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PM Modi Laddakh Visit : लद्दाख को मिलेगी 3,350 करोड़ की सौगात! नया एयरपोर्ट टर्मिनल, रणनीतिक सड़क और 40 गांवों में जल संरक्षण परियोजना

पीएम नरेंद्र मोदी लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपये की पांच विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें लेह एयरपोर्ट टर्मिनल, निम्मु-पदुम-दारचा सड़क, हाइड्रो प्रोजेक्ट और जल संरक्षण योजनाएं शामिल हैं।

लद्दाख / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन कर उन्हें देश को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इन परियोजनाओं में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रणनीतिक सड़क संपर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, प्राचीन विरासत का संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य लद्दाख में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करना और क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना है।

लेह एयरपोर्ट पर बनेगा आधुनिक सुविधाओं वाला नया टर्मिनल

इन प्रमुख परियोजनाओं में लेह के कुशोक बकुला रिम्पोचे एयरपोर्ट पर लगभग 640 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नई पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग शामिल है। करीब 23,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस आधुनिक टर्मिनल को सालाना 35 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस टर्मिनल में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जियोथर्मल ऊर्जा के इस्तेमाल की व्यवस्था की गई है। आधुनिक सुविधाओं और लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत के मेल से तैयार यह टर्मिनल यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के साथ क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

298 किलोमीटर लंबी निम्मु-पदुम-दारचा सड़क होगी समर्पित

प्रधानमंत्री मोदी सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से बनाई गई 298 किलोमीटर लंबी निम्मु-पदुम-दारचा सड़क भी देश को समर्पित करेंगे। यह सड़क लेह के निम्मु को हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ती है और लद्दाख के लिए एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराती है।

हिमालय के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और ऊंचे शिंकुन ला दर्रे से गुजरने वाली यह सड़क रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे सेना की आवाजाही और आवश्यक सैन्य रसद पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जंस्कार क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए बेहतर संपर्क मिल सकता है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करेंगे हानू हाइड्रो प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइन

लद्दाख में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री 9 मेगावाट क्षमता वाली हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खालत्सी ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन करेंगे।

इन परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने और क्षेत्र के विद्युत नेटवर्क की विश्वसनीयता बेहतर होने की उम्मीद है। लद्दाख में उपलब्ध जलविद्युत संसाधनों का उपयोग बढ़ाने की दिशा में भी इन्हें महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सिंधु घाट पर भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क

लद्दाख की प्राचीन सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री लेह में सिंधु घाट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन करेंगे।

लद्दाख में प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों के अनेक स्थल मौजूद हैं। इन पर जंगली जानवरों, मानव आकृतियों और विभिन्न प्रतीकों की नक्काशी देखने को मिलती है। ये कलाकृतियां हजारों साल पुराने मानव जीवन, संस्कृति और इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। संरक्षण पार्क के माध्यम से इस विरासत को सुरक्षित रखने और इसके महत्व को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ से 40 गांवों को मिलेगा जल संरक्षण का लाभ

जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के तहत 40 गांवों में तैयार किए गए 40 जल निकायों का भी उद्घाटन करेंगे। यह पहल ‘मिशन अमृत सरोवर’ के उद्देश्यों के अनुरूप लद्दाख की विशेष भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए शुरू की गई है।

लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता और जरूरत के बीच मौसमी असंतुलन एक बड़ी चुनौती है। बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से पानी आने के दौरान इसकी उपलब्धता बढ़ जाती है।

‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के तहत बनाए गए जल निकायों का उद्देश्य उपलब्ध पानी को संरक्षित करना और जरूरत के समय उसका उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे सिंचाई में सहायता मिलने, कृषि आधारित आजीविका को बनाए रखने और लंबे समय में क्षेत्र की जल सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

लद्दाख के विकास को मिलेगी नई गति

एयरपोर्ट, रणनीतिक सड़क, बिजली, विरासत संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़ी ये परियोजनाएं लद्दाख के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिल सकती है, जबकि बिजली और जल संरक्षण से क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके संचालन, रखरखाव और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनसे लद्दाख के लोगों को परिवहन, रोजगार, खेती और बुनियादी सेवाओं के क्षेत्र में कितना लाभ मिलता है।

Railway Bonus 2026: 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन के बोनस की मंजूरी, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने पर भी कैबिनेट की मुहर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। इनमें रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) और IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री का फैसला शामिल है। रेलवे बोनस पर सरकार लगभग 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का सौदा 52,878.08 करोड़ रुपये का है।

रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, 11.40 लाख से अधिक लोगों को लाभ

त्योहारों से पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने बोनस को मंजूरी दी है। इस फैसले से लगभग 11,40,770 पात्र रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे मेहनत करने वाले रेलवे कर्मचारियों के लिए दिवाली का तोहफा बताया।

सरकार के मुताबिक, इस बोनस पर कुल 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पात्र कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिया जाएगा। प्रत्येक पात्र कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये तक बोनस मिल सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के काम को सम्मान देने का फैसला

रेलवे कर्मचारी यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही और माल ढुलाई से लेकर रेलवे ट्रैक, इंजन, स्टेशन और कार्यशालाओं में दिन-रात सेवाएं देते हैं। त्योहारों के दौरान भी रेलवे संचालन जारी रखने में कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है।

सरकार ने इस बोनस को रेलवे कर्मचारियों के प्रदर्शन और योगदान की मान्यता बताया है। इस तरह का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस पात्र गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को दिया जाता है। इसमें ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, तकनीशियन और अन्य संबंधित श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।

IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी

कैबिनेट ने IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings की सहायक कंपनी M/s 10955230 Canada Inc. को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेची जाएगी।

इस सौदे में केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने कनाडा स्थित कंपनी को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी है।

सौदे के बाद सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी रहेगी?

