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Uttarakhand : पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट-2026’ शुरू, 90 जवान ले रहे हिस्सा

उत्तराखंड / सत्ता संदेश

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट-2026’ सोमवार, 21 सितंबर से शुरू हो गया। दोनों देशों के बीच होने वाले इस वार्षिक प्लाटून स्तर के सैन्य अभ्यास का यह 18वां संस्करण है, जो 3 अक्टूबर तक चलेगा। अभ्यास में भारतीय सेना और मंगोलियाई सेना के 45-45 जवान, यानी कुल 90 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।

इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी और अर्ध-शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए दोनों देशों की सेनाओं की संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना है। सैनिक संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत संयुक्त सैन्य अभियान चलाने की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी करेंगे।

अभ्यास के दौरान घेराबंदी और तलाशी अभियान, इमारतों में प्रवेश कर कार्रवाई, विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन सहित कई सैन्य गतिविधियों का अभ्यास किया जाएगा। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिकों को ड्रोन के इस्तेमाल, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक अपने अनुभव, सैन्य रणनीतियां और संचालन संबंधी प्रक्रियाएं साझा करेंगे। इसका उद्देश्य संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल विकसित करना और एक-दूसरे की सैन्य कार्यप्रणाली को समझना है।

‘नोमैडिक एलीफेंट’ भारत और मंगोलिया के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन बारी-बारी से दोनों देशों में किया जाता है। इसका पिछला संस्करण मई-जून 2025 में मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित किया गया था।

पिथौरागढ़ में आयोजित इस संस्करण के जरिए दोनों देशों के सैनिकों को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। अभ्यास से भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग, आपसी विश्वास और सैन्य तालमेल को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

जल के लिए सहयोग: सामूहिक प्रयास का भारत का आह्वान

सी. आर. पाटिल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री

जल हमें उन तरीकों से जोड़ता है, जिनमें बहुत कम अन्य संसाधन जोड़ पाते हैं। नदियाँ प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं। भूजल के स्रोत कई समुदायों की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। आज होने वाली बारिश कल पीने के पानी, सिंचाई, भूजल या नदी के प्रवाह का आधार बनती है।

इससे एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है: जल एक साझा संसाधन है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है। इसी भावना के साथ भारत 22 से 26 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह में वैश्विक जल समुदाय का स्वागत करेगा। इसका आयोजन जल शक्ति मंत्रालय कर रहा है।

इस वर्ष की थीम है- “जलवायु के प्रति लचीला जल प्रबंधन”। जलवायु परिवर्तन के कारण जल चक्र लगातार अनिश्चित होता जा रहा है। ऐसे समय में यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है।

भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह केवल एक सम्मेलन नहीं है। यह ऐसा मंच है, जहाँ सरकारें, विशेषज्ञ, उद्योग जगत, समुदाय और अंतरराष्ट्रीय साझेदार अपने अनुभव, तकनीक और विचार साझा कर सकते हैं तथा भविष्य के लिए साझेदारियाँ बना सकते हैं।

इसका उद्देश्य जल क्षेत्र से जुड़े हालिया विभागीय शिखर सम्मेलन की भावना और उससे मिली सीख को भी आगे बढ़ाना है। इस सम्मेलन का विचार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रखा था। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने एक साथ आकर जल क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा की, अपने अनुभव साझा किए और आगे की राह तय करने पर विचार-विमर्श किया।

भारत इस संवाद में बड़े स्तर पर जल और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को लागू करने का व्यापक अनुभव लेकर आया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण भारत में 15.9 करोड़ से अधिक घरों तक नल से पानी पहुँचाया गया है। वर्ष 2019 में ऐसे घरों की संख्या 3.23 करोड़ थी।

जल जीवन मिशन 2.0 का मुख्य उद्देश्य जलापूर्ति के बुनियादी ढाँचे को भरोसेमंद सार्वजनिक सेवा व्यवस्था में बदलना है। इसके तहत ग्राम पंचायतों और उनकी ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सेवाओं के संचालन, रखरखाव और निगरानी के लिए सशक्त बनाया जा रहा है। इन्हें स्थानीय स्तर पर छोटी जल सेवा इकाइयों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

