दिल्ली : 2,453 PG पर सवाल: 70% से ज्यादा इमारतों के नक्शे ट्रेस नहीं, सत्या निकेतन हादसे के बाद बढ़ी जांच
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
सत्या निकेतन में पेइंग गेस्ट (PG) इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में चल रहे PG आवासों की सुरक्षा और वैधता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि राजधानी के 12 जोन में कुल 2,453 PG इमारतें चिन्हित की गई हैं। इनमें 32,247 कमरे हैं और करीब 50,529 लोगों के रहने का अनुमान है।
सबसे अहम बात यह सामने आई है कि इन 2,453 PG इमारतों में से केवल 512 इमारतें मास्टर प्लान के अनुरूप पाई गई हैं, जबकि सिर्फ 730 इमारतों के मंजूर बिल्डिंग प्लान उपलब्ध या सत्यापित हो सके हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी 1,723 इमारतों को सीधे अवैध PG घोषित कर दिया गया है। MCD के मुताबिक इन इमारतों के भवन नक्शों की जानकारी फिलहाल ट्रेस या सत्यापित नहीं हो सकी है और परिसर-वार जांच जारी है।
चार PG इमारतें खतरनाक स्थिति में
MCD के सर्वे में 2,342 PG इमारतें देखने में सुरक्षित पाई गईं। वहीं 91 इमारतों में मामूली मरम्मत और 30 में बड़ी मरम्मत की जरूरत बताई गई। सर्वे के दौरान चार इमारतों को खतरनाक स्थिति में पाया गया। इसके अलावा कई ऐसी इमारतों को भी चिन्हित किया गया है जिनमें जमीन के ऊपर अधिक मंजिलें हैं और जिनकी सुरक्षा को लेकर आगे जांच की जरूरत है।
सत्या निकेतन हादसे के बाद MCD की कार्रवाई
सत्या निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना में सात लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद MCD ने अपने पांच अधिकारियों को निलंबित किया, जिनमें संबंधित जोन के डिप्टी कमिश्नर और भवन विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरिंग अधिकारी शामिल हैं। मामले की जांच भी शुरू की गई है।
MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि 6 से 23 सितंबर के बीच 543 संपत्तियां ध्वस्त, 178 सील और 354 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 205 सीलिंग शो-कॉज नोटिस और 98 ध्वस्तीकरण आदेश भी जारी किए गए। हालांकि, अदालत के सामने यह स्पष्ट किया गया कि ये आंकड़े सामान्य अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े हैं और इन्हें सीधे PG इमारतों पर हुई कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
क्या दिल्ली में PG चलाना अवैध है?
दिल्ली में PG चलाना अपने आप में अवैध नहीं है। हालांकि, इसके लिए मास्टर प्लान, स्वीकृत भवन नक्शे, जमीन के इस्तेमाल, भवन सुरक्षा और लागू बिल्डिंग बायलॉज समेत अन्य नियमों का पालन जरूरी है।
सत्या निकेतन हादसे के बाद अब मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि दिल्ली में कितने PG चल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उनमें से कितने नियमानुसार संचालित हो रहे हैं और कितने भवनों में रहने वाले छात्रों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित है।
1,723 PG पर आगे की जांच अहम
फिलहाल तस्वीर के तीन आंकड़े सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं—2,453 PG इमारतें, 730 उपलब्ध/सत्यापित मंजूर नक्शे और 512 मास्टर प्लान के अनुरूप PG। ऐसे में बाकी 1,723 इमारतों की स्थिति स्पष्ट होना आगे की जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गया है।
MCD की परिसर-वार जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें कितनी इमारतों के वैध नक्शे बाद में मिलते हैं, कितनी जगहों पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है और वहां रह रहे लोगों की सुरक्षा की स्थिति क्या है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी PG व्यवस्था और भवन सुरक्षा को लेकर अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी मांगी है।