प्रस्तावित सौदे के पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास IDBI बैंक की 15 प्रतिशत और LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहने का प्रस्ताव है। इस प्रकार दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 34 प्रतिशत होगी।

यह फैसला IDBI बैंक के स्वामित्व ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, हिस्सेदारी की बिक्री और स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सौदे का अंतिम प्रभाव स्पष्ट होगा।

Jailer 2 Advance Booking: रिलीज से पहले रजनीकांत की फिल्म का धमाका! ओपनिंग डे के लिए दुनिया भर में 140 करोड़ रुपये की बुकिंग का दावा

Jailer 2 Advance Booking: रजनीकांत की फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को रिलीज होगी। एडवांस बुकिंग, संभावित ओपनिंग कलेक्शन, स्टार कास्ट और बॉक्स ऑफिस उम्मीदों की पूरी जानकारी पढ़ें।

मनोरंजन डेस्क / सत्ता संदेश

सुपरस्टार रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जेलर 2’ 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसकी एडवांस बुकिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओपनिंग डे के लिए दुनिया भर में फिल्म की एडवांस बुकिंग से जुड़ी कमाई 140 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और वास्तविक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में अंतर हो सकता है।

Jailer 2 Advance Booking: कितनी हुई कमाई?

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में ‘जेलर 2’ की एडवांस बुकिंग 10 अक्टूबर से शुरू हुई थी। फिल्म को दक्षिण भारतीय बाजारों में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, हिंदी भाषा के दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर शुरुआती उत्साह अपेक्षाकृत कम बताया जा रहा है।

फिल्म की एडवांस बुकिंग के आंकड़े इसके शुरुआती प्रदर्शन को लेकर उम्मीदें बढ़ा रहे हैं। हालांकि, टिकटों की बिक्री से जुड़े आंकड़ों और वास्तविक कमाई की तुलना करते समय ग्रॉस कलेक्शन, नेट कलेक्शन और विदेशों की कमाई को अलग-अलग समझना जरूरी है।

‘कुली’ से कितनी पीछे है ‘जेलर 2’?

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ‘जेलर 2’ की पहले दिन की एडवांस बुकिंग से भारत में लगभग 27 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन हुआ है। तुलना करें तो रजनीकांत की 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘कुली’ की एडवांस बुकिंग से लगभग 65 करोड़ रुपये की कमाई की खबरें सामने आई थीं।

यदि ‘जेलर 2’ की टिकट बिक्री रिलीज तक इसी रफ्तार से बढ़ती है, तो फिल्म की ओपनिंग मजबूत हो सकती है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, इसका घरेलू ग्रॉस कलेक्शन 35 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। हालांकि, ये अनुमान हैं और इन्हें फिल्म की वास्तविक ओपनिंग कमाई नहीं माना जाना चाहिए।

क्या ‘जेलर 2’ तोड़ पाएगी ओपनिंग के रिकॉर्ड?

रजनीकांत की लोकप्रियता और फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता के कारण ‘जेलर 2’ से बड़ी ओपनिंग की उम्मीद की जा रही है। फिल्म का प्रदर्शन तमिलनाडु सहित अन्य भारतीय राज्यों और विदेशी बाजारों में टिकटों की बिक्री पर निर्भर करेगा।

फिल्म की एडवांस बुकिंग के शुरुआती आंकड़े उत्साहजनक बताए जा रहे हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और समीक्षाओं का बॉक्स ऑफिस पर कितना असर पड़ता है।

‘जेलर 2’ की स्टार कास्ट और निर्देशक

‘जेलर 2’ का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है, जबकि इसका निर्माण सन पिक्चर्स के बैनर तले हुआ है। फिल्म में रजनीकांत के साथ विद्या बालन, राम्या कृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती, एसजे सूर्या, सूरज वेंजारामूडू, योगी बाबू, मिर्ना और ऋत्विक नजर आएंगे।

फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अब दर्शकों की निगाहें इसकी ओपनिंग, समीक्षाओं और पहले वीकेंड के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर टिकी हैं।

एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की मुलाकात, व्यापार से रक्षा तक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के प्रयासों के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, रक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा

डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के नेतृत्व के मार्गदर्शन तथा सरकारों और उद्योग जगत के बीच निरंतर संपर्क से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर काम हो रहा है।

बैठक में सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा से यह संकेत मिला कि भारत और कनाडा आपसी संवाद के जरिए अपने संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

व्यापार और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भी भारत के साथ संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा, नवाचार और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

आनंद के अनुसार, भारत और कनाडा के संबंधों का महत्व उन साझा उपलब्धियों में है, जिन्हें दोनों देश मिलकर हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच करीबी संपर्क भविष्य की समृद्धि को आकार देने में मदद कर सकता है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं

कनाडा की विदेश मंत्री ने भारत-कनाडा सहयोग को स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की संभावनाएं हैं।