‘जल सेवा आकलन’ ग्राम पंचायत के नेतृत्व में की जाने वाली एक डिजिटल पहल है। इसके तहत हर घर जल वाले गाँवों में पीने के पानी की नियमितता, पर्याप्तता, गुणवत्ता और स्थिरता का आकलन किया जाता है। यह पहल बुनियादी ढाँचा तैयार करने से आगे बढ़कर लगातार बेहतर जल सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसमें जनभागीदारी के माध्यम से ग्राम पंचायतों और गाँव की संस्थाओं को आकलन की प्रक्रिया के केंद्र में रखा गया है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के माध्यम से भारत ने गंगा और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। इसमें सीवेज से जुड़े बुनियादी ढाँचे और प्रदूषण कम करने के प्रयासों के साथ-साथ नदी के पर्यावरण को बहाल करने, जैव विविधता के संरक्षण और लोगों की भागीदारी पर भी ध्यान दिया गया है।

इस कार्यक्रम के तहत 527 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 367 पूरी हो चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन 4,263 मिलियन लीटर सीवेज के शोधन की क्षमता तैयार की गई है।

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण से भी एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ही नहीं हुआ, बल्कि हमारी माताओं और बहनों को सम्मान मिला है और लोगों के व्यवहार में बदलाव सुनिश्चित करने में भी मदद मिली है।

इस मिशन के दूसरे चरण में ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत घरों और सामुदायिक स्तर पर इस्तेमाल के बाद निकलने वाले पानी यानी ग्रे-वॉटर के प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

इन सभी योजनाओं में एक बात समान है- ‘जनभागीदारी’। इसके पीछे यह विश्वास है कि सरकारी नीतियाँ तब सबसे अधिक प्रभावी होती हैं, जब लोग केवल योजनाओं के लाभार्थी न रहकर उनके सक्रिय भागीदार बनते हैं।

जल संरक्षण के हमारे प्रयासों में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। ‘जल संचय जनभागीदारी’ और ‘कैच द रेन’ (वर्षा जल संचयन) जैसे अभियानों के माध्यम से हमारा उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर लोगों की आदत और जनआंदोलन बनाना है।

जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन तभी सफल हो सकता है, जब स्थानीय लोग इसे समझें, इसे अपनी जिम्मेदारी मानें और इसे लंबे समय तक बनाए रखें। हाल ही में हमने ‘कैच द रेन’ अभियान का गीत भी जारी किया है।

भारत के अनुभव से यह भी सीख मिलती है कि जल संबंधी चुनौतियों का कोई एक समाधान नहीं हो सकता। हिमालयी राज्य की जरूरतें किसी सूखे क्षेत्र से अलग होती हैं। इसी तरह, तेजी से बढ़ते शहर की चुनौतियाँ ग्रामीण समुदाय की चुनौतियों से अलग होती हैं।

हमारे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विविध परिस्थितियों के कारण जल प्रबंधन का व्यापक अनुभव उपलब्ध है। इसमें भूजल का स्तर बढ़ाना, सिंचाई में पानी का बेहतर इस्तेमाल, पेयजल व्यवस्था का सामुदायिक प्रबंधन और इस्तेमाल किए जा चुके पानी का दोबारा उपयोग जैसे विषय शामिल हैं।

जब इन अनुभवों को साझा किया जाता है, तो स्थानीय स्तर पर सफल रहे समाधान उन क्षेत्रों तक भी पहुँच सकते हैं, जहाँ उनकी शुरुआत नहीं हुई थी। यही सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लागू होता है। जल सुरक्षा के सभी सवालों के जवाब किसी एक देश के पास नहीं हैं। हर देश के पास कुछ ऐसा अनुभव है, जिससे दूसरे देश सीख सकते हैं, और हर देश दूसरों से कुछ सीख सकता है।

इसलिए भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का उद्देश्य किसी पर समाधान थोपना नहीं, बल्कि साझेदारी को बढ़ावा देना है। इसमें जल प्रबंधन, तकनीक, वित्तपोषण और जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने के वैश्विक अनुभवों के साथ भारत के अपने अनुभवों पर भी चर्चा होगी।

