीलामी की गई और उससे प्राप्त राशि गुजरात में ‘कन्या केलवणी निधि’ में जमा की गई। इसी पहल के तहत जून की भीषण गर्मी में वे और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी दूर-दराज के गांवों का दौरा करते थे और माता-पिता से अपनी बेटियों को शिक्षित करने का आग्रह करते थे।

खबरों से जुड़े रहने वाले एक व्यक्ति के रूप में मैं इसे ‘सरोकार के साथ किया गया सार्वजनिक प्रदर्शन’ कहूंगा और यहां ‘प्रदर्शन’ शब्द का उपयोग मैं सर्वोच्च प्रशंसा के अर्थ में कर रहा हूं। वहीं, मेरे व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष इसे ‘सेवा’ का सर्वोच्च रूप मानेगा।

2014 के बाद इस प्रवृत्ति को एक नई दिशा मिली। वस्तुतः यह प्रवृत्ति गंगा की धारा से जुड़ गई। गंगा को उसके पुराने, निर्मल स्वरूप के निकट वापस लाने के देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रयासों में से एक ‘नमामि गंगे’ के शुभारंभ के साथ प्रधानमंत्री को मिलने वाले उपहारों को आखिरकार एक विशिष्ट और पवित्र उद्देश्य मिल गया। शॉल, तलवारें, मूर्तियां, महान खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाले क्रिकेट बैट, ओलंपिक खिलाड़ियों द्वारा भेंट किए गए भाले और दूर-दराज से केवल इस उद्देश्य से आए प्रशंसकों द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपे गए चित्र—ये सभी अब राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय तक पहुंचते हैं। इनकी आधार कीमत महज 200 रुपये जैसी मामूली राशि से तय की जाती है और आम भारतीय इनकी बोली लगाते हैं। ऐसे लोग, जो सोने के एक टुकड़े के बजाय इतिहास से जुड़ी किसी स्मृति का एक अंश अपने पास रखना अधिक पसंद करते हैं।

मुझे यह केवल छवि निर्माण से जुड़े पहलू से परे कई कारणों से असाधारण लगता है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं कि नरेन्द्र मोदी सार्वजनिक छवि के महत्व को शायद नेहरू या इंदिरा गांधी से भी बेहतर समझते हैं। मैं यह बात उन दोनों का समान रुचि के साथ अध्ययन करने वाले व्यक्ति के रूप में कह रहा हूं।

पहला कारण है—अनुशासन। पच्चीस वर्ष किसी फोटो अवसर का हिस्सा नहीं हो सकते। यह किसी समाचार चक्र के अनुरूप किया गया एकमात्र बड़ा कदम नहीं है। यह एक ऐसी आदत है, जिसे दो अलग-अलग प्रकार की जिम्मेदारियों के दौरान, चुनावी चक्रों के बीच और शासन के रोजमर्रा के कामकाज के दौरान भी लगातार बनाए रखा गया। ऐसे समय में किसी एक-दो स्मृति-चिह्न को चुपचाप अपने पास रख लेना बेहद आसान होता। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और आज तक ऐसा नहीं हुआ है।

दूसरा कारण यह है कि इससे प्रतीकों के साथ उनके संबंध की झलक मिलती है। श्रद्धा के साथ भेंट किया गया कोई शॉल जब सीवेज उपचार संयंत्र के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से नीलाम किया जाता है, तो यह महज एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है। यह एक प्रकार का रूपांतरण है—भावनाओं को ठोस व्यवस्था में और स्नेह को बुनियादी ढांचे में बदलने का प्रयास। इसे किसी संचार कार्यशाला में नहीं सिखाया जा सकता। यह दशकों के अनुभव से विकसित हुई उस सहज समझ का परिणाम है कि भारतीय केवल सुशासन नहीं चाहते, बल्कि ऐसा शासन भी चाहते हैं, जिसमें सेवा और समर्पण का भाव दिखाई दे।

तीसरा कारण, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में मेरी अपनी रुचियों के सबसे निकट है, जिसने जीवन का एक बड़ा हिस्सा ब्रांडों का अध्ययन करने में बिताया है। वह कारण यह है कि इस प्रक्रिया ने ‘नमामि गंगे’ को केवल एक सरकारी योजना न रहकर एक साझा जनभागीदारी का प्रयास बना दिया है। किसी टियर-2 या टियर-3 शहर का कोई चिकित्सक भगवान विष्णु की प्रतिमा की बोली इसलिए लगाता है कि उसे विश्वास है कि इससे उस नदी की स्वच्छता में योगदान मिलेगा, जिसमें उसके पूर्वज स्नान किया करते थे। अब सरकार ने ऐसा कुछ किया है, जो किसी विज्ञापन बजट के दायरे में नहीं आ सकता—उसने नागरिकता को व्यक्तिगत जुड़ाव का अनुभव बना दिया है।

अब इस चर्चित भाले की बात करें। दुनिया भर में खेलों से जुड़ी वस्तुओं की नीलामी होना एक सामान्य बात है। यदि ऐसी नीलामी से अधिक से अधिक युवा खेलों की ओर आकर्षित होते हैं, तो इसमें हानि ही क्या है?

