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जालंधर में 25,257 बिजली उपभोक्ताओं पर कनेक्शन कटने का खतरा, एक साल से बिल नहीं किया जमा

जालंधर में एक साल से बिजली बिल जमा नहीं करने वाले 25,257 उपभोक्ताओं पर कनेक्शन कटने का खतरा है। पावरकॉम जल्द शुरू करेगा कार्रवाई।

जालंधर / सत्ता संदेश

पंजाब के जालंधर में बिजली बिल लंबे समय से जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ पावरकॉम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, जिले में करीब 25,257 उपभोक्ताओं ने पिछले एक साल से बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया है। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई अगले तीन दिनों के भीतर शुरू की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि पहले चरण में उपभोक्ताओं के कनेक्शन अस्थायी तौर पर काटे जाएंगे। इसके बाद उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि के भीतर बिल का भुगतान कर दिया जाता है, तो कनेक्शन दोबारा बहाल कर दिया जाएगा। वहीं, निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर दो सप्ताह बाद कनेक्शन स्थायी रूप से काटने की कार्रवाई की जा सकती है।

पावरकॉम की कार्रवाई उन उपभोक्ताओं के खिलाफ प्रस्तावित है, जिन पर 20 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का बिजली बिल बकाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20 हजार से 50 हजार रुपये तक बकाया वाले 18,281 उपभोक्ता हैं। इनसे करीब 58.28 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी है।

50 हजार से एक लाख रुपये तक बकाया वाले 6,976 उपभोक्ता

आंकड़ों के अनुसार, 50 हजार से एक लाख रुपये तक बिजली बिल बकाया वाले 6,976 उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं से पावरकॉम को करीब 47.69 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलनी है।

इससे पहले एक लाख से ढाई लाख रुपये तक की बकाया राशि वाले 5,085 उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जानकारी के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में इन उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए और करीब 12.51 करोड़ रुपये की बिल रिकवरी की गई।

घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी बकाया

पावरकॉम के अधिकारियों के अनुसार, बिजली बिल जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग के मुताबिक, घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर करीब 25 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।

पावरकॉम ईस्ट, कैंट, मॉडल टाउन, वेस्ट और फगवाड़ा क्षेत्रों में भी बकायेदार उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। विभाग ने बकायेदारों की सूची तैयार कर ली है और बकाया राशि की वसूली के लिए चरणबद्ध तरीके से कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

डिप्टी चीफ इंजीनियर गुलशन चुटानी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डिफॉल्टर उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का लक्ष्य बकाया बिजली बिलों की वसूली करना है।

चंडीगढ़ मेडिकल कैडर में बदलाव पर पंजाब का हिस्सा घटने का दावा, बलतेज पन्नू ने केंद्र से ड्राफ्ट रिव्यू की मांग

चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 के प्रस्तावित बदलाव पर बलतेज पन्नू ने पंजाब का हिस्सा घटने का दावा किया। केंद्र से ड्राफ्ट रिव्यू की मांग की।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 के प्रस्तावित बदलावों को लेकर आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में पंजाब और हरियाणा के बीच 60:40 का प्रबंध है, लेकिन प्रस्तावित बदलावों से चंडीगढ़ मेडिकल कैडर में पंजाब का हिस्सा घटकर करीब 36 प्रतिशत रह सकता है।

बलतेज पन्नू के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में 60 प्रतिशत पद पंजाब और 40 प्रतिशत हरियाणा के लिए निर्धारित हैं। प्रस्तावित बदलावों के तहत 40 प्रतिशत मेडिकल ऑफिसर सीधे यूटी कैडर के तहत भर्ती किए जाने की बात कही गई है, जबकि शेष 60 प्रतिशत पद पंजाब और हरियाणा के बीच बांटे जाएंगे। उनका दावा है कि ऐसी व्यवस्था लागू होने पर पंजाब का प्रभावी हिस्सा करीब 36 प्रतिशत रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल भर्ती नियमों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ में पंजाब के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। पन्नू ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और पंजाब के पुनर्गठन के समय जो व्यवस्थाएं तय की गई थीं, उनमें इस तरह बदलाव नहीं होना चाहिए जिससे पंजाब का हिस्सा कम हो।

पंजाब के हक कमजोर करने का आरोप

बलतेज पन्नू ने प्रस्तावित बदलावों को एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक प्रोसेस का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि पंजाब के अधिकारों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के सिलेबस से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख किया और कहा कि अब चंडीगढ़ मेडिकल कैडर में बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है।