जल का प्रबंधन अलग-अलग करके नहीं किया जा सकता। जल सुरक्षा का सीधा संबंध खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य, आजीविका, पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास से है।

इसीलिए भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह में नदी घाटियों और भूजल स्रोतों के प्रबंधन, इस्तेमाल किए जा चुके पानी के पुनः उपयोग, पानी के कुशल इस्तेमाल, मौसम एवं जल संबंधी पूर्वानुमान, समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों और नदियों में पर्यावरण के लिए आवश्यक जल प्रवाह जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

तकनीक इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर आँकड़ों, वैज्ञानिक मॉडलों और डिजिटल प्रणालियों की मदद से हम समझ सकेंगे कि पानी की उपलब्धता में किस तरह बदलाव हो रहा है, संभावित खतरों का पहले से अनुमान लगा सकेंगे और पानी का अधिक कुशलता से इस्तेमाल कर सकेंगे।

लेकिन तकनीक का सबसे अधिक लाभ तभी मिलता है, जब वह सरकारों, स्थानीय संस्थाओं और समुदायों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करे। यही वजह है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, नए उद्यमों और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

जल जीवन मिशन में किए जा रहे संस्थागत सुधारों के तहत ‘सुजलम भारत’ डिजिटल सार्वजनिक ढाँचे का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आँकड़ों और तकनीक की मदद से बेहतर योजना बनाना, जल स्रोतों को टिकाऊ बनाए रखना, कामकाज की निगरानी करना और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप शासन व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

बुनियादी ढाँचा तैयार करने से आगे बढ़कर भरोसेमंद जल सेवाएँ सुनिश्चित करने का यह बदलाव भारत की ऐसी जल व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो चुनौतियों का सामना कर सके, जवाबदेह हो और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो।

चुनौतियों के बढ़ते स्तर के साथ जल क्षेत्र में वित्तपोषण के तरीकों को भी बदलना होगा। सरकारी निवेश की भूमिका बुनियादी बनी रहेगी। लेकिन जलवायु के अनुकूल जल ढाँचे के निर्माण के लिए नए वित्तीय तरीकों, जिम्मेदार निजी भागीदारी और ऐसी साझेदारियों की भी जरूरत होगी, जो सार्वजनिक हित को केंद्र में रखते हुए संसाधन जुटा सकें।

इसी के साथ, स्वस्थ नदियाँ, आर्द्रभूमियाँ, भूजल स्रोत और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी हमारे जल संबंधी बुनियादी ढाँचे का हिस्सा हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का स्वरूप अधिक अनिश्चित हो रहा है। कहीं बहुत तेज बारिश हो रही है, कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है, तो कहीं बाढ़ और भूजल पर दबाव जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं।

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए जल स्रोतों को टिकाऊ बनाए रखना, बेहतर वैज्ञानिक जानकारी और पूर्वानुमान, परिस्थितियों के अनुसार ढलने वाला बुनियादी ढाँचा, मजबूत संस्थाएँ और जागरूक समुदाय जरूरी हैं। यही भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का व्यापक उद्देश्य है। इसके माध्यम से नेतृत्व, विज्ञान, योजनाओं का क्रियान्वयन, तकनीक, वित्त और जनभागीदारी को एक साझा मंच पर लाया जाएगा।

22 से 26 सितंबर तक भारत मंडपम भारत के जल क्षेत्र के अनुभवों और दुनिया भर के जल संबंधी ज्ञान का केंद्र बनेगा। हम बड़े स्तर पर योजनाओं को लागू करने से मिले अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं। साथ ही, हम दूसरों के अनुभवों को सुनने और उनसे सीखने के लिए भी उतने ही तत्पर हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण जल चक्र अधिक अनिश्चित हो सकता है, लेकिन हमारा जवाब अनिश्चित नहीं होना चाहिए। हमारा प्रयास सामूहिक, वैज्ञानिक, समावेशी और निरंतर होना चाहिए।

