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मानसा-सिरसा हाईवे पर किसानों का धरना, गरीब किसान पर दर्ज मामला रद्द करने की मांग

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

मानसा जिले के झुनीर कस्बे में भाखड़ा पुल के पास किसानों ने मानसा-सिरसा हाईवे जाम कर रोष प्रदर्शन किया। किसान एक गरीब किसान के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से थाना झुनीर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने कथित तौर पर दबाव में आकर संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। किसानों के मुताबिक, किसान की जमीन घग्गर नदी के पास स्थित है और ग्राम पंचायत की ओर से इस जमीन को हर साल ठेके पर दिए जाने का विरोध किया जा रहा था। किसानों का कहना है कि इसके बावजूद संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया।

किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले सात दिनों से थाना झुनीर के बाहर धरना देने के बावजूद उनकी मांग पर पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मंगलवार को किसानों ने मानसा-सिरसा मार्ग पर भाखड़ा पुल के पास धरना देकर हाईवे जाम कर दिया।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किसान के खिलाफ दर्ज मामला रद्द नहीं किया गया तो वे मानसा-सिरसा मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

वहीं, थाना झुनीर प्रभारी भूपिंदर सिंह ने किसानों के आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि बीडीपीओ की ओर से पत्र भेजकर संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कहा गया था। थाना प्रभारी ने कहा कि इसी आधार पर मामले में कार्रवाई की गई है।

धरने के दौरान किसान नेता मोहिंदर सिंह, किसान मलूक सिंह और थाना प्रभारी भूपिंदर सिंह ने मामले को लेकर अपनी-अपनी बात रखी।

हरिद्वार में सामाजिक चिंतन-सद्भावना एवं समरसता सम्मेलन, समाज की एकता और युवा सशक्तिकरण पर मंथन

दिनांक : 29 सितंबर 2026

हरिद्वार / पानीपत / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : शशी कपूर

देवभूमि हरिद्वार स्थित कबीर आश्रम, ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के सामने देवपुरा में श्री कबीर आश्रम धर्मार्थ ट्रस्ट समिति (रजि.), हरिद्वार के तत्वावधान में सामाजिक चिंतन-सद्भावना एवं समरसता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज की एकता, सामाजिक समरसता, शिक्षा, रोजगार और युवा सशक्तिकरण सहित समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

सम्मेलन की अध्यक्षता विकास महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल व्यक्तिगत प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, जागरूकता, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत समाज की आधारशिला बताया।

डॉ. पंवार ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब की वाणी मानवता, समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि समाज की एकता, समरसता और आने वाली पीढ़ियों का उज्ज्वल भविष्य सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

धर्मार्थ ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष अजब सिंह ने धन्यवाद संबोधन में कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग, सद्भावना और सामाजिक समरसता को और सशक्त करना होगा। उन्होंने शिक्षा और युवा सशक्तिकरण को समाज को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

हिमाचल से पहुंचे कबीरपंथ महासभा के प्रदेशाध्यक्ष मस्तराम ने सामाजिक एकता और समरसता के मूल्यों को मजबूत करने तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य बलराज आर्य ने भी युवाओं से समाज की मजबूती के लिए आगे आने की अपील की।

कार्यक्रम का मंच संचालन खिलेराम आर्य ने किया। कार्यक्रम से पहले ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने डॉ. ओमवीर सिंह पंवार का फूलमालाओं और गुलदस्तों से स्वागत किया। हिमाचल से आए प्रतिनिधियों ने उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल पहनाकर सम्मानित किया।

सम्मेलन में ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार, बलराज आर्य, कैलाश चंद, विकास महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरविंद कुमार उर्फ बिल्लू भाई, राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र गाहल्याण, अमरपाल तोमर, राजकुमार कटारिया, विकास कुमार रोशे, रामकुमार तंवर, अमित पवार, प्रमोद तोमर, लोकेश दहिया, राजेंद्र सिंह, पालेराम पवार, किरणपाल पवार, मदनपाल, संत कुमार, पवन कुमार, धर्मेंद्र लालाजी, अशोक ठेकेदार, डॉ. अशोक कुमार, परवीन कुमार, रामनिवास आर्य, अजय कुमार, मेहर सिंह, धर्मेंद्र गहलोत, एडवोकेट लोकेश, योगेश, जनेश्वर और जगपाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