उन्होंने भाजपा के पंजाब को लेकर राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाया। पन्नू ने कहा कि भाजपा पंजाब में सरकार बनाने और चुनाव लड़ने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ उनके अनुसार पंजाब से जुड़े अधिकारों में कटौती की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर भाजपा वास्तव में पंजाब के हित में काम करना चाहती है तो चंडीगढ़ में पंजाब का निर्धारित हिस्सा कम क्यों किया जा रहा है।

60:40 व्यवस्था बनाए रखने की मांग

पन्नू ने पंजाब और हरियाणा के बीच मौजूदा 60:40 व्यवस्था को बनाए रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि नया यूटी कैडर स्ट्रक्चर लागू करने से पंजाब का हिस्सा कम नहीं होना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 के प्रस्तावित ड्राफ्ट की तत्काल समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पंजाब पुनर्गठन के बाद बनी व्यवस्थाओं और पंजाब के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब अपने अधिकारों में लगातार कमी को स्वीकार नहीं कर सकता और केंद्र सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रस्तावित नियमों की समीक्षा करनी चाहिए।

नरेंद्र मोदी अजेय क्यों हैं? पूर्व वित्त सचिव हसमुख आध्या ने बताईं PM मोदी की मैनेजमेंट, मानवीय और आध्यात्मिक खूबियां

हसमुख आध्या भारत के पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव

पूर्व वित्त एवं राजस्व सचिव हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व को लेकर विस्तार से अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक मोदी के साथ काम करने के दौरान उन्हें उनकी कई प्रशासनिक और व्यक्तिगत खूबियों को करीब से देखने का अवसर मिला।

हसमुख आध्या के मुताबिक, नरेंद्र मोदी की लंबे समय तक राजनीतिक सफलता के पीछे उनकी दूरदर्शिता, मैनेजमेंट क्षमता, टीम के साथ संवाद, लोगों से जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण जैसी कई खूबियां हैं। आध्या ने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी और बाद में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया था।

उन्होंने कहा कि मोदी किसी भी योजना को केवल तत्काल परिणाम के नजरिए से नहीं देखते, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने पर जोर देते हैं। आध्या के अनुसार, बजट तैयार करने के दौरान मोदी वित्त मंत्रालय के अलग-अलग विभागों की प्रस्तुतियों को घंटों ध्यान से सुनते और इसके बाद अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करते थे।

आध्या ने यह भी बताया कि मोदी विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की नियमित समीक्षा करते थे। उनके अनुसार, इन बैठकों में प्रधानमंत्री नए सुझाव देने के साथ अधिकारियों का उत्साह बढ़ाने पर भी ध्यान देते थे।

‘चिंतन शिविर’ से लेकर टीम मैनेजमेंट तक

हसमुख आध्या ने गुजरात में शुरू किए गए ‘चिंतन शिविर’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार करने का माध्यम बना। बाद में केंद्र स्तर पर चीफ सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस जैसी प्रक्रिया भी देखने को मिली।

आध्या ने मोदी की एक अन्य खूबी का जिक्र करते हुए कहा कि वे अधिकारियों और सहयोगियों के लिए आसानी से उपलब्ध रहते हैं। उनके मुताबिक, इससे उन्हें सरकार और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी सीधे मिलती रहती थी।

‘वाइब्रेंट गुजरात’ का उदाहरण देते हुए आध्या ने कहा कि मोदी किसी नई पहल को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसके अनुभव को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर देते थे।

लोगों से व्यक्तिगत जुड़ाव का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री मोदी के मानवीय पक्ष का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मोदी गरीब और पिछड़े वर्गों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2003 के गुजरात के पहले चिंतन शिविर की विदाई स्पीच को याद करते हुए कहा कि उस दौरान पिछड़े लोगों की समस्याओं पर मोदी की भावनात्मक चर्चा ने वहां मौजूद कई अधिकारियों और मंत्रियों को प्रभावित किया था।

आध्या के मुताबिक, मोदी अपनी टीम के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर भी जुड़ाव रखते हैं। किसी अधिकारी, राजनीतिक कार्यकर्ता या उनके परिवार के सदस्य के बीमार होने की जानकारी मिलने पर फोन करके हालचाल पूछना और विशेष अवसरों पर शुभकामनाएं देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी लोगों के नाम और उनसे हुई मुलाकातों को लंबे समय तक याद रखते हैं। आध्या के अनुसार, यह क्षमता लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करती है।

भगवद्गीता और कर्मयोग का भी किया उल्लेख

हसमुख आध्या ने नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में आध्यात्मिक पक्ष को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मोदी के काम करने के तरीके और सफलता-असफलता को स्वीकार करने के दृष्टिकोण में उन्हें भगवद्गीता के ‘कर्मयोग’ की झलक दिखाई देती है।

