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अमृतसर : कचरे से बन रही ऑर्गेनिक खाद, नगर निगम ने 5 जगहों पर लगाए कैंप; लोगों को मुफ्त में दी जा रही खाद

अमृतसर / सत्ता संदेश

शहर में कचरे के सही इस्तेमाल और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अमृतसर नगर निगम की ओर से पहल की गई है। नगर निगम द्वारा शहर से एकत्र किए जा रहे गीले कचरे को प्रोसेस कर ऑर्गेनिक खाद तैयार की जा रही है। लोगों को इसके इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने के लिए शनिवार को शहर में पांच अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाए गए, जहां लोगों को यह खाद मुफ्त में वितरित की जा रही है।

नगर निगम का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि घरों से निकलने वाले गीले कचरे को बेकार समझने के बजाय उसका उपयोग खाद बनाने में किया जा सकता है। तैयार की गई ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल लोग अपने घरों में पेड़-पौधों और बागवानी के लिए कर सकते हैं।

नगर निगम अधिकारी के मुताबिक, जब निगम की गाड़ियां घरों से कचरा एकत्र करने पहुंचती हैं, तो लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया जाता है। घरों से अलग करके एकत्र किए गए गीले कचरे को आगे प्रोसेस किया जाता है और इससे ऑर्गेनिक खाद तैयार की जाती है।

अधिकारी ने बताया कि शहर में गीले कचरे से खाद तैयार करने के लिए पांच जोन बनाए गए हैं। इन जोन में एकत्र किए गए गीले कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद में बदला जा रहा है। तैयार खाद को लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें इसके उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के साथ-साथ लोगों को वेस्ट से वेल्थ और स्वच्छता की अवधारणा से जोड़ना है, ताकि शहर में कचरे की समस्या को कम करने में लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा सके।

अमृतसर : झबाल रोड पर हंगामा, निहंग सिंहों के बीच मारपीट; SHO से भी हाथापाई की खबर

अमृतसर / सत्ता संदेश

गेट हकीमा थाना क्षेत्र के झबाल रोड पर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब प्रदर्शन कर रहे निहंग सिंहों ने मौके पर पहुंचे एक अन्य निहंग सिंह को रोक लिया और उसकी कथित तौर पर पिटाई कर दी। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब उसे बचाने पहुंचे गेट हकीमा थाने के SHO के साथ भी हाथापाई होने की बात सामने आई।

जानकारी के अनुसार, कुछ निहंग सिंह झबाल रोड पर धरना देकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक अन्य निहंग सिंह वहां पहुंचा, जिसे प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया। आरोप है कि इसके बाद उसकी मारपीट की गई। सूचना मिलने पर गेट हकीमा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और घायल/पिट रहे व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस अधिकारी और प्रदर्शन कर रहे निहंग सिंहों के बीच कथित तौर पर हाथापाई हो गई। बाद में पुलिस उस व्यक्ति को अपनी गाड़ी में बैठाकर थाने ले गई।

धरने पर बैठे एक निहंग सिंह ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि करीब एक घंटे पहले उन पर हमला किया गया था और फायरिंग भी हुई थी। इसके बाद उन्होंने विरोध में धरना शुरू किया। उनका दावा था कि विरोधी पक्ष ने कथित तौर पर स्थिति की जानकारी लेने के लिए एक व्यक्ति को भेजा था, जिसे प्रदर्शनकारियों ने पकड़ लिया था। निहंग सिंह के अनुसार, बाद में पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को उनसे छुड़ाकर ले गए।

प्रदर्शनकारी निहंग सिंह ने मेजर सिंह भिंडव के साथ पहले से विवाद होने का भी दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले पकड़े गए कुछ लोगों को भी पुलिस प्रशासन ने छोड़ दिया था। उन्होंने पुलिस पर विरोधी पक्ष के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