इंडिया एनर्जी वीक 2027 का ऐलान, कोलकाता में होगा पांचवां संस्करण

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

29 सितंबर 2026

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चंडीगढ़ में आयोजित कर्टन रेज़र कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2027’ के पांचवें संस्करण की घोषणा की। भारत का यह प्रमुख वैश्विक ऊर्जा कार्यक्रम 28 से 31 जनवरी 2027 तक कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि IEW 2027 में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विमर्श में नए दृष्टिकोण और नई आवाज़ों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और उभरते खिलाड़ियों की भूमिका को प्रमुखता दी जाएगी, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोलकाता में आयोजित होने वाला यह संस्करण भारत के ऊर्जा विकास के अगले चरण को प्रदर्शित करेगा। कार्यक्रम के जरिए भारत वैश्विक ऊर्जा संवाद में भाग लेने के साथ-साथ उसे दिशा देने में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।

हरदीप पुरी ने कहा कि IEW 2027 भारत के बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंजीनियरिंग क्षमताओं और नवाचार की क्षमता को भी दुनिया के सामने रखेगा। इसका उद्देश्य भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देश में विकसित हो रही तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।

कर्टन रेज़र कार्यक्रम में इंडियनऑयल के निदेशक (रिफाइनरीज़) अरविंद कुमार, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक मौजूद रहे। अरविंद कुमार ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक ने अपनी शुरुआत के कुछ ही समय में वैश्विक ऊर्जा मंच पर भारत की भूमिका को मजबूती से सामने रखा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम इस बात को दर्शाता है कि भारत में ऊर्जा से जुड़ी चर्चा किसी एक शहर या मंच तक सीमित नहीं है।

कार्यक्रम में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक (अंतरिम) प्रोफेसर राजेश कुमार भाटिया भी उपस्थित रहे। ऊर्जा क्षेत्र के पेशेवरों के साथ पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 120 छात्रों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

75 हजार से अधिक ऊर्जा पेशेवरों के पहुंचने की उम्मीद

2023 में शुरुआत के बाद से इंडिया एनर्जी वीक ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। IEW 2027 का आयोजन ‘नवाचार को गति, ऊर्जा सुरक्षा, भविष्य का निर्माण’ (Unlocking Innovation, Securing Energy, Shaping Tomorrow) थीम के तहत किया जाएगा।

आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में 75,000 से अधिक ऊर्जा पेशेवरों और 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, एलएनजी, डिजिटलाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-ज़ीरो से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर भी रहेगा फोकस

कोलकाता में IEW के आयोजन को कार्यक्रम के भौगोलिक और रणनीतिक विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमता के साथ पड़ोसी क्षेत्रों से बढ़ते संपर्कों को भी सामने लाने का अवसर मिलेगा।

IEW 2027 में नवाचार और युवा प्रतिभा को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। ‘वसुधा’, अविन्या और हैकाथॉन जैसे मंचों के जरिए प्रतिभागियों को वास्तविक ऊर्जा चुनौतियों के लिए समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। FIPI के 12 स्टूडेंट चैप्टर्स छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों से जोड़ेंगे, जिससे शिक्षा जगत और ऊर्जा उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क की जानकारी

इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस (PSO) नेटवर्क के तहत पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल 6,183 रिटेल आउटलेट्स में से 3,023 इंडियनऑयल के रिटेल आउटलेट्स हैं।

एलपीजी क्षेत्र में कुल 1,402 वितरकों में से इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क के तहत 784 वितरक हैं। वहीं, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास क्रमशः 328 और 290 एलपीजी वितरक हैं।

माछीवाड़ा : बंद कमरे से राजमिस्त्री का खून से लथपथ शव बरामद, हत्या या हादसे की जांच

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब के स्थानीय सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास एक बंद कमरे से करीब 50 वर्षीय राजमिस्त्री चरणजीत सिंह उर्फ बिल्ला का खून से लथपथ शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव अर्धनग्न अवस्था में पड़ा था, जबकि कमरे से बाहर तक खून के निशान दिखाई दे रहे थे।