आध्या के अनुसार, मोदी जिस काम को हाथ में लेते हैं, उसमें पूरी मेहनत और गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं। सफलता मिलने के बाद भी उनके मुताबिक मोदी इसे लेकर लापरवाह या अहंकारी नहीं होते, जबकि अपेक्षित परिणाम न मिलने की स्थिति में भी मुश्किलों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने ‘आर्जव’ का उल्लेख करते हुए इसे विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता तथा सादगी से जोड़ा। आध्या ने कहा कि मोदी की धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बचपन की घटना का भी किया जिक्र

हसमुख आध्या ने मोदी के साथ हुई एक बातचीत से जुड़ी बचपन की घटना भी साझा की। उनके अनुसार, मोदी ने बताया था कि बचपन में चोट लगने के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दर्द हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया था कि उन्हें दर्द नहीं हो रहा, बल्कि उनके शरीर में दर्द हो रहा है।

आध्या ने इस घटना को वेदांत के अद्वैत विचार से जोड़ते हुए कहा कि इसमें शरीर और आत्मा के बीच अंतर की अवधारणा दिखाई देती है।

अपने लेख के अंत में हसमुख आध्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैनेजमेंट क्षमता, मानवीय जुड़ाव और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को उनके नेतृत्व व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका यह लेख मोदी के साथ काम करने के उनके व्यक्तिगत अनुभवों और अवलोकनों पर आधारित है।

खेलो इंडिया योजना 2026-31 का बड़ा विस्तार, 36,441 करोड़ रुपये का बजट, 27 हजार से अधिक एथलीटों को मिलेगा प्रशिक्षण

जीरकपुर / सत्ता संदेश

खेलो इंडिया योजना के 2026-27 से 2030-31 तक के नए चरण को बड़े स्तर पर विस्तार दिया गया है। केंद्र सरकार ने संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी हुई सहायता के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार यह राशि पिछली खेलो इंडिया योजना के मुकाबले करीब आठ गुना अधिक है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों के लिए एक व्यवस्थित रास्ता तैयार करना है। योजना को 2036 ओलंपिक के विजन और ‘खेलो भारत नीति 2025’ के उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस योजना के तहत 30 प्राथमिकता वाले खेल विधाओं में 9,000 खेलो इंडिया एथलीट (KIA) और 18,000 इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट (E-KIA) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित खिलाड़ियों को कोचिंग, आवास एवं डाइट, खेल किट, यात्रा, चिकित्सा सहायता, शिक्षा और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

भारतीय खेल प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय जीरकपुर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान क्षेत्रीय निदेशक (प्रभारी) शैलेन्द्र कुमार ने योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का जोर गांवों और छोटे शहरों से कम उम्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आधुनिक खेल विज्ञान, एआई आधारित प्रदर्शन विश्लेषण, बेहतर कोचिंग और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।

खेल अवसंरचना पर विशेष जोर

नई योजना में खेल अवसंरचना को तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित करने की व्यवस्था की गई है। इसमें मेडल रणनीति के लिए अवसंरचना, रणनीतिक खेल परिसंपत्तियों का सुदृढ़ीकरण और राज्यों की मांग के आधार पर खेल अवसंरचना विकास के लिए राज्य कार्य योजना शामिल है।

18 प्राथमिकता वाले खेलों में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। वहीं 30 ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की विधाओं में मौजूदा खेल सुविधाओं की मैपिंग कर कमियों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और जरूरत के अनुसार नई सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

राज्य कार्य योजना के तहत सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय भागीदारी 60:40, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात रखा गया है।

स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर बढ़ेंगी प्रतियोगिताएं

खेलो इंडिया युवा, विश्वविद्यालय, पैरा, शीतकालीन, बीच, जनजातीय और जल खेलों के आयोजनों के साथ अस्मिता महिला लीग को भी विस्तार दिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल, विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय, जोनल और खेल-विशिष्ट लीगों को मजबूत किया जाएगा।

शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप स्कूल और यूनिवर्सिटी लीग तथा विभिन्न खेलों की क्षेत्रीय लीग शुरू करने की योजना है। सीमावर्ती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को खेलों की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

प्रतिभा पहचान के लिए नए प्रशिक्षण केंद्र

खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया एथलीट’ और ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट’ की श्रेणियों में वर्गीकृत कर वित्तीय और तकनीकी सहायता देने का प्रावधान किया गया है।