अपने करियर में मैंने कई विषयों पर आलोचनात्मक विचार व्यक्त किए हैं और निश्चित रूप से भविष्य में भी करता रहूंगा। लेकिन निरंतरता का अपना महत्व है, विशेषकर ऐसे देश में जहां सार्वजनिक जीवन में निरंतरता उतनी ही दुर्लभ है, जितनी दिल्ली में बिना धुंध वाली सर्दी। पच्चीस वर्षों तक उपहारों को बिना किसी शोर-शराबे और प्रचार के, एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत जनहित के कार्यों में परिवर्तित करना महज छवि निर्माण नहीं है। इसे मैं, अगर कहने की अनुमति हो, तो चरित्र का परिचायक कहूंगा। गंगा के अनेक संरक्षक हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने बहुमूल्य उपहारों को उसके संरक्षण के लिए समर्पित करने का इतना प्रत्यक्ष और ठोस उदाहरण प्रस्तुत किया है।

यह वास्तव में सेवा और त्याग के क्षेत्र में मोदी की पच्चीस वर्षों की एक उल्लेखनीय मिसाल है।

समराला में ‘मान के मुनाफे’ अभियान की शुरुआत, घर-घर पहुंचकर सरकार की योजनाओं की दी जा रही जानकारी

समराला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : परमिंदर वर्मा

पंजाब सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान किए गए कार्यों को लोगों तक पहुंचाने के लिए आम आदमी पार्टी की ओर से ‘मान के मुनाफे’ अभियान शुरू किया गया है। समराला विधानसभा क्षेत्र में अभियान की शुरुआत विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने अपने पैतृक गांव दयालपुरा से की।

अभियान के तहत आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी साझा कर रहे हैं। इस दौरान परिवारों को बताया जा रहा है कि सरकार बनने के बाद अलग-अलग सरकारी योजनाओं के माध्यम से उन्हें किस तरह के आर्थिक और सामाजिक लाभ मिले हैं।

पार्टी नेताओं के अनुसार, अभियान के दौरान मुफ्त बिजली के तहत जीरो बिजली बिल, मुफ्त तीर्थ यात्रा, मुफ्त राशन किट, स्वास्थ्य सुविधाएं, 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज और शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है।

कार्यकर्ता प्रत्येक परिवार से सीधे संपर्क कर एक साल के दौरान मिलने वाली विभिन्न सरकारी सुविधाओं का हिसाब-किताब भी बता रहे हैं। इसके साथ ही पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

विधायक जगतार सिंह दयालपुरा की अगुवाई में चल रहे इस अभियान को लेकर पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाने के उद्देश्य से घर-घर संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी ‘मान के मुनाफे’ अभियान जारी रहेगा।

अमृतसर रूरल में पुलिस और मोस्ट वांटेड गैंगस्टर के बीच एनकाउंटर, पैर में लगी गोली

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर रूरल के मत्तेवाल थाना क्षेत्र में नेहर सुए के पास पुलिस और एक मोस्ट वांटेड गैंगस्टर के बीच एनकाउंटर का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान गैंगस्टर हरमन भोपा राय के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस के अनुसार, हरमन भोपा राय स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर भोवा की तरफ से चुगावां की ओर आ रहा था। इसी दौरान पुलिस पार्टी ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन आरोपी ने रुकने के बजाय पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

SSP अमृतसर रूरल कंवलप्रीत सिंह चहल के मुताबिक, पुलिस को पहले से खुफिया सूचना मिली थी कि मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हरमन भोपा राय इस इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर मत्तेवाल थाना SHO दिलजीत सिंह की अगुवाई में पुलिस पार्टी ने नाकाबंदी की हुई थी।

पुलिस के मुताबिक, रोकने की कोशिश के दौरान गैंगस्टर ने पुलिस पार्टी पर करीब 3 से 4 गोलियां चलाईं। इस दौरान एक गोली SHO के हाथ के पास से निकल गई। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें हरमन भोपा राय के पैर में गोली लगी।

