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Ludhiana News: MLA मदन लाल बग्गा की अगुवाई में सखी सम्मान समारोह, 2000 महिलाओं ने लिया हिस्सा

लुधियाना नॉर्थ में MLA मदन लाल बग्गा की अगुवाई में सखी सम्मान समारोह आयोजित हुआ। डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने सखियों को सम्मानित किया, करीब 2000 महिलाएं रहीं मौजूद।

लुधियाना / सत्ता संदेश

विधानसभा हलका लुधियाना नॉर्थ में मां-बेटियां सत्कार योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और योजना के तहत घर-घर जाकर फॉर्म भरने वाली महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने के लिए ‘सखी सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। समारोह MLA चौधरी मदन लाल बग्गा की अगुवाई में बेंसन पैलेस में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान विशेष रूप से शामिल हुईं। इस दौरान योजना के लिए सेवाएं देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।

MLA मदन लाल बग्गा ने कहा कि योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सखियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं ने जरूरतमंद महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए घर-घर जाकर मेहनत की और लगातार सेवाएं दीं।

समारोह के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने सखियों को सूट भेंट कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने सरकार की योजना को लेकर अपने विचार भी साझा किए। कुछ महिलाओं ने दावा किया कि जिन गारंटियों को विपक्षी दलों द्वारा लेकर सवाल उठाए जाते थे, उन्हें पंजाब सरकार ने पूरा किया है। कार्यक्रम के दौरान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दावे किए गए।

समारोह में आम आदमी पार्टी पंजाब महिला विंग की स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा, लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर सहित करीब 2000 महिलाएं मौजूद रहीं।

हालिया रिपोर्टों में भी पंजाब के अलग-अलग इलाकों में ‘मावां-धियां सत्कार योजना’ से जुड़ी महिला सखियों के सम्मान समारोह आयोजित होने की जानकारी सामने आई है।

Sahnewal Drone Show: 500 ड्रोन से आसमान में दिखा गुरु रविदास जी का जीवन और संदेश

साहनेवाल में गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित 500 ड्रोन शो आयोजित हुआ। आसमान में गुरु जी के जीवन, दर्शन और बराबरी व मानवता के संदेश को प्रदर्शित किया गया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार की ओर से शुक्रवार शाम साहनेवाल के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल (बॉयज) के ग्राउंड में भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया। 500 ड्रोन की मदद से आसमान में गुरु रविदास जी के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं से जुड़े विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिन्हें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ देखा।

ड्रोन शो के दौरान तकनीक और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिला। आसमान में ड्रोन के माध्यम से गुरु रविदास जी के बराबरी, भाईचारे, दया, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के संदेश को प्रदर्शित किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे आसमान ने मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि यह ड्रोन शो श्री गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक अनोखी पहल है। उन्होंने कहा कि यह केवल मनोरंजन के लिए आयोजित शो नहीं है, बल्कि गुरु रविदास जी के बराबरी और मानव सम्मान के संदेश को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का माध्यम है।

मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मना रही है। उन्होंने बताया कि इसके तहत राज्यभर में 92 ड्रोन शो आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवा पीढ़ी को गुरु रविदास जी के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं से परिचित करवाना है।

उन्होंने बताया कि प्रकाश पर्व समारोहों के लिए पंजाब सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपये रिजर्व किए गए हैं। इसके अलावा गुरु रविदास जी के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित डॉक्यूमेंट्री शो 13,000 गांवों में दिखाए जा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सेमिनार भी आयोजित किए जा रहे हैं।

हरदीप सिंह मुंडियां ने संगत से अपील की कि गुरु रविदास जी के ऐतिहासिक प्रकाश पर्व को श्रद्धा और एकता के साथ मनाया जाए तथा उनके सार्वभौमिक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।

कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा श्री रेरू साहिब पातशाही दसवीं नंदपुर, साहनेवाल के हजूरी रागी भाई दिलबर सिंह ने कीर्तन किया। वहीं गुरुद्वारा टिब्बी साहिब, बाघोर वालिया से जुड़े बाबा बेअंत सिंह ने रूहानी शब्दों के माध्यम से संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं से जुड़ने का संदेश दिया।

गौरतलब है कि साहनेवाल के बाद 19 सितंबर को PAU लुधियाना के एथलेटिक/फुटबॉल ग्राउंड, 20 सितंबर को दाखा स्कूल ग्राउंड, 21 सितंबर को अनाज मंडी रायकोट और 22 सितंबर को नई अनाज मंडी जगराओं में ड्रोन शो आयोजित किए जाएंगे।

