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पंजाब के कैंसर अस्पताल में बड़ा खुलासा: 1,000 परिवारों की जांच में करीब 30% में वंशानुगत कैंसर से जुड़े जेनेटिक बदलाव

स्तन और ओवेरियन कैंसर से संबंधित थे लगभग 95% पहचाने गए आनुवंशिक बदलाव; होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने शुरू की थी जनवरी 2025 में कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश,

दिनांक : 14 अक्टूबर 2026

कैंसर के बढ़ते जोखिम की समय रहते पहचान और रोकथाम की दिशा में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अस्पताल की कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक में मूल्यांकन किए गए उत्तर भारत के 1,000 परिवारों में से लगभग 30 प्रतिशत परिवारों में ऐसे आनुवंशिक बदलाव पाए गए हैं, जो वंशानुगत कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। अस्पताल के अनुसार, पहचाने गए आनुवंशिक बदलावों में लगभग 95 प्रतिशत स्तन और डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर से संबंधित थे।

अस्पताल की समर्पित कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है, जिनमें कैंसर होने का आनुवंशिक जोखिम मौजूद हो सकता है, ताकि जरूरत के अनुसार समय रहते जांच, निगरानी और रोकथाम की योजना बनाई जा सके।

912 मरीजों की जेनेटिक जांच, 132 परिजनों का भी मूल्यांकन

अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, क्लिनिक में परामर्श के लिए आए 1,000 परिवारों में से 912 कैंसर-प्रभावित प्राथमिक मरीजों की आनुवंशिक जांच की गई। इन मरीजों को ‘इंडेक्स पेशेंट’ कहा जाता है, जिनकी जांच से परिवार में संभावित वंशानुगत कैंसर जोखिम का पता लगाने में मदद मिलती है।

जांच में लगभग 30 प्रतिशत की दर से कैंसर जोखिम से जुड़े आनुवंशिक बदलाव सामने आए। इसके अलावा, जोखिम की आशंका वाले 132 रक्त-संबंधियों—जैसे माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों—की भी जांच की गई। इससे परिवार के अन्य सदस्यों में संभावित जोखिम की पहचान करने और जरूरत के अनुसार स्क्रीनिंग तथा नियमित फॉलो-अप की योजना बनाने में मदद मिली।

क्या होते हैं वंशानुगत कैंसर से जुड़े जेनेटिक बदलाव?

आनुवंशिक बदलाव DNA या आनुवंशिक कोड में होने वाले परिवर्तन हैं। इनमें से कुछ बदलाव व्यक्ति में विशेष प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी जोखिम-संबंधी आनुवंशिक बदलाव का मिलना यह निश्चित नहीं करता कि व्यक्ति को भविष्य में कैंसर होगा ही।

अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया के अनुसार, आनुवंशिक जांच आमतौर पर रक्त के नमूने से की जाती है। चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर 26 से 84 जीनों की जांच की जा सकती है। इसके परिणामों से डॉक्टरों को मरीज के लिए उपचार, अधिक निगरानी और जोखिम कम करने के संभावित उपायों के संबंध में निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

उन्होंने बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर कुछ मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना, नियमित स्क्रीनिंग और विशेष परिस्थितियों में जोखिम कम करने वाली सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। इससे ऐसे परिजनों की पहचान करने में भी मदद मिलती है, जिन्हें आनुवंशिक जांच या अतिरिक्त निगरानी की जरूरत हो सकती है।

किन लोगों को आनुवंशिक परामर्श पर विचार करना चाहिए?

डॉ. गुलिया के अनुसार, यदि परिवार में कई लोगों को कैंसर हुआ हो, खासकर एक जैसे या आपस में संबंधित प्रकार के कैंसर, तो आनुवंशिक परामर्श उपयोगी हो सकता है। कम उम्र में कैंसर होना, दोनों स्तनों में कैंसर विकसित होना, अलग-अलग अंगों में एक से अधिक प्राथमिक कैंसर होना या कुछ वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम के संकेत मिलना भी चिकित्सकीय मूल्यांकन का आधार हो सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में कैंसर का इतिहास न होने पर भी किसी व्यक्ति में आनुवंशिक जोखिम मौजूद हो सकता है। स्तन, डिम्बग्रंथि, जठरांत्र संबंधी और प्रोस्टेट कैंसर सहित कुछ कैंसरों के मामलों में मरीज के चिकित्सकीय इतिहास और पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर आनुवंशिक परामर्श की सलाह दी जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवंशिक जोखिम का पता चलने पर उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ निगरानी और रोकथाम की योजना बनाई जा सकती है। हालांकि, जांच कराने या किसी निवारक प्रक्रिया का निर्णय विशेषज्ञ की सलाह और व्यक्तिगत जोखिम के आकलन के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।

