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मोदी डॉक्ट्रिन: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत बना स्थिरता का केंद्र, हरीश साल्वे ने गिनाए कारण

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर अपने एक लेख में कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत स्थिरता और आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक निरंतरता, स्पष्ट राष्ट्रीय दिशा और ऐसी विदेश नीति को प्रमुख कारण बताया, जो बाहरी दबाव के बजाय भारतीय हितों पर आधारित होने का दावा करती है।

साल्वे ने अपने लेख ‘Modi Doctrine: Stability Amid Disorder’ में दुनिया में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आए बड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि महामारी, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव, बदलती वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में बदलाव ने पुरानी वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दी है। उनके अनुसार, ऐसे दौर में भारत ने राजनीतिक स्थिरता और विकास की निरंतरता बनाए रखी है।

साल्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के एक दशक से अधिक लंबे नेतृत्व की प्रमुख विशेषताओं में राजनीतिक निरंतरता और देश की विकास दिशा को लेकर स्पष्टता शामिल है। उन्होंने ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और इटली जैसे देशों में नेतृत्व परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में लंबे समय तक एक ही राजनीतिक नेतृत्व के बने रहने से नीतियों और दीर्घकालिक योजनाओं को निरंतरता मिली।

लेख में कहा गया है कि भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रणनीतिक स्वायत्तता है। साल्वे ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों, अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी, क्वाड और ब्रिक्स में भागीदारी तथा इजराइल, खाड़ी देशों और ईरान के साथ भारत के अलग-अलग स्तर के संबंधों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता को दर्शाता है।

महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था और सुधारों का उल्लेख

साल्वे ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की आर्थिक नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पैकेज, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) और MSME क्षेत्र के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना जैसी पहलों को आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने और घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करने से जोड़ा।

लेख में भारत के बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान और वैक्सीन मैत्री का भी जिक्र किया गया है। साल्वे के अनुसार, संकट से निपटने के साथ-साथ भारत ने महामारी के बाद आर्थिक सुधार और संरचनात्मक बदलावों को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया।

वैश्विक निवेशकों के भरोसे का भी जिक्र

लेख में भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आकलनों का भी उल्लेख किया गया है। अगस्त 2025 में S&P Global Ratings ने भारत की दीर्घकालिक संप्रभु क्रेडिट रेटिंग BBB- से बढ़ाकर BBB की थी। एजेंसी ने आर्थिक मजबूती, राजकोषीय समेकन और सार्वजनिक खर्च की गुणवत्ता जैसे कारकों का उल्लेख किया था। यह 18 वर्षों में S&P की ओर से भारत की पहली संप्रभु रेटिंग वृद्धि थी।

वहीं, सितंबर 2026 में Japan Credit Rating Agency (JCR) ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया और आउटलुक स्थिर रखा। JCR ने मजबूत आर्थिक विकास, बेहतर वित्तीय प्रणाली और आर्थिक नीतियों को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया।

भविष्य की अर्थव्यवस्था पर जोर

हरीश साल्वे ने सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की दीर्घकालिक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक और नीतिगत निरंतरता ऐसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करती है, जिनके परिणाम कई वर्षों या दशकों बाद सामने आते हैं।

उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को भारत की भविष्य की औद्योगिक रणनीति से जोड़ा।

लेख के अंत में साल्वे ने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, बदलती वैश्विक व्यवस्था और आर्थिक अनिश्चितताओं जैसे कई संकटों से गुजर रही है। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में भारत की राजनीतिक स्थिरता और विकास की दिशा देश के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में सामने आती है। उन्होंने इसे ‘मोदी डॉक्ट्रिन’ से जोड़ते हुए कहा कि यह भारत को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता प्रदान करता है।