घायल गैंगस्टर को पुलिस ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हरमन भोपा राय के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। SSP के मुताबिक, गुरदासपुर के हनुमान चौक में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में भी पुलिस को उसकी तलाश थी। इसके अलावा मत्तेवाल थाने में केस नंबर 106/26 दर्ज है, जिसमें उस पर एक व्यक्ति पर गोली चलाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ स्नैचिंग और हत्या के प्रयास से जुड़े मामले भी दर्ज हैं।

पुलिस अब अस्पताल में इलाज पूरा होने के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की कार्रवाई करेगी। पुलिस के मुताबिक, रिमांड के दौरान उससे अन्य वारदातों और उसके आपराधिक नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जाएगी।

लुधियाना : विधायक कुलवंत सिद्धू का डोर-टू-डोर अभियान, लोगों को बांटे सरकार की गारंटियों के पंपलेट

लुधियाना / सत्ता संदेश

हलका आत्म नगर से विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने क्षेत्र में डोर-टू-डोर अभियान चलाकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान विधायक ने लोगों को पंजाब सरकार की ओर से पूरी की गई गारंटियों और सरकार के कामकाज से संबंधित पंपलेट वितरित किए।

अभियान के दौरान विधायक कुलवंत सिद्धू ने क्षेत्रवासियों को सरकार की उपलब्धियों और पूरे किए गए वादों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है और इसी क्रम में सरकार के कार्यों की जानकारी सीधे लोगों तक पहुंचाई जा रही है।

विधायक ने घर-घर जाकर लोगों से बातचीत भी की और क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने संबंधित मुद्दों को लेकर अधिकारियों से कार्रवाई करवाने का भरोसा दिया।

कुलवंत सिद्धू ने कहा कि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी सीधे जनता तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि लोगों को अपने क्षेत्र और पंजाब में किए जा रहे विकास कार्यों तथा सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी मिल सके।

डोर-टू-डोर अभियान के दौरान बांटे गए पंपलेट में सरकार की ओर से पूरी की गई गारंटियों और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। अब इन दावों और उपलब्धियों को लेकर क्षेत्र के लोगों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

लुधियाना : गैर-कानूनी लॉटरी की दुकान पर विधायक राजिंदर पाल कौर छीना की कार्रवाई

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना साउथ से विधायक राजिंदर पाल कौर छीना ने क्षेत्र में कथित गैर-कानूनी लॉटरी का कारोबार चलाने वाली एक दुकान पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस को बुलाया गया और दुकान संचालक को हिरासत में ले लिया गया।

विधायक ने कहा कि कुछ पैसों के लालच में लोगों को कथित तौर पर लॉटरी के नाम पर गुमराह कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मौके पर पुलिस पहुंचने के बाद दुकान संचालक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू की गई। विधायक राजिंदर पाल कौर छीना ने गैर-कानूनी लॉटरी का कारोबार करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे खुद ही इस तरह का काम बंद कर दें, अन्यथा सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

विधायक ने अधिकारियों को भी चेतावनी दी कि उनके क्षेत्र में यदि किसी भी तरह का अवैध या नियमों के विपरीत कारोबार होता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी भी तरह के “नंबर दो” के काम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुंडिया ने ‘जान दे मुनाफे’ कैंपेन के तहत जंडियाली में किया घर-घर संपर्क

कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने साहनेवाल के गांव जंडियाली में ‘मन दे मुनाफे’ कैंपेन के तहत घर-घर संपर्क किया और पंजाब सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व आर्थिक लाभों की जानकारी दी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने ‘मन दे मुनाफे’ कैंपेन के तहत साहनेवाल हलके के गांव जंडियाली में घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पंजाब सरकार की ओर से पिछले साढ़े चार वर्षों में किए गए जनकल्याणकारी कार्यों और विभिन्न योजनाओं से लोगों को मिल रहे आर्थिक लाभों के बारे में जानकारी दी।

हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि पंजाब सरकार आम लोगों को राहत देने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी पहलों का लाभ राज्य के आम परिवारों तक सीधे पहुंच रहा है।

उन्होंने बताया कि ‘मन दे मुनाफे’ कैंपेन का उद्देश्य लोगों को सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें मिलने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करना है। घर-घर संपर्क के दौरान मंत्री ने गांववासियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने।

मुंडियां ने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनके द्वारा उठाई गई समस्याओं को संबंधित विभागों के ध्यान में लाया जाएगा और उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान गांववासियों ने सरकार की योजनाओं और आर्थिक राहतों की जानकारी सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए मंत्री का धन्यवाद किया। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के संपर्क अभियानों से लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लाभों के बारे में सीधे जानकारी मिलती है।