संगरूर केंद्र में भी शुरू हुई कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक

HBCH&RC पंजाब ने अपने संगरूर केंद्र में भी कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक शुरू की है। अस्पताल में ही आनुवंशिक जांच की सुविधा स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। फिलहाल जांच के लिए नमूने टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई भेजे जाते हैं।

क्लिनिक का संचालन जेनेटिक काउंसलर हाशिमे इस्माइल, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रग्यात ठाकुर और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा गुलिया की देखरेख में किया जा रहा है।

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, पंजाब, परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक इकाई है। अस्पताल की यह पहल कैंसर के संभावित वंशानुगत जोखिम की पहचान, परिवारों को परामर्श और समय रहते चिकित्सकीय योजना बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

SIR पर सुनील जाखड़ का AAP-कांग्रेस पर निशाना, बोले- पंजाब की फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं आई कोई परेशानी

अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद जाखड़ ने उठाए सवाल; हरपाल चीमा और भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र, प्रगट सिंह ने फॉर्म-6 पर मांगा जवाब

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधा। जाखड़ ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में SIR को लेकर विरोध और हंगामा हो रहा है, लेकिन पंजाब में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद किसी बड़ी परेशानी की बात सामने नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंजाब में प्रक्रिया को लेकर स्थिति सामान्य रही, तो दूसरे राज्यों में इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है।

गौरतलब है कि पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को जारी की गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सूची में कुल 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। SIR से पहले दर्ज मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची में करीब 13.60 लाख की कमी आई है, जबकि अगस्त में जारी ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। <Cite refs={[“turn557186search6″,”turn557186search9”]}/>

हरपाल चीमा और भगवंत मान के क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र

सुनील जाखड़ ने अपने बयान में वित्त मंत्री हरपाल चीमा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में हुई कमी का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हरपाल चीमा के क्षेत्र में करीब 1.83 लाख मतदाताओं में से लगभग 3,000 नाम कम हुए, जबकि भगवंत मान के क्षेत्र में 1.57 लाख के आसपास मतदाताओं में से करीब 5,000 नाम कम हुए।

जाखड़ ने कांग्रेस नेताओं के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का भी जिक्र किया और कहा कि इन आंकड़ों को सामने रखकर स्थिति को समझना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रगट सिंह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस को ऐसा अध्यक्ष मिला है, जो किसी मुद्दे पर समझौता नहीं करता। साथ ही उन्होंने नेताओं से चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों को गुमराह नहीं करने और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखने की अपील की।

नोट: विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित आंकड़े सुनील जाखड़ के बयान के अनुसार हैं; इनका स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्रवार सत्यापन उपलब्ध जानकारी में नहीं किया गया है।

फॉर्म-6 को लेकर प्रगट सिंह ने उठाए सवाल

SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस नेता प्रगट सिंह ने कहा कि यदि किसी को फॉर्म-6 से संबंधित कोई समस्या है, तो उसे तथ्यों और उचित प्रक्रिया के आधार पर उठाना चाहिए, न कि केवल हंगामा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई वास्तविक परेशानी थी, तो संबंधित स्तर पर उस पर सवाल उठाए जाने चाहिए थे।

जाखड़ ने प्रगट सिंह को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपने आसपास मौजूद ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो उनके मुताबिक उन्हें गलत दिशा में ले जा सकते हैं। दोनों नेताओं की टिप्पणियों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

नशे के मामले में पिस्टल लाइसेंस पर उठाया सवाल

पंजाब में नशे के मुद्दे पर बोलते हुए सुनील जाखड़ ने एक व्यक्ति के खिलाफ नशे से संबंधित मामले होने के बावजूद उसके पास पिस्टल का लाइसेंस होने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे हैरानी की बात बताया और कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

जाखड़ ने एक ड्रग इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने जिस मामले का जिक्र किया, उसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

मोहाली SSP को ED के पत्र पर सरकार को घेरा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर मामला दर्ज करने की मांग किए जाने के सवाल पर जाखड़ ने पंजाब सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे “महाबेईमान सरकार” कहा।

यह जाखड़ की राजनीतिक टिप्पणी है। ED के पत्र, उसमें उल्लिखित आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों या अधिकारियों का पक्ष जरूरी है।

