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चंडीगढ़ :180 ETT शिक्षकों का प्रदर्शन, सेक्टर-39 में सिसोदिया के आवास के बाहर पहुंचे

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के करीब 180 ETT शिक्षकों और उनके परिवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया। शुक्रवार को शिक्षक सेक्टर-30 में एकत्र हुए और बाद में सेक्टर-39 स्थित आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया के आवास की ओर बढ़े। शिक्षकों की मांगों में भर्ती से जुड़े मामलों, सेवा में बहाली और वेतनमान समेत अन्य मुद्दे शामिल हैं।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। इससे पहले 22 अगस्त को भी 180 ETT शिक्षकों और उनके परिवारों ने चंडीगढ़ में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।

शिक्षकों का आरोप है कि उनकी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला 2016 की भर्ती से जुड़ा है और शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं, बहाली तथा अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

सेक्टर-39 के सरकारी आवासों को लेकर भी सियासी सवाल

प्रदर्शन के बीच चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित सरकारी आवासों को लेकर पंजाब की राजनीति में पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सेक्टर-39 का सरकारी बंगला नंबर 960 पहले पंजाब कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह को आवंटित किया गया था और बाद में इसे मनीष सिसोदिया से जोड़ा गया। हालांकि सरकारी आवासों के आवंटन और इस्तेमाल को लेकर सामने आए दावों पर आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सरकारी आवासों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं ने उनके आरोपों को खारिज किया है। इसी विवाद के बीच सेक्टर-39 में ETT शिक्षकों का प्रदर्शन राजनीतिक तौर पर भी चर्चा में आ गया है।

शिक्षकों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेकर उन्हें राहत देनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि लंबे समय से लंबित भर्ती और सेवा संबंधी मामलों का समाधान आखिर कब होगा।

स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत, अमृतसर में टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने फैसले का किया स्वागत

अमृतसर / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत देने के फैसले का शिक्षकों और स्कूल प्रिंसिपल्स ने स्वागत किया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे वे अब अपना अधिक समय कक्षा में विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और सिलेबस पूरा करने में दे सकेंगे।

स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को अतिरिक्त ड्यूटी से राहत देने के संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से पहले भी निर्देश जारी किए गए हैं। अप्रैल 2026 में जारी एक निर्देश में स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों की शैक्षणिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस, मॉल रोड की प्रिंसिपल मंदीप कौर ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है। उनके मुताबिक, उनके स्कूल के करीब 8 से 10 शिक्षक BLO और SIR जैसी ड्यूटी में लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि चुनाव और अन्य सरकारी कार्य जरूरी हैं, लेकिन स्कूल ऑफ एमिनेंस के शिक्षकों को इन अतिरिक्त ड्यूटी से राहत मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि परीक्षा नजदीक होने के कारण शिक्षकों की कक्षा में मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। जब शिक्षक कई दिनों तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं तो पढ़ाई का क्रम प्रभावित होता है और विद्यार्थियों को रिवीजन तथा विषय से जुड़े मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

14 वर्षों से स्कूल ऑफ एमिनेंस में कार्यरत शिक्षिका मंदीप कौर ने कहा कि शिक्षक के स्कूल से बाहर रहने पर शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई का नियमित सिलसिला टूटता है। खासकर टर्मिनल और फाइनल परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को रिवीजन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की जरूरत होती है।

बायोलॉजी लेक्चरर प्रतिभा मिश्रा और इंग्लिश लेक्चरर सदर शर्मा ने भी फैसले का स्वागत किया। प्रतिभा मिश्रा ने कहा कि गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से राहत मिलने के बाद शिक्षक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। वहीं सदर शर्मा ने कहा कि कई बार बड़ी संख्या में स्टाफ बाहरी ड्यूटी पर चला जाता है, जिसका असर स्कूल में नियमित शिक्षण व्यवस्था पर पड़ता है।

पंजाब में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी का मुद्दा हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। सितंबर 2026 में सरकारी स्कूल शिक्षकों ने राशन कार्ड सत्यापन जैसी अतिरिक्त ड्यूटी के विरोध में आंदोलन और बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी।

शिक्षकों का कहना है कि कक्षा में नियमित मौजूदगी से विद्यार्थियों को सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आवश्यक मानसिक एवं नैतिक सहयोग भी मिल सकेगा। शिक्षकों और प्रिंसिपल्स ने सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखने वाला कदम बताया है।

पंजाब में टीचर्स को नॉन-एकेडमिक ड्यूटी से राहत, स्कूल ऑफ एमिनेंस के प्रिंसिपल्स और शिक्षकों ने फैसले का किया स्वागत

अमृतसर / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों, विशेषकर स्कूल ऑफ एमिनेंस, के शिक्षकों को नॉन-एकेडमिक और अतिरिक्त ड्यूटी से राहत देने के फैसले का शिक्षकों और प्रिंसिपल्स ने स्वागत किया है। शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से अब उनका अधिक समय क्लासरूम में बीतेगा और वे विद्यार्थियों की पढ़ाई, रिवीजन और परीक्षा की तैयारी पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगे।

स्कूल ऑफ एमिनेंस, मॉल रोड अमृतसर की प्रिंसिपल मंदीप कौर ने सरकार के फैसले के लिए आभार जताते हुए कहा कि जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों से नॉन-एकेडमिक ड्यूटी न ली जाए। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के करीब 8 से 10 शिक्षक BLO और SIR जैसी ड्यूटी में लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव और अन्य राष्ट्रीय स्तर के कार्य जरूरी हैं, लेकिन शिक्षकों को इन ड्यूटी से राहत मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई को सीधा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि परीक्षाएं नजदीक हैं और ऐसे समय में शिक्षकों की क्लासरूम में मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थी रिवीजन, गाइडेंस और परीक्षा की तैयारी पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे।

गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से पढ़ाई का सिलसिला होता है प्रभावित

स्कूल ऑफ एमिनेंस में लंबे समय से कार्यरत शिक्षिका मंदीप कौर ने कहा कि जब शिक्षकों को नॉन-एकेडमिक कार्यों के लिए स्कूल से बाहर भेजा जाता है, तो शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई का सिलसिला प्रभावित होता है। कई बार शिक्षक कई दिनों या हफ्तों तक बाहरी ड्यूटी में व्यस्त रहते हैं, जिससे संबंधित विषय का क्रम टूट जाता है।

उन्होंने कहा कि खासकर टर्मिनल और फाइनल परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को शिक्षकों की रिवीजन और मार्गदर्शन के लिए जरूरत होती है। ऐसे समय में शिक्षकों की गैरमौजूदगी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।

शिक्षकों की मौजूदगी से विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ

बायोलॉजी लेक्चरर प्रतिभा मिश्रा ने कहा कि शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना और उनके साथ संवाद करना है। नॉन-एकेडमिक जिम्मेदारियों से राहत मिलने के बाद शिक्षक अधिक एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षण जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

इंग्लिश लेक्चरर सदर शर्मा ने कहा कि कई बार स्कूल का बड़ा हिस्सा बाहरी ड्यूटी पर चला जाता है, जिससे स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के मार्गदर्शन और व्यक्तिगत संवाद की भी जरूरत होती है।

शिक्षकों का कहना है कि क्लासरूम में नियमित मौजूदगी से विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके अनुशासन, आत्मविश्वास और समग्र विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन ने पंजाब सरकार के इस आदेश को शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के शैक्षणिक कार्य पर फोकस बढ़ाने वाला कदम बताया है।