वहीं, गेट हकीमा थाने के SHO ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों से अलग जानकारी देते हुए कहा कि सड़क से कुछ गाड़ियां गुजरी थीं, जिन्हें निहंग सिंह मेजर सिंह की गाड़ियां बता रहे हैं। इसी को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। SHO के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच पहले से मनमुटाव है, लेकिन मौके पर गाड़ियों के गुजरने के अलावा किसी बड़ी घटना की जानकारी नहीं मिली।

SHO ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने गाड़ियों के गुजरने के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज किए जाने की जानकारी दी थी। सड़क पर धरना होने के कारण यातायात प्रभावित हुआ, जिसके चलते पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल, मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और इलाके में तनाव को नियंत्रित रखने के लिए कार्रवाई की जा रही है। मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

PGI Arthroplasty Conference 2026: PGI चंडीगढ़ में जोड़ प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीकों पर मंथन

PGI चंडीगढ़ में PGI Arthroplasty Conference 2026 का आयोजन, रोबोटिक्स, नेविगेशन, AI, पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट और आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीकों पर विशेषज्ञों की चर्चा।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग की ओर से Arthroplasty Society of Tricity के तत्वावधान में वार्षिक PGI Arthroplasty Conference 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। सम्मेलन का विषय “Mastering the Precision and Newer Techniques in Joint Replacement” रखा गया है। सम्मेलन में जोड़ प्रत्यारोपण में सटीकता, व्यक्तिगत उपचार योजना, नेविगेशन, रोबोटिक्स और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जा रही है।

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बीच मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण, करुणा, ईमानदारी और नैतिकता के महत्व पर जोर दिया।

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि चिकित्सा में तकनीक डॉक्टरों की सहायता कर सकती है, लेकिन मानवीय अनुभव, संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में मरीज को हमेशा केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मरीज चिकित्सा पेशेवरों के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी और पूंजी हैं।

उन्होंने विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रो. लाल ने कहा कि जब किसी मरीज को समग्र उपचार की आवश्यकता होती है, तब चिकित्सा को अलग-अलग विशेषज्ञताओं के खांचों में सीमित नहीं किया जा सकता। न्यूरोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और अन्य विशेषज्ञताओं के बीच सहयोग मरीज के बेहतर उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

AI और आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा कि तकनीक डॉक्टरों की मदद करने वाली होनी चाहिए, न कि चिकित्सकीय अनुभव और मानवीय निर्णय का विकल्प। उन्होंने कहा, “AI मेरी मदद कर सकता है और यह बहुत अच्छा तथा शानदार हो सकता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह आपके हाथों के अनुभव का स्थान ले सकता है।”

प्रो. लाल ने चिकित्सा के मानवीय पक्ष को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक के विकास के साथ करुणा, संवेदनशीलता, मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का महत्व और बढ़ जाता है।

युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए उन्होंने विशेषज्ञता, नैदानिक कौशल और ईमानदारी को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे में लंबे समय तक सफलता का आधार मजबूत कौशल और मरीजों का विश्वास होना चाहिए। उन्होंने चिकित्सकों से अपने क्लिनिकल स्किल्स को मजबूत करने और मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का आह्वान किया।

प्रो. लाल ने कहा कि चिकित्सा एक प्रतिष्ठित और सेवा-प्रधान पेशा है तथा स्वास्थ्य पेशेवरों की समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मरीजों द्वारा डॉक्टरों पर जताए गए विश्वास को बनाए रखना आवश्यक है और करुणा, ईमानदारी तथा नैतिकता के स्तर पर किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

आर्थोप्लास्टी में आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका

इस अवसर पर प्रो. विजय जी. गोनी, विभागाध्यक्ष, ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ने आधुनिक आर्थोप्लास्टी में हो रहे बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मरीज के उचित चयन, व्यक्तिगत उपचार योजना, सर्जिकल सटीकता और बेहतर रिकवरी में आधुनिक तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया।

प्रो. गोनी ने बताया कि ऑर्थोपेडिक सर्जरी का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है। प्राथमिक और जटिल प्रक्रियाओं में नेविगेशन, रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, उपचार की प्रक्रिया में मरीज को केंद्र में रखना मूल सिद्धांत बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में देश के विभिन्न संस्थानों और अलग-अलग विशेषज्ञताओं के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है, जहां वे अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जटिल मामलों पर चर्चा कर रहे हैं और स्थापित उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों, युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना है।