परमिंदर झोटा हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई: आरोपी अश्वनी कुमार का घर गिराया, राजस्थान के सालासर से गिरफ्तारी

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

पंजाब के मानसा में परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में आरोपी बताए जा रहे मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के घर को प्रशासन ने गिरा दिया। वहीं, पुलिस ने राजस्थान के सालासर में दबिश देकर अश्वनी कुमार को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। घर गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया गया मकान

जानकारी के अनुसार, परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में कार्रवाई करते हुए प्रशासन की टीम मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के घर पहुंची। वहां प्रशासन की मौजूदगी में मकान गिराने की कार्रवाई की गई। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

हालांकि, मकान गिराने के पीछे प्रशासन की ओर से बताए गए आधिकारिक कारणों और कार्रवाई के कानूनी आधार की विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर चर्चा में थे झोटा

परमिंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठाने और अपनी गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे, जहां कथित तौर पर अवैध दवाइयों की बिक्री को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी दौरान विवाद बढ़ने पर गोली चलने की घटना सामने आई।

झोटा को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद मानसा में लोगों में आक्रोश देखने को मिला और मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग उठी।

गिरफ्तारी के बाद जांच पर टिकी नजरें

पुलिस की ओर से राजस्थान के सालासर में दबिश देकर अश्वनी कुमार को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब मामले में आगे की पुलिस जांच, आरोपों से जुड़े साक्ष्यों और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

प्रशासन की ओर से मकान गिराने की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इसके आधार और प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शारदीय नवरात्रि: माँ दुर्गा की आराधना से नारी शक्ति का जागरण

नौ दिन की साधना, आत्मबल और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प 

सावित्री ठाकुर

भारतीय संस्कृति में शारदीय नवरात्रि शक्ति, श्रद्धा, साधना और आत्मशुद्धि का पावन पर्व है। माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना हमें जीवन में साहस, संयम, धैर्य, करुणा और आत्मविश्वास अपनाने की प्रेरणा देती है। ये नौ दिन केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर की शक्ति को पहचानने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का संकल्प लेने का समय भी हैं।

नवरात्रि का प्रत्येक दिन एक विशेष संदेश लेकर आता है। माँ शैलपुत्री दृढ़ संकल्प, माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या और अनुशासन, माँ चंद्रघंटा साहस तथा माँ कूष्मांडा सृजनशीलता की प्रेरणा देती हैं। माँ स्कंदमाता वात्सल्य, माँ कात्यायनी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, माँ कालरात्रि निर्भयता, माँ महागौरी पवित्रता और माँ सिद्धिदात्री साधना की पूर्णता का संदेश देती हैं।

व्रत, ध्यान, मंत्र-जप और सेवा के माध्यम से हम मन को एकाग्र कर सकते हैं तथा अपने जीवन में सकारात्मकता और अनुशासन ला सकते हैं। सच्ची साधना वही है, जो हमारे विचारों को शुद्ध करे, व्यवहार में संवेदनशीलता लाए और हमें दूसरों के कल्याण के लिए प्रेरित करे।

माँ की आराधना और नारी शक्ति का सम्मान

भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। माँ दुर्गा का स्वरूप हमें याद दिलाता है कि नारी में ममता और करुणा के साथ साहस, नेतृत्व और संघर्ष की अद्भुत क्षमता भी विद्यमान है। आज महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, उद्यमिता, कृषि और राजनीति सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का परिचय दे रही हैं।

नारी शक्ति का वास्तविक सम्मान केवल देवी की पूजा तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनके निर्णयों का सम्मान करने और भेदभाव से मुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयास ही माँ की आराधना को वास्तविक अर्थ प्रदान करते हैं।

जब एक महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए महिला सशक्तीकरण केवल महिलाओं के विकास का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नारी सम्मान से राष्ट्र निर्माण तक: महिला एवं बाल विकास की नई दृष्टि

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और अवसरों से परिपूर्ण वातावरण तैयार करना है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, बालिकाओं की शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे विषय हमारे सामूहिक प्रयासों की प्राथमिकता हैं।

महिला सशक्तीकरण को राष्ट्र के विकास का अभिन्न अंग बनाने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। सरकार की सोच महिलाओं के विकास तक सीमित न रहकर उन्हें विकास का नेतृत्वकर्ता बनाने की है।