चाहे गाँव का तालाब हो, भूजल का स्रोत हो, नदी घाटी हो या बदलती हुई वैश्विक जलवायु- सबसे एक ही सीख मिलती है: जल हम सभी को जोड़ता है। जल के भविष्य को केवल सरकारें सुरक्षित नहीं कर सकतीं। न ही कोई एक संस्था या देश अकेले ऐसा कर सकता है।

जल हमारा साझा संसाधन है। जल सुरक्षा हमारी साझा जिम्मेदारी है। हम सभी को मिलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की एक-एक बूंद सुरक्षित करनी होगी और प्रधानमंत्री के विकसित भारत@2047 के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान देना होगा।


(लेखक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री हैं)

बसपा ने संगठन में किया फेरबदल, डॉ. सुरजीत सिंह दया को जिला सचिव की जिम्मेदारी

राजपुरा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: दीपक कुमार

बहुजन समाज पार्टी पंजाब ने संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से डॉ. सुरजीत सिंह दया को जिला सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही उन्हें संबंधित विधानसभा हलके की जिम्मेदारी भी दी गई है।

इस मौके पर बहुजन समाज पार्टी पंजाब के अध्यक्ष अवतार सिंह करीमपुरी ने पार्टी की नई जिम्मेदारियों को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि डॉ. सुरजीत सिंह दया की नियुक्ति से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। साथ ही कार्यकर्ताओं को एकजुट कर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नई जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डॉ. सुरजीत सिंह दया को बधाई दी। इस अवसर पर जगरूप सिंह इंचार्ज, जरनैल सिंह, मोहन लाल प्रधान, जोरा सिंह सचिव सहित बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

समराला में शुरू हुआ आधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर, करण अस्पताल ने माछीवाड़ा रोड पर दी नई सुविधा

करण अस्पताल समराला ने माछीवाड़ा रोड पर आधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर शुरू किया। एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने सेंटर का उद्घाटन किया।

रिपोर्ट: परमिंदर वर्मा

समराला / सत्ता संदेश

समराला के करण अस्पताल समराला की ओर से माछीवाड़ा रोड पर नए फिजियोथेरेपी सेंटर की शुरुआत की गई। सेंटर का उद्घाटन समराला की एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने किया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों, स्टाफ के साथ क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, नए फिजियोथेरेपी सेंटर में मरीजों को आधुनिक फिजियोथेरेपी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया है। सेंटर शुरू करने का उद्देश्य मरीजों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें फिजियोथेरेपी के लिए दूर न जाना पड़े।

उद्घाटन के अवसर पर एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने करण अस्पताल की ओर से शुरू किए गए नए फिजियोथेरेपी सेंटर के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सेंटर के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की बात कही।

कार्यक्रम के दौरान समराला के पूर्व विधायक जगजीवन सिंह खीरनियां, करण अस्पताल समराला के डायरेक्टर डॉ. गुरमुख सिंह और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. गुरदित्त सिंह ने भी सेंटर की सुविधाओं और यहां उपलब्ध करवाई जाने वाली सेवाओं से संबंधित जानकारी साझा की।

इस मौके पर अस्पताल के डॉक्टरों एवं स्टाफ के अलावा क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

समराला बाईपास पर धू-धू कर जली फूड वैन, गैस सिलेंडर में जोरदार धमाका

समराला बाईपास के हरियो रोड के पास फूड वैन में अचानक आग लग गई। गैस सिलेंडर फटने से जोरदार धमाका हुआ, फायर ब्रिगेड ने दूसरे सिलेंडर को सुरक्षित निकालकर बड़ा हादसा टाला।

रिपोर्ट: परमिंदर वर्मा

समराला / सत्ता संदेश

समराला बाईपास पर हरियो रोड के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़ी एक फूड वैन में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी वैन को अपनी चपेट में ले लिया। इसी दौरान वैन में रखा गैस सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फट गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।

फूड वैन में आग लगने के कारण लुधियाना-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।

