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PGI Arthroplasty Conference 2026: PGI चंडीगढ़ में जोड़ प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीकों पर मंथन

PGI चंडीगढ़ में PGI Arthroplasty Conference 2026 का आयोजन, रोबोटिक्स, नेविगेशन, AI, पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट और आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीकों पर विशेषज्ञों की चर्चा।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग की ओर से Arthroplasty Society of Tricity के तत्वावधान में वार्षिक PGI Arthroplasty Conference 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। सम्मेलन का विषय “Mastering the Precision and Newer Techniques in Joint Replacement” रखा गया है। सम्मेलन में जोड़ प्रत्यारोपण में सटीकता, व्यक्तिगत उपचार योजना, नेविगेशन, रोबोटिक्स और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जा रही है।

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बीच मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण, करुणा, ईमानदारी और नैतिकता के महत्व पर जोर दिया।

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि चिकित्सा में तकनीक डॉक्टरों की सहायता कर सकती है, लेकिन मानवीय अनुभव, संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में मरीज को हमेशा केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मरीज चिकित्सा पेशेवरों के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी और पूंजी हैं।

उन्होंने विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रो. लाल ने कहा कि जब किसी मरीज को समग्र उपचार की आवश्यकता होती है, तब चिकित्सा को अलग-अलग विशेषज्ञताओं के खांचों में सीमित नहीं किया जा सकता। न्यूरोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और अन्य विशेषज्ञताओं के बीच सहयोग मरीज के बेहतर उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

AI और आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा कि तकनीक डॉक्टरों की मदद करने वाली होनी चाहिए, न कि चिकित्सकीय अनुभव और मानवीय निर्णय का विकल्प। उन्होंने कहा, “AI मेरी मदद कर सकता है और यह बहुत अच्छा तथा शानदार हो सकता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह आपके हाथों के अनुभव का स्थान ले सकता है।”

प्रो. लाल ने चिकित्सा के मानवीय पक्ष को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक के विकास के साथ करुणा, संवेदनशीलता, मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का महत्व और बढ़ जाता है।

युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए उन्होंने विशेषज्ञता, नैदानिक कौशल और ईमानदारी को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे में लंबे समय तक सफलता का आधार मजबूत कौशल और मरीजों का विश्वास होना चाहिए। उन्होंने चिकित्सकों से अपने क्लिनिकल स्किल्स को मजबूत करने और मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का आह्वान किया।

प्रो. लाल ने कहा कि चिकित्सा एक प्रतिष्ठित और सेवा-प्रधान पेशा है तथा स्वास्थ्य पेशेवरों की समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मरीजों द्वारा डॉक्टरों पर जताए गए विश्वास को बनाए रखना आवश्यक है और करुणा, ईमानदारी तथा नैतिकता के स्तर पर किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

आर्थोप्लास्टी में आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका

इस अवसर पर प्रो. विजय जी. गोनी, विभागाध्यक्ष, ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने आधुनिक आर्थोप्लास्टी में हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मरीज के उचित चयन, व्यक्तिगत उपचार योजना, सर्जिकल सटीकता और बेहतर रिकवरी में आधुनिक तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया।

प्रो. गोनी ने बताया कि ऑर्थोपेडिक सर्जरी का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है। प्राथमिक और जटिल प्रक्रियाओं में नेविगेशन, रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, उपचार की प्रक्रिया में मरीज को केंद्र में रखना मूल सिद्धांत बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में देश के विभिन्न संस्थानों और अलग-अलग विशेषज्ञताओं के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है, जहां वे अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जटिल मामलों पर चर्चा कर रहे हैं और स्थापित उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों, युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना है।

लाइव सर्जरी से कैडेवर वर्कशॉप तक व्यापक वैज्ञानिक कार्यक्रम

Annual PGI Arthroplasty Conference 2026 में तीसरा PGI Arthroplasty Course, लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन, कैडेवरिक वर्कशॉप, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के व्याख्यान और केस आधारित चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

वैज्ञानिक सत्रों में टोटल नी आर्थोप्लास्टी, पर्सनलाइज्ड अलाइनमेंट, नेविगेशन, रोबोटिक्स, जटिल प्राथमिक प्रक्रियाएं, हिप रिप्लेसमेंट में Direct Anterior Approach (DAA) और Unicompartmental Knee Arthroplasty (UKA) जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के तहत कैडेवर और सॉ-बोन आधारित प्रशिक्षण के साथ मैनुअल एवं रोबोटिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सम्मेलन से पहले आयोजित कैडेवर वर्कशॉप में जटिल और प्राथमिक सर्जरी से संबंधित प्रक्रियाओं तथा रोबोटिक्स का व्यावहारिक अनुभव भी प्रतिभागियों को दिया गया।

सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. दीपक ने देशभर के प्रमुख संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों तथा ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान से आए अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ विशेषज्ञों, युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं की भागीदारी ने सम्मेलन को जोड़ प्रत्यारोपण के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में चर्चा, सीखने और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनाया है।

सम्मेलन में मरीज के उचित चयन, व्यक्तिगत उपचार योजना, सर्जिकल सटीकता, साक्ष्य-आधारित निर्णय, बेहतर रिकवरी और लंबे समय तक मरीजों के बेहतर परिणामों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।