इसी दिशा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ ऐतिहासिक पहल है, जिसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई अर्थात 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान किया गया। यह पहल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और निर्णय-निर्माण में उनकी भूमिका सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्र सरकार ने महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण के साथ उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करता है। मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, सहायता और सशक्तीकरण पर केंद्रित है, जबकि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 मातृ एवं बाल पोषण को मजबूती प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पात्र गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नवरात्रि पर लें नारी सम्मान और सेवा का संकल्प

शारदीय नवरात्रि हमें सिखाती है कि शक्ति का वास्तविक अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि उसका उपयोग सत्य, न्याय और लोककल्याण के लिए करना है। इस पावन अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देंगे, महिलाओं के योगदान का सम्मान करेंगे और जरूरतमंद बच्चों एवं महिलाओं की सहायता के लिए आगे आएँगे।

आइए, इन नौ दिनों की साधना को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाएँ। हमारी आस्था आत्मबल बने, हमारी भक्ति सेवा का मार्ग प्रशस्त करे और हमारे संकल्प महिला सशक्तीकरण तथा बाल कल्याण को नई दिशा दें।

माँ दुर्गा से प्रार्थना है कि उनकी कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आए, प्रत्येक महिला को आत्मसम्मान एवं आत्मनिर्भरता की शक्ति मिले और प्रत्येक बेटी अपने सपनों को साकार कर सके। हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें, जहाँ नारी का सम्मान हो, बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो और समान अवसर प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचें।

आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

जय माता दी!

(लेखिका महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की केंद्रीय राज्य मंत्री हैं)

माछीवाड़ा में अवैध झुग्गियों पर चला नगर कौंसिल का पीला पंजा, करीब 100 परिवारों के रहने की जगह हटाई लिए

माछीवाड़ा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

Machhiwara News: पंजाब के माछीवाड़ा में पुरानी सब्जी मंडी के पास बनी झुग्गियों के खिलाफ नगर कौंसिल ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हटवा दिया। ये झुग्गियां मार्केट कमेटी की जमीन और कुछ निजी मालिकाना जमीन पर बनी हुई थीं। बताया जा रहा है कि यहां करीब 100 परिवार झुग्गियां बनाकर रह रहे थे। नगर कौंसिल की ओर से पहले नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद कुछ लोगों ने खुद ही झुग्गियां हटा ली थीं। बाकी झुग्गियों को टीम ने मशीनों की मदद से हटाया।

नोटिस के बाद नगर कौंसिल ने की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, नगर कौंसिल माछीवाड़ा ने करीब एक सप्ताह पहले झुग्गियों में रहने वाले लोगों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद लोगों ने काफी हद तक अपनी झुग्गियां खुद ही हटा ली थीं। जो झुग्गियां बाकी रह गई थीं, उन्हें नगर कौंसिल की टीम ने मौके पर पहुंचकर मशीनों की सहायता से हटवा दिया।

कार्रवाई के दौरान संबंधित जमीन के निजी मालिकों ने भी कब्जे हटाने में सहयोग किया। नगर कौंसिल ने यह कार्रवाई पार्षदों, पुलिस और प्रशासन के सहयोग से की।

आसपास प्रदूषण फैलने की शिकायतों का भी जिक्र

नगर कौंसिल प्रधान मोहित कुंद्रा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि झुग्गियों के आसपास घनी आबादी है और नजदीक ही गुरुद्वारा श्री गुरु रविदास जी स्थित है। उनके अनुसार, वहां रहने वाले कुछ लोग कबाड़ का काम करते थे। आरोप है कि रात के समय टायर जलाए जाने से इलाके में प्रदूषण फैलता था, जिससे आसपास के निवासियों को परेशानी होती थी।

कुंद्रा ने कुछ लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

अन्य जगहों पर अवैध कब्जे मिलने पर भी होगी कार्रवाई: प्रधान

नगर कौंसिल प्रधान मोहित कुंद्रा ने कहा कि यदि अन्य स्थानों पर भी सरकारी या निजी जमीन पर अवैध कब्जे पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा कार्रवाई में पार्षदों, पुलिस और प्रशासन का सहयोग लिया गया।

स्थानीय लोगों ने जताया आभार

झुग्गियां हटाए जाने के बाद आसपास के लोगों ने नगर कौंसिल का आभार जताया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि उन्हें लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिली है।

इस मौके पर पार्षद अमनदीप सिंह तनेजा, नगिंदरपाल मक्कड़, जसवीर सिंह भट्टियां वाले, नीरज कुमार, निर्मल सिंह, नरेंद्रपाल और इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Amritsar Missing Case: 3 महीने से बेटे का इंतजार कर रही मां, संदीप सिंह का अब तक नहीं मिला सुराग