फायर ब्रिगेड के ड्राइवर सोहन सिंह और फायरमैन नरेश कुमार ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने के करीब 15 से 20 मिनट के भीतर टीम मौके पर पहुंच गई थी। उस समय तक वैन में मौजूद एक गैस सिलेंडर फट चुका था और आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था।

फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के मुताबिक, वैन में एक युवक मौजूद था, जिसे समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं, वैन में मौजूद दूसरे गैस सिलेंडर को भी कर्मचारियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इससे एक बड़े हादसे की आशंका टल गई।

जांच के दौरान सामने आया कि फूड वैन को अंदर से प्लास्टिक, फोम और अन्य ज्वलनशील सामग्री के साथ-साथ तेल आदि से मॉडिफाई किया गया था। ज्वलनशील सामग्री के कारण आग ने बेहद तेजी से पूरी वैन को अपनी चपेट में ले लिया।

हालांकि, फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की तत्परता और सूझबूझ के चलते आग पर जल्द काबू पा लिया गया। घटना में किसी तरह के जानी नुकसान की सूचना नहीं है।

फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने फूड वैन और रेहड़ी संचालकों से अपील की कि वे सुरक्षा नियमों का विशेष ध्यान रखें और अपनी वैन में अनिवार्य रूप से फायर एक्सटिंग्विशर रखें। इसके साथ ही प्रशासन से भी अपील की गई कि फूड वैन को हाईवे और मुख्य सड़कों के किनारे खड़ा करने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर लगाने की व्यवस्था की जाए।

Batala Murder: बटाला में युवक की गोली मारकर हत्या, सिर में लगी गोली; पार्टनरशिप विवाद की बात आई सामने

बटाला के मल्लियांवाल गांव में 35 वर्षीय फलजीत सिंह उर्फ लाली की गोली मारकर हत्या कर दी गई। परिजनों ने पार्टनरशिप विवाद को घटना से जोड़ते हुए जानकारी दी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बटाला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: लकी बटाला

बटाला के मल्लियांवाल गांव में देर शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब घर के बाहर टहल रहे 35 वर्षीय युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोली सिर में लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। परिवार के सदस्य उसे इलाज के लिए बटाला सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक की पहचान मल्लियांवाल गांव निवासी सुलखन सिंह के बेटे फलजीत सिंह उर्फ लाली के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, फलजीत सिंह घर के बाहर टहल रहा था। इसी दौरान कुछ लोग पैदल उसके पास आए और उससे बातचीत करने लगे। परिवार का आरोप है कि बातचीत के दौरान बहस हुई, जिसके बाद युवक को गोली मार दी गई।

परिजनों के मुताबिक, गोली फलजीत सिंह के सिर में लगी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

मृतक के चाचा लखविंदर सिंह ने बताया कि पार्टनरशिप को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। उनके अनुसार, पार्टनरशिप में पहले से एक कंबाइन थी, जबकि बाद में फलजीत सिंह उर्फ लाली ने भी एक कंबाइन खरीद ली थी। इसके बाद उसके कंबाइन के काम में आने से दूसरी पार्टी के काम पर असर पड़ने लगा और इसी बात को लेकर विवाद पैदा हुआ।

लखविंदर सिंह ने बताया कि फलजीत सिंह के पिता की करीब एक महीने पहले ही मौत हुई थी और अब बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि फलजीत सिंह पांच बहनों का इकलौता भाई था और उसके दो छोटे बच्चे भी हैं।

बटाला सिविल अस्पताल के डॉक्टर विपनदीप सिंह ने बताया कि युवक को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है और घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है।

पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। हत्या के पीछे के वास्तविक कारण और वारदात में शामिल आरोपियों के संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

समराला : हेडों गांव में दिनदहाड़े चोरी, घर से 25-30 तोले सोना ले उड़े चोर

समराला के हेडों गांव में परिवार के नानकियां जाने के बाद चोरों ने घर के दरवाजे तोड़कर करीब 25 से 30 तोले सोना चोरी कर लिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

समराला / सत्ता संदेश

समराला के हेडों गांव में दिनदहाड़े चोरी की बड़ी घटना सामने आई है। परिवार के लोग नानकियां गए हुए थे और पीछे से चोरों ने घर के दरवाजे तोड़कर करीब 25 से 30 तोले सोना चोरी कर लिया। चोरी हुए सोने की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