लाइव सर्जरी से कैडेवर वर्कशॉप तक व्यापक वैज्ञानिक कार्यक्रम

Annual PGI Arthroplasty Conference 2026 में तीसरा PGI Arthroplasty Course, लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन, कैडेवरिक वर्कशॉप, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के व्याख्यान और केस आधारित चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

वैज्ञानिक सत्रों में टोटल नी आर्थोप्लास्टी, पर्सनलाइज्ड अलाइनमेंट, नेविगेशन, रोबोटिक्स, जटिल प्राथमिक प्रक्रियाएं, हिप रिप्लेसमेंट में Direct Anterior Approach (DAA) और Unicompartmental Knee Arthroplasty (UKA) जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के तहत कैडेवर और सॉ-बोन आधारित प्रशिक्षण के साथ मैनुअल एवं रोबोटिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सम्मेलन से पहले आयोजित कैडेवर वर्कशॉप में जटिल और प्राथमिक सर्जरी से संबंधित प्रक्रियाओं तथा रोबोटिक्स का व्यावहारिक अनुभव भी प्रतिभागियों को दिया गया।

सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. दीपक ने देशभर के प्रमुख संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों तथा ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान से आए अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ विशेषज्ञों, युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं की भागीदारी ने सम्मेलन को जोड़ प्रत्यारोपण के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में चर्चा, सीखने और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनाया है।

सम्मेलन में मरीज के उचित चयन, व्यक्तिगत उपचार योजना, सर्जिकल सटीकता, साक्ष्य-आधारित निर्णय, बेहतर रिकवरी और लंबे समय तक मरीजों के बेहतर परिणामों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

EPFO Wage Ceiling Hike: 15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई वेतन सीमा, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

EPFO Wage Ceiling बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई। 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आएंगे। जानिए EPF, EPS और EDLI से जुड़े फायदे और सरकार पर वित्तीय असर।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। संशोधित सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार के अनुसार, इस फैसले से देशभर में 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के अनिवार्य कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।

अब 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा। इसके तहत लागू नियमों के अनुसार कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (EDLI) से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी।

EPFO की वेतन सीमा को इससे पहले सितंबर 2014 में बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। सरकार के मुताबिक, पिछले वर्षों में वेतन और आय में वृद्धि तथा औपचारिक रोजगार के विस्तार को देखते हुए सीमा में बदलाव किया गया है। नई सीमा से 15,000 से 25,000 रुपये के वेतन वर्ग में आने वाले कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ेगा।

इस फैसले का उद्देश्य औपचारिक रोजगार के दायरे को बढ़ाना और कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना भी है। सरकार का कहना है कि व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारी प्रतिधारण और कार्यबल की स्थिरता को भी समर्थन मिल सकता है।

वित्तीय प्रभाव की बात करें तो वेतन सीमा बढ़ाने से सरकार पर सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, जबकि मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित व्यय लगभग 56,696 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।

EPFO वर्तमान में करीब 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्यों और लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़ा है। वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगी हैं।

सरकार और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अब इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक और प्रशासनिक कदम उठाएंगे। वेतन सीमा में यह बदलाव देश में सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में किया गया कदम है।

भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी बनेगी विकास का नया मोर्चा, 2030 तक AVGC क्षेत्र में 20 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत

सोनीपत / हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से विकास और रोजगार के नए क्षेत्र के रूप में उभर रही है। सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

डॉ. एल. मुरुगन ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित जिंदल पॉलिसी कॉन्क्लेव में “लॉ, पॉलिसी एंड द क्रिएटिव इकोनॉमी” विषय पर उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी विचारों, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा से संचालित हो रही है और इसका विस्तार युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ नए कारोबार के अवसर भी खोल रहा है।

मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर क्रिएटिव इकोनॉमी का योगदान वैश्विक GDP में 3.1 प्रतिशत और रोजगार में 6.2 प्रतिशत है। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक करीब 5.7 करोड़ भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक और रचनात्मक व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। भारत की मीडिया और मनोरंजन अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये बताया गया।

डॉ. मुरुगन ने विशेष रूप से AVGC यानी Animation, Visual Effects, Gaming and Comics क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को वर्ष 2030 तक करीब 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है। इससे एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कॉमिक्स से जुड़े कौशल रखने वाले युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुल सकते हैं

युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से सरकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज को समर्थन दे रही है। इसके अलावा 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC क्रिएटर लैब्स के लिए भी सरकारी समर्थन की घोषणा की गई है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को उभरती रचनात्मक और तकनीक आधारित नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।

डॉ. मुरुगन ने यह भी कहा कि क्रिएटिव इकोनॉमी के विकास के साथ मजबूत कानूनी और नीतिगत ढांचे की जरूरत होगी। उन्होंने कॉपीराइट सुरक्षा, रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल को महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में रेखांकित किया।

युवा प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उन्होंने संस्थानों और स्थापित मान्यताओं पर सम्मान, तर्क और प्रमाण के आधार पर सवाल उठाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से अपने विचारों, रचनात्मकता और कौशल के जरिए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

चिपइन सेंटर देशभर के इंजीनियरों को चिप डिजाइन की दे रहा है प्रशिक्षण

कैसे चिपइन सेंटर पूरे देश के इंजीनियरों के लिए केंद्रीकृत चिप डिज़ाइन, निर्माण सुविधाएँ और विशेष प्रशिक्षण की पेशकश कर रहा है 

विवियन डेसाल्फ़िन        

एक नये चिप की शुरुआत किसी छात्र, शोधकर्ता या उद्यमी के मन में एक विचार के रूप में हो सकती है। लेकिन उस विचार को अवधारणा से सिलिकॉन में बदलने के लिए महंगे सॉफ़्टवेयर, शक्तिशाली कंप्यूटर, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा तक पहुंच की जरूरत होती है। ज्यादातर कॉलेज और स्टार्ट-अप इस लागत को अकेले वहन नहीं कर सकते।

चिपइन सेंटर, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने सी-डैक, बेंगलुरु में स्थापित किया है, साझा राष्ट्रीय अवसंरचना और चिप डिज़ाइन समर्थन के माध्यम से इन बाधाओं को दूर करने में मदद कर रहा है। एक ही जगह से महंगे संसाधनों तक सुरक्षित ऑनलाइन पहुँच प्रदान करके, यह हर कॉलेज को महंगे उपकरण खरीदने और अलग अवसंरचना निर्माण करने की जरूरत से बचाता है।

500 संगठनों के 1 लाख से अधिक इंजीनियर, जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्ट-अप शामिल हैं, चिपइन सेंटर के इस साझा प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं, जिससे केंद्रीकृत चिप-डिज़ाइन सुविधा का यह सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार बन गया है।

व्यवहार में, चिपइन एक पेशेवर चिप-डिज़ाइन प्रयोगशाला को सीधे किसी छात्र के घर तक ले आता है। तकनीक केंद्र से दूर रह रहा एक छात्र प्रमुख संस्थानों के पास उपलब्ध उन्नत सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल कर सकता है। यह चिप डिज़ाइन को लोकतांत्रित बनाता है, जिससे प्रतिभा और विचार, न कि भौगोलिक स्थिति या वित्तीय ताकत, यह तय करते हैं कि कौन भाग ले सकता है।

चिपइन उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन स्वचालन (ईडीए) उपकरणों तक पहुँच प्रदान करता है, जिनका इस्तेमाल चिप डिज़ाइन करने, इसके परिपथ (सर्किट) का परीक्षण करने और यह देखने के लिए किया जाता है कि क्या इसका विनिर्माण किया जा सकता है। यह शक्तिशाली कंप्यूटिंग, पुन: उपयोग योग्य डिज़ाइन ब्लॉक्स और मानक डिज़ाइन तरीकों की भी पेशकश करता है। परम उत्कर्ष सुपरकंप्यूटर जटिल अनुकरण प्रणाली का समर्थन करता है, जबकि राष्ट्रीय प्री-सिलिकॉन सत्यापन, प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन का विनिर्माण से पहले परीक्षण करने में मदद करता है।