अमृतसर / सत्ता संदेश

Amritsar Missing Case: पंजाब के अमृतसर में 32 वर्षीय संदीप सिंह पिछले करीब तीन महीनों से लापता है। बेटे का कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार परेशान है और बुजुर्ग मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने थाना बी-डिवीजन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन से बेटे को जल्द तलाशने की मांग की है। वहीं, पुलिस की ओर से युवक की तलाश जारी होने की बात कही गई है।

Amritsar Missing Case: 3 अगस्त को घर से निकला था संदीप सिंह, वापस नहीं लौटा

परिवार के अनुसार, संदीप सिंह 3 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे घर से निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों का कहना है कि युवक के घर से जाने के कुछ समय बाद उसकी पत्नी भी उसके पीछे गई थी और करीब डेढ़ से दो घंटे बाद घर लौट आई, लेकिन संदीप सिंह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

परिवार के मुताबिक, संदीप सिंह वेल्डिंग का काम करता था। उसके लापता होने के बाद परिजनों ने अपने स्तर पर भी उसकी तलाश की। युवक की तस्वीरों वाले पोस्टर भी लगाए गए, लेकिन परिवार का दावा है कि अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।

Amritsar Missing Case: पुराने घरेलू विवाद को लेकर परिवार ने जताई आशंका

लापता युवक के परिवार ने पुराने घरेलू विवाद का जिक्र करते हुए किसी रंजिश की आशंका जताई है। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद घरेलू कलह की बातें भी सामने आती रही थीं।

हालांकि, परिवार की ओर से जताई गई आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का बयान सामने आना जरूरी है।

Amritsar Missing Case: पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं परिवार, मोबाइल ट्रेसिंग पर उठाए सवाल

परिवार का आरोप है कि संदीप सिंह के लापता होने की शिकायत थाना बी-डिवीजन और संबंधित पुलिस अधिकारियों को दी गई थी। परिजनों के अनुसार, उन्हें मोबाइल नंबरों की ट्रेसिंग करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बार-बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।

बुजुर्ग मां अपने बेटे की तलाश में पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही हैं। परिवार चाहता है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाए और संदीप सिंह का जल्द पता लगाया जाए।

Amritsar Missing Case: सुनवाई नहीं हुई तो सीपी कार्यालय के बाहर धरने की चेतावनी

परिवार ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संदीप सिंह की तलाश तेज करने की मांग की है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो वे आने वाले दिनों में अमृतसर पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन करेंगे।

Amritsar Missing Case: पुलिस का कहना है—युवक की तलाश जारी

पुलिस कर्मचारियों से बातचीत के दौरान कैमरे से दूर दी गई जानकारी के अनुसार, युवक के लापता होने संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस ने यह भी कहा कि युवक की तलाश के लिए पोस्टर जारी किए गए हैं और उसकी खोज जारी है। परिवार की ओर से जताई गई आशंकाओं की जांच किए जाने की बात भी कही गई है।

फिलहाल, परिवार को संदीप सिंह के बारे में किसी ठोस जानकारी का इंतजार है। अब जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि युवक कहां है और उसके लापता होने के पीछे क्या कारण हैं।

Mansa Firing: परमिंदर सिंह झोटा की मौत, नशे के खिलाफ उठाते थे आवाज, साथी भी हुआ घायल

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

Mansa Firing : पंजाब के मानसा में मंगलवार, 13 अक्टूबर को दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मौत हो गई। गोली लगने के बाद उन्हें गंभीर हालत में मानसा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना में उनका एक साथी भी घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Mansa Firing : मेडिकल स्टोर पर हुई गोलीबारी, मालिक पर आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की घटना एक मेडिकल स्टोर पर हुई। बताया जा रहा है कि परमिंदर सिंह झोटा अपने साथी के साथ दवा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार पर दोनों पर गोली चलाने का आरोप लगा है। आरोप है कि झोटा पर लगातार तीन फायर किए गए। हालांकि, गोलीबारी के कारणों और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

Mansa Firing : नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे झोटा

बताया जा रहा है कि घटना के समय परमिंदर सिंह झोटा फेसबुक पर लाइव थे। वह पिछले कुछ वर्षों से पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका अभियान खास तौर पर उन दुकानों के खिलाफ रहता था, जहां कथित तौर पर नशीली गोलियां और अन्य प्रतिबंधित दवाएं बेचे जाने की शिकायतें सामने आती थीं।