जानकारी के अनुसार, चरणजीत सिंह माछीवाड़ा शहर में अपने परिवार से अलग किराए के कमरे में रह रहा था। बताया जा रहा है कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। आसपास के लोगों ने जब कमरे से बाहर खून निकलता देखा तो पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी करमजीत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दरवाजा तोड़कर पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई तो चरणजीत सिंह खून से लथपथ हालत में मृत मिला। पुलिस के अनुसार, शव से दुर्गंध आ रही थी और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मौत करीब दो से तीन दिन पहले हुई होगी।

पुलिस को मृतक के सिर के पीछे चोट के निशान मिले हैं, जबकि चेहरे पर भी चोट दिखाई दी। इन परिस्थितियों के चलते मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस ने मृतक के परिवार को सूचना दी। मृतक की पत्नी जसप्रीत कौर ने बताया कि चरणजीत सिंह शराब पीने का आदी था और करीब चार वर्षों से परिवार से अलग रह रहा था।

फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी करमजीत सिंह के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। पुलिस फिलहाल कमरे में गिरने से हुए हादसे और हत्या, दोनों पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

165 साल पुराने अंग्रेजों के दौर के रेस्ट हाउस का बदलेगा रूप, पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकास

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा के पास सरहिंद नहर के किनारे स्थित करीब 165 साल पुराने सरकारी रेस्ट हाउस को अब नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। जल संसाधन विभाग ने ऐतिहासिक इमारत को खुले टेंडर के जरिए एक निजी कंपनी को 7 साल के लिए किराये पर दिया है। इसके बाद कंपनी ने परिसर में साफ-सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।

दोराहा निवासी राजवीर सिंह मांगट ने बताया कि उनकी कंपनी ट्रिपल ए-1947 ने टेंडर प्रक्रिया के जरिए रेस्ट हाउस किराये पर लिया है। उनके मुताबिक, इमारत लंबे समय से खस्ताहाल हालत में थी और आसपास की जमीन पर घास-फूस उग आई थी। पिछले करीब एक महीने से परिसर की सफाई और जमीन को समतल करने का काम किया जा रहा है।

विरासत की पहचान बरकरार रखते हुए होगा विकास

प्रस्तावित योजना के तहत ऐतिहासिक इमारत की पुरानी विरासती पहचान को बरकरार रखते हुए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। रेस्ट हाउस में मौजूद चार कमरों को पारंपरिक शैली में तैयार कर पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था करने की योजना है।

इसके अलावा परिसर में हॉर्स स्टड फार्म, मेडिटेशन सेंटर, बच्चों के लिए गतिविधियों और फूड हब जैसी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इस स्थान का इस्तेमाल फिल्मों और गानों की शूटिंग के लिए भी किए जाने की योजना बताई गई है।

राजवीर सिंह मांगट के अनुसार, इमारत के पुराने दरवाजों को हटाकर नए दरवाजे लगाने के बजाय उनकी मौजूदा शैली को ही संरक्षित और संवारा जाएगा। उन्होंने बताया कि इमारत की छतों की गोलाकार बनावट और घड़ों में मिट्टी भरकर तैयार किया गया डिजाइन इसकी खास विशेषताओं में शामिल है।

आतंकवाद के दौर से जुड़ी रही है इमारत

स्थानीय लोगों के अनुसार, पंजाब में आतंकवाद के दौर में सरहिंद नहर के किनारे सुनसान इलाके में स्थित इस रेस्ट हाउस का इस्तेमाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के लिए भी किया जाता था। स्थानीय स्तर पर इस जगह को पूछताछ और कथित प्रताड़ना से जुड़ी चर्चाओं के साथ भी याद किया जाता है।

पिछले कई वर्षों से यह ऐतिहासिक इमारत वीरान और जर्जर हालत में थी। अब जल संसाधन विभाग द्वारा इसे किराये पर दिए जाने के बाद इसके संरक्षण और पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू हुई है।

प्रस्तावित पर्यटन परियोजना के जरिए इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलने के साथ माछीवाड़ा क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

लुधियाना के पंजाबी बाग में पार्किंग को लेकर दो पक्ष भिड़े, पुलिस के सामने भी हुई मारपीट