सिर्फ उपकरण प्रत्येक समस्या का समाधान नहीं कर सकते। एक छोटी-सी गलती भी चिप को असफल कर सकती है। इसलिए, चिपइन, प्रशिक्षण, तकनीकी समर्थन और विनिर्माण अनुपालन जांच प्रदान करता है। इसके विशेषज्ञ इस बात की जांच करते हैं कि क्या डिजाइन, विनिर्माण केंद्र के नियमों का पालन करता है, क्या इसके कल-पुर्जे सही तरीके से जुड़े हैं और क्या यह विनिर्माण के लिए तैयार है। डिज़ाइन करने वाले को फीडबैक मिलता है और वे अपने काम में सुधार करते हैं, जब तक कि यह आवश्यक मानकों को पूरा न कर ले। लोकतंत्रीकरण का सबसे स्पष्ट उदाहरण है – बहु-परियोजना वेफर (एमपीडब्लू) सेवा, जो एक कार्य-पद्धति है, जिसका उपयोग यूरोप में यूरोप्रैक्टिस और अमेरिका में एमओएसआईएस द्वारा भी किया जाता है। चूंकि संपूर्ण सेमीकंडक्टर वेफर बनाना महंगा है, इसलिए, चिपइन कई संस्थानों के डिजाइन की जांच करता है और उन्हें एक वेफर पर एक साथ रखता है। हर संस्थान एक छोटे हिस्से का इस्तेमाल करता है और लागत साझा करता है। वेफर का निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) में होता है और तैयार चिपों को उनके डिज़ाइन करने वालों को परीक्षण के लिए वापस भेज दिया जाता है।

ऐसी आठ साझा-वेफर अब तक 205 डिज़ाइनों को संस्थानों से एससीएल मोहाली तक ले जा चुकी हैं। चिपइन ने विदेशी विनिर्माण केन्द्रों में 100 से अधिक टेप-आउट्स को भी सक्षम किया है। टेप-आउट वह चरण है, जब पूरा डिज़ाइन विनिर्माण के लिए भेजा जाता है। यह कार्यक्रम लगभग एक लाख छात्रों और इंजीनियरों तक पहुँच चुका है और चार करोड़ घंटे से अधिक समय तक डिज़ाइन टूल का उपयोग हुआ है, जो दर्शाता है कि चिप डिज़ाइन कक्षा की सीख से वास्तविक सिलिकॉन अनुभव की ओर आगे बढ़ रहा है।

इसका लाभ केवल आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है। एक छात्र विचार से लेकर काम करने वाली चिप तक की यात्रा का अनुभव कर सकता है। एक प्रोफ़ेसर महंगी प्रयोगशाला बनाए बिना व्यावहारिक डिज़ाइन के बारे में पढ़ा सकते हैं। एक स्टार्ट-अप एक विचार का परीक्षण कर सकता है और उत्पाद विकास के लिए पैसे बचा सकता है। उद्योग को ऐसे इंजीनियर मिलते हैं, जो वास्तविक डिज़ाइन और निर्माण की आवश्यकताओं को समझते हैं।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए न केवल निर्माण क्षमता की जरूरत है, बल्कि ऐसे लोग भी चाहिए, जो उन चिप्स को डिजाइन कर सकें, जिन्हें विनिर्माण केंद्र बनाएंगे। उपकरण, कंप्यूटिंग, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहायता, अनुपालन जांच और विनिर्माण पहुँच को एकीकृत करके, चिपइन दुर्लभ संसाधनों को साझा राष्ट्रीय क्षमता में बदल रहा है। चिप-डिज़ाइन अवसंरचना को हर दरवाजे तक पहुंचाकर, चिपइन सुनिश्चित कर रहा है कि भारत की अगली बड़ी चिप देश की किसी भी कक्षा, प्रयोगशाला या स्टार्ट-अप से सामने आ सकती है।   