खेल और स्कूली शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय के लिए खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV) और खेलो इंडिया फीडर स्कूल (KIFS) स्थापित किए जाएंगे। प्रतिभा चयन के लिए जोनल और राष्ट्रीय स्तर पर खेल-विशिष्ट समितियों के माध्यम से वैज्ञानिक परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

साई क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अंतर्गत वर्तमान में 2 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 6 साई ट्रेनिंग सेंटर, 46 खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियां, 6 खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 152 से अधिक खेलो इंडिया सेंटर संचालित होने की जानकारी दी गई। संशोधित योजना के बाद इस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

कोचों के लिए राष्ट्रीय मानक

योजना में कोच और सहायक स्टाफ के प्रशिक्षण तथा मानकीकरण पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड (NCAB) गठित किया जा रहा है। भारतीय खेल प्राधिकरण के तहत यह निकाय कोचों के लिए L1 से L4 तक राष्ट्रीय मानक, डिजिटल कोच रजिस्ट्री और सर्टिफिकेशन प्रणाली विकसित करेगा।

‘खेल सेतु’ से डिजिटल होगी खिलाड़ी की पूरी यात्रा

खेलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के सहयोग से एआई-संचालित ‘खेल सेतु’ डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसमें यूनिफाइड एथलीट आईडी, टैलेंट स्काउटिंग मेट्रिक्स, गेम्स मैनेजमेंट और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

योजना के तहत 10 खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालयों, 500 फीडर स्कूलों और 2,500 खेलो इंडिया केंद्रों के माध्यम से वैज्ञानिक और तकनीक आधारित प्रतिभा पहचान प्रणाली विकसित करने का लक्ष्य है।

नई तकनीकी व्यवस्था में एआई और वीडियो आधारित टैलेंट स्काउटिंग, IoT वियरेबल्स, खेल विज्ञान, एआई प्रदर्शन विश्लेषण, प्रतियोगिता प्रबंधन, खेल शिक्षा, करियर के बाद सहायता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।

फिट इंडिया को भी मिलेगा विस्तार

फिट इंडिया मूवमेंट के तहत ‘फिटनेस की डोज, आधा घंटा रोज’ जैसे अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है। नमो फिट इंडिया क्लब्स, संडे ऑन साइकिल, फ्रीडम रन और नशा मुक्त भारत अभियान के साथ समन्वय कर राष्ट्रीय फिटनेस कैलेंडर को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अलावा सामुदायिक फिटनेस हब, योग, पारंपरिक और स्वदेशी खेलों तथा महिलाओं और दिव्यांगजनों की खेलों में भागीदारी पर भी ध्यान दिया जाएगा।

संशोधित खेलो इंडिया योजना का व्यापक उद्देश्य देश में ऐसा खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रतिभाशाली खिलाड़ी को शुरुआती पहचान से लेकर प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और उच्च प्रदर्शन के स्तर तक लगातार अवसर और सहायता मिल सके।

उप क्षेत्रीय कार्यालय गुरुग्राम में राजभाषा पखवाड़ा 2026 का गरिमापूर्ण शुभारंभ

गुरुग्राम / सत्ता संदेश

उप क्षेत्रीय कार्यालय, गुरुग्राम में राजभाषा पखवाड़ा 2026 का गरिमापूर्ण शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन निदेशक (प्रभारी) श्री हरिओम प्रकाश की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन में हुआ। इसका उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी एवं अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा संबंधी दायित्वों के प्रति जागरूक करना रहा।

इस अवसर पर उल्लेख किया गया कि 14 एवं 15 सितंबर 2026 को मुंबई में हिंदी दिवस समारोह एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजभाषा हिंदी के व्यापक प्रयोग, भारतीय भाषाओं के पारस्परिक समन्वय तथा हिंदी को तकनीक और आधुनिक संचार माध्यमों से जोड़ने के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

उप क्षेत्रीय कार्यालय, गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पंचदीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा कार्यालयीन कार्यों में उसके अधिकाधिक प्रयोग के प्रति सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