Mansa Firing : राजा वड़िंग और बिक्रम सिंह मजीठिया ने उठाए सवाल

परमिंदर सिंह झोटा की मौत पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दुख जताया और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या राज्य सरकार की नाकामी को दर्शाती है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

वहीं, शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब में नशे की समस्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Mansa Firing : पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होंगे घटना के कारण

इस घटना के बाद मानसा में चिंता का माहौल है। गोलीबारी के पीछे की वजह, आरोपों की सच्चाई और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का पता पुलिस जांच के बाद ही चल सकेगा।

MLA मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को श्री अकाल तख्त साहिब सेक्रेटेरिएट में जाने से रोका

जत्थेदार के आदेश का दिया हवाला, कथित आपत्तिजनक बयानों पर माफी मांगने की मांग; ऐसा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

अमृतसर / सत्ता संदेश

श्री अकाल तख्त साहिब के सेक्रेटेरिएट में विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को प्रवेश से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के पीए जसकरण सिंह ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधायक को उनकी जाति के कारण नहीं, बल्कि जत्थेदार साहिब के आदेश पर रोका गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्यासपुरा ने पहले श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और सम्मानित सिख हस्तियों एवं संस्थाओं के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान दिए थे।

जसकरण सिंह ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का सेक्रेटेरिएट किसी व्यक्ति के साथ उसके धर्म, जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उनके मुताबिक, विधायक को प्रवेश से रोकने का फैसला उनके कथित बयानों के मद्देनजर लिया गया।

जातिगत भेदभाव के आरोपों पर क्या बोले जसकरण सिंह?

जसकरण सिंह ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि विधायकों के प्रतिनिधिमंडल में दलबीर सिंह टोंग और कुलवंत सिंह पंडोरी भी शामिल थे, जिन्हें सम्मान के साथ अंदर बैठाया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की बात सुनी गई और उन्हें चाय भी पिलाई गई। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि सेक्रेटेरिएट में जाति के आधार पर भेदभाव की कोई नीति नहीं है।

उन्होंने बताया कि 29 जून को विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे थे, जहां बेअदबी से जुड़े कानून के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। जसकरण सिंह के दावे के अनुसार, उस समय कानून की कमियों को दूर करने और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर विचार करने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में विधायक द्वारा मीडिया में दिए गए कुछ बयानों को उन्होंने आपत्तिजनक बताया।

प्रतिनिधिमंडल के आने की सूचना और प्रवेश को लेकर क्या कहा?

जसकरण सिंह के मुताबिक, विधायकों के प्रतिनिधिमंडल के आने की पूर्व सूचना और समय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने बताया कि सुबह डीपीआरओ इंदरजीत सिंह हरपुरा का फोन आया था कि कुछ विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के सेक्रेटेरिएट पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में प्रतिनिधिमंडल के आने का उद्देश्य स्पष्ट नहीं था। बाद में जानकारी मिली कि विधायक दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में हुई घटना के संबंध में ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। इसके बाद उनके आने की अनुमति दी गई। जसकरण सिंह के अनुसार, दरबार साहिब परिसर में पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की जानकारी मिली और उसी दौरान ग्यासपुरा को प्रवेश से रोकने का फैसला लागू किया गया।

गुरुद्वारा बंगला साहिब मामले की भी होगी जांच

दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर नारे लगाए जाने के मुद्दे पर भी जसकरण सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब के अपने मर्यादित नियम और शिष्टाचार होते हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों के दरवाजे सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति माथा टेकने, लंगर छकने या शरण लेने आ सकता है, लेकिन धार्मिक परिसर के भीतर राजनीतिक गतिविधियां करना या नारे लगाना गुरुद्वारे के शिष्टाचार के खिलाफ है।

जसकरण सिंह ने दावा किया कि उनके पास पहुंची कुछ तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर परिसर में प्रवेश करते और कथित तौर पर नारे लगाते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिसर में ऐसी गतिविधियां हुई हैं या पुलिस ने अंदर प्रवेश किया है, तो संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी की जांच होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, इस मामले में सौंपे गए ज्ञापन को जत्थेदार साहिब के ध्यान में लाया गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से भी जवाब मांगा जा सकता है और मामले की जांच श्री अकाल तख्त साहिब के स्तर पर करवाई जा सकती है।

