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NCLT का रिकॉर्ड प्रदर्शन, चंडीगढ़ बेंच ने 1,079 करोड़ की 9 समाधान योजनाओं को दी मंजूरी

NCLT ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड 107 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। चंडीगढ़ बेंच ने 1,079.07 करोड़ रुपये की 9 योजनाओं को मंजूरी दी।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अब तक का अपना सबसे बेहतर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच एनसीएलटी की विभिन्न बेंचों ने कुल 107 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। यह किसी एक तिमाही में मंजूर की गई समाधान योजनाओं की अब तक की सबसे अधिक संख्या है।

इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में चंडीगढ़ बेंच का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। चंडीगढ़ बेंच ने तिमाही के दौरान 9 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी, जिनका कुल मूल्य 1,079.07 करोड़ रुपये रहा। चंडीगढ़ बेंच द्वारा मंजूर योजनाओं की कुल राशि 10,79,06,84,000 रुपये है।

एनसीएलटी की सभी बेंचों द्वारा मंजूर 107 समाधान योजनाओं का कुल मूल्य 11,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इस दौरान मुंबई बेंच ने सबसे अधिक 35 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। इसके बाद प्रिंसिपल बेंच और नई दिल्ली बेंच ने 29-29 योजनाओं को मंजूरी दी। चंडीगढ़ बेंच भी उल्लेखनीय योगदान देने वाली बेंचों में शामिल रही।

पिछले वर्षों के मुकाबले बड़ी उपलब्धि

एनसीएलटी का मौजूदा प्रदर्शन पिछले वर्षों की दूसरी तिमाही के मुकाबले काफी अधिक रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 60, वित्त वर्ष 2024-25 में 57, वित्त वर्ष 2023-24 में 82, वित्त वर्ष 2022-23 में 47 और वित्त वर्ष 2021-22 में 20 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी गई थी। ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 107 योजनाओं की मंजूरी एनसीएलटी का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही आंकड़ा है।

पहली छमाही में 185 समाधान योजनाएं मंजूर

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी मिली थी। दूसरी तिमाही में 107 योजनाओं की मंजूरी के बाद चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल 185 समाधान योजनाएं मंजूर हो चुकी हैं।

30 सितंबर 2026 तक एनसीएलटी की विभिन्न बेंचों द्वारा मंजूर समाधान योजनाओं की संचयी संख्या 1,735 हो गई है। इन योजनाओं के तहत स्वीकृत कुल राशि लगभग 4.89 लाख करोड़ रुपये है।

एनसीएलटी के अनुसार, समाधान योजनाओं की मंजूरी के लिए मामलों का प्रवाह लगातार बना हुआ है। 30 सितंबर तक 294 समाधान योजनाएं मंजूरी के लिए लंबित थीं, जबकि 41 मामलों में आदेश सुरक्षित रखे गए थे। इस तरह कुल 335 मामले इन दोनों चरणों में थे। यह संख्या अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोट किए गए 363 लंबित आवेदनों से कम है।

केस मैनेजमेंट और लंबित मामलों पर फोकस

एनसीएलटी ने मामलों के तेजी से निपटारे और केस-फ्लो मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए कई प्रशासनिक और संस्थागत कदम उठाए हैं। अधिकरण की 16 बेंचों में लंबित मामलों और निपटान से जुड़े आंकड़ों की निगरानी के लिए एक मजबूत व्यवस्था विकसित की गई है।

इस व्यवस्था से विभिन्न बेंचों और अदालतों में कार्यभार की बेहतर निगरानी संभव हो रही है। साथ ही मामलों के पुनर्वितरण और उपलब्ध न्यायिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़े फैसले लेने में भी मदद मिल रही है।

एनसीएलटी ने मामलों के पंजीकरण और लिस्टिंग के लिए एक संरचित व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में एकरूपता लाना और कॉज लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ IBC प्रवेश मामलों और समाधान योजनाओं की मंजूरी से संबंधित आवेदनों को भी उचित प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।

आवश्यकता के अनुसार विशेष बेंचों का गठन, कार्यभार का पुनर्वितरण और उपलब्ध न्यायिक समय के अधिकतम इस्तेमाल के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

डिजिटल सुविधाओं से न्याय तक आसान पहुंच

एनसीएलटी ने अपने डिजिटल परिवर्तन के तहत ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति (e-Certified Copy) जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। इनके माध्यम से अधिवक्ताओं, वादियों और अन्य हितधारकों को न्यायिक रिकॉर्ड और प्रमाणित दस्तावेजों तक अधिक आसानी से पहुंच मिल रही है।

ये सुविधाएं एनसीएलटी के व्यापक डिजिटल परिवर्तन का हिस्सा हैं, जिसमें नया एनसीएलटी पोर्टल और ई-कोर्ट्स 2.0 का निरंतर कार्यान्वयन शामिल है।

सदस्यों की कमी के बावजूद रिकॉर्ड प्रदर्शन

एनसीएलटी का यह प्रदर्शन संस्थागत क्षमता और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों के बीच सामने आया है। अध्यक्ष के अलावा 62 सदस्यों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले वर्तमान में अधिकरण में 48 सदस्य कार्यरत हैं, जबकि 14 पद रिक्त हैं।

वर्तमान में 13 अदालतें पूरे दिन और 18 अदालतें आधे दिन के आधार पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, मौजूदा कैलेंडर वर्ष के अंत तक चार और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है।

एनसीएलटी से जुड़े न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति तथा बुनियादी ढांचे की कमियों से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया है।

इन चुनौतियों के बावजूद एनसीएलटी ने मामलों के प्रभावी प्रबंधन, अनावश्यक देरी कम करने और उपलब्ध न्यायिक एवं प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर अपना ध्यान बनाए रखा है।

जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में चंडीगढ़ बेंच द्वारा 1,079 करोड़ रुपये से अधिक की 9 समाधान योजनाओं को मंजूरी दिया जाना एनसीएलटी के रिकॉर्ड राष्ट्रीय प्रदर्शन में चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है। अधिकरण का फोकस संस्थागत सुधार, मामलों के समयबद्ध निपटारे, बेहतर केस मैनेजमेंट और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर बना हुआ है।