निदेशक (प्रभारी) श्री हरिओम प्रकाश ने सभी कार्मिकों को हिंदी में अपना शत-प्रतिशत कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल कार्यालयी भाषा ही नहीं, बल्कि प्रशासन और जनसंपर्क को अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से राजभाषा नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप कार्यालयीन पत्राचार, टिप्पण, आलेखन एवं अभिलेखों में हिंदी के प्रयोग को निरंतर बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में डॉ. स्वीटी यादव, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने राजभाषा नीति, राजभाषा अधिनियम, 1963 तथा राजभाषा नियम, 1976 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कार्यालय में हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, वार्षिक राजभाषा लक्ष्यों की प्राप्ति, ई-ऑफिस में हिंदी के प्रयोग तथा हिंदी में टिप्पण एवं आलेखन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि राजभाषा पखवाड़े का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं एवं कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं है, बल्कि कार्यालय के दैनिक कार्यों में हिंदी के सहज, व्यावहारिक और प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देना भी है।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए और निर्धारित राजभाषा लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का संकल्प लिया। पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों, कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों में हिंदी के प्रति रुचि, जागरूकता एवं सहभागिता बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया है।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उपस्थित कार्मिकों ने राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा राजभाषा पखवाड़ा 2026 को सफल बनाने के लिए सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।

राजभाषा पखवाड़ा 2026 का यह शुभारंभ कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और राजभाषा के प्रति जागरूकता एवं प्रतिबद्धता मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।

17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान, बैंकों की ओर से जनभागीदारी पर जोर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत देशभर के बैंकों द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना के अनुसार, अभियान के दौरान पंजाब में नागरिकों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक स्थलों, अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों और क्लीननेस टारगेट यूनिट्स (CTUs) में विशेष स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करना और स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही ‘कबाड़ से जुगाड़- वेस्ट टू वेल्थ’ और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को बैंक कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता की शपथ के साथ की गई। अभियान के दौरान समावेशिता और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित विभिन्न स्वच्छता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

वहीं, 1 अक्टूबर को सुबह 8 बजे “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” के आह्वान के साथ श्रमदान गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाएगा।

अभियान के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन शिविरों में स्वास्थ्य जांच, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का वितरण और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

अभियान के सफल संचालन के लिए आम नागरिकों से भी स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। लोगों से सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया है।

अमिताभ कांत ने बताया PM मोदी के विजन का सफर, धोलेरा से UPI और स्टार्टअप इंडिया तक

मुझे उम्मीद नहीं थी कि भारत का पहला ग्रीन-फील्ड शहर बनाने का सपना कभी सच होगा। उस समय, मैं दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DMIDC) का CEO था और मुझे भारत के इंडस्ट्रियल शहरीकरण के अगले फेज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हर मुख्यमंत्री ने हमारे प्रपोजल को यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया था कि ऐसे प्रोजेक्ट के लिए 150 sq km जमीन देना बहुत रिस्की और कॉम्प्लेक्स है। फिर मैं गुजरात के मुख्यमंत्री के ऑफिस गया। श्री नरेंद्र मोदी ने मेरी बात सुनी, पांच मिनट सोचने के बाद कहा, “150 sq km बहुत कम है।”
उन्होंने मुझसे कहा, “अगर आपको सपने देखने हैं, तो बड़े सपने देखो”।

मुख्यमंत्री मोदी ने 750 sq km का प्रपोजल दिया और 2009 तक, गुजरात सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) एक्ट लागू कर दिया था और धोलेरा SIR को उसके मास्टर प्लान के साथ ऑफिशियली घोषित कर दिया था।

उस पहली बातचीत ने मुझे उनकी सोच का स्कोप दिखाया। उनका कैनवस बहुत बड़ा था। उन्होंने ज़मीन को रुकावट या किसी प्रोजेक्ट को अकेला काम नहीं माना। उन्होंने गुजरात और आगे चलकर पूरे भारत के लिए ग्रोथ का एक नया इंजन बनाने की क्षमता देखी। वह मेरे पूरे करियर में मिले सबसे दूर की सोचने वाले और आगे बढ़ने वाले नेताओं में से एक थे और हैं।

इसके कुछ समय बाद, मैंने दो ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट्स’ में हिस्सा लिया और एक डेवलप्ड, डाइनैमिक और वर्ल्ड-क्लास राज्य बनाने के उनके पक्के जुनून को देखा। वह गुजरात को भारत का सबसे एडवांस्ड राज्य बनाना चाहते थे और उन्होंने इस लक्ष्य को बहुत साफ़गोई और एनर्जी के साथ पूरा किया।