घर के मालिक तरनजीत सिंह ने बताया कि वह रविवार सुबह करीब 9:30 बजे अपने परिवार के साथ नानकियां गए थे। शाम करीब 4:30 बजे जब वह वापस घर पहुंचे और दरवाजा खोला तो अंदर के दरवाजे टूटे हुए थे और घर का सामान बिखरा पड़ा था।

घर की जांच करने पर उन्हें पता चला कि चोर घर से करीब 25 से 30 तोले सोना चोरी कर ले गए हैं। तरनजीत सिंह के मुताबिक, चोरी हुए सोने की कीमत लाखों रुपये में है।

उन्होंने बताया कि घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। आसपास के घरों और अन्य स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि चोरों के आने-जाने और फरार होने से जुड़ा कोई सुराग मिल सके।

घर के मालिक के अनुसार, उनका घर किसी सुनसान स्थान पर नहीं, बल्कि घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है। इसके बावजूद दिनदहाड़े घर को निशाना बनाए जाने से लोगों में चिंता का माहौल है।

Bathinda Cylinder Blast: बठिंडा में सिलेंडर फटने से हादसा, मां और दो बेटियां गंभीर घायल

बठिंडा के परस राम नगर की गली नंबर 9-B में गैस लीकेज के बाद सिलेंडर फटने से बड़ा हादसा हुआ। मां और उसकी दो बेटियां गंभीर घायल हुईं, महिला को AIIMS रेफर किया गया।

बठिंडा / सत्ता संदेश

बियॉन्ड लाइन्स क्षेत्र के परस राम नगर की गली नंबर 9-B में रात के समय सिलेंडर फटने से बड़ा हादसा हो गया। गैस लीकेज के बाद हुए जोरदार धमाके से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक महिला और उसकी दो बेटियां गंभीर रूप से घायल हो गईं।

मिली जानकारी के मुताबिक, रात के समय अचानक जोरदार धमाका हुआ। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। हादसे की जानकारी मिलते ही यूथ वेलफेयर सोसाइटी की टीम भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और तीनों घायलों को इलाज के लिए बठिंडा के सरकारी सिविल अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में तीनों घायलों का उपचार शुरू किया गया। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए बठिंडा स्थित AIIMS अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं, दोनों घायल बेटियों का भी उपचार जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा गैस लीकेज के कारण हुआ। प्रशासन की ओर से घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

जोरदार धमाके के बाद इलाके में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना रहा। फिलहाल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

Amritsar Khasa Dogra War Memorial: 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि, डोगरा डे पर हुआ कार्यक्रम

अमृतसर के खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल पर डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड, स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स हुए शामिल।

  • अमृतसर के खासा में डोगरा वॉर मेमोरियल पर 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि
  • डोगरा डे पर डोगरा ब्रिगेड ने किया शहीदों को नमन, स्कूल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स भी हुए शामि

अमृतसर / सत्ता संदेश

खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल में डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सेना के जवानों के साथ विभिन्न स्कूलों के स्टूडेंट्स, NCC कैडेट्स और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान शहीद सैनिकों की याद में पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही डोगरा ब्रिगेड की ओर से हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को 1965 के युद्ध के इतिहास और सैनिकों के बलिदान से परिचित करवाना भी रहा।

कार्यक्रम में पहुंची स्टूडेंट गौरी ने 1965 के युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सैनिकों ने बहादुरी के साथ देश और लोगों के घरों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनना किसी भी व्यक्ति के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

गौरी ने युवाओं से भारतीय सेना में शामिल होने की कोशिश करने की अपील करते हुए कहा कि डोगरा वॉर मेमोरियल पर हथियारों की प्रदर्शनी देखना और श्रद्धांजलि समारोह का हिस्सा बनना उन्हें काफी प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में देश सेवा और सेना में शामिल होने की भावना को मजबूत करते हैं और उन्हें NDA के माध्यम से सेना में जाने के लिए भी प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर कर्नल आर.पी.एस. ढिल्लों ने भी 1965 के युद्ध से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित और कारगिल ऑपरेशन के दौरान 9 पंजाब के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल ढिल्लों ने बताया कि एक युवा अधिकारी के रूप में उन्हें इच्छोगिल नहर के दूसरी तरफ जाने का अवसर मिला था।