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना शहर के पंजाबी बाग इलाके में गाड़ी पार्क करने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच झड़प होती दिखाई दे रही है।

जानकारी के मुताबिक, गाड़ी पार्क करने को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे। विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में भी दोनों पक्ष एक-दूसरे से उलझ गए और मारपीट शुरू हो गई।

झड़प के दौरान कुछ गाड़ियों के शीशे टूटने की भी बात सामने आई है। वहीं, एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। परिवार की ओर से एक कांग्रेस नेता के बेटे पर भी धमकाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, जब इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त हैं। ड्यूटी ऑफिसर द्वारा मामले में जरूरी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


लुधियाना : चोरी के मोबाइल और मोटरसाइकिल समेत दो युवक गिरफ्तार, पुलिस को अन्य वारदातों के खुलासे की उम्मीद

लुधियाना / सत्ता संदेश

शहर में चोरी और लूटपाट की वारदातों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना मोती नगर पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है।

मामले की जानकारी देते हुए थाना मोती नगर के एसएचओ जसपाल सिंह ने बताया कि एएसआई सेठी कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के लिए नाकाबंदी की थी।

इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार होकर आ रहे दो युवकों को पुलिस टीम ने रोककर पूछताछ की। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, जांच में मोटरसाइकिल चोरी की पाई गई।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों युवक उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और फिलहाल लुधियाना में रह रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड हासिल करने की प्रक्रिया में है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान शहर में हुई चोरी और लूट की अन्य वारदातों के संबंध में जानकारी सामने आ सकती है। साथ ही, पुलिस को आरोपियों से और बरामदगी की भी उम्मीद है।

लुधियाना : पुरानी रंजिश को लेकर घर पर पथराव, दो लोग हिरासत में

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना में पुरानी रंजिश को लेकर एक परिवार के घर पर ईंट-पत्थर फेंके जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हंगामा हो गया। परिवार की ओर से घटना की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है।

जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष पड़ोसी बताए जा रहे हैं और इनके बीच पहले भी विवाद हो चुका है। उस समय इलाके के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाकर मामला शांत कराया गया था।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी को कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। परिवार के मुताबिक, पहले भी उनके घर में घुसकर हमला किया गया था, लेकिन उस समय दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। परिवार का आरोप है कि अब दोबारा उनके घर पर ईंट-पत्थर फेंके गए। घटना की वीडियो भी परिवार द्वारा बनाए जाने की बात कही गई है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं, दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पथराव किसी शरारती तत्व की ओर से किया गया। उनका कहना है कि उनके बेटे का जन्मदिन था और इसी दौरान दूसरी तरफ से वीडियो बनाई जा रही थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में दो लोगों को मौके से हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार की ओर से बयान दिए जाने के बाद मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।

बिखरे हुए सिस्टम की कीमत अब छिपी नहीं है

अस्पतालों को लंबे समय से डॉक्टरों का समय बर्बाद होने और जानकारी एक जगह से दूसरी जगह ठीक से न पहुंचने की वजह से पेंडिंग इंश्योरेंस क्लेम के रूप में नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब ज़रूरत ऐसे डिजिटल सिस्टम बनाने की है जो आसानी से एक-दूसरे के साथ जानकारी शेयर कर सकें।

भारत के कई हिस्सों में, मरीज़ खुद ही एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर तक जानकारी का मुख्य ज़रिया है। वह हर बार अपनी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट अपने साथ रखता है – एक पेपर फ़ाइल, अपने मोबाइल पर जांच की तस्वीरें या बस अपनी याददाश्त पर भरोसा करता है। इलाज के हर स्टेज पर नई जानकारी बनती है, लेकिन अक्सर यह अगले डॉक्टर या अस्पताल तक नहीं पहुँच पाती।

अस्पतालों के लिए, इस कमी को दूर करना लंबे समय से प्राथमिकता नहीं रही है। जब हेल्थकेयर सेवाओं को डिजिटल बनाने की बात आती है, तो मुख्य सवाल यह रहा है कि इसमें कितना खर्च आएगा और अस्पतालों को अपने सिस्टम में कितना बदलाव करना होगा।