बैठक में हुई चर्चा भारत और कनाडा के बीच संवाद तथा सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आने वाले समय में इन चर्चाओं का वास्तविक प्रभाव व्यापार वार्ता और विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली प्रगति से स्पष्ट होगा।

India Skills 2026-27: युवाओं के लिए बड़ा मौका! 19 अक्टूबर तक फिर खुले रजिस्ट्रेशन, 63 कौशल श्रेणियों में ले सकेंगे हिस्सा

IndiaSkills Competition 2026-27: करीब 4 लाख रजिस्ट्रेशन, अब योग्य उम्मीदवार Skill India Digital Hub पर कर सकते हैं आवेदन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने उम्मीदवारों की बढ़ती मांग को देखते हुए ‘इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27’ के लिए पंजीकरण विंडो दोबारा खोल दी है। अब इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस फैसले से उन युवाओं को एक और अवसर मिला है, जो पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण नहीं करा सके थे।

मंत्रालय के अनुसार, प्रतियोगिता के लिए अब तक करीब 4 लाख पंजीकरण प्राप्त हो चुके हैं। युवाओं को अपने व्यावसायिक कौशल का प्रदर्शन करने, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।

वर्ल्डस्किल्स शंघाई में भारत के प्रदर्शन से बढ़ा उत्साह

इंडियास्किल्स 2026-27 के लिए पंजीकरण दोबारा खोलने का फैसला वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारतीय दल के प्रदर्शन के बाद युवाओं में बढ़ी रुचि के बीच लिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में वैश्विक स्तर पर 10वां स्थान हासिल किया। टीम ने छह रजत पदक और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 20 मेडलियन फॉर एक्सीलेंस भी जीते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अपने आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले भारतीय प्रतिभागियों से मुलाकात की थी। इस बातचीत में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों और देश के विकास में व्यावसायिक कौशल की भूमिका को रेखांकित किया गया।

मंत्रालय को इसके बाद शैक्षणिक संस्थानों और इच्छुक अभ्यर्थियों से पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने के अनुरोध मिले। इसी के मद्देनजर आवेदन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया।

63 कौशल श्रेणियों में मिलेगा प्रतिभा दिखाने का अवसर

कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की देखरेख और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के कार्यान्वयन सहयोग से आयोजित यह प्रतियोगिता 63 उद्योग-संबंधी कौशल श्रेणियों को कवर करती है।

इनमें विनिर्माण, इंजीनियरिंग, निर्माण, डिजिटल तकनीक, रचनात्मक उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े कौशल शामिल हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और कौशल के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर देना है।

प्रतिभागियों के लिए जिला और क्षेत्रीय स्तर से लेकर राज्य, प्रादेशिक तथा राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ने का व्यवस्थित मार्ग निर्धारित किया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

कहां और कैसे करें आवेदन?

इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक Skill India Digital Hub (SIDH) के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले पात्रता, उपलब्ध कौशल श्रेणियों और संबंधित दिशा-निर्देशों की जांच करना जरूरी है।

मंत्रालय ने राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI), पॉलिटेक्निक, कॉलेजों, कौशल प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग भागीदारों से अपील की है कि वे इस अवसर की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाएं और पंजीकरण प्रक्रिया में सहयोग करें।

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख: 19 अक्टूबर 2026

वर्ल्डस्किल्स 2024 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन

मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारत ने 10वां स्थान हासिल किया, जबकि वर्ल्डस्किल्स ल्योन 2024 में भारतीय टीम 13वें स्थान पर रही थी। शंघाई प्रतियोगिता में भारत के 70 प्रतियोगियों के दल ने 63 कौशल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया।

यह प्रदर्शन व्यावसायिक शिक्षा, विशेष प्रशिक्षण और लगातार अभ्यास के महत्व को सामने लाता है। इंडियास्किल्स 2026-27 के जरिए युवाओं को अपनी क्षमताएं निखारने और रोजगार तथा करियर के नए अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने का मंच मिलेगा।

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खादी और ग्रामोद्योग: समावेशी और टिकाऊ भारत का ताना-बाना बुनना

रूप राशि और डॉ. नितेश धवन

हम भारत के गौरवान्वित नागरिक हैं—जो आज नामीनल जीडीपी की दृष्टि से विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है ।  आर्थिक विकास का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई क्षेत्र से संचालित होता है, जिसका देश की समग्र जीडीपी में एक-तिहाई योगदान है। इसमें भी ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों का प्रमुख योगदान है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खादी और हथकरघा क्षेत्र जैसे कुटीर उद्योगों के साथ-साथ ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों पर निर्भर करती है। ऐसे समय में, जब दुनिया असमानता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं आईटी और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में एआई नौकरियों को लगातार निगलते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में, खादी और ग्रामोद्योग (केवीआई) सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ये कम संसाधनों का उपयोग करके विभिन्न कौशल स्तरों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाकर स्थानीय स्तर पर पलायन को कम करने में भी सक्षम हैं। खादी—हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ—भारत की आत्मा रही है। जिम्मेदार उत्पादन में ऊर्जा और जल का दक्षतापूर्वक उपयोग करते हुए प्राकृतिक रेशों का इस्तेमाल किया जाता है। विकास के वाहक के रूप में इसकी क्षमता को,धीमी गति से ही सही, लेकिन निरन्‍तर मान्यता मिल रही है