इस अवसर पर लुधियाना ईस्ट की सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट जसलीन कौर भुल्लर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

Punjab Police ने किशोर लड़कियों के लिए शुरू किया सशक्तिकरण अभियान, Ludhiana में हुई बैठक

पंजाब पुलिस ने 12-18 साल की किशोर लड़कियों के लिए सशक्तिकरण और जागरूकता अभियान शुरू किया। लुधियाना में हुई बैठक में स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और विकास पर चर्चा हुई।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब पुलिस ने 12 से 18 वर्ष की किशोर लड़कियों के लिए व्यापक सशक्तिकरण और जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य किशोरियों की सेहत, सुरक्षा, शिक्षा और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है। अभियान के तहत विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और किशोर लड़कियों के खिलाफ अपराधों का जोखिम अधिक है।

इस संबंध में लुधियाना पुलिस लाइंस के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक कोऑर्डिनेशन मीटिंग आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (Special DGP), कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (CAD), गुरप्रीत कौर देव ने की। बैठक को विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

बैठक में प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों और उन इलाकों की पहचान करने पर चर्चा हुई, जहां किशोर लड़कियों के खिलाफ अपराधों का जोखिम अधिक है। ऐसे क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार विशेष जागरूकता और सहायता गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया गया।

स्पेशल DGP गुरप्रीत कौर देव ने अभियान के विजन के बारे में बताया कि यह एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने की दिशा में प्रयास है, जो जागरूक, आत्मविश्वासी और सक्षम हो तथा सुरक्षित निर्णय लेने और समाज में सकारात्मक योगदान देने में सक्षम बने।

अभियान के तहत शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, माहवारी के दौरान स्वच्छता, कानूनी एवं सुरक्षा संबंधी जागरूकता, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, भावनात्मक मजबूती, नेतृत्व क्षमता, करियर मार्गदर्शन, संवाद कौशल और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा।

यह पहल केवल स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों, आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासी परिवारों की किशोरियों, दिव्यांग लड़कियों तथा बाल मजदूरी या कम उम्र में विवाह के जोखिम का सामना कर रही किशोरियों तक भी पहुंच बनाने का प्रयास किया जाएगा।

जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए सीधे स्वास्थ्य जांच, वोकेशनल ट्रेनिंग सेशन, इंटरैक्टिव फ्लायर्स, नुक्कड़ नाटक और पंजाबी, हिंदी तथा अंग्रेजी भाषाओं में तैयार किए गए छोटे वीडियो एवं सोशल मीडिया अभियानों का इस्तेमाल किया जाएगा।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, अभिभावकों, शिक्षकों, गैर-सरकारी संगठनों और समुदाय के नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किशोर लड़कियों तक जरूरी जानकारी और सहायता व्यापक स्तर पर पहुंचाई जा सके।

कोऑर्डिनेशन मीटिंग में लुधियाना के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (इन्वेस्टिगेशन-कम-डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी पुलिसिंग ऑफिसर) रूपिंदर भट्टी, सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, DMC लुधियाना के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनुराग चौधरी, लुधियाना की डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि, शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल अमनदीप सिंह, ‘डू गुड फाउंडेशन’ से जैस्मीन पाहवा और IDRF, चंडीगढ़ के रिसर्चर्स मौजूद रहे।

हरदीप सिंह मुंडियन ने गांव मुंडियन से ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान किया लॉन्च

साहनेवाल के गांव मुंडियन से कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान लॉन्च किया। उन्होंने पंचायतों और ग्रामीणों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

साहनेवाल / लुधियाना / सत्ता संदेश

साहनेवाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पंजाब के जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने गांव मुंडियन से ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखने के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी को जरूरी बताया।

अभियान के तहत कैबिनेट मंत्री ने लुधियाना जिले की ग्राम पंचायतों से सफाई गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने और हर घर तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का आधार है और गांवों को साफ रखने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

हरदीप सिंह मुंडियन ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास सफाई रखने, कचरे का उचित निपटान करने और स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतों को अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ना समय की जरूरत है। पंचायतों और ग्रामीणों के सहयोग से गांवों को साफ, स्वस्थ और सुंदर बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस मौके पर जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के डिवीजनल ऑफिस नंबर-2 के सोशल एवं IEC विंग की ओर से स्वच्छता से संबंधित विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को साफ-सफाई, स्वच्छ पानी के इस्तेमाल, स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अभियान के दौरान आयोजित होने वाली सफाई गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें और सामूहिक प्रयासों के जरिए अपने गांवों को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने में योगदान दें।

‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का उद्देश्य लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज के विभिन्न वर्गों को स्वच्छता गतिविधियों से जोड़ना है। अभियान की सफलता के लिए ग्राम पंचायतों, विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों की संयुक्त भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेश में फंसे पंजाब के दो और नौजवान लौटे वतन, संत सीचेवाल की पहल से हुई सुरक्षित वापसी

सुल्तानपुर लोधी / सत्ता संदेश

विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के प्रयासों के तहत संत बलबीर सिंह सीचेवाल की पहल से पंजाब के दो और नौजवान सुरक्षित भारत लौट आए हैं। तरनतारन जिले के राजिंदरपाल सिंह करीब तीन साल बाद 31 अगस्त 2026 को अपने घर पहुंचे, जबकि अमृतसर के जसबीर सिंह करीब आठ महीने विदेश में फंसे रहने के बाद 3 सितंबर 2026 को परिवार के पास लौटे।

तरनतारन के राजिंदरपाल सिंह के परिवार ने 8 दिसंबर को संत सीचेवाल से संपर्क कर अपने बेटे की भारत वापसी में मदद की अपील की थी। परिवार के मुताबिक, राजिंदरपाल अपनी सजा पूरी करने के बावजूद लंबे समय तक भारत नहीं लौट सका। परिवार का कहना है कि एक बार उसकी वापसी लगभग तय हो गई थी, लेकिन एयरपोर्ट पर दस्तावेजों को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया।

इसके बाद परिवार ने उसकी वापसी के लिए लगातार प्रयास किए। परिवार के अनुसार, इस दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी बीच परिवार में एक बच्चे की मौत हो गई, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। परिवार के मुताबिक, राजिंदरपाल बुजुर्ग माता-पिता का आखिरी सहारा था।

भारत लौटने के बाद निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे राजिंदरपाल सिंह ने विदेश में बिताए समय के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उनके साथ जा रहे ट्रकों के सामान में कथित तौर पर कुछ बरामद हुआ था। राजिंदरपाल का दावा है कि वह बेगुनाह था, लेकिन उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि जेल से सजा पूरी करने के बाद भी दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियों के कारण उनकी भारत वापसी नहीं हो सकी।

राजिंदरपाल ने बताया कि जेल के हालात काफी मुश्किल थे। लंबे समय तक भारत नहीं लौट पाने के कारण उन्हें यह डर सताने लगा था कि शायद वह कभी अपने परिवार के पास वापस नहीं पहुंच पाएंगे। उन्होंने भारत में अपने भाई की मौत की खबर को अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल बताया। राजिंदरपाल ने दावा किया कि उनकी तरह कई अन्य भारतीय भी विदेशों में फंसे हुए हैं और उन्हें अपनी वापसी के लिए मदद का इंतजार है।

राजिंदरपाल की भारत वापसी के लिए संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से भारतीय विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क और समन्वय किया गया। लंबे प्रयासों के बाद राजिंदरपाल की भारत वापसी संभव हो सकी।

राजिंदरपाल की मां ने नम आंखों से संत सीचेवाल का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की वापसी के लिए संत सीचेवाल ने लगातार प्रयास किए। परिवार ने कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो उनके बेटे की वापसी और भी मुश्किल हो सकती थी।

इसी तरह अमृतसर निवासी जसबीर सिंह भी करीब आठ महीने विदेश में फंसे रहने के बाद भारत लौट आए। जसबीर सिंह के परिवार ने 7 जनवरी को संत सीचेवाल से संपर्क कर उनकी वापसी में मदद की अपील की थी। परिवार के मुताबिक, लगातार प्रयासों के बाद जसबीर सिंह 3 सितंबर 2026 को अपने वतन लौट आया।

संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों से अपील की कि विदेश जाने से पहले एजेंट या बिचौलिए की पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। उन्होंने कहा कि विदेश जाने की जल्दबाजी में ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिससे युवाओं और उनके परिवारों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़े।

PAU किसान मेले में CM भगवंत मान का बड़ा बयान- पंजाब के पानी से कोई समझौता नहीं, नहरों से 88% सिंचाई का दावा
  • हम किसानों के हितों की रक्षा और खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब के पास एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है और किसी को पानी की एक बूंद देने का सवाल ही पैदा नहीं होता: सीएम मान
  • किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किमी पाइपें बिछाई गईं, वर्ष के अंत तक और 7,000 किमी पाइपें बिछाई जाएंगी: CM मान
  • फसल का एक-एक दाना खरीदा और समय पर उठाया जाएगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • केंद्र सरकार को विभिन्न फसलों के लिए लाभकारी एम.एस.पी. सुनिश्चित करनी चाहिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पी.ए.यू. में किसान मेला वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों के प्रति जागरूकता पैदा करेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार बीज अनुसंधान के लिए पी.ए.यू. को फंड की कोई कमी नहीं आने देगी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 1,300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • पंजाब सरकार देश में गन्ने का सबसे अधिक 416 रुपये प्रति क्विंटल भाव दे रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • यदि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करे तो पंजाब के किसान पराली जलाना पूरी तरह बंद कर देंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
  • सीएम भगवंत सिंह मान ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘किसान मेले’ को किया संबोधित