(लेखक सी-डैक, बेंगलुरु में वैज्ञानिक-एफ हैं)  

2029 तक नशा मुक्त भारत का लक्ष्य, केंद्र सरकार ने तैयार किया तीन साल का रोडमैप

केंद्र सरकार ने 2029 तक नशा मुक्त भारत बनाने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार किया है। 4 स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदुओं के साथ उपचार, पुनर्वास और नशा विरोधी अभियान पर जोर।

शिमला / चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर अगले तीन वर्षों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की मांग को कम करने, उपचार एवं पुनर्वास की सुविधाओं को बढ़ाने और जनजागरूकता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

शिमला में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की ओर से नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गृह मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत 2029’ अभियान और Vision Document 2026-2029 की प्रमुख योजनाओं की जानकारी दी गई। यह विजन डॉक्यूमेंट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 10वीं शीर्ष स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) बैठक में लॉन्च किया था।

कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार ने बताया कि रोडमैप को 35 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें केंद्र और राज्य स्तर पर NCORD बैठकों तथा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है।

चार स्तंभों पर आधारित है रोडमैप

नशा मुक्त भारत 2029 का तीन वर्षीय रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें खुफिया जानकारी एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं नुकसान में कमी तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। पूरे रोडमैप में 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदु निर्धारित किए गए हैं।

सरकार के मुताबिक रणनीति में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों, भगोड़ों, डार्कनेट और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नेटवर्क की पहचान, तस्करी की सप्लाई चेन को बाधित करने और अवैध प्रयोगशालाओं तथा पूरे वितरण नेटवर्क को खत्म करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।

उपचार और पुनर्वास क्षमता में बड़ा विस्तार

विजन डॉक्यूमेंट में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के सेवन की रोकथाम के साथ उपचार और पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार मार्च 2029 तक नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या मौजूदा 334 से बढ़ाकर 1,751 करने की योजना है।

बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करने तथा प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में नशे से संबंधित उपचार के लिए समर्पित विभाग स्थापित करने की भी योजना बताई गई है।

50 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य

‘नशा मुक्त भारत’ अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की योजना है। इसके तहत जागरूकता अभियान की पहुंच मौजूदा करीब 20 करोड़ लोगों से बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

2019 से जुलाई 2026 तक 93 लाख किलो से अधिक मादक पदार्थ जब्त

कार्यक्रम में NCB चंडीगढ़ और अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक देश में 93,33,987 किलोग्राम मादक और मन:प्रभावी पदार्थ जब्त किए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1,53,212 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसी अवधि में 44,88,576 किलोग्राम NDPS पदार्थ नष्ट किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 88,010 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा करीब 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों और परिसंपत्तियों को फ्रीज या जब्त किया गया तथा 128 अवैध गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया गया।

NCB के अनुसार 2019 से अब तक विभिन्न स्तरों पर 16,966 से अधिक NCORD बैठकें आयोजित की गई हैं। भारतपोल के माध्यम से 195 देशों के साथ इंटरपोल संपर्क स्थापित किए जाने और MANAS हेल्पलाइन 1933 के जरिए 3.33 लाख से अधिक नागरिकों के जुड़ने की जानकारी भी दी गई।

राज्यों में एंटी नारकोटिक्स व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

रोडमैप के तहत राज्यों की एंटी-ड्रग्स व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से संसाधन उपलब्ध कराने और परिणाम आधारित निगरानी पर जोर दिया गया है। मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित ANTF उपलब्ध कराने, मादक पदार्थों के नमूनों की रिपोर्टिंग 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने और गृह मंत्रालय की ओर से त्रैमासिक समीक्षा किए जाने की योजना बताई गई है।

इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिमला में NCB का जोनल कार्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसे जल्द शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

केंद्र सरकार के इस रोडमैप में नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने के साथ मांग और नुकसान को कम करने, उपचार एवं पुनर्वास सुविधाओं के विस्तार और समाज में जागरूकता बढ़ाने को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति रखी गई है।