हमारा उद्योग एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो प्राचीन काल से चली आ रही है और मानव भावनाओं के व्यक्तिगत स्पर्श तथा अनुकरणीय कौशल के साथ विविध कलात्मक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करती है। ऋग्वेद, रामायण, महाभारत, थालिया (यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस द्वारा रचित) और कौटिल्य से संबंधित विभिन्न लिखित ग्रंथों में न केवल कताई और बुनाई का उल्लेख मिलता है, बल्कि रेशम और कपास की उच्च गुणवत्ता का भी उल्लेख किया गया है। रामायण में कपास का उल्लेख संत के गुणों से जोड़कर किया गया है, वहीं विभिन्न प्रकार की बुनाइयां समृद्ध सांस्कृतिक ताने-बाने को दर्शाती हैं। हाथ से काते और हाथ से बुने ‘जनसमूह द्वारा उत्पादित’ खादी का उपयोग महात्मा गांधी जी ने उपनिवेशवादियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जाने वाले उत्पादन का मुकाबला करने के लिए किया था। स्वतंत्रता का यह वस्त्र आज अपने प्राकृतिक, आरामदायक और सतत् होने के विशिष्ट गुणों के कारण पसंदीदा फैशन स्टेटमेंट बनता जा रहा है। इसका हस्तनिर्मित स्वरूप इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करता है और इसलिए इसे बड़े पैमाने पर होने वाले सामान्यीकृत उत्पादन के साथ मात्रा के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं है।

खादी की यात्रा—स्वदेशी और स्वतंत्रता का एक प्रतीक होने से लेकर समकालीन फैशन और जीवनशैली की पसंद, विशेषकर पर्यावरण के प्रति जागरूक नई पीढ़ी की – बनने तक यह दर्शाती है कि कैसे परंपरा  स्‍वयं को बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के अनुरूप ढाल सकती है। वास्तव में, निकट-स्रोत उत्पादन की परंपरा, जो अधिक सतत् है, खादी पारिस्थितिकी तंत्र की अंतर्निहित शक्ति है। 21वीं सदी में, केवीआईसी हमारे अधिदेश में प्रधानमंत्री के आह्वान—“राष्ट्र के लिए खादी, फैशन के लिए खादी और परिवर्तन के लिए खादी”—से प्रेरणा लेते हुए कृषि, फाइबर और बाजार के बीच जुड़ाव को सुदृढ़ करने में योगदान दे रहा है।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि हाथ से कताई, खादी और हथकरघा के बीच प्रमुख अंतरकारी विशेषता है। चूंकि सूत भी हाथ से तैयार किया जाता है, इसलिए उत्पादन की श्रम–प्रधान प्रकृति बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करती है। वितरित व्यवस्था के तहत तैयार किए गए हस्तनिर्मित लच्‍छों के एकत्रीकरण का कार्य करने वाली खादी संस्थाओं को पिछले सात दशकों से खादी और ग्रामोद्योग द्वारा सहायता प्रदान की जाती रही है। केवीआईसी के विभागीय और गैर-विभागीय प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से कौशल विकास और कौशल उन्नयन के ज़रिए क्षमता वृद्धि की जा रही है। देश की दो-तिहाई ग्रामीण आबादी को देखते हुए, इस क्षेत्र का विशेष महत्व है, क्योंकि यह ग्रामीण उद्यमियों के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराता है। इस प्रकार के हस्तक्षेप जमीनी स्तर पर लोगों के लिए आय सृजन के अवसर पैदा करके सीधे एसडीजी 1 (गरीबी उन्मूलन) और एसडीजी 8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास) को आगे बढ़ाते हैं। हाल के उपाय, जिनमें खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा अप्रैल 2025 से कताई और बुनाई की मजदूरी में वृद्धि, कार्य उपकरणों, कार्य परिस्थितियों और उपकरण संबंधी अवसंरचना में सुधार के लिए अतिरिक्त सहायता तथा विपणन संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है, कारीगरों की आय बढ़ाने और पारंपरिक आजीविकाओं को आकर्षक तथा आर्थिक रूप से सतत् बनाने पर दिए जा रहे जोर को और अधिक प्रदर्शित करते समय के साथ, विशेष रूप से पिछले एक दशक के दौरान, खादी और ग्रामोद्योग (वीआई) पारिस्थितिकी तंत्र को लगातार सुदृढ़ किए जाने के कारण कुल उत्पादन लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि बिक्री लगभग 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