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में आयोजित किसान मेले में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों के हितों, कृषि को आधुनिक बनाने और राज्य के जल संसाधनों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और राज्य के बहुमूल्य जल संसाधनों के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

किसान मेले में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने में अहम योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में नहरी सिंचाई के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब सिंचाई के लिए करीब 22 प्रतिशत नहरी पानी का इस्तेमाल हो रहा था, जो अब 88 प्रतिशत से अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई जा चुकी हैं और वर्ष के अंत तक करीब 7,000 किलोमीटर और पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है।

भगवंत मान ने दावा किया कि नहरी नेटवर्क और जल रिचार्ज के प्रयासों के चलते राज्य के कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने किसानों से पानी की हर बूंद बचाने और कृषि में पानी के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के बीज अनुसंधान को मजबूत कर रही है, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सकें। उन्होंने राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 1,300 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पंजाब में गन्ने का भाव 416 रुपये प्रति क्विंटल है, जिसे उन्होंने देश में सबसे अधिक बताया।

कृषि विविधीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से वैकल्पिक फसलों के लिए लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को धान के अलावा दूसरी फसलों की ओर बढ़ने में प्रोत्साहन मिलेगा और पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

पराली प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पराली के खेत के अंदर और खेत के बाहर प्रबंधन के लिए उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र से किसानों को वित्तीय सहायता देने की भी मांग की।

आगामी खरीफ खरीद सीजन को लेकर भगवंत मान ने कहा कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा और समय पर उठाया जाएगा। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात भी कही।

मुख्यमंत्री ने किसानों से कृषि में वैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान मेले का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।

किसान मेले के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। PAU में आयोजित यह दो दिवसीय किसान मेला 18 और 19 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें किसानों और कृषि विशेषज्ञों की भागीदारी है।

उन्नत पैकेजिंग का दृष्टिकोण: न्यूनतम निवेश में अधिकतम मूल्य हासिल करना

भारत इस समय सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। चिप डिजाइन और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत को दुनिया भर में पहचान मिली है। अब उसके पास उन्नत पैकेजिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनने और आगे चलकर विश्वस्तरीय ‘सिस्टम्स फाउंड्री’ के रूप में विकसित होने का अनूठा अवसर है। उन्नत पैकेजिंग और कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान देकर भारत 21वीं सदी की सेमीकंडक्टर आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकता है।

मेरे विचार में, उन्नत पैकेजिंग सेमीकंडक्टर उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक तकनीकों में से एक बनकर उभरी है। इसकी मदद से चिप, चिपलेट, मेमोरी, फोटोनिक्स, सेंसर, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) और बिजली से जुड़े उपकरणों को एक साथ जोड़कर अत्याधुनिक और उपयोगी सिस्टम तैयार किए जा सकते हैं।

ये सिस्टम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, संचार, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को ताकत देते हैं।

जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मांग बढ़ रही है, उन्नत पैकेजिंग ऐसी महत्वपूर्ण तकनीक बनती जा रही है, जो सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हो रहे नवाचार को वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों और सेवाओं से जोड़ती है।

इस अवसर को उद्योग में हो रहा एक बुनियादी बदलाव और मजबूत बना रहा है। यह बदलाव पारंपरिक ‘सिस्टम-ऑन-चिप’ (SoC) की अवधारणा से ‘सिस्टम-ऑन-पैकेज’ (SoP) की अवधारणा की ओर बढ़ने का है। इस अवधारणा की शुरुआत मैंने जॉर्जिया टेक में की थी।

दशकों तक सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रगति ट्रांजिस्टर का आकार छोटा करने पर निर्भर रही। इससे बेहतर प्रदर्शन और कम लागत हासिल करने में मदद मिलती थी।

लेकिन आज ट्रांजिस्टर का आकार छोटा करने की प्रक्रिया को भौतिक, विद्युत और आर्थिक सीमाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर बनाने की लागत भी तेजी से बढ़ रही है।

इसके परिणामस्वरूप, नवाचार अब केवल ट्रांजिस्टर के स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप की पैकेजिंग और पूरे सिस्टम के स्तर पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भारत के लिए उन्नत पैकेजिंग सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने का एक व्यावहारिक और आकर्षक रास्ता है।