2014 तक, केंद्र में एक नई सरकार आ गई थी और मिस्टर मोदी मुख्यमंत्री से भारत के प्रधानमंत्री बन गए थे। डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (DIPP) के उस समय के सेक्रेटरी के तौर पर, मैं उन्हें प्रेजेंटेशन देने वाले पहले अधिकारियों में से एक था। वह वर्ल्ड बैंक की ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ रैंकिंग में भारत को 142वें स्थान पर देखकर निराश हुए और हमसे एक ही मिशन पर फोकस करने को कहा – भारत को अपने नागरिकों और बिज़नेस के लिए ज़्यादा आसान, सरल और ज़्यादा कुशल बनाना। इस तरह अलग-अलग मिनिस्ट्री और डिपार्टमेंट में कड़ी मेहनत शुरू हुई। हमने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) और पुराने नियमों, रेगुलेशन, प्रोसेस और एक्ट को खत्म करने पर काम किया। डिपार्टमेंट की सोच बदलना मुश्किल था, लेकिन हम कोशिश करते रहे और आखिरकार कामयाब हुए, क्योंकि प्रधानमंत्री ने ऊपर से कोशिश को लीड किया। भारत आखिरकार रैंकिंग में 79वें नंबर पर आ गया।

इसके तुरंत बाद, हमने प्रधानमंत्री के सामने ‘मेक इन इंडिया’ पर कई प्रेजेंटेशन दिए। वह बहुत उम्मीद लगाए हुए थे कि अगर भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग देश बनना है, तो उसे नौकरियां बनानी होंगी, खुशहाली को बढ़ावा देना होगा और हाई ग्रोथ रेट बनाए रखना होगा। इसी भरोसे के साथ ‘मेक इन इंडिया’ लॉन्च किया गया था। आज, वह विज़न मोबाइल फोन (भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है) और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), फार्मास्यूटिकल्स, डिफेंस इक्विपमेंट, सोलर मॉड्यूल, टेलीकम्युनिकेशन और इंजीनियरिंग गुड्स तक, अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी तक फैल गया है।

वह युवा भारतीयों को एंटरप्रेन्योर बनाने के लिए भी उतने ही पक्के इरादे वाले थे। जब ‘स्टार्टअप इंडिया’ मूवमेंट शुरू हुआ था, तब भारत में सिर्फ़ 356 जाने-माने स्टार्टअप थे। आज, यह संख्या तीन लाख को पार कर गई है। लॉन्च के समय, प्रधानमंत्री ने पूरा दिन युवा एंटरप्रेन्योर्स के साथ बातचीत करने, उनके आइडिया सुनने, उनकी चिंताओं को समझने और उन्हें पारंपरिक सीमाओं से आगे सोचने के लिए प्रोत्साहित करने में बिताया। वह तब से लगातार स्टार्टअप्स के साथ बातचीत कर रहे हैं, क्योंकि वह समझते हैं कि एंटरप्रेन्योरशिप का मकसद युवा भारतीयों को समस्याओं को हल करने, जोखिम लेने और अपनी शर्तों पर अपना भविष्य बनाने का आत्मविश्वास देना भी है।

PM मोदी के लिए, जो मुमकिन है उसकी कोई सीमा नहीं है—आसमान भी नहीं। वह टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे समझदार और समझदार लीडर्स में से एक हैं, जिनमें कटिंग-एज टेक्नोलॉजी को समझने और उनसे जुड़ने की अद्भुत क्षमता है। लीडिंग टेक्नोलॉजी में उनके विश्वास के साथ, हमेशा ऐसी पॉलिसी और इंस्टीट्यूशनल हालात बनाने की इच्छा रही है जो भारतीय एंटरप्रेन्योर्स को ग्रोथ के इन नए क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दें।

उनके नेतृत्व में, भारत ने एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, ड्रोन, रक्षा और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अपार अवसर पैदा किए हैं। चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 सहित भारत के अंतरिक्ष मिशनों की सफलता से एक जीवंत निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का उदय भी हुआ है। साथ ही, भारत का ‘भारत-एआई मिशन’ और ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ एआई और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं का विकास कर रहे हैं, जिससे भारत को तकनीकी मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और प्रतिभा मिल रही है। और फिर भी, जबकि प्रधान मंत्री एक प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य में विश्वास करते हैं, वे उस विरासत का भी सम्मान करते हैं जो उन्हें विरासत में मिली है।

‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ जैसी पहलों के माध्यम से स्थिरता के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि भारत का विकास और औद्योगिक विकास हमारे ग्रह की कीमत पर न हो। डिजिटल ट्रांसफ़र धीमे, महंगे थे और ज़्यादातर छोटे व्यापारियों और पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की पहुँच से बाहर थे। इस स्थिति को बदलने के लिए पूरे सिस्टम ने मिलकर एक सोची-समझी और ठोस कोशिश की। प्रधानमंत्री ने कम कैश वाली इकॉनमी पर ज़ोर दिया; रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मज़बूत किया; NPCI ने UPI डिज़ाइन और लॉन्च किया; और बैंक, फिनटेक कंपनियाँ, टेलीकॉम कंपनियाँ और व्यापारी एक साथ मिलकर एक खुला, इंटरऑपरेबल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए आए।