आगे बढ़ते हुए, आरामदायक वस्त्र के रूप में पहचाना जाने वाला खादी अब नई श्रेणियों और फैशन स्‍टेटमेंट का रूप ले रहा है। इसका परिवर्तन खादी डेनिम, डिजाइनर साड़ियों और ब्राइडल वियर, आधुनिक शर्ट और ट्राउज़र्स और रेमंड तथा पीटर इंग्लैंड जैसी मुख्यधारा की ब्रांडों के संग्रहों के रूप में स्पष्ट दिखाई देता है। एमएसएमई मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी (निफ्ट, दिल्ली) ने परिधानों की विभिन्न श्रेणियों, प्रिंट, बुनाई, कढ़ाई और पेंटिंग से युक्त घरेलू उत्पादों के संग्रह तथा साड़ी डिजाइनों सहित 2,129 खादी डिजाइन संग्रह विकसित किए हैं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी नॉलेज पोर्टल के माध्यम से खादी संस्थानों/इच्छुक उद्यमियों को सक्षम बनाने का कार्य जारी रखा है। शिशु परिधानों के क्षेत्र में हमारा प्रवेश इस तथ्य से प्रेरित है कि वैश्विक शिशु और बच्चों के कपड़ों का सेगमेंट बाजार के साल 2030 तक 60 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है (सीएजीआर 5–8.1 प्रतिशत के बीच), और इसमें जैविक कपास, हाइपोएलर्जेनिक कपड़ों तथा गैर-विषाक्त विनिर्माण प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। 21वीं सदी के भारत के लिए ब्रांड की स्थिति को प्रतिबिंबित करने वाले नवयुग खादी डिजाइनों को प्रगति मैदान स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में खादी नॉलेज पोर्टल के साथ लॉन्च किया गया। इनमें 710 नए उत्पाद शामिल हैं, जो समकालीन और नवोन्मेषी तरीके से “नए भारत की नई खादी” को प्रस्तुत करते हैं। सभी आयु वर्गों के लोगों, जेन ज़ी से लेकर दिल से युवा लोगों तक, को आकर्षित करने के लिए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वेलनेस/योग वियर का संग्रह ‘स्वधा’ भी लॉन्च किया गया है।

खादी में रोजगार सृजन के लिए बहुत कम निवेश की आवश्यकता होती है। खादी विकास योजना, ग्रामोद्योग विकास योजना, पीएमईजीपी जैसी योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे केवीआई संस्थानों/इकाइयों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सक्षम बनाया जा रहा है। सरकार वित्तीय सहायता, कार्यशील पूंजी की सुविधा, गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की सहायता, प्रशिक्षण, टूल-किट, मजदूरी क्षतिपूर्ति, विपणन सहायता, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और सामाजिक सुरक्षा लाभों सहित सभी आवश्यक सहायता प्रदान करके पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है। अहमदाबाद स्थित ईडीआईआई द्वारा किए गए मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, जिसकी रिपोर्ट जनवरी 2026 में प्रस्तुत की गई, सभी योजनाओं के तहत 75 प्रतिशत से अधिक कारीगरों ने हस्तक्षेप के बाद अपनी आय में मापनीय वृद्धि बताई और उन कारीगरों के लिए वर्षभर का स्‍थायी रोजगार सृजित हुआ, जो पहले मौसमी या प्रवासी श्रम पर निर्भर थे। इससे वास्तव में श्रमिकों के पलायन को कम करने में मदद मिली। खाद्य प्रसंस्करण, अगरबत्ती और हनी मिशन के तहत प्रशिक्षित कारीगर सुगंधित तेल, सुगंधित मोमबत्तियों या मूल्यवर्धित शहद उत्पादों जैसे नए उत्पादों की श्रेणियों में विविधता लेकर आए हैं। इस विविधीकरण से स्थानीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति वे अधिक सुदृढ़ हुए हैं।

खादी महिला सशक्तीकरण की दिशा में सीधे योगदान देती है और इस प्रकार समावेशी विकास के उद्देश्‍य के अनुरूप है। लगभग पांच लाख खादी कारीगरों में से करीब 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। अध्ययन के अनुसार, जीवीवाई योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी अधिक पाई गई, विशेष रूप से अगरबत्ती, हस्तनिर्मित कागज, हनी मिशन और सेवा उद्योग क्षेत्रों में। इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी रूप में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने उनके लिए सीधा पारिश्रमिक सुनिश्चित किया है, जिससे उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता और अपने घरों के भीतर तथा बाहर बढ़े हुए आत्मसम्मान के माध्यम से सशक्त बनाया जा रहा है। महिलाओं को उत्पादक आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने में सक्षम बनाकर, खादी सीधे एसडीजी 5 (स्‍त्री-पुरुष समानता) में योगदान देती है और साथ ही एसडीजी 10 (असमानताओं में कमी) के तहत सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में भी सहायता करती है।

हस्तनिर्मित उद्योग की वैश्विक मांग बढ़ रही है और इसमें निर्यात की अपार संभावनाएं हैं, जिनका दोहन किया जाना आवश्यक है। पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों की विशाल मात्रा और विविधता के साथ भारत विश्व में एक अपरिहार्य स्थान रखता है। वैश्विक हथकरघा उत्पादन का 85 प्रतिशत भारत में होता है और इस ‘अंतर्निहित मूल्य’ का लाभ उठाकर ‘अधिक प्रतिफल’ प्राप्त किया जा सकता है। श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे अन्य हथकरघा देश बहुत सीमित श्रेणी के उत्पादों का निर्माण करते हैं, लेकिन ये मुख्य रूप से घरेलू उत्पादन के लिए होते हैं। भारत में अपनी जनसांख्यिकीय बढ़त और विविध सांस्कृतिक विरासत के आधार पर खादी और हथकरघा उत्पादों की वैश्विक मांग को पूरा करने की अपार क्षमता है। दुनिया भर के उपभोक्ता हस्तनिर्मित, स्रोत का पता लगाने योग्य, प्राकृतिक और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार उत्पादों में बढ़ती रुचि दिखा रहे हैं। यह खादी और हस्तनिर्मित उत्पादों को केवल पारंपरिक वस्तुओं के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे प्रीमियम उत्पादों के रूप में पुनर्स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है, जो प्रामाणिकता, शिल्प कौशल की समृद्ध विरासत और सततता को दर्शाते हैं। विदेश मंत्रालय के अंतर्गत अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास के ट्रेड पोर्टल पर केवीआईसी ने ईपीसी के रूप में पंजीकरण कराया है। केवीआईसी ने प्रगतिशील खादी संस्थानों को ईएक्सआईएम (एक्सिम) लाइसेंस के साथ पंजीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू की है और अपनी क्षमताओं से परिचित कराने के लिए भारत स्थित वाणिज्य दूतावासों के साथ भी संपर्क स्थापित किया है, जिससे संपर्क सेतु बनाने में सहायता मिलेगी।