ग्यासपुरा से माफी की मांग, कार्रवाई की चेतावनी

जसकरण सिंह ने विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा से श्री अकाल तख्त साहिब, सिख पंथ और सम्मानित सिख संस्थाओं के बारे में कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के लिए माफी मांगने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विधायक माफी नहीं मांगते हैं, तो जत्थेदार साहिब के आदेश के अनुसार आने वाले दिनों में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे निज्जर साहिब और अन्य विधायकों से इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा गया था। जसकरण सिंह के अनुसार, यदि वे अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, इस पूरे विवाद में जसकरण सिंह ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को नकारते हुए प्रवेश रोकने के फैसले को कथित आपत्तिजनक बयानों से जोड़ा है। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा का इस पूरे मामले पर पक्ष सामने आने के बाद विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

अमृतसर में थाने के बाहर महिला का हंगामा, इंसाफ की मांग करते हुए खुद पर तेल डालने की कोशिश

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर के सिविल लाइंस थाने के बाहर अंजलि ने इंसाफ न मिलने का आरोप लगाते हुए खुद पर तेल डालने की कोशिश की। कोर्ट में मारपीट की शिकायत पर निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।अमृतसर में थाने के बाहर महिला का हंगामा, इंसाफ की मांग करते हुए खुद पर तेल डालने की कोशिश ।

अमृतसर | सत्ता संदेश

अमृतसर के सिविल लाइंस थाने के बाहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब अंजलि नाम की एक महिला ने इंसाफ न मिलने का आरोप लगाते हुए खुद पर तेल डालने की कोशिश की। महिला ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की। उसने चेतावनी दी कि अगर उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकती है।

कोर्ट में मारपीट और धमकियां देने का आरोप

पीड़ित महिला अंजलि के मुताबिक, 24 तारीख को अदालत परिसर में कुछ लोगों ने उसके साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट की। महिला ने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष ने भुलत्थ थाने में जाकर नीरज नाम के व्यक्ति की गाड़ी को लेकर कार्रवाई करवाने की कोशिश की। उसने दूसरे पक्ष पर गाली-गलौज करने, धमकियां देने और उसके स्टैंड पर हंगामा करने के आरोप भी लगाए।

महिला का दावा है कि पुलिस ने उसके खिलाफ तुरंत मामला दर्ज कर लिया, लेकिन दूसरे पक्ष के खिलाफ दी गई शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी बात को लेकर उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।

संगठनों ने भी उठाया मामला, पुलिस ने दिया कार्रवाई का भरोसा

इस मामले को लेकर संगठनों की ओर से अमृतसर में धरना भी दिया गया था। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने संगठन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया। पुलिसकर्मियों के मुताबिक, मामला वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है और पीड़ित पक्ष की डिप्टी कमिश्नर के साथ बैठक करवाई जाएगी।

पुलिस की ओर से आश्वासन दिया गया कि मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों पर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

निष्पक्ष जांच की मांग

थाने के बाहर हुए इस घटनाक्रम ने शिकायतों पर कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय मिलने से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। महिला ने अधिकारियों से उसकी शिकायत पर निष्पक्षता से कार्रवाई करने की अपील की है। अब वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।

Census 2027: हरियाणा में 100% जनगणना कवरेज का लक्ष्य, 87,450 कर्मचारियों की होगी तैनाती

हरियाणा में जनगणना 2027 के लिए 100% कवरेज का लक्ष्य। करीब 87,450 कर्मचारियों की तैनाती, 70 हजार प्रगणना ब्लॉक और जनवरी 2027 में ऑनलाइन स्व-गणना की योजना।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

हरियाणा सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 100 प्रतिशत जनसंख्या कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य में जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस दौरान लगभग 87,450 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती प्रस्तावित है, जो करीब 70,000 प्रगणना ब्लॉकों में जनसंख्या गणना का काम करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति या परिवार जनगणना से छूटना नहीं चाहिए और दोहरी गणना रोकने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने सोमवार को हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में आयोजित प्रधान जनगणना अधिकारियों के सम्मेलन में जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए। डॉ. मिश्रा जनगणना 2027 के लिए राज्य की नोडल अधिकारी भी हैं। उन्होंने उपायुक्तों को तैयारियों की व्यक्तिगत निगरानी करने, नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने और फील्ड स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान करने को कहा।

डिजिटल तकनीक से होगी जनगणना

हरियाणा में आगामी जनगणना में डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। प्रगणक स्मार्टफोन पर विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) पोर्टल और Census Management and Monitoring System (CMMS) के जरिए जनगणना की प्रगति तथा प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

