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यमन में फिर भड़की जंग: हूतियों की ताइज की ओर बढ़त, सऊदी समर्थित सरकार ने छेड़ा बड़ा सैन्य अभियान

वर्ल्ड डेस्क / यमन / सत्ता संदेश

यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तुर्बाह शहर पर कब्जे का दावा किया है। इसके बाद हूती लड़ाके प्रांतीय राजधानी ताइज की ओर बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया है।

तुर्बाह पर कब्जा यमन सरकार के लिए रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर उस अहम मार्ग पर स्थित है जो ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ता है। अदन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र माना जाता है।

ताइज की घेराबंदी का बढ़ा खतरा

तुर्बाह में पिछले कई वर्षों से यमन सरकार के समर्थन वाले सैनिकों की महत्वपूर्ण तैनाती रही है। यहां से ताइज शहर की रक्षा के साथ हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाए जाते रहे हैं। ऐसे में तुर्बाह पर नियंत्रण बदलने से सरकारी बलों की सप्लाई और आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

इससे पहले भी हूतियों ने ताइज के बाहरी इलाकों में कई क्षेत्रों पर कब्जा किया था। तुर्बाह पर नियंत्रण मिलने के बाद ताइज को घेरने की उनकी स्थिति मजबूत होने का दावा किया जा रहा है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसका सैन्य एवं रणनीतिक महत्व काफी अधिक है।

लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बढ़त

सितंबर की शुरुआत में हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट की ओर अपना अभियान तेज किया था। इस दौरान मोखा शहर और लाल सागर के कुछ द्वीपों पर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया गया। इन इलाकों की रणनीतिक स्थिति के कारण यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की सैन्य मौजूदगी को लेकर क्षेत्रीय चिंता बढ़ी है।

बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य इस पूरे घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण है। यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम रास्तों में शामिल है। ऐसे में इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

यमन सरकार ने किया सैन्य अभियान का ऐलान

सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार ने रविवार को हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेना है।

उन्होंने सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी की जानकारी देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यमन सरकार को समर्थन देने की अपील की।

सऊदी अरब ने दिया सैन्य समर्थन का भरोसा

यमन सरकार के ऐलान के कुछ घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने सरकार समर्थित बलों को सैन्य सहयोग जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब यमन सरकार की सेनाओं को हूतियों के खिलाफ अभियान में पूरी ऑपरेशनल मदद देता रहेगा।

हूतियों की ओर से पिछले कुछ समय में सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे भी किए गए हैं। इन घटनाओं ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव को और बढ़ाया है।

जुलाई से बढ़ता गया तनाव

मौजूदा संघर्ष की नई कड़ी जुलाई के मध्य में शुरू हुई थी। उस समय हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी की। हूतियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए की गई थी।

इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन सरकार समर्थित बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज करने का दावा किया। लाल सागर में सऊदी शिपिंग को निशाना बनाने की धमकियों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।

तुर्बाह पर कब्जे से सप्लाई लाइन प्रभावित होने की आशंका

वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के विश्लेषण के अनुसार, तुर्बाह पर हूतियों का नियंत्रण ताइज प्रांत और ताइज शहर में मौजूद सरकार समर्थित बलों तक सैनिकों, हथियारों और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति को मुश्किल बना सकता है।

तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सड़कों पर नियंत्रण से सरकारी बलों की आवाजाही और पीछे हटने के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं। ऐसे में तुर्बाह का नियंत्रण ताइज के आसपास चल रहे संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

2014 से जारी है यमन का गृहयुद्ध

यमन का मौजूदा गृहयुद्ध 2014 में उस समय तेज हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद संघर्ष में कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्ष शामिल हुए। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

वर्षों से जारी संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय संकट में धकेल दिया है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत, विस्थापन, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव ने देश की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है।

हालिया हिंसा में भी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के अनुसार, नए संघर्ष के कारण हजारों लोग मारे और घायल हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कुछ लोग समुद्र पार कर जिबूती भी पहुंचे हैं।

ऐसे में हूतियों की ताइज की ओर बढ़त और यमन सरकार के जवाबी सैन्य अभियान ने देश में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध को एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंचा दिया है।

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