जहाँ एक ओर, खादी की अपनी पहचान है, वहीं हमारे उत्पादकों और मूल्य श्रृंखलाओं के संरक्षण के लिए अन्य देशों में ट्रेडमार्क पंजीकृत कर ब्रांड को सुरक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा, विशिष्ट ब्रांडिंग और भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग के तहत हाल ही में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) को पोंडुरु खादी के लिए जीआई टैग प्रदान किया गया है, जिससे विशिष्ट कपास तथा समान रूप से विशिष्ट प्रक्रिया से काते और बुने गए उत्पादों के लिए मूल्य प्राप्ति में वृद्धि होगी। इस वर्ष आगरा में आयोजित प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम में जीआई-टैग प्राप्त पोंडुरु खादी, भारत कस्तूरी कॉटन, बंगाल मलमल और प्राकृतिक रंग वाले कपास उत्पादों सहित विशिष्ट और प्रीमियम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।

हमें नई पीढ़ी के जेन ज़ी ग्राहकों को आकर्षित करने, उन्हें बनाए रखने तथा ऐसे विशिष्ट उत्पादों से अधिक मूल्य प्राप्त करने के लिए अपने उत्पादों में गुणवत्ता और आश्वासन सुनिश्चित करना होगा। इसी दिशा में, विभाग के केंद्रीय स्लाइवर संयंत्र (सीएसपी), जो लगभग साढ़े तीन दशक पहले स्थापित किए गए थे, का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वर्तमान में संचालित पांच सीएसपी में से कर्नाटक के चित्रदुर्ग और केरल के कुट्टूर स्थित संयंत्रों का आधुनिकीकरण पूरा हो चुका है और वे संचालन में हैं। कर्नाटक स्थित स्लाइवर संयंत्र अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करता है, जबकि उत्पादन को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए पवन ऊर्जा के उपयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। यह दृष्टिकोण एसडीजी 9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) के अनुरूप है, क्योंकि इसके माध्यम से पारंपरिक उद्यमों को डिजाइन, प्रौद्योगिकी, आधुनिक बाजारों और विकसित होती आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ा जा रहा है। खादी संस्थानों की उत्पादन अवसंरचना के प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा प्रौद्योगिकी-आधारित साझा सुविधा केंद्रों (सीएफसी) का प्रस्ताव ग्रामोद्योग समूहों को साझा अवसंरचना और आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से सुदृढ़ करने के लिए किया गया है। केवीआईसी मूल्य श्रृंखलाओं में ट्रेसेबिलिटी समाधान सक्षम कर रहा है, जिससे परंपरा के साथ आईटी के एकीकरण में सहायता मिलेगी और उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र की ओर नई पीढ़ी की रुचि भी आकर्षित होगी।