हेल्थकेयर सेक्टर में कोई भी नया डिजिटल सिस्टम एक हफ़्ते में लागू नहीं किया जा सकता। अस्पतालों में सालों पुराने सॉफ्टवेयर, अलग-अलग काम करने के तरीके और डिजिटलाइज़ेशन के अलग-अलग लेवल होते हैं। छोटे अस्पतालों के लिए, टेक्नोलॉजी पर खर्च किया गया हर रुपया बेड, इक्विपमेंट और स्टाफ़ की लागत से जुड़ा होता है। इसलिए सवाल हमेशा यह रहा है कि क्या नया सिस्टम सच में उस समस्या का समाधान करेगा जिसे हल करने की ज़रूरत है।

अब सवाल बदल गया है। ज़्यादा ज़रूरी सवाल यह है कि मरीज़ों की जानकारी अलग-अलग जगहों पर बंटने की वजह से अस्पतालों और मरीज़ों को पहले से कितनी ज़्यादा परेशानी हो रही है।

मरीज़ के इलाज का पूरा सफ़र इस समस्या को साफ़ तौर पर दिखाता है। हो सकता है कि वह पहले किसी लोकल डॉक्टर को दिखाए, फिर किसी टेस्टिंग सेंटर पर टेस्ट करवाए, फिर किसी स्पेशलिस्ट से सलाह ले और आखिर में हॉस्पिटल में भर्ती हो। इलाज के हर स्टेज पर मरीज़ से जुड़ी नई जानकारी बनती है, लेकिन यह जानकारी अक्सर डॉक्टर, क्लिनिक और टेस्टिंग सेंटर के बीच आगे नहीं पहुँच पाती।

हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि इसके बाद क्या होता है: मरीज़ की पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं मिल पाती, वही टेस्ट दोबारा करवाने पड़ते हैं, इलाज में बेवजह देरी होती है और ऐसी जानकारी इकट्ठा करने में घंटों लग जाते हैं जो पहले से ही कहीं और मौजूद है।

लंबे समय तक, डेटा को हॉस्पिटल या संस्था की प्रॉपर्टी माना जाता था, जिसे उसके पास ही रहना चाहिए। जबकि असल में, यह जानकारी ही है जो मरीज़ के साथ आगे बढ़नी चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग फ़ॉर्मेट और अलग-अलग डिजिटल सिस्टम ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। अब जानकारी को अलग-अलग जगहों पर बंद रखने का खर्च इतना बढ़ गया है कि इससे मरीज़ और हॉस्पिटल दोनों को नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि प्राइवेट हॉस्पिटल ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन या ABDM को अलग नज़रिए से देखना शुरू कर दिया है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने भी कहा है कि अलग-अलग डिजिटल हेल्थ सिस्टम के बीच जानकारी के लेन-देन के लिए एक जैसे स्टैंडर्ड की ज़रूरत है। इससे यह पक्का हो सकता है कि मरीज़ की ज़रूरी हेल्थ से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल अगला डॉक्टर या हॉस्पिटल कर सके, चाहे वह कहीं भी इलाज करवा रहा हो।

एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर भी यही दिक्कत देखी जाती है। एक हॉस्पिटल कई इंश्योरेंस कंपनियों और पेमेंट इंस्टीट्यूशन के साथ काम करता है। इनमें से हर ऑर्गनाइज़ेशन का अपना डिजिटल सिस्टम और अपने तरीके होते हैं। जब ये सिस्टम एक-दूसरे से ठीक से बात नहीं करते हैं, तो इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस बेवजह धीमा और महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर हॉस्पिटल की फाइनेंशियल टीम और उसके कैश फ्लो पर पड़ता है।

नेशनल हेल्थ क्लेम एक्सचेंज (NHCX) इसी दिक्कत को हल करने की कोशिश करता है। यह इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस को आसान बनाने के लिए काम करता है। चाहे वह डॉक्टर के लिए ज़रूरी टेस्ट रिपोर्ट हो या हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी के बीच भेजा गया क्लेम, अगर हेल्थ जानकारी आसानी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकती, तो यह पूरी तरह से सिस्टम फेलियर है।