उन्होंने युद्ध के दौरान देखे गए तबाह पाकिस्तानी टैंकों और उन मोर्चों का जिक्र किया, जहां भारतीय सैनिकों ने बंकरों तक पहुंचकर ग्रेनेड के जरिए वहां मौजूद MMGs को निष्क्रिय किया था। कर्नल ढिल्लों ने युवा पीढ़ी से देश और भारतीय सेना के लिए मेहनत करने तथा सेना में भर्ती होने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।

कर्नल ढिल्लों ने बताया कि कार्यक्रम डोगराई दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उनके अनुसार, 1965 के युद्ध के दौरान छंब और खेमकरण सेक्टर में भारत पर दबाव के बीच लाहौर पर दबाव बनाने और अन्य मोर्चों से दबाव कम करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र से भी मोर्चा खोलने की कोशिश की गई थी।

कार्यक्रम में शामिल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और देश की रक्षा के लिए उनके बलिदान को याद किया। डोगरा वॉर मेमोरियल में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को भारतीय सेना के इतिहास, युद्ध में सैनिकों की भूमिका और देश सेवा की भावना से जोड़ने का अवसर बना।

Ludhiana Morgan Crossing: मॉर्गन क्रॉसिंग में KFC का उद्घाटन, युवाओं को रोजगार के अवसर

लुधियाना के मॉर्गन क्रॉसिंग में KFC के नए रेस्टोरेंट का कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने उद्घाटन किया। प्रोजेक्ट को ‘इन्वेस्ट पंजाब’ पहल से जोड़ते हुए रोजगार और निवेश की बात कही गई।

  • लुधियाना के मॉर्गन क्रॉसिंग में KFC का उद्घाटन, सैकड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने का दावा
  • कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किया उद्घाटन, ‘इन्वेस्ट पंजाब’ के तहत प्रोजेक्ट शुरू होने की जानकारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लोकल साउथ बाईपास, कैनाल रोड स्थित मॉर्गन क्रॉसिंग में दुनिया की प्रसिद्ध अमेरिकी फास्ट-फूड चेन KFC के नए रेस्टोरेंट का औपचारिक उद्घाटन पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किया। KFC की आधिकारिक लोकेटर जानकारी के अनुसार यह आउटलेट मॉर्गन क्रॉसिंग, कैनाल रोड पर स्थित है।

इस मौके पर मॉर्गन क्रॉसिंग के मालिक रिटायर्ड कर्नल हरबंत सिंह कहलों और रिंकी कहलों सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि पंजाब सरकार ‘इन्वेस्ट पंजाब’ पहल के तहत राज्य में कारोबार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ संपर्क कर रही है। उन्होंने कहा कि मॉर्गन क्रॉसिंग में इस तरह के कमर्शियल प्रोजेक्ट से क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलने की बात भी कही गई।

उन्होंने बताया कि मॉर्गन क्रॉसिंग प्रोजेक्ट के तहत सिधवां नहर पर एक नए पुल का निर्माण भी किया गया था, जिस पर करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई। इस प्रोजेक्ट की नींव दिसंबर 2023 में रखे जाने की बात सामने आई है।

रिटायर्ड कर्नल हरबंत सिंह कहलों ने पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हुए ‘राइट टू बिजनेस एक्ट’ के तहत कारोबार स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि उद्योगों से संबंधित NOC और अन्य प्रक्रियाएं तय समय में उपलब्ध करवाए जाने से राज्य में निवेश को बढ़ावा मिल रहा है।

मॉर्गन क्रॉसिंग एक पंजीकृत कमर्शियल प्रोजेक्ट भी है, जिसका रिकॉर्ड पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी से संबंधित दस्तावेजों में दर्ज है।