अंतत:, लेकिन महत्वपूर्ण रूप से, कुटीर उद्योग अपनी ऊर्जा दक्षता तथा जल दक्षता के चलते और प्राकृतिक रेशों/रंगों का उपयोग करने की वजह से प्रकृति से ही पर्यावरण के अनुकूल है। खादी एक पर्यावरण-अनुकूल वस्त्र है, जिसका कार्बन फुटप्रिंट बहुत कम है और जो पर्यावरण की दृष्टि से सतत् है। इसका मापन अग्रणी संस्थानों (आईआईटी, आईआईएम) द्वारा किया जा रहा है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद तथा ब्रांड प्रचार संबंधी संदेश में इन पहलुओं को उचित रूप से शामिल किया जा सके। हाल के समय में विश्व की अर्थव्यवस्थाओं का ध्यान अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ ऐसी पहलों की ओर केंद्रित हुआ है, जिनके माध्यम से आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों वाले विकास को भी सुनिश्चित किया जा सके। पर्यावरण संबंधी गंभीर चिंताओं, बढ़ती असमानताओं, भूख और गरीबी तथा संसाधनों के असमान वितरण के मद्देनजर भौतिक विस्तार के नैतिक पहलुओं ने नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया है। वर्ष 2015 में विश्व के देशों द्वारा अपनाए गए सतत् विकास के 17 लक्ष्यों वाले 2030 एजेंडा में गरीबी उन्मूलन, पर्यावरणीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और वितरणात्मक सामाजिक न्याय पर आधारित विकास हासिल करने के लिए कार्रवाई की दिशा रेखांकित की गई है। केवीआईसी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईआरसीओटी) के सहयोग से प्राकृतिक रंग वाले कपास की किस्मों के विकास के उद्देश्य से पहलों की सक्रिय रूप से संभावनाएं तलाश रहा है। यह दृष्टिकोण पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों के अनुरूप है, क्योंकि इससे पारंपरिक रंगाई प्रक्रियाओं में होने वाले जल के उपयोग, रासायनिक प्रदूषण और ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकता है। इसलिए, इस क्षेत्र को बढ़ावा देना उचित होगा, क्योंकि इसमें सतत् आजीविका के समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता है। ऐसे समय में, जब फैशन उद्योग पर अपशिष्ट, प्रदूषण और अत्यधिक संसाधन खपत की समस्या से निपटने का दबाव बढ़ रहा है, खादी एक वैकल्पिक दर्शन प्रस्तुत करती है—सोच-समझकर उत्पादन करना, जिम्मेदारी से उपभोग करना और प्रत्येक उत्पाद के पीछे के कौशल को महत्व देना। वास्तव में, कोई भी ऐसा रेशा या फिलामेंट, जिसे उसकी प्रकृति (जैसे प्लास्टिक रैपर) और/या लंबाई (जैसे देसी कपास) के कारण मशीनी कताई उद्योग द्वारा सूत में परिवर्तित नहीं किया जा सकता, उसे हाथ के चरखे के माध्यम से सूत में बदला जा सकता है और इस प्रकार ‘लूप में’ तथा ‘लूप से बाहर’ रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग को सक्षम बनाया जा सकता है। इससे हाथ से कताई में रोजगार की अतिरिक्त श्रेणियों में भी योगदान किया जा सकता है। यह खादी को सीधे एसडीजी 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) और एसडीजी 13 (जलवायु कार्रवाई) से जोड़ता है। जिम्मेदार कपास की खेती सहित सतत् कृषि पद्धतियां अधिक सतत् ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर एसडीजी 2 (शून्य भूख) और एसडीजी 15 (भूमि पर जीवन) में इसके योगदान को और मजबूत कर सकती हैं। इन संभावनाओं के साथ, निरंतर समर्थन और प्रोत्साहन से मानव समाज के लिए जिम्मेदारीपूर्वक आपूर्ति करने वाली आपूर्ति श्रृंखलाएं और अधिक मजबूत, गहरी और व्यापक होती रहेंगी।

      व्यापक संदेश बिल्‍कुल सीधा सा है; सततता हमेशा केवल नवीनतम प्रौद्योगिकी से ही नहीं आती। कभी-कभी यह उन प्रथाओं से भी उभर सकती है, जिन्हें समुदायों ने सदियों से संरक्षित रखा है और जिन्हें आधुनिक समाज अब फिर से खोज रहा है। खादी बिल्‍कुल ऐसी ही एक संभावना का प्रतिनिधित्व करती है। यह विरासत को नवाचार के साथ, रोजगार को उद्यमिता के साथ, महिला सशक्तीकरण को सामाजिक समावेशन के साथ तथा आर्थिक गतिविधि को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ती है। केवीआईसी में हम उस जादू को खोजने, उसके रहस्यों को उजागर करने, उसे फिर से स्थापित और सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे कताई-बुनाई करने वाले हमारे धागों के कलाकार पर्यावरण के प्रति जागरूक दुनिया के लिए बुन रहे हैं।

   (रूप राशि, केवीआईसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और डॉ. नितेश धवन, केवीआईसी, मुंबई के उप मुख्य  कार्यकारी अधिकारी हैं। )

HDFC बैंक ने लुधियाना में शुरू किया Festive Treat का 7वां सीजन, 25 महिला राइडर्स ने निकाली रैली

HDFC बैंक ने लुधियाना में Festive Treat के 7वें सीजन की शुरुआत 25 महिला राइडर्स की रैली से की। ग्राहकों के लिए 10,000 से अधिक ऑफर्स की जानकारी साझा की गई।

लुधियाना / सत्ता संदेश

HDFC बैंक ने लुधियाना में अपने लोकप्रिय Festive Treat कैंपेन के 7वें सीजन की शुरुआत 25 महिला राइडर्स की एक विशेष रैली के साथ की। इस पहल के जरिए महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का संदेश दिया गया। रैली में शामिल महिला राइडर्स ने लोगों को महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने और उन्हें नए अवसरों के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।

रैली को HDFC बैंक के जोनल हेड भूपिंदर सिंह वासु, क्लस्टर हेड मृदुल रिसवान, हरमीत कौर, अमित शर्मा और मार्केटिंग मैनेजर अमनदीप सिंह भुल्लर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बैंक के फेस्टिव ऑफर्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।

चार बैंक शाखाओं तक पहुंचा जागरूकता अभियान

रैली के दौरान महिला राइडर्स ने लुधियाना में HDFC बैंक की चार शाखाओं का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने Festive Treat कैंपेन की जानकारी साझा की और बैंकिंग समुदाय के साथ संवाद किया।

बैंक के अनुसार, कैंपेन के 7वें सीजन में ग्राहकों के लिए 10,000 से अधिक आकर्षक ऑफर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें बैंकिंग अकाउंट, लोन और आसान EMI विकल्पों से जुड़े ऑफर्स शामिल हैं। इनका उद्देश्य त्योहारों के दौरान ग्राहकों को विभिन्न वित्तीय जरूरतों के लिए सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना है।

महिला सशक्तिकरण और ग्राहक संबंधों पर जोर

HDFC बैंक की इस पहल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय समुदाय के साथ अपने संबंध मजबूत करना भी है। रैली के माध्यम से महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और नए अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

लुधियाना के ढोलेवाल चौक स्थित HDFC बैंक शाखा में आयोजित इस कार्यक्रम ने Festive Treat अभियान की शुरुआत को खास बनाया। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे ऑफर्स, पात्रता और संबंधित नियमों एवं शर्तों की विस्तृत जानकारी के लिए अपनी नजदीकी शाखा से संपर्क करें।

परमिंदर झोटा की हत्या पर भाजपा का हमला, अनिल सरीन ने पूछा- नशा खत्म क्यों नहीं हुआ?