NHCX और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन हेल्थ सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों पर काम करते हैं, लेकिन दोनों के पीछे बेसिक आइडिया एक ही है – यह पक्का करना कि जानकारी एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित तरीके से, एक जैसे सिस्टम के तहत और ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ जा सके।

लेकिन हेल्थ सेक्टर में डिजिटलाइजेशन को सिर्फ़ ऊपर से नीचे तक लागू नहीं किया जा सकता। इसे डॉक्टरों, अस्पतालों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर डिज़ाइन करना होगा। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने भी चेतावनी दी है कि अगर डिजिटलाइजेशन को टुकड़ों में और ऊपर से नीचे तक लागू किया जाता है, तो इससे हेल्थ सिस्टम में बिखराव हो सकता है और हेल्थकेयर वर्कर्स पर एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ बढ़ सकता है। इसलिए, अलग-अलग सिस्टम को जोड़ना मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

यह भारत में खास तौर पर ज़रूरी है, जहाँ प्राइवेट हेल्थ सेक्टर बहुत अलग-अलग तरह का है। एक मेट्रोपॉलिटन शहर में एक बड़े कॉर्पोरेट हॉस्पिटल और दूसरे या तीसरे दर्जे के शहर में एक छोटे हॉस्पिटल के पास डिजिटलाइजेशन को लागू करने के लिए एक जैसी टेक्नोलॉजी, रिसोर्स या कैपेसिटी नहीं होती है।

एक छोटे हॉस्पिटल के पास अलग टेक्निकल टीम नहीं हो सकती है। अगर डिजिटल सिस्टम को ठीक से डिज़ाइन नहीं किया गया, तो इसे लागू करने का एक्स्ट्रा बोझ भी हॉस्पिटल पर पड़ सकता है। इसलिए, डिजिटल सिस्टम अपनाने की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों को कितना प्रैक्टिकल सपोर्ट मिलता है और नए सिस्टम को मरीजों के इलाज के मौजूदा तरीकों के साथ कितनी आसानी से जोड़ा जा सकता है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के एंबेसडर और NHCX के सपोर्टर के तौर पर, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका मकसद अस्पतालों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स को इन डिजिटल सिस्टम के प्रैक्टिकल फायदे समझने में मदद करना, अलग-अलग तरह के अस्पतालों में इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देना और अस्पतालों के अनुभव उन लोगों के साथ शेयर करना है जो ये डिजिटल सिस्टम बना रहे हैं।

प्राइवेट हेल्थ सेक्टर भारत के डिजिटल हेल्थ सिस्टम का अकेला यूजर नहीं रह सकता। अस्पताल इस सिस्टम के सबसे अहम यूजर्स में से हैं, इसलिए उन्हें भी इसे बनाने में एक्टिव रोल निभाना होगा। जानकारी के बिखरे होने और तालमेल की कमी के अस्पतालों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के अनुभव को देश में डिजिटल हेल्थ सिस्टम को आगे बढ़ाने के प्लान में शामिल करना होगा।
आगे के काम को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला, अस्पतालों को ऐसे डेटा सिस्टम खत्म करने होंगे जो अलग-थलग रहने पर किसी के काम के नहीं हैं।

दूसरा, हेल्थ-टेक कंपनियों को ऐसे प्रोडक्ट और सॉफ्टवेयर बनाने होंगे जो एक-दूसरे के साथ आसानी से काम कर सकें। तीसरा, मेडिकल संस्थानों और संगठनों को डिजिटल सिस्टम अपनाने के शुरुआती दौर में छोटे अस्पतालों और हेल्थ सेंटरों को सपोर्ट करना होगा। चौथा, पॉलिसी बनाने वालों को एक जैसे और प्रैक्टिकल स्टैंडर्ड बनाने होंगे जिन्हें हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े सभी लोग अपना सकें।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सफलता तब मानी जाएगी जब अस्पतालों, डॉक्टरों और मरीजों को लगेगा कि हेल्थकेयर सिस्टम में बिखराव कम हुआ है। जब ऐसा होगा – और यह मुमकिन है – तो डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मरीजों के इलाज का एक बेहतर और असरदार तरीका माना जाएगा।

(लेखक एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) के डायरेक्टर जनरल हैं। आर्टिकल में दिए गए विचार उनके अपने हैं।)