उन्होंने हमारी टीम को 100 दिनों में 100 डिजिटल मेले लगाने का चैलेंज दिया। उस बड़ी कोशिश ने UPI की ज़बरदस्त ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद की। फ़ाइनेंशियल ईयर 2016-17 में सिर्फ़ 17.8 मिलियन UPI ​​ट्रांज़ैक्शन से, यह सिस्टम अब हर साल 24,000 करोड़ से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन हैंडल करता है—ट्रांज़ैक्शन की संख्या में 13,000 गुना से ज़्यादा और वैल्यू में 4,000 गुना बढ़ोतरी। भारत ने सात साल में वह हासिल कर लिया जिसे पूरा करने में और 50 साल लगते। 2016 तक, मैंने भारत के टॉप पॉलिसी थिंक टैंक, NITI आयोग की लीडरशिप संभाल ली थी। हमारी एक कैबिनेट मीटिंग के दौरान, PM मोदी ने मुझे अलग से बुलाया और भारत के सबसे पिछड़े जिलों पर काम शुरू करने के लिए कहा। वह सबसे मुश्किल समस्याओं को पहले हल करना चाहते थे और यह पक्का करना चाहते थे कि विकास लाइन में आखिरी आदमी तक पहुंचे।
उसी बातचीत का नतीजा ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम’ लॉन्च होना था, जिसके ज़रिए मैंने रियल-टाइम डेटा, मापने लायक नतीजे और युवा अधिकारियों की काबिलियत पर प्रधानमंत्री का गहरा भरोसा देखा। उन्हें यकीन था कि इन जिलों को बदलने से भारत बदल जाएगा। उन्होंने ‘एस्पिरेशनल’ शब्द का भी सुझाव दिया, क्योंकि वह चाहते थे कि इन जिलों की पहचान इस बात से हो कि वे क्या बन सकते हैं, न कि इस बात से कि उनमें क्या कमी है।

नतीजों ने उनकी भविष्यवाणी को सही साबित कर दिया। जिलों ने हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, फाइनेंशियल इनक्लूजन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एरिया में अपनी परफॉर्मेंस में सुधार करना शुरू कर दिया। कई मायनों में, उन्होंने देश के सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले जिलों से भी बेहतर परफॉर्म किया। प्रधानमंत्री ने प्रोग्राम पर कड़ी नज़र रखी और इस बात पर ज़ोर दिया कि फोकस ग्राउंड लेवल पर असली नतीजों पर रहे। उनके साथ काम करते हुए मैंने जो सबसे बड़ा सबक सीखा, वह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में उनकी रिव्यू मीटिंग्स से मिला। नीति आयोग से हमेशा उम्मीद की जाती थी कि वह अपना होमवर्क अच्छी तरह से करे, अलग-अलग मिनिस्ट्रीज़ के परफॉर्मेंस को एनालाइज़ करे और डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दे। प्रधानमंत्री हमेशा ध्यान से सुनते थे, जानकारी को गहराई से समझते थे और फिर कई कदम आगे सोचते थे। उनके सवाल सीधे मामले की जड़ तक जाते थे। वह जानना चाहते थे कि कोई प्रोजेक्ट क्यों रुका हुआ है, इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, तुरंत क्या किया जा सकता है और ऐसी समस्या को भविष्य में या कहीं और दोबारा होने से कैसे रोका जा सकता है।

PRAGATI प्लेटफॉर्म पर चीफ सेक्रेटरीज़ के साथ उनके वर्चुअल रिव्यू और ‘PM गति शक्ति’ के ज़रिए इंटीग्रेटेड, डेटा-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर के नतीजे में, प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से मंज़ूरी मिली, ज़मीन अधिग्रहण के मुद्दे हल हुए और असली संकट बनने से पहले ही जोखिमों की पहचान हो गई। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के साथ मिलकर, भारत ने इस मोमेंटम को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के प्रोएक्टिव विस्तार में बदल दिया। इतने सालों में, मुझे शायद किसी भी दूसरे अधिकारी की तुलना में उनके सामने ज़्यादा प्रेजेंटेशन देने का मौका मिला है।