सम्मेलन में प्रस्तुत कार्यक्रम के अनुसार, नागरिक 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक ऑनलाइन स्व-गणना कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी। एक मार्च से पांच मार्च 2027 तक पुनरीक्षण दौर आयोजित करने का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया है, जिसमें छूटे हुए लोगों की पहचान और आंकड़ों में विसंगतियों को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा।

जनगणना की संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 को रात 12 बजे निर्धारित की गई है। स्व-गणना करने वाले परिवारों की जानकारी का भी प्रगणकों द्वारा घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। वहीं, पर्यवेक्षक 20 प्रतिशत रिकॉर्ड की जांच करेंगे।

23 जिलों में करीब 70 हजार ब्लॉक

जनगणना के दूसरे चरण के परिचालन रोडमैप के अनुसार, हरियाणा के 23 जिलों, 6,522 गांवों और 88 कस्बों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉक बनाए जाने की योजना है।

इस कार्य में रिजर्व कर्मियों सहित करीब 74,800 प्रगणक और 12,650 पर्यवेक्षक लगाए जाने का अनुमान है। ये कर्मचारी 203 जनगणना चार्जों के तहत काम करेंगे, जबकि 34 प्रधान जनगणना अधिकारी निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

राज्य में जनगणना के पहले चरण के दौरान 51,907 हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों को कवर किया जा चुका है। अब दूसरे चरण के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।

छूटे हुए परिवारों और दोहरी गणना पर रहेगी नजर

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि जनगणना की विश्वसनीयता सही आंकड़ों, स्पष्ट प्रशासनिक जिम्मेदारियों और प्रभावी फील्ड निगरानी पर निर्भर करती है। उन्होंने उपायुक्तों को दुर्गम क्षेत्रों, तेजी से विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों, बहुमंजिला इमारतों, शहरी झुग्गी-बस्तियों और प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कवरेज, आंकड़ों की सटीकता और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। संभावित कमियों की पहचान करने और दोहरी गणना रोकने के लिए तकनीक तथा उपलब्ध प्रशासनिक सूचनाओं का प्रभावी उपयोग किया जाएगा।

जनगणना ड्यूटी से छूट मांगने वाले कर्मचारियों के आवेदनों की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों को सक्षम कर्मियों की समय पर नियुक्ति और सभी संबंधित कर्मचारियों के व्यापक प्रशिक्षण पर ध्यान देने को कहा गया है।

प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को मिलेंगे 25 हजार रुपये

जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के मानदेय और सुविधाओं को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। सम्मेलन में प्रस्तुत वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दोनों चरणों के लिए कुल 25,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसमें हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 9,000 रुपये और जनसंख्या गणना के लिए 16,000 रुपये शामिल हैं।

डॉ. मिश्रा ने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से लंबित मानदेय भुगतान जल्द जारी करने पर जोर दिया। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रशिक्षण सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक सहायता और अन्य जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

जनगणना के लिए चलाया जाएगा जागरूकता अभियान

सरकार जनगणना में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगी। इसके लिए सोशल मीडिया, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs), दीवार लेखन और पारंपरिक जन उद्घोषणा माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

गीता जयंती और सूरजकुंड मेले जैसे प्रमुख आयोजनों के माध्यम से भी लोगों को जनगणना के प्रति जागरूक करने और ऑनलाइन स्व-गणना के विकल्प की जानकारी देने की योजना है। अधिकारियों को अफवाहों और गलत सूचनाओं का तथ्यों के आधार पर तुरंत खंडन करने के निर्देश दिए गए हैं।

व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर जोर

हरियाणा के जनगणना निदेशक डॉ. ललित जैन ने अधिकारियों को जनगणना की तकनीकी और परिचालन तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोबाइल एप्लिकेशन और केंद्रीय निगरानी प्रणाली के माध्यम से फील्ड कार्यों का समन्वय किया जाएगा।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने जनगणना के दौरान एकत्र की जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करने और Census Act, 1948 के प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने राजस्व, शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शहरी स्थानीय निकाय, पंचायती राज, सूचना प्रौद्योगिकी और जनसंपर्क विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

सरकार का लक्ष्य जनगणना 2027 को समयबद्ध, पारदर्शी और सटीक तरीके से पूरा करना है, ताकि भविष्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों के लिए विश्वसनीय जनसंख्या संबंधी आंकड़े उपलब्ध हो सकें।