अत्याधुनिक वेफर निर्माण इकाइयों को स्थापित करने में जहां अरबों डॉलर के बड़े निवेश की जरूरत होती है, वहीं उन्नत पैकेजिंग में अपेक्षाकृत कम पूंजी लगती है। इसके बावजूद यह उच्च मूल्य वाले विनिर्माण और नवाचार के बड़े अवसर पैदा करती है।

कई विशेष प्रकार की चिपों को एक साथ जोड़कर बेहतर संरचना तैयार करने से उन्नत पैकेजिंग के जरिए अधिक सुविधाओं, बेहतर प्रदर्शन, कम बिजली खपत, कम समय में विकास और डिजाइन में अधिक लचीलापन हासिल किया जा सकता है।

मेरे विचार में, भारत का लक्ष्य इस बदलाव में केवल भागीदारी करना भर नहीं होना चाहिए। भारत को उन्नत पैकेजिंग के कुछ चुनिंदा और रणनीतिक क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सेमीकंडक्टर से लेकर पूरे सिस्टम के निर्माण तक का एक व्यापक तंत्र विकसित करना होगा। इसमें सिस्टम डिजाइन और उसकी संरचना, उन्नत सब्सट्रेट और चिपों को जोड़ने की तकनीकें, बिजली से जुड़े उपकरणों का एकीकरण, असेंबली और परीक्षण, विश्वसनीयता की जांच, कुशल कार्यबल तैयार करना, व्यावसायिक उपयोग और नए स्टार्टअप शुरू करना शामिल होगा।

इस सोच के केंद्र में एक ऐसा राष्ट्रीय नवाचार तंत्र होगा, जिसे शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप और सरकार के मजबूत सहयोग से विकसित किया जाएगा।

मैंने देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों, जैसे आईआईटी, आईआईएससी और बिट्स में नौ उद्योग-सह-विकास प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही आईआईटी गांधीनगर में एक राष्ट्रीय सिस्टम एकीकरण केंद्र और एक प्रायोगिक उत्पादन इकाई (पायलट लाइन) स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

ये केंद्र चिपलेट की संरचना, ग्लास-कोर सब्सट्रेट, कम बिजली खपत वाली पैकेजिंग, फोटोनिक पैकेजिंग, ताप प्रबंधन, विश्वसनीयता की जांच और उन्नत परीक्षण जैसी रणनीतिक तकनीकों पर काम करेंगे।

प्रायोगिक उत्पादन इकाई शोध और वास्तविक विनिर्माण के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करेगी। इससे प्रयोगशालाओं में हुए नवाचारों को तेजी से ऐसे उत्पादों में बदलने में मदद मिलेगी, जिन्हें व्यावसायिक रूप से तैयार किया जा सके।

यहां शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप और उद्योग जगत के भागीदारों को अगली पीढ़ी की तकनीकों को विकसित करने, उनकी जांच करने और बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए तैयार करने का अवसर मिलेगा। यह सब उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले किया जा सकेगा।

इस रणनीति की एक प्रमुख विशेषता यह है कि नवाचार का काम देश के अलग-अलग हिस्सों में बांटकर किया जाएगा। संसाधनों और विशेषज्ञता को किसी एक स्थान पर केंद्रित करने के बजाय, देश भर में विशेष तकनीकी केंद्र बनाए जाएंगे। हर केंद्र अपनी खास क्षमता के अनुरूप काम करेगा।

इस केंद्र और उससे जुड़े अन्य केंद्रों वाले मॉडल से भारत की विविध क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल होगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिभाओं को विकसित करने, व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने, उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने और पूरे देश में नवाचार को गति देने में मदद मिलेगी।

उद्योग जगत के साथ करीबी सहयोग यह सुनिश्चित करेगा कि शोध बाजार की जरूरतों के अनुरूप हो और उसके परिणाम तेजी से व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचें। कुशल कार्यबल तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।सेमीकंडक्टर उद्योग को हजारों इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, तकनीशियनों, ऑपरेटरों और विनिर्माण विशेषज्ञों की जरूरत होगी।

भारत विभिन्न विषयों को जोड़ने वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों, उद्योगों में इंटर्नशिप, पेशेवर प्रमाणपत्रों, प्रायोगिक उत्पादन इकाइयों में प्रशिक्षण और संयुक्त शोध परियोजनाओं के जरिए प्रतिभाओं की यह बड़ी श्रृंखला तैयार कर सकता है।

शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाकर भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कुशल सेमीकंडक्टर कार्यबल में से एक तैयार कर सकता है। उन्नत पैकेजिंग भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक लक्ष्यों को हासिल करने में भी मददगार है। जब दुनिया की आपूर्ति श्रृंखलाएं भरोसेमंद विनिर्माण और नवाचार साझेदारों की तलाश कर रही हैं, तब भारत उन्नत पैकेजिंग, असेंबली और परीक्षण के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन सकता है।

इस रणनीति से आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है, उच्च मूल्य वाले रोजगार पैदा किए जा सकते हैं, निवेश आकर्षित किया जा सकता है, नए स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा सकता है और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत की जा सकती है।

हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबे समय तक निरंतर प्रयास, रणनीतिक निवेश, नीतियों के बीच बेहतर तालमेल और सरकार, उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच गहरे सहयोग की जरूरत होगी। लेकिन इससे मिलने वाले परिणाम भारत की तकनीकी और आर्थिक तस्वीर को बदल सकते हैं।

(प्रो. राव आर. तुम्माला   एडवांस्ड पैकेजिंग के जनक और जॉर्जिया टेक में एमेरिटस प्रोफेसर और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के सलाहकार हैं।)

भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का बुनियादी स्तर से निर्माण

रेत से सिलिकॉन और सिस्टम तक, भारत का सेमीकंडक्टर का दौर

नेहा कुमारी, मिशन निदेशक गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन

कई दशकों तक, सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की स्थिति एक विरोधाभास वाली रही है। भारतीय इंजीनियरों ने उन्नत चिप्स को डिज़ाइन करने में मदद की,  लेकिन देश उनके निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण के लिए काफी हद तक विदेशी सुविधाओं पर निर्भर था। अब यह अंतर कम होने लगा है। 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू होने के बाद से, भारत ने सिर्फ़ नीति बनाने से आगे बढ़कर कारखाने लगाने, आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने, प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने और व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

अगला काम सिर्फ़ अलग अलग सयंत्र लगाने से कहीं बड़ा है। एक सेमीकंडक्टर निर्माण सयंत्र अकेले काम करके सफल नहीं हो सकता। यह निरंतर पैकेजिंग और परीक्षण सुविधाओं, उपकरणों के रख-रखाव, अति-शुद्ध रसायनों और गैसों, सटीक इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान संस्थानों और कुशल कार्यबल पर निर्भर करता है। इन क्षमताओं को एक साथ करीब लाने से परिवहन और इन्वेंट्री लागत में कमी आती है, काम पूरा होने में लगने वाला समय घटता है, तालमेल बेहतर होता है और काम को अंजाम देने से जुड़े जोखिम कम होते हैं। इसलिए भारत को केवल अकेले फेब्रिकेशन संयंत्र नहीं, बल्कि एकीकृत सेमीकंडक्टर क्लस्टर बनाने होंगे।

भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के ‘सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम’ तथा फैब्रिकेशन, असेंबली, परिक्षण, पैकेजिंग और चिप डिजाइन के लिए सहायता देकर इसकी मजबूत नींव रखी है। छह राज्यों में बारह सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया जायेगा।  इनमें वेफर फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, मेमोरी असेंबली एवं परिक्षण, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और विशिष्ट प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। असम, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में चल रही परियोजनाएं एक-दूसरे की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर रही हैं, जबकि डिजाइन कंपनियों, आधुनिक उन्नत उपकरण, फाउंड्री तक पहुंच और अकादमिक सहयोग के लिए दी जा रही सहायता से इसके नवप्रवर्तन की प्रक्रिया मज़बूत हो रही है।

‘रेत से सिलिकॉन और सिस्टम तक’ का सिद्धांत अब राष्ट्रीय प्रयास का मार्गदर्शन करने वाला होना चाहिए। भारत को वास्तविक लाभ तब होगा जब कच्चे माल और उपकरणों की आपूर्ति, चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परिक्षण और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के साथ आसानी से जुड़ जाएगी। एक ही जगह पर काम करने से आपूर्तिकर्ता प्रमाणीकरण में तेजी आ सकती है, अवसंरचना का साझा इस्तेमाल हो सकता है और निर्माता, स्टार्ट-अप व शोधकर्ता उत्पादन संबंधी समस्याओं को मिलकर हल कर सकते हैं। इससे घरेलू एमएसएमइ को भी सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने में मदद मिल सकती है; वे बड़े ग्राहकों के पास अपनी जगह बनाकर गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता के वैश्विक मानकों को धीरे-धीरे पूरा करके सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश करने में मदद कर सकता है।