हर बातचीत में, मैंने बौद्धिक गहराई, अनुशासन और जिज्ञासा का एक ही अनोखा मेल देखा है। मैंने कुछ ऐसा भी देखा है जिस पर बहुत कम चर्चा होती है—प्रधानमंत्री एक असाधारण श्रोता हैं। वह किसी भी मीटिंग में दूसरों को चुप कराए बिना अपना प्रभाव और कंट्रोल बनाए रख सकते हैं। मीटिंग में, वह अपना नज़रिया सामने रखने से पहले सभी के विचारों को गहराई से समझते हैं। भारत के G20 शेरपा के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने भी उनका यही तरीका अपनाने की कोशिश की।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट पर कोऑर्डिनेशन कमेटी को लेकर ज्ञानी रघबीर सिंह का बड़ा बयान

अमृतसर / सत्ता संदेश

‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) एक्ट 2026’ को लेकर पंजाब सरकार द्वारा गठित 7 सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कमेटी में शामिल किए जाने की जानकारी सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं मिली, बल्कि मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी मिली है।

मीडिया से बातचीत में ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कमेटी से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र, फाइल या एजेंडा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से कमेटी, उसके एजेंडे और काम करने के तरीके के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक कमेटी में अपनी भूमिका को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही वह इस मामले में अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) एक्ट को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाए गए एतराजों को दूर करने के उद्देश्य से कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाना बातचीत की दिशा में एक कदम हो सकता है। उन्होंने सभी पक्षों के साथ आपसी समन्वय और बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।

ज्ञानी रघबीर सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और समयबद्ध जांच की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने उम्रकैद तक की सजा के प्रावधान की बात करते हुए कहा कि कानून इतना सख्त होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति ऐसी घटना को अंजाम देने से पहले कई बार सोचे।

उन्होंने बेअदबी के मामलों की जांच कम से कम DSP रैंक के अधिकारी की निगरानी में करवाने और जांच पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर अदालत में चालान पेश करने की मांग की। उनके मुताबिक, समयबद्ध जांच और कार्रवाई से मामलों को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने में मदद मिल सकती है।

ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि कानून या उसमें संशोधन से जुड़े किसी भी कदम में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाए गए एतराजों, सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले में आपसी बातचीत और आम सहमति के जरिए आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ड्यूटी पर निकला 21 वर्षीय युवक हादसे का शिकार, बोलेरो की टक्कर से मौके पर मौत

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब में रोपड़ रोड पर गांव शेरपुर के पास गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान गांव शेरपुर निवासी मनजिंदर सिंह हैप्पी के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, मनजिंदर सिंह गांव हंबोवाल बेट स्थित एक पेट्रोल पंप पर कर्मचारी के तौर पर काम करता था। वह रोजाना की तरह गुरुवार सुबह मोटरसाइकिल पर सवार होकर ड्यूटी के लिए निकला था। बताया जा रहा है कि घर से कुछ ही दूरी पर शेरपुर-फलाही चौक के पास सामने से आ रही एक बोलेरो गाड़ी ने उसकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो युवक को काफी दूर तक घसीटती हुई ले गई। हादसे में मनजिंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद बोलेरो सवार वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही माछीवाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस द्वारा मृतक के भाई इंदर प्रताप सिंह के बयानों के आधार पर बोलेरो चालक के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

बताया जा रहा है कि मनजिंदर सिंह गरीब परिवार से संबंध रखता था और अभी अविवाहित था। हादसे की खबर गांव में पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई।

टांडा उड़मुड़ में बिजली कटों के विरोध में अकाली दल का प्रदर्शन, SDM कार्यालय के बाहर जताया रोष

होशियारपुर / सत्ता संदेश

लंबे समय से जारी बिजली कटों और बिजली सप्लाई में बार-बार आ रही रुकावटों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (बादल) की ओर से आज टांडा उड़मुड़ में SDM कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व शिरोमणि अकाली दल के नेशनल जनरल सेक्रेटरी एवं हलका इंचार्ज सरदार अरविंदर सिंह रसूलपुर कर रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिजली की अनियमित सप्लाई तथा कई-कई घंटों तक लगने वाले बिजली कटों के खिलाफ रोष जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक बिजली गुल रहने के कारण आम लोगों के साथ-साथ किसानों, दुकानदारों, व्यापारियों और बिजनेसमैन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अकाली नेताओं ने कहा कि लगातार और सुचारू बिजली सप्लाई आम लोगों की बुनियादी जरूरत है। बिजली कटों के कारण खेती से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का कामकाज भी बाधित हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और संबंधित बिजली विभाग से बिजली सप्लाई व्यवस्था को जल्द सुचारू करने तथा लंबे समय से आ रही समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की। अकाली दल नेताओं ने कहा कि लोगों को नियमित बिजली उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित विभाग को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।