मानसा में परमिंदर सिंह झोटा की हत्या पर भाजपा नेता अनिल सरीन ने भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल किए।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मानसा में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार नशे पर लगाम लगाने में नाकाम रही है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही है।

अनिल सरीन ने कहा कि भाजपा का सवाल मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल से है कि सरकार नशे को खत्म करने में सफल नहीं हुई, लेकिन नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की जान चली गई। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल

भाजपा नेता ने दावा किया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को सुरक्षा मिलने के बजाय कार्रवाई और खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने परमिंदर सिंह झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना राज्य में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मीडिया से बातचीत में सरीन ने पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा इस घटना की निंदा करती है और दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है।

मानसा में गोली मारकर की गई थी परमिंदर सिंह झोटा की हत्या

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मानसा में एक मेडिकल स्टोर के मालिक के साथ कथित विवाद के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। झोटा नशे की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे और इस संबंध में सोशल मीडिया पर वीडियो भी साझा करते थे। घटना के बाद पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा नेता अनिल सरीन ने मांग की कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और नशा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो। इस मामले ने एक बार फिर पंजाब में नशे की समस्या से निपटने और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

बुढलाडा में महिला पार्षद के घर लाखों के गहने चोरी, नगर कौंसिल की बैठक में गया था परिवार

बुढलाडा में पार्षद संदीप कौर के घर से लाखों रुपये के सोने और अन्य गहने चोरी। परिवार नगर कौंसिल की बैठक में गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

बुढलाडा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

पंजाब के बुढलाडा शहर में चोरी की वारदात सामने आई है। अज्ञात चोर वार्ड नंबर 9 की पार्षद संदीप कौर के घर से सोने समेत लाखों रुपये के कीमती गहने चोरी कर फरार हो गए। घटना के समय पार्षद अपने पति के साथ नगर कौंसिल की बैठक में शामिल होने के लिए कार्यालय गई हुई थीं। वारदात की सूचना मिलने के बाद थाना सिटी बुढलाडा की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नगर कौंसिल की बैठक में गया था परिवार

जानकारी के अनुसार, पार्षद संदीप कौर का घर बुढलाडा के वार्ड नंबर 11 में स्थित है। उनके पति अवतार सिंह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ नगर कौंसिल की बैठक में शामिल होने के लिए कौंसिल कार्यालय गए हुए थे। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति घर में दाखिल हुए और अलमारियों में रखे सोने तथा अन्य कीमती गहनों पर हाथ साफ कर दिया।

परिवार के घर लौटने पर चोरी की घटना का पता चला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना के बाद इलाके में चोरी की वारदात को लेकर चर्चा है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपियों की तलाश जारी

थाना सिटी बुढलाडा पुलिस ने पीड़ित के बयानों के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जांच कर रही है।

फिलहाल चोरी हुए गहनों की कुल कीमत और वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।

19 अक्टूबर को मनाया जाएगा 48वां प्रो. मोहन सिंह यादगारी सांस्कृतिक मेला, प्रतिमा पर अर्पित की जाएंगी श्रद्धांजलियां

लुधियाना में पंजाबी भवन के नजदीक सुबह 10 बजे होगा सादा कार्यक्रम, गायक, कवि और साहित्यकार करेंगे प्रो. मोहन सिंह को याद

लुधियाना / सत्ता संदेश

प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन की विशेष बैठक में 48वां प्रो. मोहन सिंह यादगारी सांस्कृतिक मेला 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाने का फैसला लिया गया। बैठक परगट सिंह ग्रेवाल के संरक्षण में हुई, जिसकी अध्यक्षता राजीव कुमार लवली और गुरनाम सिंह धालीवाल ने की।

बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए राजीव कुमार लवली और गुरनाम सिंह धालीवाल ने बताया कि 20 अक्टूबर को दशहरा होने के कारण इस बार 19 अक्टूबर को मेले के तहत सादा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजे लुधियाना में पंजाबी भवन के नजदीक स्थित प्रो. मोहन सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित की जाएगी। इस दौरान स. जगदेव सिंह जस्सोवाल और प्रो. मोहन सिंह को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी।

गायक, कवि और साहित्यकार करेंगे याद

आयोजकों के अनुसार, पुष्पमाला अर्पित करने के दौरान उपस्थित गायक, कवि और साहित्यकार अपनी-अपनी कला और अंदाज के माध्यम से प्रो. मोहन सिंह को याद करेंगे। यह कार्यक्रम पंजाबी साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियों को एक साथ लाने और महान साहित्यकार की स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

राजीव कुमार लवली और गुरनाम सिंह धालीवाल ने पंजाबी कला प्रेमियों तथा प्रो. मोहन सिंह मेले से जुड़ी सभी शख्सियतों से अपील की कि वे 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजे कार्यक्रम में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करें।