गुजरात यह दर्शाता है कि कैसे यह क्लस्टर दृष्टिकोण व्यापक राष्ट्रीय मिशन के तहत आकार ले सकता है। राज्य ने भारत की पहली समर्पित सेमीकंडक्टर नीति पेश की और एकल सुविधा प्रदाता के रूप में ‘गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन’ की स्थापना की। अब तक छह स्वीकृत परियोजनाएं और 1.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश इसी राज्य में हो चूका है। हालांकि, इससे भी अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि धोलेरा, साणंद और सूरत में फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, अवसंरचना, आपूर्तिकर्ताओं और प्रतिभाओं के बीच बन रहा आपसी तालमेल है।

माइक्रोन प्रौद्योगिकी, केन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी की सुविधाओं के आस-पास साणंद एक प्रमुख पैकेजिंग क्लस्टर के तौर पर विकसित हो रहा है।  गुजरात में तीन प्रमुख सुविधाओं ने 2026 में अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। इनके परिचालन से उपकरणों, विशिष्ट रसायनों, औद्योगिक गैसों, क्लीनरूम, टेस्टिंग, लॉजिस्टिक्स और सटीक इंजीनियरिंग की निरंतर मांग बनी रहती है। यह मांग आपूर्तिकर्ताओं को आकर्षित कर सकती है, दूरस्थ सेवा नेटवर्क पर निर्भरता को कम कर सकती है और भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों व एमएसएमई के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

धोलेरा फैब्रिकेशन के लिए एक मुख्य केंद्र के तौर पर काम करता है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर, वहाँ भारत का पहला व्यावसायिक सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित कर रहा है। इसकी दोहरी ग्रिड बिजली आपूर्ति, सुनिश्चित जल आपूर्ति, अपशिष्ट उपचार सुविधाएं, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और समर्पित औद्योगिक क्षेत्र सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए मजबूत अवसंरचना को दिखाते हैं। क्रिस्टल मैट्रिक्स की कंपाउंड-सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड-पैकेजिंग परियोजना तथा सूरत में सुची सेमिकॉन की सुविधा गुजरात के तकनीकी आधार और संभावित आपूर्तिकर्ता नेटवर्क का और अधिक विस्तार करती है।

क्लस्टरों को कारखानों को ज्ञान के केंद्रों से भी जोड़ना होगा। पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय में पैकेजिंग प्रशिक्षण केंद्र, ‘चिप-इन’ एक्सटेंशन सेंटर और आईआईटी गांधीनगर में ‘समर्थ’ नैनोफैब्रिकेशन सुविधा उद्योग के अनुकूल प्रतिभा, अनुसंधान और प्रक्रिया विकास में मदद कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, एंकर संयंत्रों, विश्वविद्यालयों, डिज़ाइन केंद्रों और साझा परीक्षण सुविधाओं के बीच इसी तरह के संबंध एक ऐसी क्षमता का निर्माण करने के लिए अनिवार्य होंगे जो शुरुआती निवेश प्रोत्साहनों के समाप्त होने के बाद भी बनी रहे।

कोई भी देश अकेले संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण नहीं करता है। वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारियां, पूंजी और बाजार हमेशा ज़रूरी रहेंगे। भारत के पास मौका है कि वह इन्हें बड़े घरेलू मार्केट, बेहतरीन इंजीनियरिंग प्रतिभा और भरोसेमंद संस्थानों के साथ जोड़े। ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ विषय के तहत आयोजित सेमिकॉन इंडिया 2026, परियोजनाओं से आगे बढ़कर क्लस्टरों के निर्माण की ओर इस बदलाव को गति दे सकता है। गुजरात इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, लेकिन यह महत्वाकांक्षा राष्ट्रीय स्तर की है: ऐसे आपस में जुड़े हुए सेमीकंडक्टर क्लस्टर जो जोखिमों को कम करते हैं, घरेलू मूल्य संवर्धन करते हैं और भारत को चिप्स, प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का एक भरोसेमंद वैश्विक स्रोत बनाते हैं। अंततः, सफलता को कम समय अवधि, त्वरित प्रमाणीकरण और भारत के भीतर निर्मित मूल्य की बढ़ती हिस्सेदारी से मापा जाना चाहिए।

जसप्रीत सिंह पंढेर ने सीएम मान से की मुलाकात, गांव ढेरी के विकास कार्यों पर हुई चर्चा

लुधियाना / सत्ता संदेश

हलका साहनेवाल के गांव ढेरी के सरपंच एवं किसान विंग हलका साहनेवाल के अध्यक्ष जसप्रीत सिंह पंढेर ने लुधियाना में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की। इस दौरान उनके भाई सतवंत सिंह पंढेर भी मौजूद रहे।

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जसप्रीत सिंह पंढेर ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात का अवसर मिला, जिसके लिए उन्होंने पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया का धन्यवाद किया।

उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के साथ गांव ढेरी में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही उन्होंने हलका साहनेवाल में कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया द्वारा करवाए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी।

जसप्रीत सिंह पंढेर ने कहा कि उनके अनुसार हलके में बड़े स्तर पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। उन्होंने मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया का विकास कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का भी धन्यवाद किया और कहा कि सरकार की ओर से हलके के विकास के लिए लगातार ग्रांट जारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर वह हरदीप सिंह मुंडिया के समर्थन में काम करेंगे और उन्हें बड़ी लीड के साथ विधानसभा पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार दोबारा सत्ता में आएगी और पंजाब के विकास को आगे बढ़ाया जाएगा।

भिवानी में SDG-7 पर हितधारक सम्मेलन, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा के लिए मानकों की भूमिका पर चर्चा

भिवानी / हरियाणा / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के हरियाणा शाखा कार्यालय की ओर से 17 सितंबर को बया टूरिस्ट रिज़ॉर्ट, भिवानी में ‘एक बेहतर दुनिया के लिए सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मानक’ विषय पर हितधारकों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में SDG-7 यानी किफायती और स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

यह कार्यक्रम 14 अक्टूबर 2026 को मनाए जाने वाले विश्व मानक दिवस 2026 के अग्रिम कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। इसमें सरकारी विभागों, शिक्षा जगत, MSME, उद्योग संघों और अन्य हितधारक संगठनों के 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री विपिन कुमार सिंह, IFS, उप वन संरक्षक, भिवानी ने सतत औद्योगिक विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी, टिकाऊ कार्यप्रणालियों और संसाधनों के कुशल उपयोग के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मानकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

BIS हरियाणा शाखा कार्यालय की निदेशक एवं प्रमुख श्रीमती मधुरिमा माधव ने विश्व मानक दिवस 2026 के विषय और SDG-7 के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किफायती और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लागू भारतीय मानकों की भूमिका की जानकारी दी। इस दौरान IS/ISO 50001 सहित सौर प्रणालियों, उपकरणों और घटकों से संबंधित मानकों का उल्लेख किया गया।

उन्होंने बताया कि लगभग 96 प्रतिशत BIS लाइसेंस MSME के पास हैं, इसलिए मानकीकरण और गुणवत्ता व्यवस्था में MSME की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने MSME प्रतिनिधियों से मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ मानक तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

तकनीकी सत्र में BIS हरियाणा शाखा कार्यालय के वैज्ञानिक-डी एवं संयुक्त निदेशक श्री चंदन कुमार ने सिंचाई उपकरण, कृषि उत्पाद एवं उपकरण, कपड़ा उत्पाद, PE/PVC पाइप, विद्युत केबल, पेवर ब्लॉक और ग्वार गम सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े भारतीय मानकों की जानकारी दी।

उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादों पर भी प्रस्तुति दी और बताया कि भारतीय मानक किस तरह नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी पहलों को समर्थन प्रदान करते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय सौर मिशन, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और पीएम-कुसुम योजना जैसी पहलों का भी संदर्भ दिया गया।

सम्मेलन के साथ जिला MSME सेंटर, भिवानी के सहयोग से MSME बैठक भी आयोजित की गई। BIS के वैज्ञानिक-सी एवं निदेशक श्री अनंत कुमार ने उत्पाद प्रमाणन योजना और कारोबार में सुगमता के लिए किए गए हालिया सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने प्रमाणन दिशानिर्देशों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCO) और BIS के ऑनलाइन पोर्टल में किए गए बदलावों के बारे में बताया।

प्रतिभागियों को BIS के विभिन्न ई-संसाधनों, जिनमें प्रशिक्षण पोर्टल, कैप्सूल कोर्स, शिकायत प्रबंधन पोर्टल और BIS CARE ऐप शामिल हैं, की जानकारी भी दी गई।

वहीं, जिला MSME सेंटर, भिवानी के औद्योगिक विस्तार अधिकारी श्री सतीश रोहिल्ला ने MSME के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और प्रोत्साहनों की जानकारी दी। उन्होंने वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास से संबंधित प्रावधानों पर भी जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें हितधारकों ने भारतीय मानकों, BIS प्रमाणन, QCO और अन्य अनुरूपता आवश्यकताओं से जुड़े सवाल पूछे। BIS अधिकारियों ने प्रतिभागियों के सवालों का जवाब देते हुए संबंधित प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं को स्पष्ट किया।

सम्मेलन के माध्यम से BIS और MSME क्षेत्र के बीच संवाद को मजबूत करने तथा गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास में भारतीय मानकों की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।