खेलो इंडिया योजना 2026-31 का बड़ा विस्तार, 36,441 करोड़ रुपये का बजट, 27 हजार से अधिक एथलीटों को मिलेगा प्रशिक्षण
जीरकपुर / सत्ता संदेश
खेलो इंडिया योजना के 2026-27 से 2030-31 तक के नए चरण को बड़े स्तर पर विस्तार दिया गया है। केंद्र सरकार ने संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी हुई सहायता के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार यह राशि पिछली खेलो इंडिया योजना के मुकाबले करीब आठ गुना अधिक है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों के लिए एक व्यवस्थित रास्ता तैयार करना है। योजना को 2036 ओलंपिक के विजन और ‘खेलो भारत नीति 2025’ के उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस योजना के तहत 30 प्राथमिकता वाले खेल विधाओं में 9,000 खेलो इंडिया एथलीट (KIA) और 18,000 इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट (E-KIA) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित खिलाड़ियों को कोचिंग, आवास एवं डाइट, खेल किट, यात्रा, चिकित्सा सहायता, शिक्षा और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

भारतीय खेल प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय जीरकपुर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान क्षेत्रीय निदेशक (प्रभारी) शैलेन्द्र कुमार ने योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का जोर गांवों और छोटे शहरों से कम उम्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आधुनिक खेल विज्ञान, एआई आधारित प्रदर्शन विश्लेषण, बेहतर कोचिंग और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।
खेल अवसंरचना पर विशेष जोर
नई योजना में खेल अवसंरचना को तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित करने की व्यवस्था की गई है। इसमें मेडल रणनीति के लिए अवसंरचना, रणनीतिक खेल परिसंपत्तियों का सुदृढ़ीकरण और राज्यों की मांग के आधार पर खेल अवसंरचना विकास के लिए राज्य कार्य योजना शामिल है।
18 प्राथमिकता वाले खेलों में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। वहीं 30 ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की विधाओं में मौजूदा खेल सुविधाओं की मैपिंग कर कमियों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और जरूरत के अनुसार नई सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
राज्य कार्य योजना के तहत सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय भागीदारी 60:40, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात रखा गया है।
स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर बढ़ेंगी प्रतियोगिताएं
खेलो इंडिया युवा, विश्वविद्यालय, पैरा, शीतकालीन, बीच, जनजातीय और जल खेलों के आयोजनों के साथ अस्मिता महिला लीग को भी विस्तार दिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल, विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय, जोनल और खेल-विशिष्ट लीगों को मजबूत किया जाएगा।

शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप स्कूल और यूनिवर्सिटी लीग तथा विभिन्न खेलों की क्षेत्रीय लीग शुरू करने की योजना है। सीमावर्ती और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को खेलों की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
प्रतिभा पहचान के लिए नए प्रशिक्षण केंद्र
खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया एथलीट’ और ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट’ की श्रेणियों में वर्गीकृत कर वित्तीय और तकनीकी सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
खेल और स्कूली शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय के लिए खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV) और खेलो इंडिया फीडर स्कूल (KIFS) स्थापित किए जाएंगे। प्रतिभा चयन के लिए जोनल और राष्ट्रीय स्तर पर खेल-विशिष्ट समितियों के माध्यम से वैज्ञानिक परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
साई क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अंतर्गत वर्तमान में 2 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 6 साई ट्रेनिंग सेंटर, 46 खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियां, 6 खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 152 से अधिक खेलो इंडिया सेंटर संचालित होने की जानकारी दी गई। संशोधित योजना के बाद इस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
कोचों के लिए राष्ट्रीय मानक
योजना में कोच और सहायक स्टाफ के प्रशिक्षण तथा मानकीकरण पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड (NCAB) गठित किया जा रहा है। भारतीय खेल प्राधिकरण के तहत यह निकाय कोचों के लिए L1 से L4 तक राष्ट्रीय मानक, डिजिटल कोच रजिस्ट्री और सर्टिफिकेशन प्रणाली विकसित करेगा।

‘खेल सेतु’ से डिजिटल होगी खिलाड़ी की पूरी यात्रा
खेलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के सहयोग से एआई-संचालित ‘खेल सेतु’ डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसमें यूनिफाइड एथलीट आईडी, टैलेंट स्काउटिंग मेट्रिक्स, गेम्स मैनेजमेंट और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
योजना के तहत 10 खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालयों, 500 फीडर स्कूलों और 2,500 खेलो इंडिया केंद्रों के माध्यम से वैज्ञानिक और तकनीक आधारित प्रतिभा पहचान प्रणाली विकसित करने का लक्ष्य है।
नई तकनीकी व्यवस्था में एआई और वीडियो आधारित टैलेंट स्काउटिंग, IoT वियरेबल्स, खेल विज्ञान, एआई प्रदर्शन विश्लेषण, प्रतियोगिता प्रबंधन, खेल शिक्षा, करियर के बाद सहायता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।
फिट इंडिया को भी मिलेगा विस्तार
फिट इंडिया मूवमेंट के तहत ‘फिटनेस की डोज, आधा घंटा रोज’ जैसे अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है। नमो फिट इंडिया क्लब्स, संडे ऑन साइकिल, फ्रीडम रन और नशा मुक्त भारत अभियान के साथ समन्वय कर राष्ट्रीय फिटनेस कैलेंडर को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा सामुदायिक फिटनेस हब, योग, पारंपरिक और स्वदेशी खेलों तथा महिलाओं और दिव्यांगजनों की खेलों में भागीदारी पर भी ध्यान दिया जाएगा।
संशोधित खेलो इंडिया योजना का व्यापक उद्देश्य देश में ऐसा खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रतिभाशाली खिलाड़ी को शुरुआती पहचान से लेकर प्रशिक्षण, प्रतियोगिता और उच्च प्रदर्शन के स्तर तक लगातार अवसर और सहायता मिल सके।

